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मेंढक- मेंढकी की शादी पर बवाल के बीच मधु किश्वर ने हज-चर्च पर उठाया सवाल
इंद्रदेवता को प्रसन्न करने के लिए हमारे देश में क्या कुछ नहीं किया जाता...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंद्रदेवता को प्रसन्न करने के लिए हमारे देश में क्या कुछ नहीं किया जाता। पूजा-पाठ होते हैं, यज्ञ किए जाते हैं और तो और मेंढक और मेंढकी की शादी तक कराई जाती है। मौजूदा वक्त में भी यही किया जा रहा है, लिहाजा हर बार की तरह इस बार भी इस पर सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों के बीच प्रख्यात लेखिका, प्रोफ़ेसर और मानवाधिकार संगठन मानुषी की संस्थापक मधु पूर्णिमा किश्वर ने भी कुछ सवाल दाग दिए हैं।
किश्वर ने एक के बाद एक दो ट्वीट किए हैं, जिसमें उन्होंने पूछा है कि आखिर मेंढक-मेंढकी की शादी पर इतना बवाल क्यों? क्या केवल इसलिए कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है? उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘अगर मेंढक-मेंढकी की शादी अवैज्ञानिक है, तो फिर चर्च में ब्रेड और वाइन को यह मानकर ऑफर करना कि प्रभु ने अपने अनुयायियों के लिए अपना खून और मांस भेजा है क्या वैज्ञानिक है? क्या हज के दौरान दीवारों को शैतान समझकर पत्थर बरसना वैज्ञानिक है’?
अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है, ‘जब तक कि धर्म आधारित अनुष्ठान किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, तब तक उन्हें मानने वालों पर हमला बोलना या उनका उपहास उड़ना कितना जायज है? वैज्ञानिक आधार संबंधी ऐसे तर्क केवल चुनिंदा मामलों में ही दिए जाते हैं, जिससे यह साफ होता है कि हिंदुओं की धार्मिक मान्यताएं बड़े पैमाने पर खतरे में हैं। इस मामले में मीडिया का रवैया भी पक्षपातपूर्ण हैं’।
मधु पूर्णिमा किश्वर शैक्षणिक मामलों पर लिखती हैं। उन्होंने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में बतौर प्रोफेसर काम भी किया है। उन्होंने अब तक 12 डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं और बॉलिवुड पर एक किताब लिख रही हैं। किश्वर ने जेएनयू से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। अभी हाल ही में जब दंगल फेम गर्ल एक्ट्रेस जायरा वसीम ने विस्तारा एयरलाइन में सहयात्री पर छेड़छाड़ का आरोप लगा था। तो किश्वर ने इस पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘यह तमाशा है, क्योंकि पीछे बैठे व्यक्ति का पैर कैसे किसी की पीठ रगड़ सकता है। कोई कलाबाज भी अपने पैरों से इस तरह की हरकत नहीं कर सकता है, वो भी बिना किसी के नोटिस किए। क्यों उन्होंने एयर हॉस्ट्रेस को नहीं बुलाया? या अन्य सीट से उठकर क्यों नहीं गईं। या उस व्यक्ति को तमीज से रहने के लिए क्यों नहीं कहा। यह तमाशा केवल लैंडिंग के बाद हुआ’। 2013 में जब केंद्र सरकार ने बलात्कार संबंधी कानून को कड़ा बनाने का फैसला लिया था, तब भी मधु किश्वर ने कुछ प्रावधानों का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि कानून की परिभाषा इस वक्त ऐसी है कि अगर कोई आदमी किसी औरत के कान में उंगली डाले तो उसे भी बलात्कार माना जा सकता है।
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