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जब अंग्रेजी मीडिया पर जमकर बरसे वरिष्ठ टीवी पत्रकार अरनब गोस्वामी...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। EEMAX ग्लोबल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड 2016 (EEMAX Global Conclave & Awards 2016) को संबोधित करते हुए टाइम्स नाउ और ईटी नाउ के एडिटर-इन-चीफ व मैनेजिंग एडिटर अरनब गोस्वामी ने मीडिया और पत्रकारिता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
EEMAX ग्लोबल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड 2016 (EEMAX Global Conclave & Awards 2016) को संबोधित करते हुए टाइम्स नाउ और ईटी नाउ के एडिटर-इन-चीफ व मैनेजिंग एडिटर अरनब गोस्वामी ने मीडिया और पत्रकारिता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
अपने संबोधन में गोस्वामी ने बताया कि प्रिंट के दौरान उनका अनुभव कैसा रहा, पाकिस्तान को कवर करने के अपने अनुभवों के बारे में उन्होंने बताया, लोगों की कहानियों को अपने बुलेटिन में लेने के अनुभवों के बारे में उन्होंने बताया। उन्होंने बताया कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति सुर्खियां बनता है। उन्होंने कहा, ‘ इस बिजनेस में एक सच या बस एक झूठ जैसा कुछ नहीं है। आपको जिंदगी के हर पहलू में सामन्जस्य बैठाना होता है। मुझे ग्रे एरिया के बारे में मत बताइए। वे लोग जो ग्रे एरिया में रहते हैं यानी अपनी बनाई दुनिया में और खुद अपने को मूर्ख बना रहे हैं और इससे बाहर भी आना नहीं चाहते।
गोस्वामी अंग्रेजी न्यूज मीडिया पर जमकर बरसे। उन्होंने अंग्रेजी मीडिया पर लंबे समय से भारतीय लोगों में अलगाव की भावना पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी मीडिया ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है वह केवल डिक्शनरी में ही उपलब्ध है। संपादकीय बैठक बस अपनी ऐसी जगहों (sacred space) पर होने लगी हैं, जहां बाहरी लोगों के साथ कोई संवाद नहीं होता है और अंत में सिर्फ एनैलिटिकल प्रोग्राम ही तैयार किए जाते हैं। अपने देश के लोगों की बजाय बहुत से विदेशी मेहमानों को बुलाया जाता है जो वहां की भाषा बोलते हैं, जिसे कोई नहीं समझ सकता। उन्होंने आरोप लगाया है अंग्रेजी मीडिया की पत्रकारिता ने पिछले 34 सालों बस यही सब किया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक पत्रकार के रूप में, हमारे अंदर स्टोरी ब्रेक करने का साहस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी खबर मैंने की है वह पर्सनल रिस्क पर की है। जब आप कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले जैसी खबरों को ब्रेक करते हो और नाम लेकर आप किसी पर अरबों डॉलर वसूलने का आरोप लगाते हो, तो आप किसी अन्य मीडिया चैनलों के कंधे का सहारा लेकर उस मीडिया रिपोर्ट को मत पेश करें। जब मैं कहता हूं कि आप भ्रष्ट हैं, तो मैंने अपनी गर्दन फंसा ली है। भले ही यह मनोरंजक लगता हो, लेकिन इसके पीछे बहुत से दिल जुड़े हैं, बहुत से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, बहुत सी आत्माएं जुड़ी हैं और तो और बहुत सा रिस्क भी है। यही कारण है कि मैं आपका समर्थन चाहता हूं।
वे आगे कहते हैं कि टेलिविजन चैनलो (न्यूज चैनलो) का मतलब है आदर्शवाद की समझ, एक कैमरा और दर्शक- बस इसके अलावा और कुछ नहीं।
गोस्वामी ने कहा कि उन पर खबर की तटस्थता को बर्बाद करने का आरोप लगाया जा रहा हैं। उनका मानना है कि खबर में तटस्थता की बात ही निराधार है। सही-गलत, उचित-अनुचित का फैसला करते समय जब तथ्य आपके सामने हैं,उदाहरण के तौर पर- जब कोई गैंगरेप की घटना होती है और राजनीतिक इस घटना पर भी असवंदेनशील कमेंट करते हैं, तो ऐसी स्थिति में आप चुपचाप सिर्फ बैठें नहीं रहें, ऐसे लोगों के बख्शे नहीं, छोड़े नहीं, अपने इमोशंस को व्यक्त कीजिए, विचारों को व्यक्त करें और सबसे जरूरी चीज लोग ऐसे में अपने भावनाओं को भी व्यक्त नहीं करते, जो कतई सही नहीं है।
वे कहते हैं कि स्वतंत्र मीडिया को डिजिटल मीडिया और टेलिविजन की शक्तियों के साथ मिलाने से ये अव्यवस्थित सिस्टम(clutter) टूट जाता है, जिसकी ये धारणा हैं कि यदि मैं अपने दर्शकों से सीधे संवाद करूं तो कोई भी मेरी इस सोच या तरीके को नहीं खरीद सकता है।और इस तरह हम ग्लोबल मीडिया की ओर कदम भी बढाएंगे। ये सब अगले तीन सालों में हम पा लेंगे। तब हम बीबीसी और सीएनएन को भी चुनौती देंगे। वे कहते हैं कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं, मुझे ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता यानी ये सपना अब सच होने वाला है।
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