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दूरदर्शन के पत्रकार का दावा, लाइव नहीं था पीएम मोदी के नोटबंदी का भाषण
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। नोटबंदी को लेकर सरकार के खिलाफ जहां विपक्षी दल एक सुर में अपनी आवाज बुलंद कर इस फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो वहीं इन सबके बीच अब एक पत्रकार सामने आया है, जिसने ये दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की जो अचानक घोषणा की थी, उ
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नोटबंदी को लेकर सरकार के खिलाफ जहां विपक्षी दल एक सुर में अपनी आवाज बुलंद कर इस फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो वहीं इन सबके बीच अब एक पत्रकार सामने आया है, जिसने ये दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की जो अचानक घोषणा की थी, उसका प्रसारण लाइव नहीं किया गया था। गौरतलब है कि देश के नाम इस संदेश को दूरदर्शन पर लाइव दिखाया गया था, जिसफी लाइव फीड ही कई न्यूज चैनलों ने चलाई।
दूरदर्शन में काम करने वाले पत्रकार और रिसर्चर सत्येन्द्र मुरली का आरोप है कि नोटबंदी का एकतरफा निर्णय लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को बरगलाने के लिए अचानक 8 नवंबर को रात 8 बजे घोषणा वाला नाटक किया। पत्रकार की मानें तो 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था। इस भाषण को लाइव कहकर चलाया जाना न सिर्फ अनैतिक था, बल्कि देश की जनता के साथ धोखा भी था।
पत्रकार का दावा है कि 8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव और शाम 7 बजे कैबिनेट को ब्रीफ किए जाने से कई दिनों पहले ही पीएम का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लिखा जा चुका था। उनका आरोप है कि मुद्रा के मामले में निर्णय लेने के रिजर्व बैंक के अधिकार का इस मामले में स्पष्ट तौर पर उल्लंघन किया गया है।
वहीं सत्येन्द्र मुरली का ये भी आरोप है कि इस बारे में आरटीआई (RTI) के जरिए पूछे जाने पर (PMOIN/R/2016/53416) प्रधानमंत्री कार्यालय ने जवाब देने की जगह टालमटोल कर दिया और आवेदन को आर्थिक मामलों के विभाग और सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया। उन्होंने इसके लिए बाकायदा RTI ट्रांसफर नंबर DOEAF/R/2016/80904 और MOIAB/R/2016/80180 सार्वजनिक है। पत्रकार का कहना है कि यह रिकॉर्डिंग पीएमओ में हुई थी, लिहाजा इस बारे में जवाब देने का दायित्व पीएमओ का है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ देते हुए कहा था कि आज मध्य रात्रि यानी 8 नवंबर 2016 की रात्रि 12 बजे से वर्तमान में जारी 500 रुपये और 1,000 रुपये के करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे यानी ये मुद्राएं कानूनन अमान्य होंगी। केंद्र सरकार की तरफ से दावा किया गया कि यह निर्णय पूरी तरह गोपनीय था और इस निर्णय की घोषणा से पूर्व इसके बारे में सिर्फ प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री समेत भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के कुछ ही अधिकारियों को मालूम था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि 8 नवंबर को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव आया, शाम 7 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई, जिसमें मोदी ने मंत्रियों को ब्रीफ किया और रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा कर दी।
पत्रकार का कहना है कि पीएम मोदी ने 'राष्ट्र के नाम संदेश' को मीडिया में लाइव बैंड के साथ प्रसारित करने को कहा था, जिसे देश के तमाम चैनलों ने लाइव बैंड के साथ ही प्रसारित किया। पीएम मोदी ने देश की जनता को बरगलाने के लिए ऐसा दिखावा किया कि मानो उन्होंने अचानक ही रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया हो। यह अचानक घोषणा वाला नाटक इसलिए किया गया, ताकि देश की जनता को भरोसा हो जाए कि प्रधानमंत्री मोदी ने मामले को बेहद गोपनीय रखा है, लेकिन ऐसा हरगिज नहीं था।
सत्येन्द्र मुरली दावा कर रहे हैं कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था। 8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव और शाम 7 बजे कैबिनेट को ब्रीफ किए जाने से कई दिनों पहले ही पीएम का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लिखा जा चुका था। और इतना ही नहीं मोदी ने इस भाषण को पढ़कर पहले ही रिकॉर्ड करवा लिया था।
उन्होंने सवाल उठाया है कि 8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई से प्रस्ताव मंगवा लेने के बाद, शाम 7 बजे मात्र दिखावे के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाई गई, जिसे मोदी ने ब्रीफ किया। किसी मसले को ब्रीफ करना और उस पर गहन चर्चा करना, दोनों में स्पष्ट अंतर होता है। मोदी ने कैबिनेट बैठक में बिना किसी से चर्चा किए ही अपना एक तरफा निर्णय सुना दिया। यह वही निर्णय था जिसे पीएम मोदी पहले ही ले चुके थे और कैमरे में रिकॉर्ड भी करवा चुके थे। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा THE GOVERNMENT OF INDIA (TRANSACTION OF BUSINESS) RULES, 1961 एवं RBI Act 1934 की अनुपालना किस प्रकार की गई होगी? क्या इस मामले में राष्ट्रपति महोदय को सूचना दी गई?
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