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TV न खत्म हुआ है और न ही भविष्य में ऐसा होने वाला है: अनिल कुमार लाहोटी
‘फिक्की फ्रेम्स’ के 24वें एडिशन में ‘टाटा प्ले’ के सीईओ हरित नागपाल के साथ बातचीत में ‘ट्राई चेयरमैन‘ का कहना था कि मोबाइल फोन टीवी की जगह नहीं ले रहा है, यह टीवी की पहुंच को बढ़ा रहा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी का कहना है कि टेलिविजन न तो खत्म हुआ है और न ही भविष्य में खत्म होने वाला है, बल्कि यह हमेशा रहेगा। ‘फिक्की फ्रेम्स’ के 24वें एडिशन में ‘टाटा प्ले’ के सीईओ हरित नागपाल के साथ बातचीत में ‘ट्राई चेयरमैन‘ का कहना था कि मोबाइल फोन टीवी की जगह नहीं ले रहा है, यह टीवी की पहुंच को बढ़ा रहा है।
लाहोटी का कहना था, ‘अक्सर यह कहा जाता है कि लोगों ने मोबाइल फोन पर वीडियो देखना शुरू कर दिया है और इसलिए वे टीवी क्यों देखेंगे? लेकिन मोबाइल पांच इंच की स्क्रीन है और टीवी 50 इंच की स्क्रीन है। ऐसे में आपको मोबाइल फोन पर टेलिविजन जैसा मनोरंजन का अनुभव नहीं मिल सकता है।’
लाहोटी के अनुसार, ‘इसलिए मोबाइल फोन टीवी की जगह नहीं ले रहा है, यह टीवी की पहुंच बढ़ा रहा है। इससे देखने का समय भी बढ़ रहा है। चूंकि टीवी को हर जगह नहीं ले जाया जा सकता, इसलिए मोबाइल लोगों को चलते-फिरते कंटेंट देखने में मदद करता है, जिससे देखने का समय बढ़ जाता है। इससे इंडस्ट्री को सपोर्ट मिलेगा।’
मंगलवार को जारी फिक्की और ईवाई (FICCI-EY) की संयुक्त रिपोर्ट का हवाला देते हुए लाहोटी ने कहा कि 118 मिलियन पेड टीवी और 45 मिलियन प्रीमियम कनेक्शन के मुकाबले 19 मिलियन स्मार्ट टीवी हैं। लाहोटी के अनुसार, ‘यानी 19 मिलियन स्मार्ट टीवी के मुकाबले लगभग 163 मिलियन टीवी हैं और आंकड़े खुद स्थिति बयां कर रहे हैं। इनमें तमाम टीवी मालिक स्मार्ट टीवी लेने की ख्वाहिश रखते हैं। ऐसे भी 140 मिलियन घर हैं, जिन्हें अभी तक अपना पहला टीवी नहीं मिला है, इसलिए टीवी बढ़ेगा।’
उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि चूंकि ब्रॉडकास्टिंग बहुत ही डायनामिक इंडस्ट्री है, ऐसे में जब नई टेक्नोलॉजी आएंगी तो इसके विकल्प होंगे और टीवी को नई टेक्नोलॉजी के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
इसके साथ ही लाहोटी का यह भी कहना था, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूं कि यह टीवी इंडस्ट्री के लिए अच्छा है क्योंकि इससे उन्हें कुछ नया करने और इसकी गुणवत्ता में सुधार करने और खुद को और अधिक किफायती बनाने का मौका मिलेगा। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि यह सोचने का कोई कारण है कि टीवी खत्म हो गया है।’
उनका कहना था कि टीवी की भी कुछ खूबियां हैं। ओटीटी के विपरीत, टीवी में लगभग 900 चैनल हैं। इनमें से बड़ी संख्या में चैनल क्षेत्रीय भाषाओं में हैं और ओटीटी इसके आसपास भी नहीं है। भारत जैसे देश के लिए क्षेत्रीय कंटेंट बहुत महत्वपूर्ण है।
दूसरी बात यह है कि लगभग 1000 मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) पूरे केबल टीवी सिस्टम का संचालन कर रहे हैं। वे क्षेत्र में मौजूद हैं और उपभोक्ताओं के सीधे संपर्क में हैं। इसलिए उनके पास ओटीटी के विपरीत उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचने की ताकत है। टीवी को यह करना होगा कि वह अपनी ताकत का लाभ उठाए और उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करे।
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