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ZEEL से जुड़े इस मामले में SIAC से Sony को लगा 'झटका', कही ये बात
SIAC ने ZEEL के खिलाफ सोनी के द्वारा दायर की गई इमरजेंसी एप्लीकेशन को खारिज कर दिया, जिसमें 'जी' को NCLT में जाने से रोकने की मांग की गई थी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
'सोनी' (Sony) को सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) से तब बड़ा झटका लगा, जब SIAC ने जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के खिलाफ उसके द्वारा दायर की गई इमरजेंसी एप्लीकेशन को खारिज कर दिया, जिसमें 'जी' को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में जाने से रोकने की मांग की गई थी। यह आवेदन भारत में सोनी की यूनिट 'कल्वर मैक्स' और 'बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड' (BEPL) द्वारा दायर किया गया था।
SIAC ने कहा कि उसके पास जी को NCLT में जाने से रोकने का कोई अधिकार क्षेत्र या अधिकार नहीं है क्योंकि विलय स्थानीय न्यायाधिकरण के दायरे में आता है। बता दें कि सिंगापुर में सोनी का आवेदन इमरजेंसी अर्बिट्रेशन प्रोसीजर के तहत दायर किया गया था।
इस निर्णय के बाद सोनी ने सोमवार को कहा कि वह SIAC के फैसले से निराश है। यह निर्णय केवल प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें केवल इस बात पर फैसला किया गया है कि जी एंटरटेनमेंट को NCLT के साथ अपने आवेदन को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।
जापानी कंपनी की भारतीय इकाई ने आगे कहा कि वह सिंगापुर में एक पूर्ण न्यायाधिकरण के सामने मामले में सख्ती से मध्यस्थता करना जारी रखेगा और विलय समझौते को खत्म करने और टर्मिनेशन फीस और बाकी उपायों की मांग करने के अपने अधिकार को भी जारी रखेगा। सोनी ने कहा कि वह सिंगापुर और भारत दोनों में अपनी पोजिशन को लेकर आश्वस्त है।
ZEEL ने रविवार को स्टॉक एक्सचेंज को यह जानकारी दी थी कि SIAC ने एक इमर्जेंसी मध्यस्थता फैसले में ZEEL पर रोक लगाने की कल्वर मैक्स और BEPL(बांग्ला एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड) की याचिका को खारिज कर दिया। SIAC ने अपने आदेश में कहा कि उसके पास ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है।
ZEEL ने कहा कि इस बारे में अब NCLT को निर्णय लेना है और उसे उम्मीद है कि NCLT विलय योजना को लागू करेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि सोनी द्वारा दायर की गई इमरजेंसी एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया जाता, तो एक दिन के अंदर ही इमरजेंसी आर्बिट्रेटर को नियुक्त कर दिया जाता। लेकिन, सोनी की इस मांग को SIAC ने स्वीकार नहीं किया।
फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पास वर्तमान में दो याचिकाएं हैं। इसमें एक जी द्वारा और दूसरी जी शेयरधारक 'मैड मेन फिल्म वेंचर्स' द्वारा। जापानी कंपनी द्वारा इसे रद्द करने के बाद दोनों ने भारतीय ब्रॉडकास्टर और सोनी के बीच विलय को लागू करने की मांग की है।
बता दें कि ZEEL और जापान के सोनी समूह की भारतीय इकाई 'सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया' (वर्तमान में कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट) के बीच होने वाले 10 अरब डॉलर के विलय समझौते को सोनी ने देरी और कुछ अन्य कारणों के चलते तोड़ दिया था। सोनी ने आरोप लगाया था कि ने ZEEL समझौते की शर्तों को पूरा नहीं किया। सोनी ने विलय की शर्तों को पूरा करने में ZEEL की विफलता के लिए टर्मिनेशन फीस के रूप में 9 करोड़ डॉलर की मांग करते हुए सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर का रुख किया।
जी एंटरटेनमेंट ने सोनी के इस दावे का विरोध किया है और सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की है। ZEEL ने इस फैसले के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में याचिका दायर की है।
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