दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में ‘श्री राम और तमिलगम’ पुस्तक का विमोचन हुआ। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने श्री राम को प्रथम पर्यावरण संरक्षक बताते हुए जीव-दया और प्रकृति संतुलन पर जोर दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के दूसरे दिन आयोजित एक विशेष सत्र में पुस्तक ‘श्री राम और तमिलगम: एक अटूट बंधन’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. नरसी राम बिश्नोई, कुलपति, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (हिसार) उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भगवान श्री राम के व्यक्तित्व के एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत प्रासंगिक पक्ष—पर्यावरण संरक्षण—को केंद्र में रखा।
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि श्री राम केवल मर्यादा पुरुषोत्तम या आदर्श राजा ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के सच्चे रक्षक भी थे। उन्होंने रामायण के समुद्र-प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब समुद्र ने मार्ग नहीं दिया और ब्रह्मास्त्र का संधान किया गया, तब श्री राम ने यह विचार कर निर्णय बदला कि इससे असंख्य जलचर निर्दोष रूप से नष्ट हो जाएंगे।
यही संवेदनशीलता उन्हें प्रथम पर्यावरण रक्षक के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने बिश्नोई परंपरा का संदर्भ देते हुए गुरु जम्भेश्वर महाराज द्वारा दिए गए 29 नियमों की चर्चा की, जिनका मूल उद्देश्य जीव-रक्षा और वृक्ष-संरक्षण है। खेजड़ली के बलिदान को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में पर्यावरण के लिए त्याग कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि जीवित परंपरा है।
अपने वक्तव्य में प्रो. बिश्नोई ने आधुनिक संदर्भों की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि जीव-दया केवल विचार नहीं, आचरण का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि वन्यजीवों को क्षति पहुंचाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करता है।
सच्चा पश्चाताप और संरक्षण का संकल्प ही न्याय और क्षमा का आधार हो सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ने के साथ-साथ ‘राम राज्य’ की उस भावना को सामने लाती है, जहां विकास प्रकृति के विनाश के बिना संभव है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार और ‘एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया’ (Editors Club Of India) के प्रेजिडेंट अमिताभ अग्निहोत्री ने नए साल पर एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘टीवी9 नेटवर्क’ (Network9) में अपनी पारी को विराम देने की घोषणा की है। अमिताभ अग्निहोत्री ‘टीवी9’ में करीब चार से बतौर कंसल्टिंग एडिटर कार्यरत थे। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं और नोएडा स्थित सेक्टर-62 में ऑफिस बनाया जा रहा है। अमिताभ अग्निहोत्री के अनुसार, जल्द ही वह नई शुरुआत करेंगे और तब उस बारे में विस्तार से बताएंगे।
गौरतलब है कि अमिताभ अग्निहोत्री को मीडिया में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जीवन और पत्रकारिता में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अमिताभ ने 1989 में ‘आईआईएमसी’, दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की। अमिताभ ‘दैनिक जागरण’ के दिल्ली से लॉन्च होने पर संस्थान का हिस्सा बने थे। 1994 में ‘आज‘ के नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में भी काम किया। ‘आज‘ के बाद ‘दैनिक भास्कर‘ में भी तकरीबन 10 साल रहे। ‘दैनिक भास्कर‘ के बाद 2008 में ‘देशबन्धु‘ के स्थानीय संपादक बने।
इसके बाद उन्होंने ‘टोटल टीवी‘ में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। हालांकि बाद में यहां से इस्तीफा देकर ‘समाचार प्लस‘ के प्रबंध संपादक बन गए। इसके बाद उन्होंने ‘इंडिया नाउ‘ समूह में बतौर एडिटर-इन-चीफ जॉइन कर लिया, पर कुछ कारणों के चलते चैनल लॉन्च ही नहीं हो सका। फिर यहां से बॉय बोलकर वह ‘के-न्यूज’ (K-NEWS) चैनल से बतौर सीईओ व एडिटर-इन-चीफ जुड़ गए।
‘के-न्यूज‘ के साथ करीब एक साल की पारी खेलने के बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया। यहां से बाय बोलकर ‘नेटवर्क18‘ (हिंदी नेटवर्क) में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने हिंदी न्यूज चैनल ‘आर9’ (R9) के साथ बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी शुरू की थी, जहां से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अमिताभ अग्निहोत्री बतौर कंसल्टिंग एडिटर ‘टीवी9’ आ गए थे, जहां से अब उन्होंने अपनी पारी को विराम दे दिया है।
अमिताभ अग्निहोत्री को पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने अमूल्य योगदान के लिए कई बार पुरस्कृत भी किया जा चुका है। उन्हें मटुश्री, गणेशशंकर विद्यार्थी और यूनिवार्ता अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2013 में उन्हें समाचार4मीडिया द्वारा ‘मीडिया महारथी’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
समाचार4मीडिया की ओर से अमिताभ अग्निहोत्री को उनके नए सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।
आखिर क्यों बंद हो रहे हैं MTV के चैनल, भारत में इसका क्या असर पड़ा, और MTV का भविष्य अब किस दिशा में जा रहा है, इसी पूरी कहानी को आसान भाषा और तथ्यों के साथ समझते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक समय था जब टीवी ऑन करते ही युवाओं की पहली पसंद MTV हुआ करता था। म्यूजिक वीडियो, पॉप कल्चर और यूथ ट्रेंड्स का पर्याय रहे इस चैनल ने पूरी एक पीढ़ी की सोच और मनोरंजन को आकार दिया। लेकिन बदलते दौर, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती ताक़त और दर्शकों की आदतों में आए बड़े बदलावों के बीच अब MTV के कई प्रतिष्ठित म्यूजिक चैनल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बंद किए जा रहे हैं। आखिर क्यों बंद हो रहे हैं ये चैनल, भारत में इसका क्या असर पड़ा, और MTV का भविष्य अब किस दिशा में जा रहा है, इसी पूरी कहानी को आसान भाषा और तथ्यों के साथ समझते हैं।
MTV का इतिहास: कैसे शुरू हुआ एक म्यूजिक का युग
MTV (Music Television) एक ऐसा चैनल था जिसने पूरी दुनिया में म्यूजिक वीडियो की पहचान बदली। इसे 1 अगस्त 1981 को अमेरिका में लॉन्च किया गया था और यह 24-घंटे म्यूजिक और म्यूजिक वीडियो दिखाने वाला पहला चैनल माना जाता है।
रिलीज के शुरुआती दिनों में MTV सिर्फ म्यूजिक वीडियोज ही प्रसारित करता था और युवा दर्शकों के बीच यह बेहद लोकप्रिय हुआ। MTV ने म्यूजिक, फैशन, पॉप कल्चर और युवा सोच को एक नया रूप दिया और “I Want My MTV” जैसे स्लोगन ने उस दौर के म्यूजिक प्रेमियों को झकझोर दिया।
टीवी से डिजिटल का सफर: दर्शकों की बदलती आदतें
मगर जैसे-जैसे समय बदला, लोगों के मनोरंजन के तरीके भी बदलने लगे। इंटरनेट और स्मार्टफोन के आने के बाद YouTube, Spotify, TikTok जैसे प्लेटफार्म म्यूजिक और वीडियो देखने का मुख्य तरीका बन गए। लोग अब टीवी पर म्यूजिक चैनल देखने की बजाय ऑनलाइन और ऑन-डिमांड कंटेंट पसंद करने लगे।
इस बदलती प्रवृत्ति के कारण MTV जैसे 24-घंटे म्यूजिक चैनल की व्यूअरशिप लगातार घटती चली गई। MTV के म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों ने जो दर्शक कभी टीवी के लिए चुने थे, वे अब डिजिटल पर चले गए। यही MTV के म्यूजिक चैनलों के बंद होने का सबसे बड़ा कारण है।
2025 में MTV की घोषणा: म्यूजिक चैनलों का अंत
12 अक्टूबर 2025 को Paramount Global (जो MTV की पैरेंट कंपनी है) ने घोषणा की कि दुनिया भर के कुछ प्रमुख MTV म्यूजिक चैनलों को 31 दिसंबर 2025 तक बंद कर दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं: MTV Music, MTV 80s, MTV 90s, Club MTV और MTV Live. ये सभी चैनल मुख्य रूप से म्यूजिक, म्यूजिक वीडियो और लाइव कॉन्सर्ट प्रोग्रामिंग पर केंद्रित थे।
MTV के इन म्यूजिक चैनलों का अंत, म्यूजिक टीवी की उस “गोल्डन एरा” का अंत माना जा रहा है, जिसमें टीनेजर्स और युवा अपने पसंदीदा म्यूजिक वीडियो देखने के लिए टीवी पर MTV देखते थे।
कहां-कहां बंद हो रहा है MTV?
सबसे पहले MTV के म्यूजिक चैनल यूके (UK) और आयरलैंड (Ireland) में 31 दिसंबर 2025 को ऑफ एयर हो गए, और बाद में इन्हें यूरोप, ब्राजील, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भी बन्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
इन देशों में MTV Music, MTV 80s, MTV 90s, Club MTV और MTV Live जैसे म्यूजिक चैनल्स प्रसारण से हटाए जा रहे हैं क्योंकि मीडिया कंपनियाँ traditional TV से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रही हैं।
हालाँकि MTV के कुछ चैनल जैसे MTV HD, जो मुख्यतः रियलिटी और मनोरंजन शो दिखाते हैं, अभी भी चल रहे हैं, इन म्यूजिक-सेंट्रिक चैनलों के अंत का मतलब यह है कि टीवी पर म्यूजिक वर्ल्ड का एक बड़ा हिस्सा गायब हो रहा है।
भारत में MTV का क्या हाल है?
भारत में MTV India को बंद किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ी थी कि MTV India भी दिसंबर 2025 में बंद हो जाएगा, लेकिन यह जानकारी गलत साबित हुई थी। अक्टूबर, 2025 में ही MTV India ने खुद स्पष्ट किया कि वह बंद नहीं हो रहा है और दर्शकों को पहले जैसे रियलिटी शोज, म्यूजिक और युवा-आधारित कार्यक्रम मिलेंगे।
इसका कारण यह है कि MTV India ने समय रहते अपनी पहचान बदल ली है- अब यह चैनल केवल म्यूजिक वीडियो नहीं बल्कि Reality Shows, Youth Entertainment और गेम फॉर्मेट्स भी प्रदर्शित करता है, जिससे उसकी व्यूअरशिप काफी मजबूत बनी हुई है।
क्यों MTV के मूल म्यूजिक चैनल बंद हो रहे हैं?
MTV के म्यूजिक चैनलों के बंद होने के पीछे कुछ बड़े कारण हैं। सबसे पहले, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई है। अब लोग गाने YouTube, TikTok, Spotify जैसे प्लेटफॉर्म्स पर देखना और सुनना पसंद करते हैं, जिससे टीवी चैनलों की मांग कम हो गई है।
दूसरा कारण यह है कि टीवी पर म्यूजिक चैनलों की व्युअरशिप लगातार घट रही है। पुराने जमाने की तरह लोग अब टीवी पर गाने देखने के बजाय ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर ही कंटेंट देखना पसंद करते हैं।
तीसरा कारण Paramount Global की रणनीति है। कंपनी अब खर्चों को कम करने और आधुनिक मीडिया की जरूरतों के हिसाब से बदलाव करने की दिशा में है। इसी वजह से उसने म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों को बंद करने का फैसला लिया है।
मीडिया की बदलती दुनिया: MTV का भविष्य
म्यूजिक टीवी का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, क्योंकि युवा दर्शक अब रियल-टाइम ऑनलाइन कंटेंट को प्राथमिकता देने लगे हैं। अब लोग गाने और एंटरटेनमेंट सिर्फ टीवी पर नहीं देखते, बल्कि YouTube, TikTok, Spotify और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर देखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि MTV के पुराने फ्लैगशिप चैनल, जैसे MTV HD, अब केवल म्यूजिक वीडियो नहीं दिखाते। ये चैनल अब रियलिटी शो, प्रतियोगिताएं, पॉप-कल्चर गेम-शो और अन्य इंटरएक्टिव कंटेंट पर फोकस कर रहे हैं।
इस बदलाव को मीडिया इंडस्ट्री की नई लहर के रूप में देखा जा रहा है। आज के समय में कंटेंट डिजिटल, शॉर्ट-फॉर्म और ऑन-डिमांड हो रहा है। ऐसे में टीवी चैनल भी खुद को नए दर्शकों और उनकी बदलती पसंद के हिसाब से ढाल रहे हैं। MTV इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है, जहां वह पुराने म्यूजिक फॉर्मेट से आगे बढ़कर नए और विविध फॉर्मेट के कंटेंट की ओर कदम बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया का यह रूप भविष्य में और भी तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर झुकेगा। ऐसे में चैनलों का अस्तित्व उसी समय टिकेगा जब वे युवा दर्शकों की पसंद, नए ट्रेंड्स और डिजिटल अनुभव को समझकर अपने कंटेंट को अपडेट करेंगे। MTV का यह परिवर्तन इसी दिशा का एक हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि मीडिया इंडस्ट्री अब केवल टेलीविजन पर आधारित नहीं रह गई, बल्कि ऑनलाइन और डिजिटल अनुभवों की दुनिया में अपने दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
परिणाम: एक युग का अंत, मगर चैनल का पूरा सफर खत्म नहीं
MTV के म्यूजिक-फोकस्ड चैनलों का बंद होना एक दीर्घ युग का अंत है जिसने बहुत से लोगों के बचपन और जवानी को म्यूजिक और वीडियो से जोड़ा, लेकिन MTV पूरी तरह से बंद नहीं हो रहा है। इसका प्रमुख चैनल अभी भी चल रहा है और नए मनोरंजन रूपों के साथ अपनी पहचान बनाए हुए है।
MTV का सफर म्यूजिक टीवी से लेकर युवा मनोरंजन तक एक लम्बा इतिहास है, और अब वह समय के साथ स्वयं को बदलते हुए भविष्य की ओर अग्रसर है।
मीडिया इंडस्ट्री के इतिहास में 2026 एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है, जहां AI सिर्फ तकनीकी सहायक नहीं बल्कि कंटेंट निर्माण, रणनीति, डिस्ट्रीब्यूशन व दर्शक जुड़ाव का केंद्र बिंदु बन जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया इंडस्ट्री के इतिहास में 2026 एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखा जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ तकनीकी सहायक नहीं बल्कि कंटेंट निर्माण, रणनीति, डिस्ट्रीब्यूशन और दर्शक जुड़ाव का केंद्र बिंदु बन जाएगा। पिछली कुछ वर्ष में मीडिया में AI की शुरुआत दिखी थी, 2025 में जनरेटिव AI और LLMs (Large Language Models) ने पत्रकारिता, वीडियो निर्माण और सोशल मीडिया कंटेंट को बदलने की दिशा में पहला कदम रखा, लेकिन 2026 में यह बदलाव और गहरा, असरदार और रोजमर्रा का बन जाएगा।
पहले मीडिया में AI का उपयोग सपोर्ट टूल के रूप में होता था- जैसे टेक्स्ट सुझाव देना, ट्रांसक्रिप्शन या छवि सुधारना। 2026 में AI अब सामग्री का रचनात्मक साथी और कहीं-कहीं मुख्य लेखक बनता दिखेगा। मीडिया कंपनियाँ AI का इस्तेमाल कर डेटा पर आधारित स्टोरीलाइन, ट्रेंड-इंटेलिजेंस और मल्टीमॉडल कंटेंट (जैसे टेक्स्ट़, वीडियो, ऑडियो एक साथ) तैयार करेंगी जो हर प्लेटफॉर्म के लिए ऑटोमैटिकली अनुकूलित होगा।
यह बदलाव किया जाता है क्योंकि यूजर डेटा और उनके व्यवहार के अनुसार पर्सनलाइज्ड कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स में AI-आधारित पर्सनलाइजेशन से यूजर इंगेजमेंट में 25% तक की वृद्धि देखी गई है।
2026 की सबसे बड़ी तकनीकी प्रगति में से एक है एजेंटिक AI का उदय- ऐसे AI सिस्टम जो सिर्फ उत्तर नहीं देंगे बल्कि लक्ष्य निर्धारित कर काम पूरा करेंगे। उदाहरण के लिए, AI अब खबर के लिए डेटा इकट्ठा कर सकता है, उसके आधार पर शीर्षक तय कर सकता है, असली रिपोर्टर के लिए प्राथमिक मसौदा तैयार कर सकता है और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म चुन सकता है।
इसका अर्थ यह होगा कि केवल रिपोर्टर ही नहीं बल्कि AI को कार्यों का सह-निर्माता माना जाएगा। यह बदलाव रणनीति रचना, संसाधन आवंटन और मीडिया आउटलेट की कार्यप्रणाली में भी दिखाई देगा। 2026 में वही मीडिया संस्थान आगे रहेंगे जो AI को प्रतिस्थापन (replacement) नहीं बल्कि सहयोगी (collaborator) के रूप में अपनाएंगे।
टेलीविजन और प्रिंट की एक-सार शैली अब पुरानी समझी जाएगी। AI के कारण अब कंटेंट डायनेमिक रूप से हर यूजर के हिसाब से बदल जाएगा- जैसे एक ही न्यूज स्टोरी को अलग-अलग भाषाओं, स्वरूपों और प्लेटफॉर्म आवश्यकता के अनुसार तुरंत अनुकूलित कर देना। इससे डिलीवरी दक्षता और पहुंच में बड़ा उछाल आएगा।
उदाहरण के तौर पर, डिजिटल न्यूज ऐप्स AI-आधारित न्यूज फीड्स को आपके पढ़ने की आदतों के हिसाब से तैयार करेंगे, जिससे यूजर्स की प्रतिधारण दर (retention) बेहतर होगी।
AI की प्रगति सिर्फ टेक्स्ट जेनरेशन तक सीमित नहीं रहेगी। 2026 में एजेंटिक AI सिस्टम्स ख़बर के स्रोत से डेटा इकट्ठा कर सकते हैं, तथ्यों की जांच कर सकते हैं, संपादकीय प्राथमिकताओं के अनुसार मसौदा तैयार कर सकते हैं और पूरे वर्कफ्लो को ट्रैक कर सकते हैं।
यह मीडिया संस्थानों को यह तय करने में मदद करेगा कि कौन-सी खबर तुरंत चलानी है, किस पर और जांच की जरूरत है और कौन-सी स्टोरी दर्शकों के लिए सबसे ज्यादा अहम है। ये फैसले अब अनुमान से नहीं, बल्कि डेटा के आधार पर लिए जाएंगे। इससे पत्रकारों को रोजमर्रा के तकनीकी कामों से राहत मिलेगी और वे गंभीर, गहरी और असरदार रिपोर्टिंग पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।
AI के बढ़ते उपयोग के साथ एक बड़ा चुनौती-क्षेत्र भी उभर रहा है, 'AI स्लॉप' कंटेंट की भरमार। एक शोध में पाया गया है कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर नए यूजर्स को दिखाए जाने वाले वीडियो का 20% तक भाग केवल AI-जनरेटेड और कम-गुणवत्ता वाला कंटेंट है, जिसे केवल व्यूज और विज्ञापन राजस्व के लिए बनाया जाता है।
इससे मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और गलत सूचना फैलने का जोखिम बढ़ता है। 2026 में मीडिया कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स के लिए यह चुनौती होगी कि वे AI के लाभ का उपयोग करते हुए गुणवत्ता और नैतिकता बनाए रखें।
AI के बढ़ते उपयोग के बीच रेगुलेटरी और नैतिक मानकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। 2026 में यह उम्मीद की जा रही है कि सरकारें, मीडिया संगठनों और प्लेटफॉर्म्स मिलकर ऐसे गाइडलाइंस तैयार करेंगे, जो नैतिकता, पारदर्शिता और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दें।
यह आवश्यक है क्योंकि AI-जनरेटेड गलत जानकारी और 'डीपफेक' जैसी तकनीकों से समाज और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी से करना सीखना होगा, ताकि AI सहायता प्रदान करे, लेकिन निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी इंसानी विवेक के पास रहे।
AI के उपयोग से रूटीन, मशीनी कामों (जैसे बेसिक एडिटिंग, ट्रांसक्रिप्शन और प्रारंभिक रिपोर्टिंग) में कटौती संभव है, लेकिन साथ ही नई भूमिकाएँ और कौशल उभरेंगे- जैसे AI-एडिटिंग विशेषज्ञ, डेटा आयोजक, AI-ट्रेनर, एथिक्स ऑफिसर और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट।
यह बदलाव पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को तकनीकी दक्षता और रणनीतिक सोच की तरफ ले जाएगा- जहां रचनात्मकता और नैतिक निर्णय मशीनों की तुलना में अधिक मूल्यवान होंगे।
2026 मीडिया में AI का वर्ष होगा- जहां कंटेंट निर्माण तेजी से, स्मार्टली और डेटा-संचालित तरीके से होगा। AI के सहयोग से मीडिया अधिक तीव्र, ज्यादा व्यक्तिगत और ज्यादा इंटरैक्टिव बनेगा। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि तकनीक की ताकत का सही इस्तेमाल तभी संभव है जब नैतिकता, गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए।
इसलिए 2026 का मीडिया परिदृश्य तकनीक और मानव बुद्धि का सही संतुलन तय करेगा, एक ऐसा संतुलन जहां AI इंसान के साथी के रूप में उभरता है, न कि उसका विकल्प।
विज्ञापन और मीडिया इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल श्रीधर ने तीन दशकों से अधिक के सफल करियर के बाद कॉरपोरेट जीवन से आगे बढ़ने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और विज्ञापन जगत में 30 वर्षों से अधिक का लंबा और प्रभावशाली सफर तय करने के बाद, सीनियर प्रोफेशनल श्रीधर ने कॉरपोरेट दुनिया से विदाई ले ली है। अपने करियर के दौरान वे मुद्रा, GroupM, Initiative और Innocean India जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियों से जुड़े रहे और कई ऐतिहासिक अभियानों का हिस्सा बने।
'Innocean' के साथ उनका जुड़ाव खास तौर पर उल्लेखनीय रहा, जहाँ उन्होंने कुल 17 वर्षों तक दो अलग-अलग चरणों में काम किया। पहले उन्होंने Hyundai के मीडिया मैन्डेट का नेतृत्व किया और बाद में वही जिम्मेदारी Kia ब्रांड के लिए संभाली।
इसके अलावा, उन्होंने Samsung, Nestlé, Pepsi Foods और Microsoft जैसे दिग्गज ब्रांड्स के साथ काम करते हुए मीडिया रणनीति और विज्ञापन जगत पर गहरी छाप छोड़ी। अब कॉरपोरेट जीवन से बाहर निकलते हुए, श्रीधर अपने व्यक्तिगत जुनून को समय देना चाहते हैं।
वे लंबे समय से एक जाने-माने बिज़नेस क्विज़ मास्टर रहे हैं और अब इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ही वे मोटिवेशनल स्पीकिंग की शुरुआत भी करने जा रहे हैं।
प्लानेटकास्ट मीडिया (Planetcast Media Services Ltd.) में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। कंपनी में डिजिटल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर वेणुगोपाल पार्थसारथी अयंगर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्लानेटकास्ट मीडिया (Planetcast Media Services Ltd.) में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। कंपनी में डिजिटल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर वेणुगोपाल पार्थसारथी अयंगर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसकी पुष्टि इस मामले से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया से की है।
वेणुगोपाल अयंगर का जाना ऐसे समय पर हुआ है जब उन्होंने प्लानेटकास्ट की डिजिटल और क्लाउड आधारित ग्रोथ रणनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी। अपने कार्यकाल के दौरान वे कंपनी के Cloud और SaaS पोर्टफोलियो को खड़ा करने और उसे आगे बढ़ाने से सीधे तौर पर जुड़े रहे। उन्होंने प्लानेटकास्ट की पारंपरिक ब्रॉडकास्ट ताकत को OTT प्लेटफॉर्म, FAST चैनल, डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन और नई पीढ़ी के कंटेंट मैनेजमेंट सॉल्यूशंस की जरूरतों के साथ जोड़ने का काम किया।
वेणुगोपाल अयंगर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के एक अनुभवी प्रोफेशनल माने जाते हैं। उन्हें कंटेंट, टेक्नोलॉजी और बिज़नेस के बीच संतुलन बनाकर काम करने के लिए जाना जाता है। पिछले 20 सालों में उन्होंने मीडिया वैल्यू चेन के लगभग हर हिस्से में काम किया है, जिसमें मोबाइल वीडियो, OTT सेवाएं, DTH, ब्रॉडकास्ट टीवी, कंटेंट एक्विजिशन, सब्सक्राइबर और प्रोडक्ट मैनेजमेंट, ब्रॉडकास्ट मार्केटिंग और फ्रेंचाइज़ डेवलपमेंट शामिल हैं।
उनका करियर कई बड़े नामों से जुड़ा रहा है। उन्होंने Walt Disney और Viacom जैसी ग्लोबल मीडिया कंपनियों में नेतृत्व की भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा भारत में Zee Entertainment Enterprises और Sun TV Network जैसे बड़े नेटवर्क्स के साथ भी काम किया है।
एक अहम उद्यमी दौर में वेणुगोपाल ने Apalya Technologies का नेतृत्व भी किया, जहां उन्होंने एशिया में कई बड़े क्लाइंट्स हासिल किए और ग्लोबल कंपनियों को कड़ी टक्कर दी। इस दौरान उन्होंने एक मजबूत मीडिया-टेक ऑपरेटर के रूप में अपनी पहचान बनाई, जिन्हें काम को ज़मीन पर उतारने में महारत हासिल है।
फिलहाल Planetcast व वेणुगोपाल की ओर से उनके अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इंडस्ट्री में इस बदलाव को एक अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रसार भारती ने अपने हालिया एलॉटमेंट प्रोसेस के तहत 17 रीजनल टीवी चैनल्स को 'डीडी फ्री डिश' के MPEG-4 प्लेटफॉर्म पर पायलट आधार पर 31 मार्च, 2026 तक मुफ्त प्रसारण के लिए चुना है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती ने अपने हालिया एलॉटमेंट प्रोसेस के तहत 17 रीजनल टीवी चैनल्स को 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) के MPEG-4 प्लेटफॉर्म पर पायलट आधार पर 31 मार्च, 2026 तक मुफ्त प्रसारण के लिए चुना है। यह घोषणा प्रसारक की 93वीं एलॉटमेंट राउंड के हिस्से के रूप में की गई है।
इस कदम का मकसद पूरे भारत में दर्शकों तक क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट की पहुंच बढ़ाना है और भारत के मुफ्त-टीवी (Free-to-Air) प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को अधिक विकल्प देना है।
पायलट योजना में शामिल प्रमुख चैनल्स में TV9 Kannada, Public TV (Kannada), Mazhavil Manorama (Malayalam) जैसे स्थापित नाम शामिल हैं। इसके अलावा बंगाली भाषी चैनल्स में ABP Ananda, R. Bangla, TV9 Bangla, R Plus Gold, Kolkata TV, R Plus Bengali, Enterr 10 Bangla और Khushboo Bangla को भी शामिल किया गया है।
अन्य क्षेत्रीय चैनल्स में Kanak News (Odia), ABP Majha और 9X Jhakaas (Marathi), ABP Asmita और Gujarat First (Gujarati), News State Punjab-Haryana-Himachal (Punjabi) जैसे नाम शामिल हैं।
इस पायलट योजना के तहत, ये चैनल DD Free Dish के MPEG-4 फीड्स पर मुफ्त में प्रसारित होंगे, यानी उन्हें इस अवधि में किसी प्रकार का कैरिज फीस नहीं चुकाना होगा।
यह सूची दर्शाती है कि प्रसार भारती क्षेत्रीय प्रसारण को मजबूत करने और 'डीडी फ्री डिश' सब्सक्राइबर्स के लिए कंटेंट को विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि लंबे समय के लिए स्लॉट एलॉटमेंट के नियमों के अंतिम रूप देने से पहले दर्शकों को अधिक विकल्प मिल सकें।
यह नियुक्ति 5 साल के लिए होगी और इसे बोर्ड ने नॉमिनेशन और रिम्यूनरेशन कमिटी की सिफारिश के आधार पर मंजूरी दी है। लेकिन यह नियुक्ति अंतिम तभी होगी जब कंपनी के सदस्यों से इस पर मंजूरी मिल जाएगी।
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बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) के बोर्ड ने 30 दिसंबर, 2025 को एक अहम फैसला लिया है। बोर्ड ने पंकज बैकुंठनाथ चतुर्वेदी (Baikunthnath Chaturvedi) को कंपनी का नॉन एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Non-Executive Independent Director) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 5 साल के लिए होगी और इसे बोर्ड ने नॉमिनेशन और रिम्यूनरेशन कमिटी की सिफारिश के आधार पर मंजूरी दी है। लेकिन यह नियुक्ति अंतिम तभी होगी जब कंपनी के सदस्यों से इस पर मंजूरी मिल जाएगी।
पंकज चतुर्वेदी फिलहाल Rich Products and Solutions Private Limited में इंडिया, टर्की और MENA के CEO के रूप में कार्यरत हैं। वे फूड और बेवरेज इंडस्ट्री के अनुभवी लीडर हैं और भारत, टर्की और MENA में कंपनी की रणनीतिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह रहे हैं।
उन्होंने Institute of Hotel Management, Mumbai से शिक्षा प्राप्त की है और Harvard Business School से Advanced Management Program भी किया है। उनके नेतृत्व में टीम वर्क, सीखने की संस्कृति और मजबूत बिजनेस रिलेशनशिप पर खास ध्यान दिया जाता है।
कंपनी के मुताबिक, इस डील के लिए दोनों कंपनियों के बीच एक एग्रीमेंट साइन हुआ है, जिसके तहत Omega Interactive Technologies को फिल्म को थिएटर और OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने के अधिकार मिलेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Bluegod Entertainment Limited ने अपनी आने वाली फिल्म “रोटी, कपड़ा और इंटरनेट” के थिएटर और OTT राइट्स बेच दिए हैं। कंपनी ने बताया कि उसने यह राइट्स Omega Interactive Technologies Limited को कुल 12 करोड़ रुपये में बेचे हैं।
कंपनी के मुताबिक, इस डील के लिए दोनों कंपनियों के बीच एक एग्रीमेंट साइन हुआ है, जिसके तहत Omega Interactive Technologies को फिल्म को थिएटर और OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने के अधिकार मिलेंगे। यह डील पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है और इसकी जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के अनुसार दी गई है।
Bluegod Entertainment का रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर में है, जबकि Omega Interactive Technologies का ऑफिस मुंबई में स्थित है। कंपनी ने साफ किया है कि यह डील फिल्म के कमर्शियल इस्तेमाल यानी थिएटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए किया गया है।
प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों ही माध्यमों के लिए यह समय केवल तकनीकी बदलावों का नहीं, बल्कि नीतिगत सख्ती, जवाबदेही और नियंत्रण के नए ढांचे का संकेत दे रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
साल 2026 की दहलीज पर खड़ी भारतीय मीडिया इंडस्ट्री एक बार फिर बड़े बदलावों के दौर से गुजरने की तैयारी में है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों ही माध्यमों के लिए यह समय केवल तकनीकी बदलावों का नहीं, बल्कि नीतिगत सख्ती, जवाबदेही और नियंत्रण के नए ढांचे का संकेत दे रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई एकल या व्यापक नीति औपचारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल कंटेंट, ब्रॉडकास्टिंग और सोशल मीडिया को लेकर जो संकेत और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वे यह साफ करते हैं कि आने वाला साल मीडिया के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और OTT ने न केवल दर्शकों की आदतें बदली हैं, बल्कि कंटेंट के निर्माण, वितरण और निगरानी की पुरानी व्यवस्थाओं को भी अप्रासंगिक बना दिया है। सरकार अब इन्हीं बदलावों के अनुरूप नए नियम और कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।
2026 में मीडिया को लेकर सरकार का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल और ऑनलाइन कंटेंट पर नजर आता है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में संशोधन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है, जिसमें सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज पोर्टल, वीडियो प्लेटफॉर्म और OTT सेवाओं को अधिक सख्त दायरे में लाने की तैयारी है। खासतौर पर डीपफेक, AI-जनरेटेड वीडियो और भ्रामक कंटेंट को लेकर सरकार गंभीर है।
संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में AI या डीपफेक से बने कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य हो सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दर्शक असली और कृत्रिम रूप से बनाए गए कंटेंट के बीच अंतर कर सकें। इसके अलावा, शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने जैसी समय-सीमाएं भी तय की जा सकती हैं।
डिजिटल मीडिया के लिए इसका मतलब साफ है कि अब केवल खबर प्रकाशित करना या वीडियो अपलोड करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके स्रोत, सत्यता और तकनीकी प्रकृति की जिम्मेदारी भी प्लेटफॉर्म और पब्लिशर दोनों पर होगी।
टीवी और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के लिए भी 2026 अहम माना जा रहा है। सरकार पुराने केबल टेलीविजन कानून की जगह एक नए व्यापक ब्रॉडकास्टिंग कानून की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें पारंपरिक टीवी चैनलों के साथ-साथ डिजिटल स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं को भी शामिल किया जा सकता है।
इस प्रस्तावित ढांचे का मकसद सभी ब्रॉडकास्टिंग प्लेटफॉर्म के लिए एक समान नियम तय करना है- चाहे वह सैटेलाइट टीवी हो या इंटरनेट के जरिए चलने वाला न्यूज चैनल। इससे लाइसेंसिंग, कंटेंट गाइडलाइंस, विज्ञापन मानक और तकनीकी अनुपालन के नियम बदल सकते हैं।
मीडिया इंडस्ट्री का एक वर्ग इसे 'लेवल प्लेइंग फील्ड' के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा वर्ग आशंका जता रहा है कि इससे सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप का दायरा बढ़ सकता है।
2026 में मीडिया को लेकर सबसे बड़ी बहस स्वतंत्रता बनाम नियंत्रण की होगी। सरकार का तर्क है कि फेक न्यूज, अश्लील सामग्री और भ्रामक सूचनाओं से समाज को बचाने के लिए नियमन जरूरी है। लेकिन पत्रकारों और मीडिया संगठनों का कहना है कि अस्पष्ट परिभाषाओं वाले नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बना सकते हैं।
'अश्लील', 'हानिकारक' या 'भ्रामक' जैसे शब्दों की व्याख्या यदि स्पष्ट नहीं हुई, तो डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और स्वतंत्र पत्रकारों पर सेल्फ-सेंसरशिप का दबाव बढ़ सकता है। कई मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संवेदनशील और सत्ता से सवाल पूछने वाली पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है।
नियमों की सख्ती के साथ-साथ सरकार यह भी संकेत दे रही है कि वह मीडिया के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में सहयोगी भूमिका निभाना चाहती है। कौशल विकास, नई तकनीक को अपनाने और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर सरकार और उद्योग के बीच संवाद जारी है।
हालांकि यह स्पष्ट है कि सरकार सीधे आर्थिक सब्सिडी देने के बजाय नीति और प्लेटफॉर्म स्तर पर सहयोग को प्राथमिकता दे रही है। इसका लाभ उन मीडिया संस्थानों को मिल सकता है जो तकनीक-आधारित पत्रकारिता, डेटा जर्नलिज्म और मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट पर निवेश कर रहे हैं।
2026 की नीतियों का एक बड़ा असर मीडिया कंपनियों के खर्च और संचालन पर भी पड़ सकता है। नए अनुपालन नियम, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी निवेश छोटे और मध्यम डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए चुनौती बन सकते हैं। वहीं बड़े मीडिया हाउस, जिनके पास संसाधन और तकनीकी क्षमता है, वे इन बदलावों के साथ जल्दी तालमेल बिठा सकते हैं।
इससे मीडिया इंडस्ट्री में एक तरह का पुनर्संयोजन देखने को मिल सकता है, जहां छोटे प्लेटफॉर्म या तो विलय का रास्ता चुनें या अपनी रणनीति बदलें।
बच्चों की सुरक्षा
हाल ही में न्यायालयों की टिप्पणियों के बाद केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर अलग गाइडलाइंस लाने पर गंभीरता से विचार कर सकती है। मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया जैसे मॉडल पर विचार करना चाहिए, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त उम्र-आधारित नियम लागू किए गए हैं।
कोर्ट की चिंता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, अश्लील और भ्रामक कंटेंट तक आसान पहुंच, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन लत को लेकर है। इसी कड़ी में सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के प्रस्तावित नियमों में भी यह संकेत मिल चुका है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट खोलने पर माता-पिता की सहमति अनिवार्य की जा सकती है। यदि यह गाइडलाइंस लागू होती हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन, पैरेंटल कंट्रोल टूल्स और बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट फिल्टर जैसे अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे।
माना जा रहा है कि 2026 में डिजिटल और मीडिया नीतियों को लेकर होने वाले बदलावों के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में एक अहम मुद्दा बनकर उभरेगी।
कुल मिलाकर, 2026 भारतीय मीडिया के लिए केवल नियमों का साल नहीं होगा, बल्कि आत्ममंथन और पुनर्परिभाषा का दौर भी साबित हो सकता है। एक ओर जहां सरकार जवाबदेही और नियंत्रण पर जोर दे रही है, वहीं मीडिया के सामने यह चुनौती होगी कि वह स्वतंत्रता, विश्वसनीयता और नवाचार के बीच संतुलन बनाए।
यदि नियम पारदर्शी और स्पष्ट रहे, तो वे फेक न्यूज और गलत सूचना के खिलाफ एक मजबूत ढांचा खड़ा कर सकते हैं। लेकिन यदि अस्पष्टता और अत्यधिक नियंत्रण हावी हुआ, तो इसका असर स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक संवाद पर पड़ सकता है।
साल 2026 इसलिए अहम है क्योंकि यह तय करेगा कि भारत की मीडिया आने वाले दशक में किस दिशा में आगे बढ़ेगी- एक जिम्मेदार, तकनीक-सक्षम और विश्वसनीय मंच के रूप में या एक ऐसे क्षेत्र के रूप में जो लगातार नियामकीय दबाव से जूझता रहे।
अपनी बेबाकी और प्रयोगधर्मिता के लिए मशहूर वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अनुरंजन झा को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज इंडिया 24X7’ ने ग्लोबल की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक बड़ी नियुक्ति की है। इसके तहत चैनल ने वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा को यूरोप का रेजिडेंट एडिटर नियुक्त किया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अनुरंजन झा ने खुद इसकी पुष्टि की है।
बता दें कि लेखक और यूनाइटेड किंगडम की ‘Gandhian Peace Society’ के चेयरपर्सन अनुरंजन झा को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। मीडिया में अपनी बेबाकी और प्रयोगधर्मिता के लिए मशहूर अनुरंजन झा चंपारण, बिहार के एक छोटे-से गाँव फुलवरिया से आते हैं। पूर्व में वह ‘इंडिया न्यूज’ के न्यूज डायरेक्टर और 'सीएनईबी' के प्रधान संपादक व सीईओ रह चुके हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट अनुरंजन झा ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। मीडिया में उनके करियर की शुरुआत ‘जनसत्ता’ से हुई। फिर ‘जी न्यूज’, ‘आजतक’ होते हुए ‘इंडिया टीवी’ लॉन्च करने में मुख्य भूमिका निभाई। फिलहाल इंगलैंड में रहते हुए भारत-यूरोप संबंधों पर शोधरत हैं।
‘भारतिका’ के संस्थापक अनुरंजन झा ने बतौर लेखक अपनी किताब ‘रामलीला मैदान’ और ‘गांधी मैदान’ से सामाजिक-राजनीतिक सच्चाई उकेरी फिर ‘झूम’ से बिहार में शराबबंदी का सच बताया है। ‘हकीकत नगर’ उनका पहला उपन्यास है, जिसमें उन्होंने 90 के दशक के दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के जीवन, उनके सपने, प्रेम और इन सबके बीच बदलते देश की परिस्थितियों को छूने की कोशिश की है।
‘न्यूज इंडिया’ में अनुरंजन झा की नियुक्ति के बारे में चैनल के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राणा यशवंत का कहना है, ‘अनुरंजन झा दृष्टि संपन्न पत्रकार हैं। उनकी भूमिका न्यूज इंडिया की लोकप्रियता आम दर्शकों के बीच बढ़ाने में कारगर सिद्ध होगी।’
वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अनुरंजन झा ने लिखा है, ‘नए साल में एक नया कदम .. बड़े भाई @RanaYashwant1 जी का आदेश कैसे टाला जा सकता है .. शुक्रिया टीम @newsindia24x7_ । नव वर्ष शुभ हो।’
समाचार4मीडिया की ओर से अनुरंजन झा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।