भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है।
by
Vikas Saxena
2026 में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील है। वैश्विक रूप से पारंपरिक समाचार पत्रों की गिरती रुझान की बात हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दबदबे का सामना, यह इंडस्ट्री एक संवेदनशील संक्रमण काल से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है। आइए एक नजर डालते हैं विषय-वार वर्तमान तथ्यों और हाल के आंकड़ों के आधार पर प्रिंट मीडिया की स्थिति पर-
वैश्विक स्तर पर प्रिंट समाचार पत्र और पत्रिकाओं का मार्केट आज पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, लेकिन यह एक मंदी की ओर बढ़ता हुआ सेक्टर है। उदाहरण के लिए, Statista के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रिंट समाचारपत्र एवं मैगजीन का राजस्व लगभग USD 108.38 बिलियन रहने का अनुमान है, और 2025‑2030 के बीच इसका CAGR लगभग ‑3.05 % रहने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह मार्केट लगभग USD 92.85 बिलियन तक गिर सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व में समग्र गिरावट जारी रहेगी, न कि बड़ी वृद्धि।
इसी तरह, IBISWorld की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल न्यूजपेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री का राजस्व पिछले पांच वर्षों में CAGR ‑3.8 % की दर से घटा है, और आगे भी इस गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, मुख्यतः प्रिंट पाठकों और विज्ञापनदारों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट होने के कारण।
दूसरी ओर, कुछ मार्केट रिसर्च (जैसे Mordor Intelligence) थोड़ा अलग परिप्रेक्ष्य देता है कि विश्व के समाचार पत्र उद्योग का आकार 2025 में लगभग USD 82.17 बिलियन था और 2030 तक इसे लगभग USD 89.85 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि कुल मार्केट वैल्यू कुछ हद तक स्थिर या मामूली वृद्धि दिखा सकता है, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः डिजिटल और प्रीमियम मॉडल के जोड़ से है, न कि केवल पारंपरिक प्रिंट से।
इन आंकड़ों से वास्तविक और व्यापक निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रिंट मीडिया उद्योग प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन राजस्व दोनों में दबाव का सामना कर रहा है, और डिजिटल उपभोग तथा ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्टिंग की वजह से पारंपरिक राजस्व संरचना कमजोर हो रही है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडस्ट्री पूरी तरह समाप्त होने वाली है बल्कि वह समायोजन और संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल और प्रिंट का मिश्रण, सस्क्रिप्शन मॉडल और नए राजस्व स्रोत शामिल हैं।
भारत में प्रिंट मीडिया का हाल कुछ हद तक मजबूत और स्थिर दिख रहा है, जो दुनिया के रुझान से अलग है। WARC की रिपोर्ट के अनुसार भारत न्यूज ब्रैंड पर विज्ञापन खर्च में 6% सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है, जबकि विश्व स्तर पर न्यूज ब्रैंड विज्ञापन खर्च गिरने की प्रवृत्ति में है।
प्रिंट समाचार पत्रों की प्रतियां (सरकारी आंकड़ों के अनुसार) 2026 तक 139 मिलियन प्रतियों तक पहुंचने की संभावना रखती हैं, जो भारतीय बाजार को चीन के आगे दुनिया का सबसे बड़ा प्रिंट संस्करण पाठक बाज़ार बनाती है।
2026 के लिए भारत का विज्ञापन बाजार बढ़ने की उम्मीद में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल विज्ञापन राजस्व लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें प्रिंट विज्ञापन लगभग ₹17,090 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- लगभग 4.5% की वृद्धि के साथ।
इसका मतलब है कि भले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, प्रिंट अभी भी वित्तीय रूप से एक मजबूत आधार बना हुआ है। विशेष रूप से बड़े शहरों और राज्य स्तरीय अखबारों के लिए विज्ञापन राजस्व एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन की पकड़ धीरे‑धीरे बढ़ रही है, जो इंडस्ट्री के लिए संतुलित विकास का संकेत देती है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में की गई बढ़ोतरी ने प्रिंट मीडिया के लिए राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद की है। हालांकि प्रिंट में वृद्धि डिजिटल की तुलना में धीमी है, फिर भी यह माध्यम अभी भी पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसका महत्व कम नहीं होने वाला।
प्रिंट की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमत, इंपोर्ट शुल्क, वेतन वृद्धि, मुद्रास्फीति और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च (फ्यूल, लॉजिस्टिक्स) से आता है। इन इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रकाशकों पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे राजस्व और लाभ की मार्जिनें कम हुई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों तक पेपर पहुंचाने में लगने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में वृद्धि का बड़ा आधार इसी निरंतर लागत वृद्धि की चुनौती को मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लागतों का संतुलित समाधान नहीं मिला तो प्रिंट मीडिया के लिए लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रास्फीति के चलते अखबार की खुद की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य हो गई है, जिससे पाठकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है।
पाठक व्यवहार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा
भारत में पाठकों की खबरें पढ़ने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और इसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर दिखाई दे रहा है। डिजिटल मीडिया का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और आज डिजिटल विज्ञापन कुल विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले चुका है। इससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव तेजी से ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है, जिसका दबाव पारंपरिक प्रिंट मीडिया पर साफ नजर आता है।
युवा वर्ग की प्राथमिकताएं भी इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। नई पीढ़ी के पाठक खबरों के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज ऐप्स पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। त्वरित अपडेट, वीडियो कंटेंट और इंटरएक्टिव फॉर्मेट की वजह से युवा पाठकों को प्रिंट की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा आकर्षक लगते हैं, जिससे प्रिंट मीडिया की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।
हालांकि इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता और विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी अखबार को भरोसेमंद सूचना का स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत, स्थानीय खबरों की गहराई और तथ्यात्मक प्रस्तुति के कारण प्रिंट मीडिया अब भी बड़ी संख्या में पाठकों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।
डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियां
भारत के विविध भौगोलिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से छोटे मीडिया हाउसों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत और नेटवर्क विस्तार, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च और स्थानीय एजेंटों की कमी के कारण अखबार समय पर और किफायती तरीके से पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
इसके साथ ही शहरी इलाकों में भी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर दबाव बढ़ा है, जहां हाकर कमीशन और रिटर्न कॉपी का बोझ प्रकाशकों की लागत को और बढ़ा देता है। इन आवागमन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी खर्चीली व्यवस्थाओं को संतुलित करना आज हर प्रिंट प्रकाशक के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन चुका है।
2026 में स्थिति का निष्कर्ष
2026 में भारत का प्रिंट मीडिया विज्ञापन के मोर्चे पर सीमित लेकिन सकारात्मक स्थिरता की स्थिति में दिखाई देता है। सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी के चलते विज्ञापन राजस्व में हल्की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं, जिससे खासकर छोटे और मध्यम अखबारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि उसे तेज ग्रोथ कहा जा सके, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रिंट मीडिया के लिए एक सहारा जरूर बनी हुई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दबाव और ऑनलाइन न्यूज कंजम्पशन में तेजी के बावजूद प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय पकड़ बनी हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में पाठकों की वफादारी अभी भी मजबूत है, जहां अखबार न केवल सूचना का स्रोत है बल्कि भरोसे और आदत का हिस्सा भी है। यही कारण है कि पूरी तरह डिजिटल शिफ्ट के बावजूद प्रिंट मीडिया अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।
इसके साथ ही लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। कागज, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन की बढ़ती लागत के सामने विज्ञापन से होने वाली आय अकेले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई प्रकाशक मार्जिन के दबाव में काम कर रहे हैं और खर्च नियंत्रण उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।
सरकार की ओर से नीति समर्थन और दरों में सुधार की दिशा में कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभी और ठोस नीतियों की जरूरत है। कागज और प्रिंटिंग इनपुट्स पर कर राहत, टैक्स प्रोत्साहन, डिस्ट्रीब्यूशन और मुद्रण से जुड़ी सब्सिडी जैसे उपाय अगर लागू होते हैं, तो प्रिंट मीडिया आने वाले वर्षों में कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा।
भारत के बड़े प्रिंट मीडिया समूहों के हालिया वित्तीय नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि भले ही कुल रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही हो, लेकिन कॉस्ट कंट्रोल और मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के जरिए कई कंपनियां खुद को संतुलित रख पाने में सफल रही हैं। अखबार कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञापन से आता है, लेकिन प्रिंट विज्ञापनों की ग्रोथ धीमी होने के कारण मैनेजमेंट का फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी, पेज ऑप्टिमाइजेशन और एड रेट्स के बेहतर इस्तेमाल पर है। न्यूजप्रिंट, ट्रांसपोर्टेशन और मैनपावर की बढ़ती लागत ने मार्जिन पर दबाव डाला है, हालांकि सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी से कुछ राहत जरूर मिली है।
डिजिटल के मोर्चे पर लगभग सभी बड़े अखबार समूह अब इसे सहायक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि कोर बिजनेस मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ई-पेपर और सोशल मीडिया के जरिए रीडर एंगेजमेंट बढ़ाने पर खास जोर है। कई मीडिया हाउस डिजिटल सब्सक्रिप्शन, प्रीमियम कंटेंट और ब्रैंडेड कंटेंट जैसे मॉडल अपना रहे हैं, ताकि केवल विज्ञापन पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि डिजिटल से होने वाली कमाई अभी प्रिंट की भरपाई नहीं कर पा रही, लेकिन भविष्य की ग्रोथ का रास्ता यहीं से निकलता दिख रहा है।
आने वाले समय को देखते हुए प्रिंट मीडिया कंपनियां हाइब्रिड मॉडल को सबसे व्यावहारिक रास्ता मान रही हैं, जहां प्रिंट अपनी विश्वसनीयता और स्थानीय पकड़ बनाए रखेगा और डिजिटल उसकी पहुंच और विस्तार बढ़ाएगा। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के लिए यह रणनीति खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 का साल प्रिंट मीडिया के लिए केवल अस्तित्व बचाने का नहीं बल्कि खुद को नए रूप में ढालने का साल होगा, जहां कंटेंट की गुणवत्ता, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल का संतुलन सबसे अहम साबित होगा।
आने वाले समय में प्रिंट मीडिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत समेकन और डिजिटल एकीकरण की होगी। प्रिंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मजबूती से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि बदलती पाठक आदतों और विज्ञापन बाजार के बीच न तो पाठक छूटें और न ही विज्ञापनदाता। डिजिटल और प्रिंट के साझा मॉडल ही आगे चलकर इसकी प्रासंगिकता और पहुंच को बनाए रख सकते हैं।
इसी क्रम में सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। कई बड़े प्रकाशक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं, जहां पाठकों को प्रीमियम कंटेंट के साथ डिजिटल और प्रिंट का संयुक्त सब्सक्रिप्शन ऑफर किया जा रहा है। इससे एक तरफ नियमित और स्थिर आमदनी का रास्ता खुलता है और दूसरी तरफ गंभीर पाठकों से सीधा जुड़ाव भी मजबूत होता है।
स्थानीय सामग्री पर फोकस प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी स्थानीय खबरों की मांग मजबूत है, जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच और भरोसा दोनों सीमित हैं। यही स्थानीय पत्रकारिता भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का जीवंत आधार बनी हुई है, जिसे प्रिंट मीडिया आने वाले समय में और मजबूती दे सकता है।
सरकारी नीतियों की भूमिका भी इस भविष्य को तय करने में अहम होगी। विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी एक जरूरी कदम जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। GST में राहत, कागज के आयात शुल्क में सुधार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को सशक्त करने जैसे ठोस नीतिगत फैसले ही प्रिंट मीडिया को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं और इसे आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं।
2026 में प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है, बल्कि बदलते आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता व्यवहार के बीच एक मजबूती से संघर्षरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनी भूमिका बना रहा है। विश्लेषण यह संकेत देता है कि अगर यह डिजिटल और पारंपरिक रणनीतियों का सही मिश्रण अपनाता है और नीतिगत समर्थन के और कदम मिलते हैं, तो 2026 और उसके बाद यह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढाल सकता है।
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ मीडिया प्रोफेशनल राकेश शर्मा प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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Samachar4media Bureau
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (INS) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ मीडिया प्रोफेशनल राकेश शर्मा प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वह युवा पत्रकारों को संबोधित करेंगे और पत्रकारिता, मीडिया नेतृत्व तथा बदलते मीडिया परिदृश्य से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' देश के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का प्रमुख मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट कार्य के दम पर पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस अवसर पर देशभर से चयनित 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष समारोह का प्रमुख आकर्षण राकेश शर्मा का विशेष संबोधन होगा। मीडिया इंडस्ट्री में करीब 50 वर्षों का अनुभव रखने वाले राकेश शर्मा युवा पत्रकारों के साथ अपने लंबे पेशेवर सफर और मीडिया इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा करेंगे। वह पत्रकारिता की विश्वसनीयता, नेतृत्व, प्रिंट मीडिया की चुनौतियों, डिजिटल दौर में अवसरों और प्रोफेशनल ग्रोथ जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक होने के साथ-साथ उनके करियर को नई दिशा देने वाला भी होगा।
राकेश शर्मा भारतीय मीडिया इंडस्ट्री का एक जाना-पहचाना नाम हैं। हाल ही में उन्होंने इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (INS) के अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। वह ITV Network और Good Morning India Media Pvt. Ltd. में डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
राकेश शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत The Times of India से की, जहां उन्होंने करीब दस वर्षों तक काम किया। इसके बाद उन्होंने Hindustan Times में लंबे समय तक विभिन्न वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभालीं। इसी दौरान उन्होंने चंडीगढ़ से Hindustan Times के संस्करण की लॉन्चिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उत्तर भारत के कई एडिशनों का संचालन किया। पिछले करीब 15 वर्षों से वह ITV Network और Good Morning India Media Pvt. Ltd. से जुड़े हुए हैं।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
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कंपनी ने 15 नवंबर 2025 को मार्कंड नवनीतलाल अधिकारी के री-क्लासिफिकेशन के लिए दोनों स्टॉक एक्सचेंज में आवेदन किया था। अब 16 जुलाई 2026 को BSE और NSE ने इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया है
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Vikas Saxena
SAB Events & Governance Now Media Limited के प्रमोटर मार्कंड नवनीतलाल अधिकारी को 'प्रमोटर' कैटेगरी से 'पब्लिक' कैटेगरी में री-क्लासिफाई (पुनर्वर्गीकृत) करने का आवेदन बॉम्बे स्टॉक एकसचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने खारिज कर दिया है।
कंपनी ने बताया कि उसने 15 नवंबर 2025 को मार्कंड नवनीतलाल अधिकारी के री-क्लासिफिकेशन के लिए दोनों स्टॉक एक्सचेंजों में आवेदन किया था। अब 16 जुलाई 2026 को BSE और NSE ने इस आवेदन को अस्वीकार करने की जानकारी दी है।
स्टॉक एक्सचेंज ने अपने पत्र में कहा है कि सेबी (SEBI) के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशन के तहत, री-क्लासिफिकेशन चाहने वाले प्रमोटर और उनसे जुड़े लोगों का कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) में प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए। साथ ही वे कंपनी में की मैनेजेरियल पर्सनल (KMP) की भूमिका में भी नहीं होने चाहिए।
BSE और NSE ने बताया कि मार्कंड नवनीतलाल अधिकारी के बेटे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और कंपनी के बोर्ड में भी शामिल हैं। ऐसे में यह व्यवस्था सेबी के नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण उनके री-क्लासिफिकेशन के आवेदन पर विचार नहीं किया जा सका और उसे खारिज कर दिया गया।
श्वेता राय ने करीब तीन साल पहले ‘भारत 24’ को बाय बोलकर ‘विस्तार न्यूज’ जॉइन किया था। वह इस चैनल की फाउंडिंग टीम मेंबर हैं।
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Samachar4media Bureau
मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के प्रमुख न्यूज चैनल 'विस्तार न्यूज' (Vistaar News) ने टीवी पत्रकार श्वेता राय को प्रमोशन का तोहफा देते हुए एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर नियुक्त किया है। श्वेता राय ने करीब तीन साल पहले ‘भारत 24’ को बाय बोलकर ‘विस्तार न्यूज’ जॉइन किया था। वह इस चैनल की फाउंडिंग टीम मेंबर हैं। ‘भारत 24’ से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ में बतौर प्रोड्यूसर कार्यरत थीं।
‘एबीपी न्यूज’ में अपने करीब सात साल के सफर में श्वेता ने 'भारत की बात', 'ऑटो राजा', 'दिल्ली का बॉस कौन' और 'जनता जिंदाबाद' जैसे सफल शो बनाए। इसके बाद उन्होंने रुबिका लियाकत के साथ ‘भारत 24’ चैनल में नई पारी की शुरुआत की।
‘भारत 24’ के बाद श्वेता राय ‘विस्तार न्यूज’ के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहीं। शुरुआत से ही श्वेता राय ने ‘विस्तार न्यूज’ के आउटपुट सेक्शन को लीड किया है। श्वेता राय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर काफी सक्रिय रहती हैं। समसामयिक घटनाओं पर उनके पोस्ट देशभर में शेयर किए जाते हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से श्वेता राय को उनके प्रमोशन पर ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं।
गोदरेज एग्रोवेट (Godrej Agrovet) ने गौरव पांडे (Gaurav Pande) को Creamline Dairy Products Limited का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
एग्री-बिजनेस कंपनी गोदरेज एग्रोवेट (Godrej Agrovet) ने गौरव पांडे (Gaurav Pande) को क्रीमलाइन डेयरी प्रोडक्ट्स लिमिटेड (Creamline Dairy Products Limited) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) नियुक्त किया है। कंपनी के अनुसार, वह संगठन के अगले विकास चरण का नेतृत्व करेंगे और बाजार में नेतृत्व मजबूत करने, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, नवाचार तथा प्रमुख बाजारों में ब्रांड विस्तार पर विशेष ध्यान देंगे।
नई जिम्मेदारी संभालने पर गौरव पांडे (Gaurav Pande) ने कहा कि ऐसे समय में क्रीमलाइन डेयरी प्रोडक्ट्स (Creamline Dairy Products Limited) से जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है, जब भारत का डेयरी क्षेत्र उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग और गुणवत्ता व पोषण पर बढ़ते फोकस के कारण तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि गोदरेज जर्सी (Godrej Jersey) ब्रांड ने उपभोक्ताओं के बीच भरोसे की मजबूत नींव बनाई है। साथ ही कंपनी का एकीकृत डेयरी इकोसिस्टम (Integrated Dairy Ecosystem) उपभोक्ताओं के साथ-साथ डेयरी किसानों के जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
गौरव पांडे (Gaurav Pande) ने कहा कि वह कंपनी की अनुभवी टीम के साथ मिलकर नवाचार को गति देने, उपभोक्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाने, नए बाजारों में विस्तार करने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप डेयरी कारोबार विकसित करने की दिशा में काम करेंगे, ताकि सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का सृजन किया जा सके।
ब्रॉडबैंड और केबल टीवी सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway Limited के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरव बनर्जी 30 सितंबर 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे।
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Vikas Saxena
ब्रॉडबैंड और केबल टीवी सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway Limited के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरव बनर्जी 30 सितंबर 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे।
GTPL Hathway ने 15 जुलाई 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को भेजी सूचना में बताया कि सौरव बनर्जी, जो कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Chief Financial Officer) और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी (Key Managerial Personnel) हैं, सेवानिवृत्ति (Superannuation) की आयु पूरी करने के बाद 30 सितंबर 2026 को कारोबार समाप्त होने के साथ अपने पद से कार्यमुक्त हो जाएंगे।
सौरव बनर्जी ने नवंबर 2023 में GTPL Hathway के CFO के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले वह KEAN Construction में ग्रुप CFO के पद पर कार्यरत थे।
चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सौरव बनर्जी के पास 35 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने लग्जरी रिटेल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट और फार्मा जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है।
वे अपने करियर में कई बड़ी कंपनियों में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इनमें GSK Pharmaceuticals, The Times of India Group, Gati Ltd, Rosy Blue India और Tribhovandas Bhimji Zaveri (TBZ) जैसी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से Gati, Rosy Blue India और TBZ में भी उन्होंने CFO के रूप में काम किया।
सौरव बनर्जी को रणनीतिक योजना, फंड जुटाने, निवेशक संबंध (Investor Relations), जोखिम प्रबंधन, बोर्ड और ऑडिट समिति के साथ काम करने, वित्तीय नियंत्रण, कैश फ्लो मैनेजमेंट और बिजनेस विस्तार जैसे क्षेत्रों का व्यापक अनुभव है।
अपने पेशेवर विचारों में वह मानते हैं कि CFO की भूमिका केवल वित्त और अकाउंट्स तक सीमित नहीं होती, बल्कि संगठन के समग्र नेतृत्व और विकास में भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
फिलहाल GTPL Hathway ने उनके उत्तराधिकारी (Successor) के नाम की घोषणा नहीं की है। कंपनी से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में नए CFO की नियुक्ति को लेकर अलग से जानकारी साझा की जाएगी।
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार देश के वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर सुधीर चौधरी प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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Samachar4media Bureau
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार देश के वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने न्यूज एंकर सुधीर चौधरी प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वह युवा पत्रकारों को संबोधित करेंगे और पत्रकारिता के अपने तीन दशक से अधिक लंबे अनुभव के आधार पर सफलता के मूल मंत्र साझा करेंगे।
एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह 28 जुलाई को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' देश के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक प्रमुख मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट कार्य के दम पर पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस अवसर पर देशभर से चयनित 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी का विशेष संबोधन होगा। भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के सबसे चर्चित और प्रभावशाली चेहरों में शामिल सुधीर चौधरी अपने अनुभवों के जरिए युवा पत्रकारों को बदलते मीडिया परिदृश्य, निष्पक्ष पत्रकारिता, नेतृत्व, डिजिटल मीडिया की चुनौतियों और प्रोफेशनल ग्रोथ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक होने के साथ-साथ उनके करियर को नई दिशा देने वाला भी होगा।
सुधीर चौधरी भारतीय टीवी पत्रकारिता का एक जाना-माना नाम हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग, चुनावी कवरेज, बड़े राजनीतिक इंटरव्यू और प्राइम टाइम एंकरिंग के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही में उन्होंने डीडी न्यूज में कंसल्टिंग एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की है। इसके अलावा उनका प्राइम टाइम शो 'Decode with Sudhir Chaudhary' भी दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है।
पत्रकारिता में उनकी स्पष्ट प्रस्तुति, गहन विश्लेषण और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग ने उन्हें देश के सबसे विश्वसनीय पत्रकारों में शामिल किया है। यही वजह है कि आज भी लाखों दर्शक उनके कार्यक्रमों को नियमित रूप से देखते हैं और युवा पत्रकार उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के वरिष्ठ मीडिया पेशेवरों से सीखने और संवाद का अवसर भी प्रदान करता है।
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अगर आप भी इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं या इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
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TDSAT ने सृष्टि टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड को बड़ा झटका देते हुए मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) हैथवे डिजिटल लिमिटेड को 21.75 लाख रुपये का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।
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Samachar4media Bureau
दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय अधिकरण (TDSAT) ने कोलकाता की ब्रॉडकास्टिंग कंपनी सृष्टि टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड को बड़ा झटका देते हुए मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) हैथवे डिजिटल लिमिटेड को 21.75 लाख रुपये का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि इस रकम पर 9 फीसदी सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। कंपनी को यह भुगतान दो महीने के भीतर करना होगा।
लिखित समझौता खत्म होने के बाद भी जारी रहा कारोबार
TDSAT ने अपने 8 जुलाई के आदेश में कहा कि सिर्फ इसलिए कोई व्यावसायिक संबंध खत्म नहीं माना जा सकता क्योंकि लिखित समझौते की अवधि समाप्त हो गई हो। यदि दोनों पक्ष पहले की तरह सेवाएं देते और लेते रहे हैं, तो उसे भी वैध व्यावसायिक व्यवस्था माना जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 8 फरवरी 2019 को हुए एक समझौते (MoU) से जुड़ा है। इसके तहत हैथवे ने पश्चिम बंगाल में अपने केबल नेटवर्क पर 'सृष्टि टीवी' चैनल को प्रमोट और प्लेस करने की जिम्मेदारी ली थी।
समझौते के अनुसार, सृष्टि टेलीविजन को हर साल 28.80 लाख रुपये (टैक्स अलग) प्लेसमेंट शुल्क देना था। यह समझौता 1 फरवरी 2019 से 31 जनवरी 2020 तक के लिए था।
हैथवे का कहना था कि जनवरी 2020 में समझौता खत्म होने के बाद कोविड-19 महामारी के कारण सृष्टि टेलीविजन ने मौखिक रूप से सेवाएं जारी रखने का अनुरोध किया। इसके बाद भी हैथवे चैनल का प्रसारण और प्रमोशन करता रहा तथा नियमित रूप से बिल और भुगतान की याद दिलाने वाले ईमेल भेजता रहा।
हैथवे के मुताबिक, सृष्टि टेलीविजन ने कुछ भुगतान तो किए, लेकिन पूरी रकम नहीं चुकाई। कई बार याद दिलाने के बावजूद बकाया नहीं मिलने पर जुलाई 2020 में कानूनी नोटिस भेजा गया और बाद में 12 अगस्त 2020 को चैनल का प्रसारण बंद कर दिया गया।
सृष्टि टेलीविजन ने क्या कहा?
सृष्टि टेलीविजन ने माना कि जनवरी 2020 तक की अवधि का करीब 4.91 लाख रुपये बकाया था। हालांकि कंपनी का कहना था कि उसके बाद कोई नया लिखित समझौता नहीं हुआ, इसलिए अतिरिक्त प्लेसमेंट शुल्क देने की जिम्मेदारी उस पर नहीं बनती।
कंपनी ने यह भी दलील दी कि कोविड-19 के कारण भुगतान में देरी हुई और हैथवे की ओर से भेजे गए बिल या ईमेल अपने आप किसी पुराने समझौते को आगे नहीं बढ़ा सकते।
TDSAT ने क्यों दिया हैथवे के पक्ष में फैसला?
ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों के दस्तावेज, ईमेल, बिल और गवाहों के बयान देखने के बाद पाया कि हैथवे लगातार सेवाएं देता रहा और सृष्टि टेलीविजन उन सेवाओं का लाभ भी उठाता रहा।
न्यायमूर्ति राम कृष्ण गौतम ने कहा कि सृष्टि टेलीविजन हैथवे के दावों का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। उसने हैथवे के गवाह से जिरह भी नहीं की और कई ईमेल का जवाब भी नहीं दिया।
ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि मौखिक सहमति और दोनों पक्षों के व्यवहार से भी यह साबित हो सकता है कि कारोबारी संबंध जारी थे। ऐसे मामलों में केवल लिखित अनुबंध ही अंतिम आधार नहीं होता।
ब्याज की दर घटाई
हैथवे ने बकाया रकम पर 24 फीसदी सालाना ब्याज की मांग की थी, लेकिन TDSAT ने कोविड-19 के दौर और अपने पुराने फैसलों को ध्यान में रखते हुए इसे घटाकर 9 फीसदी सालाना साधारण ब्याज कर दिया।
इंडस्ट्री के लिए क्या है संदेश?
इस फैसले को ब्रॉडकास्टिंग और केबल डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी समझौते की अवधि खत्म होने के बाद भी सेवाएं पहले की तरह जारी रहती हैं और दोनों पक्ष उनका लाभ उठाते हैं, तो भुगतान की जिम्मेदारी बनी रहती है।
साथ ही, यह फैसला ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए भी एक सीख है कि किसी भी सेवा को आगे बढ़ाने के लिए समय रहते लिखित समझौते का नवीनीकरण कर लेना बेहतर होता है, ताकि भविष्य में इस तरह के कानूनी विवादों से बचा जा सके।
भारतीय मीडिया जगत के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल उदय शंकर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं।
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भारतीय मीडिया जगत के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल उदय शंकर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 16 सितंबर 1961 को जन्मे उदय शंकर ने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की थी और आज वह देश की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी JioStar के वाइस चेयरमैन हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने भारतीय न्यूज टीवी, मनोरंजन, खेल प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
पटना से शुरू हुआ सफर
उदय शंकर की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बिहार के पटना में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इतिहास में एमए और फिर एम.फिल. की पढ़ाई पूरी की। वह कई बार कह चुके हैं कि JNU ने उन्हें दुनिया को अलग नजरिए से देखना सिखाया, जिसका असर उनके पूरे करियर में दिखाई दिया।
पत्रकारिता से बनाई पहचान
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया में पटना से राजनीतिक संवाददाता के रूप में की। इसके बाद वह जी, SAB TV, होम टीवी, सहारा समय और स्टार न्यूज जैसे संस्थानों से जुड़े।
उदय शंकर उन लोगों में शामिल रहे जिन्होंने भारत के पहले 24 घंटे के हिंदी न्यूज चैनल आज तक की लॉन्चिंग टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीवी न्यूज में 'ब्रेकिंग न्यूज' की संस्कृति को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
स्टार इंडिया को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया
बाद में Star India के सीईओ के रूप में उन्होंने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में क्षेत्रीय कंटेंट, सामाजिक सरोकार वाले कार्यक्रम और खेल प्रसारण पर खास फोकस किया गया, जिससे नेटवर्क की पहुंच 70 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच गई।
उनके सबसे बड़े फैसलों में से एक था आईपीएल के प्रसारण और डिजिटल अधिकार 16,347 करोड़ रुपये में खरीदना। उस समय इस फैसले पर सवाल उठे थे, लेकिन बाद में यही कदम भारतीय क्रिकेट और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग के इतिहास का सबसे सफल निवेश साबित हुआ।
Hotstar और OTT क्रांति के सूत्रधार
उदय शंकर के नेतृत्व में Hotstar लॉन्च किया गया, जिसने भारत में OTT प्लेटफॉर्म की नई शुरुआत की। 2019 में Disney द्वारा 21st Century Fox के अधिग्रहण के बाद वह The Walt Disney Company Asia Pacific के प्रेसिडेंट और Star & Disney India के चेयरमैन बने।
साल 2020 में उन्होंने Disney+ Hotstar की शुरुआत कराई, जो लॉन्च के समय ही देश का सबसे बड़ा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बन गया। बाद में इसकी शुरुआत इंडोनेशिया समेत एशिया-प्रशांत के कई देशों में भी हुई।
Bodhi Tree से JioStar तक
अक्टूबर 2020 में उन्होंने डिज्नी छोड़कर नया सफर शुरू किया। 2021 में उन्होंने जेम्स मर्डोक के साथ मिलकर Bodhi Tree Systems की स्थापना की। इस कंपनी ने 2022 में Viacom18 में बड़ा निवेश किया, जिससे JioCinema को तेजी से विस्तार मिला।
फरवरी 2024 में रिलायंस इंडस्ट्रीज और द वॉल्ट डिज्नी कंपनी ने Viacom18 और Star India के विलय का ऐलान किया। इस संयुक्त कंपनी JioStar की चेयरपर्सन नीता अंबानी बनीं, जबकि उदय शंकर को वाइस चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आज संभाल रहे हैं सबसे बड़ी जिम्मेदारी
वर्तमान में उदय शंकर JioStar के टीवी, स्ट्रीमिंग, स्पोर्ट्स और ब्रॉडकास्ट कारोबार की रणनीति तैयार कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में JioHotstar दुनिया के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स में अपनी जगह बना चुका है। मई 2025 में उन्होंने घोषणा की थी कि JioStar अगले तीन वर्षों में कंटेंट पर 10 अरब डॉलर (करीब 83 हजार करोड़ रुपये) का निवेश करेगा।
मीडिया नीति में भी निभाई अहम भूमिका
उदय शंकर केवल एक सफल मीडिया एग्जिक्यूटिव ही नहीं, बल्कि मीडिया नीति से जुड़े महत्वपूर्ण चेहरों में भी रहे हैं। वह इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (IBF) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह FICCI के भी अध्यक्ष रहे, जहां इस पद तक पहुंचने वाले वह मीडिया इंडस्ट्री के चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं।
वह Kotak Mahindra Bank, GE Shipping समेत कई बड़ी कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। हाल ही में उन्हें US-India Strategic Partnership Forum के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी जगह मिली है।
कई बड़े सम्मान से नवाजे गए
उदय शंकर को 2015 में Forbes India Leadership Award से सम्मानित किया गया। वहीं India Today ने 2019 में उन्हें देश के 50 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था। वह इस सूची में जगह बनाने वाले इकलौते मीडिया एग्जिक्यूटिव थे। इसके अलावा उन्हें Impact Person of the Decade सम्मान भी मिल चुका है।
भारतीय मीडिया जगत में उदय शंकर को उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है, जिन्होंने समय के साथ सिर्फ बदलाव नहीं देखा, बल्कि अपनी दूरदर्शिता और फैसलों से मीडिया इंडस्ट्री की दिशा भी तय की। उनके जन्मदिन पर मीडिया जगत के कई लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे हर फिल्म के साथ उसकी एक्सेसिबिलिटी की जानकारी वेबसाइट और ऐप पर दिखाएं।
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Samachar4media Bureau
अब ऑनलाइन फिल्म टिकट बुक करते समय दर्शकों को यह भी पता चल सकेगा कि जिस फिल्म को वे देखने जा रहे हैं, उसमें दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सभी ऑनलाइन मूवी टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म और टिकट एग्रीगेटर्स को निर्देश दिया है कि वे हर फिल्म के साथ उसकी एक्सेसिबिलिटी (Accessibility) से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट रूप से दिखाएं।
मंत्रालय ने 9 जुलाई को इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है। यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के 19 फरवरी के एक आदेश के बाद उठाया गया है। यह मामला दृष्टिबाधित अधिवक्ता राहुल बजाज द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से कहा था कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे दिव्यांगजन टिकट खरीदने से पहले ही जान सकें कि संबंधित फिल्म में उनके लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। इसी आदेश के अनुपालन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स से कहा है कि वे अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर ऐसा सिस्टम विकसित करें, जिससे हर फिल्म के साथ उसकी एक्सेसिबिलिटी संबंधी जानकारी आसानी से दिखाई दे।
नई व्यवस्था के तहत दर्शकों को टिकट बुक करने से पहले यह जानकारी मिलनी चाहिए कि फिल्म में ऑडियो डिस्क्रिप्शन (Audio Description), क्लोज्ड कैप्शन (Closed Captions), सेम लैंग्वेज कैप्शनिंग, इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) या दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध अन्य सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।
अगर ये सुविधाएं सीधे सिनेमाघर में उपलब्ध नहीं हैं और किसी अलग ऐप या प्लेटफॉर्म के जरिए दी जा रही हैं, तो टिकट बुकिंग पेज पर उस ऐप या प्लेटफॉर्म का नाम भी स्पष्ट रूप से बताना होगा।
मंत्रालय ने सभी ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स को इस व्यवस्था को सात दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इससे दिव्यांगजन फिल्म देखने का फैसला पहले से बेहतर तरीके से कर सकेंगे और उन्हें टिकट बुक करते समय जरूरी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
यह एडवाइजरी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की गई है और इसकी एक प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को भी भेजी गई है।
माना जा रहा है कि इस पहल से देश में सिनेमा को और अधिक समावेशी (Inclusive) बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब फिल्म की टाइमिंग और सीटों की उपलब्धता के साथ-साथ एक्सेसिबिलिटी से जुड़ी जानकारी भी दर्शकों के लिए आसानी से उपलब्ध होगी, जिससे खासकर दिव्यांगजन बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरत के अनुसार फिल्म चुन सकेंगे।
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार जी न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राहुल सिन्हा प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
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Samachar4media Bureau
मीडिया जगत के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' में इस बार जी न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राहुल सिन्हा प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वह युवा पत्रकारों को संबोधित करेंगे और पत्रकारिता के अपने 26 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर सफलता के मूल मंत्र साझा करेंगे।
एक्सचेंज4मीडिया समूह की हिंदी वेबसाइट समाचार4मीडिया की ओर से आयोजित यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं।
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' देश के उन युवा पत्रकारों को सम्मानित करने का एक प्रमुख मंच है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और बेहतरीन काम के दम पर पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस अवसर पर देशभर से चयनित 40 प्रतिभाशाली युवा पत्रकारों को सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राहुल सिन्हा का विशेष संबोधन होगा। पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले राहुल सिन्हा बदलते मीडिया परिदृश्य, न्यूज़रूम की चुनौतियों, नेतृत्व और डिजिटल दौर में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा करेंगे। उनका संबोधन युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणादायक होने के साथ-साथ उनके करियर को नई दिशा देने वाला भी होगा।
राहुल सिन्हा वर्तमान में जी न्यूज में मैनेजिंग एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले वह टीवी9 भारतवर्ष में इनपुट एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अगस्त 2020 में जी न्यूज में अपनी 18 वर्षों की लंबी पारी के बाद टीवी9 भारतवर्ष का रुख किया था। बाद में उन्होंने एक बार फिर जी न्यूज में वापसी की और अब चैनल के मैनेजिंग एडिटर के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले राहुल सिन्हा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'वीर अर्जुन' अखबार से की थी। इसके बाद उन्होंने टीवी पत्रकारिता की ओर कदम बढ़ाया और जैन टीवी, सहारा समय, जी न्यूज और टीवी9 भारतवर्ष जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई बड़े राष्ट्रीय और राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है।
युवा पत्रकारों के लिए खास मंच
'समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40 अंडर 40' ऐसा मंच है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के उन पत्रकारों को पहचान और सम्मान देता है, जिन्होंने अपने काम से मीडिया जगत में नई मिसाल कायम की है। यह मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें देश के वरिष्ठ मीडिया पेशेवरों से सीखने और संवाद का अवसर भी प्रदान करता है।
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अगर आप भी इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं या इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
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