भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है।
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Vikas Saxena
2026 में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील है। वैश्विक रूप से पारंपरिक समाचार पत्रों की गिरती रुझान की बात हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दबदबे का सामना, यह इंडस्ट्री एक संवेदनशील संक्रमण काल से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है। आइए एक नजर डालते हैं विषय-वार वर्तमान तथ्यों और हाल के आंकड़ों के आधार पर प्रिंट मीडिया की स्थिति पर-
वैश्विक स्तर पर प्रिंट समाचार पत्र और पत्रिकाओं का मार्केट आज पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, लेकिन यह एक मंदी की ओर बढ़ता हुआ सेक्टर है। उदाहरण के लिए, Statista के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रिंट समाचारपत्र एवं मैगजीन का राजस्व लगभग USD 108.38 बिलियन रहने का अनुमान है, और 2025‑2030 के बीच इसका CAGR लगभग ‑3.05 % रहने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह मार्केट लगभग USD 92.85 बिलियन तक गिर सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व में समग्र गिरावट जारी रहेगी, न कि बड़ी वृद्धि।
इसी तरह, IBISWorld की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल न्यूजपेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री का राजस्व पिछले पांच वर्षों में CAGR ‑3.8 % की दर से घटा है, और आगे भी इस गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, मुख्यतः प्रिंट पाठकों और विज्ञापनदारों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट होने के कारण।
दूसरी ओर, कुछ मार्केट रिसर्च (जैसे Mordor Intelligence) थोड़ा अलग परिप्रेक्ष्य देता है कि विश्व के समाचार पत्र उद्योग का आकार 2025 में लगभग USD 82.17 बिलियन था और 2030 तक इसे लगभग USD 89.85 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि कुल मार्केट वैल्यू कुछ हद तक स्थिर या मामूली वृद्धि दिखा सकता है, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः डिजिटल और प्रीमियम मॉडल के जोड़ से है, न कि केवल पारंपरिक प्रिंट से।
इन आंकड़ों से वास्तविक और व्यापक निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रिंट मीडिया उद्योग प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन राजस्व दोनों में दबाव का सामना कर रहा है, और डिजिटल उपभोग तथा ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्टिंग की वजह से पारंपरिक राजस्व संरचना कमजोर हो रही है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडस्ट्री पूरी तरह समाप्त होने वाली है बल्कि वह समायोजन और संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल और प्रिंट का मिश्रण, सस्क्रिप्शन मॉडल और नए राजस्व स्रोत शामिल हैं।
भारत में प्रिंट मीडिया का हाल कुछ हद तक मजबूत और स्थिर दिख रहा है, जो दुनिया के रुझान से अलग है। WARC की रिपोर्ट के अनुसार भारत न्यूज ब्रैंड पर विज्ञापन खर्च में 6% सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है, जबकि विश्व स्तर पर न्यूज ब्रैंड विज्ञापन खर्च गिरने की प्रवृत्ति में है।
प्रिंट समाचार पत्रों की प्रतियां (सरकारी आंकड़ों के अनुसार) 2026 तक 139 मिलियन प्रतियों तक पहुंचने की संभावना रखती हैं, जो भारतीय बाजार को चीन के आगे दुनिया का सबसे बड़ा प्रिंट संस्करण पाठक बाज़ार बनाती है।
2026 के लिए भारत का विज्ञापन बाजार बढ़ने की उम्मीद में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल विज्ञापन राजस्व लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें प्रिंट विज्ञापन लगभग ₹17,090 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- लगभग 4.5% की वृद्धि के साथ।
इसका मतलब है कि भले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, प्रिंट अभी भी वित्तीय रूप से एक मजबूत आधार बना हुआ है। विशेष रूप से बड़े शहरों और राज्य स्तरीय अखबारों के लिए विज्ञापन राजस्व एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन की पकड़ धीरे‑धीरे बढ़ रही है, जो इंडस्ट्री के लिए संतुलित विकास का संकेत देती है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में की गई बढ़ोतरी ने प्रिंट मीडिया के लिए राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद की है। हालांकि प्रिंट में वृद्धि डिजिटल की तुलना में धीमी है, फिर भी यह माध्यम अभी भी पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसका महत्व कम नहीं होने वाला।
प्रिंट की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमत, इंपोर्ट शुल्क, वेतन वृद्धि, मुद्रास्फीति और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च (फ्यूल, लॉजिस्टिक्स) से आता है। इन इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रकाशकों पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे राजस्व और लाभ की मार्जिनें कम हुई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों तक पेपर पहुंचाने में लगने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में वृद्धि का बड़ा आधार इसी निरंतर लागत वृद्धि की चुनौती को मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लागतों का संतुलित समाधान नहीं मिला तो प्रिंट मीडिया के लिए लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रास्फीति के चलते अखबार की खुद की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य हो गई है, जिससे पाठकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है।
पाठक व्यवहार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा
भारत में पाठकों की खबरें पढ़ने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और इसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर दिखाई दे रहा है। डिजिटल मीडिया का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और आज डिजिटल विज्ञापन कुल विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले चुका है। इससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव तेजी से ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है, जिसका दबाव पारंपरिक प्रिंट मीडिया पर साफ नजर आता है।
युवा वर्ग की प्राथमिकताएं भी इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। नई पीढ़ी के पाठक खबरों के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज ऐप्स पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। त्वरित अपडेट, वीडियो कंटेंट और इंटरएक्टिव फॉर्मेट की वजह से युवा पाठकों को प्रिंट की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा आकर्षक लगते हैं, जिससे प्रिंट मीडिया की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।
हालांकि इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता और विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी अखबार को भरोसेमंद सूचना का स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत, स्थानीय खबरों की गहराई और तथ्यात्मक प्रस्तुति के कारण प्रिंट मीडिया अब भी बड़ी संख्या में पाठकों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।
डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियां
भारत के विविध भौगोलिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से छोटे मीडिया हाउसों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत और नेटवर्क विस्तार, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च और स्थानीय एजेंटों की कमी के कारण अखबार समय पर और किफायती तरीके से पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
इसके साथ ही शहरी इलाकों में भी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर दबाव बढ़ा है, जहां हाकर कमीशन और रिटर्न कॉपी का बोझ प्रकाशकों की लागत को और बढ़ा देता है। इन आवागमन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी खर्चीली व्यवस्थाओं को संतुलित करना आज हर प्रिंट प्रकाशक के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन चुका है।
2026 में स्थिति का निष्कर्ष
2026 में भारत का प्रिंट मीडिया विज्ञापन के मोर्चे पर सीमित लेकिन सकारात्मक स्थिरता की स्थिति में दिखाई देता है। सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी के चलते विज्ञापन राजस्व में हल्की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं, जिससे खासकर छोटे और मध्यम अखबारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि उसे तेज ग्रोथ कहा जा सके, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रिंट मीडिया के लिए एक सहारा जरूर बनी हुई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दबाव और ऑनलाइन न्यूज कंजम्पशन में तेजी के बावजूद प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय पकड़ बनी हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में पाठकों की वफादारी अभी भी मजबूत है, जहां अखबार न केवल सूचना का स्रोत है बल्कि भरोसे और आदत का हिस्सा भी है। यही कारण है कि पूरी तरह डिजिटल शिफ्ट के बावजूद प्रिंट मीडिया अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।
इसके साथ ही लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। कागज, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन की बढ़ती लागत के सामने विज्ञापन से होने वाली आय अकेले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई प्रकाशक मार्जिन के दबाव में काम कर रहे हैं और खर्च नियंत्रण उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।
सरकार की ओर से नीति समर्थन और दरों में सुधार की दिशा में कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभी और ठोस नीतियों की जरूरत है। कागज और प्रिंटिंग इनपुट्स पर कर राहत, टैक्स प्रोत्साहन, डिस्ट्रीब्यूशन और मुद्रण से जुड़ी सब्सिडी जैसे उपाय अगर लागू होते हैं, तो प्रिंट मीडिया आने वाले वर्षों में कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा।
भारत के बड़े प्रिंट मीडिया समूहों के हालिया वित्तीय नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि भले ही कुल रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही हो, लेकिन कॉस्ट कंट्रोल और मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के जरिए कई कंपनियां खुद को संतुलित रख पाने में सफल रही हैं। अखबार कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञापन से आता है, लेकिन प्रिंट विज्ञापनों की ग्रोथ धीमी होने के कारण मैनेजमेंट का फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी, पेज ऑप्टिमाइजेशन और एड रेट्स के बेहतर इस्तेमाल पर है। न्यूजप्रिंट, ट्रांसपोर्टेशन और मैनपावर की बढ़ती लागत ने मार्जिन पर दबाव डाला है, हालांकि सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी से कुछ राहत जरूर मिली है।
डिजिटल के मोर्चे पर लगभग सभी बड़े अखबार समूह अब इसे सहायक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि कोर बिजनेस मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ई-पेपर और सोशल मीडिया के जरिए रीडर एंगेजमेंट बढ़ाने पर खास जोर है। कई मीडिया हाउस डिजिटल सब्सक्रिप्शन, प्रीमियम कंटेंट और ब्रैंडेड कंटेंट जैसे मॉडल अपना रहे हैं, ताकि केवल विज्ञापन पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि डिजिटल से होने वाली कमाई अभी प्रिंट की भरपाई नहीं कर पा रही, लेकिन भविष्य की ग्रोथ का रास्ता यहीं से निकलता दिख रहा है।
आने वाले समय को देखते हुए प्रिंट मीडिया कंपनियां हाइब्रिड मॉडल को सबसे व्यावहारिक रास्ता मान रही हैं, जहां प्रिंट अपनी विश्वसनीयता और स्थानीय पकड़ बनाए रखेगा और डिजिटल उसकी पहुंच और विस्तार बढ़ाएगा। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के लिए यह रणनीति खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 का साल प्रिंट मीडिया के लिए केवल अस्तित्व बचाने का नहीं बल्कि खुद को नए रूप में ढालने का साल होगा, जहां कंटेंट की गुणवत्ता, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल का संतुलन सबसे अहम साबित होगा।
आने वाले समय में प्रिंट मीडिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत समेकन और डिजिटल एकीकरण की होगी। प्रिंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मजबूती से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि बदलती पाठक आदतों और विज्ञापन बाजार के बीच न तो पाठक छूटें और न ही विज्ञापनदाता। डिजिटल और प्रिंट के साझा मॉडल ही आगे चलकर इसकी प्रासंगिकता और पहुंच को बनाए रख सकते हैं।
इसी क्रम में सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। कई बड़े प्रकाशक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं, जहां पाठकों को प्रीमियम कंटेंट के साथ डिजिटल और प्रिंट का संयुक्त सब्सक्रिप्शन ऑफर किया जा रहा है। इससे एक तरफ नियमित और स्थिर आमदनी का रास्ता खुलता है और दूसरी तरफ गंभीर पाठकों से सीधा जुड़ाव भी मजबूत होता है।
स्थानीय सामग्री पर फोकस प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी स्थानीय खबरों की मांग मजबूत है, जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच और भरोसा दोनों सीमित हैं। यही स्थानीय पत्रकारिता भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का जीवंत आधार बनी हुई है, जिसे प्रिंट मीडिया आने वाले समय में और मजबूती दे सकता है।
सरकारी नीतियों की भूमिका भी इस भविष्य को तय करने में अहम होगी। विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी एक जरूरी कदम जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। GST में राहत, कागज के आयात शुल्क में सुधार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को सशक्त करने जैसे ठोस नीतिगत फैसले ही प्रिंट मीडिया को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं और इसे आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं।
2026 में प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है, बल्कि बदलते आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता व्यवहार के बीच एक मजबूती से संघर्षरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनी भूमिका बना रहा है। विश्लेषण यह संकेत देता है कि अगर यह डिजिटल और पारंपरिक रणनीतियों का सही मिश्रण अपनाता है और नीतिगत समर्थन के और कदम मिलते हैं, तो 2026 और उसके बाद यह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढाल सकता है।
मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बता दें कि NBDA वर्तमान में देश के प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स का शीर्ष संगठन है।
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Samachar4media Bureau
‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ (NBDA) ने ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को वर्ष 2026-27 के लिए सर्वसम्मति से फिर प्रेजिडेंट चुना है। मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बता दें कि NBDA वर्तमान में देश के प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स का शीर्ष संगठन है। इसके 29 प्रमुख न्यूज और करेंट अफेयर्स ब्रॉडकास्टर्स सदस्य हैं, जिनके तहत 136 न्यूज चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इससे पहले NBDA की 19वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में MM TV Ltd. का प्रतिनिधित्व करने वाले जयंत एम मैथ्यू का बोर्ड में स्वागत किया गया। उन्हें NBDA के बोर्ड में नियुक्त किया गया है।
इसी बैठक में ‘टाइम्स ग्रुप’ की डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसी एंड कंटेंट एश्योरेंस) रचना बर्मन और ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ की ग्रुप जनरल काउंसल क्षिप्रा जटाना को NBDA का स्थायी निदेशक बनाया गया।
NBDA बोर्ड के अन्य सदस्य
आईसीसी चेयरमैन जय शाह के जन्मदिन पर उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रमुख फैसलों और महिला क्रिकेट, टेस्ट क्रिकेट तथा वैश्विक क्रिकेट से जुड़े बदलावों पर नजर डालते हैं।
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Samachar4media Bureau
आज क्रिकेट जगत, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (International Cricket Council) के चेयरमैन जय शाह (Jay Shah) का जन्मदिन मना रहा है। जय शाह पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) यानी बीसीसीआई (BCCI) के सचिव रहे और अब आईसीसी के सबसे कम उम्र के चेयरमैन हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट में पे पैरिटी पॉलिसी (Pay Parity Policy) लागू की गई, जिसके तहत भारतीय महिला क्रिकेटरों को पुरुष क्रिकेटरों के बराबर मैच फीस देने का फैसला किया गया। यह भारतीय खेलों में इस तरह का पहला कदम बताया गया।
जय शाह के कार्यकाल में महिला प्रीमियर लीग (Women’s Premier League) की शुरुआत भी हुई। लंबे समय से चर्चा में रही इस लीग की शुरुआत के बाद इसमें ब्रॉडकास्ट डील्स (Broadcast Deals), फ्रेंचाइजी निवेश और दर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली।
टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए टेस्ट क्रिकेट इंसेंटिव स्कीम (Test Cricket Incentive Scheme) भी शुरू की गई। इसके तहत भारतीय टेस्ट सीजन में खेलने वाले खिलाड़ियों की मैच फीस में बढ़ोतरी की गई। इसका उद्देश्य लंबे फॉर्मेट के प्रति खिलाड़ियों की दिलचस्पी बनाए रखना था।
बीसीसीआई में उनके कार्यकाल के दौरान घरेलू खिलाड़ियों की सैलरी और प्राइज मनी (Prize Money) में बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) का निर्माण और कोविड-19 महामारी के दौरान आईपीएल (IPL) का बायो-सिक्योर आयोजन भी हुआ।
एशियन क्रिकेट काउंसिल (Asian Cricket Council) के अध्यक्ष के तौर पर जय शाह ने एशिया कप (Asia Cup) को मजबूत मल्टी-वेन्यू टूर्नामेंट के तौर पर आगे बढ़ाने और एशिया में क्रिकेट के विस्तार पर भी काम किया।
दिसंबर 2024 में आईसीसी चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालने के बाद जय शाह ने वैश्विक स्तर पर क्रिकेट को लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक (Los Angeles 2028 Olympics) में वापस लाने की दिशा में काम किया। इसके साथ ही इंटरनेशनल क्रिकेट में टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन (Technology Integration) और कैलेंडर रिफॉर्म (Calendar Reform) से जुड़े प्रयास भी जारी रहे।
पूर्व में सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18), रॉयटर्स (Reuters), टाइम्स नाउ (Times Now) और बिजनेस टुडे (Business Today) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं आकाशदीप
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स्टार्टअप पॉलिसी फोरम (SPF) ने आकाशदीप बरुआ को अपना कम्युनिकेशंस लीड नियुक्त किया है। SPF में अपनी नई भूमिका में आकाशदीप सोशल मीडिया, कम्युनिकेशंस और मीडिया रिलेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही वह संगठन के वर्कफ्लो में AI के इस्तेमाल को बढ़ाने और SPF के पॉलिसी पक्ष को प्रमुख ऑडियंस तक पहुंचाने का काम भी करेंगे।
आकाशदीप को प्रमुख न्यूजरूम्स में काम करने का सात साल से अधिक का अनुभव है। पूर्व में उन्होंने सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18), रॉयटर्स (Reuters), टाइम्स नाउ (Times Now) और बिजनेस टुडे (Business Today) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।
स्टार्टअप पॉलिसी फोरम की प्रेजिडेंट और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) श्वेता राजपाल कोहली ने आकाशदीप की नियुक्ति पर कहा कि वह न्यूजरूम के अनुभव और प्रोडक्ट-ग्रोथ माइंडसेट का अनोखा मेल लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि SPF को ऐसी कम्युनिकेशंस व्यवस्था की जरूरत है, जो गुणवत्ता से समझौता किए बिना तेजी और बड़े स्तर पर काम कर सके।
वहीं, आकाशदीप बरुआ ने कहा कि SPF पॉलिसी और उसके द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले स्टार्टअप्स के बीच एक नई दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह इस काम को उन लोगों तक पहुंचाने के तरीके को आकार देने के लिए उत्साहित हैं, जिन तक यह पहुंचना जरूरी है।
शो में चुनावों से पहले देश की बड़ी राजनीतिक खबरों और मुद्दों पर होगी चर्चा, लॉन्च एपिसोड में IIT Bombay, DUSU, ‘छात्रों की गूंज’ और उत्तर प्रदेश में बुलडोजर स्वागत जैसे विषय शामिल होंगे।
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जानी-मानी टीवी पत्रकार और NDTV की मैनेजिंग एडिटर पद्मजा जोशी जल्द ही दर्शकों के लिए नया साप्ताहिक राजनीतिक शो ‘Politics Zindabad’ लेकर आ रही हैं। इसकी जानकारी उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के जरिए साझा की है।
पद्मजा जोशी ने अपने पोस्ट में बताया कि यह नया शो चुनावों की ओर बढ़ते देश के राजनीतिक माहौल के बीच बड़ी राजनीतिक खबरों और घटनाक्रमों पर केंद्रित होगा। इसका प्रसारण हर शुक्रवार रात 8 बजे किया जाएगा।
पद्मजा जोशी ने बताया कि शो का विशेष लॉन्च एपिसोड इसी सप्ताह प्रसारित होगा। इस एपिसोड में IIT Bombay, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU), ‘छात्रों की गूंज’ और उत्तर प्रदेश में बुलडोजर स्वागत जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
#PoliticsZindabad debuts this week.
— Padmaja Joshi (@PadmajaJoshi) September 21, 2026
Pure politics.
Every Friday
8 pm
A special launch episode today, where we talk of IIT Bombay, DUSU, Chhatron ki Goonj and a bulldozer welcome in Uttar Pradesh. pic.twitter.com/HYPkFHy2FR
बता दें कि पद्मजा जोशी ने पिछले वर्ष NDTV में बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी नई पारी शुरू की थी। इसके साथ ही वह NDTV 24x7 पर प्राइम टाइम एंकरिंग की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। इससे पहले वह TV9 Network में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में कार्यरत थीं। अपने लंबे पत्रकारिता करियर में वह स्टार न्यूज (अब एबीपी न्यूज), हेडलाइंस टुडे, टाइम्स नाउ और TV9 Network जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में मनीष सिंघल का सफर उद्यमिता, दर्शकों की पसंद को समझने और स्थापित खिलाड़ियों को चुनौती देने के साहस की कहानी है।
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Samachar4media Bureau
भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में मनीष सिंघल का सफर उद्यमिता, दर्शकों की पसंद को समझने और स्थापित खिलाड़ियों को चुनौती देने के साहस की कहानी है। हाल ही में Enterr10 Television के संस्थापक मनीष सिंघल का जन्मदिन था। इस मौके पर 'दंगल टीवी' की सफलता के पीछे की सोच और विजन को याद किया गया।
मनीष सिंघल ने 2004 में इंदौर से Enterr10 Television की शुरुआत की। उन्होंने इसके लिए मुंबई और दिल्ली जैसे देश के पारंपरिक मीडिया केंद्रों से अलग इंदौर को चुना। शुरुआत में यह कारोबार उनके शॉपिंग और टेली-कॉमर्स बिजनेस के विस्तार के तौर पर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक बड़े टेलीविजन कारोबार में बदल गया।
2009 में लॉन्च हुआ 'दंगल टीवी'
इस सफर में सबसे बड़ा मोड़ 2009 में 'दंगल टीवी' के लॉन्च के साथ आया। शुरुआत में 'दंगल' एक भोजपुरी फिल्म चैनल था। इसके बाद 2015 में इसे हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) के रूप में पेश किया गया। यह बदलाव दिखाता है कि मनीष सिंघल दर्शकों की बदलती पसंद को समझने और हिंदी भाषी दर्शकों के लिए अलग तरह का कंटेंट तैयार करने में सक्षम रहे।
'दंगल' ने पारिवारिक ड्रामा, पौराणिक कथाओं और क्राइम आधारित कार्यक्रमों के जरिए धीरे-धीरे अपनी मजबूत ऑडियंस बनाई। चैनल की पहुंच शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण बाजारों तक बनी। इसकी सफलता ने उस पुरानी धारणा को भी चुनौती दी कि हिंदी एंटरटेनमेंट की दुनिया में सिर्फ पुराने बड़े ब्रॉडकास्टर्स, बड़े बजट और महानगरों से चलने वाले नेटवर्क ही आगे रह सकते हैं।
‘मास इंडिया’ को समझना बनी रणनीति
मनीष सिंघल की रणनीति के केंद्र में बड़े पैमाने पर भारतीय दर्शकों को समझना रहा है। इंडस्ट्री में चल रहे ट्रेंड को फॉलो करने के बजाय उन्होंने ऐसी कहानियों पर ध्यान दिया, जिनमें लोगों को अपने रिश्ते, भावनाएं और सांस्कृतिक मूल्य नजर आएं। दर्शकों को प्राथमिकता देने वाली इस सोच ने 'दंगल' को अलग-अलग इलाकों के दर्शकों से जोड़ने में मदद की और फ्री-टू-एयर टीवी सेगमेंट में एक मजबूत खिलाड़ी के तौर पर उसकी पहचान बनाई।
उनकी प्रतिस्पर्धा को लेकर सोच भी अलग रही है। उनका फॉर्मूला “'दंगल' versus 'दंगल'” रहा है। इसका मतलब है कि नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा पैमाना उसके प्रतिस्पर्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उसका अपना पिछला प्रदर्शन होना चाहिए।
ओरिजिनल कंटेंट पर बढ़ाया फोकस
मनीष सिंघल ने ओरिजिनल और इन-हाउस प्रोग्रामिंग में निवेश कर 'दंगल' की क्रिएटिव स्वतंत्रता को भी मजबूत किया। इससे नेटवर्क को कंटेंट, प्रोडक्शन और शेड्यूलिंग पर ज्यादा नियंत्रण मिला। साथ ही, दर्शकों की बदलती पसंद के हिसाब से तेजी से बदलाव करने में भी मदद मिली।
टीवी से आगे बढ़ा 'दंगल' का सफर
डिजिटल खपत बढ़ने के साथ मनीष सिंघल ने 'दंगल' ब्रैंड को पारंपरिक टीवी से आगे ले जाने की कोशिश की। 2022 में 'दंगल प्ले' की शुरुआत के साथ Enterr10 ने स्ट्रीमिंग की दुनिया में कदम रखा।
'दंगल प्ले' की कमान उनके बेटे अक्षत सिंघल संभाल रहे हैं। इस तरह कारोबार में एक तरफ मनीष सिंघल का मास-मार्केट ब्रॉडकास्टिंग अनुभव है, तो दूसरी तरफ अगली पीढ़ी का डिजिटल-फर्स्ट नजरिया भी जुड़ रहा है।
विदेशों तक पहुंचा 'दंगल'
मनीष सिंघल के नेतृत्व में नेटवर्क ने भारत से बाहर भी विस्तार की दिशा में काम किया है। 'दंगल' की इंटरनेशनल मार्केट्स में डिस्ट्रीब्यूशन और उसके कंटेंट की सिंडिकेशन के जरिए भारतीय मनोरंजन को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
कंपनी की क्षेत्रीय और हाई-डेफिनिशन पेशकशों की योजनाएं भी उसके मल्टीलिंगुअल और मल्टीप्लेटफॉर्म विस्तार की दिशा को दिखाती हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों तक पहुंच
विज्ञापनदाताओं के लिए भी 'दंगल' छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण बाजारों तक पहुंचने का एक जरिया बनकर उभरा है। इसकी व्यापक पहुंच और आम भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार को समझने की क्षमता ने इसे उन ब्रैंड्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण बनाया है, जो महानगरों से आगे अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं।
मनीष सिंघल का सफर यह दिखाता है कि पारंपरिक मीडिया केंद्रों से बाहर रहकर भी बड़ा मीडिया कारोबार खड़ा किया जा सकता है। इंदौर से टेलीविजन कारोबार शुरू करने से लेकर 'दंगल' को राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले एंटरटेनमेंट ब्रैंड में बदलने तक, उनका सफर बताता है कि दर्शकों की सही समझ, लगातार बेहतर अमल और बड़े फैसले लेने का साहस प्रतिस्पर्धी बाजार में भी बदलाव ला सकता है।
Tips Music ने अपने शेयर बायबैक कार्यक्रम के 10वें दिन यानी 21 सितंबर 2026 को 12,416 इक्विटी शेयर वापस खरीदे। कंपनी ने ये शेयर औसतन 658.39 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे।
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Vikas Saxena
Tips Music ने अपने शेयर बायबैक कार्यक्रम के 10वें दिन यानी 21 सितंबर 2026 को 12,416 इक्विटी शेयर वापस खरीदे। कंपनी ने ये शेयर औसतन 658.39 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे। इसके साथ ही बायबैक के तहत अब तक वापस खरीदे गए शेयरों की कुल संख्या 3,37,116 हो गई है।
कंपनी ने BSE और NSE को दी गई रोजाना रिपोर्ट में बताया कि इन सभी शेयरों की खरीदारी ITI Securities Broking Limited के जरिए की गई। 21 सितंबर को BSE पर कोई शेयर नहीं खरीदा गया, जबकि NSE पर 12,416 शेयर खरीदे गए। इस दिन कोई शेयर क्लोज-आउट या MSEI पर ट्रेड नहीं हुआ।
10वें दिन खरीदारी में बड़ी गिरावट
10वें दिन शेयर बायबैक की मात्रा पिछले दिन के मुकाबले काफी कम रही। 18 सितंबर को कंपनी ने 63,000 शेयर वापस खरीदे थे, जबकि 21 सितंबर को यह संख्या घटकर 12,416 शेयर रह गई।
21 सितंबर की खरीदारी का पूरा विवरण:

पहले के दिनों में कितने शेयर खरीदे गए?
18 सितंबर को कंपनी ने 63,000 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 2,000 और NSE पर 61,000 शेयर शामिल थे। औसत खरीद कीमत ₹657.45 रही। इसके साथ कुल बायबैक 3,24,700 शेयर हो गया था।
17 सितंबर को कंपनी ने 64,000 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 2,000 और NSE पर 62,000 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹657.25 रही और कुल बायबैक 2,61,700 शेयर पहुंच गया था।
16 सितंबर को कंपनी ने 62,000 शेयर खरीदे थे। BSE पर 2,000 और NSE पर 60,000 शेयर खरीदे गए। औसत कीमत ₹658.40 रही और कुल बायबैक 1,97,700 शेयर हो गया था।
11 सितंबर को कंपनी ने 39,143 शेयर वापस खरीदे थे। इनमें BSE के 2,000 और NSE के 37,143 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹660.20 रही और कुल बायबैक 77,700 शेयर तक पहुंच गया था।
10 सितंबर को कंपनी ने 38,069 शेयर खरीदे थे। BSE पर 1,000 और NSE पर 37,069 शेयर खरीदे गए। औसत कीमत ₹651.79 रही।
बायबैक की शुरुआत 9 सितंबर 2026 को हुई थी। पहले दिन कंपनी ने 488 शेयर खरीदे थे। इनमें BSE पर 100 और NSE पर 388 शेयर शामिल थे। औसत कीमत ₹649 प्रति शेयर रही।
₹44.50 करोड़ तक का है बायबैक
Tips Music ने 9 सितंबर को अपने सार्वजनिक ऐलान में बायबैक से जुड़ी समयसीमा को स्पष्ट करने के लिए एक करेक्शन जारी किया था। कंपनी के मुताबिक, बायबैक का अधिकतम आकार ₹44.50 करोड़ है। बायबैक पूरा करने की अंतिम तारीख इनमें से जो पहले आएगी, वह होगी:
कंपनी को इस अंतिम तारीख से पहले सभी भुगतान संबंधी दायित्व पूरे करने होंगे।
बायबैक की मुख्य शर्तें
कंपनी का बायबैक अधिकतम 66 कारोबारी दिनों तक खुला रहेगा और तय शर्तों के तहत इससे पहले भी बंद किया जा सकता है।
शेयरधारकों ने दी थी मंजूरी
शेयरधारकों ने AGM में विशेष प्रस्ताव के जरिए शेयर बायबैक को मंजूरी दी थी। 2 सितंबर 2026 को जारी वोटिंग नतीजों के मुताबिक, बायबैक प्रस्ताव के पक्ष में 9,92,51,965 वोट पड़े, जबकि 4,01,238 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव को 99.5974% वोट मिले। प्रमोटर्स ने बायबैक प्रस्ताव के पक्ष में पूरी तरह मतदान किया। वहीं, संस्थागत निवेशकों में करीब 3.08% वोट प्रस्ताव के खिलाफ पड़े।
₹750 प्रति शेयर का अधिकतम भाव
कंपनी ने बायबैक के लिए अधिकतम कीमत ₹750 प्रति शेयर तय की है। यह हाल की बाजार कीमतों के मुकाबले प्रीमियम पर है।
कंपनी के मुताबिक, ₹750 की कीमत 29 जुलाई 2026 को BSE के क्लोजिंग प्राइस से 9.50% अधिक और बोर्ड बैठक की सूचना से पहले के दो हफ्तों के BSE वॉल्यूम-वेटेड औसत भाव से 8.01% अधिक है। कंपनी ने यह भी बताया है कि उस पर कोई बकाया उधारी या कर्ज नहीं है। बायबैक के बाद भी कंपनी का सुरक्षित और असुरक्षित कर्ज, पेड-अप शेयर कैपिटल और फ्री रिजर्व के मुकाबले नियामकीय सीमा के भीतर रहेगा।
पारुल बुधिराजा ने ओगिल्वी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह सितंबर 2026 तक इंडिपेंडेंट फ्रैक्शनल सीएमओ और स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट रहीं।
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पारुल बुधिराजा (Parul Budhiraja) ने ओगिल्वी (Ogilvy) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (Executive Vice President) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इसकी जानकारी उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए दी।
अपनी पोस्ट में पारुल ने लिखा कि वह ओगिल्वी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई पोजिशन शुरू करने को लेकर खुश हैं। ओगिल्वी से जुड़ने से पहले पारुल अप्रैल 2024 से सितंबर 2026 तक इंडिपेंडेंट फ्रैक्शनल सीएमओ (Independent Fractional CMO) और स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट (Strategic Consultant) के तौर पर काम कर रही थीं।
इससे पहले वह चीइल इंडिया (Cheil India) और कॉन्ट्रैक्ट इंडिया (Contract India) के साथ भी काम कर चुकी हैं।
'पिच बीएफसीआई समिट' (Pitch BFSI Summit) का चौथा संस्करण मुंबई में 23 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल होंगे।
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'पिच बीएफसीआई समिट' (Pitch BFSI Summit) का चौथा संस्करण मुंबई में 23 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल होंगे। सम्मेलन में भारत के बदलते वित्तीय परिदृश्य, इससे जुड़े अवसरों और चुनौतियों के साथ-साथ आने वाले समय में विकास की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
इस सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण ‘India’s Next Decade: From Financialisation to Wealth Creation’ विषय पर होने वाली फायरसाइड चैट होगी। इसमें HSBC Mutual Fund के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर कैलाश कुलकर्णी और BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉ. अन्नुराग बत्रा शामिल होंगे।
इस बातचीत में चर्चा होगी कि औपचारिक वित्तीय उत्पादों में भारतीयों की बढ़ती भागीदारी को किस तरह लोगों और परिवारों के लिए लंबे समय में संपत्ति बनाने के अवसर में बदला जा सकता है।
फायरसाइड चैट में भारतीय निवेशकों के बदलते व्यवहार, म्यूचुअल फंड और दूसरे वित्तीय उत्पादों की बढ़ती भूमिका और अगले दशक में देश की बचत एवं निवेश व्यवस्था में होने वाले बदलावों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे अधिक भारतीय पारंपरिक बचत की आदतों से आगे बढ़कर व्यवस्थित तरीके से संपत्ति बनाने की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे में वित्तीय क्षेत्र में भरोसा, भागीदारी और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के तरीकों पर भी बातचीत होगी।
दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में कई अहम बातचीत, मुख्य वक्ताओं के सत्र और पैनल चर्चाएं होंगी। इनमें बीएफएसआई क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल, एसआईपी और बीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़ी संभावनाएं, और जब लोगों का ध्यान अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बंटा हुआ है, तब ब्रांड अपनी प्रासंगिकता कैसे बनाए रखें, जैसे विषय शामिल होंगे।
SAB Events & Governance Now Media Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में कंपनी की पूंजी और शेयरहोल्डिंग से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
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Vikas Saxena
SAB Events & Governance Now Media Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में कंपनी की पूंजी और शेयरहोल्डिंग से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है। ये फैसले कंपनी के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच-I द्वारा मंजूर किए गए रिजॉल्यूशन प्लान के तहत लिए गए हैं।
NCLT ने 10 जुलाई 2026 को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 की धारा 54L और धारा 31 के तहत रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। कंपनी को इस आदेश की प्रमाणित कॉपी 21 जुलाई 2026 को मिली थी।
बोर्ड बैठक में मुख्य रूप से Preferential Basis पर इक्विटी शेयर्स और कन्वर्टिबल वारंट्स जारी करने तथा Sri Adhikari Brothers Digital Network Private Limited के साथ विलय के तहत इक्विटी शेयर्स जारी करने को मंजूरी दी गई।
12 लाख इक्विटी शेयर्स प्रमोटर को जारी होंगे
बोर्ड ने Sri Adhikari Brothers Assets Holdings Private Limited, जो प्रमोटर कैटेगरी की कंपनी है, को Preferential Basis पर अधिकतम 12,00,000 इक्विटी शेयर्स जारी करने को मंजूरी दी है। इन शेयरों का इश्यू प्राइस 22.50 रुपये प्रति शेयर होगा। इस तरह इन शेयरों की कुल कीमत 2.70 करोड़ रुपये होगी।
यह शेयर NCLT द्वारा मंजूर रिजोल्यूशन प्लान और SEBI ICDR Regulations, SEBI LODR Regulations, IBC तथा लागू नियमों के तहत जारी किए जाएंगे। इसके लिए जरूरी वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां भी लागू होंगी।
पब्लिक कैटेगरी के निवेशकों को 73 लाख शेयर
इसके अलावा बोर्ड ने पब्लिक कैटेगरी में आने वाले स्ट्रैटजिक इन्वेंस्टर्स को Preferential Basis पर अधिकतम 73,00,000 इक्विटी शेयर्स जारी करने को मंजूरी दी है। इन शेयरों का इश्यू प्राइस 22.50 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। इसके हिसाब से इन शेयरों की कुल कीमत 16.425 करोड़ रुपये होगी। यह इश्यू भी NCLT द्वारा मंजूर रिजोल्यूशन प्लान और SEBI ICDR Regulations, SEBI LODR Regulations, IBC तथा अन्य लागू कानूनों और नियमों के अनुसार होगा।
60 लाख कन्वर्टिबल वारंट्स जारी होंगे
बोर्ड ने स्ट्रैटजिक इन्वेंस्टर्स को Preferential Basis पर अधिकतम 60,00,000 कन्वर्टिबल वारंट्स जारी करने की भी मंजूरी दी है। हर वारंट की कीमत 22.50 रुपये होगी और इस तरह इन वारंट की कुल राशि 13.50 करोड़ रुपये होगी। प्रत्येक वारंट का फेस वैल्यू 10 रुपये है।
इन वारंट के इश्यू प्राइस का 25% हिस्सा सब्सक्रिप्शन और अलॉटमेंट के समय देना होगा, जबकि बाकी 75% राशि वारंट के अलॉटमेंट की तारीख से अधिकतम 18 महीने के भीतर एक या एक से ज्यादा किस्तों में देनी होगी। हर कन्वर्टिबल वारन्ट को 10 रुपये फेस वैल्यू वाले एक पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। इसमें प्रति शेयर 12.50 रुपये का प्रीमियम शामिल होगा।
वारंट धारक अलॉटमेंट की तारीख से 18 महीने के भीतर अपने वारंट को इक्विटी शेयर्स में बदल सकते हैं। अगर इस अवधि में वारंट का इस्तेमाल नहीं किया गया तो वह समाप्त हो जाएगा और अलॉटमेंट के समय दी गई राशि कंपनी द्वारा जब्त कर ली जाएगी।
Sri Adhikari Brothers Digital Network के शेयरधारकों को भी शेयर
बोर्ड ने श्रीअधिकारी ब्रदर्स डिजिटल नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों को भी इक्विटी शेयर्स जारी करने को मंजूरी दी है। यह शेयर दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित Scheme of Amalgamation यानी विलय योजना के तहत जारी किए जाएंगे। यह योजना NCLT द्वारा मंजूर Pre-Packaged Insolvency रिजोल्यूशन प्लान का हिस्सा है। इसके तहत श्रीअधिकारी ब्रदर्स डिजिटल नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों को शेयर एक्सचेंज रेशियो के अनुसार 1,10,34,070 इक्विटी शेयर्स जारी किए जाएंगे।
शेयर एक्सचेंज रेशियो के तहत ट्रांसफर कंपनी के हर 100 इक्विटी शेयर्स के बदले SAB Events & Governance Now Media Limited के 436 इक्विटी शेयर्स दिए जाएंगे।
किन निवेशकों को कितने शेयर मिलेंगे?
पब्लिक कैटेगरी में Preferential Basis पर इक्विटी शेयर्स पाने वाले निवेशकों की सूची इस प्रकार है:

शेयर जारी होने के बाद प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी
शेयर जारी होने के बाद कंपनी में प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी 61.43% बताई गई है।
इसमें:
इस तरह प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप को कुल 1,22,34,070 शेयर मिलेंगे।
पब्लिक शेयरहोल्डिंग 36.65% होगी
शेयरों के अलॉटमेंट के बाद पब्लिक कैटेगरी के निवेशकों के पास कुल 73,00,000 इक्विटी शेयर्स होंगे और उनकी कुल हिस्सेदारी 36.65% बताई गई है। इनमें SERA Investments & Finance India Ltd की हिस्सेदारी 11.05%, जबकि SERA Capital AIF की 4.02% होगी।
जिग्नेशभाई मगनभाई भुवा, हितेशभाई मगनभाई भुवा और तरंगकुमार मनुभाई सवालिया प्रत्येक के पास 5.02% हिस्सेदारी होगी। निमेश चिटालिया की हिस्सेदारी 2.01%, उर्वी चिटालिया की 1.51%, दानिश देसाई की 1.26%, धीरेन सेठिया (HUF) की 0.50% और Rajiv Mehta की 1.26% होगी।
प्रमोटर और पब्लिक कैटेगरी को मिलाकर कुल 1,95,34,070 इक्विटी शेयर्स होंगे और बताई गई कुल हिस्सेदारी 98.08% होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिशत Fully Diluted Basis पर नहीं निकाला गया है।
कन्वर्टिबल वारंट्स का अलॉटमेंट
60 लाख कन्वर्टिबल वारंट्स में:
तीनों को मिलाकर कुल 60,00,000 वारंट्स होंगे। अगर इन सभी वारंट्स को इक्विटी शेयर्स में बदला जाता है, तो प्रत्येक निवेशक के पास 20,00,000 शेयर होंगे और प्रत्येक की हिस्सेदारी 7.72% बताई गई है। तीनों की कुल हिस्सेदारी 23.15% होगी।
इश्यू प्राइस और प्रीमियम
Preferential Issue के तहत इक्विटी शेयर्स का इश्यू प्राइस 22.50 रुपये प्रति शेयर है। इसमें 12.50 रुपये प्रति शेयर का प्रीमियम शामिल है। कन्वर्टिबल वारंट्स का इश्यू प्राइस भी 22.50 रुपये प्रति वारंट है, जिसमें 12.50 रुपये का प्रीमियम शामिल है। वारंट्स के मामले में 25% राशि अलॉटमेंट के समय और बाकी 75% राशि वारंट के Exercise और Conversion के समय देनी होगी।
विलय योजना के तहत जारी किए जाने वाले 1,10,34,070 इक्विटी शेयर्स के लिए कोई इश्यू प्राइस नहीं है, क्योंकि ये NCLT द्वारा मंजूर रिजोल्यूशन प्लान के तहत Scheme of Amalgamation के अनुसार जारी किए जा रहे हैं।
निवेशकों की संख्या
कंपनी के अनुसार:
बोर्ड बैठक का समय
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 18 सितंबर 2026 को शाम 5:30 बजे शुरू हुई और शाम 7:30 बजे समाप्त हुई। कंपनी ने कहा है कि Preferential Issue of इक्विटी शेयर्स और कन्वर्टिबल वारंट्स से जुड़ी जानकारी SEBI LODR Regulations के Regulation 30 और 30 जनवरी 2026 के SEBI Master Circular के तहत दी गई है।
वह कंपनी में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां भी निभाते रहेंगे और Times Television Network के सीईओ आशीष सहगल को रिपोर्ट करेंगे।
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Samachar4media Bureau
टाइम्स नेटवर्क (Times Network) ने जाने-माने टीवी पत्रकार शमशेर सिंह को अपने हिंदी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत (Times Now Navbharat) के मैनेजिंग एडिटर का अंतरिम प्रभार सौंपा है। वह यह जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से संभालेंगे। इसके साथ ही वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां भी निभाते रहेंगे।
शमशेर सिंह फिलहाल मैनेजिंग एडिटर – डिजिटल (हिंदी और स्थानीय भाषाएं) के पद पर हैं। इस भूमिका के तहत वह टाइम्स ग्रुप की हिंदी और स्थानीय भाषाओं की डिजिटल न्यूज प्रॉपर्टीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नई अंतरिम जिम्मेदारी के तहत शमशेर सिंह Times Television Network के CEO और Media & Entertainment के Chief Growth Officer आशीष सहगल को रिपोर्ट करेंगे।
कंपनी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पूर्व मैनेजिंग एडिटर रंजीत कुमार के टाइम्स नेटवर्क से अलग होने के बाद उनके अधीन रिपोर्ट करने वाले सभी सहयोगी अब इस अंतरिम अवधि के दौरान शमशेर सिंह को रिपोर्ट करेंगे।
समाचार4मीडिया की ओर से शमशेर सिंह को ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं।