भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है।
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Vikas Saxena
2026 में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील है। वैश्विक रूप से पारंपरिक समाचार पत्रों की गिरती रुझान की बात हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दबदबे का सामना, यह इंडस्ट्री एक संवेदनशील संक्रमण काल से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है। आइए एक नजर डालते हैं विषय-वार वर्तमान तथ्यों और हाल के आंकड़ों के आधार पर प्रिंट मीडिया की स्थिति पर-
वैश्विक स्तर पर प्रिंट समाचार पत्र और पत्रिकाओं का मार्केट आज पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, लेकिन यह एक मंदी की ओर बढ़ता हुआ सेक्टर है। उदाहरण के लिए, Statista के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रिंट समाचारपत्र एवं मैगजीन का राजस्व लगभग USD 108.38 बिलियन रहने का अनुमान है, और 2025‑2030 के बीच इसका CAGR लगभग ‑3.05 % रहने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह मार्केट लगभग USD 92.85 बिलियन तक गिर सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व में समग्र गिरावट जारी रहेगी, न कि बड़ी वृद्धि।
इसी तरह, IBISWorld की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल न्यूजपेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री का राजस्व पिछले पांच वर्षों में CAGR ‑3.8 % की दर से घटा है, और आगे भी इस गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, मुख्यतः प्रिंट पाठकों और विज्ञापनदारों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट होने के कारण।
दूसरी ओर, कुछ मार्केट रिसर्च (जैसे Mordor Intelligence) थोड़ा अलग परिप्रेक्ष्य देता है कि विश्व के समाचार पत्र उद्योग का आकार 2025 में लगभग USD 82.17 बिलियन था और 2030 तक इसे लगभग USD 89.85 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि कुल मार्केट वैल्यू कुछ हद तक स्थिर या मामूली वृद्धि दिखा सकता है, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः डिजिटल और प्रीमियम मॉडल के जोड़ से है, न कि केवल पारंपरिक प्रिंट से।
इन आंकड़ों से वास्तविक और व्यापक निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रिंट मीडिया उद्योग प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन राजस्व दोनों में दबाव का सामना कर रहा है, और डिजिटल उपभोग तथा ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्टिंग की वजह से पारंपरिक राजस्व संरचना कमजोर हो रही है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडस्ट्री पूरी तरह समाप्त होने वाली है बल्कि वह समायोजन और संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल और प्रिंट का मिश्रण, सस्क्रिप्शन मॉडल और नए राजस्व स्रोत शामिल हैं।
भारत में प्रिंट मीडिया का हाल कुछ हद तक मजबूत और स्थिर दिख रहा है, जो दुनिया के रुझान से अलग है। WARC की रिपोर्ट के अनुसार भारत न्यूज ब्रैंड पर विज्ञापन खर्च में 6% सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है, जबकि विश्व स्तर पर न्यूज ब्रैंड विज्ञापन खर्च गिरने की प्रवृत्ति में है।
प्रिंट समाचार पत्रों की प्रतियां (सरकारी आंकड़ों के अनुसार) 2026 तक 139 मिलियन प्रतियों तक पहुंचने की संभावना रखती हैं, जो भारतीय बाजार को चीन के आगे दुनिया का सबसे बड़ा प्रिंट संस्करण पाठक बाज़ार बनाती है।
2026 के लिए भारत का विज्ञापन बाजार बढ़ने की उम्मीद में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल विज्ञापन राजस्व लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें प्रिंट विज्ञापन लगभग ₹17,090 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- लगभग 4.5% की वृद्धि के साथ।
इसका मतलब है कि भले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, प्रिंट अभी भी वित्तीय रूप से एक मजबूत आधार बना हुआ है। विशेष रूप से बड़े शहरों और राज्य स्तरीय अखबारों के लिए विज्ञापन राजस्व एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन की पकड़ धीरे‑धीरे बढ़ रही है, जो इंडस्ट्री के लिए संतुलित विकास का संकेत देती है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में की गई बढ़ोतरी ने प्रिंट मीडिया के लिए राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद की है। हालांकि प्रिंट में वृद्धि डिजिटल की तुलना में धीमी है, फिर भी यह माध्यम अभी भी पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसका महत्व कम नहीं होने वाला।
प्रिंट की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमत, इंपोर्ट शुल्क, वेतन वृद्धि, मुद्रास्फीति और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च (फ्यूल, लॉजिस्टिक्स) से आता है। इन इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रकाशकों पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे राजस्व और लाभ की मार्जिनें कम हुई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों तक पेपर पहुंचाने में लगने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में वृद्धि का बड़ा आधार इसी निरंतर लागत वृद्धि की चुनौती को मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लागतों का संतुलित समाधान नहीं मिला तो प्रिंट मीडिया के लिए लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रास्फीति के चलते अखबार की खुद की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य हो गई है, जिससे पाठकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है।
पाठक व्यवहार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा
भारत में पाठकों की खबरें पढ़ने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और इसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर दिखाई दे रहा है। डिजिटल मीडिया का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और आज डिजिटल विज्ञापन कुल विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले चुका है। इससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव तेजी से ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है, जिसका दबाव पारंपरिक प्रिंट मीडिया पर साफ नजर आता है।
युवा वर्ग की प्राथमिकताएं भी इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। नई पीढ़ी के पाठक खबरों के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज ऐप्स पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। त्वरित अपडेट, वीडियो कंटेंट और इंटरएक्टिव फॉर्मेट की वजह से युवा पाठकों को प्रिंट की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा आकर्षक लगते हैं, जिससे प्रिंट मीडिया की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।
हालांकि इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता और विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी अखबार को भरोसेमंद सूचना का स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत, स्थानीय खबरों की गहराई और तथ्यात्मक प्रस्तुति के कारण प्रिंट मीडिया अब भी बड़ी संख्या में पाठकों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।
डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियां
भारत के विविध भौगोलिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से छोटे मीडिया हाउसों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत और नेटवर्क विस्तार, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च और स्थानीय एजेंटों की कमी के कारण अखबार समय पर और किफायती तरीके से पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
इसके साथ ही शहरी इलाकों में भी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर दबाव बढ़ा है, जहां हाकर कमीशन और रिटर्न कॉपी का बोझ प्रकाशकों की लागत को और बढ़ा देता है। इन आवागमन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी खर्चीली व्यवस्थाओं को संतुलित करना आज हर प्रिंट प्रकाशक के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन चुका है।
2026 में स्थिति का निष्कर्ष
2026 में भारत का प्रिंट मीडिया विज्ञापन के मोर्चे पर सीमित लेकिन सकारात्मक स्थिरता की स्थिति में दिखाई देता है। सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी के चलते विज्ञापन राजस्व में हल्की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं, जिससे खासकर छोटे और मध्यम अखबारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि उसे तेज ग्रोथ कहा जा सके, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रिंट मीडिया के लिए एक सहारा जरूर बनी हुई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दबाव और ऑनलाइन न्यूज कंजम्पशन में तेजी के बावजूद प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय पकड़ बनी हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में पाठकों की वफादारी अभी भी मजबूत है, जहां अखबार न केवल सूचना का स्रोत है बल्कि भरोसे और आदत का हिस्सा भी है। यही कारण है कि पूरी तरह डिजिटल शिफ्ट के बावजूद प्रिंट मीडिया अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।
इसके साथ ही लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। कागज, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन की बढ़ती लागत के सामने विज्ञापन से होने वाली आय अकेले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई प्रकाशक मार्जिन के दबाव में काम कर रहे हैं और खर्च नियंत्रण उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।
सरकार की ओर से नीति समर्थन और दरों में सुधार की दिशा में कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभी और ठोस नीतियों की जरूरत है। कागज और प्रिंटिंग इनपुट्स पर कर राहत, टैक्स प्रोत्साहन, डिस्ट्रीब्यूशन और मुद्रण से जुड़ी सब्सिडी जैसे उपाय अगर लागू होते हैं, तो प्रिंट मीडिया आने वाले वर्षों में कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा।
भारत के बड़े प्रिंट मीडिया समूहों के हालिया वित्तीय नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि भले ही कुल रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही हो, लेकिन कॉस्ट कंट्रोल और मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के जरिए कई कंपनियां खुद को संतुलित रख पाने में सफल रही हैं। अखबार कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञापन से आता है, लेकिन प्रिंट विज्ञापनों की ग्रोथ धीमी होने के कारण मैनेजमेंट का फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी, पेज ऑप्टिमाइजेशन और एड रेट्स के बेहतर इस्तेमाल पर है। न्यूजप्रिंट, ट्रांसपोर्टेशन और मैनपावर की बढ़ती लागत ने मार्जिन पर दबाव डाला है, हालांकि सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी से कुछ राहत जरूर मिली है।
डिजिटल के मोर्चे पर लगभग सभी बड़े अखबार समूह अब इसे सहायक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि कोर बिजनेस मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ई-पेपर और सोशल मीडिया के जरिए रीडर एंगेजमेंट बढ़ाने पर खास जोर है। कई मीडिया हाउस डिजिटल सब्सक्रिप्शन, प्रीमियम कंटेंट और ब्रैंडेड कंटेंट जैसे मॉडल अपना रहे हैं, ताकि केवल विज्ञापन पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि डिजिटल से होने वाली कमाई अभी प्रिंट की भरपाई नहीं कर पा रही, लेकिन भविष्य की ग्रोथ का रास्ता यहीं से निकलता दिख रहा है।
आने वाले समय को देखते हुए प्रिंट मीडिया कंपनियां हाइब्रिड मॉडल को सबसे व्यावहारिक रास्ता मान रही हैं, जहां प्रिंट अपनी विश्वसनीयता और स्थानीय पकड़ बनाए रखेगा और डिजिटल उसकी पहुंच और विस्तार बढ़ाएगा। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के लिए यह रणनीति खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 का साल प्रिंट मीडिया के लिए केवल अस्तित्व बचाने का नहीं बल्कि खुद को नए रूप में ढालने का साल होगा, जहां कंटेंट की गुणवत्ता, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल का संतुलन सबसे अहम साबित होगा।
आने वाले समय में प्रिंट मीडिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत समेकन और डिजिटल एकीकरण की होगी। प्रिंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मजबूती से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि बदलती पाठक आदतों और विज्ञापन बाजार के बीच न तो पाठक छूटें और न ही विज्ञापनदाता। डिजिटल और प्रिंट के साझा मॉडल ही आगे चलकर इसकी प्रासंगिकता और पहुंच को बनाए रख सकते हैं।
इसी क्रम में सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। कई बड़े प्रकाशक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं, जहां पाठकों को प्रीमियम कंटेंट के साथ डिजिटल और प्रिंट का संयुक्त सब्सक्रिप्शन ऑफर किया जा रहा है। इससे एक तरफ नियमित और स्थिर आमदनी का रास्ता खुलता है और दूसरी तरफ गंभीर पाठकों से सीधा जुड़ाव भी मजबूत होता है।
स्थानीय सामग्री पर फोकस प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी स्थानीय खबरों की मांग मजबूत है, जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच और भरोसा दोनों सीमित हैं। यही स्थानीय पत्रकारिता भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का जीवंत आधार बनी हुई है, जिसे प्रिंट मीडिया आने वाले समय में और मजबूती दे सकता है।
सरकारी नीतियों की भूमिका भी इस भविष्य को तय करने में अहम होगी। विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी एक जरूरी कदम जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। GST में राहत, कागज के आयात शुल्क में सुधार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को सशक्त करने जैसे ठोस नीतिगत फैसले ही प्रिंट मीडिया को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं और इसे आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं।
2026 में प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है, बल्कि बदलते आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता व्यवहार के बीच एक मजबूती से संघर्षरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनी भूमिका बना रहा है। विश्लेषण यह संकेत देता है कि अगर यह डिजिटल और पारंपरिक रणनीतियों का सही मिश्रण अपनाता है और नीतिगत समर्थन के और कदम मिलते हैं, तो 2026 और उसके बाद यह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढाल सकता है।
Sri Adhikari Brothers Television Network Limited ने बोर्ड बैठक में श्रीवत्सव सुनकारा की चेयरपर्सन के रूप में नियुक्ति को मंज़ूरी दी है। यह नियुक्ति 6 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।
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Samachar4media Bureau
Sri Adhikari Brothers Television Network Limited (SABTNL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने आज हुई बैठक में Srivatsava Sunkara को कंपनी का नया चेयरपर्सन नियुक्त करने को मंज़ूरी दे दी है। नियामक फाइलिंग्स के अनुसार, यह नियुक्ति 6 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी।
श्रीवत्सव सुनकारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखते हैं। उनका ट्रैक रिकॉर्ड संगठनों के संचालन को अधिक कुशल बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने का रहा है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सुनकारा का बोर्ड के किसी भी मौजूदा निदेशक से कोई पारिवारिक या पेशेवर संबंध नहीं है और वे SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा निदेशक पद धारण करने से प्रतिबंधित नहीं हैं।
इसी बैठक में बोर्ड ने वर्तमान चेयरपर्सन Kiran Kumar Inampudi का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है, जो 6 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। हालांकि, इनामपुड़ी कंपनी में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे और सक्रिय योगदान देते रहेंगे।
कंपनी सूत्रों के मुताबिक, यह नेतृत्व परिवर्तन SABTNL की डिजिटल और तकनीकी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है, जहां एआई आधारित समाधान भविष्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वहां नेटवर्क18 (ब्रॉडकास्ट) के सीईओ और A+E नेटवर्क्स | TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
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Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख मीडिया नेटवर्क्स में शुमार ‘नेटवर्क18’ (Network18) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्वसनी सूत्रों के हवाले से मिली इस खबर के मुताबिक सीनियर मीडिया प्रोफेशनल अविनाश कौल ने ‘नेटवर्क18’ में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वहां नेटवर्क18 (ब्रॉडकास्ट) के सीईओ और A+E नेटवर्क्स | TV18 के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
अपनी इस भूमिका में वह ‘नेटवर्क18’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को रिपोर्ट कर रहे थे। इस खबर की पुष्टि के लिए समचार4मीडिया ने 'नेटवर्क18' के शीर्ष प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक वहां से कोई जवाब नहीं मिल सका था।
बता दें कि अविनाश कौल ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Limited) में एक दशक से ज्यादा समय से कार्यरत थे। पिछले अगस्त में उनके पोर्टफोलियो में इजाफा किया गया था, ताकि टीवी, डिजिटल और प्रिंट में सीधे राजस्व वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरान उन्हें टीवी और प्रिंट बिजनेस के ऑपरेटिंग वर्टिकल्स और रेटिंग बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अविनाश कौल को इंडस्ट्री में काम करने का 26 साल से ज्यादा का अनुभव है और पिछले करीब 15 वर्षों से वह लीडरशिप भूमिकाएं निभा रहे हैं। ब्रैंड निर्माण से लेकर कंटेंट को विभिन्न शैलियों में गढ़ने और इंडस्ट्री के तेज बदलावों के बीच टीमों को दिशा देने तक अविनाश का प्रभाव व्यापक और गहरा रहा है। सहयोगी, दूरदर्शी और परिणामों पर नज़र रखने वाले लीडर के रूप में वे जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व की खासियत यह रही है कि वे नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए दर्शकों की पसंद और व्यवसायिक लक्ष्यों के संतुलन को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।
अपने करियर के दौरान अविनाश कौल ने जनरल न्यूज, बिजनेस न्यूज, जनरल एंटरटेनमेंट, किड्स प्रोग्रामिंग, रीजनल एंटरटेनमेंट और अंग्रेजी व हिंदी फिल्मों जैसे तमाम कंटेंट जॉनर (genres) का प्रबंधन करते हुए टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया है। उन्हें ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के तहत सीईओ ऑफ द ईयर का पुरस्कार भी मिल चुका है।
‘नेटवर्क18’ से पहले अविनाश कौल ‘टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क’ (Times Television Network) में चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं, जहां उन्होंने ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now), ‘ईटी नाउ’ (ET Now) और ‘जूम’ (ZOOM) जैसे प्रमुख चैनल्स का प्रबंधन किया।
वह ‘टाइम्स टेलिविजन नेटवर्क’ के अलावा ‘सहारा वन’ में बतौर सीईओ काम कर चुके हैं। उन्होंने सात साल तक ‘एनडीटीवी मीडिया’ में बतौर एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के रूप में भी काम किया है। ‘एनडीटीवी’ से पहले कौल ‘डिस्कवरी कम्युनिकेशनंस’ और ‘स्टार इंडिया’ के साथ भी काम कर चुके हैं। कौल ने अपना करियर ‘माइंडशेयर’ के साथ बतौर मीडिया प्लानर शुरू किया था।
नई व्यवस्था के तहत कुलदीप मिश्रा संभालेंगे लल्लनटॉप की संपादकीय जिम्मेदारी, जबकि रजत सेन प्रोडक्शन टीम का नेतृत्व करेंगे।
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Samachar4media Bureau
‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, वर्तमान में इस समूह के डिजिटल न्यूज पोर्टल ‘द लल्लनटॉप’ (The Lallantop) और ‘इंडिया टुडे’ (हिंदी) के एडिटर सौरभ द्विवेदी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस नए बदलाव के साथ ही कुलदीप मिश्रा को ‘द लल्लनटॉप’ की संपादकीय जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि रजत सेन प्रोडक्शन टीम का नेतृत्व करेंगे।
इस बारे में ‘इंडिया टुडे’ समूह की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने लिखा है, ‘इंडिया टुडे ग्रुप डिजिटल के साथ 12 साल की पारी के बाद ‘द लल्लनटॉप’ और इंडिया टुडे (हिंदी) के एडिटर सौरभ द्विवेदी अब अलग-अलग क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने aajtak.in में फीचर्स एडिटर के रूप में जॉइन किया था और कमलेश के साथ मिलकर लल्लनटॉप को देश के हिंदी भाषी इलाकों के युवाओं का भरोसेमंद और पसंदीदा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया।’
इसके साथ ही कली पुरी ने लिखा, ‘मुझे सौरभ और उनके द्वारा किए गए काम पर बेहद गर्व है। समय के साथ हम इस बात पर चर्चा करते रहे हैं कि वे अपनी रचनात्मक ऊर्जा ऐसे अन्य माध्यमों में लगाना चाहते हैं, जो फिलहाल इंडिया टुडे ग्रुप के पोर्टफोलियो का हिस्सा नहीं हैं। कुलदीप और रजत दोनों ही लल्लनटॉप की फाउंडिंग टीम का हिस्सा रहे हैं। किसी संस्थान में अपने ही लोगों के जरिये पीढ़ीगत बदलाव देखना मुझे सबसे ज़्यादा संतोष देता है। कुलदीप अक्सर एलटी शो और नेतानगरी जैसे कार्यक्रमों की एंकरिंग करते हैं, जबकि रजत ने द लल्लनटॉप को प्रोडक्शन के कई बदलावों और नए दौर से सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। हालांकि सौरभ की कमी ज़रूर महसूस होगी, लेकिन आने वाले इस बदलाव को लेकर मैं काफ़ी उत्साहित हूं।’
बता दें कि सौरभ द्विवेदी ने अपने इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर भी एक ट्वीट किया है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया
— Saurabh Dwivedi (@saurabhtop) January 5, 2026
हम न होंगे कोई हमसा होगा
शुक्रिया @TheLallantop
मान, पहचान और ज्ञान के लिए.
एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी
( शेर नासिर काज़मी की कलम से) pic.twitter.com/yrVSM2YpQw
बता दें कि सौरभ द्विवेदी मूलरूप से उत्तर प्रदेश में उरई के रहने वाले हैं। कानपुर से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और फिर यहीं बस गए। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका आगाज 2007 में स्टार न्यूज के साथ इंटर्नशिप से हुआ। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वक्त तक एक एस्ट्रो शो में काम किया और फिर ‘टाइम्स‘ समूह से जुड़ गए। ‘नवभारत टाइम्स’ में करीब तीन साल पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने के बाद सौरभ ने न्यूज एडिटर के रूप में ‘भास्कर‘ समूह का दामन थामा और यहां से उनकी सीधे ‘इंडिया टुडे‘ ग्रुप में एंट्री हुई, जहां से अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
सरकार ने एक अहम फैसले में वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा अधिकारी ममता वर्मा को दूरदर्शन न्यूज (डीडी न्यूज) का नया डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
सरकार ने एक अहम फैसले में वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा अधिकारी ममता वर्मा को दूरदर्शन न्यूज (डीडी न्यूज) का नया डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया है। ममता वर्मा ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं जब पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग के सामने भरोसा बनाए रखने, संतुलित खबरें देने और तेजी से बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाने की बड़ी चुनौती है।
ममता वर्मा 1994 बैच की IIS अधिकारी हैं और मूल रूप से शिमला, हिमाचल प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने शिमला के लोरेटो कॉन्वेंट और सेंट बीड्स कॉलेज से पढ़ाई की है। उनकी पढ़ाई और शुरुआती जीवन ने उन्हें सार्वजनिक सेवा के लिए तैयार किया और अपने काम में अनुशासन सिखाया।
अपने करियर के दौरान ममता वर्मा ने संचार, सूचना और नीति से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया है और हर जगह अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाया है। डीडी न्यूज की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह केंद्रीय पंचायती राज विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं। वहां उन्होंने जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था, विकेंद्रीकरण और जनता तक सही जानकारी पहुंचाने के काम को मजबूत किया।
डीडी न्यूज की डायरेक्टर जनरल के तौर पर उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह चैनल को सिर्फ सरकारी जानकारी देने वाले माध्यम तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उसे एक भरोसेमंद, तथ्यपरक और संतुलित न्यूज प्लेटफॉर्म के रूप में आगे बढ़ाएंगी। उनकी यह नियुक्ति हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है और साथ ही यह देश के मीडिया क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
Network18 ने अपने प्रमुख अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल CNN-News18 के लिए CNN International के साथ ब्रांड और कंटेंट लाइसेंसिंग साझेदारी को अगले एक दशक के लिए बढ़ा दिया है।
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Samachar4media Bureau
भारत के अग्रणी मीडिया नेटवर्क Network18 ने वैश्विक न्यूज़ ब्रांड CNN International के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत कर दिया है। इस समझौते के तहत CNN-News18 पर CNN ब्रांड और कंटेंट का लाइसेंस अब 31 दिसंबर 2035 तक जारी रहेगा।
यह साझेदारी पहली बार 2005 में शुरू हुई थी, जिसे 2015 में नवीनीकृत किया गया और अब यह तीसरे दशक में प्रवेश कर रही है। इस नए चरण में दोनों कंपनियों ने केवल टीवी ही नहीं, बल्कि डिजिटल और कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म्स पर भी सहयोग को और गहरा करने का फैसला किया है।
नई रणनीति के तहत CNN-News18 अपनी डिजिटल मौजूदगी को यूट्यूब, कनेक्टेड टीवी और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक विस्तार देगा, जिससे यह ब्रांड वैश्विक दर्शकों तक पहुंचेगा। इस मौके पर Network18 के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी ने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक न्यूज़ इंडस्ट्री में एक “अद्वितीय और ऐतिहासिक सहयोग” है।
उन्होंने कहा कि अब यह रिश्ता डिजिटल और कनेक्टेड टीवी के जरिए नए विकास के रास्ते खोलेगा। CNN International, जो Warner Bros. Discovery का हिस्सा है, अपनी अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता और संपादकीय विशेषज्ञता इस सहयोग में जारी रखेगा। CNN International के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट Phil Nelson ने कहा कि Network18 के साथ साझेदारी CNN के सबसे मजबूत वैश्विक सहयोगों में से एक है।
तेज़ी से बदलते “ग्लोकल” न्यूज़ परिदृश्य में, जहाँ दुनिया की घटनाएँ सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं, CNN की वैश्विक पहुंच और Network18 की भारतीय विश्वसनीयता मिलकर दर्शकों को व्यापक और भरोसेमंद समाचार अनुभव प्रदान करती हैं। Network18 आने वाले समय में CNN-News18 के डिजिटल, तकनीकी और संपादकीय विस्तार में और निवेश करेगा, ताकि भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी नेतृत्वकारी स्थिति और मजबूत हो सके।
वैश्विक म्यूज़िक दिग्गज Universal Music Group ने फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की प्रोडक्शन कंपनी Excel Entertainment में कुछ हिस्सेदारी खरीदी है।
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Samachar4media Bureau
वैश्विक संगीत और मनोरंजन कंपनी Universal Music Group ने भारत के कंटेंट इंडस्ट्री में औपचारिक कदम रखते हुए मुंबई स्थित प्रोडक्शन हाउस Excel Entertainment में कुछ निवेश किया है। यह कंपनी Farhan Akhtar और Ritesh Sidhwani के नेतृत्व में संचालित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह सौदा लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद पूरा हुआ है और इसकी औपचारिक घोषणा आज मुंबई में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की जाएगी। इस कार्यक्रम में Devendra Fadnavis की मौजूदगी भी प्रस्तावित है, जिससे इस साझेदारी को मिल रहे महत्व का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
यह साझेदारी भारत के तेज़ी से बढ़ते फिल्म–ओटीटी–म्यूज़िक इकोसिस्टम और वैश्विक म्यूज़िक इंडस्ट्री के बीच गहरे तालमेल की ओर इशारा करती है। Universal Music Group के लिए यह निवेश भारतीय सिनेमा, म्यूज़िक एल्बम्स और ओरिजिनल कंटेंट में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मज़बूत करता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट के रूप में उभर रहा है।
वहीं, Excel Entertainment के लिए यह साझेदारी ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन, इंटरनेशनल म्यूज़िक इंटीग्रेशन और वैश्विक सहयोग के नए रास्ते खोलती है। जानकारों के मुताबिक, इस निवेश से संस्थापकों की हिस्सेदारी या रचनात्मक नियंत्रण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी बहुमत हिस्सेदारी के साथ पूर्ण क्रिएटिव कंट्रोल बनाए रखेंगे।
कस्तूरी एंड सन्स ने सुंदर कोंडूर को द हिंदू ग्रुप का नया Chief Revenue Officer (CRO) नियुक्त किया है। दो दशकों से अधिक अनुभव रखने वाले कोंडूर ने यह जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के ज़रिये साझा की।
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Samachar4media Bureau
Kasturi & Sons, जो The Hindu Group का पब्लिशिंग हाउस है, ने सुंदर कोंडूर को अपना नया Chief Revenue Officer नियुक्त किया है। कोंडूर ने लिंक्डइन पर पोस्ट कर कहा कि वे The Hindu Group Publishing Pvt. Ltd. में अपनी नई भूमिका शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।
सुंदर कोंडूर मीडिया पब्लिशिंग, विज्ञापन बिक्री और रेवेन्यू लीडरशिप में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव रखते हैं। इससे पहले वे Bennett Coleman & Co. (टाइम्स ग्रुप) के साथ नौ साल से अधिक समय तक जुड़े रहे और विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाईं। दिलचस्प बात यह है कि कोंडूर पहले भी Kasturi & Sons के साथ Vice President – Advertising Sales के रूप में काम कर चुके हैं।
मई 2015 से नवंबर 2016 के बीच उन्होंने The Hindu के लिए नेशनल सेल्स का नेतृत्व किया था। अपने करियर के शुरुआती चरण में वे Mid Day में भी सीनियर भूमिकाओं में रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोंडूर का अनुभव द हिंदू ग्रुप की रेवेन्यू रणनीति को और मज़बूत करेगा तथा डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म्स पर विकास को गति देगा।
चुनाव आयोग ने 2025 के लिए वोटर एजुकेशन और जागरूकता पर सबसे अच्छे मीडिया कैंपेन के लिए मीडिया हाउस से आवेदन मांगे हैं।
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Vikas Saxena
चुनाव आयोग ने 2025 के लिए वोटर एजुकेशन और जागरूकता पर सबसे अच्छे मीडिया कैंपेन के लिए मीडिया हाउस से आवेदन मांगे हैं। इसका मकसद उन मीडिया संस्थाओं को पहचानना है जिन्होंने चुनाव में भागीदारी बढ़ाने और सभी के लिए आसान चुनावों के बारे में जागरूकता फैलाने में विशेष काम किया।
ये अवॉर्ड चार कैटेगरी में दिए जाएंगे– प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो और ऑनलाइन मीडिया। इसमें वो मीडिया कैंपेन शामिल होंगे, जिन्होंने:
आसान और सुलभ चुनाव को प्रमोट किया,
चुनाव प्रक्रिया को समझाया,
चुनाव से जुड़े IT ऐप्स को दिखाया,
दूरदराज के मतदान केंद्रों की कवरेज की, और
लोगों में वोटिंग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई।
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि वे उन मीडिया संस्थाओं के नाम सुझाएं जिन्होंने 2025 में इन क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया। सभी नामों की समीक्षा चुनाव आयोग स्तर पर गठित जूरी करेगी।
इसके अलावा, मीडिया टीमों के शानदार प्रयासों को पहचानने के लिए आयोग ने नया मीडिया एक्सीलेंस अवॉर्ड भी शुरू किया है। इसके तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ CEO सोशल मीडिया टीम को एक अवॉर्ड मिलेगा। ये अवॉर्ड इस साल राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर प्रस्तुत किए जाएंगे।
आयोग ने कहा है कि इस श्रेणी के तहत सभी सुझाव और नामांकन इस महीने की 7 जनवरी तक भेजे जाएं।
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— Election Commission of India (@ECISVEEP) January 4, 2026
ECI invites entries from Media Houses for the Media Awards 2025.
The Award(s) will be presented on National Voters’ Day 2026.
(1/6) pic.twitter.com/ppefmzK6R6
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में ‘श्री राम और तमिलगम’ पुस्तक का विमोचन हुआ। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने श्री राम को प्रथम पर्यावरण संरक्षक बताते हुए जीव-दया और प्रकृति संतुलन पर जोर दिया।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के दूसरे दिन आयोजित एक विशेष सत्र में पुस्तक ‘श्री राम और तमिलगम: एक अटूट बंधन’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. नरसी राम बिश्नोई, कुलपति, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (हिसार) उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भगवान श्री राम के व्यक्तित्व के एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत प्रासंगिक पक्ष—पर्यावरण संरक्षण—को केंद्र में रखा।
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि श्री राम केवल मर्यादा पुरुषोत्तम या आदर्श राजा ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के सच्चे रक्षक भी थे। उन्होंने रामायण के समुद्र-प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब समुद्र ने मार्ग नहीं दिया और ब्रह्मास्त्र का संधान किया गया, तब श्री राम ने यह विचार कर निर्णय बदला कि इससे असंख्य जलचर निर्दोष रूप से नष्ट हो जाएंगे।
यही संवेदनशीलता उन्हें प्रथम पर्यावरण रक्षक के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने बिश्नोई परंपरा का संदर्भ देते हुए गुरु जम्भेश्वर महाराज द्वारा दिए गए 29 नियमों की चर्चा की, जिनका मूल उद्देश्य जीव-रक्षा और वृक्ष-संरक्षण है। खेजड़ली के बलिदान को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में पर्यावरण के लिए त्याग कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि जीवित परंपरा है।
अपने वक्तव्य में प्रो. बिश्नोई ने आधुनिक संदर्भों की ओर संकेत करते हुए स्पष्ट किया कि जीव-दया केवल विचार नहीं, आचरण का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि वन्यजीवों को क्षति पहुंचाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करता है।
सच्चा पश्चाताप और संरक्षण का संकल्प ही न्याय और क्षमा का आधार हो सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक संबंधों को जोड़ने के साथ-साथ ‘राम राज्य’ की उस भावना को सामने लाती है, जहां विकास प्रकृति के विनाश के बिना संभव है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार और ‘एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया’ (Editors Club Of India) के प्रेजिडेंट अमिताभ अग्निहोत्री ने नए साल पर एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘टीवी9 नेटवर्क’ (Network9) में अपनी पारी को विराम देने की घोषणा की है। अमिताभ अग्निहोत्री ‘टीवी9’ में करीब चार से बतौर कंसल्टिंग एडिटर कार्यरत थे। उन्होंने इस बारे में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर की है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमिताभ अग्निहोत्री ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब मीडिया की दुनिया में अपना काम शुरू करेंगे। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं और नोएडा स्थित सेक्टर-62 में ऑफिस बनाया जा रहा है। अमिताभ अग्निहोत्री के अनुसार, जल्द ही वह नई शुरुआत करेंगे और तब उस बारे में विस्तार से बताएंगे।
गौरतलब है कि अमिताभ अग्निहोत्री को मीडिया में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जीवन और पत्रकारिता में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अमिताभ ने 1989 में ‘आईआईएमसी’, दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद करियर की शुरुआत ‘दैनिक जागरण’ से की। अमिताभ ‘दैनिक जागरण’ के दिल्ली से लॉन्च होने पर संस्थान का हिस्सा बने थे। 1994 में ‘आज‘ के नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में भी काम किया। ‘आज‘ के बाद ‘दैनिक भास्कर‘ में भी तकरीबन 10 साल रहे। ‘दैनिक भास्कर‘ के बाद 2008 में ‘देशबन्धु‘ के स्थानीय संपादक बने।
इसके बाद उन्होंने ‘टोटल टीवी‘ में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। हालांकि बाद में यहां से इस्तीफा देकर ‘समाचार प्लस‘ के प्रबंध संपादक बन गए। इसके बाद उन्होंने ‘इंडिया नाउ‘ समूह में बतौर एडिटर-इन-चीफ जॉइन कर लिया, पर कुछ कारणों के चलते चैनल लॉन्च ही नहीं हो सका। फिर यहां से बॉय बोलकर वह ‘के-न्यूज’ (K-NEWS) चैनल से बतौर सीईओ व एडिटर-इन-चीफ जुड़ गए।
‘के-न्यूज‘ के साथ करीब एक साल की पारी खेलने के बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया। यहां से बाय बोलकर ‘नेटवर्क18‘ (हिंदी नेटवर्क) में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने हिंदी न्यूज चैनल ‘आर9’ (R9) के साथ बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी नई पारी शुरू की थी, जहां से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अमिताभ अग्निहोत्री बतौर कंसल्टिंग एडिटर ‘टीवी9’ आ गए थे, जहां से अब उन्होंने अपनी पारी को विराम दे दिया है।
अमिताभ अग्निहोत्री को पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने अमूल्य योगदान के लिए कई बार पुरस्कृत भी किया जा चुका है। उन्हें मटुश्री, गणेशशंकर विद्यार्थी और यूनिवार्ता अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2013 में उन्हें समाचार4मीडिया द्वारा ‘मीडिया महारथी’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
समाचार4मीडिया की ओर से अमिताभ अग्निहोत्री को उनके नए सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।