2026 का प्रिंट मीडिया परिदृश्य: विज्ञापन, लागत और डिजिटल युग की जंग

भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 January, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 January, 2026
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2026 में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील है। वैश्विक रूप से पारंपरिक समाचार पत्रों की गिरती रुझान की बात हो या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दबदबे का सामना, यह इंडस्ट्री एक संवेदनशील संक्रमण काल से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया की स्थिति वैश्विक ट्रेंड से थोड़ा अलग दिख रही है, जहां यह अभी भी स्थिरता और कुछ हद तक विकास की ओर अग्रसर है। आइए एक नजर डालते हैं विषय-वार वर्तमान तथ्यों और हाल के आंकड़ों के आधार पर प्रिंट मीडिया की स्थिति पर-

प्रिंट मीडिया का वैश्विक परिदृश्य

वैश्विक स्तर पर प्रिंट समाचार पत्र और पत्रिकाओं का मार्केट आज पूरी तरह समाप्त नहीं हो रहा, लेकिन यह एक मंदी की ओर बढ़ता हुआ सेक्टर है। उदाहरण के लिए, Statista के आंकड़ों के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रिंट समाचारपत्र एवं मैगजीन का राजस्व लगभग USD 108.38 बिलियन रहने का अनुमान है, और 2025‑2030 के बीच इसका CAGR लगभग ‑3.05 % रहने की संभावना है, जिससे 2030 तक यह मार्केट लगभग USD 92.85 बिलियन तक गिर सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व में समग्र गिरावट जारी रहेगी, न कि बड़ी वृद्धि। 

इसी तरह, IBISWorld की रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल न्यूजपेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्री का राजस्व पिछले पांच वर्षों में CAGR ‑3.8 % की दर से घटा है, और आगे भी इस गिरावट की प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, मुख्यतः प्रिंट पाठकों और विज्ञापनदारों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट होने के कारण।  

दूसरी ओर, कुछ मार्केट रिसर्च (जैसे Mordor Intelligence) थोड़ा अलग परिप्रेक्ष्य देता है कि विश्व के समाचार पत्र उद्योग का आकार 2025 में लगभग USD 82.17 बिलियन था और 2030 तक इसे लगभग USD 89.85 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि कुल मार्केट वैल्यू कुछ हद तक स्थिर या मामूली वृद्धि दिखा सकता है, लेकिन यह वृद्धि मुख्यतः डिजिटल और प्रीमियम मॉडल के जोड़ से है, न कि केवल पारंपरिक प्रिंट से। 

इन आंकड़ों से वास्तविक और व्यापक निष्कर्ष यह है कि वैश्विक प्रिंट मीडिया उद्योग प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन राजस्व दोनों में दबाव का सामना कर रहा है, और डिजिटल उपभोग तथा ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्टिंग की वजह से पारंपरिक राजस्व संरचना कमजोर हो रही है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडस्ट्री पूरी तरह समाप्त होने वाली है बल्कि वह समायोजन और संक्रमण के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल और प्रिंट का मिश्रण, सस्क्रिप्शन मॉडल और नए राजस्व स्रोत शामिल हैं।

भारत में प्रिंट मीडिया का वर्तमान परिदृश्य

भारत में प्रिंट मीडिया का हाल कुछ हद तक मजबूत और स्थिर दिख रहा है, जो दुनिया के रुझान से अलग है। WARC की रिपोर्ट के अनुसार भारत न्यूज ब्रैंड पर विज्ञापन खर्च में 6% सालाना वृद्धि दर्ज कर रहा है, जबकि विश्व स्तर पर न्यूज ब्रैंड विज्ञापन खर्च गिरने की प्रवृत्ति में है। 

प्रिंट समाचार पत्रों की प्रतियां (सरकारी आंकड़ों के अनुसार) 2026 तक 139 मिलियन प्रतियों तक पहुंचने की संभावना रखती हैं, जो भारतीय बाजार को चीन के आगे दुनिया का सबसे बड़ा प्रिंट संस्करण पाठक बाज़ार बनाती है।  

प्रिंट मीडिया में विज्ञापन राजस्व की स्थिति

2026 के लिए भारत का विज्ञापन बाजार बढ़ने की उम्मीद में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल विज्ञापन राजस्व लगभग ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें प्रिंट विज्ञापन लगभग ₹17,090 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- लगभग 4.5% की वृद्धि के साथ।  

इसका मतलब है कि भले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, प्रिंट अभी भी वित्तीय रूप से एक मजबूत आधार बना हुआ है। विशेष रूप से बड़े शहरों और राज्य स्तरीय अखबारों के लिए विज्ञापन राजस्व एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन की पकड़ धीरे‑धीरे बढ़ रही है, जो इंडस्ट्री के लिए संतुलित विकास का संकेत देती है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में की गई बढ़ोतरी ने प्रिंट मीडिया के लिए राजस्व स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद की है। हालांकि प्रिंट में वृद्धि डिजिटल की तुलना में धीमी है, फिर भी यह माध्यम अभी भी पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में इसका महत्व कम नहीं होने वाला।

सरकार की नीतियां और समर्थन

हालांकि प्रिंट विज्ञापन दरों में 26% की वृद्धि कई महीने पहले की गई थी, इसके प्रभाव अब तक प्रिंट मीडिया पर दिखने लगे हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने डीएवीपी/सीबीसी के माध्यम से सरकारी विज्ञापनों के लिए प्रिंट मीडिया की दरें ₹47.40 से ₹59.68 प्रति वर्ग सेमी तक बढ़ाई थीं। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती उत्पादन लागत, विशेषकर न्यूजप्रिंट और मुद्रण खर्च के दबाव को कम करना था। साथ ही यह छोटे और मध्यम स्तर के प्रकाशकों को वित्तीय राहत और स्थानीय पत्रकारिता की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करने के लिए भी लिया गया था। हालांकि इंडस्ट्री बॉडीज का मानना है कि यह सुधार अपेक्षाकृत देर से आया और पर्याप्त नहीं है, क्योंकि विभागीय बजट की वृद्धि दर इसके अनुरूप नहीं रही, जिससे वास्तविक राजस्व वृद्धि केवल 10‑15% के आसपास ही रही।

नीति निर्माण के व्यापक पहलू पर सरकार ने केवल विज्ञापन दर बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहकर अन्य मीडिया क्षेत्रों की भी समीक्षा शुरू की है। रेडियो, टीवी और DTH जैसे पारंपरिक मीडिया पर भी नीतिगत सुधारों की संभावना तलाशी जा रही है ताकि डिजिटलीकरण के बढ़ते दबाव के बीच प्रिंट मीडिया की स्थिरता बनी रह सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में और ठोस कदम, जैसे मुद्रण इनपुट पर कर राहत, सब्सिडी और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे में सुधार, आने वाले वर्षों में प्रिंट मीडिया को अधिक मजबूत बना सकते हैं।

प्रिंट मीडिया पर बढ़ती लागत का दबाव

प्रिंट की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमत, इंपोर्ट शुल्क, वेतन वृद्धि, मुद्रास्फीति और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च (फ्यूल, लॉजिस्टिक्स) से आता है। इन इनपुट लागतों में लगातार वृद्धि ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रकाशकों पर गंभीर दबाव डाला है, जिससे राजस्व और लाभ की मार्जिनें कम हुई हैं। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों तक पेपर पहुंचाने में लगने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सरकार द्वारा हाल ही में विज्ञापन दरों में वृद्धि का बड़ा आधार इसी निरंतर लागत वृद्धि की चुनौती को मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन लागतों का संतुलित समाधान नहीं मिला तो प्रिंट मीडिया के लिए लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, कच्चे माल की कीमतों और मुद्रास्फीति के चलते अखबार की खुद की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य हो गई है, जिससे पाठकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है।

पाठक व्यवहार और डिजिटल प्रतिस्पर्धा

भारत में पाठकों की खबरें पढ़ने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और इसका सीधा असर प्रिंट मीडिया पर दिखाई दे रहा है। डिजिटल मीडिया का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और आज डिजिटल विज्ञापन कुल विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा अपने कब्जे में ले चुका है। इससे विज्ञापनदाताओं का झुकाव तेजी से ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा है, जिसका दबाव पारंपरिक प्रिंट मीडिया पर साफ नजर आता है।

युवा वर्ग की प्राथमिकताएं भी इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। नई पीढ़ी के पाठक खबरों के लिए मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज ऐप्स पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। त्वरित अपडेट, वीडियो कंटेंट और इंटरएक्टिव फॉर्मेट की वजह से युवा पाठकों को प्रिंट की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म ज्यादा आकर्षक लगते हैं, जिससे प्रिंट मीडिया की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।

हालांकि इसके बावजूद प्रिंट मीडिया की लोकप्रियता और विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी अखबार को भरोसेमंद सूचना का स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत, स्थानीय खबरों की गहराई और तथ्यात्मक प्रस्तुति के कारण प्रिंट मीडिया अब भी बड़ी संख्या में पाठकों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।

डिस्ट्रीब्यूशन की चुनौतियां

भारत के विविध भौगोलिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से छोटे मीडिया हाउसों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लागत और नेटवर्क विस्तार, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी और दूरदराज ग्रामीण इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च और स्थानीय एजेंटों की कमी के कारण अखबार समय पर और किफायती तरीके से पहुंचाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

इसके साथ ही शहरी इलाकों में भी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर दबाव बढ़ा है, जहां हाकर कमीशन और रिटर्न कॉपी का बोझ प्रकाशकों की लागत को और बढ़ा देता है। इन आवागमन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी खर्चीली व्यवस्थाओं को संतुलित करना आज हर प्रिंट प्रकाशक के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन चुका है।

2026 में स्थिति का निष्कर्ष

2026 में भारत का प्रिंट मीडिया विज्ञापन के मोर्चे पर सीमित लेकिन सकारात्मक स्थिरता की स्थिति में दिखाई देता है। सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी के चलते विज्ञापन राजस्व में हल्की वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं, जिससे खासकर छोटे और मध्यम अखबारों को कुछ राहत मिली है। हालांकि यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं है कि उसे तेज ग्रोथ कहा जा सके, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रिंट मीडिया के लिए एक सहारा जरूर बनी हुई है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दबाव और ऑनलाइन न्यूज कंजम्पशन में तेजी के बावजूद प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय पकड़ बनी हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में पाठकों की वफादारी अभी भी मजबूत है, जहां अखबार न केवल सूचना का स्रोत है बल्कि भरोसे और आदत का हिस्सा भी है। यही कारण है कि पूरी तरह डिजिटल शिफ्ट के बावजूद प्रिंट मीडिया अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।

इसके साथ ही लागत से जुड़ी चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। कागज, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन की बढ़ती लागत के सामने विज्ञापन से होने वाली आय अकेले पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। यही वजह है कि कई प्रकाशक मार्जिन के दबाव में काम कर रहे हैं और खर्च नियंत्रण उनकी प्राथमिकता बनता जा रहा है।

सरकार की ओर से नीति समर्थन और दरों में सुधार की दिशा में कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अभी और ठोस नीतियों की जरूरत है। कागज और प्रिंटिंग इनपुट्स पर कर राहत, टैक्स प्रोत्साहन, डिस्ट्रीब्यूशन और मुद्रण से जुड़ी सब्सिडी जैसे उपाय अगर लागू होते हैं, तो प्रिंट मीडिया आने वाले वर्षों में कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभा सकेगा।

वित्तीय दबाव में संतुलन की कोशिश

भारत के बड़े प्रिंट मीडिया समूहों के हालिया वित्तीय नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि भले ही कुल रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रही हो, लेकिन कॉस्ट कंट्रोल और मल्टी-प्लेटफॉर्म स्ट्रैटेजी के जरिए कई कंपनियां खुद को संतुलित रख पाने में सफल रही हैं। अखबार कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अभी भी विज्ञापन से आता है, लेकिन प्रिंट विज्ञापनों की ग्रोथ धीमी होने के कारण मैनेजमेंट का फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी, पेज ऑप्टिमाइजेशन और एड रेट्स के बेहतर इस्तेमाल पर है। न्यूजप्रिंट, ट्रांसपोर्टेशन और मैनपावर की बढ़ती लागत ने मार्जिन पर दबाव डाला है, हालांकि सरकारी विज्ञापन दरों में हालिया बढ़ोतरी से कुछ राहत जरूर मिली है।

डिजिटल अब सपोर्ट नहीं, मुख्य रणनीति

डिजिटल के मोर्चे पर लगभग सभी बड़े अखबार समूह अब इसे सहायक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि कोर बिजनेस मानकर आगे बढ़ रहे हैं। वेबसाइट, मोबाइल ऐप, ई-पेपर और सोशल मीडिया के जरिए रीडर एंगेजमेंट बढ़ाने पर खास जोर है। कई मीडिया हाउस डिजिटल सब्सक्रिप्शन, प्रीमियम कंटेंट और ब्रैंडेड कंटेंट जैसे मॉडल अपना रहे हैं, ताकि केवल विज्ञापन पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि डिजिटल से होने वाली कमाई अभी प्रिंट की भरपाई नहीं कर पा रही, लेकिन भविष्य की ग्रोथ का रास्ता यहीं से निकलता दिख रहा है।

हाइब्रिड मॉडल पर टिका भविष्य

आने वाले समय को देखते हुए प्रिंट मीडिया कंपनियां हाइब्रिड मॉडल को सबसे व्यावहारिक रास्ता मान रही हैं, जहां प्रिंट अपनी विश्वसनीयता और स्थानीय पकड़ बनाए रखेगा और डिजिटल उसकी पहुंच और विस्तार बढ़ाएगा। छोटे शहरों और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के लिए यह रणनीति खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 का साल प्रिंट मीडिया के लिए केवल अस्तित्व बचाने का नहीं बल्कि खुद को नए रूप में ढालने का साल होगा, जहां कंटेंट की गुणवत्ता, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मॉडल का संतुलन सबसे अहम साबित होगा।

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में प्रिंट मीडिया के लिए सबसे बड़ी जरूरत समेकन और डिजिटल एकीकरण की होगी। प्रिंट को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मजबूती से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि बदलती पाठक आदतों और विज्ञापन बाजार के बीच न तो पाठक छूटें और न ही विज्ञापनदाता। डिजिटल और प्रिंट के साझा मॉडल ही आगे चलकर इसकी प्रासंगिकता और पहुंच को बनाए रख सकते हैं।

इसी क्रम में सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। कई बड़े प्रकाशक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं, जहां पाठकों को प्रीमियम कंटेंट के साथ डिजिटल और प्रिंट का संयुक्त सब्सक्रिप्शन ऑफर किया जा रहा है। इससे एक तरफ नियमित और स्थिर आमदनी का रास्ता खुलता है और दूसरी तरफ गंभीर पाठकों से सीधा जुड़ाव भी मजबूत होता है।

स्थानीय सामग्री पर फोकस प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी स्थानीय खबरों की मांग मजबूत है, जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच और भरोसा दोनों सीमित हैं। यही स्थानीय पत्रकारिता भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का जीवंत आधार बनी हुई है, जिसे प्रिंट मीडिया आने वाले समय में और मजबूती दे सकता है।

सरकारी नीतियों की भूमिका भी इस भविष्य को तय करने में अहम होगी। विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी एक जरूरी कदम जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। GST में राहत, कागज के आयात शुल्क में सुधार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को सशक्त करने जैसे ठोस नीतिगत फैसले ही प्रिंट मीडिया को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं और इसे आने वाले वर्षों की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकते हैं।

2026 में प्रिंट मीडिया पूरी तरह से समाप्त होने वाला नहीं है, बल्कि बदलते आर्थिक, तकनीकी और उपभोक्ता व्यवहार के बीच एक मजबूती से संघर्षरत लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपनी भूमिका बना रहा है। विश्लेषण यह संकेत देता है कि अगर यह डिजिटल और पारंपरिक रणनीतियों का सही मिश्रण अपनाता है और नीतिगत समर्थन के और कदम मिलते हैं, तो 2026 और उसके बाद यह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं दोनों की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढाल सकता है। 

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NDTV Digital में विनय सरावगी की एंट्री, बने चीफ कंटेंट ऑफिसर

नई भूमिका में वह NDTV Digital के कंटेंट इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 02 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
Vinay Sarawagi

डिजिटल मीडिया क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एनडीटीवी डिजिटल (NDTV Digital) ने सीनियर मीडिया प्रोफेशनल विनय सरावगी को चीफ कंटेंट ऑफिसर (Chief Content Officer) के पद पर नियुक्त किया है।

नई भूमिका में वह NDTV Digital के कंटेंट इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। इसके साथ ही AI की मदद से नई स्टोरीटेलिंग तकनीकों को अपनाने, संपादकीय गुणवत्ता को बेहतर बनाने और दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित करने पर विशेष ध्यान देंगे।

विनय सरावगी के पास मीडिया, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। एनडीटीवी से जुड़ने से पहले वह The Media GCC के को-फाउंडर और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) थे। यह संस्था मीडिया और ब्रॉडकास्ट संगठनों को कंटेंट स्ट्रैटेजी, तकनीकी बदलाव और रेवेन्यू ग्रोथ से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती है। संस्था का विशेष फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित बदलावों पर रहा है।

अपने करियर के दौरान विनय सरावगी ने टाइम्स ग्रुप, नेटवर्क18, बिजनेस स्टैंडर्ड, रॉयटर्स, डीएनए और इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने संपादकीय संचालन, ऑडियंस ग्रोथ और डिजिटल राजस्व बढ़ाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। विनय सरावगी के पास मीडिया मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री, साइबर लॉ में डिप्लोमा है और वह CNN Fellow भी रह चुके हैं।

इस नियुक्ति पर एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि विनय सरावगी के पास संपादकीय समझ, डिजिटल अनुभव और रणनीतिक दृष्टि का बेहतरीन संयोजन है। उनके नेतृत्व से NDTV Digital दुनियाभर के दर्शकों के लिए विश्वसनीय, समकालीन और प्रासंगिक कंटेंट तैयार करने की दिशा में और मजबूत होगा।

वहीं, चीफ पीपल ऑफिसर पूर्वा मिश्रा ने कहा कि विनय की सहयोगात्मक कार्यशैली और न्यूजरूम में AI के उपयोग को लेकर उनका दृष्टिकोण उन्हें विशेष बनाता है। उन्होंने कहा कि संगठन के भविष्य के निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी।

अपनी नियुक्ति पर विनय सरावगी ने कहा कि NDTV लंबे समय से विश्वसनीय पत्रकारिता और जनविश्वास का प्रतीक है। ऐसे समय में NDTV Digital से जुड़ना उनके लिए उत्साहजनक है, जब पत्रकारिता तकनीक, बदलती दर्शक प्राथमिकताओं और नए स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट्स के कारण तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि वह टीम के साथ मिलकर भविष्य के अनुरूप मजबूत डिजिटल कंटेंट तैयार करने के लिए काम करेंगे।

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तिप्ती खेरिया बनीं 'पारा म्यूजिक' की कंटेंट और ब्रांड प्रमुख

टिपती खेरिया (Tipti Kheria) ने 'पारा म्यूजिक' (PaRa Music) जॉइन किया है। उन्हें कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट – कंटेंट, पार्टनरशिप, ब्रांड और PR की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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Published - Tuesday, 02 June, 2026
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Tuesday, 02 June, 2026
tiptikheriya

टिपती खेरिया (Tipti Kheria) ने 'पारा म्यूजिक' (PaRa Music) जॉइन किया है। उन्हें कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट -कंटेंट, पार्टनरशिप, ब्रांड और PR की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने LinkedIn पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। टिपती खेरिया ने लिखा, “यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने 'पारा म्यूजिक' (PaRa Music) में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

उन्होंने कहा कि 'पारा म्यूजिक' (PaRa Music) का नया और अलग विजन उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। उनके मुताबिक कंपनी creativity, technology और intellectual property को साथ जोड़कर भारत के विविध music ecosystem की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।

टिपती खेरिया ने कहा कि वह इस नई journey में building, collaboration और योगदान को लेकर उत्साहित हैं। इससे पहले वह करीब 11 वर्षों तक 'रेडियो सिटी इंडिया' (Radio City India) के साथ जुड़ी रहीं। वहां वह आखिरी बार जनरल मैनेजर -ब्रांड, मार्केटिंग और PR की भूमिका निभा रही थीं।

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टाइम्स ग्रुप में जंगजीत सिंह अहलावत की एंट्री, हेड–प्रोक्योरमेंट (NMI) की मिली जिम्मेदारी

नई भूमिका में वह समूह की खरीद प्रक्रियाओं का नेतृत्व करेंगे और लागत अनुकूलन के साथ विभिन्न कंपनियों में प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं के सामंजस्य पर फोकस करेंगे।

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Published - Tuesday, 02 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
Jangjeet Singh

देश के प्रमुख मीडिया समूहों में शामिल टाइम्स ग्रुप (Times Group) ने जवाबदेही बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बिजनेस की बदलती जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किया है। इस फेरबदल के तहत जंगजीत सिंह अहलावत को हेड–प्रोक्योरमेंट, एनएमआई के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अपनी इस भूमिका में वह समूह में खरीद प्रक्रियाओं का नेतृत्व करेंगे और लागत अनुकूलन, विभिन्न समूह कंपनियों में प्रक्रियाओं के सामंजस्य तथा बेहतर प्रोक्योरमेंट प्रथाओं को लागू करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। बेनेट यूनिवर्सिटी की प्रोक्योरमेंट टीम, जिसका नेतृत्व यश पाल नारंग कर रहे हैं, सहित टाइम्स ग्रुप की अन्य प्रोक्योरमेंट टीमें उन्हें रिपोर्ट करेंगी।

जंगजीत सिंह अहलावत के पास सप्लाई चेन मैनेजमेंट और प्रोक्योरमेंट क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया एवं मनोरंजन, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और केपीओ जैसे क्षेत्रों में काम किया है। टाइम्स ग्रुप से जुड़ने से पहले वह सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड में हेड ऑफ प्रोक्योरमेंट (नॉन-कोर) थे। इसके अलावा वह एबीपी नेटवर्क, जी एंटरटेनमेंट, भारती एयरटेल, टीसीएस, विप्रो बीपीओ और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं।

कंपनी की ओर से जारी इंटरनल मेल में कहा गया है कि यह कदम समूह की दीर्घकालिक विकास योजनाओं और विस्तार रणनीति को समर्थन देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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JioStar में निधि माहेश्वरी का प्रमोशन, बनीं ब्रैंड मार्केटिंग की सीनियर डायरेक्टर

मीडिया व एंटरटेनमेंट कंपनी JioStar ने निधि माहेश्वरी को ब्रैंड मार्केटिंग की सीनियर डायरेक्टर के तौर पर प्रमोट किया है।

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Published - Tuesday, 02 June, 2026
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Tuesday, 02 June, 2026
NidhiMaheshwari41

मीडिया व एंटरटेनमेंट कंपनी JioStar ने निधि माहेश्वरी को ब्रैंड मार्केटिंग की सीनियर डायरेक्टर के तौर पर प्रमोट किया है। इससे पहले वह कंपनी में ब्रैंड मार्केटिंग के डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थीं।

निधि माहेश्वरी ने अपने प्रमोशन की जानकारी एक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "मैं JioStar में सीनियर डायरेक्टर- ब्रांड मार्केटिंग के रूप में अपनी नई भूमिका शुरू करने को लेकर उत्साहित हूं।"

निधि करीब दो वर्षों से JioStar के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने दिसंबर 2024 में कंपनी जॉइन की थी और तब से ब्रैंड मार्केटिंग से जुड़े विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। JioStar से पहले वह लगभग चार वर्षों तक Disney+ Hotstar के साथ काम कर चुकी हैं। वहां भी उन्होंने ब्रैंड और मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

अपने करियर के दौरान निधि माहेश्वरी की पहचान एक अनुभवी मार्केटिंग प्रोफेशनल के रूप में रही है। Disney+ Hotstar से पहले वह Lionsgate से भी जुड़ी रही हैं। JioStar में यह नई जिम्मेदारी मिलने के साथ अब वह कंपनी की ब्रांड मार्केटिंग रणनीतियों को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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टाइम्स ग्रुप में विनीत चौहान, संजय सिंह व जंगजीत सिंह अहलावत को नई भूमिकाएं

देश के प्रमुख मीडिया समूहों में शामिल टाइम्स ग्रुप (Times Group) ने अपने प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से संगठनात्मक स्तर पर नई जिम्मेदारियों की घोषणा की है।

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Tuesday, 02 June, 2026
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देश के प्रमुख मीडिया समूहों में शामिल टाइम्स ग्रुप (Times Group) ने अपने प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से संगठनात्मक स्तर पर नई जिम्मेदारियों की घोषणा की है। इसके तहत कंपनी द्वारा विनीत चौहान, संजय सिंह और जंगजीत सिंह अहलावत को नई भूमिकाएं सौंपी गई हैं।

कंपनी की ओर से जारी इंटरनल मेल में कहा गया है कि यह पुनर्गठन जवाबदेही बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बिजनेस की बदलती जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए किया गया है। यह कदम समूह की दीर्घकालिक विकास योजनाओं और विस्तार रणनीति को समर्थन देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विनीत चौहान को रियल एस्टेट वर्टिकल की जिम्मेदारी: टाइम्स ग्रुप के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट विनीत चौहान अब समूह के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का नेतृत्व करेंगे। उनकी जिम्मेदारी ग्रुप सीईओ की निगरानी में रियल एस्टेट पोर्टफोलियो के प्रबंधन और बिक्री को आगे बढ़ाने की होगी। इसके अलावा, वह पहले की तरह टाइम्स ग्रुप के फैसिलिटी मैनेजमेंट वर्टिकल का नेतृत्व भी करते रहेंगे। इस भूमिका में उनका फोकस लागत अनुकूलन, साझा इंफ्रास्ट्रक्चर के बेहतर प्रबंधन और फैसिलिटी मैनेजमेंट से जुड़े विक्रेताओं की निगरानी पर रहेगा।

संजय सिंह संभालेंगे प्रोजेक्ट्स–ऑफिसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर वर्टिकल: टाइम्स ग्रुप ने प्रोजेक्ट्स–ऑफिसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर वर्टिकल की कमान संजय सिंह को सौंपी है। वर्तमान में वह बीपीएचसीएल (BPHCL) के सीईओ हैं और दो दशकों से अधिक समय से बीसीसीएल (BCCL) से जुड़े हुए हैं। नई भूमिका में संजय सिंह पूरे टाइम्स ग्रुप में प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन और डिलीवरी की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका ध्यान समयबद्ध क्रियान्वयन, परिचालन दक्षता और संगठनात्मक प्राथमिकताओं के अनुरूप परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि संदीप चुघ और प्रोजेक्ट टीम के सभी सदस्य अब संजय सिंह को रिपोर्ट करेंगे।

जंगजीत सिंह अहलावत बने हेड–प्रोक्योरमेंट, एनएमआई: टाइम्स ग्रुप ने जंगजीत सिंह अहलावत को हेड–प्रोक्योरमेंट, एनएमआई के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। वह समूह में खरीद प्रक्रियाओं का नेतृत्व करेंगे और लागत अनुकूलन, विभिन्न समूह कंपनियों में प्रक्रियाओं के सामंजस्य तथा बेहतर प्रोक्योरमेंट प्रथाओं को लागू करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। बेनेट यूनिवर्सिटी की प्रोक्योरमेंट टीम, जिसका नेतृत्व यश पाल नारंग कर रहे हैं, सहित टाइम्स ग्रुप की अन्य प्रोक्योरमेंट टीमें उन्हें रिपोर्ट करेंगी।

जंगजीत सिंह अहलावत के पास सप्लाई चेन मैनेजमेंट और प्रोक्योरमेंट क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया एवं मनोरंजन, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और केपीओ जैसे क्षेत्रों में काम किया है। टाइम्स ग्रुप से जुड़ने से पहले वह सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड में हेड ऑफ प्रोक्योरमेंट (नॉन-कोर) थे। इसके अलावा वह एबीपी नेटवर्क, जी एंटरटेनमेंट, भारती एयरटेल, टीसीएस, विप्रो बीपीओ और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं।

टाइम्स ग्रुप ने विश्वास जताया है कि तीनों अधिकारियों का अनुभव और नेतृत्व क्षमता संगठन के विभिन्न वर्टिकल्स को और मजबूत बनाएगी तथा समूह की दीर्घकालिक विकास रणनीति को गति देगी।

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‘Adobe India’ में इस बड़े पद से अलग हुईं प्रतिवा महापात्र

प्रतिवा महापात्र ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह अब कुछ समय का विराम लेना चाहती हैं और इसके बाद अपने प्रोफेशनल जीवन की नई यात्रा शुरू करेंगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 01 June, 2026
Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
Prativa Mohapatra

टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Adobe India की वाइस प्रेजिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतिवा महापात्र (Prativa Mohapatra) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस बारे में जानकारी अपने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। इसके साथ ही Adobe India में उनका करीब पांच वर्षों का कार्यकाल समाप्त हो गया है।

प्रतिवा महापात्र ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह अब कुछ समय का विराम लेना चाहती हैं और इसके बाद अपने प्रोफेशनल जीवन की नई यात्रा शुरू करेंगी। उन्होंने Adobe India में बिताए समय को बेहद संतोषजनक और यादगार बताया।

उन्होंने अपने संदेश में क्लाइंट्स, पार्टनर्स, सहकर्मियों और अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास ने इस यात्रा को विशेष बनाया। उन्होंने लिखा कि वह जल्द ही एक नए अध्याय के साथ वापस लौटेंगी।

प्रतिवा महापात्र सितंबर 2021 में Adobe India से जुड़ी थीं और तब से कंपनी के भारत कारोबार के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके नेतृत्व में Adobe India ने अपने कारोबार और क्लाइंट्स रिलेशंस को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें कीं।

Adobe से पहले प्रतिवा महापात्र IBM के साथ भी महत्वपूर्ण लीडरशिप भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट नेतृत्व के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है और उन्हें उद्योग जगत की प्रभावशाली लीडर्स में गिना जाता है। फिलहाल उन्होंने अपने अगले प्रोफेशनल कदम की घोषणा नहीं की है।

 

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YAAP Digital की मजबूत छलांग, राजस्व बढ़ा 21% और मुनाफे में 98% का उछाल

डिजिटल मार्केटिंग और क्रिएटर इकोनॉमी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी YAAP Digital Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है।

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Published - Monday, 01 June, 2026
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Monday, 01 June, 2026
Yaap Digital...

डिजिटल मार्केटिंग और क्रिएटर इकोनॉमी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी याप डिजिटल लिमिटेड (YAAP Digital Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) लगभग दोगुना हो गया, जबकि राजस्व और कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

कंपनी द्वारा जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, FY26 में परिचालन से प्राप्त राजस्व (Revenue from Operations) 21.2 प्रतिशत बढ़कर 184.89 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष FY25 में 152.54 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी की कुल आय (Total Income) 22.23 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 188.73 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 154.40 करोड़ रुपये थी।

सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी कंपनी के मुनाफे में देखने को मिली। FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 97.95 प्रतिशत बढ़कर 22.20 करोड़ रुपये हो गया, जबकि FY25 में यह 11.22 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी ने कारोबार के विस्तार के साथ-साथ परिचालन दक्षता को भी मजबूत किया है।

YAAP Digital खुद को डेटा, कंटेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मार्केटिंग सॉल्यूशंस के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रही है। कंपनी क्रिएटिव डेवलपमेंट, ऑडियंस डिस्कवरी, मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन, ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट, मार्केटिंग टेक्नोलॉजी और परफॉर्मेंस-आधारित मीडिया सेवाएं प्रदान करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विज्ञापनदाता अब तकनीक-संचालित और परिणाम आधारित मार्केटिंग रणनीतियों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे माहौल में AI और क्रिएटर-आधारित अभियानों पर YAAP Digital का फोकस कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बनकर उभरा है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने अपने कारोबार और ग्राहक आधार का भी विस्तार किया। कंपनी के अनुसार, वह अब 200 से अधिक ब्रांड्स के साथ काम कर रही है। उसके संचालन देश के आठ स्थानों तक फैले हुए हैं और उसके पास 400 से अधिक कर्मचारियों की टीम है। FY26 के दौरान कंपनी ने 100 से ज्यादा नए क्लाइंट्स भी जोड़े, जो उसकी सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, FY26 के नतीजे यह संकेत देते हैं कि YAAP Digital ने केवल राजस्व वृद्धि ही नहीं हासिल की, बल्कि उसे बेहतर लाभप्रदता में भी सफलतापूर्वक बदलकर दिखाया है। डिजिटल मार्केटिंग, क्रिएटर इकोनॉमी और AI-आधारित संचार समाधानों की बढ़ती मांग के बीच कंपनी ने प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत की है।

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‘टाइम्स नेटवर्क’ में निवेश अग्रवाल की वापसी, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

निवेश अग्रवाल टाइम्स नेटवर्क से पहले सीएनएन-न्यूज18 (नेटवर्क18) में गेस्ट रिलेशंस और मीडिया रिलेशंस हेड के रूप में कार्यरत थे।

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Published - Monday, 01 June, 2026
Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
Nivesh Agarwal

‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने सीनियर मीडिया प्रोफेशनल निवेश अग्रवाल को सीनियर एडिटर (एडिटोरियल एंड कंटेंट) के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में वह ‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के लिए गेस्ट रिलेशंस और मीडिया रिलेशंस का नेतृत्व करेंगे। इसके साथ ही वह नेटवर्क की विभिन्न स्ट्रैटेजिक संपादकीय पहलों और विशेष परियोजनाओं की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

बता दें कि टाइम्स नेटवर्क के साथ निवेश अग्रवाल का यह दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले भी वह अपने करियर के शुरुआती दौर में इस मीडिया समूह से जुड़े रह चुके हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उनके व्यापक अनुभव और मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

निवेश अग्रवाल टाइम्स नेटवर्क से पहले सीएनएन-न्यूज18 (नेटवर्क18) में गेस्ट रिलेशंस और मीडिया रिलेशंस हेड के रूप में कार्यरत थे। वहां उन्होंने नेटवर्क की कई प्रमुख बौद्धिक संपदाओं (आईपी), बड़े आयोजनों और विशेष पहलों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। टेलीविजन पत्रकारिता और मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ वह एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, स्टेकहोल्डर्स मैनेजमेंट, वीआईपी गेस्ट्स के समन्वय और बड़े स्तर के आयोजनों के संचालन में विशेषज्ञता रखते हैं।

पत्रकारिता में ग्रेजुएट निवेश अग्रवाल ने ‘वाईएमसीए’ से पब्लिक रिलेशंस और मार्केटिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है। इसके अलावा उनके पास एलएलबी की डिग्री भी है। मीडिया, कम्युनिकेशंस और पब्लिक रिलेशंस से जुड़े विषयों पर उनकी काफी अच्छी पकड़ है।

अपने करियर के दौरान निवेश अग्रवाल आजतक, इंडिया टुडे, टाइम्स नाउ, सीएनएन-न्यूज18, जी मीडिया, न्यूजएक्स और इंडिया न्यूज जैसे प्रतिष्ठित चैनल्स के साथ काम कर चुके हैं। इंडिया टुडे समूह में दो कार्यकालों के दौरान करीब सात वर्षों तक काम करते हुए उन्होंने संपादकीय पहुंच बढ़ाने, अतिथि प्रबंधन और प्रभावशाली कंटेंट एवं कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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DNA इंडिया की पैरेंट कंपनी को मिला नया CEO, प्रियदर्शन गर्ग ने संभाली कमान

DNA इंडिया की पैरेंट कंपनी 'डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड' ने सीनियर मीडिया प्रोफेशनल प्रियदर्शन गर्ग को अपना नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 01 June, 2026
Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
Priyadarshan5665

DNA इंडिया की पैरेंट कंपनी 'डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड' ने सीनियर मीडिया प्रोफेशनल प्रियदर्शन गर्ग को अपना नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। कंपनी के बोर्ड ने 28 मई को हुई बैठक में इस नियुक्ति को मंजूरी दी।

मिली जानकारी के अनुसार, प्रियदर्शन गर्ग 1 जून यानी आज से ही CEO का पद संभालेंगे। उन्हें कंपनी का प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी (Key Managerial Personnel) और सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा भी बनाया गया है।

प्रियदर्शन गर्ग मीडिया और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में लंबा अनुभव रखते हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर समूह में रिपोर्टर, सब-एडिटर और नेशनल कंटेंट हेड (रेडियो डिवीजन) जैसी जिम्मेदारियां संभाली हैं। इसके अलावा वह TV Today Network में प्रिंसिपल कॉरेस्पोंडेंट, UCWeb और Alibaba में चीफ एडिटर तथा जी एंटरटेनमेंट में में वाइस प्रेजिडेंट (न्यूज) के पद पर भी काम कर चुके हैं।

फिलहाल वह Indiadotcom Digital Private Limited से जुड़े हुए हैं। कंपनी के अनुसार प्रियदर्शन गर्ग को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बिजनेस ग्रोथ, रणनीतिक साझेदारियों और मीडिया कारोबार को आगे बढ़ाने का व्यापक अनुभव है।

इसी बैठक में कंपनी के बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को भी मंजूरी दी। हालांकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 236.10 लाख रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसे 1,387.16 लाख रुपये का मुनाफा हुआ था।

कंपनी को उम्मीद है कि नए नेतृत्व के साथ वह अपने डिजिटल मीडिया कारोबार को मजबूत करने और विकास की नई संभावनाओं पर काम करेगी।

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NDTV के चीफ लीगल एंड रेगुलेटरी ऑफिसर निखिल गुलियानी की सेवाएं समाप्त

न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) ने अपने चीफ लीगल एंड रेगुलेटरी ऑफिसर निखिल गुलियानी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 01 June, 2026
Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
NikhilGuilani84521

न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) ने अपने चीफ लीगल एंड रेगुलेटरी ऑफिसर निखिल गुलियानी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। कंपनी ने इस संबंध में शेयर बाजारों को जानकारी देते हुए बताया कि निखिल गुलियानी 29 मई 2026 से कंपनी से अलग हो गए हैं।

NDTV ने बीएसई और एनएसई को भेजी गई सूचना में कहा कि यह बदलाव सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत वरिष्ठ प्रबंधन (Senior Management Personnel) में परिवर्तन की श्रेणी में आता है। कंपनी के मुताबिक निखिल गुलियानी की सेवा समाप्त कर दी गई है और इसी के साथ उनका कार्यकाल भी खत्म हो गया है।

फाइलिंग के अनुसार, निखिल गुलियानी कंपनी में चीफ लीगल एंड रेगुलेटरी ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। उनकी सेवा समाप्ति 29 मई 2026 से प्रभावी हो गई है।

कंपनी ने इस बदलाव की जानकारी नियामकीय आवश्यकताओं के तहत शेयर बाजारों को दे दी है। हालांकि फाइलिंग में उनकी सेवा समाप्त किए जाने के पीछे किसी विस्तृत कारण का उल्लेख नहीं किया गया है।

यह जानकारी NDTV की कंपनी सचिव और कंप्लायंस ऑफिसर परिनीता भूटानी दुग्गल की ओर से जारी की गई है।

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