इसका मतलब यह है कि अदालत के सामने मौजूद सबूत यह दिखाते हैं कि उमर और शरजील के भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने में भूमिका निभाई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया है, जबकि इसी मामले में पाँच अन्य आरोपियों को ज़मानत मिल गई है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने लिखा, सुप्रीम कोर्ट के आज के फ़ैसले में उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार किया गया है। इस पर बहस चाहे जितनी हो, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को समझना ज़रूरी है। अदालत ने साफ़ कहा है कि पहली नज़र में यूएपीए के तहत मामला बनता है और साज़िश तथा भड़काऊ भाषणों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इसका मतलब यह है कि अदालत के सामने मौजूद सबूत यह दिखाते हैं कि उमर और शरजील के भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि बलात्कार और हत्या के दोषी राम रहीम को अब तक 405 दिनों की पैरोल कैसे और क्यों मिल चुकी है।
क्या क़ानून सभी के लिए समान है, या फिर कुछ लोगों के लिए अलग मानदंड अपनाए जाते हैं? आपको बता दें, अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी यूएपीए के तहत दर्ज मामले में अपेक्षित मानदंड पर खरे नहीं उतरते हैं, इसलिए उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा, लेकिन वे एक साल बाद या संरक्षित गवाहों के बयान के पूरा होने के बाद पुनः जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आज का फ़ैसला कि उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत नहीं दी जाएगी, इस पर बहस चाहे जैसी और जितनी हो जाए, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत के फ़ैसले को समझना ज़रूरी है. अदालत ने साफ़ कहा कि prima facie UAPA के तहत मामला बनता है, और साज़िश एवं भड़काऊ भाषणों को हल्के में… pic.twitter.com/RwMnl5j7ak
— Rana Yashwant (@RanaYashwant1) January 5, 2026
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर भारत रूसी तेल के मसले पर उनके अनुरूप सहयोग नहीं करता है तो अमेरिका जल्दी से टैरिफ बढ़ा सकता है, जिससे भारत को भारी नुकसान हो सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा है कि 'मोदी एक अच्छे आदमी हैं' और 'वे जानते थे कि मैं खुश नहीं था।' ट्रंप यह बात 5 जनवरी 2026 को वॉशिंगटन से फ्लोरिडा में एयर फ़ोर्स वन पर मीडिया से बातचीत में कह रहे थे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान का वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने विश्लेषण किया है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट की और लिखा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 'अच्छे आदमी' हैं, लेकिन यह बात उन्होंने इस संदर्भ में कही कि मोदी उन्हें खुश करना चाहते थे, इसलिए भारत ने रूस से तेल आयात कम किया। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव में भारत को झुकना पड़ा।
मामला यहीं खत्म नहीं होता, क्योंकि ट्रंप के मुताबिक अमेरिका आगे भी भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है, यानी भारत के लिए मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। वेनेजुएला में आक्रामक कार्रवाई के बाद अमेरिका की नजरें कोलंबिया, ईरान और अन्य देशों पर भी बताई जा रही हैं। ‘डॉन’ डोनाल्ड ट्रंप अब खुद को एक तरह का ‘अंतरराष्ट्रीय डॉन’ बनाने की कोशिश में दिखते हैं।
इसका असर यह भी हो सकता है कि ताइवान के मुद्दे पर चीन और यूक्रेन के मामले में रूस को खुली छूट मिल जाए। ऐसे माहौल में सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इस स्थिति का फायदा उठाकर संसद में किए गए अपने वादे-पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी?
आपको बता दें, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर भारत रूसी तेल के मसले पर उनके अनुरूप सहयोग नहीं करता है तो अमेरिका जल्दी से टैरिफ बढ़ा सकता है, जिससे भारत को भारी नुकसान हो सकता है। ट्रंप की इस टिप्पणी को व्यापारिक दबाव और रणनीतिक कूटनीति दोनों की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ‘अच्छे आदमी है” - अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया।
— Ajay Kumar (@AjayKumarJourno) January 5, 2026
लेकिन context ये था - प्रधानमंत्री मोदी, मुझे खुश करना चाहते थे, इसलिए भारत ने रूस से तेल import करना कम किया - ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया।
मतलब, भारत ने अमेरिकी #tariff के आगे घुटने टेक दिये।… pic.twitter.com/5BNcLA1zTj
अपने इस फैसले के बारे में सूचना देते हुए सौरभ द्विवेदी ने दो ट्वीट किए हैं। जिनमें से एक में उन्होंने यहां से ‘अलग होने’ और दूसरे में उन्होंने एक ‘अल्पविराम के बाद नई यात्रा’ का इशारा किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडिया टुडे समूह में संपादक और डिजिटल प्लेटफॉर्म द लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने यहां से अलविदा कह दिया है। सौरभ द्विवेदी लंबे वक्त से इंडिया टुडे से जुड़े हैं। वह द लल्लनटॉप के संस्थापक संपादक हैं। उनके नेतृत्व में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी मीडिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
इस जानकारी के सामने आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी एक पोस्ट कर कहा कि ‘द लल्लनटॉप’ वाकई एक ट्रेंडसेटर रहा है। उन्होंने लिखा, सौरभ, हम सब आपको बहुत याद करेंगे और मैं तो आपको और भी ज़्यादा मिस करूँगा। मेरे लिए ‘नेता नगरी’ हमेशा एक खास शो रहेगा और ‘द लल्लनटॉप’ वाकई एक ट्रेंडसेटर रहा है।
उम्मीद है कि आगे चलकर हमारे रास्ते फिर मिलेंगे। आपको ढेरों शुभकामनाएँ और ईश्वर का आशीर्वाद। आपको बता दें, अपने इस फैसले के बारे में सूचना देते हुए सौरभ द्विवेदी ने दो ट्वीट किए हैं। जिनमें से एक में उन्होंने यहां से ‘अलग होने’ और दूसरे में उन्होंने एक ‘अल्पविराम के बाद नई यात्रा’ का इशारा किया है। फिलहाल, सौरभ के लल्लनटॉप से अलग होने की वजहें साफ नहीं हो पाई हैं। साथ ही उनके आगामी निर्णय को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
We will all miss you @saurabhtop and I will miss you even more. For me,Neta Nagri will always remain a special show . And @TheLallantop a real trend setter. Hopefully our paths will cross again. Good luck and god bless!⭐️? https://t.co/vQHigVZEOT
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) January 5, 2026
बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में एक हिंदू व्यापारी और पत्रकार की गोली मारकर और गला रेतकर हत्या कर दी गई। यह घटना अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सोमवार शाम का है, जब जेस्सोर जिले में एक हिंदू व्यापारी और पत्रकार की बेहद नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों में भय पैदा किया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक की पहचान 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है, जो जेस्सोर जिले के केशबपुर उपजिला स्थित अरुआ गांव के निवासी थे। बैरागी मोनिरामपुर क्षेत्र के कोपलिया बाजार में बर्फ बनाने की एक फैक्टरी संचालित करते थे। इसके साथ-साथ वे नरैल से प्रकाशित दैनिक बीडी खबर नामक समाचार पत्र में कार्यवाहक संपादक की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे।
प्रथम आलो और BDNews24 की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम करीब 5:45 बजे मोटरसाइकिल पर सवार तीन हमलावर बैरागी को फैक्टरी से बाहर बुलाकर बाजार के पश्चिमी हिस्से में ले गए। वहां सुनसान गली में पहले उनके सिर में नजदीक से गोलियां मारी गईं और उसके बाद गला रेत दिया गया।
हमलावर वारदात के बाद मौके से फरार हो गए और बैरागी की वहीं मौत हो गई। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पीछे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और हमलावरों की तलाश जारी है।
विवाद के बीच बीसीसीआई ने बांग्लादेश के खिलाडि़यों की आइपीएल में भागीदारी पर चुप्पी साध रखी है। बीसीसीआई ने आइपीएल में बांग्लादेशी खिलाडि़यों की भागीदारी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने को लेकर कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के मालिक और अभिनेता शाहरुख खान विवादों में घिर गए हैं। आध्यात्मिक गुरु रामभद्राचार्य और कथावाचक देवकी नंदन के विरोध के बाद अब भाजपा और शिवसेना नेताओं ने कहा कि वे रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) में नहीं खेलने देंगे।
इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, तो सोशल मीडिया पर बेरोज़गार राइट विंग आईटी सेल (और टीवी न्यूज़ के कमांडो) ने आईपीएल में केकेआर के लिए मुस्तफिज़ुर रहमान को साइन करने पर शाहरुख़ ख़ान को ‘देशद्रोही’ कहना शुरू कर दिया है।
यह बेहद अजीब और बेवकूफ़ी भरा है। पहली बात, आईपीएल एक निजी टूर्नामेंट है, कोई सरकारी आयोजन नहीं। दूसरी, भारत और बांग्लादेश के बीच मज़बूत कूटनीतिक रिश्ते हैं और पिछले कुछ दिनों में भारतीय अधिकारी बांग्लादेशी नेताओं के साथ खुलेआम दिखे हैं। तीसरी, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर भारत सरकार और बीसीसीआई पाकिस्तान के साथ मैचों को हरी झंडी देते हैं, तो आईटी सेल तब क्या कहेगा?
चौथी, बांग्लादेशी हिंदुओं पर हमलों का मुद्दा भारत को ज़रूर उठाना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद की तरह यहां राज्य की मिलीभगत का कोई ठोस सबूत नहीं है। पाँचवीं, मुस्तफिज़ुर एक बेहतरीन गेंदबाज़ हैं और आईपीएल खेलने के हक़दार हैं। और आख़िरी बात हम जिस खेल से प्यार करते हैं, उसे भटकाने वाले हथियारों से दूर रखिए।
आपको बता दें, विवाद के बीच बीसीसीआई ने बांग्लादेश के खिलाडि़यों की आइपीएल में भागीदारी पर चुप्पी साध रखी है। बीसीसीआई ने आइपीएल में बांग्लादेशी खिलाडि़यों की भागीदारी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
So the unemployed RW IT cell on social media (and the tv news commandoes) have turned on @iamsrk and called him a ‘traitor’ for signing on Mustafizur Rahman for KKR in IPL. Bizarre and idiotic! 1) IPL is a private tournament , not state sponsored 2) we have well established and…
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) January 2, 2026
उद्धव ने राजनीति में विचारधारा से समझौता करके इतना बड़ा यू टर्न ले लिया है कि अब वहाँ से उद्धव की वापसी मुमकिन नहीं है। बीएमसी में अब बीजेपी और एकनाथ शिंदे की सरकार बनने जा रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग की ओर से मुंबई की बीएमसी सहित राज्य के 29 महानगर पालिकाओं में चुनाव के लिए 'आचार संहिता लागू' को लागू कर दिया गया है। महाराष्ट्र में मुंबई समेत 29 नगर के लिए चुनाव 15 जनवरी, 2026 को शुरू होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर का कहना है कि बीएमसी में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की सरकार बनेगी।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, मराठी अस्मिता के दम पर 1996 में शिवसेना ने मुंबई में अपना मेयर बनाया और लगातार 26 साल मेयर पद पर क़ब्ज़ा जमाए रखा। जिस मातोश्री से बाला साहेब ठाकरे ने मराठी अस्मिता के दम पर पूरी मुंबई पर राज किया, उसी मातोश्री में बैठकर उद्धव ठाकरे अब अपने सामने बीएमसी को अपने हाथ से फिसलता देख रहे हैं।
बाला साहेब ठाकरे की अर्जित लोकप्रियता और उनकी बनाई शिवसेना को उनके बेटे उद्धव ठाकरे सहेज नहीं सके और एक सच्चे शिवसैनिक एकनाथ शिंदे से मात खा गए।विचारधारा से भटके और केंद्र और राज्य में सत्ता की लड़ाई हार कर लहूलुहान हो चुके उद्धव ठाकरे अब बीएमसी चुनावी रणक्षेत्र में अपने जख्मों को निहार रहे है और राज ठाकरे को साथ लेकर वापसी के लिए छटपटा रहे है।
शिवसेना ऐसी पार्टी है जिसके कार्यकर्ताओं का उल्लास और जीवंतता ही उसकी जीवनशक्ति है। लेकिन उद्धव ऐसे शख्स रहे है जिनकी फितरत उस वक्त भी अपने खोल में दुबक जाने की रही है, जब जमीन के साथ धड़कते हुए शिवसैनिको के साथ जुड़ाव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उद्धव की यही खासियत उनकी दुखती रग है और पराजय का कारण है।
महाराष्ट्र में मराठीयों के रगो में बहने वाली शिवसेना मातोश्री से निकलकर अब एकनाथ शिंदे के घर पहुँच चुकी है। 16 जनवरी को बीएमसी में बीजेपी और एकनाथ शिंदे मिलकर अपना मेयर बनाने जा रहे हैं। उद्धव के पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
उद्धव ठाकरे सब कुछ गवाने के मुहाने पर खड़े हैं। उद्धव ने राजनीति में विचारधारा से समझौता करके इतना बड़ा यू टर्न ले लिया है कि अब वहाँ से उद्धव की वापसी मुमकिन नहीं है। बीएमसी में अब बीजेपी और एकनाथ शिंदे की सरकार बनने जा रही है।
मराठी अस्मिता के दम पर 1996 में शिवसेना ने मुंबई में अपना मेयर बनाया और लगातार 26 साल मेयर पद पर क़ब्ज़ा जमाए रखा।
— sameer chougaonkar (@semeerc) January 2, 2026
जिस मातोश्री से बाला साहेब ठाकरे ने मराठी अस्मिता के दम पर पूरी मुंबई पर राज किया, उसी मातोश्री में बैठकर उद्धव ठाकरे अब अपने सामने बीएमसी को अपने हाथ से फिसलता देख…
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि अन्य रिपोर्ट्स में यह संख्या 13 बताई जा रही है। 149 से अधिक लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभास है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि अन्य रिपोर्ट्स में यह संख्या 13 बताई जा रही है। 149 से अधिक लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
हाल ही में, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक पत्रकार द्वारा मौतों पर सवाल पूछे जाने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद खूब हंगामा हुआ। इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय दी।
उन्होंने लिखा, अब समय आ गया है कि भाजपा के नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए। जब असहज सवाल पूछे जाते हैं, तो कई अनुभवी मंत्री और नेता अपनी भाषा पर नियंत्रण खो देते हैं। यही नहीं, मध्य स्तर के कार्यकर्ताओं में भी घमंड और बदतमीज़ी बढ़ती दिख रही है। सवाल यह है कि क्या यह झुंझलाहट की निशानी है या फिर सत्ता का घमंड? सच्चाई यह है कि अहंकार अंत में नुकसान और पीड़ा ही देता है।
आपको बता दें, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद अस्पताल जाकर मरीजों का हालचाल जाना और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए। इलाके के मेयर ने माना कि ड्रेनेज का पानी लीकेज के कारण पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल गया था, जिससे डायरिया और उल्टी का प्रकोप फैला।
I feel the time has come for the @BJP4India leadership to do some introspection over the way their experienced ministers and leaders are losing control over their language when confronted with uncomfortable questions. Even the middle level functionaries are become arrogant and… https://t.co/K5SfepWBgq
— PrabhuChawla (@PrabhuChawla) January 1, 2026
एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी ने इस पर सवाल किया, तो विजयवर्गीय ने आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और ‘फोकट सवाल मत पूछो’ जैसा जवाब दे दिया, जिसका वीडियो वायरल हो गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों और बीमारी को लेकर भाजपा नेता और नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया में विवादित बयान देकर सुर्खियों में आ गए हैं। हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर खेद भी प्रकट किया। इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर कहा कि यह मामला सिर्फ माफ़ी का नहीं है।
उन्होंने लिखा, जिस शहर को लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बताया जाता है, वहाँ जहरीला पानी पीने से लोगों की मौत पर सवाल उठाना कैलाश विजयवर्गीय को बेवजह का सवाल लगता है। वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने माफी तो मांग ली, लेकिन सच्चाई यह है कि कैलाश विजयवर्गीय ऐसे बयान बार-बार देते आए हैं और इसलिए उन्हें ‘सीरियल ऑफेंडर’ कहा जाता है।
उनकी बदज़बानी और गैर-जिम्मेदार सोच के किस्से पहले से ही मशहूर हैं, इसलिए यह मामला सिर्फ माफी का नहीं है। इस पूरे प्रकरण में अनुराग द्वारी ने एक पत्रकार के रूप में अपना धर्म निभाया और यह भी ध्यान देने वाली बात है कि वह उसी एनडीटीवी इंडिया के पत्रकार हैं, जो अब गौतम अडानी समूह के स्वामित्व में है। दुर्भाग्य यह है कि ऐसे व्यक्ति को न तो भाजपा कोई सख्त सज़ा दे पा रही है और न ही जनता। जनता उन्हें चुनकर भेज देती है और पार्टी मंत्री बना देती है। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
आपको बता दें, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में जहरीले पानी के कारण अब तक कम से कम 8–10 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, लेकिन जब एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी ने इस पर सवाल किया, तो विजयवर्गीय ने आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और ‘फोकट सवाल मत पूछो’ जैसा जवाब दे दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
जिस शहर को देश में सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा लगातार मिला हो, वहां जहरीला पानी पीने से लोगों की मौत होने पर सवाल पूछना @KailashOnline को फोकट का सवाल लगता है। वीडियो सार्वजनिक हो गया तो कैलाश विजयवर्गीय ने माफी मांग ली, लेकिन सच यही है कि, कैलाश विजयवर्गीय “Serial Offender” है। इस… pic.twitter.com/fbpYwusAel
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी ??Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) January 1, 2026
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर सवाल पूछने वाले पत्रकार से बदसलूकी के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को माफी मांगनी पड़ी। यह मामला मीडिया की ताकत और जवाबदेही की अहम मिसाल बन गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सवाल पूछना एक पत्रकार के लिए भारी पड़ गया था, लेकिन अब उसी सवाल ने सत्ता को झुकने पर मजबूर कर दिया। मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आखिरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी है।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया के सवाल के जवाब में उनके शब्द अनुचित थे और इसके लिए उन्होंने खेद जताया। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने को लेकर सवाल किया।
सवाल के जवाब में मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। पत्रकार संगठनों और आम लोगों ने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की। बढ़ते दबाव के बीच मंत्री विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए कहा कि वे और उनकी टीम लगातार प्रभावित इलाकों में काम कर रही है और जनता की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि अगर मीडिया सवाल न पूछता, तो क्या जवाबदेही तय होती?यह माफी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता की जीत मानी जा रही है जो सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखती है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना ही सबसे बड़ा हथियार है, और जब मीडिया एकजुट होता है, तो सत्ता को जवाब देना ही पड़ता है।
मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ।
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 31, 2025
लेकिन जब…
इसी वजह से कंपनियों ने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव भी घोषित किये हैं, लेकिन वर्कर्स का कहना है कि यह असली समस्याओं का समाधान नहीं है और सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देशभर के गिग वर्कर्स यानी फूड और क्यूिक कॉमर्स डिलीवरी कर्मियों ने नए साल की पूर्व संध्या 31 दिसंबर 2025 को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया। गिग वर्कर्स यूनियन का कहना है कि 10 मिनट डिलीवरी मॉडल और भुगतान संरचना उनके लिए असुरक्षित व अनंत लाभकारी नहीं है, इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने भी अपनी राय दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, मुझे एक भी वजह नहीं दिखती कि किसी चीज़ की डिलीवरी हमें दस मिनट में ही क्यों चाहिए। मैं गिग वर्कर्स की इस मांग का पूरी तरह समर्थन करती हूँ कि इस शर्त को खत्म किया जाए।
सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे शहरों में ट्रैफिक और गड्ढों से जूझ रहे डिलीवरी कर्मियों के लिए यह अपेक्षा असुरक्षित है और उनकी जान को खतरे में डालने वाली है। आपको बता दें, पहले हुए हड़तालों में लगभग 40,000 डिलीवरी कर्मियों ने भाग लिया था और इस बार करीब 1.7 लाख से ज़्यादा कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
इसी वजह से कंपनियों ने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव भी घोषित किये हैं, लेकिन वर्कर्स का कहना है कि यह असली समस्याओं का समाधान नहीं है और सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।
Can’t see one reason why we need anything delivered to us in ten minutes. Completely support gig workers demand to lose this requisite. Above all, it’s an unsafe ask from delivery staff in our cities dogged as they are by traffic and potholes.
— barkha dutt (@BDUTT) December 31, 2025
भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह समझौता राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि सीटों के इस बंटवारे से महायुति में भाजपा का प्रभुत्व साफ़ दिख रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव 2026 की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और सियासी हलचल तेज़ हो गई है। महाराष्ट्र की बृहन्मुंबई नगर निगम के 227 वार्डों पर चुनाव 15 जनवरी 2026 को होंगे और 16 जनवरी को नतीजे आएँगे, जिससे लंबे समय के बाद शहर में सत्ता की दिशा तय होगी।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का कहना है कि महाराष्ट्र जैसा राज्य शायद ही कोई हो, जहाँ गठबंधन इतनी तेजी से बदलते हों। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, पवार परिवार जैसा उदाहरण भी राजनीति में कम ही मिलता है। लोकसभा और विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार गुट) कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के साथ है, जबकि एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए के साथ खड़ी है।
लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नगर निगम चुनावों में पवार परिवार एक साथ आकर भाजपा और कांग्रेस-शिवसेना दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहा है। मुंबई में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है, जबकि पुणे में वह शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के साथ गठबंधन कर रही है। भाजपा भी कहीं अकेले तो कहीं गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। यही राजनीति की पुरानी सच्चाई है।
यहाँ न कोई स्थायी दोस्त होता है, न स्थायी दुश्मन, केवल स्थायी हित होते हैं। आपको बता दें, महायुति के घटक भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने सीट शेयरिंग फाइनल कर ली है—भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह समझौता राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि सीटों के इस बंटवारे से महायुति में भाजपा का प्रभुत्व साफ़ दिख रहा है।
Political gyaan: No state quite like Maharashtra when it comes to shifting alliances and no one quite like Pawars. NCP (SP) with Cong and Shiv Sena (UBT) in Lok Sabha and Vidhan Sabha while NCP (Ajit Pawar) is with NDA. But in Pune and Pimpri Chinchwad municipal elections,…
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) December 30, 2025