प्रसार भारती ने 17 रीजनल टीवी चैनल्स को 'डीडी फ्री डिश' पर मुफ्त प्रसारण के लिए चुना

प्रसार भारती ने अपने हालिया एलॉटमेंट प्रोसेस के तहत 17 रीजनल टीवी चैनल्स को 'डीडी फ्री डिश' के MPEG-4 प्लेटफॉर्म पर पायलट आधार पर 31 मार्च, 2026 तक मुफ्त प्रसारण के लिए चुना है।

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Friday, 02 January, 2026
DD Free Dish


देश के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती ने अपने हालिया एलॉटमेंट प्रोसेस के तहत 17 रीजनल टीवी चैनल्स को 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) के MPEG-4 प्लेटफॉर्म पर पायलट आधार पर 31 मार्च, 2026 तक मुफ्त प्रसारण के लिए चुना है। यह घोषणा प्रसारक की 93वीं एलॉटमेंट राउंड के हिस्से के रूप में की गई है।

इस कदम का मकसद पूरे भारत में दर्शकों तक क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट की पहुंच बढ़ाना है और भारत के मुफ्त-टीवी (Free-to-Air) प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को अधिक विकल्प देना है।

पायलट योजना में शामिल प्रमुख चैनल्स में TV9 Kannada, Public TV (Kannada), Mazhavil Manorama (Malayalam) जैसे स्थापित नाम शामिल हैं। इसके अलावा बंगाली भाषी चैनल्स में ABP Ananda, R. Bangla, TV9 Bangla, R Plus Gold, Kolkata TV, R Plus Bengali, Enterr 10 Bangla और Khushboo Bangla को भी शामिल किया गया है।

अन्य क्षेत्रीय चैनल्स में Kanak News (Odia), ABP Majha और 9X Jhakaas (Marathi), ABP Asmita और Gujarat First (Gujarati), News State Punjab-Haryana-Himachal (Punjabi) जैसे नाम शामिल हैं।

इस पायलट योजना के तहत, ये चैनल DD Free Dish के MPEG-4 फीड्स पर मुफ्त में प्रसारित होंगे, यानी उन्हें इस अवधि में किसी प्रकार का कैरिज फीस नहीं चुकाना होगा।

यह सूची दर्शाती है कि प्रसार भारती क्षेत्रीय प्रसारण को मजबूत करने और 'डीडी फ्री डिश' सब्सक्राइबर्स के लिए कंटेंट को विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि लंबे समय के लिए स्लॉट एलॉटमेंट के नियमों के अंतिम रूप देने से पहले दर्शकों को अधिक विकल्प मिल सकें। 

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Balaji Telefilms ने पंकज चतुर्वेदी को बनाया नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

यह नियुक्ति 5 साल के लिए होगी और इसे बोर्ड ने नॉमिनेशन और रिम्यूनरेशन कमिटी की सिफारिश के आधार पर मंजूरी दी है। लेकिन यह नियुक्ति अंतिम तभी होगी जब कंपनी के सदस्यों से इस पर मंजूरी मिल जाएगी।

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Friday, 02 January, 2026
PankajChaturvedi7845

बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) के बोर्ड ने 30 दिसंबर, 2025 को एक अहम फैसला लिया है। बोर्ड ने पंकज बैकुंठनाथ चतुर्वेदी (Baikunthnath Chaturvedi) को कंपनी का नॉन एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Non-Executive Independent Director) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 5 साल के लिए होगी और इसे बोर्ड ने नॉमिनेशन और रिम्यूनरेशन कमिटी की सिफारिश के आधार पर मंजूरी दी है। लेकिन यह नियुक्ति अंतिम तभी होगी जब कंपनी के सदस्यों से इस पर मंजूरी मिल जाएगी।

पंकज चतुर्वेदी फिलहाल Rich Products and Solutions Private Limited में इंडिया, टर्की और MENA के CEO के रूप में कार्यरत हैं। वे फूड और बेवरेज इंडस्ट्री के अनुभवी लीडर हैं और भारत, टर्की और MENA में कंपनी की रणनीतिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह रहे हैं।

उन्होंने Institute of Hotel Management, Mumbai से शिक्षा प्राप्त की है और Harvard Business School से Advanced Management Program भी किया है। उनके नेतृत्व में टीम वर्क, सीखने की संस्कृति और मजबूत बिजनेस रिलेशनशिप पर खास ध्यान दिया जाता है।

 

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Bluegod Entertainment ने 12 करोड़ में बेचे इस फिल्म के थिएटर व OTT राइट्स

कंपनी के मुताबिक, इस डील के लिए दोनों कंपनियों के बीच एक एग्रीमेंट साइन हुआ है, जिसके तहत Omega Interactive Technologies को फिल्म को थिएटर और OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने के अधिकार मिलेंगे।

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Friday, 02 January, 2026
BlueGodEntertainment874

Bluegod Entertainment Limited ने अपनी आने वाली फिल्म “रोटी, कपड़ा और इंटरनेट” के थिएटर और OTT राइट्स बेच दिए हैं। कंपनी ने बताया कि उसने यह राइट्स Omega Interactive Technologies Limited को कुल 12 करोड़ रुपये में बेचे हैं।

कंपनी के मुताबिक, इस डील के लिए दोनों कंपनियों के बीच एक एग्रीमेंट साइन हुआ है, जिसके तहत Omega Interactive Technologies को फिल्म को थिएटर और OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने के अधिकार मिलेंगे। यह डील पूरी तरह से नियमों के तहत की गई है और इसकी जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के अनुसार दी गई है।

Bluegod Entertainment का रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर में है, जबकि Omega Interactive Technologies का ऑफिस मुंबई में स्थित है। कंपनी ने साफ किया है कि यह डील फिल्म के कमर्शियल इस्तेमाल यानी थिएटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए किया गया है।

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2026 में क्या बदल सकती है भारतीय मीडिया की तस्वीर?

प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों ही माध्यमों के लिए यह समय केवल तकनीकी बदलावों का नहीं, बल्कि नीतिगत सख्ती, जवाबदेही और नियंत्रण के नए ढांचे का संकेत दे रहा है।

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Friday, 02 January, 2026
Media-2026

साल 2026 की दहलीज पर खड़ी भारतीय मीडिया इंडस्ट्री एक बार फिर बड़े बदलावों के दौर से गुजरने की तैयारी में है। प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों ही माध्यमों के लिए यह समय केवल तकनीकी बदलावों का नहीं, बल्कि नीतिगत सख्ती, जवाबदेही और नियंत्रण के नए ढांचे का संकेत दे रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई एकल या व्यापक नीति औपचारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल कंटेंट, ब्रॉडकास्टिंग और सोशल मीडिया को लेकर जो संकेत और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वे यह साफ करते हैं कि आने वाला साल मीडिया के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और OTT ने न केवल दर्शकों की आदतें बदली हैं, बल्कि कंटेंट के निर्माण, वितरण और निगरानी की पुरानी व्यवस्थाओं को भी अप्रासंगिक बना दिया है। सरकार अब इन्हीं बदलावों के अनुरूप नए नियम और कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।

डिजिटल कंटेंट पर बढ़ती नजर

2026 में मीडिया को लेकर सरकार का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल और ऑनलाइन कंटेंट पर नजर आता है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में संशोधन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है, जिसमें सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज पोर्टल, वीडियो प्लेटफॉर्म और OTT सेवाओं को अधिक सख्त दायरे में लाने की तैयारी है। खासतौर पर डीपफेक, AI-जनरेटेड वीडियो और भ्रामक कंटेंट को लेकर सरकार गंभीर है।

संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में AI या डीपफेक से बने कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य हो सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दर्शक असली और कृत्रिम रूप से बनाए गए कंटेंट के बीच अंतर कर सकें। इसके अलावा, शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने जैसी समय-सीमाएं भी तय की जा सकती हैं।

डिजिटल मीडिया के लिए इसका मतलब साफ है कि अब केवल खबर प्रकाशित करना या वीडियो अपलोड करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके स्रोत, सत्यता और तकनीकी प्रकृति की जिम्मेदारी भी प्लेटफॉर्म और पब्लिशर दोनों पर होगी।

ब्रॉडकास्टिंग कानून में बड़ा बदलाव संभव

टीवी और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर के लिए भी 2026 अहम माना जा रहा है। सरकार पुराने केबल टेलीविजन कानून की जगह एक नए व्यापक ब्रॉडकास्टिंग कानून की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें पारंपरिक टीवी चैनलों के साथ-साथ डिजिटल स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं को भी शामिल किया जा सकता है।

इस प्रस्तावित ढांचे का मकसद सभी ब्रॉडकास्टिंग प्लेटफॉर्म के लिए एक समान नियम तय करना है- चाहे वह सैटेलाइट टीवी हो या इंटरनेट के जरिए चलने वाला न्यूज चैनल। इससे लाइसेंसिंग, कंटेंट गाइडलाइंस, विज्ञापन मानक और तकनीकी अनुपालन के नियम बदल सकते हैं।

मीडिया इंडस्ट्री का एक वर्ग इसे 'लेवल प्लेइंग फील्ड' के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा वर्ग आशंका जता रहा है कि इससे सरकारी नियंत्रण और सेंसरशिप का दायरा बढ़ सकता है।

स्वतंत्र पत्रकारिता बनाम नियमन की बहस

2026 में मीडिया को लेकर सबसे बड़ी बहस स्वतंत्रता बनाम नियंत्रण की होगी। सरकार का तर्क है कि फेक न्यूज, अश्लील सामग्री और भ्रामक सूचनाओं से समाज को बचाने के लिए नियमन जरूरी है। लेकिन पत्रकारों और मीडिया संगठनों का कहना है कि अस्पष्ट परिभाषाओं वाले नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बना सकते हैं।

'अश्लील', 'हानिकारक' या 'भ्रामक' जैसे शब्दों की व्याख्या यदि स्पष्ट नहीं हुई, तो डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और स्वतंत्र पत्रकारों पर सेल्फ-सेंसरशिप का दबाव बढ़ सकता है। कई मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संवेदनशील और सत्ता से सवाल पूछने वाली पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर सरकार का रुख

नियमों की सख्ती के साथ-साथ सरकार यह भी संकेत दे रही है कि वह मीडिया के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में सहयोगी भूमिका निभाना चाहती है। कौशल विकास, नई तकनीक को अपनाने और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर सरकार और उद्योग के बीच संवाद जारी है।

हालांकि यह स्पष्ट है कि सरकार सीधे आर्थिक सब्सिडी देने के बजाय नीति और प्लेटफॉर्म स्तर पर सहयोग को प्राथमिकता दे रही है। इसका लाभ उन मीडिया संस्थानों को मिल सकता है जो तकनीक-आधारित पत्रकारिता, डेटा जर्नलिज्म और मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट पर निवेश कर रहे हैं।

आर्थिक और संचालन संबंधी असर

2026 की नीतियों का एक बड़ा असर मीडिया कंपनियों के खर्च और संचालन पर भी पड़ सकता है। नए अनुपालन नियम, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी निवेश छोटे और मध्यम डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए चुनौती बन सकते हैं। वहीं बड़े मीडिया हाउस, जिनके पास संसाधन और तकनीकी क्षमता है, वे इन बदलावों के साथ जल्दी तालमेल बिठा सकते हैं।

इससे मीडिया इंडस्ट्री में एक तरह का पुनर्संयोजन देखने को मिल सकता है, जहां छोटे प्लेटफॉर्म या तो विलय का रास्ता चुनें या अपनी रणनीति बदलें।

बच्चों की सुरक्षा

हाल ही में न्यायालयों की टिप्पणियों के बाद केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर अलग गाइडलाइंस लाने पर गंभीरता से विचार कर सकती है। मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया जैसे मॉडल पर विचार करना चाहिए, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त उम्र-आधारित नियम लागू किए गए हैं।

कोर्ट की चिंता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, अश्लील और भ्रामक कंटेंट तक आसान पहुंच, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन लत को लेकर है। इसी कड़ी में सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के प्रस्तावित नियमों में भी यह संकेत मिल चुका है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट खोलने पर माता-पिता की सहमति अनिवार्य की जा सकती है। यदि यह गाइडलाइंस लागू होती हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन, पैरेंटल कंट्रोल टूल्स और बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट फिल्टर जैसे अतिरिक्त इंतजाम करने होंगे।

माना जा रहा है कि 2026 में डिजिटल और मीडिया नीतियों को लेकर होने वाले बदलावों के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में एक अहम मुद्दा बनकर उभरेगी।

2026: चुनौती भी, मौका भी

कुल मिलाकर, 2026 भारतीय मीडिया के लिए केवल नियमों का साल नहीं होगा, बल्कि आत्ममंथन और पुनर्परिभाषा का दौर भी साबित हो सकता है। एक ओर जहां सरकार जवाबदेही और नियंत्रण पर जोर दे रही है, वहीं मीडिया के सामने यह चुनौती होगी कि वह स्वतंत्रता, विश्वसनीयता और नवाचार के बीच संतुलन बनाए।

यदि नियम पारदर्शी और स्पष्ट रहे, तो वे फेक न्यूज और गलत सूचना के खिलाफ एक मजबूत ढांचा खड़ा कर सकते हैं। लेकिन यदि अस्पष्टता और अत्यधिक नियंत्रण हावी हुआ, तो इसका असर स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक संवाद पर पड़ सकता है।

साल 2026 इसलिए अहम है क्योंकि यह तय करेगा कि भारत की मीडिया आने वाले दशक में किस दिशा में आगे बढ़ेगी- एक जिम्मेदार, तकनीक-सक्षम और विश्वसनीय मंच के रूप में या एक ऐसे क्षेत्र के रूप में जो लगातार नियामकीय दबाव से जूझता रहे। 

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विस्तार की दिशा में ‘News India’ का बड़ा कदम, अनुरंजन झा को सौंपी यूरोप ब्यूरो की कमान

अपनी बेबाकी और प्रयोगधर्मिता के लिए मशहूर वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अनुरंजन झा को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।

Last Modified:
Thursday, 01 January, 2026
Anuranjan

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज इंडिया 24X7’ ने ग्लोबल की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक बड़ी नियुक्ति की है। इसके तहत चैनल ने वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा को यूरोप का रेजिडेंट एडिटर नियुक्त किया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अनुरंजन झा ने खुद इसकी पुष्टि की है।

बता दें कि लेखक और यूनाइटेड किंगडम की ‘Gandhian Peace Society’ के चेयरपर्सन अनुरंजन झा को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। मीडिया में अपनी बेबाकी और प्रयोगधर्मिता के लिए मशहूर अनुरंजन झा चंपारण, बिहार के एक छोटे-से गाँव फुलवरिया से आते हैं। पूर्व में वह ‘इंडिया न्यूज’ के न्यूज डायरेक्टर और 'सीएनईबी' के प्रधान संपादक व सीईओ रह चुके हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट अनुरंजन झा ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। मीडिया में उनके करियर की शुरुआत ‘जनसत्ता’ से हुई। फिर ‘जी न्यूज’, ‘आजतक’ होते हुए ‘इंडिया टीवी’ लॉन्च करने में मुख्य भूमिका निभाई। फिलहाल इंगलैंड में रहते हुए भारत-यूरोप संबंधों पर शोधरत हैं।

‘भारतिका’ के संस्थापक अनुरंजन झा ने बतौर लेखक अपनी किताब ‘रामलीला मैदान’ और ‘गांधी मैदान’ से सामाजिक-राजनीतिक सच्चाई उकेरी फिर ‘झूम’ से बिहार में शराबबंदी का सच बताया है। ‘हकीकत नगर’ उनका पहला उपन्यास है, जिसमें उन्होंने 90 के दशक के दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के जीवन, उनके सपने, प्रेम और इन सबके बीच बदलते देश की परिस्थितियों को छूने की कोशिश की है।

‘न्यूज इंडिया’ में अनुरंजन झा की नियुक्ति के बारे में चैनल के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राणा यशवंत का कहना है, ‘अनुरंजन झा दृष्टि संपन्न पत्रकार हैं। उनकी भूमिका न्यूज इंडिया की लोकप्रियता आम दर्शकों के बीच बढ़ाने में कारगर सिद्ध होगी।’

वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अनुरंजन झा ने लिखा है, ‘नए साल में एक नया कदम .. बड़े भाई @RanaYashwant1 जी का आदेश कैसे टाला जा सकता है .. शुक्रिया टीम @newsindia24x7_ । नव वर्ष शुभ हो।’

समाचार4मीडिया की ओर से अनुरंजन झा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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‘PTI’ के न्यूजरूम में अहम बदलाव, CEO विजय जोशी ने स्टाफ को लिखा ईयर-एंड मैसेज

इस इंटरनल ईमेल में विजय जोशी ने न्यूजरूम के काम को सराहते हुए गिनाईं 2025 की उपलब्धियां और कहा कि नए साल में भी पीटीआई की प्राथमिकताओं पर रहेगा फोकस

Last Modified:
Thursday, 01 January, 2026
PTI.

देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' (PTI) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ विजय जोशी ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर स्टाफ को एक इंटरनल मेल लिखा है। अपने इस मेल में विजय जोशी ने वर्ष 2025 के दौरान ‘पीटीआई’ के न्यूज़रूम के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सटीक, संतुलित और विश्वसनीय पत्रकारिता का प्रदर्शन किया।

इसके साथ ही उन्होंने न्यूजरूम से जुड़े अहम बदलावों की जानकारी भी दी है। इस मेल में उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों से इन बदलावों पर काम किया जा रहा था, जिन्हें अब लागू किया जा रहा है। इसके तहत पीटीआई की टेक्स्ट और फोटो टीम के नेतृत्व को और मजबूत करने के लिए अमनप्रीत सिंह को बतौर मैनेजिंग एडिटर नियुक्त किया गया है, जो 1 जनवरी, 2026 से एजेंसी से जुड़ेंगे।

अमनप्रीत सिंह इससे पहले ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत थे और अखबार के दैनिक संस्करण की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित अमनप्रीत सिंह वकील भी हैं। उनकी रुचि मैक्रो-इकनॉमिक्स, कानून, डेटा आधारित रिपोर्टिंग और लॉन्ग-फॉर्म जर्नलिज्म में है।

मेल के अनुसार, पीटीआई की पत्रकारिता की रीढ़ माने जाने वाले सीनियर एडिटर सुधाकर नायर 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। विजय जोशी ने स्पष्ट किया कि सुधाकर नायर फिलहाल अपनी जिम्मेदारी संभालते रहेंगे और अमनप्रीत सिंह को संगठन, पीटीआई की कार्यसंस्कृति और संपादकीय प्रक्रियाओं को समझने में सहयोग करेंगे।

सुधाकर नायर ने वर्ष 1979 में नई दिल्ली में ट्रेनी सब-एडिटर के तौर पर ‘पीटीआई’ में करियर की शुरुआत की थी। करीब 47 वर्षों के पत्रकारिता करियर में उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य राजनीति से जुड़ी हजारों अहम खबरों को दिशा दी। उन्होंने 1998 से 2001 के बीच जर्मनी में पीटीआई के संवाददाता के रूप में भी सेवाएं दीं।

इस मेल में विजय जोशी ने पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसा, बिहार चुनाव, लाल किले में ब्लास्ट, करूर और बेंगलुरु की भगदड़, महाकुंभ, अमेरिकी राजनीति में बदलाव जैसे बड़े घटनाक्रमों की सटीक और संवेदनशील कवरेज का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने जीएसटी सुधार, बजट, अमेरिकी टैरिफ, इंडिगो फ्लाइट व्यवधान और महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत जैसी खबरों में पीटीआई की भूमिका को भी सराहा है।

मेल के अंत में विजय जोशी ने कहा कि वर्ष 2026 में भी पीटीआई की प्राथमिकताएं वही रहेंगी—स्पष्टता, निरंतरता, एंप्लॉयीज पर फोकस और सटीक, निष्पक्ष व भरोसेमंद पत्रकारिता। उन्होंने सभी एंप्लॉयीज और उनके परिवारों को नववर्ष की शुभकामनाएं भी दी हैं।  

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नया आरंभ, नया संकल्प (नववर्ष 2026 विशेष कविता) : डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत

यह वह क्षण होता है, जब उम्मीदें फिर से आकार लेती हैं, थकी हुई इच्छाओं को नई ऊर्जा मिलती है और मन एक बार फिर बेहतर इंसान बनने का संकल्प करता है।

Last Modified:
Thursday, 01 January, 2026
newyearpoem

नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन, संकल्प और नए रास्तों की ओर बढ़ने का अवसर है। हर नया साल हमें ठहरकर यह सोचने का मौका देता है कि हमने बीते समय से क्या सीखा, क्या खोया और क्या पाया। यह वह क्षण होता है, जब उम्मीदें फिर से आकार लेती हैं, थकी हुई इच्छाओं को नई ऊर्जा मिलती है और मन एक बार फिर बेहतर इंसान बनने का संकल्प करता है।

नया साल है- न कोई अंत, बल्कि एक नया आरंभ है।

बीते कल की परछाइयों से सीख की मशाल जलाकर,

आज हम खड़े हैं उस मोड़ पर, जहाँ भविष्य हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।

जो बीत गया-वह अनुभव था, जो मिला-वह सबक था।

हर ठोकर ने सिखाया हमें, कैसे मजबूती से खड़ा रहा जाता है।

आज का दिन कहता है- लक्ष्य तय करो!

क्योंकि जिनके पास दिशा होती है, उन्हीं के कदम इतिहास बनाते हैं।

जीवन की शुरुआत में हो या नववर्ष की पहली सुबह में-

जो लक्ष्य बनाता है, वही शिखर तक पहुँचता है।

हर दिन एक संकल्प, हर कर्म में सच्चाई,

निरंतर प्रयास की शक्ति से, लिखी जाती है सफलता की कहानी।

तो आओ- इस नए वर्ष में सत्कर्मों को अपना हथियार बनाएं,

और अपने श्रम से अपने जीवन को उसके चरम तक पहुँचाएँ।

नया साल मुबारक हो।

रचियता/लेखक - डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत

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‘Quint Digital Limited’ ने LEE में निवेश के लिए किया स्टॉक खरीद समझौता

मीडिया-टेक कंपनी ‘क्विंट डिजिटल लिमिटेड’ (QDL) ने घोषणा की है कि उसने Lee Enterprises Inc. (LEE) के साथ स्टॉक खरीद का अंतिम समझौता किया है।

Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
Quint Digital

मीडिया-टेक कंपनी ‘क्विंट डिजिटल लिमिटेड’ (QDL) ने घोषणा की है कि उसने Lee Enterprises Inc. (LEE) के साथ स्टॉक खरीद का अंतिम समझौता किया है। यह समझौता $50 मिलियन की प्राइवेट प्लेसमेंट पेशकश में भागीदारी के लिए किया गया है। LEE अमेरिका में स्थानीय समाचार देने वाला एक प्रमुख सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन प्लेटफॉर्म है।

इस रणनीतिक निवेश का नेतृत्व और एंकर इन्वेस्टर डेविड हॉफमैन कर रहे हैं, जिन्होंने लगभग $35 मिलियन के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें मौजूदा निवेशकों के साथ QDL भी शामिल है। QDL ने $3.25 प्रति शेयर की कीमत पर लगभग $7.97 मिलियन का निवेश किया है। इस लेन-देन के पूरा होने के बाद LEE में QDL की हिस्सेदारी बढ़कर 14.85 प्रतिशत हो जाएगी।

सामान्य क्लोजिंग शर्तों और शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर, लेन-देन के पूरा होते ही LEE को कुल $50 मिलियन की सकल राशि प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसमें से ट्रांजैक्शन खर्च बाद में घटाए जाएंगे।

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इफको साहित्य सम्मान 2025: वरिष्ठ कथाकार मैत्रेयी पुष्पा हुईं सम्मानित

इफको ने वर्ष 2025 के साहित्य सम्मान की घोषणा करते हुए वरिष्ठ कथाकार मैत्रेयी पुष्पा और युवा लेखिका अंकिता जैन को ग्रामीण-कृषि जीवन पर केंद्रित रचनात्मक योगदान के लिए सम्मानित किया।

Last Modified:
Tuesday, 30 December, 2025
IFFCO Sahitya Samman 2025

नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में वर्ष 2025 के इफको साहित्य सम्मान और इफको युवा साहित्य सम्मान प्रदान किए गए। उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको द्वारा यह सम्मान ग्रामीण और कृषि जीवन को केंद्र में रखने वाले लेखन के लिए दिया जाता है।

इस वर्ष वरिष्ठ हिंदी कथाकार मैत्रेयी पुष्पा को इफको साहित्य सम्मान से नवाजा गया, जबकि युवा साहित्य सम्मान अंकिता जैन को उनकी चर्चित पुस्तक ओह रे! किसान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान समारोह 30 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के कमानी सभागार में आयोजित हुआ, जहां इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दोनों लेखिकाओं को सम्मानित किया।

मैत्रेयी पुष्पा का साहित्य ग्रामीण परिवेश, स्त्री जीवन और सामाजिक यथार्थ की गहरी पड़ताल के लिए जाना जाता है। बुंदेलखंड की पृष्ठभूमि से उपजे उनके उपन्यास और कहानियां हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान रखती हैं। निर्णायक समिति ने उनके व्यापक साहित्यिक अवदान और बदलते भारतीय समाज के यथार्थ को सशक्त रूप में प्रस्तुत करने के लिए उन्हें चुना।

वहीं अंकिता जैन ने लेखन के साथ-साथ कृषि और सामाजिक सरोकारों को भी अपनी रचनाओं से जोड़ा है। ओह रे! किसान सहित उनकी पुस्तकों में समकालीन ग्रामीण संघर्षों और संवेदनाओं की स्पष्ट झलक मिलती है। इफको द्वारा 2011 से दिए जा रहे इस सम्मान के अंतर्गत सम्मानित साहित्यकार को प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और ग्यारह लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। समारोह में साहित्य, शिक्षा और कला जगत के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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‘News India’ ने नवीन कुमार को किया नियुक्त, सौंपी प्रोडक्शन की कमान

अपनी इस भूमिका में नवीन कुमार चैनल के पूरे प्रोडक्शन वर्कफ्लो की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह यह सुनिश्चित करेंगे कि कंटेंट का निर्माण और प्रसारण बिना किसी रुकावट के और उच्च गुणवत्ता के साथ हो।

Last Modified:
Tuesday, 30 December, 2025
Naveen

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज इंडिया 24X7’ ने नवीन कुमार को अपना नया प्रोडक्शन हेड नियुक्त किया है। अपनी इस भूमिका में नवीन कुमार चैनल के पूरे प्रोडक्शन वर्कफ्लो की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह यह सुनिश्चित करेंगे कि कंटेंट का निर्माण और प्रसारण बिना किसी रुकावट के और उच्च गुणवत्ता के साथ हो।

नवीन कुमार को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइन, प्रोडक्शन मैनेजमेंट, कैमरा और साउंड ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों में उनकी गहरी पकड़ है। बड़े प्रोजेक्ट्स और टीम मैनेजमेंट का उनका अनुभव चैनल की एडिटोरियल विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

नवीन कुमार का प्रोफेशनल सफर काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने ‘द अमेजिंग स्पाइडरमैन’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘किंग कॉन्ग’ जैसी बड़ी फिल्मों के लिए काम किया है। वह अरिजीत सिंह, पापोन और टी.एन. कृष्णन जैसे नामी कलाकारों के साथ भी काम कर चुके हैं। इसके साथ ही नवीन ने सोनी टीवी, ओला और नेक्सा जैसे बड़े ब्रैंड्स के लिए विज्ञापन फिल्में भी तैयार की हैं।

‘न्यूज इंडिया’ से पहले नवीन कुमार स्टार न्यूज, ईगल होम एंटरटेनमेंट और पेज 3 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं। यहां उन्होंने वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइन और प्रोडक्शन मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो नवीन कुमार मुजफ्फरपुर के आरडीएस कॉलेज से कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। इसके साथ ही उनके पास मल्टीमीडिया और एडिटिंग में डिप्लोमा भी है।

नवीन कुमार की नियुक्ति के बारे में इस मौके पर ‘न्यूज इंडिया’ के चेयरमैन शैलेन्द्र शर्मा (शालू) और सीईओ एवं एडिटर-इन-चीफ राणा यशवंत ने कहा, ‘हमें नवीन कुमार का अपनी टीम में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। प्रोडक्शन के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव चैनल के लिए एक बड़ी ताकत साबित होगा। हमें पूरा भरोसा है कि वे हमारे कंटेंट को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।’

 

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2025: मीडिया में AI बना वरदान या चुनौती, 2026 में कैसे बदलेगा पत्रकारिता का चेहरा

जिस AI को कुछ साल पहले तक भविष्य की तकनीक माना जाता था, वह 2025 में मीडिया इंडस्ट्री की रोजमर्रा की प्रक्रिया में शामिल हो गया।

Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
AI2025

साल 2025 भारतीय मीडिया के इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज हुआ, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं रहा, बल्कि न्यूजरूम, कंटेंट प्रोडक्शन और ऑडियंस एंगेजमेंट का सक्रिय हिस्सा बन गया। जिस AI को कुछ साल पहले तक भविष्य की तकनीक माना जाता था, वह 2025 में मीडिया इंडस्ट्री की रोजमर्रा की प्रक्रिया में शामिल हो गया। इसने काम को तेज, सस्ता और डेटा-आधारित बनाया, लेकिन साथ ही पत्रकारिता की विश्वसनीयता, रोजगार और नैतिकता को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए।

न्यूजरूम में AI का प्रवेश: काम करने का तरीका बदला

2025 में अधिकांश बड़े मीडिया हाउसेज ने AI टूल्स को न्यूजरूम के अलग-अलग स्तरों पर अपनाया। हेडलाइन सजेशन, ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो सबटाइटल, ट्रांसलेशन और यहां तक कि शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने में AI का इस्तेमाल आम हो गया। इससे पत्रकारों का समय बचा और न्यूज साइकल पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गया।

जहां पहले एक खबर को तैयार करने, एडिट करने और पब्लिश करने में घंटों लगते थे, वहीं AI की मदद से यह प्रक्रिया मिनटों में पूरी होने लगी। डेटा जर्नलिज्म और ट्रेंड एनालिसिस में AI ने रिपोर्टर्स को यह समझने में मदद की कि किस खबर पर पाठकों की दिलचस्पी ज्यादा है और किस एंगल से स्टोरी पेश की जानी चाहिए।

कंटेंट की रफ्तार बढ़ी, लेकिन सवाल भी

AI की वजह से कंटेंट की मात्रा में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। 2025 में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पहले से कहीं ज्यादा खबरें, वीडियो, रील्स और एक्सप्लेनर्स देखने को मिले। यह बदलाव दर्शकों के लिए विकल्पों की भरमार लेकर आया, लेकिन इसी के साथ कंटेंट की गुणवत्ता और गहराई पर सवाल भी उठे।

आलोचकों का मानना है कि AI-जनरेटेड या AI-असिस्टेड कंटेंट कई बार सतही होता है और उसमें जमीनी रिपोर्टिंग, मानवीय संवेदना और संदर्भ की कमी महसूस होती है। खासकर ब्रेकिंग न्यूज के दबाव में तथ्यात्मक गलतियों और आधी-अधूरी सूचनाओं के मामले भी सामने आए।

फैक्ट चेकिंग और डीपफेक से लड़ाई में AI की भूमिका

2025 में AI ने मीडिया के सामने एक नई चुनौती भी रखी—डीपफेक, सिंथेटिक वीडियो और फर्जी ऑडियो क्लिप्स। चुनावों और संवेदनशील राजनीतिक घटनाओं के दौरान AI-जनरेटेड फेक कंटेंट तेजी से वायरल हुआ, जिसने मीडिया की विश्वसनीयता को खतरे में डाला।

हालांकि इसी AI ने इस खतरे से लड़ने का रास्ता भी दिखाया। कई मीडिया संस्थानों ने AI-आधारित डीपफेक डिटेक्शन टूल्स अपनाए, जो वीडियो और ऑडियो की प्रामाणिकता जांचने में मदद करते हैं। फैक्ट-चेकिंग डेस्क पहले से ज्यादा टेक-सैवी हुई और गलत सूचनाओं को पकड़ने की गति भी बढ़ी।

रोजगार पर असर: डर और नए अवसर

AI के बढ़ते इस्तेमाल का सबसे बड़ा डर पत्रकारों की नौकरियों को लेकर रहा। 2025 में कई मीडिया संस्थानों ने कॉस्ट कटिंग के तहत सब-एडिटिंग, ट्रांसलेशन और कंटेंट रीपर्पजिंग जैसे कामों में AI का सहारा लिया, जिससे कुछ भूमिकाएं सीमित हुईं। लेकिन इसी के साथ नए रोल्स भी उभरे- AI एडिटर, डेटा जर्नलिस्ट, ऑडियंस एनालिस्ट और मीडिया ट्रेनर जैसे पदों की मांग बढ़ी। यह साफ हो गया कि AI पत्रकारों की जगह पूरी तरह नहीं ले रहा, बल्कि स्किल सेट बदल रहा है। जो पत्रकार तकनीक के साथ खुद को ढाल पाए, उनके लिए नए अवसर खुले।

नैतिकता और भरोसे का संकट

2025 में मीडिया में AI के बढ़ते उपयोग ने नैतिकता से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े किए। क्या AI से लिखी खबरों को पाठकों को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए? क्या एल्गोरिदम तय करेगा कि कौन सी खबर ज्यादा महत्वपूर्ण है? और क्या इससे एजेंडा संचालित पत्रकारिता को बढ़ावा मिलेगा?

कई मामलों में यह देखा गया कि एल्गोरिदम ऑडियंस एंगेजमेंट के नाम पर सनसनीखेज या ध्रुवीकरण वाली खबरों को प्राथमिकता देने लगे। इससे पत्रकारिता के मूल सिद्धांत- सार्वजनिक हित, संतुलन और जिम्मेदारी पर बहस तेज हुई।

2026 में मीडिया कैसे बदलेगा?

2026 की ओर बढ़ते हुए यह स्पष्ट है कि AI मीडिया से हटने वाला नहीं है, बल्कि और गहराई से इसमें शामिल होगा। आने वाले समय में AI केवल सपोर्ट टूल नहीं, बल्कि रणनीतिक निर्णयों का हिस्सा बनेगा। कंटेंट प्लानिंग, ऑडियंस प्रेडिक्शन और पर्सनलाइज्ड न्यूज फीड में AI की भूमिका और मजबूत होगी।

हालांकि 2026 में यह भी उम्मीद की जा रही है कि AI के इस्तेमाल को लेकर रेगुलेशन और गाइडलाइंस ज्यादा स्पष्ट होंगी। मीडिया संगठनों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और यह स्पष्ट करें कि कहां और कैसे AI का उपयोग किया गया है।

इंसानी पत्रकारिता की अहमियत और बढ़ेगी

AI के बढ़ते प्रभाव के बीच एक बात साफ होती जा रही है- ग्राउंड रिपोर्टिंग, खोजी पत्रकारिता और मानवीय कहानियों का महत्व और बढ़ेगा। AI डेटा प्रोसेस कर सकता है, लेकिन समाज की जटिलताओं, भावनाओं और नैतिक सवालों को समझने की क्षमता अभी भी इंसान के पास ही है।

2026 में वही मीडिया संस्थान आगे रहेंगे, जो AI को प्रतिस्थापन नहीं बल्कि सहयोगी के रूप में अपनाएंगे। टेक्नोलॉजी और इंसानी विवेक के संतुलन से ही भरोसेमंद पत्रकारिता संभव होगी।

निष्कर्ष: न पूरी तरह अच्छा, न पूरी तरह बुरा

2025 में मीडिया में AI की एंट्री न तो पूरी तरह वरदान साबित हुई और न ही पूरी तरह अभिशाप। इसने जहां काम को आसान और तेज बनाया, वहीं पत्रकारिता की आत्मा को लेकर नई बहसें भी खड़ी कीं। 2026 में मीडिया का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि AI का इस्तेमाल किस उद्देश्य और किस जिम्मेदारी के साथ किया जाता है।

अगर AI को पारदर्शिता, नैतिकता और सार्वजनिक हित के साथ जोड़ा गया, तो यह मीडिया को ज्यादा मजबूत और प्रभावी बना सकता है। लेकिन अगर इसे केवल मुनाफे और गति का साधन बनाया गया, तो भरोसे की कीमत चुकानी पड़ सकती है। मीडिया के लिए असली चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल की है।

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