एक दशक पहले न्यूजरूम में एडिटर की कुर्सी सबसे ताकतवर होती थी। वो तय करता था, क्या पहले पन्ने पर जाएगा, क्या दब जाएगा, किस खबर को 'ब्रेकिंग' का दर्जा मिलेगा। आज वही ताकत धीरे-धीरे किसी और के हाथ जा रही है, एक ऐसी सत्ता के हाथ जिसका कोई चेहरा नहीं, जो किसी को जवाब नहीं देती और जो हर सेकंड लाखों फैसले करती है। उसका नाम है: एल्गोरिदम (Algorithm) वैसे बता दें कि यह महज तकनीकी बदलाव नहीं है। यह पत्रकारिता के मूल ढांचे पर हमला है।
गूगल का 'जीरो-क्लिक' साम्राज्य
पहले अगर किसी को कोई खबर पढ़नी होती थी, तो वो गूगल पर सर्च करता, किसी न्यूज साइट पर जाता, और खबर पढ़ता। अब यह सफर बहुत छोटा हो गया है, इतना छोटा कि पब्लिशर तक पहुंचने की जरूरत ही नहीं रही।
गूगल के AI ओवरव्यूज ने यह खेल बदल दिया है। Similarweb के मई 2025 के डेटा के मुताबिक, गूगल पर न्यूज से जुड़े सर्च में 69% सवाल ऐसी हैं, जहां लोगों को जवाब सीधे गूगल पर ही मिल जाता है और उन्हें किसी न्यूज वेबसाइट पर क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे ‘zero-click’ सर्च कहा जाता है। मई 2024 में अमेरिका में AI Overviews लॉन्च होने से पहले यह आंकड़ा 56% था। यानी सिर्फ एक साल में इसमें 13% पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, SparkToro के 2025 डेटा के अनुसार, गूगल की कुल 58.5% सर्च बिना किसी क्लिक के ही खत्म हो जाती हैं।
इसका सीधा असर न्यूज पब्लिशर्स पर पड़ा है। Chartbeat के डेटा के अनुसार, जो 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स को ट्रैक करता है, 2025 में गूगल से आने वाला सर्च ट्रैफिक 33% तक गिर गया। यह तुलना नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच की है। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38% रही। Reuters Institute की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन रेफ्ररल में 43% तक और गिरावट आ सकती है। इनमें से करीब एक-पांचवें पब्लिशर्स को लगता है कि यह नुकसान 75% से भी ज्यादा हो सकता है।
कुछ कंपनियों पर इसका असर और गंभीर रहा। HubSpot ने अपनी organic traffic में 70 से 80% तक की गिरावट दर्ज की। वहीं, एजुकेशन प्लेटफॉर्म Chegg ने अपनी 49% नॉन-सब्सक्राइबर ट्रैफिक खो दी। इसके बाद Chegg ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कानूनी मामला दायर किया। कंपनी का आरोप है कि गूगल ने पब्लिशर्स के कंटेंट का इस्तेमाल अपने AI को ट्रेन करने में किया और अब वही AI लोगों को सीधे जवाब देकर पब्लिशर्स की जगह ले रहा है।
Pew Research Center के जुलाई 2025 के अध्ययन में 900 अमेरिकी वयस्कों की 68,879 गूगल सर्च को ट्रैक किया गया। इसमें पाया गया कि जब AI Overview दिखता है, तब सिर्फ 8% यूजर्स ही किसी ट्रेडिशनल लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15% रहता है। इतना ही नहीं, AI Overview में दिए गए लिंक पर सिर्फ 1% लोग ही क्लिक करते हैं।
Reuters Institute के सर्वे में पब्लिशर्स कानेट स्कोर -25 रहा, जब उनसे पूछा गया कि वे 2026 में गूगल सर्च पर ज्यादा काम करेंगे या कम। इसका मतलब यह है कि ज्यादातर पब्लिशर्स अब गूगल सर्च में अपना निवेश घटाने की तैयारी में हैं।
Facebook का 'War on News', और उसका अधूरा अंत
Meta ने 2018 में Facebook पर एक बड़ा बदलाव किया, जिसका असर न्यूज इंडस्ट्री पर साफ दिखा। कंपनी ने कहा कि वह लोगों के बीच “meaningful social connections” बढ़ाना चाहती है। इसके बाद Facebook ने अपने algorithm में न्यूज और सामाजिक-राजनीतिक कंटेंट को कम दिखाना शुरू कर दिया। बाद में इसे ‘War on News’ कहा गया।
University of Warsaw और University of California Davis के शोधकर्ताओं की जुलाई 2025 की एक स्टडी में 2016 से फरवरी 2025 के बीच 40 न्यूज संगठनों के 52 लाख से ज्यादा Facebook posts और करीब 787 करोड़ user reactions का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि 2021 से 2024 के बीच न्यूज पोस्ट्स पर reactions में 78% की भारी गिरावट आई, जबकि गैर-न्यूज पेजों पर engagement बढ़ती रही।
2025 में Meta ने यह policy वापस ले ली, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। Reuters Institute और Press Gazette की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 की तुलना में Facebook से न्यूज वेबसाइट्स पर आने वाला ट्रैफिक 43% तक गिर चुका था। पॉलिसी वापस लेने के बाद भी यह गिरावट पूरी तरह नहीं संभल सकी।
वहीं, X (पहले Twitter) में एलन मस्क के आने के बाद प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम ज्यादा राजनीतिक रंग में नजर आने लगा। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, X के 58% users को लगता है कि ऑनलाइन कंटेंट में असली और नकली जानकारी में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसके बावजूद, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद के बाद X पर खबरें देखने वाले लोगों की संख्या 8% पॉइंट्स बढ़ गई और यह वयस्क आबादी के 23% तक पहुंच गई।
TikTok: नया गेटकीपर
अगर गूगल और Facebook पुराने गेटकीपर्स हैं, तो TikTok नया उभरता हुआ गेटकीपर है। Reuters Institute की Digital News Report 2025 के मुताबिक, जो 48 देशों और करीब 1,00,000 लोगों पर आधारित है, TikTok न्यूज का सबसे तेजी बढ़ता प्लेटफॉर्म बन गया है। Global sample में 17% लोग TikTok पर न्यूज लेते हैं। 18 से 24 साल के युवाओं में 44% का प्राइमरी न्यूज सोर्स सोशल मीडिया है।
थाइलैंड में 49% लोग TikTok पर न्यूज देखते हैं, जो पिछले साल से 10% पॉइंट्स ज्यादा है। मलेशिया में यह 48%, केन्या में 40% है। 2026 की शुरुआत तक TikTok के वैश्विक स्तर पर 1.9 बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स हो चुके हैं।
लेकिन TikTok का एल्गोरिदम काफी सख्त तरीके से काम करता है। वह यह नहीं देखता कि किसी क्रिएटर के कितने फॉलोअर्स हैं, बल्कि यह देखता है कि वीडियो के पहले घंटे में कितने likes, comments, watch time और video completion मिले।
सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, TikTok का algorithm उन वीडियो को ज्यादा बढ़ावा देता है जो लोगों का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखें और ज्यादा इंट्रैक्शन हासिल करें। इसका असर यह होता है कि एडिटर्स और क्रिएटर्स ऐसी खबरों को प्राथमिकता देने लगते हैं जो ज्यादा अटेंशन खींचें। यानी कई बार गंभीर लेकिन धीमी खबरें दब जाती हैं, जबकि ज्यादा नाटकीय और सतही खबरें तेजी से वायरल हो जाती हैं।
News Consumption का बदलता चेहरा
पिछले पांच वर्षों में न्यूज कंजप्शन का तरीका मौलिक रूप से बदला है। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट सीधे कहती है: 2020 में 52% लोग सोशल वीडियोज के जरिए न्यूज देखते थे, जो 2025 में बढ़कर 65% हो गया। किसी भी format में वीडियो न्यूज देखने वाले 67% से बढ़कर 75% हो गए।
अमेरिका में पहली बार सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स ने टीवी न्यूज और न्यूज वेबसाइट्स दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अब 54% अमेरिकी लोग सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स के जरिए खबरें देखते हैं, जबकि टीवी न्यूज देखने वालों की संख्या 50% और न्यूज वेबसाइट्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 48% है।
Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी, प्रिंट और न्यूज वेबसाइट्स के साथ लोगों की जुड़ाव लगातार घट रहा है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है।
न्यूजरूम के अंदर: Algorithm की घुसपैठ