जागरण न्यू मीडिया से टाइम्स इंटरनेट पहुंचीं रुपसा भद्र, बनीं ‘Pregatips’ की एडिटर

डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री की जानी-मानी कंटेंट प्रोफेशनल रूपसा भद्र ने ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) के साथ नई पारी शुरू की है।

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Thursday, 28 May, 2026
Rupsa Bhadra


डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री की जानी-मानी कंटेंट प्रोफेशनल रूपसा भद्र ने ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) के साथ नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी के प्रेग्नेंसी और पैरेंटिंग फोकस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘Pregatips’ में बतौर एडिटर जॉइन किया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। अपनी पोस्ट में रूपसा भद्र का कहना है कि वह ‘Pregatips’ को आगे बढ़ाने और नए स्तर पर ले जाने को लेकर उत्साहित हैं।

रूपसा भद्र इससे पहले करीब चार वर्षों तक जागरण न्यू मीडिया के साथ जुड़ी रही थीं। यहां उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। फरवरी 2024 से मई 2026 तक वह ‘मैनेजर’ के पद पर रहीं। इस दौरान उन्होंने इमर्सिव स्टोरीज, वीडियो प्रोजेक्ट्स और ‘HerZindagi’ के लिए कम्युनिटी बिल्डिंग जैसे कई अहम प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इससे पहले वह यहां सीनियर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर की भूमिका में भी कार्यरत थीं।

अपनी पोस्ट में रूपसा भद्र ने जागरण न्यू मीडिया छोड़ने के दौरान अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और AI ओवरव्यू तथा ‘Zero-click Search’ जैसे बदलाव ऑडियंस बिहेवियर और मीडिया बिजनेस मॉडल को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने इसे अपने करियर का अहम सीखने वाला दौर बताया।

रूपसा भद्र को डिजिटल कंटेंट, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग का लंबा अनुभव है। वह ‘द क्विंट’ (The Quint), ‘सीएनएन-न्यूज18’ (CNN-News18), ‘इंडिया अहेड’ (India Ahead) और ‘मास स्टूडियोज’ (MASS Studios) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वह ‘कोलकाता ब्लॉगर्स’ (Kolkata Bloggers) और ‘द टेलिग्राफ’ (The Telegraph) से भी जुड़ी रही हैं।

उन्होंने चेन्नई स्थित एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है, जबकि जादवपुर यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस एंड अफेयर्स में स्नातक की पढ़ाई की है।

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जियोस्टार को अलविदा बोलकर ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ से जुड़ीं स्नेहा यादव

स्नेहा यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नई भूमिका में आए उन्हें करीब डेढ़ महीना हो चुका है और अब उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर साझा करने का फैसला किया है।

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Thursday, 28 May, 2026
Sneha Yadav

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की अनुभवी प्रोफेशनल स्नेहा यादव ने जियोस्टार (JioStar) को बाय बोलकर अब सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के नेटवर्क ब्रैंड सॉल्यूशंस डिवीजन में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने अपने नए सफर की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।

स्नेहा यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नई भूमिका में आए उन्हें करीब डेढ़ महीना हो चुका है और अब उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर साझा करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि जियोस्टार में उनका सफर बेहद शानदार रहा, जहां उन्हें बड़े आइडियाज, हाई-इम्पैक्ट लॉन्च, यादगार शोज और चुनौतीपूर्ण डेडलाइंस पर काम करने का मौका मिला।

उन्होंने जियोस्टार टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वहां से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। साथ ही उन्होंने सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया में अपनी नई पारी को लेकर उत्साह भी जताया।

स्नेहा यादव के पास मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इंडस्ट्री में उन्हें ब्रैंड स्ट्रैटेजी, कंटेंट इंटीग्रेशन और नेटवर्क सॉल्यूशंस की अच्छी समझ रखने वाली प्रोफेशनल के तौर पर देखा जाता है।

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ऑनलाइन गेमिंग पर सरकार की बड़ी जीत: जानिए SC के फैसले के पीछे कौन हैं एन. वेंकटरमण?

कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने बेहद आक्रामक तरीके से पैरवी की।

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Thursday, 28 May, 2026
ASGNVenkataraman

इमरान फ़ज़ल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

पिछले कुछ सालों से भारत की रियल मनी गेमिंग इंडस्ट्री एक बड़ी कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। इंडस्ट्री का कहना था कि भारी GST और सख्त नियमों से ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का पूरा बिजनेस मॉडल खतरे में पड़ सकता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े फैसलों ने इस सेक्टर की दिशा ही बदल दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु और कर्नाटक के उन कानूनों को सही ठहराया, जिनमें पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर रोक और रेगुलेशन की व्यवस्था की गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर किसी गेम में पैसे का दांव लगाया जा रहा है, तो राज्य सरकारें उस पर नियंत्रण या प्रतिबंध लगा सकती हैं, भले ही वह स्किल बेस्ड गेम ही क्यों न हो।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मद्रास और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन फैसलों को पलट दिया, जिनमें इन कानूनों के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “बेटिंग और गैंबलिंग” यानी सट्टेबाजी और जुए की संवैधानिक परिभाषा को सिर्फ किस्मत वाले खेलों तक सीमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, जैसे ही किसी खेल में पैसे लगते हैं, वहां जुए का तत्व जुड़ जाता है, फिर यह मायने नहीं रखता कि खेल स्किल का है या चांस का।

कोर्ट ने कहा, “जब पैसे दांव पर लगते हैं, तो खेल की प्रकृति कम महत्वपूर्ण हो जाती है। लालच, लत और ज्यादा कमाने की चाह मुख्य मुद्दा बन जाते हैं।”

यह फैसला ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए इसलिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कंपनियां अब तक पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर यह तर्क देती रही थीं कि स्किल गेम्स को जुए की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राज्य सरकारों को ऐसे गेम्स को रेगुलेट या बैन करने का पूरा अधिकार है, अगर उनमें पैसे का दांव शामिल हो।

इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के GST मामले में भी सरकार के पक्ष को मजबूती दी। वहीं, कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने बेहद आक्रामक तरीके से पैरवी की। 

दरअसल, कोर्ट में सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या स्किल बेस्ड गेम्स, यानी कौशल आधारित खेल, पैसे लगने के बाद भी सिर्फ गेम माने जाएंगे या फिर उन्हें जुए की श्रेणी में रखा जाएगा। सरकार की ओर से वेंकटरमण ने साफ कहा कि जैसे ही किसी खेल में पैसे का दांव लगता है, उसका कानूनी स्वरूप बदल जाता है।

उन्होंने कोर्ट में “जुए के सात सूत्र” पेश किए। उनका तर्क था कि जुआ बिना दांव के हो ही नहीं सकता और अगर किसी खेल में पैसे लगाए जा रहे हैं, तो फिर यह मायने नहीं रखता कि वह स्किल का खेल है या किस्मत का। उनके मुताबिक, स्किल गेम्स अपने आप में जुआ नहीं हैं, लेकिन जब उन पर पैसे लगाए जाते हैं तो वह जुए की श्रेणी में आ जाते हैं।

सुनवाई के दौरान वेंकटरमण ने फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर मेसी खुद इस बात पर दांव लगाएं कि वह मैच में चार गोल करेंगे, तब भी यह जुआ ही माना जाएगा क्योंकि नतीजा अनिश्चित है। इसी तरह उन्होंने घुड़दौड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही यह स्किल गेम माना जाता हो, लेकिन इस पर दांव लगाना जुआ ही है।

कोर्ट में उनका एक बयान काफी चर्चा में रहा- “पासे का खेल आखिरकार बुराइयों के खेल तक पहुंचता है।” इस लाइन के जरिए सरकार ने ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग को सिर्फ तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक जोखिम के तौर पर पेश करने की कोशिश की।

वेंकटरमण ने गेमिंग कंपनियों के उस तर्क को भी चुनौती दी, जिसमें कंपनियां खुद को सिर्फ टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बताती थीं। उन्होंने कहा कि ये कंपनियां सिर्फ खिलाड़ियों को जोड़ने का काम नहीं करतीं, बल्कि पैसे के पूरे लेनदेन, प्राइज वितरण और नियम तय करने में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

GST को लेकर भी सरकार ने साफ किया कि टैक्स कानून स्किल और चांस गेम्स में कोई फर्क नहीं करता। सरकार का कहना था कि यहां मुद्दा जुए का नहीं, बल्कि पैसे लगाकर खेले जाने वाले गेम्स पर टैक्स का है। सुप्रीम कोर्ट ने अब सरकार की इसी व्याख्या को सही माना है।

इस फैसले के बाद ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर टैक्स और नियमों का दबाव और बढ़ सकता है। इंडस्ट्री पहले ही बढ़े हुए GST, निवेशकों की चिंता और बढ़ती लागत से जूझ रही है। वहीं कानूनी हलकों में इस फैसले को एन. वेंकटरमण की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने कोर्ट में सरकार का पक्ष बेहद रणनीतिक तरीके से रखा।

 

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BW FM Summit & Awards: स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और नए दौर की लीडरशिप का बड़ा मंच

भारत में तेजी से बदलते वर्कप्लेस कल्चर और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में अब फैसेलिटी मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन सेक्टर की नई पीढ़ी के लीडर्स को सम्मान देने की तैयारी हो रही है।

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Thursday, 28 May, 2026
BWFacilityManagment521

भारत में तेजी से बदलते वर्कप्लेस कल्चर और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में अब फैसेलिटी मैनेजमेंट (Facility Management) और एडमिनिस्ट्रेशन सेक्टर की नई पीढ़ी के लीडर्स को सम्मान देने की तैयारी हो रही है। इसी कड़ी में BW Businessworld जल्द ही ‘BW FM 40 Under 40 Summit & Awards 2026’ का आयोजन करने जा रहा है।

यह कार्यक्रम देश के उन युवा प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री लीडर्स को एक मंच पर लाएगा, जो आधुनिक, स्मार्ट, टिकाऊ और कर्मचारी-केंद्रित वर्कप्लेस बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इस समिट में कॉरपोरेट एडमिनिस्ट्रेशन, फैसिलिटी मैनेजमेंट, वर्कप्लेस स्ट्रैटेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और ऑपरेशंस से जुड़े कई बड़े नाम हिस्सा लेंगे। आयोजन का मुख्य फोकस भविष्य के वर्कप्लेस, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर रहेगा।

कार्यक्रम में 40 से ज्यादा युवा लीडर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल होंगे। इनमें बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों, रियल एस्टेट फर्म्स, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और सर्विस ऑर्गेनाइजेशंस के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।

इस साल समिट की थीम रखी गई है — “Building Intelligent, Sustainable & Future-Ready Workplaces”। यानी ऐसा वर्कप्लेस तैयार करना जो स्मार्ट भी हो, पर्यावरण के अनुकूल भी और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से पूरी तरह तैयार भी।

समिट के दौरान कई keynote sessions, panel discussions और leadership conversations आयोजित किए जाएंगे। इनमें इस बात पर चर्चा होगी कि आज के दौर में फैसिलिटी और एडमिन लीडर्स बिजनेस ग्रोथ, वर्कप्लेस प्रोडक्टिविटी और बिजनेस कंटिन्यूटी को कैसे मजबूत बना सकते हैं।

कार्यक्रम का दूसरा बड़ा आकर्षण होगा ‘BW FM 40 Under 40 Awards 2026’। इन अवॉर्ड्स के जरिए 40 साल से कम उम्र के उन प्रोफेशनल्स को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने workplace management, sustainability, smart infrastructure, employee experience, security और operational transformation जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है।

अवॉर्ड्स में खास तौर पर उन युवा लीडर्स को पहचान दी जाएगी, जिन्होंने डिजिटल वर्कप्लेस, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और ऑटोमेशन जैसी नई तकनीकों को अपनाकर इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित किए हैं।

समिट में AI, IoT, automation और data-driven technologies के इस्तेमाल से स्मार्ट वर्कप्लेस बनाने, ESG goals को आगे बढ़ाने, employee wellbeing सुधारने और integrated facility management को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा होगी।

इसके अलावा workplace resilience, operational preparedness और business continuity जैसे मुद्दों पर भी इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स अपने विचार साझा करेंगे।

BW FM 40 Under 40 Summit & Awards 2026 को भारत के तेजी से बदलते फैसिलिटी मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन सेक्टर का बड़ा मंच माना जा रहा है, जहां भविष्य के वर्कप्लेस मॉडल और युवा नेतृत्व की नई तस्वीर देखने को मिलेगी।

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Prime Focus मामले में SC से Raspalfa Services को झटका, NCLAT की अंतरिम राहत बरकरार

प्राइम फोकस लिमिटेड (Prime Focus Limited) से जुड़े दिवालिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Raspalfa Services Private Limited को बड़ा झटका दिया है।

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Thursday, 28 May, 2026
PrimeFocus8745
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शिप्रा वाही संभालेंगी Zee5 की डिजिटल सेल्स रणनीति

ज़ी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) ने Zee5 के लिए शिप्रा वाही को नई जिम्मेदारी सौंपी है। वह डिजिटल विज्ञापन राजस्व, सेल्स रणनीति और ऑपरेशंस से जुड़े कारोबार को आगे बढ़ाएंगी।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
shiprawahi

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd.) ने अपने डिजिटल विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने के लिए शिप्रा वाही (Shipra Wahi) को Zee5 का चीफ सेल्स ऑफिसर (Chief Sales Officer) नियुक्त किया है। नई भूमिका में शिप्रा वाही Zee5 के लिए सेल्स, रणनीति और ऑपरेशंस से जुड़े राजस्व मॉडल को आगे बढ़ाने का काम करेंगी। वह नोएडा कार्यालय से काम करेंगी और विज्ञापन राजस्व के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) संदीप मेहरोत्रा (Sandeep Mehrotra) को रिपोर्ट करेंगी।

संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि डिजिटल विज्ञापन इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है और विज्ञापनदाता अब डेटा-आधारित व एकीकृत समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि Zee5 के मोनेटाइजेशन मॉडल को और मजबूत करना कंपनी की प्राथमिकता है और शिप्रा वाही का अनुभव इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। शिप्रा वाही को वित्तीय सेवाओं, ई-कॉमर्स, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग सेक्टर में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

वह पहले सिटी (Citi), एटी कीर्नी (AT Kearney), अमेजन (Amazon) और मेटा (Meta) जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ काम कर चुकी हैं। मेटा (Meta) में वह क्रिएटर पार्टनरशिप्स और क्रिएटर इकोनॉमी से जुड़े रणनीतिक विकास पर काम कर रही थीं। नई जिम्मेदारी पर शिप्रा वाही ने कहा कि Zee5 ने मजबूत ग्रोथ की नींव तैयार की है और वह इस यात्रा का हिस्सा बनकर उत्साहित हैं।

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MR. D.I.Y. इंडिया में ग्रुप सीईओ बने विकास गुप्ता

एमआर. डी.आई.वाई. इंडिया (MR. D.I.Y. India) ने विकास गुप्ता को ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। कंपनी भारत में विस्तार और ग्रोथ रणनीति को मजबूत करने पर फोकस कर रही है।

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Tuesday, 26 May, 2026
vikasgupta

एमआर. डी.आई.वाई. इंडिया (MR. D.I.Y. India) ने विकास गुप्ता (Vikas Gupta) को ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Group Chief Executive Officer) नियुक्त किया है। कंपनी भारत में अपने विस्तार और कारोबार को मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

विकास गुप्ता को ऑपरेशंस, प्राइवेट इक्विटी और मैनेजमेंट कंसल्टिंग के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह कंपनी के शुरुआती दौर से जुड़े रहे हैं और एक स्टोर से शुरू हुए ब्रांड को देशभर में 425 से ज्यादा स्टोर्स तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही है।

नई जिम्मेदारी संभालने पर विकास गुप्ता ने कहा कि यह उनके लिए बेहद खास और भावुक पल है। उन्होंने कहा कि कंपनी के पहले स्टोर से लेकर आज मजबूत राष्ट्रीय उपस्थिति तक के सफर का हिस्सा रहना गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनी का फोकस ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देने, शॉपिंग अनुभव को और मजबूत बनाने और देशभर में तेजी से विस्तार करने पर रहेगा। साथ ही उन्होंने प्रमोटर्स, निवेशकों और टीम का भरोसा और समर्थन देने के लिए आभार जताया।

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क्या अब खबरें एडिटर्स नहीं, एल्गोरिदम्स तय कर रहे हैं?

एक दशक पहले न्यूजरूम में एडिटर की कुर्सी सबसे ताकतवर होती थी। वो तय करता था, क्या पहले पन्ने पर जाएगा, किस खबर को 'ब्रेकिंग' का दर्जा मिलेगा। आज वही ताकत धीरे-धीरे किसी और के हाथ जा रही है

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
News8745

एक दशक पहले न्यूजरूम में एडिटर की कुर्सी सबसे ताकतवर होती थी। वो तय करता था, क्या पहले पन्ने पर जाएगा, क्या दब जाएगा, किस खबर को 'ब्रेकिंग' का दर्जा मिलेगा। आज वही ताकत धीरे-धीरे किसी और के हाथ जा रही है, एक ऐसी सत्ता के हाथ जिसका कोई चेहरा नहीं, जो किसी को जवाब नहीं देती और जो हर सेकंड लाखों फैसले करती है। उसका नाम है: एल्गोरिदम (Algorithm)  वैसे बता दें कि यह महज तकनीकी बदलाव नहीं है। यह पत्रकारिता के मूल ढांचे पर हमला है।

गूगल का 'जीरो-क्लिक' साम्राज्य

पहले अगर किसी को कोई खबर पढ़नी होती थी, तो वो गूगल पर सर्च करता, किसी न्यूज साइट पर जाता, और खबर पढ़ता। अब यह सफर बहुत छोटा हो गया है, इतना छोटा कि पब्लिशर तक पहुंचने की जरूरत ही नहीं रही।

गूगल के AI ओवरव्यूज ने यह खेल बदल दिया है। Similarweb के मई 2025 के डेटा के मुताबिक, गूगल पर न्यूज से जुड़े सर्च में 69% सवाल ऐसी हैं, जहां लोगों को जवाब सीधे गूगल पर ही मिल जाता है और उन्हें किसी न्यूज वेबसाइट पर क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे ‘zero-click’ सर्च कहा जाता है। मई 2024 में अमेरिका में AI Overviews लॉन्च होने से पहले यह आंकड़ा 56% था। यानी सिर्फ एक साल में इसमें 13% पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, SparkToro के 2025 डेटा के अनुसार, गूगल की कुल 58.5% सर्च बिना किसी क्लिक के ही खत्म हो जाती हैं।

इसका सीधा असर न्यूज पब्लिशर्स पर पड़ा है। Chartbeat के डेटा के अनुसार, जो 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स को ट्रैक करता है, 2025 में गूगल से आने वाला सर्च ट्रैफिक 33% तक गिर गया। यह तुलना नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच की है। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38% रही। Reuters Institute की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन रेफ्ररल में 43% तक और गिरावट आ सकती है। इनमें से करीब एक-पांचवें पब्लिशर्स को लगता है कि यह नुकसान 75% से भी ज्यादा हो सकता है।

कुछ कंपनियों पर इसका असर और गंभीर रहा। HubSpot ने अपनी organic traffic में 70 से 80% तक की गिरावट दर्ज की। वहीं, एजुकेशन प्लेटफॉर्म Chegg ने अपनी 49% नॉन-सब्सक्राइबर ट्रैफिक खो दी। इसके बाद Chegg ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कानूनी मामला दायर किया। कंपनी का आरोप है कि गूगल ने पब्लिशर्स के कंटेंट का इस्तेमाल अपने AI को ट्रेन करने में किया और अब वही AI लोगों को सीधे जवाब देकर पब्लिशर्स की जगह ले रहा है।

Pew Research Center के जुलाई 2025 के अध्ययन में 900 अमेरिकी वयस्कों की 68,879 गूगल सर्च को ट्रैक किया गया। इसमें पाया गया कि जब AI Overview दिखता है, तब सिर्फ 8% यूजर्स ही किसी ट्रेडिशनल लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15% रहता है। इतना ही नहीं, AI Overview में दिए गए लिंक पर सिर्फ 1% लोग ही क्लिक करते हैं।

Reuters Institute के सर्वे में पब्लिशर्स कानेट स्कोर -25 रहा, जब उनसे पूछा गया कि वे 2026 में गूगल सर्च पर ज्यादा काम करेंगे या कम। इसका मतलब यह है कि ज्यादातर पब्लिशर्स अब गूगल सर्च में अपना निवेश घटाने की तैयारी में हैं।

Facebook का 'War on News', और उसका अधूरा अंत

Meta ने 2018 में Facebook पर एक बड़ा बदलाव किया, जिसका असर न्यूज इंडस्ट्री पर साफ दिखा। कंपनी ने कहा कि वह लोगों के बीच “meaningful social connections” बढ़ाना चाहती है। इसके बाद Facebook ने अपने algorithm में न्यूज और सामाजिक-राजनीतिक कंटेंट को कम दिखाना शुरू कर दिया। बाद में इसे ‘War on News’ कहा गया।

University of Warsaw और University of California Davis के शोधकर्ताओं की जुलाई 2025 की एक स्टडी में 2016 से फरवरी 2025 के बीच 40 न्यूज संगठनों के 52 लाख से ज्यादा Facebook posts और करीब 787 करोड़ user reactions का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि 2021 से 2024 के बीच न्यूज पोस्ट्स पर reactions में 78% की भारी गिरावट आई, जबकि गैर-न्यूज पेजों पर engagement बढ़ती रही।

2025 में Meta ने यह policy वापस ले ली, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। Reuters Institute और Press Gazette की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 की तुलना में Facebook से न्यूज वेबसाइट्स पर आने वाला ट्रैफिक 43% तक गिर चुका था। पॉलिसी वापस लेने के बाद भी यह गिरावट पूरी तरह नहीं संभल सकी।

वहीं, X (पहले Twitter) में एलन मस्क के आने के बाद प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम ज्यादा राजनीतिक रंग में नजर आने लगा। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, X के 58% users को लगता है कि ऑनलाइन कंटेंट में असली और नकली जानकारी में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसके बावजूद, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद के बाद X पर खबरें देखने वाले लोगों की संख्या 8% पॉइंट्स बढ़ गई और यह वयस्क आबादी के 23% तक पहुंच गई।

TikTok: नया गेटकीपर

अगर गूगल और Facebook पुराने गेटकीपर्स हैं, तो TikTok नया उभरता हुआ गेटकीपर है। Reuters Institute की Digital News Report 2025 के मुताबिक, जो 48 देशों और करीब 1,00,000 लोगों पर आधारित है, TikTok न्यूज का सबसे तेजी बढ़ता प्लेटफॉर्म बन गया है। Global sample में 17% लोग TikTok पर न्यूज लेते हैं। 18 से 24 साल के युवाओं में 44% का प्राइमरी न्यूज सोर्स सोशल मीडिया है।

थाइलैंड में 49% लोग TikTok पर न्यूज देखते हैं, जो पिछले साल से 10% पॉइंट्स ज्यादा है। मलेशिया में यह 48%, केन्या में 40% है। 2026 की शुरुआत तक TikTok के वैश्विक स्तर पर 1.9 बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स हो चुके हैं।

लेकिन TikTok का एल्गोरिदम काफी सख्त तरीके से काम करता है। वह यह नहीं देखता कि किसी क्रिएटर के कितने फॉलोअर्स हैं, बल्कि यह देखता है कि वीडियो के पहले घंटे में कितने likes, comments, watch time और video completion मिले।

सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, TikTok का algorithm उन वीडियो को ज्यादा बढ़ावा देता है जो लोगों का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखें और ज्यादा इंट्रैक्शन हासिल करें। इसका असर यह होता है कि एडिटर्स और क्रिएटर्स ऐसी खबरों को प्राथमिकता देने लगते हैं जो ज्यादा अटेंशन खींचें। यानी कई बार गंभीर लेकिन धीमी खबरें दब जाती हैं, जबकि ज्यादा नाटकीय और सतही खबरें तेजी से वायरल हो जाती हैं।

News Consumption का बदलता चेहरा

पिछले पांच वर्षों में न्यूज कंजप्शन का तरीका मौलिक रूप से बदला है। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट सीधे कहती है: 2020 में 52% लोग सोशल वीडियोज के जरिए न्यूज देखते थे, जो 2025 में बढ़कर 65% हो गया। किसी भी format में वीडियो न्यूज देखने वाले 67% से बढ़कर 75% हो गए।

अमेरिका में पहली बार सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स ने टीवी न्यूज और न्यूज वेबसाइट्स दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अब 54% अमेरिकी लोग सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स के जरिए खबरें देखते हैं, जबकि टीवी न्यूज देखने वालों की संख्या 50% और न्यूज वेबसाइट्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 48% है।

Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी, प्रिंट और न्यूज वेबसाइट्स के साथ लोगों की जुड़ाव लगातार घट रहा है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है।

न्यूजरूम के अंदर: Algorithm की घुसपैठ

खतरा सिर्फ बाहर से नहीं है। अब algorithm न्यूजरूम के अंदर भी अपनी जगह बना चुका है।

Nieman Lab की 2026 predictions रिपोर्ट में कहा गया है कि AI अब सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि newsroom की “editorial infrastructure” बनती जा रही है। Harvard Innovation Labs के Nikita Roy के मुताबिक, न्यूजरूम्स को खुद को सिर्फ article बनाने वाली फैक्ट्री नहीं, बल्कि “AI-native knowledge engines” में बदलना होगा।

वहीं, Maryland University के Professor Daniel Trielli ने 2026 में चेतावनी दी कि पत्रकारिता धीरे-धीरे इंसानों के बजाय AI systems के हिसाब से तैयार की जा रही है। उन्होंने इसे ‘agentic journalism’ कहा है। इसका मतलब है कि editorial control कम होता जाएगा और algorithm पर निर्भरता बढ़ती जाएगी।

Nieman Lab के Parker Molloy ने दिसंबर 2025 में लिखा था, “जो आने वाला है, वह धीरे-धीरे आत्मसमर्पण जैसा होगा। पत्रकार ऐसे systems का इस्तेमाल करने लगेंगे, जिन पर वे बिना सोचे भरोसा करेंगे।” यानी कई editors को शायद यह एहसास भी न हो कि वे algorithm के हिसाब से काम करने लगे हैं।

Global South यानी विकासशील देशों के publishers की स्थिति और ज्यादा मुश्किल होती जा रही है। International Fund for Public Media (IFPM) की director Irene Jay Liu ने JournalismAI Festival 2025 में बताया कि Brazil, South Africa और Indonesia के बड़े publishers ने पिछले एक साल में 50 से 60% तक traffic खो दिया।

एडिटोरियल स्वतंत्रता बनाम प्लेटफॉर्म पर निर्भरता

यह बहस अब सिर्फ सिद्धांत तक सीमित नहीं रही। Frontiers in Communication में 2025 में प्रकाशित एक शोध, जो इंडोनेशिया के स्थानीय न्यूजरूम्स पर आधारित था, बताता है कि algorithm आधारित कमाई का मॉडल, audience engagement के आधार पर मिलने वाली visibility और platforms पर बढ़ती निर्भरता, लंबी और गंभीर पत्रकारिता को धीरे-धीरे किनारे कर रही है।

यानी जब पत्रकारिता पूरी तरह platform के logic पर चलने लगती है, तब investigative journalism आर्थिक रूप से टिक पाना मुश्किल हो जाता है।

Columbia Journalism Review ने अक्टूबर 2025 की अपनी analysis में इसे आसान शब्दों में समझाया। रिपोर्ट के मुताबिक, टेक प्लेटफॉर्म्स लंबे समय से मीडिया कंपनियों के साथ दोहरा व्यवहार करते रहे हैं — पहले वे publishers को ज्यादा reach का लालच देते हैं और फिर अचानक उनका traffic कम कर देते हैं।

Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट में भी पाठकों ने साफ कहा कि वे चाहते हैं पत्रकार अपना समय ताकतवर लोगों की जांच-पड़ताल और गहराई वाली रिपोर्टिंग में लगाएं, न कि सिर्फ clicks पाने के लिए algorithm के पीछे भागें। यानी audience अब भी गंभीर और असली पत्रकारिता चाहती है, लेकिन algorithm अक्सर ऐसी पत्रकारिता को पीछे धकेल देता है।

क्या कोई रास्ता है?

Reuters Institute की जनवरी 2026 रिपोर्ट में 280 मीडिया लीडर्स ने इस संकट से निकलने के कुछ रास्ते सुझाए हैं। अब publishers तेजी से newsletters, podcasts और direct audience connection पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि platforms पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कंपनी Nine की Senior Audience Editor Sophia Phan का कहना है कि search से आने वाला traffic लगातार घट रहा है, इसलिए अब readers से सीधे जुड़ने के बेहतर तरीके तलाशने होंगे।

इसी वजह से paywall का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। 2026 में ज्यादातर quality publishers अपना content paywall के पीछे रख रहे हैं। Substack अप्रैल 2025 में 42.5% year-over-year growth के साथ अमेरिका की top 19 news websites में शामिल हो गया।

हालांकि, यह रास्ता हर publisher के लिए आसान नहीं है। जिन मीडिया संस्थानों के पास मजबूत brand trust है, वही इस मॉडल में टिक पा रहे हैं। छोटे और स्थानीय न्यूजरूम्स के लिए स्थिति ज्यादा गंभीर है। Chartbeat के 2026 डेटा के मुताबिक, 1,000 से 10,000 daily pageviews वाले छोटे publishers ने दो साल में search traffic में 60% तक की गिरावट झेली है।

गेटकीपर बदल गया है

एक समय था जब यह तय करने की ताकत editors के पास होती थी कि लोगों तक कौन-सी खबर पहुंचेगी। बाद में यह ताकत मीडिया मालिकों के हाथ में चली गई। लेकिन आज यह शक्ति algorithms के पास है — Google, Meta और TikTok जैसे platforms के algorithms के पास।

फर्क सिर्फ इतना नहीं है कि ताकत बदल गई है, बल्कि यह भी है कि पहले editor से सवाल किया जा सकता था। Media owners को अदालत तक ले जाया जा सकता था। लेकिन algorithm न जवाब देता है, न यह बताता है कि उसने क्या और क्यों चुना। उसका मकसद सिर्फ एक होता है- ज्यादा engagement, ज्यादा retention और ज्यादा revenue।

इस दौड़ में सबसे ज्यादा नुकसान उस पत्रकारिता का होता है जो सच सामने लाती है, ताकतवर लोगों से सवाल पूछती है और असुविधाजनक मुद्दों को उठाती है।

Reuters Institute के 2026 forecast की एक लाइन इस पूरे संकट को साफ शब्दों में बताती है। रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया संस्थान अब सिर्फ खबरें नहीं बना रहे, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं — उन platforms के खिलाफ, जिन्होंने खबरों को एक product और journalists को सिर्फ content creators बनाकर छोड़ दिया है।

अब असली सवाल यह नहीं है कि algorithm पत्रकारिता को बदल रहा है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या पत्रकारिता में अब भी इतनी ताकत बची है कि वह algorithm के दबाव के खिलाफ खड़ी रह सके।

 

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Tips Music व पूजा एंटरटेनमेंट के बीच कानूनी विवाद, सुप्रीम कोर्ट से कंपनी को मिली राहत

म्यूजिक कंपनी टिप्स म्यूजिक लिमिटेड (Tips Music Limited) और पूजा एंटरटेनमेंट इंडिया लिमिटेड के बीच पुराने बॉलीवुड फिल्मों के म्यूजिक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
TipsMusic5421

म्यूजिक कंपनी टिप्स म्यूजिक लिमिटेड (Tips Music Limited) और पूजा एंटरटेनमेंट इंडिया लिमिटेड के बीच पुराने बॉलीवुड फिल्मों के म्यूजिक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IP Rights) को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से Tips Music को बड़ी राहत मिली है।

दरअसल, पूजा एंटरटेनमेंट ने बिहार के कटिहार कोर्ट में आरोप लगाया था कि उसकी कई फिल्मों के गाने, म्यूजिक कैटलॉग और अन्य कंटेंट का इस्तेमाल बिना अनुमति किया जा रहा है। मामला ‘Coolie No. 1’, ‘Hero No. 1’, ‘Biwi No. 1’, ‘Bade Miyan Chote Miyan’, ‘Tera Jadoo Chal Gayaa’ और ‘Mujhe Kucch Kehna Hai’ जैसी फिल्मों के अधिकारों से जुड़ा बताया जा रहा है।  

इस पर कटिहार कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में दोनों पक्षों को विवादित कंटेंट को लेकर फिलहाल मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। यानी जब तक मामला कोर्ट में है, तब तक संबंधित अधिकारों और कंटेंट के इस्तेमाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जा सकता था।  

हालांकि, Tips Music ने इस आदेश को चुनौती दी। कंपनी का कहना है कि उसके पास इन म्यूजिक राइट्स से जुड़े वैध और पुराने समझौते मौजूद हैं और वह करीब 30 साल से इन अधिकारों का कानूनी रूप से इस्तेमाल करती आ रही है। कंपनी ने पूजा एंटरटेनमेंट के आरोपों को “गलत और भ्रामक” बताया है।  

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई 2026 को कटिहार कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक पटना हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।  

कंपनी ने कहा है कि वह अपने कानूनी सलाहकारों के साथ मिलकर मामले को आगे बढ़ा रही है और आगे होने वाले किसी भी बड़े घटनाक्रम की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी जाएगी।

बता दें कि Tips Music पहले Tips Industries Limited के नाम से जानी जाती थी और हाल ही में कंपनी ने अपना नाम बदलकर Tips Music Limited किया है।

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PVR INOX में बड़ा बदलाव: ग्रोथ व इन्वेस्टमेंट के CEO प्रमोद अरोड़ा ने दिया इस्तीफा

देश की बड़ी सिनेमा कंपनी PVR INOX Limited में टॉप लेवल पर एक अहम बदलाव हुआ है। कंपनी में ग्रोथ व इनवेस्टमेंट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर प्रमोद अरोड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
PramodArora541

देश की बड़ी सिनेमा कंपनी PVR INOX Limited में टॉप लेवल पर एक अहम बदलाव हुआ है। कंपनी में ग्रोथ व इनवेस्टमेंट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर प्रमोद अरोड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा निजी कारणों की वजह से दिया गया है।

कंपनी ने प्रमोद अरोड़ा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और उन्हें 24 मई की शाम से सेवा से मुक्त कर दिया गया है। 

प्रमोद अरोड़ा ने अपने इस्तीफे में कहा कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान मिले अवसरों, मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि उन्होंने अपने काम का पूरा स्मूथ ट्रांजिशन सुनिश्चित किया है ताकि जिम्मेदारियों के हस्तांतरण में कोई दिक्कत न हो।  

प्रमोद अरोड़ा को भारत में मॉडर्न सिनेमा और रिटेल डेवलपमेंट का एक अहम नाम माना जाता है। वे पिछले करीब 30 सालों से सिनेमा, रियल एस्टेट, रिटेल और इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1996 से भारत में मल्टीप्लेक्स सिनेमा के विकास के साथ अपने करियर की शुरुआत की और देश में शॉपिंग मॉल्स और सिनेमा हॉल्स के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 प्रमोद अरोड़ा को इस सेक्टर में एक ऐसे प्रोफेशनल के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने शुरुआत में दिल्ली में एक 4-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स से काम शुरू किया और आगे चलकर भारत और श्रीलंका में 360+ सिनेमाघरों और 1700+ स्क्रीन तक इस बिजनेस के विस्तार में अहम योगदान दिया।

वे सिर्फ विस्तार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि डिजाइनिंग, डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी-आधारित सिनेमा स्पेस, मर्जर-एक्विजिशन और फाइनेंशियल स्ट्रक्चरिंग जैसे जटिल कामों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्हें आधुनिक भारत में सिनेमा और कंजम्पशन आधारित रिटेल ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख लोगों में गिना जाता है।

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दिल्ली प्रेस के COO बने शैलेश श्रीवास्तव

शैलेश श्रीवास्तव इससे पहले ‘रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क’ के साथ बिजनेस हेड के रूप में जुड़े हुए थे।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2026
Shailesh Srivastava Delhi Press

देश के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने प्रकाशन समूहों में से एक ‘दिल्ली प्रेस’ (Delhi Press) ने अपने कारोबार को तेजी से बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सीनियर बिजनेस लीडर शैलेश श्रीवास्तव को चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के पद पर नियुक्त किया है। मीडिया, टेलीकॉम, हॉस्पिटैलिटी और BFSI सेक्टर में दो दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शैलेश श्रीवास्तव अब अपनी इस भूमिका में दिल्ली प्रेस के संचालन और बिजनेस स्ट्रैटेजी को नई दिशा देंगे।

कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति उसके आक्रामक विस्तार योजना का हिस्सा है, जिसमें विज्ञापन, आयोजन, कंटेंट से कमाई और पत्रिका कारोबार को नई रफ्तार देने पर जोर रहेगा।

'दिल्ली प्रेस' के पास दि कारवां, चंपक, गृहशोभा, मोटरिंग वर्ल्ड,  सरिता और मनोहर कहानियां जैसी कई लोकप्रिय पत्रिकाएं हैं। फिलहाल समूह 9 भाषाओं में 31 पत्रिकाएं प्रकाशित करता है। इसके अलावा उसके 9 वेबसाइट और सोशल मीडिया मंच भी हैं।

कंपनी के एग्जिक्यूटिव पब्लिशर अनंत नाथ ने कहा कि 'दिल्ली प्रेस' अब खुद को सिर्फ एक प्रकाशन समूह नहीं, बल्कि “मल्टी-वर्टिकल कंटेंट एंड एक्सपीरियंस कंपनी” के रूप में बदल रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी डिजिटल ढांचे, ब्रांडेड कंटेंट, क्रिएटर साझेदारी और विशेष ब्रांड अनुभवों पर तेजी से निवेश कर रही है।

उन्होंने कहा कि शैलेश श्रीवास्तव का मीडिया कारोबार को बढ़ाने, आयोजन आधारित बौद्धिक संपदा तैयार करने और नए कमाई मॉडल विकसित करने का अनुभव कंपनी के अगले चरण की वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा।

शैलेश श्रीवास्तव इससे पहले Reliance Broadcast Network Limited में व्यवसाय प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। वहां उन्होंने करीब 8 साल तक काम किया और आयोजन कारोबार, गैर-मेट्रो मार्केट्स और कंटेंट-आधारित इनिशिएटिव्स को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बैंकिंग-वित्तीय सेवाएं, दूरसंचार और आतिथ्य क्षेत्र में भी नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभाली हैं।

अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर शैलेश श्रीवास्तव ने कहा, “कंटेंट कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है, जबकि आयोजन और बौद्धिक संपदा उसके विकास के इंजन हैं। मैं टीम के साथ मिलकर दर्शकों की भागीदारी को और मजबूत करने और नए कमाई स्रोत तैयार करने को लेकर उत्साहित हूं।”

'दिल्ली प्रेस' ने पिछले कुछ वर्षों में अपने आयोजन कारोबार को भी तेजी से बढ़ाया है। अभी कंपनी हर साल 30 से 35 कार्यक्रम आयोजित करती है और आने वाले समय में इसे बढ़ाकर 70 से ज्यादा करने की योजना है। इनमें Inspire Awards, EmpowerHer सम्मेलन, Farm n Food Krishi Samman, Saras Salil Bhojpuri Cine Awards और Motoring World Auto Awards जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

कंपनी ने हाल के वर्षों में सदस्यता मॉडल पर भी खास फोकस किया है। 'दिल्ली प्रेस' का दावा है कि अब उसकी 65% से ज्यादा पाठक आय सदस्यताओं से आने लगी है, जबकि पहले यह सिर्फ 5% थी। कंपनी के मुताबिक सदस्यता आय में 500% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अनंत नाथ ने कहा कि 'दिल्ली प्रेस' ऐसे पाठकों का मजबूत समुदाय तैयार करना चाहता है, जो उसके कंटेंट और ब्रैंड्स से भावनात्मक रूप से जुड़े हों और प्रीमियम कंटेंट के लिए भुगतान करने को तैयार हों।

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