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मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस को इससे बेहतर कोई बयां नहीं कर सकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अमित शाह के साथ मीडिया से हुए रूबरू
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
पत्रकारों और विपक्ष की शिकायत रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते। लिहाजा शुक्रवार को जब पीएम मीडिया से रूबरू हुए तो सभी उत्साहित थे। पत्रकारों ने भी उनके लिए कुछ ख़ास सवाल तैयार किये, जिन्हें वह पांच सालों से अपने ज़हन में दबाये बैठे थे। लेकिन जब प्रेस कांफ्रेंस शुरू हुई तो उत्साह पल भर में काफूर हो गया। क्योंकि पीएम मोदी वहां होकर भी नहीं थे। उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया, उनकी तरफ से अमित शाह ही बोलते रहे। ये भी अपने आप में एक बड़ी घटना थी, लिहाजा मीडिया में इस चुप्पी ने भी सुर्खियाँ बंटोरीं। चुनावी ख़बरों के बीच शनिवार के अख़बारों में पीएम की ख़ामोशी छाई रही, मगर इस ख़ामोशी को सबसे अच्छे या कहें कि अलग और मारक अंदाज़ में ‘द टेलीग्राफ’ ही बयां कर पाया।
अख़बार का फ्रंट पेज हर बार की तरह देखने लायक है। पीएम की पहली प्रेस कांफ्रेंस को फोटो के साथ जिस तरह से पेश किया गया है, वो केवल ‘द टेलीग्राफ’ ही कर सकता है। कहने को तो यह खबर लीड है, लेकिन इसकी कोई हेडलाइन नहीं है। इसके बजाय ‘नो हॉर्न’ का एक सिंबल चस्पा किया गया है, जो अपने आप में ही काफी कुछ बयां करता है। इसके नीचे बोल्ड शब्दों में लिखा है, ‘1817 दिनों के इंतजार के बाद वह प्रेस कांफ्रेंस जिसने देश को स्पीचलेस कर दिया। नीचे शुक्रवार को हुई उस प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें हैं, जिसमें 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद नरेंद्र मोदी शामिल हुए।’
इसके बाद टाइम स्टैम्प के साथ नरेंद्र मोदी की अलग-अलग मुद्रा वालीं सात छोटी-छोटी तस्वीरें हैं और कैप्शन में उनके बारे में बताया गया है। मसलन, पहली तस्वीर में लिखा है ’36वां मिनट: मोदी और अमित शाह के बयानों के बाद यह सवालों का समय है।’ दूसरी तस्वीर: 37वां मिनट–शाह ने जवाब दिए, मोदी कमरा निहारते रहे। तीसरी तस्वीर: 41वां मिनट-मोदी से सवाल पूछा गया, लेकिन उन्होंने अमित शाह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मैं अनुशासित सैनिक हूं, पार्टी अध्यक्ष ही मेरे लिए सबकुछ हैं। चौथी तस्वीर: 44वां मिनट-शाह ने जवाब दिया, मोदी यहां-वहां देखते रहे। पांचवी तस्वीर: 45वां मिनट-फिर शाह बोले, मोदी देखते रहे। छठी तस्वीर: 47वां मिनट-शाह ने सवालों के जवाब दिए, मोदी सोच में डूबे रहे। सातवीं तस्वीर: 51वां मिनट-शाह ने जवाब दिए, मोदी गहरी सोच में डूबे रहे।
इसके ठीक नीचे लिखा है ‘52वां मिनट, 48 सेकंड: शाह ने कहा ‘चलिए धन्यवाद। सबका बहुत-बहुत धन्यवाद और मोदी और शाह उठकर चले गए।’ अख़बार की क्रिएटिविटी यहीं ख़त्म नहीं होती, इसके बाद एक बड़ा सा खाली स्पेस छोड़ा गया है। इसके नीचे छोटे अक्षरों में लिखा है, ‘द टेलीग्राफ इस स्पेस को आरक्षित रख रहा है, इसे तब भरा जाएगा जब प्रधानमंत्री किसी प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब देंगे। इस स्पेस को देखें।’
कुल मिलाकर कहा जाए, तो अख़बार की संपादकीय टीम ने मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस और उससे देश को हुई निराशा को बड़ी ही खूबसूरती के साथ बयां किया है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है, जब ‘द टेलीग्राफ’ अपनी रचनात्मकता के लिए तालियाँ बंटोर रहा है। अख़बार के फ्रंट पेज पर लगभग हर रोज़ इस तरह के प्रयोग देखने को मिल जाया करते हैं और यही ‘द टेलीग्राफ’ को दूसरों से अलग बनाते हैं।
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