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‘विरासत के साथ विकास’ से बदली भारत की पहचान: गजेंद्र सिंह शेखावत
पाञ्चजन्य के “बात भारत की” कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण, धरोहरों की वापसी, धार्मिक पर्यटन और भारत की बदलती वैश्विक छवि पर विस्तार से अपने विचार रखे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़ी पत्रिका पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना वर्ष पर आयोजित “बात भारत की” कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कंसल्टिंग एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव से संवाद किया। इस बातचीत में उन्होंने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक पहचान पर विस्तार से प्रकाश डाला। शेखावत ने कहा कि जब सरकार “विकसित भारत” के लक्ष्य को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में भी उतारती है, तब देश की सांस्कृतिक छवि मजबूत होती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले भारत केवल 13 प्राचीन धरोहरें वापस ला सका था, जबकि अब यह संख्या लगभग 700 तक पहुंच चुकी है। यह सफलता सरकार की गंभीर पहल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है। उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच हुए ‘कल्चरल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे चोरी हुई धरोहरों की वापसी की प्रक्रिया तेज हुई है। यह समझौता दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है।
“विरासत के साथ विकास” की अवधारणा पर बोलते हुए मंत्री ने महाकाल लोक, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और नए संसद भवन जैसी परियोजनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बना है, जिससे लोगों में आत्मविश्वास बढ़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि आज भारत विश्व मंचों पर अपनी संस्कृति और मूल्यों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर रहा है। इससे देश की वैश्विक छवि बदली है। नई पीढ़ी को लेकर उठने वाले सवालों पर उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में युवाओं की धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में रुचि बढ़ी है। उज्जैन, काशी और अयोध्या जैसे स्थानों पर रिकॉर्ड श्रद्धालुओं की संख्या इसका प्रमाण है।
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