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एक हफ्ते बाद भी चर्चा में बना है अरनब का ये इंटरव्यू...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। पहली बार किसी घरेलू निजी न्यूज चैनल द्वारा लिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू एक हफ्ते बाद भी चर्चा में बना हुआ है। यह इंटरव्यू टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने किया था। इस इंटरव्यू को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी जगी त
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पहली बार किसी घरेलू निजी न्यूज चैनल द्वारा लिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू एक हफ्ते बाद भी चर्चा में बना हुआ है। यह इंटरव्यू टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने किया था। इस इंटरव्यू को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी जगी तो कुछ ने इसकी प्रशंसा की। कुछ लोगों ने गोस्वामी पर मोदी के खिलाफ नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया, तो कुछ ने ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया, क्योंकि मोदी के इंटरव्यू के लिए कई लोग कतार में थे, लेकिन कामयाबी ने सिर्फ अरनब का हाथ थामा।
कई तरह की आलोचनाओं का सामना करने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ कि लोगों ने सोशल मीडिया पर इस इंटरव्यू को लेकर बातचीत करने से कोई गुरैज की हो। और यहीं वजह रही कि यह इंटरव्यू सोशल मीडिया पर छाया रहा। गोस्वामी के मुताबिक, ट्विटर पर तो इंटरव्यू को लेकर एक बिलियन से ज्यादा ट्वीट हो चुके हैं और फेसबुक पर करीब 10 मिलियन बार इसे लेकर चर्चा की जा चुकी है।
हालांकि चैनल का कहना था कि यह देश में एक प्रधानमंत्री का किसी प्राइवेट न्यूज चैनल को दिया गया पहला इंटरव्यू है। लेकिन इंडिया टुडे टेलिविजन के डिप्टी एडिटर अशोक कुमार उपाध्याय ने अपने दावे में कहा, ‘पहले अरनब की बात को सही कर दूं कि मोदी पहले प्रधानमंत्री नहीं है, जिन्होंने किसी निजी न्यूज चैनल को पहली बार इंटरव्यू दिया है। जहां तक मुझे याद है इंद्र कुमार गुजराल दो बार होम टीवी को इंटरव्यू दे चुके हैं, जोकि एक निजी न्यूज चैनल ही था।’ उपाध्याय ने ये बात इंडिया टुडे की एक विचार पोर्टल डेलीओ न्यूजपोर्टल (dailyo.in) में कही।
इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में शैलजा बाजपेयी ने पिछले दे सालों में अरनब गोस्वामी द्वारा लिए गए नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू की तुलना की। उन्होंने कहा कि पहला इंटरव्यू 8 मई 2014 को 2014 के आम चुनावों के दौरान आयोजित किया गया था, जिसमें देखने को मिला था कि गोस्वामी ने मोदी को सांप्रदायिक राजनीति और स्नूपगेट जैसे अन्य विषयों की एक सूची लेकर जवाब देने को मजबूर कर दिया था, लेकिन हालही में लिए इंटरव्यू में ये देखा गया है एक तेजतर्रार एंकर का रुख नर्म हो जाता है और मोदी आराम से अपनी सलाह देते नजर आते हैं।
बाजपेयी ने अपने लेख में लिखा कि, ‘फ्रैंकली स्पीकिंग (Frankly speaking) बेहद रोमांचक इंटरव्यू था। लेकिन पत्रकारिता का इससे और अच्छा नमूना देखा जा सकता था यदि 2016 के मोदी की भिड़ंत 2014 के गोस्वामी से होती।’
इसी बीच गल्फ न्यूज (Gulf News’) के बॉबी नकवी ने एक फेसबुक पोस्ट किया जोकि वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने मोदी के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया था। नकवी ने यूएई स्थित एक अखबार के लिए कथित तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू उनके यूएई दौरे से पहले लिया था। अपनी फेसबुक पोस्ट में नकवी ने कहा था कि इंटरव्यू से पहले ही उनसे सवाल मांग लिए गये थे। बॉबी नकवी ने लिखा था कि 7 रेसकोर्स पर एक ऑफिसर ने उन्हें इंटरव्यू से कुछ मिनट पहले ही बताया कि वे सिर्फ एक सवाल पूछ सकते हैं।
नकवी ने कहा कि, ‘मुझे एक और झटका तब लगा जब मुझसे कहा गया कि आपके बचे सवालों का जवाब इंटरव्यू के बाद लिखित में मिल जाएगा।’ उन्होंने कहा कि, ‘इस बात से मुझे बिलकुल हैरानी नहीं हुई जब मैंने पढ़ा कि टाइम्स नाउ के इंटरव्यू के लिए सवाल पहले से ही मंगा लिए गए थे।’
मीडिया की निगरानी करने वाली लोकप्रिय वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry) ने भी टाइम्स नाउ की आलोचना की। न्यूजलॉन्ड्री की मैनेजिंग एडिटर दीपांजना पाल ने डीडी से टाइम्स नाउ की बराबरी करते हुए कहा कि, ‘इस इंटरव्यू से यह सिद्ध होता है कि एक नजर में प्रेस की आजादी बहुत धीरे-धीरे दम तोड़ रही है।’
पाल ने आगे लिखा, ‘कल के फ्रैंकली स्पीकिंग में लगभग पांच मिनट तक ही अरनब गोस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया। बाकी समय ऐसा लगा कि अरनब अब नहीं तो तब मोदी से सेल्फी के लिए मोदी से कहेंगे और इस तरह एक फैनब्वॉय की एक आइडल से मुलाकात पूरी होती है, मानों जैसे दोनों ही हमारे टेलिविज सेट्स पर खेल रहे थे। चाहें या न चाहें गोस्वामी को मोदी का ऑटोग्राफ तो मिल गया, लेकिन सेल्फी का खुलासा अज्ञात रह गया।’
हालांकि कैच न्यूज की सोमी दास ने ‘द न्यूजऑर’ (The Newshour) के प्रस्तोता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि, ‘सत्ता में आने के बाद लोग बेहद ही मुश्किल से खुलकर बोलने के लिए सहमत होते हैं।’ उन्होंने ये भी कहा कि, ‘मात्र दो साल के भीतर ही मोदी का दो बार इंटरव्यू लेना गोस्वामी के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं’
उन्होंने कहा, ‘हमें एक चीज समझनी चाहिए कि आप किसी पार्टी के प्रवक्ता कि तरह देश के प्रधानमंत्री से बात नहीं कर सकते हैं।’
आलोचनाओं को गलत साबित करने के लिए गोस्वामी ने एक व्यंग्य का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि, ‘ग्रुप के पास करने के लिए कुछ नहीं है, तो मुझसे, मेरी खबर या फिर मेरे इंटरव्यू को लेकर बहस करेंगे।
Goswami chose to rebut the criticism with a dose of sarcasm. “There is a group that has nothing to do but discuss me, my stories and my interview, day in and day out without any fail, without getting exhausted. I am very flattered. It shows how keenly they watch The Newshour and Frankly Speaking. I can only say that for their loyal and enthusiastic viewership, I’m very grateful,” he said.
Later, he even wrote a column in a publication in which he brushed aside claims of being friendly with Modi. The combative anchor claimed that exclusive interviews are given to those channels “who command viewership” and “not to those who nobody watches”. Considering the polarizing personalities involved in the interview, the controversies surrounding it don’t seem to be dying down anytime soon.
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