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YouTube ने बदली कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी, 'जनहित' वाले कंटेंट पर आंशिक उल्लंघन को दी इजाजत
यह बदलाव उस संतुलन को दर्शाता है जिसे YouTube अब हानिकारक कंटेंट को रोकने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के बीच साधने की कोशिश कर रहा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
'यूट्यूब' (YouTube) ने अपनी आंतरिक मॉडरेशन गाइडलाइंस में बड़ा बदलाव किया है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब ऐसे वीडियो जो उसकी पॉलिसीज का कुछ हद तक उल्लंघन करते हैं, लेकिन सार्वजनिक समझ को बेहतर बनाने में मददगार माने जाते हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाया नहीं जाएगा।
यह बदलाव उस संतुलन को दर्शाता है जिसे YouTube अब हानिकारक कंटेंट को रोकने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के बीच साधने की कोशिश कर रहा है, खासकर चुनाव, पहचान, लिंग, नस्ल, प्रवासन और सामाजिक विचारधाराओं जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।
नई पॉलिसी के तहत, कंटेंट मॉडरेटर अब तब तक वीडियो हटाने से बचेंगे जब तक कि उसका 50% से ज्यादा हिस्सा YouTube की गाइडलाइंस का उल्लंघन न कर रहा हो। पहले यह सीमा 25% थी। इसके साथ ही अब मॉडरेटर्स से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वे यह आकलन करें कि क्या किसी वीडियो की फ्री स्पीच यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की संभावित उपयोगिता, उससे जुड़े जोखिमों से कहीं अधिक है। ऐसे मामलों में वीडियो को तुरंत हटाने की बजाय आगे की समीक्षा के लिए भेजने का निर्देश है। यह प्रक्रिया YouTube की EDSA (Education, Documentary, Science, Art) रूपरेखा के तहत आती है।
YouTube की प्रवक्ता निकोल बेल ने The Verge को बताया कि प्लेटफॉर्म के विकसित होते स्वरूप को देखते हुए उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव वीडियो की एक सीमित श्रेणी को प्रभावित करेगा और इसका उद्देश्य पॉलिसी-प्रवर्तन में अतिरेक को रोकना है। उदाहरण के लिए, किसी लंबे न्यूज पॉडकास्ट को सिर्फ इसलिए नहीं हटाया जाएगा क्योंकि उसमें एक छोटा हिस्सा नियमों का उल्लंघन कर रहा हो।
यह अपडेट उस पॉलिसी का विस्तार है जिसमें YouTube ने चुनावी उम्मीदवारों द्वारा अपलोड किए गए ऐसे वीडियो को भी प्लेटफॉर्म पर रहने देने की अनुमति दी थी, जो नियमों का उल्लंघन करते हों, बशर्ते वे सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ाते हों, विशेषकर 2024 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को ध्यान में रखते हुए।
यह बदलाव सिर्फ YouTube तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब एक व्यापक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। Meta ने भी हाल में गलत सूचना और घृणास्पद भाषण को लेकर अपने रुख में ढील दी है, उसने तीसरे पक्ष के फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम को बंद कर दिया है और अब यूजर्स आधारित सुधारों पर भरोसा कर रहा है। यही तरीका अब X (पहले Twitter) भी अपना रहा है।
Covid-19 महामारी और डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान YouTube ने बहुत सख्त कंटेंट मॉडरेशन लागू किया था यानी वीडियो हटाने या सेंसर करने के नियम काफी सख्त थे। अब जो नई पॉलिसी लागू की गई है, वह उस पुराने कड़े रुख से थोड़ा संतुलन बनाते हुए, उसे थोड़ा नरम या लचीला करने की कोशिश है।"
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