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डिजिटल मीडिया के लिए कैसी रही 2020 की ‘डगर’, जानें एडिटर्स की राय

कोरोनावायरस (कोविड-19) और इसके संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में किए गए लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग-धंधों के साथ मीडिया के लिए भी यह साल काफी चुनौतियों भरा रहा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

कोरोनावायरस (कोविड-19) और इसके संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में किए गए लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग-धंधों के साथ मीडिया के लिए भी यह साल काफी चुनौतियों भरा रहा। लॉकडाउन के दौरान टीवी की व्युअरशिप बढ़ने के बावजूद विज्ञापनों की संख्या घट गई और प्रिंट का सर्कुलेशन भी काफी प्रभावित हुआ। वहीं, डिजिटल की बात करें तो मीडिया के अन्य स्वरूपों के मुकाबले इसकी रफ्तार ठीक रही। कहने का तात्पर्य यह है कि डिजिटल के पाठकों/दर्शकों की संख्या साल 2020 में काफी बढ़ी, हालांकि रेवेन्यू के लिहाज से यहां भी स्थिति बेहतर नहीं रही। अब जबकि अनलॉक हो गया है और उद्योग-धंधे भी पटरी पर लौटने लगे हैं, अब सबकी उम्मीदें नए साल की ओर लगी हैं।

ऐसे में समाचार4मीडिया ने देश के चुनिंदा मीडिया संस्थानों में डिजिटल मीडिया की कमान संभाल रहे पत्रकारों से जानना चाहा कि उनकी नजर में डिजिटल मीडिया के लिए वर्ष 2020 कैसा रहा और आने वाले साल में वे इस क्षेत्र में क्या चुनौतियां/संभावनाएं देखते हैं।

‘अमर उजाला’ डिजिटल के एडिटर जयदीप कर्णिक का कहना है, ‘मेरे हिसाब से जैसे वर्ष 2020 सभी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, वैसे ही डिजिटल मीडिया के लिए भी रहा। हालांकि, कई मायनों में यह डिजिटल मीडिया के लिए लाभकारी भी रहा। वह इसलिए रहा कि डिजिटल मीडिया के महत्व को लेकर पिछले कई वर्षों से बात हो रही है कि डिजिटल ही भविष्य है। लगभग सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने इस बात को समझ लिया था और 2010 से ही इस दिशा में बहुत सारा काम किया गया था। लेकिन 2020 ने ये समझा दिया कि डिजिटल मीडिया भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान है। मेरा मानना है कि 2020 में कोविड की जो चुनौती आई, उसने कई मायनों में मीडिया में फास्ट फॉरवर्ड का बटन दबा दिया। फास्ट फॉरवर्ड से तात्पर्य यह है कि इस दौरान जो चीजें हुईं, वह होनी थी और अवश्यंभावी थीं। जैसे- अखबारों की पठनीयता पर फर्क पड़ना या मीडिया के नए तरीके तलाशना या न्यूजरूम्स का ऑनलाइन हो जाना अथवा न्यूजरूम्स में नई पहलों को जल्दी जगह मिलना, यह सब होना था और इस पर काम भी चल रहा था, लेकिन यह सब फास्ट फॉरवर्ड हो गया। जो चीज चार-पांच साल या आठ-दस साल बाद होती, वह 2020 ने इतनी फास्ट फॉरवर्ड कर दी कि सब मजबूर हो गए।’

जयदीप कर्णिक के अनुसार, ‘साल 2020 में डिजिटल कंटेंट का उपभोग भी ज्यादा हुआ। तमाम लोग ई-पेपर की तरफ भी मुड़े। खास बात यह रही कि तमाम लोगों द्वारा डिजिटल मीडिया को पहले जिस संशय की नजरों से देखा जाता था कि इस पर सब फेक और बकवास है, वह इस माध्यम से जुड़े और जाना कि इस पर अच्छा और बुरा सभी तरह का कंटेंट है। मेरा मानना है कि डिजिटल के लिए यह साल काफी महत्वपूर्ण रहा। लोगों को समझ आया कि इस पर सब कुछ फेक नहीं है। जिस मीडिया संस्थान की वेबसाइट ने अच्छा कंटेंट तैयार किया, उसे इसका लाभ भी मिला। इस दृष्टि से देखें तो डिजिटल के लिए यह साल काफी अच्छा रहा। वर्ष 2021 में डिजिटल मीडिया के लिए यही चुनौती रहेगी कि जो लोग इससे जुड़े हैं, वह संख्या नीचे न जा पाए। इसके लिए वेबसाइट्स को अलग तरीके से सोचना पड़ेगा और नए प्रयोग करने पड़ेंगे। वेबसाइट्स को अपने खुद के कंटेंट और सबस्क्राइबर्स पर ज्यादा काम करना पड़ेगा। मेरा मानना है कि जो लोग डिजिटल मीडिया में अच्छा कंटेंट दे रहे हैं और बेहतर काम कर रहे हैं, वे नए साल में आगे बढ़ेंगे। अच्छे कंटेंट को लेकर जिसने भी 2020 में तैयारी की है, उसे 2021 में इसका लाभ जरूर मिलेगा।’

‘नवभारत टाइम्स’ (डिजिटल) के एडिटर आलोक कुमार का इस बारे में कहना है, ‘मेरा मानना है कि कोरोना के कारण डिजिटल में न्यूज के प्रति आकर्षण में बढ़ोतरी हुई। पहले जो यूजर्स डिजिटल पर नॉन न्यूज पढ़ने के लिए आते थे, वे न्यूज पढ़ने के लिए इस प्लेटफॉर्म पर आए। इस दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूनिक विजिटर्स की संख्या में 100 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। इस हिसाब से देखें तो वर्ष 2020 डिजिटल के लिए बेहतर रहा है, लेकिन रेवेन्यू के हिसाब से यह साल बहुत खराब रहा है। इसका कारण यह रहा कि अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई और विज्ञापन के साथ इनकी दरों में भी काफी कमी आई। ऐसे में यूनिक विजिटर्स और पेज व्यूज में काफी वृद्धि होने के बावजूद रेवेन्यू काफी घट गया। रही बात वर्ष 2021 की तो इस साल के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही रहेगी कि वर्ष 2020 में जो यूजर्स इस प्लेटफॉर्म पर जुड़े, उन्हें बरकरार रखा जाए। देखा जा रहा है कि लॉकडाउन खत्म होने के साथ-साथ डिजिटल यूजर्स की संख्या में कमी देखी जा रही है। ऐसे में डिजिटल मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि बढ़े हुए यूजर्स को जोड़े रखा जाए। इसके अलावा अगले साल 5-जी आने की उम्मीद है, ऐसे में यह भी चुनौती होगी कि आप कितनी तेजी से अपने कंटेंट को 5-जी के हिसाब से मोड़ते हैं।’

‘इंडियन एक्सप्रेस’ समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल ‘जनसत्ता.कॉम’(jansatta.com) के एडिटर विजय झा ने बताया कि वर्ष 2020 कोरोना की वजह से डिजिटल मीडिया क्या, किसी भी इंडस्ट्री के लिए एक तरह से ऐसा साल रहा जहां सर्वाइवल के लिए संघर्ष था। साल 2020 में तमाम चुनौतियां आईं, हालांकि ये धीरे-धीरे कम हो रही हैं। 2021 में भी इन चुनौतियों का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। 2020 में जो ट्रेंड हम लोग सोचकर चल रहे थे कि डिजिटल मीडिया काफी हावी होगा, उस ट्रेंड पर ज्यादा काम नहीं हो पाया। मेरे ख्याल से 2021 में भी उस पर फोकस बना रहेगा। 2021 में ऑरिजनल कंटेंट का महत्व और बढ़ने वाला है। अभी भी तमाम वेबसाइट्स कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन के लिए गूगल व अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं, गूगल भी ऑरिजनल कंटेंट को महत्व देने की बात कह चुका है। सिर्फ गूगल के लिहाज से ही नहीं बल्कि लॉयल यूजर्स के लिए भी ऑरिजनल कंटेंट को बहुत ज्यादा महत्व देने की जरूरत है। मुझे लगता है कि 2021 में इस पर काफी जोर रहेगा। मेरे हिसाब से 2021 में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल और ज्यादा होगा। हालांकि 2020 में यह प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन 2021 में यह और ज्यादा तेजी से चलेगी। साल 2020 में पेज व्यूज और यूजर्स की संख्या में चार महीने में जो वृद्धि हुई थी, उस समय लोगों के पास डिजिटल सीमित विकल्पों में से एक था। लॉकडाउन के दौरान जो यह वृद्धि देखने को मिली थी, मुझे नहीं लगता कि आगे भी यह इसी तरह से जारी रहेगी। हालांकि अन्य कारणों से इसमें वृद्धि हो सकती है, क्योंकि मेरा मानना है कि मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ेगी। आने वाले साल में न्यूज का उपभोग निश्चित बढ़ेगा और यूजर्स की संख्या भी बढ़ेगी। हालांकि, अभी हम ये नहीं कह सकते हैं कि यह लॉकडाउन में हुई बढ़ोतरी जितनी होगी, हां सामान्य वृद्धि तो होगी। क्योंकि उस समय जो वृद्धि हुई थी, वह परिस्थितियों के अनुसार हुई थी। मुझे लगता है कि सोशल साइट्स पर सजग यूजर्स की संख्या बढ़ रही है। ऐसे तमाम यूजर्स पैनी नजर रखते हैं और कुछ गलत होने पर सकारात्मक रूप से टोकते भी हैं तो मुझे लगता है कि 2021 में ऐसे यूजर्स की संख्या में और बढ़ोतरी होगी और इसके अच्छे परिणाम निकलेंगे।      

‘बीबीसी हिंदी’ के एडिटर मुकेश शर्मा के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि डिजिटल के लिए साल 2020 को दो तरह से देखना चाहिए। ऑरिजिनल कवरेज के लिहाज से देखें तो यह साल काफी चुनौती भर रहा, लेकिन लोगों तक पहुंच के मामले में यह गोल्डन ईयर रहा। ऑरिजिनल कवरेज की बात करें तो रिपोर्टर्स ऑनग्राउंड जाकर उस तरह से कंटेंट नहीं ला पा रहे थे, जिस तरह से महामारी से पहले लाते थे, लेकिन लोगों तक डिजिटल न्यूज पहुंचाने के टूल्स काफी इस्तेमाल होने लगे। यानी 2020 में महामारी ने स्कूली बच्चे से लेकर बड़ों तक को डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करना सिखा दिया, जो पहले काफी कम था। यानी हम कह सकते हैं कि टेक्नोलॉजी पार्ट के हिसाब से डिजिटल के लिए यह साल काफी अच्छा रहा। 2020 में लोगों के अंदर न्यूज की ‘भूख’ भी काफी थी। लोग महामारी से जुड़ी हर खबर को जानना चाहते थे कि कहां क्या हो रहा है। लोग यह सारी जानकारी खोजना चाहते थे, इसलिए भी डिजिटल पर ज्यादा आए।’

मुकेश शर्मा के अनुसार, ’टीवी पर होता यह है कि आपको जो सुनाया व दिखाया जा रहा है, आपको वही सुनना और देखना पड़ेगा, लेकिन डिजिटल में ऐसा नहीं है। डिजिटल ऐसा माध्यम है कि जहां आप जो जानना चाहते हैं, वह तलाश सकते हैं। महामारी के कारण साल 2020 लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल थे और इसलिए भी उनका रुझान डिजिटल की तरफ बढ़ा, ताकि उन्हें जवाब मिल सकें। मेरे कहने का मतलब है कि इस्तेमाल (Comsumption) के मामले में डिजिटल के लिए यह साल काफी अच्छा रहा। रही बात रेवेन्यू की तो शुरुआत में थोड़ा सा ठहराव आया था, लेकिन अब ब्रैंड्स वापस लौट रहे हैं। मेरा मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल और आगे बढ़ेगा। हालांकि, नए साल में डिजिटल के लिए ऑरिजनल कंटेंट को जुटाने की चुनौती भी रहेगी।’

‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में डिजिटल एडिटर शैलेश कुमार का कहना है, ‘मार्च में जब भारत में कोरोना आया था और इसका संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन की वजह से तमाम जगह अखबार नहीं पहुंच पा रहे थे, ऐसे में लोगों के लिए या तो टीवी था या फिर डिजिटल मीडिया। इस दौरान एंटरटेनमेंट की बात करें तो रामायण और महाभारत जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों का प्रसारण फिर शुरू हुआ और इनकी टीआरपी भी काफी रही। जहां तक न्यूज की बात है तो अखबार के विकल्प के रूप में डिजिटल आया। साल 2020 के चार महीने (अप्रैल, मई, जून व जुलाई) डिजिटल के लिए काफी अहम रहे। इसका फायदा डिजिटल मीडिया को आने वाले साल में मिल सकता है, क्योंकि अखबार का विकल्प टीवी उस तरह से बन नहीं पाया है, लेकिन डिजिटल में वह क्षमताएं हैं, जहां पर आपको 24*7 न्यूज भी मिल सकती है और आप क्रेडिबिलिटी बना सकते हैं। ऐसे में वर्ष 2021 में डिजिटल मीडिया को इसका लाभ मिल सकता है। 2020 में डिजिटल ने एक नया पाठक वर्ग अपने साथ जोड़ा और अब क्रेडिबिलिटी व बेहतर प्रजेंटेशन के साथ उसे बरकरार रखने का काम 2021 कर सकता है।’

‘न्यूज नेशन’ (डिजिटल) के एडिटर राजीव मिश्रा के अनुसार, ‘न्यूज नेशन की बात करें तो मई में हमने अपना डोमेन बदला था। ऐसे में शुरुआत में थोड़ी दिक्कत आई थी, लेकिन अब हम ग्रोथ की ओर अग्रसर हैं। रही बात रेवेन्यू की तो हम शुरू में डिजिटल में इतने स्थापित नहीं थे। मैं दूसरों से तुलना नहीं करूंगा, लेकिन हमने रेवेन्यू में भी डिजिटल का रिकॉर्ड बनाए रखा है। चूंकि डिजिटल में स्पीड काफी मायने रखती है, ऐसे में वर्क फ्रॉम होम के कारण इस पर थोड़ा असर जरूर पड़ा, क्योंकि ऑफिस के मुकाबले इसमें कम्युनिकेशन में थोड़ा समय लगता है। मुझे लगता है कि इसमें अन्य संस्थानों को भी थोड़ी दिक्कत हुई होगी। यह थोड़ी सी दिक्कत अभी भी चल ही रही है, क्योंकि अभी भी ज्यादातर स्टाफ वर्क फ्रॉम होम कर रहा है। ब्रेकिंग खबरों के लिहाज से वर्ष 2020 काफी महत्वपूर्ण रहा है, ऐसे में डिजिटल को अपनी स्पीड को कायम रखने में थोड़ी सी दिक्कत जरूर हुई। डिजिटल के लिए यह साल खासकर न्यूज नेशन के लिए एक तरह से मिला-जुला रहा। मुझे उम्मीद है कि 2021 डिजिटल के लिए काफी बेहतर रहेगा। हम ट्रैफिक, रेवेन्यू और मार्केटिंग सभी में आगे बढ़ रहे हैं। हमने पिछले महीनों में भी अच्छी ग्रोथ की है और हमने जो अपना बेस मजबूत किया है, अब उसका लाभ लेने का समय आ रहा है। न्यूज नेशन के लिए वर्ष 2021 बहुत अच्छा होने वाला है। कुल मिलाकर आने वाला साल मेरी नजर में टीवी के मुकाबले डिजिटल के लिए काफी बेहतर रहने वाला है।’


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