PROGA के जरिए केंद्र का बड़ा दांव : ऑनलाइन गेमिंग की निगरानी अब एक ही जगह

सरकार ने Online Gaming Act 2026 लागू किया है, जिसमें ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध और सोशल गेम्स व ई-स्पोर्ट्स पर केंद्र का नियंत्रण तय किया गया है, जिससे सेक्टर में स्पष्टता आएगी।

Last Modified:
Thursday, 23 April, 2026
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केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2026 (PROGA) भारत के गेमिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की शुरुआत करने जा रहा है। यह कानून 1 मई से लागू होगा और इसका उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए स्पष्ट और एकीकृत रेगुलेटरी ढांचा तैयार करना है। इस नए कानून के तहत सबसे बड़ा कदम ऑनलाइन मनी गेम्स पर सख्त प्रतिबंध लगाना है। खास बात यह है कि अब गेम्स को स्किल या चांस के आधार पर अलग-अलग देखने की बजाय, मनी आधारित गेमिंग को पूरी तरह से बैन किया गया है।

वहीं, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स को केंद्र सरकार के दायरे में लाया गया है, जिससे पूरे देश में एक समान नियम लागू होंगे। इसके लिए एक केंद्रीय रेगुलेटर -Online Gaming Authority of India की स्थापना की गई है, जो इन क्षेत्रों की निगरानी करेगा। इस बदलाव का असर राज्य स्तर की संस्थाओं पर भी पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, तमिलनाडु ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी (TNOGA) अब सोशल गेम्स को रेगुलेट नहीं कर पाएगी, क्योंकि यह अधिकार केंद्र के पास चला गया है। हालांकि, बेटिंग और जुआ जैसे मामलों में राज्यों की भूमिका बनी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गेमिंग इंडस्ट्री में मौजूद रेगुलेटरी भ्रम को खत्म करेगा और डेवलपर्स को अलग-अलग राज्यों के नियमों से राहत देगा। हालांकि, इस कानून के लागू होने के बाद भी एक बड़ी चुनौती इसका प्रभावी क्रियान्वयन होगा। खासकर अवैध और ऑफशोर बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई में राज्यों की भूमिका अहम बनी रहेगी।

इंडस्ट्री के कई प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे सोशल गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स को स्पष्ट पहचान और सुरक्षा मिलेगी। कुल मिलाकर, PROGA 2026 एक संतुलित कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकार ने एक ओर यूजर सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं दूसरी ओर वैध गेमिंग सेगमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में स्पष्ट नीति बनाई है।

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डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘अमृत उजाला’ का भव्य शुभारंभ

‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी।

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
Amrit Ujala

बहुप्रतीक्षित डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘अमृत उजाला’ की न्यूज वेबसाइट, न्यूज ऐप एवं यूट्यूब न्यूज चैनल का शुभारंभ 24 जून को कानपुर में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित के. ए. दुबे पद्मेश के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।

इस अवसर पर पंडित पद्मेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मीडिया क्षेत्र के अनुभवी एवं प्रतिष्ठित लोगों द्वारा प्रारंभ किया गया यह अभिनव प्रयास निश्चित रूप से सफलता के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘अमृत उजाला’ प्रदेश के दूरस्थ गांवों एवं छोटे कस्बों तक की महत्वपूर्ण खबरों को आम जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर ‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य देश के सभी हिंदी भाषी राज्यों के प्रत्येक जिले, कस्बे एवं गांव की खबरों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी। उन्होंने बताया कि ‘अमृत उजाला’ का ध्येय वाक्य है-‘अब सच की रोशनी, हर जिले में।’

डॉ. सिंह ने बताया कि ‘अमृत उजाला’ के न्यूज ऐप को और अधिक उन्नत बनाया जा रहा है, जिसे पाठक गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ‘अमृत उजाला’ का यूट्यूब न्यूज चैनल भी एक जुलाई से शुरू हो जाएगा।

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पद्म पुरस्कार विजेताओं की अनकही कहानियां लेकर आएंगी पद्मजा जोशी

वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) का प्रकाशन 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) करेगा।

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
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'ग्रिन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' (Grin Media Private Limited) की प्रकाशन इकाई 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) ने वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) के प्रकाशन की घोषणा की है। यह एक नैरेटिव नॉन-फिक्शन (Narrative Non-Fiction) पुस्तक होगी, जिसमें भारत के पद्म पुरस्कार विजेताओं की प्रेरणादायक और कम चर्चित कहानियों को शामिल किया जाएगा।

पुस्तक का हार्डकवर संस्करण 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) के बैनर तले प्रकाशित किया जाएगा। दक्षिण एशिया में इसके वितरण की जिम्मेदारी 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (Penguin Random House India) संभालेगा, जिसने प्रकाशक के साथ साझेदारी की है।

प्रकाशक के अनुसार, 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) उन व्यक्तियों की जीवन यात्राओं को सामने लाने का प्रयास है, जिनका योगदान समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जो अक्सर सार्वजनिक चर्चा से दूर रहे। पुस्तक में 1954 में शुरू हुए पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) के इतिहास और विकास को भी रेखांकित किया जाएगा।

इसमें पर्यावरणविदों, शिक्षकों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पैरा-एथलीट्स सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पद्म सम्मान प्राप्त व्यक्तित्वों की कहानियां शामिल होंगी। पुस्तक में 'वॉटर मैन ऑफ इंडिया' (Water Man of India) राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh), किसान एवं पर्यावरणविद जादव "मोलाई" पायेंग (Jadav "Molai" Payeng), पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर (Murlikant Petkar) और ट्रांसजेंडर लोक कलाकार मंजम्मा जोगती (Manjamma Jogati) जैसे नामों को भी स्थान दिया गया है।

'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने कहा कि पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) में एक पत्रकार की शोधपरक दृष्टि, साहित्यकार की संवेदनशीलता और आम भारतीयों की असाधारण उपलब्धियों को सामने लाने का जुनून है। प्रकाशक ने बताया कि इसे दक्षिण एशिया के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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AI ने न्यूजरूम व क्रिएटिव वर्ल्ड को क्यों हिला दिया है? भरोसे और पारदर्शिता की नई लड़ाई

हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

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Wednesday, 24 June, 2026
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दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।

इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।

किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।

लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।

इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।

इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।

AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।

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एआई के चलते 'ओरेकल' में बड़े पैमाने पर छंटनी : 13% घटी वर्कफोर्स

अमेरिकी टेक कंपनी 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की है। भविष्य में भी वर्कफोर्स में कटौती जारी रह सकती है।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिकी टेक दिग्गज 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 नौकरियों में कटौती की है। कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 तक उसकी कुल वर्कफोर्स घटकर 1.41 लाख रह गई, जो एक वर्ष पहले लगभग 1.62 लाख थी। यानी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

सोमवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'ओरेकल' (Oracle) ने कहा कि उसके विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में एआई (AI) तकनीकों के इस्तेमाल से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और भविष्य में भी ऐसी कटौती जारी रह सकती है। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन और उत्पाद संबंधी बदलाव, प्रदर्शन मूल्यांकन, रणनीतिक पुनर्गठन और अधिग्रहण जैसी वजहों ने भी वर्कफोर्स में बदलाव को प्रभावित किया है।

इस वर्ष मार्च में भी 'ओरेकल' (Oracle) ने संकेत दिया था कि वह बड़े पैमाने पर नौकरी कटौती करने जा रही है। कंपनी उस समय एआई (AI) डेटा सेंटर विस्तार योजनाओं पर भारी निवेश के कारण नकदी दबाव का सामना कर रही थी।

'लैरी एलिसन' (Larry Ellison) के नेतृत्व में 'ओरेकल' (Oracle) अब पारंपरिक डेटाबेस सॉफ्टवेयर कंपनी से आगे बढ़कर एआई (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रही है। कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) जैसे ग्राहकों के लिए विशाल एआई डेटा सेंटर विकसित कर रही है, जिससे उसका मुकाबला 'अमेजन' (Amazon) और 'माइक्रोसॉफ्ट' (Microsoft) जैसे दिग्गजों से हो रहा है।

हालांकि इस बदलाव की कीमत भी कंपनी को चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में पुनर्गठन गतिविधियों के तहत 'ओरेकल' (Oracle) ने कर्मचारियों को सेवरेंस और अन्य एग्जिट लागत के रूप में 1.84 अरब डॉलर खर्च किए। यह पिछले वित्त वर्ष के 374 मिलियन डॉलर के मुकाबले कई गुना अधिक है।

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गलत कैमरा भेजने पर 'एमेजॉन' और विक्रेता पर 4.68 लाख रुपये का जुर्माना

दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत कैमरा डिलीवर करने और रिफंड से इनकार करने के मामले में 'एमेजॉन' को ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने ई-कॉमर्स कंपनी 'एमेजॉन' (Amazon) और उसके एक विक्रेता को एक ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला ग्राहक को ऑर्डर किए गए कैमरे की जगह दूसरा मॉडल भेजे जाने और बाद में रिफंड देने से इनकार करने से जुड़ा है।

आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष तिकेंद्र नारायण प्रधान (Tikendra Narayan Pradhan) और सदस्य भावना ठाकुरी (Bhawana Thakuri) शामिल थीं, ने 'एमेजॉन' (Amazon) और विक्रेता को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।

मामले के अनुसार, ग्राहक ने 'एमेजॉन' (Amazon) के माध्यम से 1.43 लाख रुपये कीमत का 'फुजीफिल्म एक्स-टी5' (Fujifilm X-T5) डिजिटल कैमरा खरीदा था। फरवरी 2025 में डिलीवरी मिलने पर ग्राहक ने पाया कि उसे 'फुजीफिल्म एक्स-टी50' (Fujifilm X-T50) मॉडल भेजा गया है, जो ऑर्डर किए गए उत्पाद से अलग था।

ग्राहक ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद उसे कैमरा वापस भेजने और रिफंड मिलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि उत्पाद वापस लेने के बाद रिफंड अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लौटाया गया उत्पाद मूल ऑर्डर से मेल नहीं खाता। बाद में ग्राहक को यह भी बताया गया कि मामला गलत डिलीवरी का नहीं, बल्कि इस्तेमाल या क्षतिग्रस्त उत्पाद का है।

ग्राहक ने ईमेल और तस्वीरों के माध्यम से अपने दावे के समर्थन में सबूत भी प्रस्तुत किए, लेकिन न तो रिफंड दिया गया और न ही कैमरा वापस लौटाया गया। कानूनी नोटिस का भी कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।

आयोग ने 1.43 लाख रुपये की रिफंड राशि के अलावा 2 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न, 1 लाख रुपये सेवा में लापरवाही और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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'Meta' ने 'Cred' में किया 900 मिलियन डॉलर का निवेश

'मेटा प्लेटफॉर्म्स' ने 'क्रेड' में 900 मिलियन डॉलर का निवेश कर 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है। साथ ही कंपनी ने कुणाल शाह को 'व्हाट्सऐप' का नया प्रमुख नियुक्त किया है।

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
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'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए भारतीय फिनटेक कंपनी 'क्रेड' (Cred) में 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इस निवेश के बाद 'मेटा' (Meta) को कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। इस सौदे के बाद 'क्रेड' (Cred) का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर आंका गया है।

निवेश के साथ ही 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने एक महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव का भी ऐलान किया है। कंपनी ने 'क्रेड' (Cred) के संस्थापक कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वह 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) की जगह लेंगे, जिन्होंने सात वर्षों तक 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) 'मेटा' (Meta) के सबसे प्रभावशाली और सफल नेताओं में से एक रहे हैं। उनके नेतृत्व में 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) ने 3 अरब से अधिक यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई और प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कंपनी के अनुसार, कैथकार्ट अब 'मेटा' (Meta) के भीतर एक नई भूमिका संभालेंगे, जहां वह शुरुआत से नए उत्पादों के विकास पर काम करेंगे। कंपनी ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनके साथ करीबी सहयोग जारी रहेगा।

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नाबालिगों पर सोशल मीडिया बैन से JIO को चिंता, IPO दस्तावेज में बताया कारोबारी जोखिम

देश में अगर नाबालिगों (18 साल से कम उम्र के बच्चों) के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगती है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर ही नहीं बल्कि टेलीकॉम सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
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देश में अगर नाबालिगों (18 साल से कम उम्र के बच्चों) के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगती है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर ही नहीं बल्कि टेलीकॉम सेक्टर पर भी पड़ सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने अपने आईपीओ (IPO) दस्तावेजों में पहली बार इस तरह की आशंका जताई है।

न्यूज वेबसाइट 'मिंट' (Mint) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कहा है कि अगर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर किसी तरह की रोक या सीमा लगाई जाती है, खासकर नाबालिगों के लिए, तो इससे ग्राहकों की डेटा खपत प्रभावित हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग या डेटा उपयोग पर अतिरिक्त शुल्क जैसी नीतियां डेटा की खपत कम कर सकती हैं, जिसका सीधा असर उसके कारोबार पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जियो ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसमें वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया तथा डिजिटल पेमेंट्स की बड़ी भूमिका है। ऐसे में यदि सोशल मीडिया के यूजर्सओं की संख्या घटती है या उन पर सख्त नियम लागू होते हैं, तो मोबाइल डेटा की मांग पर असर पड़ सकता है।

भारत दुनिया में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। अक्टूबर 2025 तक भारत में फेसबुक के करीब 40.3 करोड़, इंस्टाग्राम के 48.1 करोड़ और यूट्यूब के 50 करोड़ मासिक सक्रिय यूजर्स थे। हालांकि भारत में फिलहाल नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इस दिशा में चर्चा तेज हो रही है।

मार्च 2026 में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा था। वहीं दुनिया के कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

ऑस्ट्रेलिया इस मामले में सबसे आगे है। जनवरी 2026 में वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इसके तहत टिकटॉक, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और थ्रेड्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

ब्रिटेन भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। वहां के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल ही में कहा है कि उनकी सरकार 2027 तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने और गेमिंग व लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी अतिरिक्त नियंत्रण लगाने की योजना बना रही है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और मलेशिया जैसे देश भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के विकल्पों पर काम कर रहे हैं।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी सोशल मीडिया तक पहुंच पर उम्र आधारित प्रतिबंधों की सिफारिश की गई थी। सर्वेक्षण में कहा गया था कि आज लगभग सभी युवा मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए अब चिंता इंटरनेट की उपलब्धता नहीं बल्कि डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य, कंटेंट की गुणवत्ता और डिजिटल स्वच्छता जैसी चुनौतियों की है।

सर्वेक्षण में यह भी सुझाव दिया गया था कि सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन (Age Verification) और बच्चों के लिए सुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग्स लागू करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। खासकर सोशल मीडिया, जुआ ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर और टारगेटेड विज्ञापनों के मामले में कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत बताई गई थी।

फिलहाल, जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के जरिए 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी कर पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था फिलहाल देश के कुल सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added) में लगभग 14 प्रतिशत योगदान दे रही है और आने वाले वर्षों में डेटा खपत में और तेज वृद्धि होने की उम्मीद है।

जियो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत 25.7 जीबी रही, जो अमेरिका जैसे विकसित देशों से भी अधिक है। कंपनी का अनुमान है कि यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 59.2 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। हालांकि सोशल मीडिया पर संभावित प्रतिबंधों और नए नियामकीय नियमों को कंपनी ने अपने भविष्य के कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में भी चिन्हित किया है।

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‘जागरण न्यू मीडिया’ को अलविदा कह ‘NDTV’ की डिजिटल टीम में शामिल हुए विनय सक्सेना

पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
Vinay Saxena

पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।

इस बारे में विनय सक्सेना ने खुद सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की है। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘NDTV India के साथ नई पारी की शुरुआत।’ NDTV से जुड़ने से पहले वह जागरण न्यू मीडिया में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अप्रैल 2023 से जून 2026 तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

विनय सक्सेना प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम कर चुके हैं। जागरण न्यू मीडिया से पहले वह वन इंडिया हिंदी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने विभिन्न संपादकीय भूमिकाओं में काम किया। इसके अलावा वह डीबी डिजिटल (दैनिक भास्कर समूह) में सब एडिटर और राजस्थान पत्रिका में क्रिएटिव कंटेंट राइटर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले विनय सक्सेना ने अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा के बाद पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की।

समाचार4मीडिया की ओर से विनय सक्सेना को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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Penske Media खरीदेगी Vox Media के बड़े ब्रैंड्स, डिजिटल मीडिया में बढ़ी ताकत

अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2026
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डिजिटल मीडिया जगत में एक बड़ा सौदा हुआ है। अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है। इस डील के तहत The Verge, Eater, SB Nation, Popsugar, The Dodo, Punch और Thrillist जैसे चर्चित डिजिटल ब्रैंड अब PMC के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाएंगे।

इसके अलावा, Vox Media का प्रीमियम विज्ञापन मार्केटप्लेस Concert और फर्स्ट-पार्टी डेटा प्लेटफॉर्म Forte भी इस सौदे में शामिल हैं। गौरतलब है कि इस डील से पहले भी PMC, Vox Media की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी थी। हालांकि सौदे के बाद Vox Media के मौजूदा शेयरधारकों की नई कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी बनी रहेगी।

PMC ने इस अधिग्रहण के लिए PMX नाम से एक नई सहायक कंपनी बनाई है। इस नई इकाई में PMC के मौजूदा प्रतिष्ठित ब्रैंड जैसे Billboard, Variety, Rolling Stone, WWD, The Hollywood Reporter, Deadline, Robb Report, Artforum, Sportico, SHE Media, StyleCaster, ARTnews, FN, IndieWire और VIBE को Vox Media के अधिग्रहित ब्रैंडों के साथ जोड़ा जाएगा। इस तरह PMX के पास कुल मिलाकर 25 से अधिक बड़े मीडिया टाइटल्स का पोर्टफोलियो होगा।

कंपनी का कहना है कि इस विलय के बाद वह डिजिटल मीडिया क्षेत्र की सबसे बड़ी पब्लिशिंग कंपनी बन जाएगी। संयुक्त रूप से यह नेटवर्क हर महीने दुनिया भर में करोड़ों पाठकों और दर्शकों तक पहुंचेगा, सालाना 300 से अधिक लाइव इवेंट आयोजित करेगा और विज्ञापन तकनीक के क्षेत्र में भी मजबूत स्थिति रखेगा।

इस नई कंपनी PMX की कमान रायन पॉले संभालेंगे, जो हाल तक Vox Media के अध्यक्ष थे। मीडिया, संपादकीय, व्यापारिक और संचालन नेतृत्व में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पॉले न्यूयॉर्क से काम करेंगे और PMC के चेयरमैन एवं सीईओ जे पेंस्के तथा कंपनी के अध्यक्ष क्रेग पेरो को रिपोर्ट करेंगे।

वहीं PMC में रणनीति और संचालन के कार्यकारी उपाध्यक्ष टॉम फिन को PMX का मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बनाया गया है। इसके अलावा कंपनी के वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी केनेथ डेलालकाज़ार अब PMX के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

PMC के संस्थापक और सीईओ जे पेंस्के ने कहा कि उन्हें Vox Media की टीम और उसके ब्रैंडों का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने रायन पॉले को मीडिया और तकनीक क्षेत्र का अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि वह PMX के अगले विकास चरण का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।

PMC के अध्यक्ष क्रेग पेरो ने कहा कि Vox Media के ये ब्रैंड कंपनी के मौजूदा पोर्टफोलियो को और मजबूत करेंगे। इससे कंटेंट की विविधता बढ़ेगी, पाठकों की पहुंच का विस्तार होगा और कंपनी के लाइव इवेंट कारोबार को भी नई ताकत मिलेगी।

रायन पॉले ने कहा कि यह मीडिया उद्योग के सबसे मजबूत ब्रैंड पोर्टफोलियो में से एक है, जिसने न केवल इतिहास बनाया है बल्कि आज भी संस्कृति और समाज को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगे का लक्ष्य इन प्रतिष्ठित ब्रैंडों को और मजबूत बनाना, पत्रकारिता की गुणवत्ता बनाए रखना तथा दर्शकों और समुदायों के साथ गहरा जुड़ाव कायम रखना होगा।

इस सौदे में Vox Media के लिए वित्तीय सलाहकार की भूमिका LionTree ने निभाई, जबकि कानूनी सलाहकार के रूप में Clifford Chance US ने काम किया।

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हिंदुस्तान डिजिटल को बाय बोलकर अब NDTV Digital (Hindi) से जुड़े सूर्य प्रकाश

करीब पांच वर्षों तक हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े रहे वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार सूर्य प्रकाश ने नई जिम्मेदारी संभालते हुए NDTV India की डिजिटल टीम में कदम रखा है।

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
Surya Prakash

डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार सूर्य प्रकाश ने अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने हाल ही में NDTV India की डिजिटल टीम में डिप्टी एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये साझा की।

सूर्य प्रकाश ने अपने पोस्ट में लिखा कि पत्रकारिता के सफर में एक नया पड़ाव आया है और वह अब NDTV India की डिजिटल टीम का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों से उनकी पेशेवर पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हिंदुस्तान डिजिटल का साथ अब छूट गया है और अब नई पारी की शुरुआत हो रही है।

सूर्य प्रकाश पिछले करीब पांच वर्षों से हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े हुए थे। वह वहां एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत थे और लाइव हिंदुस्तान के न्यूज ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, वायरल और मौसम से जुड़ी खबरों के कंटेंट ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सूर्य प्रकाश को डिजिटल मीडिया क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में हिंदुस्तान डिजिटल, इंडियन एक्सप्रेस समूह, नवभारत टाइम्स डॉट कॉम, टाइम्स इंटरनेट, अमर उजाला और दिव्य हिमाचल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।

मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले सूर्य प्रकाश की कंटेंट स्ट्रेटेजी, सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी, एनालिटिक्स और एसईओ जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता है।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो सूर्य प्रकाश ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

उन्होंने जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड वारफेयर जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक पर हाल ही में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है। समाचार4मीडिया की ओर से सूर्य प्रकाश को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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