'मेटा प्लेटफॉर्म्स' ने 'क्रेड' में 900 मिलियन डॉलर का निवेश कर 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है। साथ ही कंपनी ने कुणाल शाह को 'व्हाट्सऐप' का नया प्रमुख नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए भारतीय फिनटेक कंपनी 'क्रेड' (Cred) में 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इस निवेश के बाद 'मेटा' (Meta) को कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी। इस सौदे के बाद 'क्रेड' (Cred) का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर आंका गया है।
निवेश के साथ ही 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' (Meta Platforms) ने एक महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव का भी ऐलान किया है। कंपनी ने 'क्रेड' (Cred) के संस्थापक कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वह 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) की जगह लेंगे, जिन्होंने सात वर्षों तक 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि 'विल कैथकार्ट' (Will Cathcart) 'मेटा' (Meta) के सबसे प्रभावशाली और सफल नेताओं में से एक रहे हैं। उनके नेतृत्व में 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) ने 3 अरब से अधिक यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई और प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी के अनुसार, कैथकार्ट अब 'मेटा' (Meta) के भीतर एक नई भूमिका संभालेंगे, जहां वह शुरुआत से नए उत्पादों के विकास पर काम करेंगे। कंपनी ने उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनके साथ करीबी सहयोग जारी रहेगा।
अमेरिकी टेक कंपनी 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की है। भविष्य में भी वर्कफोर्स में कटौती जारी रह सकती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिकी टेक दिग्गज 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 नौकरियों में कटौती की है। कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 तक उसकी कुल वर्कफोर्स घटकर 1.41 लाख रह गई, जो एक वर्ष पहले लगभग 1.62 लाख थी। यानी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'ओरेकल' (Oracle) ने कहा कि उसके विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में एआई (AI) तकनीकों के इस्तेमाल से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और भविष्य में भी ऐसी कटौती जारी रह सकती है। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन और उत्पाद संबंधी बदलाव, प्रदर्शन मूल्यांकन, रणनीतिक पुनर्गठन और अधिग्रहण जैसी वजहों ने भी वर्कफोर्स में बदलाव को प्रभावित किया है।
इस वर्ष मार्च में भी 'ओरेकल' (Oracle) ने संकेत दिया था कि वह बड़े पैमाने पर नौकरी कटौती करने जा रही है। कंपनी उस समय एआई (AI) डेटा सेंटर विस्तार योजनाओं पर भारी निवेश के कारण नकदी दबाव का सामना कर रही थी।
'लैरी एलिसन' (Larry Ellison) के नेतृत्व में 'ओरेकल' (Oracle) अब पारंपरिक डेटाबेस सॉफ्टवेयर कंपनी से आगे बढ़कर एआई (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रही है। कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) जैसे ग्राहकों के लिए विशाल एआई डेटा सेंटर विकसित कर रही है, जिससे उसका मुकाबला 'अमेजन' (Amazon) और 'माइक्रोसॉफ्ट' (Microsoft) जैसे दिग्गजों से हो रहा है।
हालांकि इस बदलाव की कीमत भी कंपनी को चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में पुनर्गठन गतिविधियों के तहत 'ओरेकल' (Oracle) ने कर्मचारियों को सेवरेंस और अन्य एग्जिट लागत के रूप में 1.84 अरब डॉलर खर्च किए। यह पिछले वित्त वर्ष के 374 मिलियन डॉलर के मुकाबले कई गुना अधिक है।
दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत कैमरा डिलीवर करने और रिफंड से इनकार करने के मामले में 'एमेजॉन' को ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने ई-कॉमर्स कंपनी 'एमेजॉन' (Amazon) और उसके एक विक्रेता को एक ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला ग्राहक को ऑर्डर किए गए कैमरे की जगह दूसरा मॉडल भेजे जाने और बाद में रिफंड देने से इनकार करने से जुड़ा है।
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष तिकेंद्र नारायण प्रधान (Tikendra Narayan Pradhan) और सदस्य भावना ठाकुरी (Bhawana Thakuri) शामिल थीं, ने 'एमेजॉन' (Amazon) और विक्रेता को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।
मामले के अनुसार, ग्राहक ने 'एमेजॉन' (Amazon) के माध्यम से 1.43 लाख रुपये कीमत का 'फुजीफिल्म एक्स-टी5' (Fujifilm X-T5) डिजिटल कैमरा खरीदा था। फरवरी 2025 में डिलीवरी मिलने पर ग्राहक ने पाया कि उसे 'फुजीफिल्म एक्स-टी50' (Fujifilm X-T50) मॉडल भेजा गया है, जो ऑर्डर किए गए उत्पाद से अलग था।
ग्राहक ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद उसे कैमरा वापस भेजने और रिफंड मिलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि उत्पाद वापस लेने के बाद रिफंड अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लौटाया गया उत्पाद मूल ऑर्डर से मेल नहीं खाता। बाद में ग्राहक को यह भी बताया गया कि मामला गलत डिलीवरी का नहीं, बल्कि इस्तेमाल या क्षतिग्रस्त उत्पाद का है।
ग्राहक ने ईमेल और तस्वीरों के माध्यम से अपने दावे के समर्थन में सबूत भी प्रस्तुत किए, लेकिन न तो रिफंड दिया गया और न ही कैमरा वापस लौटाया गया। कानूनी नोटिस का भी कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने 1.43 लाख रुपये की रिफंड राशि के अलावा 2 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न, 1 लाख रुपये सेवा में लापरवाही और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
देश में अगर नाबालिगों (18 साल से कम उम्र के बच्चों) के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगती है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर ही नहीं बल्कि टेलीकॉम सेक्टर पर भी पड़ सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में अगर नाबालिगों (18 साल से कम उम्र के बच्चों) के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगती है, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर ही नहीं बल्कि टेलीकॉम सेक्टर पर भी पड़ सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने अपने आईपीओ (IPO) दस्तावेजों में पहली बार इस तरह की आशंका जताई है।
न्यूज वेबसाइट 'मिंट' (Mint) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में कहा है कि अगर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर किसी तरह की रोक या सीमा लगाई जाती है, खासकर नाबालिगों के लिए, तो इससे ग्राहकों की डेटा खपत प्रभावित हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग या डेटा उपयोग पर अतिरिक्त शुल्क जैसी नीतियां डेटा की खपत कम कर सकती हैं, जिसका सीधा असर उसके कारोबार पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जियो ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इसमें वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया तथा डिजिटल पेमेंट्स की बड़ी भूमिका है। ऐसे में यदि सोशल मीडिया के यूजर्सओं की संख्या घटती है या उन पर सख्त नियम लागू होते हैं, तो मोबाइल डेटा की मांग पर असर पड़ सकता है।
भारत दुनिया में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। अक्टूबर 2025 तक भारत में फेसबुक के करीब 40.3 करोड़, इंस्टाग्राम के 48.1 करोड़ और यूट्यूब के 50 करोड़ मासिक सक्रिय यूजर्स थे। हालांकि भारत में फिलहाल नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इस दिशा में चर्चा तेज हो रही है।
मार्च 2026 में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा था। वहीं दुनिया के कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
ऑस्ट्रेलिया इस मामले में सबसे आगे है। जनवरी 2026 में वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इसके तहत टिकटॉक, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और थ्रेड्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
ब्रिटेन भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। वहां के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हाल ही में कहा है कि उनकी सरकार 2027 तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने और गेमिंग व लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी अतिरिक्त नियंत्रण लगाने की योजना बना रही है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और मलेशिया जैसे देश भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के विकल्पों पर काम कर रहे हैं।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी सोशल मीडिया तक पहुंच पर उम्र आधारित प्रतिबंधों की सिफारिश की गई थी। सर्वेक्षण में कहा गया था कि आज लगभग सभी युवा मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए अब चिंता इंटरनेट की उपलब्धता नहीं बल्कि डिजिटल लत, मानसिक स्वास्थ्य, कंटेंट की गुणवत्ता और डिजिटल स्वच्छता जैसी चुनौतियों की है।
सर्वेक्षण में यह भी सुझाव दिया गया था कि सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन (Age Verification) और बच्चों के लिए सुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग्स लागू करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। खासकर सोशल मीडिया, जुआ ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर और टारगेटेड विज्ञापनों के मामले में कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत बताई गई थी।
फिलहाल, जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के जरिए 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी कर पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था फिलहाल देश के कुल सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added) में लगभग 14 प्रतिशत योगदान दे रही है और आने वाले वर्षों में डेटा खपत में और तेज वृद्धि होने की उम्मीद है।
जियो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत 25.7 जीबी रही, जो अमेरिका जैसे विकसित देशों से भी अधिक है। कंपनी का अनुमान है कि यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 59.2 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। हालांकि सोशल मीडिया पर संभावित प्रतिबंधों और नए नियामकीय नियमों को कंपनी ने अपने भविष्य के कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में भी चिन्हित किया है।
पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकार विनय सक्सेना ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया है। उन्होंने इस समूह की डिजिटल टीम (हिंदी) में बतौर चीफ सब एडिटर जॉइन किया है।
इस बारे में विनय सक्सेना ने खुद सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की है। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘NDTV India के साथ नई पारी की शुरुआत।’ NDTV से जुड़ने से पहले वह जागरण न्यू मीडिया में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अप्रैल 2023 से जून 2026 तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
विनय सक्सेना प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम कर चुके हैं। जागरण न्यू मीडिया से पहले वह वन इंडिया हिंदी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने विभिन्न संपादकीय भूमिकाओं में काम किया। इसके अलावा वह डीबी डिजिटल (दैनिक भास्कर समूह) में सब एडिटर और राजस्थान पत्रिका में क्रिएटिव कंटेंट राइटर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले विनय सक्सेना ने अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा के बाद पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की।
समाचार4मीडिया की ओर से विनय सक्सेना को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया जगत में एक बड़ा सौदा हुआ है। अमेरिकी मीडिया कंपनी Penske Media Corporation (PMC) ने Vox Media के कई लोकप्रिय ब्रैंडों का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है। इस डील के तहत The Verge, Eater, SB Nation, Popsugar, The Dodo, Punch और Thrillist जैसे चर्चित डिजिटल ब्रैंड अब PMC के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाएंगे।
इसके अलावा, Vox Media का प्रीमियम विज्ञापन मार्केटप्लेस Concert और फर्स्ट-पार्टी डेटा प्लेटफॉर्म Forte भी इस सौदे में शामिल हैं। गौरतलब है कि इस डील से पहले भी PMC, Vox Media की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी थी। हालांकि सौदे के बाद Vox Media के मौजूदा शेयरधारकों की नई कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी बनी रहेगी।
PMC ने इस अधिग्रहण के लिए PMX नाम से एक नई सहायक कंपनी बनाई है। इस नई इकाई में PMC के मौजूदा प्रतिष्ठित ब्रैंड जैसे Billboard, Variety, Rolling Stone, WWD, The Hollywood Reporter, Deadline, Robb Report, Artforum, Sportico, SHE Media, StyleCaster, ARTnews, FN, IndieWire और VIBE को Vox Media के अधिग्रहित ब्रैंडों के साथ जोड़ा जाएगा। इस तरह PMX के पास कुल मिलाकर 25 से अधिक बड़े मीडिया टाइटल्स का पोर्टफोलियो होगा।
कंपनी का कहना है कि इस विलय के बाद वह डिजिटल मीडिया क्षेत्र की सबसे बड़ी पब्लिशिंग कंपनी बन जाएगी। संयुक्त रूप से यह नेटवर्क हर महीने दुनिया भर में करोड़ों पाठकों और दर्शकों तक पहुंचेगा, सालाना 300 से अधिक लाइव इवेंट आयोजित करेगा और विज्ञापन तकनीक के क्षेत्र में भी मजबूत स्थिति रखेगा।
इस नई कंपनी PMX की कमान रायन पॉले संभालेंगे, जो हाल तक Vox Media के अध्यक्ष थे। मीडिया, संपादकीय, व्यापारिक और संचालन नेतृत्व में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पॉले न्यूयॉर्क से काम करेंगे और PMC के चेयरमैन एवं सीईओ जे पेंस्के तथा कंपनी के अध्यक्ष क्रेग पेरो को रिपोर्ट करेंगे।
वहीं PMC में रणनीति और संचालन के कार्यकारी उपाध्यक्ष टॉम फिन को PMX का मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बनाया गया है। इसके अलावा कंपनी के वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी केनेथ डेलालकाज़ार अब PMX के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
PMC के संस्थापक और सीईओ जे पेंस्के ने कहा कि उन्हें Vox Media की टीम और उसके ब्रैंडों का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने रायन पॉले को मीडिया और तकनीक क्षेत्र का अनुभवी नेता बताते हुए कहा कि वह PMX के अगले विकास चरण का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।
PMC के अध्यक्ष क्रेग पेरो ने कहा कि Vox Media के ये ब्रैंड कंपनी के मौजूदा पोर्टफोलियो को और मजबूत करेंगे। इससे कंटेंट की विविधता बढ़ेगी, पाठकों की पहुंच का विस्तार होगा और कंपनी के लाइव इवेंट कारोबार को भी नई ताकत मिलेगी।
रायन पॉले ने कहा कि यह मीडिया उद्योग के सबसे मजबूत ब्रैंड पोर्टफोलियो में से एक है, जिसने न केवल इतिहास बनाया है बल्कि आज भी संस्कृति और समाज को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगे का लक्ष्य इन प्रतिष्ठित ब्रैंडों को और मजबूत बनाना, पत्रकारिता की गुणवत्ता बनाए रखना तथा दर्शकों और समुदायों के साथ गहरा जुड़ाव कायम रखना होगा।
इस सौदे में Vox Media के लिए वित्तीय सलाहकार की भूमिका LionTree ने निभाई, जबकि कानूनी सलाहकार के रूप में Clifford Chance US ने काम किया।
करीब पांच वर्षों तक हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े रहे वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार सूर्य प्रकाश ने नई जिम्मेदारी संभालते हुए NDTV India की डिजिटल टीम में कदम रखा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार सूर्य प्रकाश ने अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने हाल ही में NDTV India की डिजिटल टीम में डिप्टी एडिटर के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये साझा की।
सूर्य प्रकाश ने अपने पोस्ट में लिखा कि पत्रकारिता के सफर में एक नया पड़ाव आया है और वह अब NDTV India की डिजिटल टीम का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों से उनकी पेशेवर पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हिंदुस्तान डिजिटल का साथ अब छूट गया है और अब नई पारी की शुरुआत हो रही है।
सूर्य प्रकाश पिछले करीब पांच वर्षों से हिंदुस्तान डिजिटल से जुड़े हुए थे। वह वहां एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत थे और लाइव हिंदुस्तान के न्यूज ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, वायरल और मौसम से जुड़ी खबरों के कंटेंट ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सूर्य प्रकाश को डिजिटल मीडिया क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में हिंदुस्तान डिजिटल, इंडियन एक्सप्रेस समूह, नवभारत टाइम्स डॉट कॉम, टाइम्स इंटरनेट, अमर उजाला और दिव्य हिमाचल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं।
मास कम्युनिकेशन और पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले सूर्य प्रकाश की कंटेंट स्ट्रेटेजी, सोशल मीडिया स्ट्रेटेजी, एनालिटिक्स और एसईओ जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता है।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो सूर्य प्रकाश ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में ग्रेजुएशन और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
उन्होंने जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड वारफेयर जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक पर हाल ही में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है। समाचार4मीडिया की ओर से सूर्य प्रकाश को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
'ओपनएआई' (OpenAI) ने अपनी नई Ad Tools Terms जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि AI से तैयार विज्ञापनों की अंतिम जिम्मेदारी विज्ञापनदाताओं और मार्केटर्स की होगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन तेजी से विज्ञापन उद्योग का हिस्सा बन रहे हैं, लेकिन 'ओपनएआई' (OpenAI) ने अपनी नई Ad Tools Terms में साफ कर दिया है कि AI द्वारा तैयार किए गए विज्ञापनों की जिम्मेदारी पूरी तरह विज्ञापनदाताओं और मार्केटर्स की होगी।
कंपनी ने विज्ञापन निर्माण, ऑडियंस टार्गेटिंग, कस्टम ऑडियंस, कन्वर्जन मापन और AI आधारित क्रिएटिव टूल्स जैसी कई नई सुविधाएं पेश की हैं, लेकिन किसी भी जोखिम या गलती की जवाबदेही उपयोगकर्ताओं पर ही रहेगी।
नई नीति के अनुसार विज्ञापनदाताओं को AI द्वारा तैयार कंटेंट की सटीकता, उपयुक्तता और कानूनी अनुपालन की जांच स्वयं करनी होगी। 'ओपनएआई' (OpenAI) ने चेतावनी दी है कि AI जनरेटेड कंटेंट कभी-कभी गलत, भ्रामक, अपूर्ण या किसी विशेष उद्देश्य के लिए अनुपयुक्त हो सकता है। इसलिए किसी भी विज्ञापन को प्रकाशित करने से पहले मानवीय समीक्षा को अनिवार्य माना गया है।
कंपनी ने ऑडियंस डेटा के उपयोग को लेकर भी कड़े नियम लागू किए हैं। विज्ञापनदाता केवल उसी ग्राहक डेटा का उपयोग कर सकेंगे, जिसके लिए उनके पास स्पष्ट अनुमति और कानूनी आधार हो। डेटा ब्रोकर्स से प्राप्त ऑडियंस डेटा के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा जाति, धर्म, राजनीतिक विचार, स्वास्थ्य स्थिति, यौन अभिरुचि, बायोमेट्रिक जानकारी और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के आधार पर टार्गेटिंग की अनुमति नहीं होगी।
'ओपनएआई' (OpenAI) ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके टूल्स का इस्तेमाल फर्जी समर्थन (Endorsement), भ्रामक सामग्री, अनधिकृत पहचान या सिंथेटिक मीडिया तैयार करने के लिए नहीं किया जा सकता। कंपनी ने विज्ञापन प्रदर्शन, पहुंच, कन्वर्जन या व्यावसायिक परिणामों की कोई गारंटी भी नहीं दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति दर्शाती है कि AI भले ही विज्ञापन निर्माण को आसान बना रहा हो, लेकिन पारदर्शिता, सटीकता और कानूनी जिम्मेदारी की अंतिम जवाबदेही अब भी इंसानों और ब्रांड्स पर ही रहेगी।
भारत में 'टेलीग्राम' पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बाद सीईओ पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) ने 'रिलायंस इंडस्ट्रीज' (Reliance Industries) पर इंटरनेट कनेक्टिविटी में दखल देने का आरोप लगाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
RE-NEET परीक्षा से पहले भारत सरकार द्वारा 'टेलीग्राम' (Telegram) पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 'टेलीग्राम' (Telegram) के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल ड्यूरोव (Pavel Durov) ने दावा किया है कि पेपर लीक की समस्या का समाधान किसी ऐप को बैन करना नहीं है, क्योंकि लीक सामग्री किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की जा सकती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर किए गए एक पोस्ट में ड्यूरोव ने 'रिलायंस इंडस्ट्रीज' (Reliance Industries) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी BGP हाइजैकिंग (BGP Hijacking) नामक तकनीक का इस्तेमाल कर 'टेलीग्राम' (Telegram) की इंटरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रही है। उनके अनुसार यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ अन्य देशों में भी उपयोगकर्ताओं को ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
ड्यूरोव ने यह भी आरोप लगाया कि 'रिलायंस' (Reliance) के कारोबारी संबंध 'मेटा' (Meta) के साथ हैं, जो 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp), 'फेसबुक' (Facebook) और 'इंस्टाग्राम' (Instagram) जैसे प्लेटफॉर्म संचालित करती है। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
गौरतलब है कि 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (National Testing Agency-NTA) के अनुसार RE-NEET 2026 परीक्षा से पहले कुछ 'टेलीग्राम' (Telegram) समूहों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद सरकार ने 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' (Information Technology Act) के तहत कार्रवाई करते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया।
'सॉफ्टबैंक' और 'ओपनएआई' ने जापान में AI आधारित साइबर सुरक्षा सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उन्नत साइबर हमलों से सुरक्षित रखना है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
साइबर अपराधों और डिजिटल हमलों के बढ़ते खतरे के बीच जापान की प्रमुख टेक कंपनी 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) ने 'ओपनएआई' (OpenAI) के साथ मिलकर नई AI आधारित साइबर सुरक्षा सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित हो रहे साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है।
टोक्यो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मासायोशी सोन (Masayoshi Son) ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब जापान के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार, आज के साइबर हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल, तेज और खतरनाक हो गए हैं, जिससे कंपनियों और सरकारी संस्थानों को बड़े जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
नई सेवा को जापान की लगभग 3,000 बड़ी कंपनियों और संस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें हवाई अड्डे, बिजली आपूर्ति नेटवर्क, परिवहन प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं।
सेवा के तहत सबसे पहले किसी संगठन की डिजिटल सुरक्षा का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद AI की मदद से सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुरक्षा सुझाव और पैच उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह परियोजना 'सॉफ्टबैंक' (SoftBank) और 'ओपनएआई' (OpenAI) के संयुक्त उपक्रम 'एसबी ओएआई जापान' (SB OAI Japan) के तहत संचालित की जाएगी। इस संयुक्त उपक्रम की स्थापना जापानी बाजार के लिए विशेष AI सेवाएं विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।
कार्यक्रम में 'ओपनएआई' (OpenAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) वीडियो संदेश के माध्यम से जुड़े, जबकि कंपनी के मुख्य शोध अधिकारी मार्क चेन (Mark Chen) ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया।
फुटबॉल विश्व कप के इतिहास में अगर किसी एक गाने को सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय वर्ल्ड कप एंथम कहा जाए, तो वह निस्संदेह शकीरा का "वाका वाका" है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्येंद्र खान, कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।
फुटबॉल विश्व कप के इतिहास में अगर किसी एक गाने को सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय वर्ल्ड कप एंथम कहा जाए, तो वह निस्संदेह शकीरा का "वाका वाका (This Time for Africa)" है। यह गाना आज भी बाकी सभी विश्व कप गीतों से काफी आगे माना जाता है। "वाका वाका" के नाम Spotify पर सबसे ज्यादा स्ट्रीम किए गए FIFA World Cup Song का Guinness World Record दर्ज है। वहीं, YouTube पर इसे 4 अरब से अधिक बार देखा जा चुका है।
साल 2019 तक यह गाना दुनिया भर में 1.5 करोड़ से ज्यादा डिजिटल डाउनलोड हासिल कर चुका था, जिससे यह इतिहास के सबसे ज्यादा बिकने वाले डिजिटल सिंगल्स में शामिल हो गया। यह गीत ऐसे समय आया जब YouTube एक वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में तेजी से उभर रहा था और इसी लहर पर सवार होकर "वाका वाका" ने सांस्कृतिक इतिहास में अपनी स्थायी जगह बना ली।
हालांकि इसकी सफलता का सफर विवादों से पूरी तरह अछूता नहीं रहा। जब FIFA ने अफ्रीकी महाद्वीप में पहली बार आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए कोलंबियाई पॉप स्टार शकीरा को आधिकारिक गीत रिकॉर्ड करने के लिए चुना, तो कई लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि उद्घाटन समारोह में अफ्रीकी कलाकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके बाद FIFA और शकीरा की टीम ने दक्षिण अफ्रीका के Afro-fusion बैंड Freshlyground को भी इस गीत का हिस्सा बनाया।
इसके अलावा इस गीत पर साहित्यिक चोरी यानी प्लेजरिज्म के आरोप भी लगे। दावा किया गया कि इसका कोरस कैमरून के समूह Golden Sounds के 1980 के दशक के लोकप्रिय गीत "Zangaléwa" से लिया गया है। बाद में Sony Music और शकीरा की मैनेजमेंट टीम ने अदालत के बाहर समझौता किया और Zangaléwa के रचनाकारों को सह-लेखक का श्रेय दिया गया।
इन विवादों के बावजूद "वाका वाका" की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा। 16 साल बाद भी जब कोई विश्व कप का नाम लेता है, तो सबसे पहले लोगों के दिमाग में यही धुन गूंजती है।
‘La Copa de la Vida’ जिसने बदल दिया वर्ल्ड कप म्यूजिक का इतिहास
1998 के फ्रांस विश्व कप के लिए रिकी मार्टिन का गीत "La Copa de la Vida (The Cup of Life)" आधुनिक वर्ल्ड कप एंथम का शुरुआती बिंदु माना जाता है।
इस गीत ने लैटिन पॉप और अंग्रेजी पॉप संगीत को एक साथ जोड़ दिया। यह सिर्फ विश्व कप का आधिकारिक गीत नहीं था, बल्कि इसी ने रिकी मार्टिन को क्षेत्रीय स्पेनिश भाषा के स्टार से वैश्विक सुपरस्टार बना दिया। 1990 और 2000 के दशक में लैटिन पॉप संगीत की जो वैश्विक लहर देखने को मिली, उसकी शुरुआत काफी हद तक इसी गीत से मानी जाती है।
गीत में इस्तेमाल हुआ "Ole, Ole, Ole" का नारा बाद में दुनिया का सबसे लोकप्रिय फुटबॉल नारा बन गया। आज भी FIFA के लिए बनने वाले लगभग सभी गीत किसी न किसी रूप में इसी फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश करते हैं।
‘Un'estate italiana’ से शुरू हुआ वर्ल्ड कप एंथम का दौर
1990 के इटली विश्व कप का गीत "Un'estate italiana (Notti Magiche)" वह मोड़ था जहां से आधुनिक वर्ल्ड कप एंथम की अवधारणा शुरू हुई।
यह गीत पूरे यूरोप में लोकप्रिय हुआ और एक सांस्कृतिक पहचान बन गया। इसी गीत ने वह फॉर्मूला तैयार किया जिसे बाद में लगभग हर वर्ल्ड कप गीत ने अपनाया- द्विभाषी कोरस, स्टेडियम में गूंजने वाली धुन और समापन समारोह में प्रस्तुति।
इटालिया 90 वास्तव में पहला FIFA World Cup था जिसने आधिकारिक गीत को औपचारिक रूप से अपनाया। 36 साल बाद भी "Notti Magiche" की शुरुआती धुन सुनकर फुटबॉल प्रेमियों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
‘We Are One’ ने दिखाई ब्राजील की रंगीन झलक
2014 विश्व कप के लिए पिटबुल, जेनिफर लोपेज और ब्राजीलियाई स्टार क्लाउडिया लिट्टे ने मिलकर "We Are One (Ole Ola)" पेश किया। अंग्रेजी, स्पेनिश और पुर्तगाली भाषाओं के मेल से बना यह गीत काफी भव्य और ऊर्जावान था। YouTube पर इसे एक अरब से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
हालांकि "वाका वाका" के मुकाबले इसे उतनी भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान नहीं मिल सकी। कई लोगों के लिए यह वह दौर था जब वर्ल्ड कप गीत एक संगीत आयोजन की बजाय ब्रांड प्रमोशन जैसा महसूस होने लगा।
‘Dai Dai’ के साथ शकीरा की ऐतिहासिक वापसी
2026 विश्व कप के लिए शकीरा एक बार फिर आधिकारिक गीत "Dai Dai" के साथ लौटी हैं। हालांकि अभी इसकी लोकप्रियता का अंतिम मूल्यांकन करना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसकी टीम और पैमाना इसे शीर्ष वर्ल्ड कप गीतों में शामिल करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
इस गीत में Afrobeats, Dance-Pop और Reggaeton का मिश्रण है। शकीरा ने इसे वैश्विक एकता के संदेश के साथ तैयार किया है। गीत के सह-लेखकों में Ed Sheeran भी शामिल हैं और इसके कोरस में कई भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है।
"Dai Dai" का अर्थ इतालवी भाषा में "Come On, Come On" यानी "आगे बढ़ो, अपना सर्वश्रेष्ठ दो" होता है। इस गीत के साथ शकीरा विश्व कप संगीत के चार अलग-अलग दौरों का हिस्सा बनने वाली पहली कलाकार बन गई हैं।
‘Gloryland’ को नहीं मिला उसका हक
1994 विश्व कप अमेरिका में आयोजित हुआ और इसी के साथ आया "Gloryland"। रॉक, आरएंडबी और सोल संगीतकार Daryl Hall तथा संगीत समूह Sounds of Blackness द्वारा प्रस्तुत इस गीत में Gospel संगीत का प्रभाव साफ दिखाई देता था।
सैक्सोफोन की मधुर धुनों से सजा यह गीत गर्मजोशी, ईमानदारी और अमेरिकी सांस्कृतिक पहचान से भरपूर था। बावजूद इसके, वर्ल्ड कप एंथम की चर्चाओं में इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
‘Dreamers’ बना कतर विश्व कप का सरप्राइज हिट
2022 विश्व कप के दौरान BTS के सदस्य Jung Kook और कतरी गायक Fahad Al Kubaisi का गीत "Dreamers" सबसे चर्चित गीतों में से एक बन गया।
Jung Kook के वैश्विक फैनबेस ने इस गीत को सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। इतना ही नहीं, गीत में भावनात्मक गहराई भी थी, जिसकी वजह से समय के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ी। कई लोगों का मानना है कि यह उस विश्व कप के मुख्य आधिकारिक गीत से भी ज्यादा सफल साबित हुआ।
‘The Time of Our Lives’ का अनोखा प्रयोग
2006 विश्व कप के लिए Il Divo और Toni Braxton ने मिलकर "The Time of Our Lives" रिकॉर्ड किया। कागज पर यह साझेदारी बेहद असामान्य लगती थी, लेकिन परिणाम काफी हद तक सफल रहा। गीत में ओपेरा और पॉप संगीत का मिश्रण था, जो उस समय की संगीत शैली को दर्शाता था।
‘Live It Up’ उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका
2018 विश्व कप के लिए Will Smith, Nicky Jam और Era Istrefi का गीत "Live It Up" काफी चर्चा में रहा। कई लोगों को लगा था कि Will Smith जैसे स्टार की मौजूदगी इस गीत को ऐतिहासिक बना देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गीत लोकप्रिय तो हुआ, लेकिन टूर्नामेंट खत्म होने के कुछ महीनों बाद ही लोगों की यादों से धुंधला पड़ गया।
इसके विपरीत, उसी विश्व कप के दौरान Coca-Cola के अभियान से जुड़ा K'naan का "Wavin' Flag" लोगों के दिलों में कहीं ज्यादा गहराई से बस गया।
‘Hayya Hayya’ छाया में रह गया
2022 विश्व कप में FIFA ने पहली बार एक मल्टी-सॉन्ग एल्बम फॉर्मेट अपनाया और "Hayya Hayya (Better Together)" उसका प्रमुख गीत था। हालांकि यह गीत अपने पूर्ववर्ती विश्व कप गीतों की छाया से बाहर नहीं निकल सका और समय के साथ लोगों की यादों में Jung Kook का "Dreamers" उससे ज्यादा मजबूत स्थान बनाने में सफल रहा।
शुरुआती दौर के गीतों ने रखी नींव
पॉप संगीत के दौर से पहले विश्व कप के गीत आज की तरह बड़े एंथम नहीं होते थे। वे अधिकतर ऑर्केस्ट्रा धुनों, मार्चिंग म्यूजिक और यादगार रिकॉर्डिंग्स के रूप में तैयार किए जाते थे। 1962 में चिली विश्व कप के लिए Los Ramblers का "El Rock del Mundial" पहला व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त आधिकारिक गीत माना जाता है।
1966 में इंग्लैंड के "World Cup Willie" ने पहली बार पॉप संगीत जैसी पहचान बनाई। वहीं 1978 विश्व कप की थीम प्रसिद्ध संगीतकार Ennio Morricone ने तैयार की थी।
ये गीत Spotify प्लेलिस्ट के लिए नहीं, बल्कि स्टेडियम और इतिहास के लिए बनाए गए थे। इन्हें असफलता नहीं बल्कि उस नींव के रूप में देखा जाना चाहिए, जिस पर आज का पूरा वर्ल्ड कप म्यूजिक उद्योग खड़ा है।
फुटबॉल के साथ-साथ संगीत का भी महाकुंभ
1962 की ऑर्केस्ट्रा धुनों से लेकर 2026 के Afrobeats फ्यूजन तक, विश्व कप गीत पिछले 64 वर्षों से यह दिखाते रहे हैं कि कौन-सा संगीत शैली दुनिया को सबसे ज्यादा जोड़ सकती है, जो सफर स्थानीय रिकॉर्डिंग्स से शुरू हुआ था, वह आज एक विशाल मनोरंजन उद्योग का रूप ले चुका है। अब विश्व कप संगीत में एल्बम, हाफटाइम शो, ब्रांड पार्टनरशिप और बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़े समझौते भी शामिल हो चुके हैं।
आज स्थिति यह है कि विश्व कप के संगीत की रणनीति और फुटबॉल की रणनीति दोनों लगभग समान महत्व रखती हैं।
और अगर "वाका वाका" ने दुनिया को कुछ सिखाया है, तो वह यह है कि सही समय पर आया एक सही गीत सिर्फ टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और एक पूरे दौर से भी ज्यादा समय तक याद रखा जा सकता है।