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IT नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से HC के जस्टिस ने खुद को किया अलग

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सोमवार को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 की आवश्यकता को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सोमवार को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की आवश्यकता को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं क्विंट डिजिटल मीडिया लिमिटेड और इसकी निदेशक रितु कपूर, ‘द वायर’ प्रकाशित करने वाले फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म, फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज’ चलाने वाले प्रवदा मीडिया फाउंडेशन और अन्य द्वारा दायर की गई हैं।

याचिकाओं को जस्टिस भंभानी और जस्टिस जसमीत सिंह की अवकाश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मामले के लंबित रहने के दौरान अंतरिम सुरक्षा की मांग करने के लिए अदालती अवकाश के दौरान मामलों को सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया था, लेकिन मामला सामने आते ही जस्टिस भंभानी ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि वह सुनवाई से हट रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मामलों को अगले सोमवार को सूचीबद्ध किया जाएगा।

न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि या तो वह मामले की सुनवाई कर सकते हैं या नहीं, कोई बीच का रास्ता नहीं है। अब यह मामला रोस्टर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध है।

‘द क्विंट’ और ‘द वायर’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं के लिए नियमों के भाग 3 (जो डिजिटल मीडिया से संबंधित है) के तहत कठोर कदमों से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी, पीठ ने कहा कि वह इसे अभी नहीं देगी। हालांकि पीठ ने कहा था कि यदि कोई कठोर कदम उठाया जाता है, तो याचिकाकर्ता तत्काल सुनवाई की मांग करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

इससे पहले चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मई में गैर-जरूरी के आधार पर याचिकाओं की सुनवाई 4 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी थी। याचिकाओं के बैच में व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने तर्क दिया था कि मामला अत्यावश्यक है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित है।

गौरतलब है कि क्विंट द्वारा दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि डिजिटल न्यूज पोर्टल्स पर सामग्री को वस्तुतः निर्देशित करने की कार्यकारी शक्ति संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 (1) (ए) का पूरी तरह से उल्लंघन करेगी।

अन्य याचिकाओं में भी इसी तरह के तर्क दिए गए हैं। याचिका में कहा गया, ‘आईटी नियम, 2021 एक विशिष्ट और लक्षित वर्ग के रूप में समाचार और करेंट अफेयर्स की सामग्री के साथ डिजिटल पोर्टल पेश को करते हैं, जो एक ढीले-ढाले आचार संहिता के तहत विनियमित होते हैं और केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से देखे जाते हैं।’

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि नियम राज्य को डिलीट करने, संशोधन या अवरुद्ध करने, निंदा, माफी के लिए मजबूर करने और अधिक के माध्यम से समाचार दर्ज करने और नियंत्रित करने के लिए अधिकार देते हैं। इसमें तर्क दिया गया, ऑनलाइन न्यूज पोर्टल्स को सोशल मीडिया से जोड़ना और प्रिंट न्यूज मीडिया से अलग करना अनुचित और तर्कहीन वर्गीकरण है।


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