क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के Employee Stock Option Plan 2020 (ESOP 2020) में जरूरी बदलावों को मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के Employee Stock Option Plan 2020 (ESOP 2020) में जरूरी बदलावों को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को हुई कंपनी की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में दी गई। AGM शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:04 बजे समाप्त हुई। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित की गई।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि शेयरधारकों ने Employee Stock Option Plan 2020 में संशोधन के प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव पर स्क्रूटिनाइजर Devesh Kumar Vasisht, Managing Partner, DPV & Associates LLP की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के आधार पर मंजूरी की पुष्टि हुई है।
क्या हुआ है बदलाव?
कंपनी ने ESOP 2020 के एडमिनस्ट्रेशन से जुड़े प्रावधानों में एक नया क्लॉज (n) जोड़ा है। इस बदलाव के बाद कंपनी की Compensation Committee को एम्प्लॉयीज को दिए गए स्टॉक ऑप्शंस की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार मिलेगा।
सबसे अहम बात यह है कि जरूरत पड़ने पर Compensation Committee Stock Options की Repricing कर सकेगी। यानी कंपनी के शेयर की बाजार कीमत में बड़ी गिरावट आने या बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एम्प्लॉयीज को दिए गए Stock Options के Exercise Price को कम या संशोधित किया जा सकेगा।
इसके अलावा समिति के पास Stock Options की Vesting और Exercise Conditions में बदलाव, पुराने ऑप्शंस को रद्द करके दोबारा नए ऑप्शंस जारी करने (Cancellation and Re-grant) और Options की दूसरी शर्तों में बदलाव करने का अधिकार भी होगा।
किन परिस्थितियों में हो सकता है बदलाव?
कंपनी के मुताबिक, इन अधिकारों का इस्तेमाल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, कंपनी के शेयर के बाजार भाव में बड़ी गिरावट या अन्य कारोबारी परिस्थितियों को देखते हुए किया जा सकता है।
हालांकि, यह बदलाव मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकेगा। कंपनी ने साफ किया है कि किसी भी तरह की Repricing या शर्तों में बदलाव SEBI (Share Based Employee Benefits and Sweat Equity) Regulations, 2021 और लागू कानूनों के मुताबिक ही किया जाएगा।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह का बदलाव Stock Option पाने वाले एम्प्लॉयीज के हितों के खिलाफ न हो।
बोर्ड ने पहले ही दी थी मंजूरी
Quint Digital के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस संशोधन को अपनी 22 मई 2026 को हुई बैठक में मंजूरी दी थी। इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए इसे कंपनी के शेयरधारकों के सामने रखा गया। अब 18 अगस्त को हुई AGM में शेयरधारकों ने भी इसे जरूरी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
इस बदलाव से कंपनी के पास भविष्य में बाजार की स्थिति और शेयर की कीमत में बड़े उतार-चढ़ाव के हिसाब से अपने ESOP को अधिक लचीले तरीके से मैनेज करने का विकल्प रहेगा।
कंपनी के Company Secretary और Compliance Officer Tarun Belwal ने यह जानकारी BSE को दी है। यह सूचना कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरहोल्डर्स ने आभा कपूर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर लगातार दूसरी बार नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी है।
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Samachar4media Bureau
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरहोल्डर्स ने आभा कपूर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर लगातार दूसरी बार नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी है। उनका नया कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 30 दिसंबर 2031 तक रहेगा। यानी आभा कपूर अगले पांच साल तक कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक की भूमिका निभाती रहेंगी।
कंपनी ने यह जानकारी 18 अगस्त 2026 को BSE को दी गई सूचना में साझा की। Quint Digital की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) मंगलवार, 18 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित हुई। AGM शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:04 बजे समाप्त हुई।
आभा कपूर की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव कंपनी की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) और निदेशक मंडल (Board of Directors) की सिफारिश के बाद शेयरहोल्डर्स के सामने रखा गया था। Scrutinizer की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई।
मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में लंबा अनुभव
आभा कपूर को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में टैलेंट और बिजनेस लीडरशिप से जुड़े काम का लंबा अनुभव है। वह Quint Digital Limited के अलावा Quintype Technologies India Limited समेत कई कंपनियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर काम कर रही हैं।
कंपनी के मुताबिक, आभा कपूर बोर्ड स्तर पर बिजनेस को मजबूत करने के साथ-साथ बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस पर भी सक्रिय रूप से काम करती हैं। वह बोर्डरूम में जिम्मेदार तरीके से बिजनेस बढ़ाने और बेहतर गवर्नेंस पर जोर देती हैं।
इससे पहले आभा कपूर ने K&J Search की फाउंडिंग पार्टनर के तौर पर काम किया। यह मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में एग्जिक्यूटिव सर्च से जुड़ी विशेषज्ञ फर्म रही है। इससे पहले उन्होंने एक इंटरनेशनल बैंक के साथ भी काम किया था।
K&J Search ने मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के तेजी से बढ़ते दौर में कई बड़ी कंपनियों के लिए टैलेंट खोजने और उन्हें जोड़ने का काम किया। कंपनी ने सैटेलाइट चैनल, म्यूजिक लेबल, प्रोडक्शन हाउस, फिल्म स्टूडियो, रेडियो, डिजिटल और मोबाइल कंपनियों, टेलीकॉम कंपनियों और मल्टीनेशनल विज्ञापन एजेंसियों के लिए टैलेंट उपलब्ध कराया।
इसके अलावा फर्म ने FMCG और टेलीकॉम सेक्टर में कई CXO स्तर की नियुक्तियों के लिए भी काम किया।
नए स्टार्टअप्स को टीम बनाने में भी मदद
आभा कपूर ने भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के शुरुआती विकास के दौर से ही इसमें अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के अनुसार, अलग-अलग सेक्टर के बिजनेस और बिजनेस मॉडल को जल्दी समझने और सही टैलेंट पहचानने की उनकी क्षमता ने कई नए स्टार्टअप्स को अपनी टीम बनाने और ब्रांड स्थापित करने में मदद की।
उनके अनुभव का फायदा खास तौर पर उन कंपनियों को मिला, जिन्हें तेजी से बढ़ते कारोबार के लिए मजबूत नेतृत्व और प्रोफेशनल टीम तैयार करनी थी।
Sydenham College और NMIMS से पढ़ाई
आभा कपूर ने Sydenham College से पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने NMIMS यानी Narsee Monjee Institute of Management Studies से Master in Management की डिग्री हासिल की।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आभा कपूर का Quint Digital के किसी भी अन्य निदेशक से कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। साथ ही, कंपनी के मुताबिक, आभा कपूर को SEBI या किसी अन्य अथॉरिटी के आदेश के तहत निदेशक का पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
इस तरह शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद आभा कपूर का Quint Digital के बोर्ड में दूसरा पांच साल का कार्यकाल तय हो गया है, जो 31 दिसंबर 2026 से 30 दिसंबर 2031 तक चलेगा।
नितीश कुमार (Nitish Kumar) को गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) में डायरेक्टर–डिजिटल मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह शारदा यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।
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नितीश कुमार (Nitish Kumar) को गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) में डायरेक्टर–डिजिटल मार्केटिंग (Director – Digital Marketing) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
नई भूमिका को लेकर नितीश कुमार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़कर उत्साहित और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई चुनौतियों, नए नजरिए और डिजिटल क्षेत्र में प्रभावी काम करने का अवसर बताया।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में शामिल होने से पहले नितीश कुमार शारदा यूनिवर्सिटी (Sharda University) में एचओडी–डिजिटल मार्केटिंग (HOD – Digital Marketing) के पद पर कार्यरत थे।
इससे पहले भी वह एमिटी यूनिवर्सिटी (Amity University) के साथ काम कर चुके हैं। डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी में उनकी नई भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डायरेक्टर–डिजिटल मार्केटिंग के तौर पर नितीश कुमार यूनिवर्सिटी की डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी रणनीतियों और पहलों को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे। उन्होंने अपनी पोस्ट में नई भूमिका के तहत इनोवेशन और लंबे समय तक असर पैदा करने वाले डिजिटल काम पर ध्यान देने की बात कही है।
रफीक पठान (Rafique Pathan) ने पुढ़ारी पब्लिकेशंस (Pudhari Publications) में हेड-डिजिटल बिजनेस की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह साकाल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे।
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रफीक पठान (Rafique Pathan) ने पुढ़ारी पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड (Pudhari Publications Private Limited) में हेड-डिजिटल बिजनेस (Head - Digital Business) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने नए पद की जानकारी साझा की।
पठान पुढ़ारी पब्लिकेशंस से जुड़ने से पहले साकाल मीडिया ग्रुप (Sakal Media Group) के साथ नौ साल से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं। यहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी डिजिटल ऑपरेशंस लीड (Digital Operations Lead) की थी।
उन्होंने 2017 में साकाल मीडिया ग्रुप के साथ प्रोडक्ट मैनेजर (Product Manager) के तौर पर करियर शुरू किया था। इसके बाद अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी में कई वरिष्ठ पदों की जिम्मेदारी संभाली।
डिजिटल मीडिया और ऑपरेशंस के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पुढ़ारी पब्लिकेशंस में उनकी नई भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हेड-डिजिटल बिजनेस के तौर पर वह कंपनी के डिजिटल कारोबार से जुड़े कामकाज को संभालेंगे और उसे आगे बढ़ाने पर काम करेंगे।
Yaap Digital Limited के बोर्ड में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी ने विजयकुमार मालपानी को अतिरिक्त गैर-कार्यकारी निदेशक (Additional Non-Executive निदेशक) नियुक्त किया है।
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Vikas Saxena
Yaap Digital Limited के बोर्ड में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी ने विजयकुमार मालपानी को अतिरिक्त गैर-कार्यकारी निदेशक (Additional Non-Executive निदेशक) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 14 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी ने यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को दी है।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सर्कुलर रेजोल्यूशन के जरिए उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह नियुक्ति 14 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है।
कंपनी ने 14 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि विजयकुमार मालपानी फिलहाल अतिरिक्त गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर बोर्ड का हिस्सा होंगे। उनकी नियुक्ति को आगे जारी रखने के लिए कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
अगली AGM में शेयरधारकों से मांगी जाएगी मंजूरी
कंपनी के मुताबिक, मालपानी अगली वार्षिक आम बैठक (AGM) तक अतिरिक्त गैर-कार्यकारी निदेशक के पद पर रहेंगे। अगर तय समय के भीतर AGM आयोजित नहीं होती है, तो जिस तारीख तक AGM हो जानी चाहिए थी, उस तारीख पर उनका यह कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनका कंपनी से जुड़ना केवल AGM तक ही सीमित है। अगली AGM में शेयरधारकों के सामने उनकी नियमित निदेशक के तौर पर नियुक्ति का प्रस्ताव रखा जा सकता है। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद वह बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर आगे भी बने रह सकते हैं।
कौन हैं विजयकुमार मालपानी?
विजयकुमार मालपानी चार्टेड अकाउटेंट और Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) के फेलो मेंबर भी हैं। उन्हें अकाउंटिंग, फाइनेंस, टैक्सेशन और कमर्शियल के क्षेत्र में 20 साल से ज्यादा का प्रोफेशनल अनुभव है।
वर्तमान में वह Dorf Ketal Chemicals India Limited में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद पर हैं। वह 1 अगस्त 2004 से इस कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं।
अपने दो दशक से ज्यादा लंबे करियर के दौरान मालपानी ने फाइनेंस, अकाउंटिंग, टैक्सेशन और कमर्शियल मामलों में काम किया है। कंपनी के मुताबिक, उनका यह अनुभव Yaap Digital के बोर्ड में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
Yaap Digital ने अपने खुलासे में यह भी साफ किया है कि विजयकुमार मालपानी का कंपनी के किसी भी मौजूदा डायरेक्टर के साथ कोई संबंध नहीं है।
विजयकुमार मालपानी की नियुक्ति 14 अगस्त 2026 से प्रभावी है। उन्हें फिलहाल अतिरिक्त गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर बोर्ड में शामिल किया गया है।
आने वाली AGM में शेयरधारकों के सामने उनकी नियुक्ति को नियमित निदेशक के तौर पर मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इसके बाद शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर वह कंपनी के बोर्ड में नियमित रूप से निदेशक के तौर पर काम कर सकेंगे।
बता दें कि Yaap Digital Limited कंपनी पहले Yaap Digital Private Limited के नाम से जानी जाती थी।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) की राइट्स इश्यू समिति की बैठक 19 अगस्त 2026 को होने वाली है।
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Vikas Saxena
केंद्र सरकार ने सही और भरोसेमंद जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए PIB फैक्ट चेक, प्रसार भारती के सार्वजनिक प्रसारण और डिजिटल मीडिया से जुड़े नियमों को अहम माध्यम बताया है।
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Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने सही और भरोसेमंद जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए PIB फैक्ट चेक, प्रसार भारती के सार्वजनिक प्रसारण और डिजिटल मीडिया से जुड़े नियमों को अहम माध्यम बताया है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म और क्षेत्रीय भाषाओं के जरिए लोगों तक समय पर और सटीक जानकारी पहुंचाई जा रही है।
यह जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बुधवार को लोकसभा में डॉ. आलोक कुमार सुमन के सवाल के लिखित जवाब में दी।
फेक न्यूज से निपटने के लिए PIB में फैक्ट चेक यूनिट
सरकार ने सरकारी योजनाओं और नीतियों से जुड़ी फेक न्यूज को रोकने के लिए प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) में फैक्ट चेक यूनिट (FCU) बनाई है। यह यूनिट केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और अन्य केंद्रीय सरकारी संगठनों से जुड़े दावों की जांच करती है।
PIB की फैक्ट चेक यूनिट एक तय प्रक्रिया के तहत दावों का सत्यापन करती है और इसके बाद सही जानकारी को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाती है।
दूरदर्शन और आकाशवाणी भी फैक्ट चेक जानकारी पहुंचा रहे
सरकार के मुताबिक, दूरदर्शन और आकाशवाणी भी अपने समाचार बुलेटिन, कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सत्यापित जानकारी लोगों तक पहुंचाते हैं।
डीडी न्यूज में खबरों को प्रसारित करने से पहले कई स्तरों पर संपादकीय जांच की जाती है। इसमें तथ्यों की जांच, एक से ज्यादा भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी का मिलान और संपादकीय समीक्षा शामिल है।
PIB फैक्ट चेक की सत्यापित सामग्री को नियमित रूप से दूरदर्शन और आकाशवाणी के न्यूज और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी शामिल किया जाता है, ताकि गलत सूचना और झूठे नैरेटिव का मुकाबला किया जा सके।
डिजिटल मीडिया और OTT के लिए भी नियम
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 अधिसूचित किए हैं।
इन नियमों के तहत सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन मध्यस्थों के लिए कुछ जरूरी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। साथ ही डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और OTT प्लेटफॉर्म के लिए आचार संहिता भी बनाई गई है।
नियमों में शिकायतों के समाधान के लिए तीन स्तर की व्यवस्था रखी गई है। इसमें पहले प्रकाशकों का स्व-नियमन, उसके बाद स्व-नियामक संस्थाएं और फिर केंद्र सरकार की निगरानी व्यवस्था शामिल है।
फिल्म और मीडिया सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं
सरकार ने बताया कि फिल्म और मीडिया सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। इनमें Development, Communication and Dissemination of Filmic Content (DCDFC) Scheme, India Cine Hub (ICH) और National Film Heritage Mission (NFHM) शामिल हैं।
DCDFC योजना के तहत फिल्म समारोहों, भारतीय सिनेमा के प्रचार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी, फिल्मों के संरक्षण और इससे जुड़ी दूसरी गतिविधियों के लिए वित्तीय मदद दी जाती है।
वहीं, India Cine Hub के जरिए फिल्मों की शूटिंग के लिए सिंगल-विंडो व्यवस्था के तहत अनुमति दिलाने की सुविधा दी जाती है। इसका उद्देश्य भारत को एक प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ावा देना भी है।
National Film Heritage Mission के तहत भारत की सिनेमाई विरासत को संरक्षित करने, पुरानी फिल्मों को बहाल करने, उनका डिजिटलीकरण और आर्काइविंग करने का काम किया जा रहा है।
ग्लोबल मीडिया सहयोग पर भी सरकार का जोर
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मीडिया सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी अपने प्रयासों की जानकारी दी। इसके तहत भारत वैश्विक स्तर पर मीडिया और प्रसारण क्षेत्र में अपनी भागीदारी मजबूत कर रहा है।
सरकार ने बताया कि मई 2025 में मुंबई में पहला World Audio Visual & Entertainment Summit (WAVES 2025) आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य ‘Create in India, Create for the World’ की सोच के साथ भारत को कंटेंट निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना था।
इस समिट में भारतीय क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स और स्टार्टअप्स को दुनिया के अलग-अलग देशों के खरीदारों, निवेशकों, OTT प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रमुख लोगों के साथ जुड़ने का मौका मिला। इसमें 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।
48 देशों के ब्रॉडकास्टर्स के साथ समझौते
प्रसारण क्षेत्र में भी प्रसार भारती दुनिया के अलग-अलग देशों के प्रसारण संगठनों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स के साथ कंटेंट शेयरिंग और दूसरे संगठनों के साथ प्रसारण समझौते किए गए हैं।
सरकार के मुताबिक, प्रसार भारती के अलग-अलग देशों के ब्रॉडकास्टर्स के साथ 48 सक्रिय समझौता ज्ञापन (MoU) हैं। इन समझौतों के जरिए प्रसारण क्षेत्र में कंटेंट, पेशेवर विशेषज्ञता और बेहतर कामकाजी तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि PIB फैक्ट चेक, दूरदर्शन, आकाशवाणी, डिजिटल मीडिया नियमों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया सहयोग के जरिए लोगों तक भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने और गलत सूचना का मुकाबला करने की कोशिश की जा रही है।
सारेगामा इंडिया (Saregama India) ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Pocket Aces की लीडरशिप टीम में बड़ा बदलाव किया है।
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Samachar4media Bureau
सारेगामा इंडिया (Saregama India) ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी Pocket Aces की लीडरशिप टीम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने 12 अगस्त को घोषणा की कि Pocket Aces की को-फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO अदिति श्रीवास्तव 1 अक्टूबर 2026 से अपनी एग्जिक्यूटिव भूमिका से हटकर कंपनी के बोर्ड में स्ट्रैटेजिक जिम्मेदारी संभालेंगी। उनके स्थान पर मौजूदा चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) विनय पिल्लई को कंपनी का नया CEO बनाया जाएगा।
बता दें कि यह बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।
2021 से CEO की जिम्मेदारी संभाल रही थीं अदिति
अदिति श्रीवास्तव ने 2021 में Pocket Aces की CEO की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में कंपनी ने भारत की प्रमुख डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनियों में अपनी जगह मजबूत की।
Pocket Aces के तहत FilterCopy, Dice Media और Clout जैसे डिजिटल ब्रांड हैं। कंपनी ने शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट, वेब सीरीज और क्रिएटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Pocket Aces का Saregama ने 2023 में अधिग्रहण किया था। इसके बाद भी कंपनी ने अपने डिजिटल कंटेंट और क्रिएटर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाना जारी रखा।
अब अदिति श्रीवास्तव एग्जिक्यूटिव लीडरशिप से हटकर बोर्ड की रणनीतिक भूमिका में रहेंगी। माना जा रहा है कि इससे कंपनी में उनके अनुभव और विजन का इस्तेमाल लंबे समय की रणनीति बनाने में जारी रहेगा।
विनय पिल्लई को मिली बड़ी जिम्मेदारी
मौजूदा CBO विनय पिल्लई 1 अक्टूबर से Pocket Aces के CEO का पद संभालेंगे। Saregama ने इसे कंपनी के भीतर मौजूद टैलेंट को आगे बढ़ाने की अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है।
विनय पिछले करीब छह साल से Pocket Aces के साथ जुड़े हैं। उन्होंने कंपनी के क्रिएटर मैनेजमेंट बिजनेस Clout को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई और बाद में चीफ बिजनेस ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली।
विनय ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उनके पास Booz Allen Hamilton में कंसल्टिंग का अनुभव भी है। इसके अलावा उन्होंने खुद का स्ट्रीमिंग स्टार्टअप Dekkho भी शुरू किया था। कंपनी के मुताबिक, उनका कॉर्पोरेट और एंटरप्रेन्योरियल अनुभव Pocket Aces को अगले चरण में ले जाने में काम आएगा।
युवाओं के बीच मजबूत पकड़
Pocket Aces ने भारत में शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट, वेब सीरीज और क्रिएटर मैनेजमेंट के बाजार को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के FilterCopy और Dice Media जैसे ब्रांड युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जबकि Clout के जरिए कंपनी क्रिएटर्स और टैलेंट मैनेजमेंट का कारोबार करती है।
कंपनी आगे भी युवाओं के लिए डिजिटल कंटेंट तैयार करने पर फोकस करेगी। इसके लिए वह अपने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर और क्रिएटर चैनलों के साथ-साथ बड़े विज्ञापनदाताओं और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ काम जारी रखेगी।
इसके अलावा Pocket Aces, Saregama के नए और पुराने म्यूजिक कैटलॉग के लिए एक महत्वपूर्ण मार्केटिंग आर्म के तौर पर भी काम करती रहेगी।
Saregama के लिए भी अहम बदलाव
Pocket Aces का नेतृत्व बदलाव Saregama की डिजिटल एंटरटेनमेंट रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। Saregama, RP-Sanjiv Goenka Group का हिस्सा है और 1902 से मनोरंजन कारोबार में मौजूद है।
कंपनी का कारोबार म्यूजिक, डिजिटल सीरीज, टीवी कंटेंट, फिल्म प्रोडक्शन, शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट, आर्टिस्ट और इंफ्लुएंसर मैनेजमेंट, लाइव इवेंट्स और Carvaan जैसे प्रोडक्ट्स तक फैला हुआ है।
Saregama ने 2023 में Pocket Aces का अधिग्रहण किया था। अब नए CEO के नेतृत्व में Pocket Aces के सामने डिजिटल कंटेंट और क्रिएटर इकोसिस्टम को और बड़े स्तर पर ले जाने की जिम्मेदारी होगी।
भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा को साफ कर दिया है कि भारत में उसके प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ ग्लोबल कंटेंट पॉलिसी के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता।
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Samachar4media Bureau
भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा को साफ कर दिया है कि भारत में उसके प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ ग्लोबल कंटेंट पॉलिसी के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता। कंपनी को भारतीय कानून और नियमों के मुताबिक अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहचान, मॉडरेशन और उसे हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने मेटा से सिर्फ आश्वासन देने के बजाय अपने सिस्टम में ठोस सुधार दिखाने को कहा है।
यह मामला मेटा की टेक्निकल टीम और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बीच हुई कई बैठकों के बाद सामने आया है। इन बैठकों में अधिकारियों ने कंपनी से यह समझने की कोशिश की कि उसके प्लेटफॉर्म भारत में हानिकारक और नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट की पहचान और कार्रवाई कैसे करते हैं।
पूरा एल्गोरिदम बदलने का निर्देश नहीं
सरकारी सूत्रों ने उन खबरों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र ने मेटा को अपने पूरे एल्गोरिदम को बदलने के लिए कहा है।
सरकार का कहना है कि वह मेटा की पूरी टेक्नोलॉजी को नए सिरे से तैयार करवाने की मांग नहीं कर रही है। उसका फोकस यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी की Content Policy, Platform Guidelines और Moderation Mechanism भारतीय कानून के अनुरूप काम करें।
भारत की भाषाओं और संस्कृति को लेकर चिंता
सरकार ने मेटा की ग्लोबल कंटेंट मॉडरेशन टीमों की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अधिकारियों का मानना है कि ग्लोबल टीमों को भारत की अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों की पूरी समझ हमेशा नहीं हो सकती।
इसी वजह से सरकार चाहती है कि भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील मामलों में लोकल एक्सपर्ट्स और स्थानीय स्तर की समझ को ज्यादा महत्व दिया जाए।
CSAM को लेकर Zero Tolerance
बैठकों में Child Sexual Abuse Material (CSAM) यानी बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
सरकार ने मेटा से कहा है कि इस तरह की सामग्री को उसके प्लेटफॉर्म पर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों ने कंपनी से केवल यह बताने के बजाय कि वह इसे रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, ठोस और सक्रिय कार्रवाई दिखाने को कहा है।
Deepfake पर भी सरकार की नजर
सरकार ने Deepfake और AI से तैयार किए गए Synthetic Content को लेकर भी मेटा से जवाब मांगा है।
एक चिंता यह है कि किसी बड़े या चर्चित व्यक्ति के Verified या अधिकृत अकाउंट से पोस्ट की गई असली सामग्री को मेटा का ऑटोमेटेड सिस्टम गलती से Deepfake या Manipulated Content न मान ले। इसीलिए अधिकारियों ने संवेदनशील मामलों में Human-in-the-loop सिस्टम की जरूरत बताई है। यानी सिर्फ AI सिस्टम को अंतिम फैसला लेने देने के बजाय जरूरत पड़ने पर इंसान भी कंटेंट की जांच करे।
हटाया गया कंटेंट दोबारा कैसे लौटता है?
सरकार ने यह भी पूछा है कि मेटा ऐसे Synthetic Content को दोबारा प्लेटफॉर्म पर आने से कैसे रोकता है, जिसे पहले पहचानकर हटा दिया गया हो।
सरकार की चिंता है कि एक बार हटाए गए कंटेंट को किसी नए अकाउंट या दूसरे तरीके से दोबारा अपलोड करके लोगों तक न पहुंचाया जा सके।
रिकमंडेशन एल्गोरिदम्स भी जांच के दायरे में
मेटा के रिकमंडेशन और Virality Systems को लेकर भी सरकार ने सवाल उठाए हैं।
अधिकारियों ने पूछा है कि कई बार यूजर्स को उनकी रुचि से अलग कंटेंट क्यों दिखाया जाता है और क्या कंपनी के रिकमंडेशन एल्गोरिदम्स अनजाने में Synthetic या AI-generated कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
सरकार चाहती है कि जिस कंटेंट को Problematic या नियमों का उल्लंघन करने वाला माना गया है, उसे बाद में रिकमंडेशन सिस्टम के जरिए फिर से यूजर्स तक न पहुंचाया जाए।
Section 79 और Safe Harbour पर भी चर्चा
इस बातचीत में मेटा की Intermediary Obligations और Information Technology Act की Section 79 के तहत मिलने वाली Safe Harbour Protection का मुद्दा भी शामिल है।
सरकार पहले भी यह देख चुकी है कि यूजर्स को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए, इसे तय करने में मेटा के एल्गोरिदमs की भूमिका उसकी एक Intermediary के तौर पर जिम्मेदारियों पर क्या असर डाल सकती है।
सरकार को चाहिए काम का सबूत
शुक्रवार को हुई ताजा बैठक में मेटा की टेक्निकल टीम ने अधिकारियों को बताया कि कंपनी ऑनलाइन Harmful Content की पहचान और उसे संभालने के लिए अभी कौन-कौन से सिस्टम इस्तेमाल करती है। इस मुद्दे पर अगले हफ्ते भी तकनीकी स्तर पर बातचीत होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर सरकार का संदेश साफ है- मेटा को भारत में सिर्फ अपनी ग्लोबल पॉलिसी के भरोसे काम नहीं करना है, बल्कि यह साबित करना होगा कि उसके सिस्टम भारतीय कानून, भाषाओं और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं।
सरकार का जोर मेटा की पूरी टेक्नोलॉजी बदलने के बजाय उसके मौजूदा सिस्टम को भारतीय नियमों के मुताबिक लागू करने पर है। यानी अब सरकार को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला बदलाव और उसके ठोस सबूत चाहिए।
OpenAI ने प्रेजेंटेशन बनाने वाले स्टार्टअप NextSlide का अधिग्रहण कर लिया है। इस डील के बाद NextSlide की टीम OpenAI से जुड़ गई है और अब ChatGPT के लिए काम करेगी।
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Samachar4media Bureau
OpenAI ने प्रेजेंटेशन बनाने वाले स्टार्टअप NextSlide का अधिग्रहण कर लिया है। इस डील के बाद NextSlide की टीम OpenAI से जुड़ गई है और अब ChatGPT के लिए काम करेगी। इस अधिग्रहण की जानकारी NextSlide के फाउंडर अहमद बेश्री ने दी है।
Beshry के मुताबिक, यह डील इसी साल की शुरुआत में पूरी हो गई थी, लेकिन इसकी घोषणा हाल ही में की गई है। हालांकि, OpenAI ने NextSlide को कितनी रकम में खरीदा है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
बिना डिजाइन एक्सपीरियंस के भी बना सकते थे प्रेजेंटेशन
NextSlide की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी। इसका मकसद ऐसे लोगों के लिए प्रेजेंटेशन बनाना आसान करना था, जिन्हें डिजाइनिंग का ज्यादा अनुभव नहीं है।
स्टार्टअप का प्रोडक्ट Prompts, Notes, Documents और Research Material को एडिटेबल प्रजेंटेशन में बदलने के लिए बनाया गया था। यानी यूजर को हर स्लाइड खुद तैयार करने की जरूरत कम हो जाती थी और AI की मदद से जल्दी एक प्रेजेंटेशन तैयार की जा सकती थी।
विजुअल कम्युनिकेशन को आसान बनाना था मकसद
Ahmed Beshry ने कहा कि NextSlide का बड़ा उद्देश्य विजुअल कम्युनिकेशन को ज्यादा आसान और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था, ताकि लोग अपने विचारों को बेहतर तरीके से पेश कर सकें।
अब OpenAI में भी NextSlide की टीम इसी लक्ष्य पर काम करेगी। टीम ऐसे AI प्रोडक्ट्स विकसित करने में मदद करेगी, जो लोगों को कंटेंट बनाने और अपने विचारों को बेहतर तरीके से कम्युनिकेट करने में मदद करें।
वेबसाइट पर दी टीम के OpenAI से जुड़ने की जानकारी
NextSlide की वेबसाइट पर अब Ahmed Beshry की ओर से एक संदेश दिया गया है, जिसमें उन्होंने बताया कि टीम OpenAI से जुड़ गई है। उन्होंने उन सभी यूजर्स का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने NextSlide पर प्रेजेंटेशन बनाए, अपना फीडबैक दिया और स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में मदद की।
Beshry का पहले भी Startup का अनुभव
NextSlide शुरू करने से पहले Ahmed Beshry Caper AI के को-फाउंडर रह चुके हैं। यह Smart Cart और Cashier-less Checkout टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला स्टार्टअप था, जिसे Instacart ने 2021 में अधिग्रहण कर लिया था।
NextSlide का सफर भले ही करीब एक साल का रहा, लेकिन OpenAI के साथ जुड़ने के बाद इसकी टीम अब AI के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम करेगी। माना जा रहा है कि इस टीम का अनुभव ChatGPT में प्रजेंटेशन और विजुअल कंटेंट क्रिएशन जैसे फीचर्स को बेहतर बनाने में काम आ सकता है।
कंप्यूटर वैज्ञानिक संजय घेमावत ने 27 वर्षों बाद Google छोड़कर Discovery Loop नामक AI स्टार्टअप की स्थापना की है, जो वैज्ञानिक शोध और इंजीनियरिंग प्रयोगों को स्वचालित बनाने पर काम करेगा।
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Samachar4media Bureau
भारतीय मूल के प्रसिद्ध कंप्यूटर वैज्ञानिक संजय घेमावत (Sanjay Ghemawat) ने लगभग 27 वर्षों तक गूगल (Google) में सेवाएं देने के बाद कंपनी छोड़ दी है। उन्होंने अपने लंबे समय के सहयोगियों जेफ डीन (Jeff Dean), ओरियोल विन्याल्स (Oriol Vinyals) और क्वॉक ले (Quoc Le) के साथ मिलकर 'डिस्कवरी लूप' (Discovery Loop) नामक नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) कंपनी की स्थापना की है। इसका उद्देश्य AI की मदद से वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रयोगों को स्वचालित बनाकर नई खोजों की रफ्तार बढ़ाना है।
संजय घेमावत का जन्म वर्ष 1966 में अमेरिका के इंडियाना (Indiana) में हुआ था। उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) से शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1995 में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology-MIT) से पीएचडी पूरी की। गूगल से जुड़ने से पहले वह डीईसी सिस्टम्स रिसर्च सेंटर (DEC Systems Research Center) में कार्यरत थे, जहां उनकी मुलाकात जेफ डीन से हुई।
वर्ष 1999 में Google से जुड़ने के बाद संजय घेमावत और जेफ डीन ने Google File System, MapReduce, Bigtable और Spanner जैसी कई महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाई। इन तकनीकों ने बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और आधुनिक क्लाउड कंप्यूटिंग की नींव मजबूत की।
नई कंपनी Discovery Loop को अल्फाबेट (Alphabet) का रणनीतिक क्लाउड और कंप्यूटिंग सहयोग मिलेगा। इसके अलावा रेडिकल वेंचर्स (Radical Ventures), खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures), क्लेनर पर्किन्स (Kleiner Perkins), लाइटस्पीड (Lightspeed) और डोअर कैपिटल (Doerr Capital) जैसे प्रमुख निवेशकों का समर्थन भी प्राप्त हुआ है।
गूगल और अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) ने संजय घेमावत और जेफ डीन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि दोनों ने कंपनी की शुरुआती सर्च तकनीकों से लेकर आधुनिक AI युग तक कई ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Google, Discovery Loop का संस्थापक निवेशक और क्लाउड पार्टनर बना रहेगा।