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डीपफेक को लेकर केंद्र सरकार सख्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की बुलाई बैठक
सरकार ने डीपफेक से होने वाले 'गंभीर जोखिम' पर चर्चा के लिए 24 नवंबर को गूगल, फेसबुक, यू-ट्यूब समेत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को बुलाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
डीपफेक के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इससे निपटने के लिए सरकार अलर्ट मोड पर है। सरकार ने डीपफेक से होने वाले 'गंभीर जोखिम' पर चर्चा के लिए 24 नवंबर को गूगल, फेसबुक, यू-ट्यूब समेत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को बुलाया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के प्रमुखों के साथ 24 नवंबर को चर्चा की जाएगी। इंडिया टुडे से बातचीत में केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर से यह जानकारी दी है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि आईटी में नियम 31बी के तहत 11 मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें प्लेटफॉर्म अपने यहां शेयर नहीं कर सकते हैं। उदाहरण के लिए- बाल यौन शोषण सामग्री, इनसाइटफुल कंटेंट, पेटेंट उल्लंघन, हिंसात्मक सामग्री। इसके केंद्र में 31 बी पांच नियम है। इसमें कहा गया है कि गलत सूचना, स्पष्ट रूप से झूठी जानकारी अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं ले जा सकते हैं, यदि वे अपने प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना या डीप फेक लाते हैं तो उन पर इस अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि जो सुरक्षा है, जो इम्युनिटी है, वो खत्म हो जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी भी प्लेटफॉर्म पर कोई डीपफेक है, चाहे वो मैसेंजर प्लेटफॉर्म हो या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म... सूचना मिलने के 36 घंटे के भीतर यदि वे अपने प्लेटफॉर्म से ऐसा कंटेंट नहीं हटाते हैं तो उन्हें अदालत में ले जाया जा सकता है। उस पर आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।
सरकार को डीपफेक के खतरे का एहसास है। पीएम ने शुक्रवार को कहा था कि हमारे जैसे विविधतापूर्ण समाज में ‘डीपफेक’ एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है। समाज में असंतोष की आग भी भड़का सकता है। कारण है कि लोग मीडिया से जुड़ी किसी भी चीज पर उसी तरह भरोसा करते हैं जैसे आम तौर पर गेरुआ वस्त्र पहने व्यक्ति को सम्मान दिया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि डीपफेक के कारण एक नया संकट उभर रहा है। समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग है जिसके पास समानांतर सत्यापन प्रणाली नहीं है।
जानिए, क्या होता है डीपफेक
अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मसले ने सबका ध्यान खींचा, जिसके बाद अब हर तरफ डीपफेक की चर्चा होने लगी है।
वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को डिजिटल रूप से बदलने की तकनीक को डीपफेक कहते हैं। मशीन लर्निंग और एआई से बने ये वीडियो किसी को भी आसानी से धोखा दे सकते हैं। डीपफेक टर्म को डीप लर्निंग से लिया गया है। यह टेक्नोलॉजी मशीन लर्निंग का हिस्सा है। इस तरह के वीडियो नकली होती है। इसमें कई फेक कंटेंट को असली कंटेंट की तरह दिखाया जाता है।
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