शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स में कमाई की जंग: ब्रैंड्स के लिए कौन सबसे फायदेमंद?

2026 की शॉर्ट वीडियो इकोनॉमी की यही असली तस्वीर है। एक तरफ व्युअरशिप और एंगेजमेंट रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म से मिलने वाला रेवेन्यू अभी भी सीमित है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 29 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 29 April, 2026
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शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की दुनिया में आज एक दिलचस्प ट्रेंड साफ दिखाई दे रहा है। Youtube Shorts जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों व्यूज हासिल करने के बावजूद क्रिएटर्स की सीधी कमाई अभी भी काफी सीमित है। लाखों से लेकर करोड़ों व्यूज पर भी आमतौर पर कमाई कुछ हजार रुपये तक ही सिमटी रहती है।

इसके उलट, Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म पर ब्रैंड्स की ओर से मिलने वाले स्पॉन्सर्ड डील्स में कहीं ज्यादा पैसा है। एक ही वीडियो के लिए क्रिएटर्स को दसियों हजार रुपये तक मिल रहे हैं, जो प्लेटफॉर्म की कमाई से कई गुना ज्यादा है।

2026 की शॉर्ट वीडियो इकोनॉमी की यही असली तस्वीर है। एक तरफ व्युअरशिप और एंगेजमेंट रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म से मिलने वाला रेवेन्यू अभी भी सीमित है। ऐसे में क्रिएटर्स की कमाई का मुख्य जरिया अब ब्रैंड डील्स बन चुका है, जहां हर प्लेटफॉर्म अपनी अलग रणनीति और अवसर लेकर सामने आ रहा है।

भारत में शॉर्ट वीडियो का विस्फोट- तस्वीर कितनी बड़ी है?

2026 में भारत शॉर्ट वीडियो का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। YouTube India पर अकेले 50 करोड़ यूजर्स हैं, जोकि दुनिया में सबसे ज्यादा (Statista, October 2025) हैं। Youtube Shorts दुनिया भर में 200 बिलियन व्यूज प्रतिदिन बना रहा है- YouTube के CEO नील मोहन ने पहली बार जून 2025 में Cannes Lions Festival में इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी थी। इसके बाद 21 जनवरी 2026 को अपने YouTube ब्लॉग में इसे फिर से कन्फर्म किया। इसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 25% है, यानी इस मामले में भारत सबसे आगे है।

Instagram पर भारत में 40 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं (DataReportal, April 2026) और IPSOS Survey के अनुसार Instagram Reels भारत में सबसे लोकप्रिय शॉर्ट फॉर्म वीडियो फार्मेट है। Moj (ShareChat का प्लेटफॉर्म) और Josh मिलाकर देश के Tier 2-3 शहरों में 35 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स तक पहुंच रखते हैं।

FICCI-EY 2026 रिपोर्ट (मार्च 2026) के अनुसार भारत में ऑनलाइन वीडियो व्युअर्स की संख्या 57.2 करोड़ तक पहुंच चुकी है। Dentsu की Digital Advertising Report 2026 (फरवरी 2026) बताती है कि देश का Online Video Advertising 2025 में ₹20,004 करोड़ का हो चुका है- जो कुल Digital Advertising का 28% है।

इस विशाल बाजार में तीन तरह के खिलाड़ी हैं: Youtube Shorts (Google का), Instagram Reels (Meta का), और Moj (भारत का अपना)। तीनों के मॉनेटाइजेशन मॉडल बिल्कुल अलग हैं और ब्रैंड्स के लिए हर प्लेटफॉर्म का ROI भी अलग।

Youtube Shorts- सबसे बड़ा स्टेज, सबसे छोटा चेक

YouTube Shorts का स्केल भारत में बाकी सभी प्लेटफॉर्म से बड़ा है। हर दिन करीब 200 बिलियन व्यूज और 2 बिलियन मंथली यूजर्स (Q1 2026) के साथ यह शॉर्ट वीडियो का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। लेकिन क्रिएटर्स के लिए सच्चाई यह है कि यहां से सीधी कमाई अभी भी काफी कम है।

CPM और Creator Payouts की हकीकत:

YouTube Shorts पर कमाई का तरीका थोड़ा अलग है। यहां सभी Shorts Ads से आने वाला पैसा एक Pool में जाता है, और फिर क्रिएटर्स को उनके व्यूज के हिसाब से हिस्सा मिलता है। इसमें से पहले म्यूजिक का खर्च कटता है, फिर क्रिएटर को करीब 45% हिस्सा मिलता है (जबकि Long Video में 55% मिलता है)।

अब बात कमाई की- Shorts पर 1,000 व्यूज के लिए सिर्फ $0.03 से $0.10 मिलते हैं। यानी 10 लाख व्यूज पर करीब ₹2,500 से ₹8,400 ही बनते हैं। वहीं Long Videos में यही कमाई करीब 30–60 गुना ज्यादा होती है। 

भारत में यह कमाई और भी कम है। यहां 1,000 व्यूज पर करीब ₹5 से ₹30 मिलते हैं। मतलब यदि किसी वीडियो पर 1 करोड़ व्यूज भी आ जाएं, तो कमाई सिर्फ ₹5,000 से ₹30,000 तक ही रहती है। 

YPP (YouTube Partner Program) की जरूरत: YouTube Shorts से कमाई शुरू करने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इसके लिए 1,000 सब्सक्राइबर्स जरूरी हैं। साथ ही या तो 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज होने चाहिए, या फिर Long Videos के जरिए 4,000 घंटे का वॉच टाइम पूरा होना चाहिए।

ब्रैंड्स के लिए Youtube Shorts का CPM: ब्रैंड्स की बात करें तो शॉर्ट्स पर उनका खर्च भी कम होता है। यहां विज्ञापनदाता हर व्यू के लिए करीब $0.10 से $0.30 तक देते हैं। यह Long YouTube Videos के मुकाबले कम है, जहां प्रति व्यू $0.50 से $3 तक मिल सकता है। लेकिन शॉर्ट्स का फायदा इसका बहुत बड़ा स्केल है, जहां व्यूज करोड़ों में आते हैं।

Youtube Shorts बनाम Long Form- एक स्पष्ट फैसला:

Inventiva (फरवरी 2026) की रिपोर्ट के मुताबिक YouTube की सबसे बड़ी ताकत है लंबा एंगेजमेंट टाइम। यानी 10 मिनट का वीडियो किसी 30 सेकंड की Reel के मुकाबले ब्रैंड को ज्यादा यादगार बनाता है। खासकर Finance, Tech और Education जैसे सेक्टर में YouTube पर वीडियो लंबे समय तक सर्च में दिखते रहते हैं, क्योंकि यह सिर्फ वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं, एक सर्च इंजन भी है।

upGrowth (अप्रैल 2026) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ब्रैंड डील के रेट कुछ इस तरह हैं:

  • Micro Creator (10 हजार से 1 लाख सब्सक्राइबर्स) के लिए एक YouTube Short: ₹8,000 से ₹80,000
  • 1 मिलियन+ सब्सक्राइबर्स वाले क्रिएटर के लिए YouTube Short: ₹60,000 से ₹2 लाख
  • Long Form वीडियो (60–90 सेकंड ब्रैंड इंटीग्रेशन): ₹2.5 लाख से ₹6 लाख

Instagram Reels- ब्रैंड डील्स में आगे, डायरेक्ट अर्निंग में पीछे

Instagram Reels की कहानी Youtube Shorts से एकदम उलटी है। प्लेटफॉर्म सीधे तो लगभग कुछ नहीं देता, लेकिन ब्रैंड डील्स (Brand Deals) के लिए यह अब भी सबसे प्रीमियम प्लेटफॉर्म है।

Reels Play Bonus का अंत:

Instagram का Reels Play Bonus Program, जो 2021 में शुरू हुआ था और व्यूज के आधार पर क्रिएटर्स को पैसा देता था, मार्च 2023 से नए क्रिएटर्स के लिए बंद कर दिया गया। अब मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। Instagram ने माना कि सीधे पैसे देने वाला मॉडल ज्यादा बड़ा नहीं बन पाया, इसलिए अब कंपनी क्रिएटर्स की कमाई को Brand Deals और Partnerships की तरफ बढ़ा रही है।

Direct Ad Revenue की हकीकत:

Instagram Reels पर जो प्लेटफॉर्म से सीधी कमाई होती है, वह काफी कम है। Ads Program के तहत 1,000 व्यूज पर करीब $0.01 से $0.10 मिलते हैं। यानी 10 लाख व्यूज पर लगभग ₹8,400 से ₹50,000 तक की कमाई हो सकती है। लेकिन यह सुविधा सभी के लिए नहीं है- यह सिर्फ Invite-Only है और भारत में बहुत कम क्रिएटर्स तक पहुंची है।

fluxnote.io के March 2026 के India-specific Analysis के अनुसार, भारत में रील्स पर प्रति व्यू कमाई $0.002 से $0.008 के बीच रहती है, जबकि अमेरिका में यह $0.01 से $0.05 तक होती है। यानी भारतीय क्रिएटर्स को अमेरिकी क्रिएटर्स के मुकाबले करीब 5–10 गुना कम पैसा मिलता है।

Brand Deals में Reels का दबदबा:

upGrowth की April 2026 Influencer Pricing Report के अनुसार, India में Instagram Brand Deal Rates:

  • Instagram Reels पर ब्रैंड डील की कमाई फॉलोअर्स के हिसाब से बढ़ती है।

  • 10 हजार से 1 लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर एक Reel के लिए करीब ₹15,000 से ₹80,000 तक लेते हैं।

  • 1 लाख से 5 लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर की फीस ₹75,000 से ₹3.5 लाख तक होती है।

  • वहीं 5 लाख से 20 लाख फॉलोअर्स वाले बड़े क्रिएटर एक Reel के लिए ₹2.5 लाख से ₹8 लाख तक चार्ज करते हैं।

  • अगर ब्रैंड को “Whitelisting Rights” भी दिए जाते हैं (यानि ब्रैंड उस कंटेंट को अपने एड्स में इस्तेमाल कर सकता है), तो यही रकम 1.5 से 2 गुना तक बढ़ जाती है।

Instagram Reels की Reach:

Instagram Reels का एल्गोरिद्म वीडियो को करीब 72 घंटों के अंदर तेजी से वायरल करने में मदद करता है। Explore Page के जरिए यह कंटेंट को उन लोगों तक भी पहुंचाता है जो आपको फॉलो नहीं करते- यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, Sprout Social और Hootsuite (2025) के मुताबिक Instagram का कुल औसत एंगेजमेंट रेट घटकर 0.50% रह गया है। इसलिए Reels को सबसे बेहतर तरीके से “Discovery Tool” यानी नए लोगों तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन एक कमी यह है कि Reels में Direct Purchase Links का सपोर्ट नहीं है, इसलिए सीधी कन्वर्जन (conversion) के मामले में यह YouTube Shorts से थोड़ा पीछे रह जाता है।

वहीं Loopexdigital.com के Q1 2026 के आंकड़ों के अनुसार YouTube Shorts की एंगेजमेंट रेट 5.91% है, जो शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स में सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद ब्रैंड डील्स के मामले में रील्स अभी भी आगे है, क्योंकि यहां की ऑडियंस ज्यादा Urban और Aspirational मानी जाती है, जिसे प्रीमियम ब्रैंड्स ज्यादा पसंद करते हैं।

Moj – देसी प्लेटफॉर्म, लोकल ऑडियंस और नया एक्सपेरिमेंट

Moj, जो ShareChat का शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म है, उसे शहरी मार्केटिंग एजेंसियां अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन असल में यह भारतीय क्षेत्रीय (vernacular) मार्केटिंग का एक बड़ा और अनदेखा मौका है।

Moj की ताकत:

Moj पर 15 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में कंटेंट बनाया और देखा जाता है। इसकी ऑडियंस का बड़ा हिस्सा हिंदी, तमिल, तेलुगु और बंगाली जैसे क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट पसंद करता है। खास बात यह है कि Tier-2, Tier-3 शहरों और गांवों में इसकी पहुंच कई बड़े प्रीमियम प्लेटफॉर्म्स से भी ज्यादा है।

मॉनेटाइजेशन मॉडल:

Moj का सीधे Ads से कमाई वाला सिस्टम अभी YouTube जितना मजबूत नहीं है। यहां क्रिएटर्स ज्यादातर तीन तरीकों से कमाते हैं- ब्रैंड डील्स, Moj Creator League (जहां हफ्ते में ₹5 लाख तक का प्राइज पूल मिलता है) और लाइव स्ट्रीम के दौरान मिलने वाले वर्चुअल गिफ्ट्स।

Moj का 2026 का सबसे बड़ा कदम:

जनवरी 2026 में Moj ने Micro Drama Challenge लॉन्च किया। यह एक तरह का Accelerator Program है, जिसके लिए कंपनी ने सालाना ₹20 करोड़ का बजट रखा है। इसके तहत 10 चुने हुए स्टूडियो को ₹10 लाख-₹10 लाख का ग्रांट दिया गया, ताकि वे Vertical Micro Drama Series बना सकें। हर सीरीज कम से कम 1 घंटे की होगी और हर एपिसोड 1–2 मिनट का होगा। यह भारत का पहला ऐसा संगठित क्रिएटर फंड है, जो खास तौर पर Short Form Drama पर फोकस कर रहा है।

ब्रैंड्स के लिए Moj का Value:

Moj और Josh पर एक माइक्रो इन्फ्लुएंसर (5K-50K Followers) का Sponsored Post ₹5,000-₹30,000 में मिलता है- जो Instagram पर उसी Tier के क्रिएटर से 40-60% सस्ता है। FMCG, Telecom, और सरकारी कैंपेंस के लिए Moj एक Cost-Effective High Reach प्लेटफॉर्म है।

Case Study: IPL और Viral Campaigns में शॉर्ट वीडियो का रोल

IPL 2026 में शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और प्लानिंग के साथ किया गया।

JioHotstar के आंकड़ों के मुताबिक IPL 2026 के ओपनिंग वीकेंड पर टीवी और डिजिटल मिलाकर करीब 51.5 करोड़ दर्शक जुड़े। इस दौरान Fantasy Gaming Apps, FMCG ब्रैंड्स और टेलीकॉम कंपनियों ने नई मल्टी-प्लेटफॉर्म रणनीति अपनाई- YouTube Shorts पर लंबे समय तक दिखने वाला कंटेंट, Instagram Reels पर 72 घंटे का वायरल पुश, और Moj पर क्षेत्रीय (vernacular) ऑडियंस तक पहुंच।

Otbox Media Solutions (फरवरी 2026) की एक केस स्टडी में सामने आया कि जिन ब्रैंड्स ने हफ्ते में 3 Reels और 1 YouTube Short की रणनीति अपनाई, उन्हें 8 हफ्तों में करीब 25% तक बिक्री में बढ़ोतरी मिली।

सिर्फ ब्रैंड्स ही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी शॉर्ट वीडियो का जमकर इस्तेमाल हुआ था। खासकर क्षेत्रीय पार्टियों ने Moj और Josh जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन इलाकों तक पहुंच बनाई, जहां Instagram की पहुंच कम थी। 2026 में यह ट्रेंड और मजबूत होता दिख रहा है।

भारत का Influencer Marketing बाजार- 2026 का आँकड़ा

भारत में Influencer Marketing का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में यह करीब ₹2,200 करोड़ था, जो 2025 में ₹2,850 करोड़ और 2026 में बढ़कर ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यानी करीब 25% की सालाना ग्रोथ, जो पारंपरिक डिजिटल विज्ञापन (12–15%) से कहीं ज्यादा है (Otbox Media Solutions, नवंबर 2025)।

इस बाजार में ब्रैंड्स अपना बजट अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस तरह खर्च कर रहे हैं (upGrowth, अप्रैल 2026):

  • Instagram Reels पर करीब 70% बजट जाता है, खासकर Fashion, Beauty, FMCG और Lifestyle कैटेगरी में।
  • YouTube Shorts और Long Videos को 20–25% बजट मिलता है, जहां Finance, Tech और EdTech जैसे सेक्टर एक्टिव हैं।
  • वहीं Moj और Josh जैसे क्षेत्रीय प्लेटफॉर्म्स को 5–10% बजट मिलता है, जिसमें FMCG, Telecom और सरकारी कैंपेन शामिल हैं।

Dentsu Digital Advertising Report 2026 के मुताबिक, टीवी का एड शेयर लगातार घट रहा है। 2024 में जहां यह 28% था, वहीं 2025 में घटकर 21% (₹25,964 करोड़) रह गया। इसका साफ मतलब है कि बड़े विज्ञापनदाता अब तेजी से डिजिटल और खासकर शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ रहे हैं।

तीन प्लेटफॉर्म्स की चुनौतियां-  

Youtube Shorts की समस्या: YouTube Shorts से सीधी कमाई इतनी कम है कि ज्यादातर क्रिएटर्स इसे सिर्फ ग्रोथ का जरिया मानते हैं, कमाई का नहीं। उदाहरण के तौर पर, 1 करोड़ व्यूज पर Shorts से सिर्फ ₹5,000 से ₹30,000 तक मिलते हैं, जबकि उसी रीच के लिए एक ब्रैंड डील ₹5 लाख तक दे सकती है। यानी कमाई में 15 से 100 गुना तक का फर्क है और यही बात कई क्रिएटर्स के लिए निराशा की वजह बन रही है।

Instagram Reels की समस्या: Instagram Reels पर अब सीधी कमाई लगभग खत्म हो चुकी है। Reels Play Bonus बंद हो गया है और प्लेटफॉर्म से मिलने वाला डायरेक्ट पैसा बहुत कम रह गया है। ऐसे में अगर किसी क्रिएटर के पास ब्रैंड डील्स नहीं हैं, तो करोड़ों व्यूज आने के बावजूद कमाई ना के बराबर रहती है।

इसके अलावा, Instagram में Direct Purchase Links का सही सपोर्ट नहीं है, जिससे किसी प्रोडक्ट की सीधी बिक्री (conversion) करना भी मुश्किल हो जाता है।

Moj की समस्या:  Moj का मोनेटाइजेशन सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। यहां ब्रैंड डील्स का नेटवर्क भी उतना मजबूत नहीं है। साथ ही, क्रिएटर्स के लिए सही और भरोसेमंद डेटा (third-party verified tools) की कमी है, जिससे ब्रैंड्स यहां बड़े स्तर पर निवेश करने में हिचकते हैं।

Moj फिलहाल बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच बनाने का प्लेटफॉर्म है, लेकिन प्रीमियम कमाई के लिए अभी उतना मजबूत नहीं माना जाता।

पूरे Ecosystem की समस्या: भारत का CPM- Cost Per Mille (यानी 1,000 व्यूज या इम्प्रेशन पर विज्ञापनदाता कितना पैसा देता है) दुनिया में सबसे कम है। ऑस्ट्रेलिया का Average YouTube CPM $36.21 है, US का $32.75- जबकि भारत का $0.70-$0.83 है। इसका मतलब है कि 50 करोड़ यूट्यूब यूजर्स होने के बावजूद भारतीय क्रिएटर्स को वैश्विक स्तर पर बेहद कम कीमत मिलती है। अमेरिका के मुकाबले लगभग 40-50 गुना कम।

भविष्य की दिशा- 2026 के बाद क्या होगा?

YouTube का दांव: YouTube Shorts पर दिखने वाले Vertical Video Ads, Long Videos के मुकाबले 10–20% ज्यादा कन्वर्जन दे रहे हैं। इसके साथ ही Connected TV (CTV) पर Shorts देखने वालों की संख्या एक साल में दोगुनी हो गई है, यानी लोग अब टीवी पर भी शॉर्ट वीडियो ज्यादा देखने लगे हैं। वहीं YouTube ने अपने Partner Program के जरिए अब तक क्रिएटर्स को $100 बिलियन से ज्यादा का कुल भुगतान किया है, जो किसी भी दूसरे क्रिएटर प्लेटफॉर्म से ज्यादा है।

Instagram का दांव: Meta ने Reels को अब E-commerce से और ज्यादा जोड़ दिया है। Instagram Shopping, Collab Shops और Allowlisting जैसे फीचर्स के जरिए कमाई के नए रास्ते बन रहे हैं, जहां ब्रैंड सीधे क्रिएटर के अकाउंट से Ads भी चला सकते हैं।

भारत में Social Commerce भी तेजी से बढ़ रहा है। Meesho और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म वीडियो-फर्स्ट स्ट्रेटेजी अपना रहे हैं, जिससे 20–30% तक ज्यादा कन्वर्जन देखने को मिल रहा है।

Moj का दांव: माइक्रो ड्रामा फॉर्मेट भारत में तेजी से एक नया कंटेंट सेगमेंट बनता जा रहा है। FICCI-EY 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2028 तक इसका मार्केट करीब ₹2,300 करोड़ तक पहुंच सकता है।

आज कई शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म जैसे Dolby Vision सपोर्ट और AI आधारित रीजनल कंटेंट रिकमेंडेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यूजर्स को उनकी भाषा और पसंद के हिसाब से कंटेंट मिल रहा है और यह पूरा फॉर्मेट धीरे-धीरे प्रीमियम कंटेंट की तरफ बढ़ रहा है।

कौन जीत रहा है असली मॉनेटाइजेशन की जंग?

YouTube Shorts, Instagram Reels और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म में से कोई एक अकेला “सबसे आगे” नहीं है। असल में ये तीनों मिलकर एक नई डिजिटल इकोनॉमी बना रहे हैं।

क्रिएटर के नजरिए से:

YouTube Shorts, Instagram Reels और Moj- तीनों का कमाई मॉडल अलग-अलग तरह से काम करता है।

  • YouTube Shorts: इसे सबसे ज्यादा stable long-term income वाला माना जाता है, क्योंकि यहां कमाई सिर्फ ads से नहीं होती, बल्कि platform revenue + brand deals + merchandise तीनों मिलकर एक मजबूत income system बनाते हैं।
  • Instagram Reels: यहां creators को अक्सर brand deals से सबसे ज्यादा पैसा मिलता है, लेकिन यह पूरी तरह उनके audience size और niche (कौन सा content बनाते हैं) पर depend करता है।
  • Moj: यह अभी भी डेवलपिंग फेज में है, यानी इसका मोनेटाइजेशन सिस्टम और कमाई के अवसर अभी पूरी तरह मैच्योर नहीं हुए हैं।

ब्रैंड के नजरिए से:

YouTube Shorts, Instagram Reels और Moj- तीनों का फोकस अलग ऑडियंस और अलग मार्केटिंग गोल पर है।

  • YouTube Shorts: यह long-term search discovery के लिए सबसे मजबूत है। यहां लोग intent के साथ content ढूंढते हैं, इसलिए audience ज्यादा high-intent होती है और content लंबे समय तक चलता है।
  • Instagram Reels: यह तेजी से viral awareness बनाने के लिए बेहतर है। यहां ज्यादातर urban, premium audience मौजूद है, जो trends और lifestyle content पर जल्दी react करती है।
  • Moj: यह mainly vernacular India को target करता है। यानी छोटे शहरों और regional language audience तक पहुंच बनाने के लिए यह एक cost-effective platform है।

शॉर्ट वीडियो अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे एक मजबूत कमर्शियल (व्यापार) प्लेटफॉर्म बन चुका है। आज इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का बाजार करीब ₹3,375 करोड़ तक पहुंच चुका है। वहीं ऑनलाइन वीडियो एड स्पेंड भी लगभग ₹20,004 करोड़ के स्तर पर है। इसके साथ ही भारत में करीब 57.2 करोड़ वीडियो व्यूअर्स हैं, जो इस इकोसिस्टम की बड़ी ताकत दिखाते हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में वही प्लेटफॉर्म आगे रहेगा जो क्रिएटर्स को बेहतर कमाई देगा, ब्रैंड्स को ज्यादा बेहतर रिजल्ट (ROI) देगा और भारत के हर छोटे-बड़े इलाके तक अपनी पहुंच बना सकेगा।

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न्यूजरूम के लिए YouTube ने लॉन्च किए नए टूल्स, कमाई से लेकर AI सेफ्टी तक पर फोकस

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
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यूट्यूब (YouTube) ने न्यूज ऑर्गनाइजेशंस और न्यूजरूम के लिए कई नए टूल्स पेश किए हैं। इनका मकसद न्यूज स्टोरी को बेहतर तरीके से तैयार करने, दर्शकों के व्यवहार को समझने, नियमित कमाई बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारों की पहचान और कंटेंट के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा देने में मदद करना है।

इन नए फीचर्स की घोषणा न्यूयॉर्क में आयोजित YouTube के 14वें न्यूज वर्किंग ग्रुप में की गई। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 100 से ज्यादा न्यूज पार्टनर्स शामिल हुए और डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य पर चर्चा की गई।

YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर न्यूज देखने का चलन लगातार बढ़ रहा है। 2025 में दुनियाभर के यूजर्स ने 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज कंटेंट देखा। इनमें से 12 अरब घंटे से ज्यादा कंटेंट कनेक्टेड टीवी पर देखा गया। इससे पता चलता है कि लोग अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर पर ही नहीं, बल्कि टीवी पर भी YouTube के जरिए न्यूज देख रहे हैं।

YouTube Studio में मिलेंगे ज्यादा डेटा और इनसाइट्स

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है। इससे एडिटोरियल टीम यह समझ सकेगी कि उनकी कवरेज को दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है और किन विषयों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

इसका इस्तेमाल सिर्फ वीडियो के लाइव होने के बाद व्यूज देखने तक सीमित नहीं रहेगा। न्यूजरूम यह समझ सकेंगे कि दर्शक किस तरह की खबरों और कंटेंट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके आधार पर वे आगे की कवरेज और एडिटोरियल संसाधनों को लेकर फैसले ले सकेंगे।

वीडियो तैयार करते समय भी मिलेगा AI फीडबैक

YouTube वीडियो तैयार करने के दौरान भी फीडबैक देने वाले फीचर्स ला रहा है। ये टूल्स नैरेटिव फ्लो, पेसिंग और स्टोरीटेलिंग स्ट्रक्चर जैसे पहलुओं पर इनपुट दे सकेंगे। यानी वीडियो पब्लिश होने से पहले ही न्यूजरूम को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कहानी को किस तरह और बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है।

थंबनेल की भी होगी टेस्टिंग

YouTube ने थंबनेल को लेकर भी नए फीचर्स पेश किए हैं। डायनेमिक थंबनेल के जरिए ऑडियंस के अलग-अलग हिस्सों को प्रदर्शन के आधार पर अलग वर्जन दिखाए जा सकेंगे। इससे हर दर्शक को एक ही थंबनेल दिखाने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को आजमाया जा सकेगा।

इसके अलावा आने वाले वीडियो A/B टेस्टिंग टूल के जरिए न्यूज ऑर्गनाइजेशन अलग-अलग हुक, स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट और विजुअल्स को टेस्ट कर सकेंगे। इससे यह तुलना करने में मदद मिलेगी कि किस तरीके से दर्शकों की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है।

पुरानी खबरों को फिर से सामने लाने में मदद करेगा Ask Studio

YouTube अपने AI-पावर्ड Ask Studio का इस्तेमाल पुरानी कवरेज को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए भी कर रहा है। यह पुराने वीडियो को देखकर नए थंबनेल जैसे बदलाव सुझा सकता है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन की पुरानी और उपयोगी रिपोर्टिंग को दोबारा ऑडियंस के सामने लाने में मदद मिल सकती है, बजाय इसके कि नई वीडियो के आने के बाद पुरानी स्टोरी पीछे छूट जाए।

मेंबरशिप के जरिए नियमित कमाई पर भी जोर

YouTube ने न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए कमाई से जुड़े फीचर्स पर भी ध्यान दिया है। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, Channel Memberships के जरिए पिछले पांच साल में क्रिएटर्स को 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया गया है। अब YouTube में मेंबर्स के लिए एक अलग इन-ऐप हब भी जोड़ा जा रहा है। इसमें सदस्य सिर्फ मेंबर्स के लिए उपलब्ध कंटेंट आसानी से खोज सकेंगे।

संभावित सदस्य सब्सक्राइब करने से पहले members-only वीडियो का प्रीव्यू भी देख सकेंगे। इसके अलावा YouTube members-only communities भी शुरू कर रहा है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन अपने दर्शकों के साथ ज्यादा सीधा और नियमित जुड़ाव बना सकेंगे।

AI से पत्रकारों की आवाज और चेहरे की सुरक्षा

नए अपडेट का सबसे संवेदनशील हिस्सा पत्रकारों और क्रिएटर्स की डिजिटल पहचान से जुड़ा है। जनरेटिव AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज की नकल करना आसान हो गया है। ऐसे में YouTube पत्रकारों और क्रिएटर्स को उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में काम कर रहा है।

YouTube के पास पहले से Likeness Detection फीचर है। इसके जरिए क्रिएटर्स अपनी दृश्य पहचान यानी चेहरे के अनधिकृत इस्तेमाल को पहचान और मैनेज कर सकते हैं।

अब YouTube Speaking-Voice Detection को Facial Detection के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इसका मकसद ऐसे कंटेंट को पहचानना आसान बनाना है जिसमें किसी क्रिएटर या पत्रकार के चेहरे और आवाज की नकल की गई हो।

Likeness Detection को YouTube के मोबाइल ऐप में भी लाया जाएगा। इसके बाद न्यूज क्रिएटर्स मोबाइल से ही सिस्टम सेट कर सकेंगे, अपनी पहचान के संभावित इस्तेमाल की समी`क्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उस पर कार्रवाई कर सकेंगे।

एक ही जगह पर न्यूज के कई पहलुओं पर फोकस

YouTube के नए टूल्स न्यूज बिजनेस के कई हिस्सों को कवर करते हैं। इनमें ऑडियंस की पसंद समझना, स्टोरी को बेहतर बनाना, अलग-अलग पैकेजिंग को टेस्ट करना, पुराने कंटेंट को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाना, मेंबरशिप से कमाई बढ़ाना और पत्रकारों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा शामिल है।

2025 में YouTube पर 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज देखे जाने और इनमें 12 अरब घंटे से ज्यादा कनेक्टेड टीवी पर देखे जाने के आंकड़ों के बीच इन नए फीचर्स का न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए महत्व बढ़ जाता है।

अब न्यूज संस्थानों के सामने इन टूल्स को एक साथ इस्तेमाल करने की चुनौती होगी- दर्शकों की पसंद समझने से लेकर खबर को बेहतर तरीके से पेश करने, उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने, दर्शकों को दोबारा जोड़ने, कुछ दर्शकों को पेड मेंबर बनाने और AI के दौर में पत्रकारों की डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तक।

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TOI Digital से जुड़ीं मेघना डेका, बनीं नेशनल एडिटर व वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड

टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में मेघना, TOI Digital के वीडियो कारोबार की रणनीति और उसके विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल की एग्जिक्यूटिव एडिटर-वीडियो अदिति प्रसाद को रिपोर्ट करेंगी।

मेघना की जिम्मेदारी में टाइम्स ऑफ इंडिया के मौजूदा वीडियो पोर्टफोलियो के साथ-साथ नए वीडियो प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना शामिल होगा। खास तौर पर वह Times Axis, TOI Bharat और Defence HQ के यूट्यूब चैनलों को अलग पहचान वाले वीडियो प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित करने और उनका विस्तार करने पर काम करेंगी।

इसके अलावा वह संपादकीय और बिजनेस टीमों के साथ मिलकर नए वीडियो फॉर्मेट, फ्रेंचाइजी और दर्शकों से जुड़ने के नए अवसरों पर भी काम करेंगी। यह काम TOI Digital के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए किया जाएगा।

ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव

मेघना डेका को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह इससे पहले Times Now में एडिटर-आउटपुट और प्राइम-टाइम एंकर के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने ‘Decoding Now with Meghna Deka’ और ‘Setting the Agenda’ जैसे कार्यक्रमों को एंकर किया है।

Times Now में हेड ऑफ आउटपुट के तौर पर उन्होंने पिछले करीब 8 साल तक चैनल की रणनीति को लीड किया। इससे पहले वह CNN-News18, India Today, NewsX और NDTV में भी संपादकीय भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं और एंकरिंग की है।

वीडियो अब न्यूज देखने का अहम जरिया: अदिति प्रसाद

मेघना डेका की नियुक्ति पर अदिति प्रसाद, एग्जीक्यूटिव एडिटर-वीडियो, Times of India Digital ने कहा कि आज वीडियो इस बात का अहम हिस्सा बन गया है कि दर्शक न्यूज को कैसे खोजते और देखते हैं।

उन्होंने कहा कि मेघना ने दो दशक से ज्यादा समय न्यूजरूम में बिताया है और Times Now में प्राइम-टाइम न्यूज के प्रमुख चेहरों में रही हैं। उनके मुताबिक मेघना को अच्छी तरह पता है कि दर्शकों का ध्यान किस तरह बनाए रखा जा सकता है।

अदिति प्रसाद ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत वीडियो ब्रैंड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि Defence HQ और Times Axis जैसे प्लेटफॉर्म्स से यह पता चला है कि दर्शकों के बीच फोकस्ड और भरोसेमंद वीडियो कंटेंट की मांग है।

'सिर्फ ज्यादा वीडियो बनाने से बात नहीं बनेगी': मेघना डेका

अपनी नियुक्ति पर मेघना डेका ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक दर्शकों को सिर्फ हेडलाइन से आगे की पूरी कहानी समझाने की कोशिश की है और वीडियो इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि न्यूज वीडियो का अगला दौर सिर्फ ज्यादा से ज्यादा वीडियो बनाने से तय नहीं होगा। इसके बजाय ऐसे फॉर्मेट जरूरी होंगे, जिनकी अपनी अलग पहचान और आवाज हो और जिन्हें दर्शक दोबारा देखना चाहें।

मेघना ने कहा कि Times of India की पहुंच और भरोसे के साथ-साथ Times Axis और Defence HQ जैसे प्लेटफॉर्म पहले से दिशा दिखा रहे हैं और ऐसे समय में कुछ नया तैयार करने का यह महत्वपूर्ण मौका है।

 

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क्विंट डिजिटल ने शेयरधारकों से मांगी 9 प्रस्तावों पर मंजूरी, कर्ज देने समेत कई फैसले शामिल

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए 9 अहम प्रस्तावों पर मंजूरी मांगी है। इनमें कंपनी की अमेरिका स्थित Lee Enterprises Inc. में हिस्सेदारी पर कर्ज के लिए सुरक्षा बनाने, RB Diversified Private Limited को 120 करोड़ रुपये तक का कर्ज देने और कई संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। कंपनी ने इसकी जानकारी 1 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी है।

कंपनी ने बताया कि शेयरधारकों की मंजूरी ई-वोटिंग के जरिए ली जाएगी। इसके लिए वोटिंग 2 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू होगी और 31 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे खत्म होगी।

Lee Enterprises में हिस्सेदारी को लेकर पहला प्रस्ताव

पहले प्रस्ताव में क्विंट डिजिटल ने अपनी Lee Enterprises Inc. में मौजूद हिस्सेदारी को लेकर बोर्ड को सुरक्षा बनाने की मंजूरी देने की बात कही है। कंपनी के पास Lee Enterprises के 32,44,800 शेयर हैं। कंपनी या उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां भविष्य में कर्ज या अन्य वित्तीय सुविधा ले सकती हैं, जिसके लिए इन शेयरों को सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रस्ताव में कंपनी के बोर्ड को इन शेयरों पर गिरवी, चार्ज या दूसरी तरह की सुरक्षा बनाने की अनुमति देने की बात है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी अपनी इस हिस्सेदारी को बेच भी सकती है। हालांकि, दस्तावेज में साफ कहा गया है कि अभी बोर्ड ने Lee Enterprises में अपनी हिस्सेदारी बेचने का कोई फैसला मंजूर नहीं किया है। यह प्रस्ताव फिलहाल एक सक्षम मंजूरी के तौर पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर कंपनी वित्त जुटा सके।

RB Diversified को 120 करोड़ रुपये तक कर्ज

दूसरे प्रस्ताव में RB Diversified Private Limited को कर्ज देने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी गई है। इसके तहत कंपनी एक या कई चरणों में कर्ज दे सकती है और किसी भी समय इस कर्ज की कुल बकाया राशि 120 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होगी। कर्ज का इस्तेमाल RB Diversified अपने मुख्य कारोबार और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए करेगी।

इसी कंपनी के साथ कर्ज से जुड़े 120 करोड़ रुपये तक के संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

Shvaas Creations को 5 करोड़ रुपये तक कर्ज

चौथे प्रस्ताव में Shvaas Creations Private Limited को कर्ज देने की मंजूरी मांगी गई है। कंपनी के मुताबिक, Shvaas एक सहायक कंपनी और संबंधित पक्ष है।

प्रस्ताव के तहत Shvaas को उसकी फंडिंग और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिया जा सकता है। यह कर्ज असुरक्षित होगा और इसकी ब्याज दर कंपनी द्वारा लिए गए किसी भी कर्ज की सबसे ऊंची ब्याज दर से 68 बेसिस पॉइंट ज्यादा रखने का प्रस्ताव है। कर्ज की अवधि 12 महीने तक या आपसी सहमति से तय दूसरी अवधि हो सकती है।

Make A Difference Hospitality के साथ 50 करोड़ रुपये तक का समझौता

पांचवें प्रस्ताव में Make A Difference Hospitality Private Limited के साथ संबंधित पक्ष के लेन-देन को मंजूरी देने की बात है। इसके तहत कंपनी की जगह, उससे जुड़ी सप्लाई, सेवाओं और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर समझौता किया जा सकता है।

इस लेन-देन की कुल सीमा प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये तक रखी गई है।

Quintype से जुड़े कई प्रस्ताव

क्विंट डिजिटल ने अपनी सहायक कंपनियों Quintype Technologies India Limited, Quintype Technologies Inc. और Quintype Services India Private Limited के साथ जुड़े कई लेन-देन की सीमा और अवधि में बदलाव के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है।

एक प्रस्ताव के तहत Quintype Technologies India Limited की ओर से Quintype Technologies Inc. को प्रोडक्ट की बिक्री, प्लेटफॉर्म लाइसेंस, होस्टिंग, मानव संसाधन, प्रशासन, वित्त, बैक-ऑफिस सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसी सेवाएं दी जा सकती हैं। इसके लिए 5 साल की अवधि और अलग-अलग वित्त वर्षों के लिए 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सालाना सीमा प्रस्तावित है।

एक अन्य प्रस्ताव में Quintype Services India Private Limited की ओर से लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े संसाधन, प्रशासन, वित्त, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, तकनीकी सहायता और ग्राहक सेवा जैसी सेवाओं का प्रावधान शामिल है। इसके लिए भी 2031 तक की अवधि और वित्त वर्ष के हिसाब से 25 करोड़ रुपये से 75 करोड़ रुपये तक की सीमा प्रस्तावित है।

RBD Real Estate को 100 करोड़ रुपये तक वित्तीय मदद

नौवें प्रस्ताव में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. समेत अन्य पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी सहायक कंपनियों को RBD Real Estate Inc. और उसकी विदेशी सहयोगी कंपनियों को कर्ज, अग्रिम या अन्य वित्तीय मदद देने की अनुमति मांगी गई है।

इसकी कुल बकाया सीमा किसी भी समय 100 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है। यह वित्तीय मदद तय नियमों के मुताबिक और सामान्य व्यावसायिक शर्तों पर देने की बात कही गई है।

31 अक्टूबर तक वोटिंग

क्विंट डिजिटल के शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग 2 अक्टूबर सुबह 9 बजे से 31 अक्टूबर शाम 5 बजे तक चलेगी। 25 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख पर कंपनी के शेयर रखने वाले सदस्य इन प्रस्तावों पर वोट कर सकेंगे।

कंपनी ने ई-वोटिंग की सुविधा के लिए सीडीएसएल की सेवाएं ली हैं। प्रस्तावों पर मतदान के बाद स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के आधार पर नतीजे जारी किए जाएंगे। अगर जरूरी बहुमत से प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो इन्हें 31 अक्टूबर 2026, यानी ई-वोटिंग की आखिरी तारीख को पारित माना जाएगा।

 

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भारत में लॉन्च हुआ ऐपल पे : एक्सिस बैंक के साथ शुरू हुई सेवा

ऐपल पे ने एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी कर भारत में अपनी भुगतान सेवा शुरू की है, शुरुआत में वीजा और मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को सुविधा मिलेगी, रुपे कार्ड पात्र नहीं हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
applepay

ऐपल (Apple) ने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर दी है। इसके साथ ही कंपनी ने दुनिया के बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक भारत में अपनी सेवा की शुरुआत की है। इसके लिए एप्पल ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) के साथ साझेदारी की है।

फिलहाल ऐपल पे की सुविधा एक्सिस बैंक के वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। भारत के घरेलू रुपे (RuPay) नेटवर्क पर जारी कार्ड अभी इस सेवा के लिए पात्र नहीं हैं।

ऐपल की ऐपल पे और ऐपल वॉलेट की वाइस प्रेसिडेंट जेनिफर बेली (Jennifer Bailey) ने कहा कि भारत की डिजिटल रूप से सक्रिय आबादी कैशलेस भविष्य को अपना रही है और सुरक्षा व प्राइवेसी के उच्च मानकों की उम्मीद करती है। उन्होंने भारत में ऐपल पे लाने को लेकर उत्साह जताया।

कंपनी के मुताबिक, ऐपल पे के जरिए स्टोर, ऑनलाइन और ऐप्स में आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इसमें पूरा भुगतान करने, समय के साथ भुगतान करने और रिवॉर्ड्स के इस्तेमाल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी ने इसे सुरक्षित और प्राइवेट पेमेंट सर्विस बताया है।

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दीपक सिंह की ओपनएआई में एंट्री : भारत में जीटीएम पार्टनरशिप पर करेंगे काम

दीपक सिंह को ओपनएआई में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया नियुक्त किया गया है। वह भारत में जीटीएम पार्टनरशिप को तैयार करने और विस्तार देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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दीपक सिंह (Deepak Singh) को ओपनएआई (OpenAI) में पार्टनर डायरेक्टर, इंडिया (Partner Director, India) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

दीपक सिंह ने कहा कि वह ओपनएआई के साथ नई शुरुआत को लेकर उत्साहित हैं और भारत में जीटीएम पार्टनरशिप (GTM Partnerships) को तैयार करने और बड़े स्तर पर विस्तार देने में योगदान करेंगे।

दीपक के पास 23 वर्षों से ज्यादा का ईएनटी (ENT) अनुभव है, जिसमें 12 से अधिक वर्षों का अनुभव क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा/एआई (Cloud Computing & Data/AI) इकोसिस्टम में रहा है। उन्होंने इंटेल (Intel), हेवलेट पैकार्ड (Hewlett Packard), वीएमवेयर (VMware), अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) और गूगल (Google) जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।

अपने करियर में दीपक भारत और सार्क क्षेत्र (SAARC Region) में एडब्ल्यूएस (AWS), गूगल क्लाउड (Google Cloud) और वीएमवेयर के शुरुआती विस्तार और बिल्ड-अप फेज (Build-up Phase) का हिस्सा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग इंडस्ट्रीज में क्लाउड एडॉप्शन पैटर्न (Cloud Adoption Patterns) का भी अनुभव है।

ओपनएआई से पहले दीपक सिंह पालो ऑल्टो नेटवर्क्स (Palo Alto Networks) में इंडिया और सार्क के लिए सीनियर डायरेक्टर (Sr Director) के तौर पर एंटरप्राइज बिजनेस (Enterprise Business) संभाल रहे थे।

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मेटा के 18 अरब डॉलर वाले चाइल्ड सेफ्टी सेटलमेंट में शामिल नहीं होगा यूट्यूब: नील मोहन

यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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यूट्यूब, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मेटा के बहु-राज्यीय सेटलमेंट में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पहले से ही युवा यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा चुका है।

मोहन ने सीएनएन से कहा, "हमने यह सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से निवेश किया है कि हमारे प्लेटफॉर्म पर युवा सुरक्षित रहें। यूट्यूब से आप उम्मीद कर सकते हैं कि हम इन चीजों पर लगातार ध्यान देते रहेंगे।"

मोहन ने बुधवार को यूट्यूब के सालाना ‘मेड ऑन यूट्यूब’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। इस कार्यक्रम में कंपनी ने क्रिएटर्स और दर्शकों के लिए नए फीचर्स की भी घोषणा की, जिसमें नए AI टूल्स और मैसेजिंग फीचर्स शामिल हैं।

मेटा ने राज्यों के साथ करीब 18 अरब डॉलर के सेटलमेंट पर सहमति जताई है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि मेटा के प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए गए थे, जिससे युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। हालांकि, समझौते के तहत मेटा ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।

इस सेटलमेंट में 13 से 17 साल के यूजर्स के लिए रोजाना इस्तेमाल की समय सीमा, रात के समय इस्तेमाल पर रोक और माता-पिता के लिए ज्यादा मजबूत कंट्रोल जैसे कदम शामिल हैं।

समझौते के तहत मेटा ने कहा है कि वह सेटलमेंट की 70 प्रतिशत रकम का भुगतान करेगा। बाकी 30 प्रतिशत रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि यूट्यूब और टिकटॉक इस समझौते में शामिल होते हैं या नहीं और इसी तरह के बदलाव लागू करते हैं या नहीं। राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि अगर ये प्लेटफॉर्म समझौते में शामिल नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

नील मोहन ने यूट्यूब के पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों का जिक्र किया। इनमें माता-पिता के लिए ऐसा विकल्प भी शामिल है, जिससे वे यह तय कर सकते हैं कि उनके किशोर बच्चे शॉर्ट्स कितनी देर तक देख सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यूट्यूब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स पर तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों के साथ काम करता है।

मोहन ने कहा कि यूट्यूब और मेटा एक-दूसरे से काफी अलग प्लेटफॉर्म भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी घरों में टीवी पर यूट्यूब देखने के अनुभव पर ध्यान दे रही है।

टिकटॉक ने मेटा के समझौते में शामिल होने की अपील पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा के कार्यालय ने भी मोहन के इस रुख पर टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।

मार्च में लॉस एंजिल्स में हुई एक अलग सुनवाई में यूट्यूब और मेटा को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म की वजह से लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा मिला। दोनों कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।

यूट्यूब को युवा यूजर्स से जुड़े अलग-अलग मुकदमों का भी सामना करना पड़ा है। इस साल कंपनी ने टिकटॉक और स्नैप के साथ इसी तरह के दावों से जुड़े कुछ व्यक्तिगत मामलों में समझौता किया है। हालांकि, युवा यूजर्स को नुकसान पहुंचने के आरोपों को लेकर इन कंपनियों के खिलाफ लोगों, परिवारों और स्कूल जिलों की ओर से सैकड़ों मुकदमे अभी भी चल रहे हैं।

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डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन की आम बैठक में दो प्रस्ताव मंजूर, मुकेश जिंदल फिर बने डायरेक्टर

डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड की 21वीं सालाना आम बैठक (AGM) 25 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित हुई। कंपनी ने बताया कि AGM में रखे गए दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।

AGM दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। कंपनी ने शेयरधारकों को प्रस्तावों पर वोट करने के लिए रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग की सुविधा दी थी।

18 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के मुताबिक, कंपनी के कुल 84,624 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 41 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया। दस्तावेज के मुताबिक, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 शेयरधारकों की संख्या उनके पास मौजूद फोलियो की संख्या के आधार पर निकाली गई है।

पहला प्रस्ताव: वित्तीय नतीजों को मंजूरी

पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के कंपनी के ऑडिट किए गए वार्षिक वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,62,491 वोट पड़े, जबकि 604 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वैध वोटों में 99.999 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।

रिमोट ई-वोटिंग में 169 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में 7,86,62,486 वोट डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट प्रस्ताव के पक्ष में दिए। वहीं, रिमोट ई-वोटिंग में 15 सदस्यों ने 604 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले।

दूसरा प्रस्ताव: मुकेश जिंदल की दोबारा नियुक्ति

दूसरे प्रस्ताव में मुकेश जिंदल को कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव, नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र होने के चलते उन्होंने अपना नाम पेश किया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 7,86,61,161 वोट पड़े, जबकि 2,006 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल वोटों में 99.997 प्रतिशत वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।

रिमोट ई-वोटिंग में 165 सदस्यों ने 7,86,61,156 वोट प्रस्ताव के पक्ष में डाले, जबकि AGM के दौरान ई-वोटिंग में 3 सदस्यों ने 5 वोट पक्ष में दिए। वहीं, 19 सदस्यों ने 2,006 वोट प्रस्ताव के खिलाफ डाले। स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रस्ताव शेयरधारकों ने जरूरी बहुमत के साथ मंजूर कर दिए।

मीता पुष्पल संघवी थीं स्क्रूटिनाइजर

कंपनी ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच के लिए एमपी संघवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी की डिजाइनटेड पार्टनर मीता पुष्पल संघवी को स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया था।

शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग 22 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे शुरू हुई और 24 सितंबर 2026 को शाम 5 बजे समाप्त हुई। 18 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक शेयर रखने वाले वे सदस्य, जिन्होंने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान और AGM खत्म होने के 15 मिनट बाद तक ई-वोटिंग की सुविधा दी गई थी।

AGM खत्म होने के बाद 25 सितंबर को ई-वोटिंग के नतीजे खोले गए। स्क्रूटिनाइजर ने बताया कि यह प्रक्रिया दो ऐसे गवाहों की मौजूदगी में हुई, जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे।

 

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Google ने लॉन्च किए Gemini 3.8 Flash TTS और Flash-Lite TTS मॉडल

गूगल ने Google Cloud पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए AI मॉडल पेश किए हैं। इनमें कस्टम आवाज, अलग-अलग भाषाओं और बोलने की गति बदलने की सुविधा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 24 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2026
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गूगल (Google) ने अपने क्लाउड प्लेटफॉर्म (Cloud Platform) पर टेक्स्ट को आवाज में बदलने वाले दो नए एआई मॉडल (AI Models) जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस (Gemini 3.8 Flash TTS) और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस (Gemini 3.8 Flash-Lite TTS) पेश किए हैं। दोनों मॉडल लिखे हुए टेक्स्ट को आवाज में बदलने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कंपनी ने दोनों मॉडल को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है। फ्लैश-लाइट टीटीएस को कम खर्च और तेज काम के लिए बनाया गया है, जबकि फ्लैश टीटीएस बेहतर आवाज की गुणवत्ता पर फोकस करता है।

दोनों मॉडल में 2,000 से ज्यादा पहले से तैयार आवाजों का विकल्प मिलता है। डेवलपर्स अपनी जरूरत के हिसाब से नई आवाज भी बना सकते हैं। इसमें आवाज का टोन (Tone), एक्सेंट (Accent) और बोलने की गति बदली जा सकती है। 30 सेकंड के ऑडियो से भी नई आवाज तैयार की जा सकती है।

गूगल के मुताबिक, फ्लैश टीटीएस 130 भाषाओं में और फ्लैश-लाइट टीटीएस 101 भाषाओं में आवाज तैयार कर सकता है। इसके अलावा, आवाज को जरूरत के अनुसार बदलने की सुविधा भी मिलती है। डेवलपर्स यह तय कर सकते हैं कि कोई लाइन किस तरह और कितनी तेजी से बोली जाए।

गूगल एआई से तैयार की गई आवाज में खास वॉटरमार्क (Watermark) भी जोड़ता है। इसे इंसान सुन नहीं सकते, लेकिन कुछ एआई पहचानने वाले टूल (AI Detection Tools) इसे पहचान सकते हैं। कंपनी ऑडियो के साथ एक रिकॉर्ड भी देती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि फाइल कब बनाई गई थी।

जेमिनी 3.8 फ्लैश टीटीएस और जेमिनी 3.8 फ्लैश-लाइट टीटीएस गूगल क्लाउड पर डेवलपर्स के लिए उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल ऑडियोबुक (Audiobook), वॉयस एजेंट (Voice Agent) और दूसरे ऐप बनाने में किया जा सकता है। गूगल के मुताबिक, दोनों मॉडल की आवाज की गुणवत्ता को अलग-अलग परीक्षणों में जांचा गया है। दोनों मॉडल की कीमत अलग-अलग हो सकती है।

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IBDF ने CCI की कार्रवाई का पहली बार किया खुलासा, जांच जारी

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 23 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2026
IBDF895

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने पहली बार कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से मार्च 2025 में अपने नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड ऑफिस में की गई सर्च और सीजर कार्रवाई की जानकारी दी है। IBDF ने बताया कि यह मामला अभी जांच के स्तर पर है और CCI के डायरेक्टर जनरल (DG-CCI) ने संगठन से अब तक कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है।

यह जानकारी IBDF के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में दी गई है। इसके मुताबिक, CCI की जांच शाखा ने 18 मार्च 2025 को IBDF के रजिस्टर्ड ऑफिस में बिना किसी पूर्व सूचना के सर्च और सीजर की कार्रवाई की थी। इस दौरान IBDF को पता चला कि CCI में यह मामला Suo Motu Case No. 02 of 2024 के तौर पर दर्ज है।

यह खुलासा सर्च कार्रवाई के करीब 18 महीने बाद सामने आया है। मार्च 2025 में हुई इस कार्रवाई के समय IBDF, Advertising Agencies Association of India (AAAI) और Indian Society of Advertisers (ISA) ने सार्वजनिक तौर पर इस सर्च को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी।

IBDF के मुताबिक, इसके बाद संगठन ने बाहरी वकीलों की नियुक्ति की। इन वकीलों ने CCI के केस रिकॉर्ड की जांच के लिए इंस्पेक्शन रिक्वेस्ट दाखिल की। वकीलों की शुरुआती जांच के आधार पर IBDF ने बताया कि 9 अगस्त 2024 के CCI के एक आदेश में ISA, AAAI, उनके सदस्यों और IBDF के खिलाफ जांच का निर्देश दिया गया था। इसमें Competition Act, 2002 की Section 3 के प्रथम दृष्टया उल्लंघन की बात कही गई थी।

Competition Act की Section 3 ऐसे समझौतों से जुड़ी है, जिनका प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रतिकूल असर पड़ता है या पड़ने की संभावना होती है।

इंडस्ट्री संगठनों की गतिविधियों की भी जांच

CCI की जांच में यह देखा गया कि क्या ISA, AAAI और IBDF की ओर से जारी गाइडलाइंस, एडवाइजरी और व्यावसायिक तौर-तरीकों से प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। CCI ने खास तौर पर उन इंडस्ट्री दस्तावेजों और प्रथाओं की जांच की, जो विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और ब्रॉडकास्टर्स के बीच संबंधों से जुड़ी थीं।

इसके बाद CCI ने कई बड़े विज्ञापन और मीडिया एजेंसियों के दफ्तरों के साथ-साथ इन इंडस्ट्री संगठनों के दफ्तरों में भी सर्च की कार्रवाई की।

CCI की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि उसे कमीशन और अन्य व्यावसायिक शर्तों को लेकर समन्वय के शुरुआती सबूत मिले हैं। हालांकि, ये सभी बातें अभी जांच का हिस्सा हैं और इन्हें किसी अंतिम तौर पर जिम्मेदारी तय करने का निष्कर्ष नहीं माना गया है।

समन को लेकर अदालत में मामला

IBDF ने अपने खुलासे में CCI की जांच से जुड़ी कानूनी कार्यवाही का भी जिक्र किया है। संगठन ने बताया कि एक पक्ष ने दिल्ली हाई कोर्ट में संवैधानिक रिट याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने समन पर रोक लगा दी थी।

एक दूसरी संवैधानिक रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने भी समन पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक दिल्ली हाई कोर्ट संबंधित मामले पर फैसला नहीं करता।

IBDF ने यह भी बताया कि उसके कुछ कर्मचारियों को DG-CCI के सामने पेश होने के लिए समन मिले थे। संगठन ने इन समन को टालने की मांग करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही पूरी होने तक समन पर रोक रखी जाए। संगठन ने बताया कि वह फिलहाल DG-CCI के जवाब का इंतजार कर रहा है। 

IBDF ने साफ किया कि मामला अभी जांच के स्तर पर है और DG-CCI ने संगठन से आगे कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी है। इसी वजह से IBDF ने कहा कि इस मामले को लेकर अपने अलग फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई।

IBDF का यह खुलासा अब तक इस मामले में संगठन की भूमिका को लेकर सबसे स्पष्ट जानकारी देता है। इससे यह भी साफ होता है कि इंडस्ट्री संगठनों के खिलाफ CCI की कार्रवाई अभी किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है।

फिलहाल CCI की जांच जारी है और DG-CCI ने मामले में शामिल संस्थाओं के खिलाफ अपनी कार्यवाही पूरी नहीं की है। प्रतिस्पर्धा कानून का कोई उल्लंघन हुआ है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद CCI की ओर से किया जाएगा।

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ब्लिंक डिजिटल ने मेटा से मांगा 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हर्जाना

डिजिटल विज्ञापन एजेंसी ब्लिंक डिजिटल ने मेटा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर चार बिजनेस अकाउंट बहाल करने और 1,000 करोड़ से ज्यादा हर्जाने की मांग की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 22 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
meta

डिजिटल एडवरटाइजिंग एजेंसी ब्लिंक डिजिटल इंडिया (Blink Digital India) ने मेटा (Meta) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) का रुख किया है। एजेंसी ने अपने बिजनेस अकाउंट्स और कॉरपोरेट पेज बंद किए जाने को चुनौती देते हुए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने की मांग की है।

ब्लिंक डिजिटल ने फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज (Facebook India Online Services) और मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के खिलाफ कमर्शियल सूट (Commercial Suit) दायर किया है। इसमें चार बिजनेस मैनेजर (Business Manager) अकाउंट्स को बंद किए जाने को चुनौती देते हुए उन्हें बहाल करने की मांग की गई है।

मेटा का बिजनेस मैनेजर प्लेटफॉर्म विज्ञापन एजेंसियों को फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर कई क्लाइंट अकाउंट्स, एडवरटाइजिंग कैंपेन और बिजनेस पेज मैनेज करने की सुविधा देता है। इन अकाउंट्स के बंद होने से एजेंसियों के लिए कैंपेन मैनेजमेंट और क्लाइंट्स के एडवरटाइजिंग एसेट्स तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

यह मामला 17 सितंबर को जस्टिस संदीप वी. मार्ने (Justice Sandeep V. Marne) के सामने आया। मेटा की ओर से पेश वकील ने ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम अर्जी (Interim Application) का विरोध करने के लिए हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए मेटा का जवाब मिलने के बाद ब्लिंक डिजिटल को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह दिया। अंतरिम अर्जी पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे तय की गई है।

सुनवाई के दौरान मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास (Janak Dwarkadas) ने कहा कि अगली सुनवाई तक कंपनी कानून के मुताबिक ब्लिंक डिजिटल का डेटा सुरक्षित रखेगी। इस आश्वासन को 17 सितंबर के कोर्ट ऑर्डर में दर्ज किया गया है।

कोर्ट ने अभी तक अकाउंट बंद किए जाने की वैधता या ब्लिंक डिजिटल के हर्जाने के दावे पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगली सुनवाई में ब्लिंक डिजिटल की अंतरिम राहत की अर्जी पर विचार होगा, जबकि हर्जाने से जुड़ा मुख्य कमर्शियल सूट बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।

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