2026 की शॉर्ट वीडियो इकोनॉमी की यही असली तस्वीर है। एक तरफ व्युअरशिप और एंगेजमेंट रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म से मिलने वाला रेवेन्यू अभी भी सीमित है।
by
Vikas Saxena
शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की दुनिया में आज एक दिलचस्प ट्रेंड साफ दिखाई दे रहा है। Youtube Shorts जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों व्यूज हासिल करने के बावजूद क्रिएटर्स की सीधी कमाई अभी भी काफी सीमित है। लाखों से लेकर करोड़ों व्यूज पर भी आमतौर पर कमाई कुछ हजार रुपये तक ही सिमटी रहती है।
इसके उलट, Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म पर ब्रैंड्स की ओर से मिलने वाले स्पॉन्सर्ड डील्स में कहीं ज्यादा पैसा है। एक ही वीडियो के लिए क्रिएटर्स को दसियों हजार रुपये तक मिल रहे हैं, जो प्लेटफॉर्म की कमाई से कई गुना ज्यादा है।
2026 की शॉर्ट वीडियो इकोनॉमी की यही असली तस्वीर है। एक तरफ व्युअरशिप और एंगेजमेंट रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म से मिलने वाला रेवेन्यू अभी भी सीमित है। ऐसे में क्रिएटर्स की कमाई का मुख्य जरिया अब ब्रैंड डील्स बन चुका है, जहां हर प्लेटफॉर्म अपनी अलग रणनीति और अवसर लेकर सामने आ रहा है।
भारत में शॉर्ट वीडियो का विस्फोट- तस्वीर कितनी बड़ी है?
2026 में भारत शॉर्ट वीडियो का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। YouTube India पर अकेले 50 करोड़ यूजर्स हैं, जोकि दुनिया में सबसे ज्यादा (Statista, October 2025) हैं। Youtube Shorts दुनिया भर में 200 बिलियन व्यूज प्रतिदिन बना रहा है- YouTube के CEO नील मोहन ने पहली बार जून 2025 में Cannes Lions Festival में इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी थी। इसके बाद 21 जनवरी 2026 को अपने YouTube ब्लॉग में इसे फिर से कन्फर्म किया। इसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 25% है, यानी इस मामले में भारत सबसे आगे है।
Instagram पर भारत में 40 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं (DataReportal, April 2026) और IPSOS Survey के अनुसार Instagram Reels भारत में सबसे लोकप्रिय शॉर्ट फॉर्म वीडियो फार्मेट है। Moj (ShareChat का प्लेटफॉर्म) और Josh मिलाकर देश के Tier 2-3 शहरों में 35 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स तक पहुंच रखते हैं।
FICCI-EY 2026 रिपोर्ट (मार्च 2026) के अनुसार भारत में ऑनलाइन वीडियो व्युअर्स की संख्या 57.2 करोड़ तक पहुंच चुकी है। Dentsu की Digital Advertising Report 2026 (फरवरी 2026) बताती है कि देश का Online Video Advertising 2025 में ₹20,004 करोड़ का हो चुका है- जो कुल Digital Advertising का 28% है।
इस विशाल बाजार में तीन तरह के खिलाड़ी हैं: Youtube Shorts (Google का), Instagram Reels (Meta का), और Moj (भारत का अपना)। तीनों के मॉनेटाइजेशन मॉडल बिल्कुल अलग हैं और ब्रैंड्स के लिए हर प्लेटफॉर्म का ROI भी अलग।
Youtube Shorts- सबसे बड़ा स्टेज, सबसे छोटा चेक
CPM और Creator Payouts की हकीकत:
YouTube Shorts पर कमाई का तरीका थोड़ा अलग है। यहां सभी Shorts Ads से आने वाला पैसा एक Pool में जाता है, और फिर क्रिएटर्स को उनके व्यूज के हिसाब से हिस्सा मिलता है। इसमें से पहले म्यूजिक का खर्च कटता है, फिर क्रिएटर को करीब 45% हिस्सा मिलता है (जबकि Long Video में 55% मिलता है)।
अब बात कमाई की- Shorts पर 1,000 व्यूज के लिए सिर्फ $0.03 से $0.10 मिलते हैं। यानी 10 लाख व्यूज पर करीब ₹2,500 से ₹8,400 ही बनते हैं। वहीं Long Videos में यही कमाई करीब 30–60 गुना ज्यादा होती है।
भारत में यह कमाई और भी कम है। यहां 1,000 व्यूज पर करीब ₹5 से ₹30 मिलते हैं। मतलब यदि किसी वीडियो पर 1 करोड़ व्यूज भी आ जाएं, तो कमाई सिर्फ ₹5,000 से ₹30,000 तक ही रहती है।
YPP (YouTube Partner Program) की जरूरत: YouTube Shorts से कमाई शुरू करने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इसके लिए 1,000 सब्सक्राइबर्स जरूरी हैं। साथ ही या तो 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज होने चाहिए, या फिर Long Videos के जरिए 4,000 घंटे का वॉच टाइम पूरा होना चाहिए।
ब्रैंड्स के लिए Youtube Shorts का CPM: ब्रैंड्स की बात करें तो शॉर्ट्स पर उनका खर्च भी कम होता है। यहां विज्ञापनदाता हर व्यू के लिए करीब $0.10 से $0.30 तक देते हैं। यह Long YouTube Videos के मुकाबले कम है, जहां प्रति व्यू $0.50 से $3 तक मिल सकता है। लेकिन शॉर्ट्स का फायदा इसका बहुत बड़ा स्केल है, जहां व्यूज करोड़ों में आते हैं।
Youtube Shorts बनाम Long Form- एक स्पष्ट फैसला:
Inventiva (फरवरी 2026) की रिपोर्ट के मुताबिक YouTube की सबसे बड़ी ताकत है लंबा एंगेजमेंट टाइम। यानी 10 मिनट का वीडियो किसी 30 सेकंड की Reel के मुकाबले ब्रैंड को ज्यादा यादगार बनाता है। खासकर Finance, Tech और Education जैसे सेक्टर में YouTube पर वीडियो लंबे समय तक सर्च में दिखते रहते हैं, क्योंकि यह सिर्फ वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं, एक सर्च इंजन भी है।
upGrowth (अप्रैल 2026) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ब्रैंड डील के रेट कुछ इस तरह हैं:
Instagram Reels- ब्रैंड डील्स में आगे, डायरेक्ट अर्निंग में पीछे
Instagram Reels की कहानी Youtube Shorts से एकदम उलटी है। प्लेटफॉर्म सीधे तो लगभग कुछ नहीं देता, लेकिन ब्रैंड डील्स (Brand Deals) के लिए यह अब भी सबसे प्रीमियम प्लेटफॉर्म है।
Reels Play Bonus का अंत:
Instagram का Reels Play Bonus Program, जो 2021 में शुरू हुआ था और व्यूज के आधार पर क्रिएटर्स को पैसा देता था, मार्च 2023 से नए क्रिएटर्स के लिए बंद कर दिया गया। अब मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। Instagram ने माना कि सीधे पैसे देने वाला मॉडल ज्यादा बड़ा नहीं बन पाया, इसलिए अब कंपनी क्रिएटर्स की कमाई को Brand Deals और Partnerships की तरफ बढ़ा रही है।
Direct Ad Revenue की हकीकत:
Instagram Reels पर जो प्लेटफॉर्म से सीधी कमाई होती है, वह काफी कम है। Ads Program के तहत 1,000 व्यूज पर करीब $0.01 से $0.10 मिलते हैं। यानी 10 लाख व्यूज पर लगभग ₹8,400 से ₹50,000 तक की कमाई हो सकती है। लेकिन यह सुविधा सभी के लिए नहीं है- यह सिर्फ Invite-Only है और भारत में बहुत कम क्रिएटर्स तक पहुंची है।
fluxnote.io के March 2026 के India-specific Analysis के अनुसार, भारत में रील्स पर प्रति व्यू कमाई $0.002 से $0.008 के बीच रहती है, जबकि अमेरिका में यह $0.01 से $0.05 तक होती है। यानी भारतीय क्रिएटर्स को अमेरिकी क्रिएटर्स के मुकाबले करीब 5–10 गुना कम पैसा मिलता है।
Brand Deals में Reels का दबदबा:
upGrowth की April 2026 Influencer Pricing Report के अनुसार, India में Instagram Brand Deal Rates:
Instagram Reels पर ब्रैंड डील की कमाई फॉलोअर्स के हिसाब से बढ़ती है।
10 हजार से 1 लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर एक Reel के लिए करीब ₹15,000 से ₹80,000 तक लेते हैं।
1 लाख से 5 लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर की फीस ₹75,000 से ₹3.5 लाख तक होती है।
वहीं 5 लाख से 20 लाख फॉलोअर्स वाले बड़े क्रिएटर एक Reel के लिए ₹2.5 लाख से ₹8 लाख तक चार्ज करते हैं।
अगर ब्रैंड को “Whitelisting Rights” भी दिए जाते हैं (यानि ब्रैंड उस कंटेंट को अपने एड्स में इस्तेमाल कर सकता है), तो यही रकम 1.5 से 2 गुना तक बढ़ जाती है।
Instagram Reels की Reach:
Instagram Reels का एल्गोरिद्म वीडियो को करीब 72 घंटों के अंदर तेजी से वायरल करने में मदद करता है। Explore Page के जरिए यह कंटेंट को उन लोगों तक भी पहुंचाता है जो आपको फॉलो नहीं करते- यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, Sprout Social और Hootsuite (2025) के मुताबिक Instagram का कुल औसत एंगेजमेंट रेट घटकर 0.50% रह गया है। इसलिए Reels को सबसे बेहतर तरीके से “Discovery Tool” यानी नए लोगों तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन एक कमी यह है कि Reels में Direct Purchase Links का सपोर्ट नहीं है, इसलिए सीधी कन्वर्जन (conversion) के मामले में यह YouTube Shorts से थोड़ा पीछे रह जाता है।
वहीं Loopexdigital.com के Q1 2026 के आंकड़ों के अनुसार YouTube Shorts की एंगेजमेंट रेट 5.91% है, जो शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स में सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद ब्रैंड डील्स के मामले में रील्स अभी भी आगे है, क्योंकि यहां की ऑडियंस ज्यादा Urban और Aspirational मानी जाती है, जिसे प्रीमियम ब्रैंड्स ज्यादा पसंद करते हैं।
Moj – देसी प्लेटफॉर्म, लोकल ऑडियंस और नया एक्सपेरिमेंट
Moj पर 15 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में कंटेंट बनाया और देखा जाता है। इसकी ऑडियंस का बड़ा हिस्सा हिंदी, तमिल, तेलुगु और बंगाली जैसे क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट पसंद करता है। खास बात यह है कि Tier-2, Tier-3 शहरों और गांवों में इसकी पहुंच कई बड़े प्रीमियम प्लेटफॉर्म्स से भी ज्यादा है।
मॉनेटाइजेशन मॉडल:
Moj का सीधे Ads से कमाई वाला सिस्टम अभी YouTube जितना मजबूत नहीं है। यहां क्रिएटर्स ज्यादातर तीन तरीकों से कमाते हैं- ब्रैंड डील्स, Moj Creator League (जहां हफ्ते में ₹5 लाख तक का प्राइज पूल मिलता है) और लाइव स्ट्रीम के दौरान मिलने वाले वर्चुअल गिफ्ट्स।
Moj का 2026 का सबसे बड़ा कदम:
जनवरी 2026 में Moj ने Micro Drama Challenge लॉन्च किया। यह एक तरह का Accelerator Program है, जिसके लिए कंपनी ने सालाना ₹20 करोड़ का बजट रखा है। इसके तहत 10 चुने हुए स्टूडियो को ₹10 लाख-₹10 लाख का ग्रांट दिया गया, ताकि वे Vertical Micro Drama Series बना सकें। हर सीरीज कम से कम 1 घंटे की होगी और हर एपिसोड 1–2 मिनट का होगा। यह भारत का पहला ऐसा संगठित क्रिएटर फंड है, जो खास तौर पर Short Form Drama पर फोकस कर रहा है।
ब्रैंड्स के लिए Moj का Value:
Moj और Josh पर एक माइक्रो इन्फ्लुएंसर (5K-50K Followers) का Sponsored Post ₹5,000-₹30,000 में मिलता है- जो Instagram पर उसी Tier के क्रिएटर से 40-60% सस्ता है। FMCG, Telecom, और सरकारी कैंपेंस के लिए Moj एक Cost-Effective High Reach प्लेटफॉर्म है।
Case Study: IPL और Viral Campaigns में शॉर्ट वीडियो का रोल
IPL 2026 में शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और प्लानिंग के साथ किया गया।
JioHotstar के आंकड़ों के मुताबिक IPL 2026 के ओपनिंग वीकेंड पर टीवी और डिजिटल मिलाकर करीब 51.5 करोड़ दर्शक जुड़े। इस दौरान Fantasy Gaming Apps, FMCG ब्रैंड्स और टेलीकॉम कंपनियों ने नई मल्टी-प्लेटफॉर्म रणनीति अपनाई- YouTube Shorts पर लंबे समय तक दिखने वाला कंटेंट, Instagram Reels पर 72 घंटे का वायरल पुश, और Moj पर क्षेत्रीय (vernacular) ऑडियंस तक पहुंच।
Otbox Media Solutions (फरवरी 2026) की एक केस स्टडी में सामने आया कि जिन ब्रैंड्स ने हफ्ते में 3 Reels और 1 YouTube Short की रणनीति अपनाई, उन्हें 8 हफ्तों में करीब 25% तक बिक्री में बढ़ोतरी मिली।
सिर्फ ब्रैंड्स ही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी शॉर्ट वीडियो का जमकर इस्तेमाल हुआ था। खासकर क्षेत्रीय पार्टियों ने Moj और Josh जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन इलाकों तक पहुंच बनाई, जहां Instagram की पहुंच कम थी। 2026 में यह ट्रेंड और मजबूत होता दिख रहा है।
भारत का Influencer Marketing बाजार- 2026 का आँकड़ा
भारत में Influencer Marketing का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में यह करीब ₹2,200 करोड़ था, जो 2025 में ₹2,850 करोड़ और 2026 में बढ़कर ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यानी करीब 25% की सालाना ग्रोथ, जो पारंपरिक डिजिटल विज्ञापन (12–15%) से कहीं ज्यादा है (Otbox Media Solutions, नवंबर 2025)।
इस बाजार में ब्रैंड्स अपना बजट अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस तरह खर्च कर रहे हैं (upGrowth, अप्रैल 2026):
Dentsu Digital Advertising Report 2026 के मुताबिक, टीवी का एड शेयर लगातार घट रहा है। 2024 में जहां यह 28% था, वहीं 2025 में घटकर 21% (₹25,964 करोड़) रह गया। इसका साफ मतलब है कि बड़े विज्ञापनदाता अब तेजी से डिजिटल और खासकर शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ रहे हैं।
तीन प्लेटफॉर्म्स की चुनौतियां-
Youtube Shorts की समस्या: YouTube Shorts से सीधी कमाई इतनी कम है कि ज्यादातर क्रिएटर्स इसे सिर्फ ग्रोथ का जरिया मानते हैं, कमाई का नहीं। उदाहरण के तौर पर, 1 करोड़ व्यूज पर Shorts से सिर्फ ₹5,000 से ₹30,000 तक मिलते हैं, जबकि उसी रीच के लिए एक ब्रैंड डील ₹5 लाख तक दे सकती है। यानी कमाई में 15 से 100 गुना तक का फर्क है और यही बात कई क्रिएटर्स के लिए निराशा की वजह बन रही है।
Moj की समस्या: Moj का मोनेटाइजेशन सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। यहां ब्रैंड डील्स का नेटवर्क भी उतना मजबूत नहीं है। साथ ही, क्रिएटर्स के लिए सही और भरोसेमंद डेटा (third-party verified tools) की कमी है, जिससे ब्रैंड्स यहां बड़े स्तर पर निवेश करने में हिचकते हैं।
Moj फिलहाल बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच बनाने का प्लेटफॉर्म है, लेकिन प्रीमियम कमाई के लिए अभी उतना मजबूत नहीं माना जाता।
पूरे Ecosystem की समस्या: भारत का CPM- Cost Per Mille (यानी 1,000 व्यूज या इम्प्रेशन पर विज्ञापनदाता कितना पैसा देता है) दुनिया में सबसे कम है। ऑस्ट्रेलिया का Average YouTube CPM $36.21 है, US का $32.75- जबकि भारत का $0.70-$0.83 है। इसका मतलब है कि 50 करोड़ यूट्यूब यूजर्स होने के बावजूद भारतीय क्रिएटर्स को वैश्विक स्तर पर बेहद कम कीमत मिलती है। अमेरिका के मुकाबले लगभग 40-50 गुना कम।
भविष्य की दिशा- 2026 के बाद क्या होगा?
YouTube का दांव: YouTube Shorts पर दिखने वाले Vertical Video Ads, Long Videos के मुकाबले 10–20% ज्यादा कन्वर्जन दे रहे हैं। इसके साथ ही Connected TV (CTV) पर Shorts देखने वालों की संख्या एक साल में दोगुनी हो गई है, यानी लोग अब टीवी पर भी शॉर्ट वीडियो ज्यादा देखने लगे हैं। वहीं YouTube ने अपने Partner Program के जरिए अब तक क्रिएटर्स को $100 बिलियन से ज्यादा का कुल भुगतान किया है, जो किसी भी दूसरे क्रिएटर प्लेटफॉर्म से ज्यादा है।
Instagram का दांव: Meta ने Reels को अब E-commerce से और ज्यादा जोड़ दिया है। Instagram Shopping, Collab Shops और Allowlisting जैसे फीचर्स के जरिए कमाई के नए रास्ते बन रहे हैं, जहां ब्रैंड सीधे क्रिएटर के अकाउंट से Ads भी चला सकते हैं।
Moj का दांव: माइक्रो ड्रामा फॉर्मेट भारत में तेजी से एक नया कंटेंट सेगमेंट बनता जा रहा है। FICCI-EY 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2028 तक इसका मार्केट करीब ₹2,300 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कौन जीत रहा है असली मॉनेटाइजेशन की जंग?
YouTube Shorts, Instagram Reels और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म में से कोई एक अकेला “सबसे आगे” नहीं है। असल में ये तीनों मिलकर एक नई डिजिटल इकोनॉमी बना रहे हैं।
क्रिएटर के नजरिए से:
ब्रैंड के नजरिए से:
शॉर्ट वीडियो अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे एक मजबूत कमर्शियल (व्यापार) प्लेटफॉर्म बन चुका है। आज इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का बाजार करीब ₹3,375 करोड़ तक पहुंच चुका है। वहीं ऑनलाइन वीडियो एड स्पेंड भी लगभग ₹20,004 करोड़ के स्तर पर है। इसके साथ ही भारत में करीब 57.2 करोड़ वीडियो व्यूअर्स हैं, जो इस इकोसिस्टम की बड़ी ताकत दिखाते हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में वही प्लेटफॉर्म आगे रहेगा जो क्रिएटर्स को बेहतर कमाई देगा, ब्रैंड्स को ज्यादा बेहतर रिजल्ट (ROI) देगा और भारत के हर छोटे-बड़े इलाके तक अपनी पहुंच बना सकेगा।
Yaap Digital Limited ने Gozoop Online Private Limited के अधिग्रहण से जुड़े भुगतान के तहत ₹12 करोड़ की राशि चुका दी है।
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Vikas Saxena
Yaap Digital Limited ने Gozoop Online Private Limited के अधिग्रहण से जुड़े भुगतान के तहत ₹12 करोड़ की राशि चुका दी है। कंपनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह रकम Gozoop के बेचने वाले शेयरधारकों को दी गई है।
कंपनी के मुताबिक, यह भुगतान अतिरिक्त शुद्ध कार्यशील पूंजी (Excess Net Working Capital यानी ENWC) के मद में किया गया है। यह राशि Gozoop के अधिग्रहण के पहले चरण यानी ट्रेंच-1 (Tranche 1) से जुड़ी है।
पूरा हुआ ₹12 करोड़ का भुगतान
Yaap Digital ने बताया कि 30 मार्च, 2026 को हुए शेयर खरीद और शेयरधारक समझौते (Share Purchase and Shareholders Agreement) की शर्तों के अनुसार यह भुगतान किया गया है। इसी समझौते के तहत कंपनी ने Gozoop के अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।
कंपनी के अनुसार, इस भुगतान के साथ ट्रेंच-1 अधिग्रहण के लिए बेचने वाले शेयरधारकों को देय अतिरिक्त शुद्ध कार्यशील पूंजी की पूरी ₹12 करोड़ की राशि चुका दी गई है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने आंशिक भुगतान वाले वारंट धारकों के लिए पहली और अंतिम किस्त के भुगतान का नोटिस जारी किया है।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने आंशिक भुगतान वाले वारंट धारकों के लिए पहली और अंतिम किस्त के भुगतान का नोटिस जारी किया है। कंपनी ने हर वारंट पर ₹5 का भुगतान करने को कहा है। इसके लिए भुगतान की अवधि 6 नवंबर से 20 नवंबर, 2026 तक तय की गई है।
कंपनी के मुताबिक, यह भुगतान उन वारंटों के लिए मांगा गया है, जिन्हें 19 अगस्त, 2026 को जारी ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू के माध्यम से जारी किया गया था। इस भुगतान के लिए वही धारक पात्र होंगे, जिनके नाम 15 अक्टूबर, 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में दर्ज थे।
इस कॉरपोरेट कार्रवाई को पूरा करने के लिए इन वारंटों में शेयर बाजारों पर कारोबार 16 अक्टूबर, 2026 से रोक दिया गया था।
20 नवंबर तक करना होगा भुगतान
कंपनी ने वारंट धारकों को तय समयसीमा के भीतर बकाया राशि जमा करने को कहा है। भुगतान में देरी होने पर 10 फीसदी सालाना की दर से ब्याज लग सकता है। यह ब्याज 21 नवंबर, 2026 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक लागू होगा, जब तक कि कंपनी इसे माफ नहीं करती।
कंपनी ने साफ किया है कि तय समय में भुगतान नहीं करने या केवल कुछ राशि जमा करने को भुगतान में चूक माना जाएगा।
भुगतान नहीं करने पर जब्त हो सकते हैं वारंट
कंपनी की ओर से जारी शर्तों के मुताबिक, अगर कोई धारक तय राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसके आंशिक भुगतान वाले वारंट जब्त किए जा सकते हैं। इसमें पहले जमा की गई ₹5 प्रति वारंट की राशि भी जब्त होने का जोखिम है।
आंशिक भुगतान को भी पूरा भुगतान नहीं माना जाएगा। इसलिए वारंट धारकों को निर्धारित समयसीमा में पूरी बकाया राशि जमा करनी होगी।
भुगतान के बाद इक्विटी शेयरों में बदलेंगे वारंट
कंपनी के अनुसार, पहली और अंतिम मांग की गई राशि का सफलतापूर्वक भुगतान होने के बाद आंशिक भुगतान वाले वारंट पूरी तरह भुगतान किए गए इक्विटी शेयरों में बदल जाएंगे। इन शेयरों का अंकित मूल्य ₹10 प्रति शेयर होगा।
भुगतान की अंतिम तारीख के बाद दो सप्ताह के भीतर शेयर आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद शेयर संबंधित धारकों के डीमैट खातों में जमा किए जाएंगे और शेयर बाजारों में कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे।
कंपनी ने यह भी कहा है कि भुगतान वारंट धारक के अपने बैंक खाते से किया जाना चाहिए। किसी तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते से किया गया भुगतान अस्वीकार किया जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है।
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Vikas Saxena
वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने एनडीटीवी इंडिया (NDTV India) से विदाई ले ली है। करीब 19 साल तक इस संस्थान से जुड़े रहने के बाद अब उन्होंने अपना नया सफर शुरू करने का फैसला किया है। 'समाचार4मीडिया' से राजीव रंजन ने बताया कि वह अपने यूट्यूब चैनल (BharatDefX) के जरिए दर्शकों से जुड़ेंगे। उन्होंने एक संदेश के जरिए एनडीटीवी छोड़ने के फैसले और अपने पत्रकारिता के सफर के बारे में जानकारी दी है।
राजीव रंजन ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ समय से चीजें वैसी नहीं चल रही थीं, जैसी उन्हें चलनी चाहिए थीं। ऐसे में जब उन्हें लगा कि आगे बढ़ने का सही समय आ गया है, तो उन्होंने एनडीटीवी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने दिसंबर 2007 में एनडीटीवी जॉइन किया था और तब से वह रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और देश की राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर कर रहे थे।
एनडीटीवी के साथ रहा करीब 19 साल का सफर
राजीव रंजन ने एनडीटीवी के साथ अपने लंबे सफर को याद करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब इस संस्थान से जुड़ना कई पत्रकारों का सपना हुआ करता था। हालांकि, उनका मानना है कि हर सफर का एक पड़ाव होता है और अब उनके लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है।
उन्होंने अपने संदेश में दर्शकों के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताया। उनके मुताबिक, पत्रकारिता के इस लंबे सफर में उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिले, लेकिन दर्शकों का लगातार मिलता रहा भरोसा उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।
विनोद दुआ के मार्गदर्शन में शुरू किया पत्रकारिता का सफर
राजीव रंजन ने बताया कि पत्रकारिता में उनकी शुरुआत 30 साल से भी पहले हुई थी। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के मार्गदर्शन में 'परख' और 'न्यूज वेव' जैसे कार्यक्रमों के लिए रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन के लिए 'परसेप्शन' और 'खोज खबर' जैसे खोजी कार्यक्रमों में काम किया।
इसके बाद वह एशिया न्यूज इंटरनेशनल (ANI) से जुड़े और जम्मू-कश्मीर से रिपोर्टिंग की। यह उनके करियर का एक चुनौतीपूर्ण दौर था। बाद में उन्होंने सहारा समय में रक्षा और गृह मंत्रालय से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने 'डिफेंस डायरी' नाम का साप्ताहिक कार्यक्रम भी तैयार किया।
दिसंबर 2007 में एनडीटीवी इंडिया से जुड़ने के बाद उन्होंने रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, संसद और राजनीति से जुड़ी कई अहम खबरों को कवर किया।

'वतन के रखवाले' रहा यादगार कार्यक्रम
राजीव रंजन के पत्रकारिता करियर का एक खास पड़ाव 'वतन के रखवाले' कार्यक्रम रहा। इस कार्यक्रम के जरिए उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के जीवन और उनके कामकाज को दर्शकों के सामने पेश किया। उन्होंने इस कार्यक्रम के 100 एपिसोड तैयार किए और उन्हें होस्ट भी किया।
राजीव रंजन के मुताबिक, यह उनके पत्रकारिता जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें एनटी अवॉर्ड, ईएनबीए अवॉर्ड और चंद्रशेखर सम्मान समेत कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
नए मंच पर भी निष्पक्ष पत्रकारिता का वादा
अपने नए सफर को लेकर राजीव रंजन ने कहा कि मंच और काम करने का अंदाज नया होगा, लेकिन निष्पक्ष पत्रकारिता के बुनियादी उसूल नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना, तथ्यों की पड़ताल करना और खबरों के पीछे की सच्चाई दर्शकों तक पहुंचाना आगे भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने दर्शकों से आगे भी अपना साथ बनाए रखने की अपील की। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति जैसे विषयों पर लंबे समय तक रिपोर्टिंग करने वाले राजीव रंजन अपने नए यूट्यूब चैनल के जरिए किस तरह की खबरें और विश्लेषण दर्शकों के सामने लाते हैं।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी।
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Samachar4media Bureau
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकार किसी सोशल मीडिया यूजर के कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए किसी सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजती है, तो उस नोटिस की कॉपी यूजर को भी तुरंत देनी होगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने और यूजर को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए जरूरी है।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में यह साफ तौर पर नहीं लिखा है कि सरकार को सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले प्रभावित यूजर को इसकी जानकारी देनी होगी। हालांकि, कोर्ट के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत कंपनी को भेजे गए नोटिस की कॉपी यूजर को देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत जरूरी है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “इसलिए, जब सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजा जाए, उसी समय उसकी एक कॉपी यूजर को भी दी जानी चाहिए।”
क्या है पूरा मामला?
हाई कोर्ट हरियाणा 24 न्यूज नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। कंपनी ने भारत में अपने फेसबुक पेज को ब्लॉक किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। यह पेज हरियाणा पुलिस की ओर से मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत भेजे गए नोटिस के बाद ब्लॉक किया गया था।
कंपनी का फेसबुक पेज 21 अगस्त, 2026 को ब्लॉक कर दिया गया था। कंपनी ने अदालत में कहा कि उसे न तो पहले कोई नोटिस दिया गया और न ही मेटा को भेजे गए नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराई गई। इस वजह से उसे यह पता ही नहीं चला कि पेज ब्लॉक करने के पीछे क्या कारण थे और इसके लिए किन तथ्यों या सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।
एसपी के नोटिस जारी करने पर भी उठे सवाल
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कंपनी के एक निदेशक पर एक आपराधिक मामले में आरोपी होने का आरोप है। सरकार के मुताबिक, वह फेसबुक पेज के जरिए वीडियो पोस्ट कर रहा था और संदेश भेजकर कथित तौर पर पीड़ित तथा गवाहों को डराने की कोशिश कर रहा था। इसी आधार पर यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मेटा को फेसबुक पेज की पहुंच बंद करने के लिए नोटिस भेजा था।
हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि यह नोटिस पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी किया गया था, जबकि 2021 के नियमों के तहत ऐसे नोटिस जारी करने के लिए कम से कम पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक के अधिकारी का अधिकृत होना जरूरी है।
नियमों के मुताबिक, संबंधित सरकार की ओर से विशेष रूप से अधिकृत ऐसा पुलिस अधिकारी, जो डीआईजी रैंक से नीचे का न हो, पुलिस प्रशासन की तरफ से इस तरह का नोटिस जारी कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का न्यूनतम पद तय किया गया है, तो इस अधिकार को उससे नीचे के पद के अधिकारी को नहीं सौंपा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने माना कि संबंधित नोटिस अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था।
शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए कार्रवाई की जानकारी जरूरी
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कंपनी को अपना फेसबुक पेज दोबारा शुरू कराने के लिए मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था का सहारा लेना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि 2021 के नियमों का नियम 3(2) यूजर्स को शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था देता है। लेकिन इस व्यवस्था का सही तरीके से इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब प्रभावित यूजर को यह पता हो कि उसका कंटेंट किस आधार पर ब्लॉक किया गया है।
अदालत के मुताबिक, मेटा के शिकायत अधिकारी के सामने फैसले के बाद सुनवाई के दौरान यूजर को संबंधित नोटिस, उसमें लिखे कारणों और नोटिस जारी करने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की जानकारी होनी चाहिए। इसके बिना यूजर अपना बचाव नहीं कर पाएगा और शिकायत निवारण व्यवस्था का मकसद भी पूरा नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत अपनाई जाने वाली हर प्रक्रिया निष्पक्ष और उचित होनी चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का पालन जरूरी है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भी शामिल है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले माध्यमम ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड बनाम भारत संघ का भी हवाला दिया। हाई कोर्ट ने दोहराया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और पक्षपात के खिलाफ अधिकार प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांत हैं।
कोर्ट ने कहा कि भले ही नियम 3(2) में सरकार की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजने से पहले यूजर को जानकारी देने की स्पष्ट शर्त नहीं है, लेकिन नोटिस की कॉपी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को इस नियम का हिस्सा माना जाना चाहिए।
इस मामले में कंपनी को न तो पुलिस और न ही मेटा की ओर से नोटिस की कॉपी मिली थी। इस तरह उसे फेसबुक पेज ब्लॉक किए जाने की कार्रवाई के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी को केवल मेटा की शिकायत निवारण व्यवस्था के पास जाने के लिए कहना बेअसर होगा और इससे अपना पक्ष रखने के उसके अधिकार पर गंभीर असर पड़ेगा।
फेसबुक पेज बहाल करने का आदेश
हाई कोर्ट ने 21 अगस्त, 2026 को यमुनानगर के पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी मेटा को कंपनी का फेसबुक पेज पहले की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दें।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार को लगता है कि कंपनी के फेसबुक पेज पर मौजूद कोई जानकारी या कंटेंट कानून के तहत प्रतिबंधित है और उसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो अधिकृत अधिकारी की ओर से सोशल मीडिया कंपनी को भेजे जाने वाले किसी भी नोटिस की कॉपी कंपनी को तुरंत उपलब्ध करानी होगी।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी कंपनी Quint Digital Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार बढ़त दर्ज की है। कंपनी का जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 372 प्रतिशत बढ़कर 36.78 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने इस तिमाही में ब्याज लागत और कुछ गैर-नकद खर्चों को समायोजित करने के बाद 5.67 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है।
कंपनी ने 19 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे साझा किए। कंपनी के मुताबिक, उसकी कारोबारी रणनीति में बदलाव, मीडिया-टेक्नोलॉजी कारोबार की बढ़त और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों की मांग से कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
पहली छमाही में 354% बढ़ा राजस्व
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान Quint Digital का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 354 प्रतिशत बढ़कर 71.57 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में ब्याज लागत और कुछ अन्य खर्चों को समायोजित करने के बाद कंपनी का लाभ 10.62 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने बताया कि वह अपने कारोबार को वैश्विक मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई आधारित मंच के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है। इसके तहत मीडिया, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी और अनुभव आधारित कारोबार में विस्तार किया जा रहा है।
Quintype बना कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार
कंपनी के मुताबिक, Quintype उसके कारोबार की बढ़त का प्रमुख आधार बना हुआ है। यह मंच एआई आधारित मीडिया-टेक्नोलॉजी समाधान उपलब्ध कराता है और दुनियाभर में अपने संस्थागत ग्राहकों का दायरा बढ़ा रहा है।
दूसरी तिमाही में Quintype के मीडिया-टेक कारोबार से 34.3 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। वहीं, पहली छमाही में इस कारोबार का राजस्व 67.13 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी का कहना है कि उसके एआई आधारित मीडिया-टेक मंच को वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। इससे कारोबार का विस्तार करने और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।
दिल्ली में दिसंबर में शुरू होगा Time Out Market
Quint Digital अपने कारोबार को डिजिटल मीडिया और टेक्नोलॉजी से आगे बढ़ाकर हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन के क्षेत्र में भी विस्तार दे रही है। इसी रणनीति के तहत कंपनी नई दिल्ली के एयरोसिटी स्थित वर्ल्डमार्क में दिसंबर 2026 में भारत का पहला Time Out Market शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इस केंद्र में खाने-पीने से जुड़े 11 चुने हुए कॉन्सेप्ट, दो खास बार, लाइव मनोरंजन और पूरे साल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य लोगों को एक ही जगह पर खानपान, संस्कृति और मनोरंजन का अनुभव देना है।
कंपनी ने इस परियोजना के लिए छह रणनीतिक खानपान साझेदारियां भी हासिल की हैं। इनमें Chard, Mizu, Bhawan, Delhi Food Walks और Levonne शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, अन्य प्रमुख साझेदारियों पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है। Mizu के साथ इस परियोजना के संबंध में रियायत समझौता किए जाने का प्रस्ताव है।
Lee Enterprises के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर
Quint Digital ने अमेरिकी मीडिया कंपनी Lee Enterprises में अपने निवेश को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। कंपनी इस साझेदारी को और मजबूत करने तथा भविष्य में कारोबार की बढ़त के नए अवसर तलाशने पर ध्यान दे रही है।
Lee Enterprises अमेरिका के 25 राज्यों के 72 बाजारों में स्थानीय समाचार और विज्ञापन सेवाएं देती है। कंपनी के पास करीब 350 डिजिटल मंच और प्रिंट प्रकाशन हैं। Quint Digital की इसमें महत्वपूर्ण अल्पांश हिस्सेदारी है।
इसके अलावा, Quint Digital ने न्यूयॉर्क स्थित सोशल मीडिया और डिजिटल विश्लेषण मंच ListenFirst Media का अधिग्रहण किया है। इससे कंपनी को एआई आधारित दर्शक विश्लेषण और लोगों की भागीदारी को समझने की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राइट्स इश्यू से जुटाए 90.87 करोड़ रुपये
कंपनी ने बताया कि उसने राइट्स इश्यू के जरिए 90.87 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस इश्यू को मौजूदा सार्वजनिक शेयरधारकों ने पूरी तरह सब्सक्राइब किया। इश्यू के आकार के मुकाबले 1.09 गुना बोलियां मिलीं।
कंपनी के मुताबिक, जुटाई गई रकम से भविष्य के कारोबारी कामकाज को समर्थन मिलेगा। Quint Digital का कहना है कि वह अपने कारोबार को विस्तार देने, परिचालन क्षमता बेहतर बनाने और लंबी अवधि में मूल्य बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
Quint Digital के कारोबार में क्या-क्या शामिल है?
Quint Digital के प्रमुख डिजिटल मीडिया ब्रैंड्स में The Quint, The News Minute, Youth Ki Awaaz और Kisan India शामिल हैं। कंपनी का प्रमुख समाचार मंच The Quint वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। वहीं, Quintype का संपादकीय मंच दुनियाभर में 300 से अधिक प्रकाशकों को सामग्री तैयार करने से जुड़े समाधान उपलब्ध कराता है।
कंपनी बीएसई में सूचीबद्ध है और उसके शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार की अनुमति वाली श्रेणी में भी शामिल किया गया है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में Quint Digital के राजस्व में तेज बढ़त दर्ज की गई है। कंपनी अब मीडिया-टेक्नोलॉजी और एआई कारोबार के साथ हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी कर रही है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की योजनाओं और कारोबारी प्रदर्शन से जुड़े अनुमान कई बाजार और नियामकीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
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Samachar4media Bureau
कैसीनो कारोबार से जुड़ी कंपनी Delta Corp ने जीएसटी (GST) देनदारी के लिए ब्याज सहित 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। कंपनी ने यह प्रावधान सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के वित्तीय नतीजों में दिखाया है। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब गेमिंग, सट्टेबाजी, जुआ और कैसीनो से जुड़े लेनदेन पर जीएसटी लागू होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय असर का आकलन किया जा रहा है।
कंपनी को 2023 में हजारों करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस मिले थे। अब जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए जारी आदेशों में कैसीनो से जुड़े लेनदेन और मिश्रित आपूर्ति (मिक्स्ड सप्लाई) के आधार पर अलग-अलग देनदारी तय की गई है।
Delta Corp ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि के नतीजों में इस प्रावधान को असाधारण मद (Exceptional Item) के रूप में दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि वह इन मांगों को संबंधित अधिकारियों और मंचों पर चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखती है। खास तौर पर कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई से जुड़ी पूरी मांग और सीजीएसटी नियमों के नियम 31C के तहत तय जीएसटी देनदारी पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने की बात कही है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि पहले जारी किए गए कारण बताओ नोटिस, जांच के बाद आदेशों में तय की गई रकम और कंपनी की ओर से किए गए प्रावधान अलग-अलग हैं। 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान कंपनी के प्रबंधन के आकलन पर आधारित है और इसमें ब्याज भी शामिल है। इसे सभी लंबित जीएसटी विवादों का अंतिम निपटारा नहीं माना जाना चाहिए।
हजारों करोड़ के नोटिस से घटकर तय हुई देनदारी
Delta Corp और उसकी दो सहायक कंपनियों Highstreet Cruises & Entertainment तथा Delta Pleasure Cruise Company को 27 सितंबर 2023 को हैदराबाद स्थित जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) से कारण बताओ नोटिस मिले थे। इन नोटिसों में 1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2022 की अवधि के दौरान कुल 16,822.98 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।
कंपनी की पूर्व सहयोगी Deltatech Gaming को भी 28 अक्टूबर 2023 को कोलकाता स्थित DGGI से अलग नोटिस मिला था। इसमें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि के लिए 6,384.32 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद कंपनी और संबंधित संस्थाओं ने अलग-अलग हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्हें जुलाई 2017 से नवंबर 2022 की अवधि से जुड़े मामलों की कार्यवाही पर रोक मिल गई थी। केंद्र सरकार ने भी उद्योग की ओर से अलग-अलग हाई कोर्ट में दायर इसी तरह की याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के बाद लंबित मामलों पर अदालत के तय सिद्धांतों और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत लागू मूल्यांकन प्रावधानों के अनुसार फैसला किया जाना था।
इसके बाद कंपनी को जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि के लिए समूह स्तर पर आदेश मिले। इन आदेशों में नियम 31C के तहत कैसीनो लेनदेन के लिए 151.15 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 125.27 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी तय की गई।
वहीं, केवल Delta Corp के स्तर पर कैसीनो लेनदेन के लिए 78.56 करोड़ रुपये और मिक्स्ड सप्लाई के लिए 93.80 करोड़ रुपये की देनदारी तय की गई।
ये आंकड़े तय अवधि और संबंधित श्रेणियों के लिए जारी आदेशों से जुड़े हैं। इन्हें समूह की ओर से किए गए कुल प्रावधान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रावधान में अतिरिक्त अवधि और ब्याज भी शामिल हैं।
ब्याज और बाद की अवधि को मिलाकर 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान
Delta Corp ने बताया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बताए गए सिद्धांतों और संबंधित आदेशों के आधार पर कैसीनो लेनदेन के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2023 तक और मिक्स्ड सप्लाई के लिए जुलाई 2017 से सितंबर 2025 तक की अवधि की जीएसटी देनदारी का आकलन किया है।
इस आधार पर 30 सितंबर 2026 तक समूह स्तर पर ब्याज सहित कुल 443.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसमें जून 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 306.73 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
केवल Delta Corp के स्तर पर यह प्रावधान 319.60 करोड़ रुपये रहा। इसमें जून तिमाही के दौरान दर्ज किए गए 200.62 करोड़ रुपये शामिल हैं।
कंपनी ने कहा कि उसने सावधानी बरतते हुए यह प्रावधान किया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों और मंचों के सामने मांग को चुनौती देने के अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखे हैं।
कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों से जुड़े खुलासे में कहा, “कानूनी सलाह और प्रबंधन के आकलन के आधार पर कंपनी का मानना है कि उसके पास मिक्स्ड सप्लाई की पूरी मांग और नियम 31C के तहत तय जीएसटी मांग पर लगाए गए ब्याज को चुनौती देने के मजबूत आधार हैं।”
कंपनी ने यह भी बताया कि उसने बैलेंस शीट की तारीख के बाद जुलाई 2017 से मार्च 2022 की अवधि से जुड़े आदेश के तहत नियम 31C के अंतर्गत तय मूल देनदारी के लिए 80.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। केवल कंपनी के स्तर पर यह भुगतान 49 करोड़ रुपये बताया गया है।
यह भुगतान नियम 31C के तहत तय मूल देनदारी से संबंधित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज समेत पूरा विवाद सुलझ गया है।
नए नोटिस से जीएसटी देनदारी को लेकर अनिश्चितता बरकरार
पहले जारी आदेशों के बाद भी Delta Corp के सामने जीएसटी से जुड़े मामले खत्म नहीं हुए हैं। कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों को गोवा के वाणिज्यिक कर आयुक्त की ओर से भी कारण बताओ नोटिस मिले हैं।
इन नोटिसों में 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 की अवधि के दौरान 1,883.96 करोड़ रुपये के जीएसटी भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया है।
Delta Corp और Highstreet Cruises & Entertainment को ये नोटिस 17 मार्च 2026 को जारी किए गए थे, जबकि Delta Pleasure Cruise Company को 25 सितंबर 2026 को नोटिस मिला।
इन मामलों में आगे का फैसला जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लागू मूल्यांकन नियमों के आधार पर होगा।
जीएसटी प्रावधान का सितंबर तिमाही के नतीजों पर असर
जीएसटी से जुड़े इस असाधारण खर्च का असर Delta Corp के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों पर भी पड़ा। कंपनी ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में समूह स्तर पर 106.41 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी को 25.10 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस दौरान कंपनी की कामकाज से होने वाली आय घटकर 159.34 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 182.76 करोड़ रुपये थी।
असाधारण मदों और टैक्स को शामिल करने से पहले कंपनी का मुनाफा 21.57 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 34.69 करोड़ रुपये था।
सितंबर 2026 को समाप्त छह महीने की अवधि में भी समूह को 318.83 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में 54.56 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। इस छह महीने की अवधि में कंपनी ने 443.65 करोड़ रुपये की असाधारण मद दर्ज की।
इस तरह, Delta Corp का जीएसटी प्रावधान कंपनी के वित्तीय नतीजों पर बड़ा असर डालने वाला रहा है। हालांकि, कंपनी ने मिक्स्ड सप्लाई और ब्याज से जुड़ी मांगों को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखा है और कुछ मामलों में आगे की कार्यवाही अभी बाकी है।
यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है।
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Samachar4media Bureau
यूट्यूब (YouTube) अब वीडियो और म्यूजिक के साथ ऑडियोबुक के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल के स्वामित्व वाला यह मंच बड़े बुक पब्लिशर्स के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि 2027 तक ऑडियोबुक की सुविधा शुरू की जा सके। इसके जरिए यूजर्स किताबों को पढ़ने के बजाय सुन सकेंगे।
इस सुविधा को यूट्यूब प्रीमियम (YouTube Premium) की मौजूदा सदस्यता के साथ जोड़ने या इसके लिए अलग से शुल्क लेने का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। फिलहाल यूट्यूब प्रीमियम की सदस्यता की कीमत 15.99 डॉलर प्रति माह है। अगर यह योजना शुरू होती है, तो यूट्यूब का सीधा मुकाबला एमेजॉन की ऑडिबल (Audible) और स्पॉटिफाई (Spotify) जैसी सेवाओं से होगा।
पब्लिशर्स के लिए कमाई का नया मौका
बुक पब्लिशर्स के साथ यूट्यूब की बातचीत उनके लिए कमाई का नया रास्ता खोल सकती है। यूट्यूब के पास बड़ी संख्या में यूजर्स हैं, जिन तक ऑडियोबुक पहुंचाकर पब्लिशर अपनी किताबों से कमाई बढ़ा सकते हैं।
इसके साथ ही, मंच पर यूजर्स की ओर से अपलोड की गई बिना अनुमति वाली ऑडियोबुक पर भी लगाम लगाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल यूट्यूब पर कई ऐसे ऑडियोबुक अपलोड मौजूद हैं, जिन्हें संबंधित अधिकारधारकों की अनुमति के बिना साझा किया गया है।
हालांकि, इस सुविधा को किस तरह शुरू किया जाएगा और कमाई का बंटवारा कैसे होगा, इस पर अभी बातचीत चल रही है। संभावित योजनाओं में यूट्यूब प्रीमियम के सदस्यों को हर महीने एक ऑडियोबुक चुनने का मौका देना और उन्हें अलग-अलग किताबों की बदलती सूची उपलब्ध कराना शामिल है।
विज्ञापन से आगे बढ़कर कमाई बढ़ाने की तैयारी
यूट्यूब का यह कदम विज्ञापन से होने वाली कमाई के अलावा सदस्यता के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऑडियोबुक को जोड़ने से यूट्यूब प्रीमियम की सुविधाएं बढ़ेंगी और यूजर्स को सदस्यता लेने की एक और वजह मिल सकती है।
कंपनी पहले ही यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब प्रीमियम के 10 करोड़ से ज्यादा सशुल्क सदस्यों का आंकड़ा पार करने की घोषणा कर चुकी है। अब ऑडियोबुक की सुविधा जोड़कर कंपनी डिजिटल ऑडियो बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
दुनियाभर में ऑडियोबुक की लोकप्रियता बढ़ रही है और कई डिजिटल मंच इस क्षेत्र में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में यूट्यूब की इस संभावित पहल से ऑडियोबुक बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
फिलहाल यह योजना बातचीत के स्तर पर है। यूट्यूब ने अभी तक इसके शुरू होने की तारीख, सदस्यता की कीमत और उपलब्ध किताबों की सूची को लेकर अंतिम जानकारी नहीं दी है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने Quintype Solutions LLC के लिए कुल 50 लाख डॉलर (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की कॉरपोरेट गारंटी दी है। कंपनी ने 17 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह गारंटी दो अलग-अलग मास्टर सर्विस एग्रीमेंट के तहत दी गई है। इन समझौतों के तहत कंपनी की अधिकतम गारंटी राशि 25-25 लाख डॉलर तय की गई है।
कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग नियमों के तहत बीएसई को यह जानकारी दी है। यह खुलासा सेबी के नियमों के तहत जरूरी जानकारी साझा करने के लिए किया गया है।
दो कंपनियों के साथ हुए समझौतों के लिए गारंटी
क्विंट डिजिटल ने बताया कि Quintype Solutions LLC ने दो अलग-अलग कंपनियों के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किए हैं। इनमें INN Partners, LLC, जो BLOX Digital के नाम से कारोबार करती है, और Lee Enterprises, Incorporated शामिल हैं।
इन दोनों समझौतों के तहत क्विंट डिजिटल ने Quintype Solutions की कुछ तय भुगतान संबंधी जिम्मेदारियों के लिए कॉरपोरेट गारंटी दी है। प्रत्येक समझौते में क्विंट डिजिटल की अधिकतम गारंटी की सीमा 25 लाख अमेरिकी डॉलर रखी गई है। इस तरह दोनों समझौतों के लिए कंपनी की कुल अधिकतम गारंटी राशि 50 लाख डॉलर तक है।
हालांकि, ये गारंटी संबंधित समझौतों के गारंटी से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद ही लागू होंगी। इनकी जिम्मेदारी संबंधित समझौतों में तय शर्तों, नियमों और सीमाओं के अधीन होगी।
Quintype Solutions में 10% हिस्सेदारी
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, Quintype Solutions LLC में क्विंट डिजिटल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Global Media Technologies Inc. के माध्यम से 10% इक्विटी हिस्सेदारी है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन में प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह की कंपनियों का कोई हित नहीं है।
तत्काल नकदी खर्च होने की उम्मीद नहीं
क्विंट डिजिटल के मुताबिक, इन गारंटी के कारण कंपनी को तत्काल नकदी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। कंपनी पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी तभी आ सकती है, जब संबंधित समझौतों में तय शर्तों के अनुसार कोई विशेष स्थिति पैदा होती है। कंपनी के मौजूदा आकलन के अनुसार, इन गारंटी से उसके वित्तीय प्रदर्शन पर किसी बड़े असर की उम्मीद नहीं है।
इंटरनेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म HOOK Global ने अनन्या दत्ता को सीनियर न्यूज एडिटर एवं एंकर नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
इंटरनेशनल न्यूज प्लेटफॉर्म HOOK Global ने अनन्या दत्ता को सीनियर न्यूज एडिटर एवं एंकर नियुक्त किया है। ब्रॉडकास्ट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग सात वर्ष का अनुभव रखने वाली दत्ता इससे पहले वे हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत थीं।
अनन्या दत्ता ने 'समाचार4मीडिया' से बातचीत में कहा कि वह नई भूमिका में न्यूजरूम की संपादकीय दिशा तय करने में अहम योगदान देंगी, अंतरराष्ट्रीय खबरों की कवरेज को मजबूत करेंगी और मौलिक कार्यक्रमों का विकास करेंगी। HOOK Global इस समय अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है।
अनन्या दत्ता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत मई 2019 में WION से की। एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पढ़ाई पूरी करने के बाद वे बतौर न्यूज राइटर चैनल से जुड़ीं। दो वर्ष के भीतर ही वे एंकरिंग में आ गईं और भू-राजनीति तथा चुनावों पर केंद्रित प्राइम-टाइम कार्यक्रम प्रस्तुत करने लगीं।
WION में पांच साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान उन्होंने "द विटनेस" (The Witness) नाम की मौलिक डिजिटल न्यूज प्रॉपर्टी भी तैयार की, जो डिजिटल-प्रथम कहानी कहने की दिशा में उनका शुरुआती कदम था।
जनवरी 2025 में वे हिंदुस्तान टाइम्स से जुड़ीं, जहां उन्होंने यूट्यूब के लिए मौलिक डिजिटल फॉर्मेट विकसित करने और शुरू करने में भूमिका निभाई। संपादकीय शोध, स्क्रिप्टिंग, टैलेंट के चयन और प्रोडक्शन की निगरानी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल थी। वे जून 2026 तक संस्थान में रहीं।
अपनी नई भूमिका पर अनन्या दत्ता ने कहा, "हम एक महत्वाकांक्षी न्यूजरूम हैं और अपने सफर के अहम मोड़ पर खड़े हैं। मेरे लिए यह अलग-अलग कहानियों और शो बनाने से आगे बढ़कर पूरे न्यूजरूम की संपादकीय दिशा गढ़ने का रोमांचक अवसर है।"
मौजूदा टीम के काम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "टीम ने न्यूजरूम की बुनियाद बनाने में शानदार काम किया है। अब मेरी भूमिका यह तय करने में मदद करना है कि हम आगे कहां जाएं।"
आगे की योजना पर उन्होंने कहा कि उनका ध्यान ऐसा न्यूजरूम बनाने पर रहेगा जो मजबूत संपादकीय मूल्यों को इस समझ के साथ जोड़े कि दुनिया भर के दर्शक खबरें कैसे देखते-पढ़ते हैं। उनके शब्दों में, "मैं ऐसा न्यूजरूम बनाने में योगदान देना चाहती हूं, जिसका हिस्सा बनने की मैंने हमेशा चाह रखी है: जिसकी पत्रकारिता महत्वाकांक्षी हो, जो दुनिया को लेकर जिज्ञासु हो और अपने दर्शकों के साथ निरंतर विकसित होता रहे।"
उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब HOOK Global अपनी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी का विस्तार कर रहा है। मौलिक पत्रकारिता, एंकर-आधारित कार्यक्रमों और डिजिटल-प्रथम न्यूज फॉर्मेट पर संस्थान का जोर लगातार बढ़ रहा है, जिनका लक्ष्य दुनिया भर के बाजारों के दर्शक हैं।
पत्रकारिता में करीब 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले सिंह इससे पहले द लल्लनटॉप में सीनियर एडिटोरियल भूमिका में कार्यरत थे। यहां उन्होंने करीब तीन साल तक काम किया।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार दिग्विजय सिंह टाइम्स नाउ नवभारत में एडिटर- डिजिटल वीडियो (ओरिजन्स) के पद पर नई जिम्मेदारी संभाल ली है। पत्रकारिता में करीब 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले सिंह इससे पहले 'द लल्लनटॉप' में सीनियर एडिटोरियल भूमिका में कार्यरत थे। यहां उन्होंने करीब तीन साल तक काम किया और मॉर्निंग बैंड के साथ स्पेशल स्टोरीज और लॉन्ग फॉर्म कंटेंट की जिम्मेदारी संभाली।
टाइम्स नाउ नवभारत में उनकी नई भूमिका डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ओरिजिनल वीडियो कंटेंट की रणनीति, विकास और क्रियान्वयन से जुड़ी होगी। उनके लंबे संपादकीय अनुभव, न्यूज रूम संचालन और विभिन्न माध्यमों में काम करने की विशेषज्ञता का इस्तेमाल नए डिजिटल वीडियो फॉर्मेट और स्टोरीटेलिंग को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में सहारा से बतौर रिपोर्टर की थी। इसके बाद उन्होंने इंडिया टीवी, आज तक, जी न्यूज और न्यूज नेशन जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उनके अनुभव में रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, प्रोग्रामिंग, संपादकीय संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
दिग्विजय सिंह जनसत्ता ऑनलाइन की वीडियो टीम की संस्थापक टीम के सदस्य भी रहे हैं। पारंपरिक टेलीविजन न्यूजरूम से लेकर डिजिटल पत्रकारिता तक काम करने के अनुभव ने उन्हें कंटेंट निर्माण के विभिन्न स्वरूपों और दर्शकों की बदलती पसंद को करीब से समझने का अवसर दिया है।
डिफेंस और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग उनकी प्रमुख विशेषज्ञताओं में शामिल हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई डिफेंस ड्रिल कवर की हैं और अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार यानी IIFA जैसे बड़े मनोरंजन आयोजनों की रिपोर्टिंग भी की है।
मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले दिग्विजय सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। उनके खाते में अटल रत्न अवॉर्ड और भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिला नेशनल यूथ अवॉर्ड भी शामिल है।
टेलीविजन, रेडियो, अखबार और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखने वाले दिग्वजिय सिंह की नई नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब न्यूज संस्थान डिजिटल वीडियो और अपने प्लेटफॉर्म के लिए विशिष्ट, मौलिक कंटेंट तैयार करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।