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डिजिटल मीडिया में 94% विज्ञापन नियमों का उल्लंघन, प्रिंट-टीवी सबसे भरोसेमंद: ASCI
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024–25 में जिन सभी विज्ञापनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनमें से अधिकांश डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर थे
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024–25 में जिन सभी विज्ञापनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनमें से अधिकांश डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर थे, जबकि टीवी और अखबार जैसे पारंपरिक माध्यम अब भी अपेक्षाकृत जिम्मेदार बने हुए हैं।
वित्त वर्ष 2024–25 में विज्ञापनों में नियमों का उल्लंघन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 94.4% हुआ। इसके मुकाबले अखबारों (प्रिंट) में सिर्फ 2.4% विज्ञापनों में गड़बड़ी मिली, तो वहींं टीवी में 2.6% नियमों का उल्लंघन पाया गया। वहीं अन्य आउटडोर (होर्डिंग्स) और रेडियो जैसे अन्य माध्यमों से जुड़ी शिकायतों का हिस्सा सिर्फ 0.6% रहा।
ASCI की रिपोर्ट बताती है कि कुल 7,078 ऐसे विज्ञापन चिन्हित किए गए जिनमें बदलाव की जरूरत थी। इनमें प्रिंट मीडिया का हिस्सा महज 2.4% और टीवी का 2.6% रहा, जबकि डिजिटल माध्यमों ने भारी बहुमत के साथ उल्लंघन में सबसे ऊपर स्थान पाया। आउटडोर और रेडियो जैसे अन्य माध्यमों से जुड़ी शिकायतों का हिस्सा सिर्फ 0.6% रहा।
अनुपालन दर (Compliance Rate) की बात करें तो, प्रिंट में यह 98%, टीवी में 97% और डिजिटल में 81% दर्ज की गई। जिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे अधिक उल्लंघन पाए गए, उनमें Meta, ई-कॉमर्स साइट्स, वेबसाइट्स, ट्विटर, मोबाइल ऐप्स, प्रॉपर्टी पोर्टल्स और ईमेल सेवाएं शामिल हैं। इसके विपरीत, Google, LinkedIn और OTT प्लेटफॉर्म्स पर सबसे कम उल्लंघन रिपोर्ट किए गए।
डिजिटल शिकायतों की संख्या में वृद्धि और आधुनिक विज्ञापन अभियानों की अल्पकालिक प्रकृति को देखते हुए ASCI ने औसतन एक शिकायत को निपटाने में लगने वाला समय (Turnaround Time या TAT) 46% घटा दिया है। अब एक शिकायत को प्राप्त करने से लेकर उसे हल करने तक का औसत समय सिर्फ 16 दिन रह गया है।
ASCI की CEO और सेक्रेटरी जनरल मनीषा कपूर ने कहा, “डिजिटल युग में ASCI उपभोक्ता संरक्षण के सबसे अहम क्षेत्रों में लगातार अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाता रहा है। सरकार के साथ मिलकर सट्टेबाजी और जुए से संबंधित विज्ञापनों पर हमारा फोकस इसका एक बेहतरीन उदाहरण है कि सभी संबंधित पक्ष प्रभाव डालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम आगे भी उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विज्ञापन निगरानी में अपनी विशेषज्ञता को मजबूत करते रहेंगे।”
उन्होंने इस तेज समाधान समय का श्रेय बिना चुनौती दिए गए मामलों की संख्या में वृद्धि और चुनौती दिए गए मामलों की अधिक दक्ष प्रोसेसिंग को दिया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई डिजिटल ब्रांड्स के पास अलग से कानूनी या मार्केटिंग टीमें नहीं होतीं। ऐसे मामलों में ASCI के केस ऑफिसर्स ने सीधे इन विज्ञापनदाताओं से संपर्क कर उन्हें संभावित कोड उल्लंघनों की जानकारी दी, जिससे स्वैच्छिक अनुपालन की दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
वित्त वर्ष 2024–25 में ASCI द्वारा चिन्हित किए गए विज्ञापनों में से 59% मामलों में विज्ञापनदाताओं ने शिकायत को चुनौती नहीं दी, जबकि 2023–24 में यह संख्या 49% और 2022–23 में 37% थी। इन मामलों को तब बंद कर दिया गया जब विज्ञापनदाता ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह शिकायत को चुनौती नहीं देगा और मामला ASCI की उपभोक्ता शिकायत परिषद (Consumer Complaints Council) तक नहीं गया।
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