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क्या है यूपी के सियासी ड्रामे की स्क्रिप्ट, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार निर्मलेन्दु
निर्मलेन्दु कार्यकारी संपादक, दैनिक राष्ट्रीय उजाला ।। सपा में अंतर्कलह। चाचा भतीजे के बीच क्या सचमुच यह गृह युद्ध है, या फिर सियासी ड्रामा? शिवपाल ने पहले इस्तीफे की धमकी दी, फिर कहा कि जो भईया कहेंगे, वही कर
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
निर्मलेन्दु
कार्यकारी संपादक, दैनिक राष्ट्रीय उजाला ।।
सपा में अंतर्कलह। चाचा भतीजे के बीच क्या सचमुच यह गृह युद्ध है, या फिर सियासी ड्रामा? शिवपाल ने पहले इस्तीफे की धमकी दी, फिर कहा कि जो भईया कहेंगे, वही करुंगा। ऐसे में विपक्ष को यही लग रहा है कि यह यादव कुनबे की फिक्सिंग है, कुछ कुछ मैच फिक्सिंग की तरह। दरअसल, इसी बहाने कुछ नेताओं को बर्खास्त करने की योजना बनी है।
क्यों ऐसा माना जा रहा है? क्या सचमुच सपा में बिखराव है? इसे हम सबसे बड़ा सियासी ड्रामा भी कह सकते हैं। यह सियासी ड्रामा है, इसका उदाहरण यही है कि अखिलेश ने भी कहा कि कुछ फैसले उन्होंने लिये हैं और कुछ नेताजी। यानी यह एक तरह से पॉलिटिकल गेम है। अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि नेताजी की बात सबसे ऊपर है। यूपी चीफ की पोस्ट से हटाए जाने के दो घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव से राजस्व, सिंचाई और पीडब्ल्यूडी जैसे बड़े विभाग छीन लिए। इससे नाराज शिवपाल ने इस्तीफे की धमकी दे दी। हालांकि शिवपाल अब कह रहे हैं कि जो नेताजी का आदेश होगा, वही करेंगे। वैसे, एक बात बता दें कि इस अंतर्कलह के पीछे कहते हैं कि पद से हटाए गए मुख्य सचिव सिंघल हैं, जो कि इस पूरे खेल के विलेन हैं।
दरअसल, खबर यही है कि वे लगातार मुलायम को गायत्री प्रजापति और राजकिशोर के हटाए जाने का दबाव बनाते रहे। लेकिन अमेठी से विधायक गायत्री प्रजापति मुलायम को मनाते रहे और इधर सिंघल उन्हें गुमराह करते रहे।
इस समय देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा सियासी ड्रामा चल रहा है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि ‘चौके’ की बात चौकी तक कैसे आ गई। हर किसी के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि आखिर यह लड़ाई है या फिर सीएम अखिलेश यादव की इमेज बिल्डिंग के लिए मुलायम कुनबे की फिक्सिंग। सपा की विरोधी पार्टियों ने तो इसे ड्रामा करार दिया है और साथ ही यह भी कहा है कि यह पब्लिक है, सब जानती है।
पर्दे के पीछे का खेल
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, अखिलेश यादव का ऑपरेशन क्लीन अभियान लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल, वह जानते हैं कि जब उनकी पार्टी चुनाव में जाएगी, तो उनके लिए सबसे अहम उनकी इमेज होगी। इसलिए वह अपनी इमेज को बचाने की कोशिश में सियासी ड्रामा रच रहे हैं। चर्चा है कि इसीलिए अब अखिलेश यादव मंत्रियों पर आक्रामक हो रहे हैं। इसी बहाने कुछ नेताओं को बर्खास्त करने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में शिवपाल नाराज हो गए, क्योंकि मुख्य सचिव उनके करीबी थे। दरअसल, मुलायम चाहते थे कि अखिलेश दोनों मंत्री को बहाल करें, लेकिन अखिलेश ने साफ शब्दों में मना कर दिया। और इन सबके बीच शिवपाल को तसल्ली देने के लिए मुलायम ने अखिलेश को अध्यक्ष पद से हटा दिया। ऐसे में अखिलेश को यही लगा कि इस पूरी घटना के पीछे शिवपाल और रामगोपाल का हाथ है, जिसके बाद अखिलेश ने शिवपाल से अहम मंत्रालय ही छीन लिए।
हालांकि शिवपाल ने सियासी बयान देते हुए कहा कि जो भईया कहेंगे, वही करुंगा। यूपी में सत्तरूढ़ सियासी परिवार में छिड़ी पावर पॉलिटिक्स के बीच शिवपाल यादव बुधवार सुबह मीडिया से मुखातिब हुए और कहा कि हम सब नेताजी के साथ हैं और उनके निर्देशों का पालन करेंगे। शिवपाल ने कहा कि मंत्री पद बदलने या देने का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री के पास है और उन्हीं का फैसला अंतिम होगा। शिवपाल ने कहा कि नेताजी ने मुझे जो जिम्मा सौंपा है, मैं उसके अनुसार काम करुंगा और संगठन को मजबूत बनाने पर ध्यान दूंगा। शिवपाल ने कहा कि नेताजी से बात कर फैसला लूंगा, यानी वे जो भइया कहेंगे, वही करेंगे। इस पूरे प्रकरण में विपक्षियों को लग रहा है कि यह सपा का ड्रामा है।
ऑपरेशन क्लीन के तहत यह अखिलेश यादव की इमेज बिल्डिंग करने की कोशिश है और पूरा कुनबा मिलकर यह सब कर रहा है। विपक्षियों ने सवाल दागा कि क्यों बढ़ रहा है घर का संघर्ष। कहीं चुनावी स्टंट तो नहीं। उन लोगों का मानना यही है कि यूपी में चल रहे परिवार और सरकार के इस हाई वोल्टेज ड्रामे का जल्दी अंत हो जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि मंत्रियों की बर्खास्तगी नाटक है।
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