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देश की सुरक्षा को टीआरपी (TRP) की दौड़ से अलग रखना होगा : पूरन डावर

पूरन डावर अध्यक्ष, ‘आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन’ ।। गत् 18 सितम्बर 2016 भारतीय सेना के उड़ी कैम्प पर फिर एक बार आतंकी हमला हुआ। पूरा देश शोक मे है, शायद इस बार जितनी प्रतिक्रिया हुई है, लगने लगा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

पूरन डावर

अध्यक्ष, ‘आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन’ ।।

गत् 18 सितम्बर 2016 भारतीय सेना के उड़ी कैम्प पर फिर एक बार आतंकी हमला हुआ। पूरा देश शोक मे है, शायद इस बार जितनी प्रतिक्रिया हुई है, लगने लगा है, जैसे मात्र सैन्य विकल्प ही बचा है। जनता का खून खोलना स्वाभाविक है, शरीफ से शरीफ जनता की भी एक सीमा होती है। धैर्य होता है, विशेष तौर पर जब नरेन्द्र मोदी जैसे प्रधानमंत्री हो, भाजपा शासन मे हो अपेक्षायें बढ़ जाना स्वाभाविक है। पूरे चुनाव प्रचार भाषणों का केन्द्र पाकिस्तान पर रहा, एक के बदले 10 सिर लाने की बात हो, आतंकवाद के मुज्जफराबाद में अड्डे ध्वस्त करने से लेकर लड़ाई सीमा पर नही, लाहौर में होगी, जैसे जोश पैदा करने वाले भाषण हुए। यह सारे भाषण जनता की आवाज और मानसिकता के अनुरूप थे, जनता यही अपेक्षा करती थी और आज भी वही अपेक्षा है।

यह बात अलग है, राजनीति में जनता की अपेक्षाओं और सत्ताधीन पार्टियो की नीति को धता बताने के लिये अप्रत्याशित जोश उत्पन्न किया जाता है। उसी प्रकार लगातार पठानकोट और उसके बाद उड़ी की घटना ने जहां आम जनता के धैर्य को तोड़ा, वहीं वर्तमान विपक्ष तत्कालीन सत्ताधारी ने उसी भाषा में, उन्ही के शब्दों का स्मरण कराते हुये कार्रवाई की न केवल मांग की, बल्कि सबसे बड़ा हमला बोला है, हालांकि लम्बे समय तक सत्ता में रहते हुये, वास्तविकता से वाफिक जो जनता मांग कर रही या हमला बोला जा रहा है, वैसी कार्रवाई सम्भव नहीं है।

भारत सभ्य देश है, सीधे बिना प्रमाण के पाकिस्तान पर आरोप तो लगा सकते है, अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबूतों की जरूरत होती है, हमें मालूम है अमुख व्यक्ति ने कत्ल किया है, लेकिन न्यायालय के लिए सबूत इकठ्ठे करना आवश्यक है।

मात्र पाकिस्तानी नागरिक होने से यह सिद्ध नहीं हो जाता कि पाकिस्तान का हाथ है, पाकिस्तान सरकार की भूमिका के प्रमाण एकत्र करने होंगे, आज घटना हुई सीधे पाकिस्तान पर आरोप जड़ दिया, न्यायसंगत नही है। कई बार सरकार चाहते हुए भी कार्रवाई नहीं कर पाती, सरकार को हुरियत समेत बहुत सारे संगठनों की गतिविधियों की पूरी जानकारी है, लेकिन वर्षो से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे, एक ‘वानी‘ को मारने पर आज 2 माह से कश्मीर जल रहा है। इसी तरह यह समझना एवं सिद्ध करना जरूरी है कि पाकिस्तान वहां की मौजूद परिस्थितियों में कार्रवाई करने में असमर्थ है या वाकई पाक सरकार की भी इसमें भूमिका है।

समय आ गया आत्मचिंतन का, विपक्ष को सकारात्मक भूमिका निभाने का, सरकार की विवशताओं और वास्तविकताओं को समझने का, कांग्रेस को यदि वापस आना है तो अपने आचरण से अहसास कराना है कि विपक्ष मे रहकर गाल बजाना जितना आसान है, शासन चलाना उतना नहीं, विशेष तौर पर रक्षा के विषय पर बचकाने, जोशीले बयानों से काम नहीं चलता। लेकिन विडम्बना है कांग्रेस जानबूझकर हमला बोलकर, वही नकारात्मक भूमिका निभा रही, जबकि सकारात्मक निभाकर छवि को सुधार सकती है, यह बात दीगर है कि किसी बड़ी कार्रवाई में अक्षमता की दोषी कांग्रेस ही है, ये बात निश्चित रूप से एनडीए को आज अच्छी तरह से समझ आ गया होगा।

निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी इस बात को अच्छी तरह समझते है, जितने भी जोशीले भाषणों के जरिए पाकिस्तान के विरुद्ध चुनाव रैलियों में जहर डाला हो, लेकिन पहले दिन ही शपथग्रहण समारोह में अपने पड़ोसी को बुलाकर संदेश दिया कि शान्ति के रास्ते पर ही दोनों देश विकास कर सकते है, युद्ध कोई विकल्प नहीं है, चुनाव में जहर उगलना मात्र राजनीति है, कमोबेश पाकिस्तान की राजनीति पूरी तरह से कश्मीर पर भारत से मीलों आगे है, पाक भी जानता है कि युद्ध उसके लिए भारत से कहीं अधिक घातक है।

 पाकिस्तान आज अपनी आग में स्वयं जल रहा है, आतंकवादी उसके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा बन चुके है, जितने भारत, यूरोप और अमेरिका देशों के, यहां तक कि इस्लामिक देश भी नहीं छूटे है, बल्कि ये देश सबसे अधिक प्रभावित है। सीरिया, इजिप्ट, ईराक, ईरान, कुवैत, टर्की सभी आग की लपटो को झेल रहे है। यदि पाकिस्तान उस दलदल में फस चुका है और अपनी शक्ति से निकलने में कामयाब नहीं है, तो स्पष्ट तौर पर आतंकवादी पाकिस्तान की सत्ता से कहीं अधिक शक्तिशाली नजर आते हैं, तो पाकिस्तान को भारत, चीन अमेरिका जैसे देशों से मदद लेकर, उन्हे समाप्त करना चाहिये। यदि ऐसा नही है तो पाकिस्तान स्वेच्छा से आतंक की फैक्टरी चला रहा है तो विनाश अवश्यमभावी है। ऐसे हम भारत वासियों को राजनीत से दूर हटकर आचरण करना होगा। राजनीतिज्ञों ने राजनीति के कारण जो भूल की है, उन्हे सुधारना होगा।

भ्रष्टाचार के कारण जो सुरक्षा खोखली हुई है या उसमे जो घुन लगा है, निश्चित रूप से यूपीए सरकार सर्वाधिक दोषी है, उसमें बड़ा रोल मीडिया का भी है, देश की सुरक्षा को टीआरपी की दौड़ से अलग रखना होगा। पचासों चैनलों पर स्वयम्भू रक्षा सलाहकार बहस करके जितना बड़ा देश का नुकसान कर रहे है उतना कोई और नहीं।

सुरक्षा व्यवस्था शक्ति से कहीं अधिक गुप्तनीति होती है, हर ऑपरेशन गुप्त होता है, कई बार हमले को भी जबाबी कार्रवाई बताई जा सकती है, न ही शक्ति बताई जा सकती है, न ही हमारी कार्रवाई क्या, कब, और कहां होगी, न ही कहीं भी अपनी कमजोरी बताई जाए, रक्षा विशेषज्ञों का कार्य है अपनी सलाह एक बंद लिफाफे में सरकार को भेजे, न कि टीवी पर बहस कर और दोनों को युद्ध के लिये भड़कायें बल्कि पूरा प्रयास कर युद्ध में ढकेलने के लिए

आज युद्ध थल सेना का नहीं है, परमाणु युद्ध है, परमाणु बम भी नागासाकी, हिरोशिया वाले नहीं है, शक्ति इतनी है कि करोड़ों लोग एक बम से समाप्त हो सकते है, ज्ञातव्य रहे द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बम का प्रयोग अमेरिका द्वारा लड़ाई के लिए या जापान को समाप्त या पराजित करने के लिये नहीं, मात्र युद्ध को रोकने कि लिए किया गया था और उसी दिन द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया था।

जब परमाणु युद्ध और एक दूसरे को समाप्त करने के लिये होगा तो उस भयावह स्थित की कल्पना इसलिए नही कर सकते, क्योकि ऐसा इतिहास में अभी तक हुआ ही नहीं। राजनैतिज्ञ, कम से कम देश की सुरक्षा को राजनीति से दूर रखें, यह शायद भाजपा को भी अच्छी तरह समझ आ गया होगा, जनता-सरकार जोश जरूर दिलाये, वीर रस के कवि जरूर वीरता की कवितायें लिखे, सेना का मनोबल बढ़ाये, लेकिन नेतृत्व पर विश्वास रखें, विशेष तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अवश्य, वो ऐसी कोई भी कार्रवाई, जो सम्भव हो, उससे चूकने वाले नहीं है।

यहां यह भी स्मरण करें, परमाणु परीक्षण का साहस भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने ही किया था। लेकिन ऐसी कोई कार्रवाई करना, जो देश के लिए घातक हो, विनाश की ओर ले जा रही है, हमें उड़ी जैसे सैकड़ो सैनिक कुर्बान करने के लिए भी मानसिक तौर पर तैयार होना होगा।

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