होम / विचार मंच / चौथी दुनिया में कमल मोरारका ने बताया, नेहरू नहीं होते तो कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा होता

चौथी दुनिया में कमल मोरारका ने बताया, नेहरू नहीं होते तो कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा होता

‘कश्मीर आसानी से पाकिस्तान में चला गया होता, अगर शेख अब्दुल्लाह (जो नेहरू और महात्मा गांधी के प्रशंसक थे) ने भारत के साथ रहने का फैसला नहीं किया होता। ये शेख अब्दुल्लाह थे जिन्होंने फैसला किया कि कश्मीर सेक्युलर भारत के साथ रहेगा न कि मुस्लिम पाकिस्तान के साथ।’ हिंदी साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुन

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

‘कश्मीर आसानी से पाकिस्तान में चला गया होता, अगर शेख अब्दुल्लाह (जो नेहरू और महात्मा गांधी के प्रशंसक थे) ने भारत के साथ रहने का फैसला नहीं किया होता। ये शेख अब्दुल्लाह थे जिन्होंने फैसला किया कि कश्मीर सेक्युलर भारत के साथ रहेगा न कि मुस्लिम पाकिस्तान के साथ।’ हिंदी साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया में छपे अपने कॉलम ‘कमल मोरारका के कॉलम’ के जरिए ये कहा सुप्रसिद्ध समाजशास्त्री कमल मोरारका ने। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:

पढ़ें: कश्मीरियों का साथ चाहते हैं, तो 370 वाली गारंटी पूरी करनी होगी, बोले कमल मोरारका…

पढ़ें: ‘ईटीवी उर्दू’ के शो में वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने बताया कश्मीर का ये चौंकाने वाला सच…

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की याद में नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में एक समारोह का आयोजन हुआ। विषय की गंभीरता को देखते हुए अच्छा होता कि प्रधानमंत्री या गृह मंत्री अपना व्याख्यान देते। यदि उनके पास समय की कमी थी और यदि पार्टी को इसके लिए किसी को चुनना था तो वह व्यक्ति आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी के कद का होना चाहिए था, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी से सीनियर नहीं तो बराबर कद वाले जरूर हैं। अमित शाह को मुख्य वक्ता बनाना दरअसल श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कद को कम करने जैसा है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेहरू कैबिनेट के एक काबिल सदस्य थे। उनके पास उद्योग मंत्रालय था। पब्लिक सेक्टर के पक्ष में लिए जाने वाले शुरुआती फैसले श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ही थे। लोग इतिहास और घटनाएं भूल जाते हैं, इसलिए आज यह आसान हो जाता है कि सारा दोष नेहरू के सिर मढ़ दिया जाए और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की खूब तारीफ की जाए। ऐसी बातें बेतुकी हैं।

पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने खुले खत के जरिए प्रधानमंत्री को बताया कश्‍मीर का ये सच…

सच्चाई यह है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस के वैचारिक विकल्प के रूप में भारतीय जन संघ की स्थापना की थी। दरअसल यह लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे पब्लिक सेक्टर के खिलाफ थे। जहां तक कश्मीर का सवाल है तो संयुक्त राष्ट्र संघ में जाने के लिए नेहरू को दोष देना चाहिए। एक सज्जन पुरुष होने के नाते उन्होंने ऐसा किया। भारत के इस फैसले का पाकिस्तान गलत इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन जो बिंदु हमसे छूट रहा है वह यह है कि कश्मीर आसानी से पाकिस्तान में चला गया होता, अगर शेख अब्दुल्लाह (जो नेहरू और महात्मा गांधी के प्रशंसक थे) ने भारत के साथ रहने का फैसला नहीं किया होता। ये शेख अब्दुल्लाह थे जिन्होंने फैसला किया कि कश्मीर सेक्युलर भारत के साथ रहेगा न कि मुस्लिम पाकिस्तान के साथ। महाराजा हरि सिंह जो अलग-थलग पड़ गए थे और यह सोचते हुए कि राज्य की बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम है पाकिस्तान चले गए होते। चाहे भाजपा को अच्छा लगे या नहीं, चाहे अमित शाह को अच्छा लगे या नहीं, लेकिन आप दो घटनाओं को अलग नहीं कर सकते। कश्मीर भारत के साथ शेख अब्दुल्लाह और नेहरू की वजह से है। कश्मीर समस्या भी नेहरू की वजह से है, और दोनों मामले एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। आप यह नहीं कह सकते कि अगर नेहरू नहीं होते तो कश्मीर मसला नहीं होता। जी हां, बिलकुल सही, कोई मसला नहीं होता क्योंकि ऐसे में कश्मीर पाकिस्तान में चला गया होता। भाजपा को दोबारा इतिहास पढ़ना चाहिए और अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। जहां तक हम समझते हैं आरएसएस और भाजपा का स्टैंड मुस्लिम मुक्त भारत का है। अगर ऐसा है तो उन्हें साफ-साफ कहना चाहिए कि कश्मीर को पाकिस्तान के साथ चले जाना चाहिए। लेकिन वे वहां सरकार बनाना चाहते हैं और इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं ताकि कश्मीरियों को अपने में कैसे सम्मिलित किया जाए। मेरे ख्याल से भाजपा के नीति निर्माताओं के बीच बड़ी भ्रान्ति फैली हुई है। मुझे नहीं मालूम कि आरएसएस उनका मार्गदर्शन कर रहा है या नहीं। लेकिन अरुणाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में उनकी चालों से एक बात साफ हो रही है कि वे कांग्रेस को कमज़ोर कर रहे हैं और यह साबित कर रहे हैं कि उनका उद्देश्य जितना हो सके राज्य सरकारों को अपने हिस्से में कर लिया जाए, सिद्धांत और नीति से कोई मतलब नहीं है।

एक और घटना जो समाचारों में है। अब मॉल और रेस्टोरेंट्स 24 घंटे खुले रहेंगे। एक बार फिर हम पश्चिम की नकल कर रहे हैं। मेरे ख्याल में अमेरिका की। भारत को अपनी संस्कृति के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए। शहरों में भोजनालय पहले से देर रात तक खुले रहते हैं, लेकिन हमें इस मामले में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ना चाहिए। मुझे नहीं पता कि आखिर इसका मकसद क्या है? क्या यह राजस्व इकट्‌ठा करने के लिए किया जा रहा है या रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए? जो भी हो सरकार को अपनी नीति साफ करनी चाहिए। आज तक एनडीए सरकार का लेखा-जोखा तैयार किया जाय तो यह कहा जा सकता है कि वे यूपीए सरकार की स्कीमों को ही जारी रखे हुए हैं। कुछ के नाम बदलकर और कुछ पुराने नामों के साथ (जैसे मनरेगा)। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अच्छा है या बुरा है, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर आप को गरीबों, दबे-कुचले, बेरोजगारों, खेतिहर मजदूरों के लिए काम करना है तो कुछ ऐसे काम हैं जो कांग्रेस भी अपने तरीके से कर रही थी, भाजपा यह काम अपनी सोच के हिसाब से कर सकती है। लेकिन यह कहना कि जनधन योजना, कृषि बीमा क्रान्तिकारी फैसले हैं, सही नहीं है। ये ऐसी स्कीमें हैं जो काफी पहले से चल रही हैं, और बेशक इनमें सुधार की जरूरत है। अगर भाजपा इन स्कीमों को बेहतर बनाती है, खास तौर पर किसानों की हालत को बेहतर करने के लिए तो उसका स्वागत होना चाहिए।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को कैबिनेट ने अपनी मंज़ूरी दे दी। लेकिन यह अपेक्षित था। मैं नहीं समझता कि किसी सरकार के पास इसको लेकर अधिक विकल्प होते हैं। क्योंकि वेतन आयोग अनेक प्रक्रियाओं से गुजरकर अपनी सिफारिशें पेश करता है। अगर सरकार उसमें किसी तरह की कटौती करने की कोशिश करेगी तो इससे सरकारी कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ेगी। बेशक इसमें पैसे खर्च होंगे, लेकिन इसके लिए बजट का आवंटन कर इसका खयाल रखा जा सकता है।

(साभार: चौथी दुनिया)


समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।


टैग्स
सम्बंधित खबरें

'जब स्कोरबोर्ड से आगे निकलकर खेल सिखाता है जिंदगी की बड़ी सीख'

जब भारत एक और शानदार टी20 वर्ल्ड कप जीत का जश्न मना रहा है, तो स्वाभाविक है कि सबसे ज्यादा चर्चा मैच, ट्रॉफी और खिलाड़ियों की हो रही है।

15 hours ago

क्या दुनिया वैसी नहीं रहेगी जैसी हम जानते हैं?

मैं जब विज्ञापन इंडस्ट्री में चल रहे बड़े बदलावों की खबरें देख रहा था, तो मेरे मन में एक सवाल आया कि इन बदलावों से क्लाइंट्स को आखिर क्या फायदा होगा।

1 day ago

खुद को नया रूप देकर आगे बढ़ेगा इंडियन न्यूज इकोसिस्टम, भविष्य रहेगा मजबूत: हर्ष भंडारी

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

1 day ago

ChatGPT को टक्कर देने वाला Claude क्या है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

Anthropic कंपनी ने Claude AI बनाया है। उसका दावा है कि अमेरिकी सरकार AI का ‘दुरुपयोग’ करना चाहती थी। सरकार Claude का इस्तेमाल दो कामों के लिए करना चाहती थी।

1 day ago

राहुल गांधी की सिनेमा की बचकानी समझ: अनंत विजय

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में यह कोई नई प्रवृत्ति है? क्या भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज में राजनीतिक विचारों और वैचारिक संदेशों का इस्तेमाल पहले नहीं होता था?

1 day ago


बड़ी खबरें

सरकार की फैक्ट चेक यूनिट पर रोक, AIM ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

AIM भी उन याचिकाकर्ताओं में शामिल था, जिन्होंने इस फैक्ट चेक यूनिट की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दी थी।

7 hours ago

एक बार फिर धूम मचाने आया Laqshya Pitch Best CMO अवॉर्ड्स, 12 मार्च को होगा इवेंट

एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप Laqshya Pitch Best CMO Awards एक बार फिर आयोजित करने जा रहा हैं।

15 hours ago

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया में देविका प्रभु की एंट्री, बनीं हिंदी मूवीज की बिजनेस हेड

इस नई जिम्मेदारी की जानकारी देविका प्रभु ने खुद लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिये साझा की।

4 hours ago

ESOP स्कीम के तहत 'बालाजी टेलीफिल्म्स' ने एम्प्लॉयीज को यूं बनाया अपना हिस्सेदार

बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड ने अपने एम्प्लॉयीज को ESOP (एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान) के तहत 51,997 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

16 hours ago

‘Times’ समूह ने इस बड़े पद पर शमशेर सिंह को किया नियुक्त

शमशेर सिंह इससे पहले सितंबर 2024 से ‘नेटवर्क18’ (Network18) समूह में ग्रुप कंसल्टिंग एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, जहां से उन्होंने बाय बोल दिया है।

5 hours ago