होम / विचार मंच / पाक पर हमले को लेकर भूपेंद्र चौबे ने दागा ये 'बड़ा' सवाल

पाक पर हमले को लेकर भूपेंद्र चौबे ने दागा ये 'बड़ा' सवाल

पुलवामा हमले के बाद देश गुस्से में है। हर तरफ से बस एक ही आवाज़ उठ रही है कि पाकिस्तान का नामोनिशान...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

भूपेंद्र चौबे
एग्जिक्यूटिव एडिटर, न्यूज़18 नेटवर्क।।

हमें अब भी पाकिस्तान से बातचीत क्यों करनी चाहिए?

पुलवामा हमले के बाद देश गुस्से में है। हर तरफ से बस एक ही आवाज़ उठ रही है कि पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देना चाहिए। जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है, सोशल मीडिया पर एक अलग ही जंग लड़ी जा रही है। लेकिन क्या जंग इस समस्या का हल है?

कई लोगों ने मुझसे पूछा कि जब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 70 जवान नक्सली हमले में शहीद हुए, तब इस तरह का गुस्सा क्यों देखने को नहीं मिला? क्या हमें उसका दुःख नहीं था? जिस तरह के कैंडल मार्च अभी निकाले जा रहे हैं, उस वक़्त कोई क्यों सामने नहीं आया? उस वक़्त किसी ने क्यों नहीं कहा कि आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए? लेकिन अब जब पुलवामा हमले में पाकिस्तानी हाथ उजागर हुआ है, तो हम सभी बड़ी कार्रवाई चाहते हैं। इससे यह पता चलता है कि जब बात शांति की राह में बाधा बनने वाले पाकिस्तान की आती है, तो हम उसे ख़त्म कर देना चाहते हैं। मैंने भी ऐसा कुछ ट्वीट किया है और यदि आप मेरी टाइमलाइन देखें तो मैंने लिखा है ‘पाकिस्तान को ख़त्म कर दो’। लेकिन फिर मैंने इसके बारे में सोचा। मैंने देखा कि किस तरह से इस गुस्से के रिएक्शन सामने आ रहे हैं। बॉलिवुड स्टार सलमान खान ने कहा कि वो आतिफ असलम को उनकी फिल्म का हिस्सा नहीं बनने देंगे। अजय देवगन, अक्षय कुमार, अनुपम खेर, सभी ने एकसुर में कहा कि बॉलिवुड को किसी भी पाकिस्तानी के साथ काम नहीं करना चाहिए।

यहां सवाल ये है कि जब मुंबई हमला हुआ, उरी हमला हुआ, कहा गया कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह का सांस्कृतिक आदान-प्रदान बंद किया जाना चाहिए। अब न तो मैं युद्धविरोधी हूँ और न ही युद्ध चाहता हूं। मेरी दिलचस्पी समाधान खोजने में है। क्योंकि जब कारगिल युद्ध हुआ था तो हमने क्या किया? हमने ऑपरेशन पराक्रम चलाया, करीब एक महीने तक हमारी सेना सीमा पर तैनात रही। क्या हमें कोई क्लाइमैक्स मिला, नहीं। इस स्टोरी में कोई क्लाइमैक्स नहीं था। जब मुंबई हमला हुआ, तब क्या हुआ? फिर से कहा गया कि ईंट का जवाब पत्थर से दो, हमें दुश्मन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। एक बार फिर हम दहाड़े, लेकिन हमने काटने से मना कर दिया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार यह कह रहे हैं कि वो न केवल दहाड़ लगायेंगे, बल्कि दुश्मन पर वहां वार करेंगे, जहां उसे सबसे ज्यादा चोट पहुंचे। आप उन्हें लगातार चोट पहुंचाते रहें, लेकिन क्या आपको समाधान मिलेगा? लगभग सभी रक्षा विशेषज्ञ, पूर्व सैन्य अधिकारियों का यही मानना है कि कश्मीर विवाद में सेना को समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सेना केवल एक बैकअप हो सकती है, लेकिन दीर्घकालीन राजनीतिक समाधान प्रदान नहीं कर सकती। क्या हम अपने पड़ोसी के अस्तित्व को नज़रंदाज़ करके राजनीतिक समाधान प्राप्त कर सकते हैं?

यदि मैं अपनी आँखें बंद कर लूँ तो क्या मैं अपने आसपास को बदल सकता हूं? इसका ये मतलब भी नहीं है कि मैं अपने इकोसिस्टम को बदलने में सक्षम हो सकूंगा। हमने मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा पाकिस्तान से वापस ले लिया है। हमने कहा है कि हम पाकिस्तान से कोई व्यावसायिक रिश्ता नहीं रखेंगे। लेकिन आखिरी में हम एक ऐसे देश की बात कर रहे हैं, जिसका सालाना रक्षा खर्च हमारे मुकाबले 300 गुना कम है। क्या फिर भी हमें पाकिस्तान पर हमला करने के बारे में सोचना चाहिए? मुझे लगता है कि ऐसे समय में जब हम सभी दुखी हैं,आहत हैं, हमें दीर्घकालीन समाधान तलाशने पर ध्यान देना होगा। दीर्घकालीन समाधान की बात तभी आती है, जब आप सबसे ज्यादा आहत महसूस करते हैं। कहा जाता है कि ‘बदला एक ऐसा व्यंजन है, जिसे ठंडा करके परोसना अच्छा रहता है’। लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि क्या बदला लेने से इस बात की गारंटी मिल जाएगी कि हम पुन: ऐसी स्थिति में नहीं होंगे? इस सवाल का जवाब आख़िरकार यही है कि हमारी दीर्घकालीन पाकिस्तानी नीति क्या होनी चाहिए? और मेरा मानना है कि हमें अब भी पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए। हां, हम नहीं जानते कि इमरान खान पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं और हमने किसी भी पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं किया है, लेकिन फिर भी हमें यह सोचना होगा कि बातचीत के लिए माहौल कैसे निर्मित किया जाए?

(लेखक के विडियो के आधार पर ये लेख तैयार किया गया है)

भूपेंद्र चौबे की ये बात देखने के लिए नीचे विडियो पर क्लिक कीजिए...


टैग्स भूपेंद्र चौबे पुलवामा हमला
सम्बंधित खबरें

AI पर नियंत्रण करना भी बेहद आवश्यक: रजत शर्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है।

2 hours ago

रामबहादुर राय-पत्रकारिता क्षेत्र में शुचिता और पवित्रता के जीवंत व्यक्तित्व

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वे शीर्ष नेताओं में थे। जब पत्रकारिता में आए तो शीर्ष पत्रकार बने। आज की भारतीय पत्रकारिता में उन सरीखे सम्मानित और सर्वस्वीकार्य नाम बहुत कम हैं।

2 hours ago

भविष्य को आकार देने की कोशिश कर रहा है भारत: राहुल कंवल

यदि कुछ समय के लिए राजनीति को अलग रख दें, तो एक बात स्पष्ट है। भारत की एआई रणनीति (AI strategy) की सफलता में हमारे सामूहिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निहित है।

1 day ago

मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन

आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।

1 day ago

प्रवक्ता, अहंकार और संवाद की संवेदनहीनता का सबक: नीरज बधवार

चूंकि समाज के अवचेतन में अंग्रेज़ी को लेकर एक हीन भावना मौजूद है, इसलिए जो व्यक्ति अंग्रेज़ी में प्रभावशाली ढंग से बोल लेता है, वह अक्सर खुद को विद्वान भी मान बैठता है।

2 days ago


बड़ी खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 day ago

AI बना सकता है भारत को दुनिया की क्रिएटिव कैपिटल: उदय शंकर

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने कहा कि अब भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर में है।

15 hours ago

ENIL के प्रमोटर ढांचे में जल्द होगा बड़ा बदलाव, NCLT के बाद अब CCI की भी मंजूरी

एफएम चैनल ‘रेडियो मिर्ची’ का संचालन करने वाली कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) के कॉर्पोरेट ढांचे में बड़ा बदलाव अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।

1 day ago

Decode ने पूरे किए 200 एपिसोड: यूट्यूब व्यूज़ और सब्सक्राइबर में बना नंबर 1

डीडी न्यूज के प्राइम टाइम शो डिकोड विद सुधीर चौधरी ने 200 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। यूट्यूब पर मिले कुल व्यूज़ में इसका योगदान 74 प्रतिशत और नए सब्सक्राइबर में 75 प्रतिशत रहा।

21 hours ago

AI में 10 लाख करोड़ का निवेश करेगी रिलायंस: मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी ने AI क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया। जियो सस्ता और सुलभ इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा, जिससे भारत को इंटेलिजेंस के नए युग से जोड़ने की तैयारी है।

1 day ago