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युद्ध से ज्यादा खतरनाक उसका उन्माद है, बोले वरिष्ठ पत्रकार विजय विद्रोही
विजय विद्रोही एग्जिक्यूटिव एडिटर, एबीपी न्यूज ।। कुछ दिन पहले मैंने लिखा था कि लड़ाई से ज्यादा खतरनाक उसका उन्माद होता है। इसके पीछे था 1971 की लड़ाई के बाद का
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
विजय विद्रोही
एग्जिक्यूटिव एडिटर, एबीपी न्यूज ।।
कुछ दिन पहले मैंने लिखा था कि लड़ाई से ज्यादा खतरनाक उसका उन्माद होता है। इसके पीछे था 1971 की लड़ाई के बाद का एक अनुभव। उस समय मैं छह साल का था। पिता वायु सेना में थे और हम एयर फोर्स स्टेशन हिंडन, गाजियाबाद में रहा करते थे।
लड़ाई खत्म हो चुकी थी, हर रोज सुबह एक फौजी ट्रक आता था। महिलाएं अपने बच्चों के साथ वहां पहले से ही आकर इंतजार करने लगती थी। उसमें मेरी मां भी होती थी। ट्रक से लड़ाई पर गए फौजी उतरते थे, जिसका पति उतरता था उसकी पत्नी की खुशी के मारे रुलाई फूट पड़ती थी। बच्चे दौड़ कर पिता से लिपट जाते थे।
ट्रक खाली होता जाता था। फौजी अपने परिवार वालों के साथ घर चले जाते थे, लेकिन वहां कुछ औरते फिर भी खड़ी मिलती थी। बच्चों का हाथ थामे। यह वह औरतें होती थी जिनके पति उस दिन लड़ाई से नहीं लौटे थे। बहुत ही थके कदमों से यह महिलाएं घर लौटती थीं। उनकी भी रुलाई फूटती थी। अगले दिन फिर उन्हीं महिलाओं को बच्चों के साथ ट्रक का इंतजार करते देखा जा सकता था।
यह मंजर भूल नहीं पाता, जब भी कोई लड़ाई की बात करता है। इस समय भी बहुत सी पत्नियां पति के घर लौट आने का इंतजार कर रही है जो सीमा पर चौकसी दे रहे हैं। बहुस से बच्चे हैं जो उसी तरह इंतजार कर रहे हैं जैसा कि मैंने 1971 में किया था। ऐसे परिवारों से पूछिए लड़ाई का उन्माद कैसे तोड़के रख देता है उनको।
(साभार: फेसबुक वॉल से)
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