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ये एंकरिंग नहीं आसां, इत्ता समझ लीजे...
सुरजीत सिंह व्यंग्यकार ।। ये एंकरिंग नहीं आसां, इत्ता समझ लीजे न्यूज चैनलों पर एंकरिंग करना अब युद्ध लड़ने से भी ज्यादा जोखिम का काम हो गया है। जो काम सीमा
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
सुरजीत सिंह
व्यंग्यकार ।।
ये एंकरिंग नहीं आसां, इत्ता समझ लीजे
न्यूज चैनलों पर एंकरिंग करना अब युद्ध लड़ने से भी ज्यादा जोखिम का काम हो गया है। जो काम सीमा पर सैनिक कभी-कभार करता है, एंकर स्टूडियो में उससे रोज दो-चार होता है। गोया सैनिक सीमा पर अटल, अविचल, धीर-गंभीर, बुद्धू सी शांति के साथ खड़ा है और स्टूडियो में एंकर युद्धोन्मादी हुआ जाता है- हाय, माहौल तो पूरा रच दिया, फिर भी युद्ध शुरू क्यों नहीं हो रहा!
अभी भारत-पाक के बीच तनाव का माहौल बना, चैनलिया एंकर उसे युद्ध के हालात तक खेंच ले गए। स्टूडियो वॉर रूम बन गए। लगा, बस अभी युद्ध की घोषणा होने वाली है। शुक्र है कि अभी, उन्हें युद्ध संबंधी डिसीजन लेने की पावर नहीं, वरना अब तक तो ये धरती से पाकिस्तान का नामोनिशान मिटवा चुके होते।
खैर, जिस प्रकार दिन-प्रतिदिन न्यूज प्रजेंटेशन में नए–नए प्रयोग किए जा रहे हैं, एंकर्स की बड़ी आफत हो रही है। अभी ओलंपिक निपटा नहीं था, खेल के मैदान में स्टूडियो के सेट किसी और स्टूडियो में तब्दील हुए भी नहीं थे, एंकर्स स्पोर्ट्स तक बदली नहीं थी कि एकाध युद्ध का माहौल हो उठा। आनन-फानन में एंकर स्टूडियो को युद्ध के मैदान में तब्दील कर धमचक मचाने लगे। एंकर को खिलाड़ी से सैनिक तक, सब होना पड़ता है, सिवाय खबरनवीस के। ओलंपिक की खबरों में एंकर खिलाड़ियोचित मुद्रा में थे, बाढ़ आई तो नदी के बीचोंबीच नाव पर खड़े मिले और रेस्क्यू की खबरों में हेलिकॉप्टर में लद गए। पूछने पर एक एंकर ने बताया- पब्लिक की भारी डिमांड के चलते खबर की स्टाइल में सीन रचने पड़ते हैं।
मैंने कहा- इस स्टाइल में तो रेप, सेक्स स्कैंडल आदि की खबरों में सीन रचने पर तो दुविधा में होते होंगे? उम्मीद थी, वे झेपेंगे, मगर वो एंकर ही क्या जो झेंप जाए। पूरे कॉन्फिडेंस से बोले- नो कन्फ्यूजन, स्कैंडल की न्यूज में एंकर बीच-बीच में लंबी सांस भरते हुए हौले-हौले खबर पढ़ता है, हर दूसरी पंक्ति पर कहना नहीं भूलता कि सीडी में सीन इत्ते आपत्तिजनक हैं कि हम दर्शकों को दिखा भी नहीं सकते। बाकी काम स्क्रीन पर चलता लाल रंग का गोल घेरा कर देता है।
उनकी बात सुन मुझे लगा कि शायर गलत लिख गए कि ‘ये इश्क नहीं आसां, इतना समझ लीजे, बाढ़ का पानी है डूब के जाना है’।
(साभार: नईदुनिया)
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