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रोहित सरदाना का सवाल: आतंकियों को सम्मानजनक अंतिम क्रिया का अधिकार क्यों?
रोहित सरदाना आउटपुट एडिटर व एंकर, जी न्यूज ।। उड़ी में सेना कैम्प पर हमला करने वाले 4 आतंकवादियों को दफनाए जाने के बाद फिर ये बहस तेज है कि आतंकवादियों को सम्मानजनक अंतिम क्रिया का अधिकार क्यों दिया जाए? इस्ला
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
रोहित सरदाना आउटपुट एडिटर व एंकर, जी न्यूज ।।
उड़ी में सेना कैम्प पर हमला करने वाले 4 आतंकवादियों को दफनाए जाने के बाद फिर ये बहस तेज है कि आतंकवादियों को सम्मानजनक अंतिम क्रिया का अधिकार क्यों दिया जाए?
इस्लामिक विद्वान तारेक फतह कहते हैं कि इस्लाम की आड़ में आतंक फैलाने वालों को जन्नत और हूरें मिलने की बात कह कर बरगलाया जाता है। इसलिए वो रास्ता ही बंद कर देना चाहिए। ऐसे आतंकवादियों को जला दिया जाना चाहिए। तारेक फतह तो इससे भी एक कदम आगे जा कर इज़रायल की सोच पर चलने की सलाह देते हैं जहां आतंकवादियों के शवों पर सुअर की चर्बी का तेल डाल कर आग लगाई जाती है।
लेकिन क्या भारत के संदर्भ में ये सब संभव है? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और डिप्लोमेट रहे मीम अफज़ल को लगता है कि दफनाने की बजाए जलाने का मतलब होगा हिंदू रीति रिवाज़ का अपमान करना, क्या बहुसंख्यक हिंदू ये स्वीकार कर पाएंगे कि किसी आतंकवादी का अंतिम संस्कार हो ?
बीजेपी के साक्षी महाराज को लगता है कि आतंकवादियों के शवों को चौराहे पर जला दिया जाना चाहिए। पर क्या हम सऊदी अरब, ईरान या ईराक हैं?
अलग अलग विचार होने के बावजूद – राजनीतिक पार्टियां एक बात पर एकमत हैं कि ये मामला बड़ा ‘सेंसिटिव’ है। इस पर बड़ी गंभीरता से सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए। वरना लोगों की भावनाएं आहत होंगी।
मैं तब से यही सोच रहा हूं कि आतंकवादी के शव को कैसे रफा-दफा करना है, इस पर भी अगर हमारी भावनाएं आहत होंगी तो हम किस मुंह से आतंकवाद के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस का दावा करते हैं?
(साभार: फेसबुक वॉल से)
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