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ये जीडीपी क्या है: पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

सरकार दावा करती है कि भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी तो इसका मतलब यह होता है कि GDP को जोड़ 5 ट्रिलियन डॉलर होगा। अभी यह जोड़ क़रीब 4 ट्रिलियन डॉलर है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

भारत सरकार ने शुक्रवार को पिछले पूरे वित्त वर्ष और मार्च को ख़त्म तिमाही के आँकड़े जारी किए हैं। इन आँकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों ने दावे किए हैं। हिसाब किताब करेंगे इन आँकड़ों का। GDP को आप अर्थव्यवस्था का परीक्षा परिणाम कह सकते है। अर्थव्यवस्था की स्थिति का अंदाज़ा GDP के आँकड़ों से पता चलता है। अच्छी है या ख़राब।

पूरे वर्ष में हम सबके, सब कंपनियों और सरकार के खर्च का जोड़ मिलकर मोटे तौर पर बनता है GDP, यह जोड़ मान लीजिए पिछले साल ( 2023-24) ₹100 था और इस साल (2024-25) ₹106.5 हो गया तो GDP ग्रोथ रेट 6.5% रहा। सरकार दावा करती है कि भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी तो इसका मतलब यह होता है कि GDP को जोड़ 5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। अभी यह जोड़ क़रीब 4 ट्रिलियन डॉलर है। GDP के इस जोड़ में अमेरिका और चीन हमसे बहुत आगे है मतलब नंबर एक और दो पर, फिर बारी आती है जर्मनी और जापान की।

नीति आयोग के CEO ने यह कहने में जल्दबाज़ी कर दी कि भारत चौथे स्थान पर पर आ गया है। अब सरकार के वित्तीय सलाहकार कह रहे हैं कि हम साल के अंत तक जापान से आगे निकल जाएँगे। GDP को खाने की थाली मान लें तो चीन की थाली हमसे पाँच गुना बड़ी है। खाने वाले लोग लगभग उतने ही है तो किसके हिस्से में ज़्यादा खाना (पैसा) आएगा। अमेरिका की थाली हमसे आठ गुना बड़ी है जबकि वहाँ खाने वाले हैं हमसे क़रीब पाँच गुना कम।

यही कारण है कि अमेरिकी लोग हमारी तुलना में 30 गुना अधिक समृद्ध है। हम जापान, जर्मनी या ब्रिटेन जैसे देशों को थाली के आकार (GDP) में पीछे छोड़ कर खुश हो सकते है लेकिन यह नहीं भूलें कि उनके देश में खाने वालों की आबादी महाराष्ट्र जैसे राज्य से भी कम है। यही कारण है कि IMF के मुताबिक़ प्रति व्यक्ति आय में हमारी रैंकिंग 142 नंबर है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत इस साल भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। यह सही है लेकिन वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया कि चार साल में भारत की सबसे कम ग्रोथ है।

ऊपर लिखे बिंदु से आप समझ ही गए होंगे कि चीन भले ही 5% से बढ़े तब भी वो हर साल ज़्यादा GDP जोड़ रहा है या अमेरिका 2% से बढ़े क्योंकि उनकी थाली हमसे कई गुना ज़्यादा बड़ी है। GDP के आँकड़े अर्थव्यवस्था का रिज़ल्ट मानें तो यह अच्छी ख़बर है। साल के पहले 6 महीनों में अर्थव्यवस्था की स्थिति ख़राब थी। आख़िरी 6 महीनों में रफ़्तार पकड़ी। यह रफ़्तार बनी रहीं तो आपकी आमदनी बढ़ेगी, नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ महंगाई कम हुई है। इस कारण आपके हाथ में पैसा ज़्यादा रहेगा।

रिज़र्व बैंक इस हफ़्ते मीटिंग करेगी और बहुत संभव है कि रेट कट होगा। इससे आपकी EMI कम होने की उम्मीद है। शेयर बाज़ार के लिए भी अच्छी ख़बर है क्योंकि लोगों की खपत बढ़ेगी तो कंपनियों का माल बिकेगा। माल बिकने से फ़ायदा बढ़ेगा। शेयर बाज़ार यही चाहता है कि कंपनियों का मुनाफ़ा बढ़ता रहें। प्रधानमंत्री बार बार 2047 विकसित भारत बनाने की बात कर रहे हैं तो फिर क्या भारत अगले 20-22 साल में वहाँ पहुँच जाएगा।

वहाँ पहुँचने के लिए हमारी प्रति व्यक्ति आय को पाँच से छह गुना बढ़ाना पड़ेगा। नीति आयोग, रिज़र्व बैंक की अलग अलग रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि हर साल 7% से ज़्यादा ग्रोथ के साथ यह संभव है। इस साल तो हम उससे नीचे है और जैसे जैसे अर्थव्यवस्था यानी थाली का आकार बढ़ता जाएगा इस रफ़्तार को बनाने में अड़चनें आ सकती है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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