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‘द लल्लनटॉप’ से सौरभ द्विवेदी की विदाई की कहीं ये बड़ी वजहें तो नहीं!
‘इंडिया टुडे’ समूह के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म ‘द लल्लनटॉप’ (The Lallantop) और इंडिया टुडे (हिंदी) के एडिटर पद से सौरभ द्विवेदी की विदाई को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
‘इंडिया टुडे’ समूह के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म ‘द लल्लनटॉप’ (The Lallantop) और इंडिया टुडे (हिंदी) के एडिटर पद से सौरभ द्विवेदी की विदाई को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। ये सभी अपनी-अपनी पोस्ट के माध्यम से दिल के उद्गार व्यक्त करने में लगे हुए हैं और इस्तीफे के वजह को लेकर अपना आकलन करते हुए अपनी बातों को सही साबित करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की सूचना देने के अलावा सौरभ ने इस तरह की पोस्ट्स पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है।
फिर भी जब इस्तीफा हुआ है और जो इतना चर्चा में है तो इसके पीछे कुछ ठोस वजहें भी जरूर रही होंगी। हालांकि, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने साफ कहा है कि सौरभ नए क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स (ग्रुप से बाहर) पर काम करना चाहते थे।
सौरभ द्विवेदी ने इस्तीफा भले ही अब दिया हो, लेकिन करीब एक साल पहले ही इस फैसले की नींव डल गई थी। उस समय मीडिया गलियारों में सुगबुगाहट थी कि सौरभ द्विवेदी ने ‘इंडिया टुडे’ समूह से इस्तीफा दे दिया है। कहा यह भी जा रहा था कि संस्थान ने सौरभ द्विवेदी से उनका विकल्प मिलने तक फिलहाल अपने पद पर बने रहने के लिए कहा था। उस समय सूत्रों का कहना था कि सौरभ द्विवेदी अब अपनी पत्रकारिता से थोड़ा हटकर कुछ नया करना चाहते हैं और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं।
इन चर्चाओं का ही असर था कि पिछले साल लगभग इसी समय यानी छह जनवरी को समाचार4मीडिया ने इंडिया टुडे और सौरभ द्विवेदी को एक मेल लिखा था और इन चर्चाओं का हवाला देते हुए उस पर प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन दोनों ही ओर से आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई थी।
ऐसे में समाचार4मीडिया की ओर से इन चर्चाओं पर किसी तरह की मुहर नहीं लगाई जा सकी थी। अब जबकि सौरभ द्विवेदी ने नए साल की शुरुआत में इस समूह से अपने 12 साल के सफर को विराम देने की औपचारिक घोषणा कर दी है तो यह मामला एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया है।
बता दें कि मीडिया की दुनिया में एक अलिखित सच्चाई हमेशा रहती है कि चाहे कोई कितना भी लोकप्रिय हो जाए, यदि वह खुद को संस्थान से बड़ा समझने लगता है तो संस्थान भी समय आने पर उसे ‘आईना’ दिखाने से नहीं चूकता। पहले भी तमाम मीडिया संस्थानों में इस तरह के मामले सामने आए हैं, जिन पर फिर कभी चर्चा करेंगे।
हमने उपरोक्त बातों का हवाला इसलिए दिया है कि सौरभ के मामले में भी कुछ इसी तरह की प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं, जिन्होंने उनके इस्तीफे में अहम भूमिका निभाई।
आइए डालते हैं इन संभावित प्रमुख वजहों पर एक नजर:
भविष्य की योजनाओं में अंतर:
सौरभ द्विवेदी के 'द लल्लनटॉप' से अलग होने की एक प्रमुख वजह उनकी भविष्य की योजनाओं और संस्थान की प्राथमिकताओं में उभरता अंतर था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सौरभ लंबे समय से पत्रकारिता से आगे बढ़कर कंटेंट क्रिएशन और क्रिएटिव क्षेत्रों में नए विकल्प तलाश रहे थे। उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा में एक छोटे ब्रेक के बाद 'नई यात्रा' शुरू करने का संकेत दिया, जो संभवतः एक नया मीडिया वेंचर या स्वतंत्र प्रोजेक्ट हो सकता है। संस्थान यानी इंडिया टुडे ग्रुप, मौजूदा डिजिटल फ्रेमवर्क पर फोकस कर रहा था, जहां सौरभ की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं फिट नहीं हो रही थीं। यह अंतर धीरे-धीरे बढ़ा, जो अंततः अलगाव का कारण बना।
संस्थागत संरचना और भूमिका का टकराव:
दूसरी वजह संस्थागत संरचना और सौरभ की भूमिका के बीच उभरा टकराव माना जा रहा है। 'द लल्लनटॉप' की लोकप्रियता बढ़ने के साथ प्लेटफॉर्म की ब्रैंडिंग काफी हद तक सौरभ-केंद्रित हो गई, जो कॉरपोरेट मीडिया हाउस के लिए व्यक्ति केंद्रित होने की वजह से चुनौतीपूर्ण साबित होती जा रही थी। इंडिया टुडे ग्रुप जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में भूमिकाएं और अधिकार स्पष्ट रूप से परिभाषित होते हैं और जब कोई प्लेटफॉर्म एक व्यक्ति से अत्यधिक जुड़ जाता है, तो प्रबंधन इसे बैलेंस करने के लिए कदम उठाता है। दरअसल, तमाम लोग इस प्लेटफॉर्म को सौरभ का निजी प्लेटफॉर्म मानने लगे थे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सौरभ भी कुछ ऐसा ही समझने लगे थे और वह संस्थान की नीतियों-रीतियों को भी दरकिनार करने लगे थे, जो मैनेजमेंट को अखर भी रहा था। मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति असहजता पैदा कर रही थी। यह टकराव पिछले एक साल से बन रहा था, जिसने अंततः इस्तीफे का रूप ले लिया।
संपादकीय स्वतंत्रता और अनुशासन में मतभेद:
तीसरी वजह संपादकीय स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच मतभेद माने जा रहे हैं। बीते महीनों में कई घटनाक्रमों ने इस अंतर को उजागर किया, जैसे बॉलिवुड अभिनेता आमिर खान के विशेष इंटरव्यू में प्रक्रियाओं का पूरा पालन न होने की बात। यानी सौरभ ने ग्रुप को इस बारे में न तो जानकारी दी और न ही पूर्व अनुमति ली। कहा यह भी जा रहा है कि सौरभ ने कुछ कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में टॉप मैनेजमेंट की अनुमति के बिना भाग लिया, जिससे अनुशासन संबंधी मुद्दे उठे। नदवी-जावेद अख्तर डिबेट को लेकर भी लोग तमाम बातें कर रहे हैं। सौरभ ने इस कार्यक्रम में मॉडरेटर की भूमिका निभाई, जहां 'Does God Exist?' (क्या ईश्वर है?) जैसे संवेदनशील विषय पर जावेद अख्तर और मुफ्ती शमैल नदवी के बीच बहस हो रही थी। कहा जा रहा है कि इस डिबेट की रिकॉर्डिंग भी बिना अनुमति 'लल्लनटॉप' पर प्रसारित कर दी गई, जो तमाम लोगों को रास नहीं आई। हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि संस्थान ने इन फैसलों को प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं माना, जबकि सौरभ की स्टाइल स्वतंत्र और बोल्ड थी। इंडस्ट्री सूत्र इसे बढ़ती असहमतियों का नतीजा मानते हैं, जो अंततः अलगाव का कारण बने।
अब सौरभ द्विवेदी का इंडिया टुडे समूह से इस्तीफा हो चुका है, पर अब भी यह तय नहीं है कि क्या वास्तव में वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में जाएंगे। हालांकि, ‘चंद्रयान’ फिल्म के ट्रेलर में उनकी एक झलक देखने को तो मिली है। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि सौरभ का यह फैसला उन्हें किस मुकाम पर ले जाएगा।
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