होम / विचार मंच / कोर्ट की प्राथमिकता कुत्ते या सामान्य नागरिकों का हित: आलोक मेहता

कोर्ट की प्राथमिकता कुत्ते या सामान्य नागरिकों का हित: आलोक मेहता

सुप्रीम कोर्ट ने यह क्लियर किया कि उसने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का आदेश नहीं दिया है; बल्कि इसके निर्देश का उद्देश्य है कि नियमों के मानवतावादी और वैज्ञानिक प्रबंधन को लागू किया जाए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

आलोक मेहता, पद्मश्री, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।

राजधानी दिल्ली ही नहीं देश के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं के कारण हो रही समस्या गंभीर होने से अदालतों के सामने पहुँच गई हैं। दुर्भाग्य की बात है कि कुछ संगठन, नेता, संपन्न लोग और कानूनविद भी आवारा कुत्तों के बचाव में सुप्रीम कोर्ट में जाकर खड़े हो गए हैं। इसलिए सवाल उठ रहा है कि समाज, सरकार और कोर्ट की प्राथमिकता क्या हो?

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में स्वतः आवारा कुत्तों और उनकी वजह से हो रहे कटने, रेबीज़ संक्रमण और सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों पर सुनवाई शुरू की। अदालत ने हालांकि शुरू में यह कहा कि यह एक मामूली मामला नहीं है; इसके पीछे “सार्वजनिक सुरक्षा और मूल अधिकार (Article 21)” की गंभीरता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट-बेंच ने कहा: “कुत्ता इंसान के डर को सूंघकर हमला कर सकता है।” “हम किसी इंसान के मन को नहीं पढ़ सकते कि कुत्ता काटेगा या नहीं।” “सड़कों पर आवारा कुत्ता न केवल काटता है, बल्कि वाहन चालकों/साइकिल के साथ भिड़ंत कर देता है।”

“अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा पहले है।” सुप्रीम कोर्ट ने यह क्लियर किया कि उसने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का आदेश नहीं दिया है; बल्कि इसके निर्देश का उद्देश्य है कि नियमों के मानवतावादी और वैज्ञानिक प्रबंधन को लागू किया जाए। भारत सरकार के स्वास्थ्य डेटा के मुताबिक़ कुत्ता काटने डॉग बाइट के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं: 2022: 21,89,909, 2023: 30,52,521, 2024: 37,15,713, 2025 (जनवरी 2026 तक): 4,29,664 मामले दर्ज हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में कुत्ता काटना एक महामारी-स्तरीय समस्या बन चुका है। दिल्ली अकेले ही उजागर करता है कि संकट कितनी गहरा है। 2022 में ~6,691 काटने की रिपोर्ट, 2023 में 17,874, 2024 में ~25,210, 2025 (जनवरी तक) 3,196 मामले दर्ज हैं। कुत्ता काटने के बाद सबसे गंभीर स्वास्थ्य खतरा है रेबीज़ (Rabies) — ऐसा वायरल संक्रमण जो औसत में 100% मृत्यु दर तक ले जाता है।

अगर समय पर Post-Exposure Prophylaxis (PEP) न मिले। भारत विश्व में आधे से ज़्यादा रेबीज़ मामलों का केंद्र है, जहाँ वैज्ञानिक रिपोर्टों के हिसाब से अनुमानित 5,000 से अधिक लोग हर साल इसी कारण मरते हैं। कुत्ता काटने के बाद इम्यूनोग्लोबुलिन + वैक्सीन शॉट की ज़रूरत होती है।

पहले 11 अगस्त 2025 को दो-न्यायाधीश की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली-राजधानी क्षेत्र से सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में पकड़ा जाए, उन्हें शेल्टर होम में भेजा जाए, शेल्टर में नसबंदी, टीकाकरण हो, कुत्तों को वापस सड़कों पर नहीं छोड़ा जाए। यह आदेश भारी चर्चा और डॉग लवर्स के विरोध के बीच आया। फिर फैसले को पुनः समीक्षा के लिए तीन-जजों की बेंच को सौंपा गया जिसमें नसबंदी + टीकाकरण + लागू करने पर विचार हुआ। कोर्ट ने रैबीज़/आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखने पर ज़ोर दिया। अस्पताल की गैलरियों आदि में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर रोक लगाई गई।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा जानवर सिर्फ काटने तक सीमित नहीं हैं। वे वाहन चालकों के बीच सीधी दुर्घटनाएँ भी कराते हैं। कई बाइक/कार जैसे वाहन अचानक सामने आने वाले कुत्तों या ग़ायों से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर चोटें/मौत हो जाती हैं। कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य मार्गों से गाय-भैंसे और अन्य जानवर हटाए जाएं। हर 10-15 किमी पर 24×7 पेट्रोल टोल और हेल्पलाइन स्थापित हो, रोड साइन, चेतावनी बोर्ड और अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय हो।

आवारा कुत्तों, सड़क पर घूमते अन्य जानवरों और उनसे जुड़े बैरो (रैबीज़) तथा सड़क दुर्घटना मुद्दे को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निजी भावनाओं के ऊपर “सार्वजनिक सुरक्षा और वैज्ञानिक समाधान” को प्राथमिकता दी है। कोर्ट ने ABC नियमों को लागू करने पर जोर दिया है। रोड से पशु हटाने की व्यवस्थाएँ की जानी चाहिए। काटने के बाद रैबीज़ प्रोटोकॉल सुव्यवस्थित होना चाहिए। राज्यों को अपनी योजनाओं की जवाबदेही तय करनी चाहिए। यह मामला सिर्फ कुत्तों का नहीं — सामान्य जनता की जीवन रक्षा, स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षितता का है।

भारत की अदालतों में लगभग 5.41 करोड़ से ऊपर मुकदमे लंबित हैं। यह संख्या सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला/अधीनस्थ अदालतों का कुल मिलाकर आंकड़ा है। सरकारी और अदालती रिकार्ड्स के अनुसार 2025-26 में सुप्रीम कोर्ट में लगभग 90,000 से 92,000 केस लंबित हैं। हाई कोर्ट (सभी 25 उच्च न्यायालय) में लगभग 63 लाख से 65 लाख मामले विचाराधीन हैं।

जिला और अधीनस्थ न्यायालय लगभग 4.8 से 4.9 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। इसका मतलब है कि कुल मामलों का लगभग 90% हिस्सा जिला अदालतों में लंबित है, और केवल एक छोटा हिस्सा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचता है। पिछले कुछ वर्षों में नए मुकदमों की संख्या बढ़ने के साथ पुरानी पेंडेंसी भी बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट के मामलों में लगभग 30% की वृद्धि 2021 के बाद से देखी गयी है, और निचली अदालतों में तो हजारों कारणों से लंबित मामलों का ढेर बढ़ा है।

लंबित मामलों की वृद्धि केवल संख्या नहीं है — यह समस्या जटिलताओं की वजह से भी है: बहुत से केस आसान नहीं होते — उनका तथ्य, गवाह और सबूत कठिन होता है, बार-बार तारीख बदलना स्थगन कोर्ट कार्यवाही को धीमा करता है, प्राथमिक साक्ष्य, अफ़सरों की उपलब्धता और पारिवारिक मतभेद जैसे कारण भी देरी बढ़ाते हैं। राज्य सरकारों, केंद्रीय संस्थान एजेंसियों के आपसी विवाद ही लटके रहते हैं। अदालतों में कुछ मुकदमे दशक या सदी से भी ऊपर समय से लंबित हैं।

2025-26 की स्थिति के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या लगभग 34 है और इस समय सभी कार्यरत हैं। लेकिन देश के हाई कोर्ट्स में लगभग 300 से अधिक जजों के स्थान खाली हैं। निचली जिला अदालतों में भी हजारों पद रिक्त हैं। विभिन्न राज्यों में 1000 से ऊपर जजों की रिक्त संख्या बतायी जाती है, जैसे उत्तर प्रदेश में 1055, गुजरात में 535, मध्य प्रदेश में 384 आदि रिक्त स्थान हैं। यह स्थिति बताती है कि कोर्ट में आज भी बहुत कम जज हैं, जबकि हर साल नए मामले दर्ज होते जाते हैं।

जजों की नियुक्ति मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम व्यवस्था के तहत होती है, जिसमें मुख्य न्यायधीश और वरिष्ठ जज मिलकर नाम तय करते हैं। फिर यह नाम सरकार को भेजा जाता है — जहाँ समीक्षा, सत्यापन और अनुमोदन के लिये काफी समय लगता है। कई बार कॉलेजियम ने नाम भेजे, लेकिन सरकार ने अतिरिक्त प्रश्न पूछे या इसे नज़र में देर कर दी, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया महीनों तक रुकी रहती है।

कभी-कभी सिफारिश किये गये नामों पर अन्य जजों या पार्टियों के विवाद/आक्षेप उठते हैं, जिससे प्रक्रिया को और समय लगता है। इन सभी कारणों से जजों की नियुक्ति में महीनों से लेकर कभी-कभी सालों तक की देरी हो जाती है — जिससे रिक्त पद और देर से भरे जाते हैं, जबकि कार्यभार बढ़ता जा रहा होता है। सवाल यही है कि सत्ता व्यवस्था और समाज की प्राथमिकता क्या हो?

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


टैग्स
सम्बंधित खबरें

क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान को हरा पाएगा: रजत शर्मा

तालिबान ने कहा कि उसके हमले में 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, इनमें से 23 सैनिकों की लाशें भी अफगान लड़ाके अपने साथ अफगानिस्तान ले गए।

15 hours ago

2028 तक AI से बाज़ार में बर्बादी? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

अमेरिका में 100 में से 10 लोग जो white collar jobs करते हैं वो कुल खपत का 50% खर्च करते हैं। उदाहरण दिया गया है कि डेटा सेंटर में काम कर रहे एजेंट काम तो करेंगे लेकिन वो खर्च नहीं करेंगे।

1 day ago

वंदे मातरम् के खंडित स्वरूप पर सवाल : अनंत विजय

किसी कविता या गीत को खंडित करने का अधिकार रचनाकार के अलावा किसी अन्य को है? रचनात्मक संवेदना का सर्जनात्मक स्वतंत्रता की बात करनेवालों ने एक कृति को खंडित कर दिया।

1 day ago

शिक्षा के क्षेत्र में अराजकता की जिम्मेदारी किसकी: आलोक मेहता

मुख्य प्रश्न यही है, क्या इन गड़बड़ियों के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, या फिर मंत्रालय और उसके नेतृत्व को अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए?

1 day ago

PM मोदी की इजराइल यात्रा से किसे मिर्ची लगी: रजत शर्मा

दोनों देशों ने 27 समझौतों पर दस्तखत किए। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स और क्वांटम कंप्यूटिंग में नई टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे, आपसी सहयोग बढ़ाएंगे।

3 days ago


बड़ी खबरें

BSE व NSE ने इस मामले में 'बालाजी टेलीफिल्म्स' पर लगाया जुर्माना

टीवी और फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) पर स्टॉक एक्सचेंज ने जुर्माना लगाया है।

14 hours ago

मैडिसन मीडिया सिग्मा की CEO वनिता केसवानी ने छोड़ा पद

मीडिया इंडस्ट्री से एक बड़ी खबर सामने आई है। वनिता केसवानी ने मैडिसन मीडिया सिग्मा (Madison Media Sigma) के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है।

15 hours ago

क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान को हरा पाएगा: रजत शर्मा

तालिबान ने कहा कि उसके हमले में 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, इनमें से 23 सैनिकों की लाशें भी अफगान लड़ाके अपने साथ अफगानिस्तान ले गए।

15 hours ago

वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में शाजिया फ़ज़ल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) में शाजिया फ़ज़ल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है

15 hours ago

'वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी' खरीदने के बाद 'पैरामाउंट' पर चढ़ेगा 79 अरब डॉलर का कर्ज

मीडिया इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ी डील होने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 'पैरामाउंट' (Paramount) और 'वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी' (Warner Bros. Discovery) आपस में मर्ज होने वाले हैं

14 hours ago