होम / विचार मंच / ‘राष्ट्रीय सहारा' की परीक्षा में सुप्रिय का असफल होना, उस युग की एक दस्तक थी’

‘राष्ट्रीय सहारा' की परीक्षा में सुप्रिय का असफल होना, उस युग की एक दस्तक थी’

सुप्रिय की उपलब्धियां जानने के लिए कोई सर्च इंजन तलाशने की जरूरत नहीं, बल्कि फिलवक्त ‘आजतक’ जो भी है, उसमें सुप्रिय की निष्ठा, ईमानदारी और कर्मठता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

संस्थान के संगियों में एक और नाम है सुप्रिय प्रसाद। जिंदगी में ऐसे बहुत कम मौके आते हैं, जब मेरी भाषा और शैली, मेरी सोच, संवेदना और सृजनशीलता के सामने जवाब देने लगती है। आज अपने संस्थान के इस संगी सुप्रिय प्रसाद के बारे में लिखते हुए सालों बाद मेरी शब्द सम्पदा और शैली खुद को कमजोर महसूस कर रही है। मतलब सुप्रिय की उपलब्धि मेरी सोच, शैली और शब्द से बहुत आगे है।

आज हम सोचने को जरूर मजबूर हैं कि कार्यशैली के किस गुर ने सुप्रिय को इतना सफल और नामवर बनाया। एक प्रसंग याद करता हूं कि 1995 में दैनिक 'राष्ट्रीय सहारा' के उप संपादक (प्रशिक्षु) पद की जांच परीक्षा में सुप्रिय का असफल होना हम सहपाठियों के लिए खबर थी। मगर वह उसकी असफलता नहीं थी और न ही योग्यता, बल्कि जो भी हुआ, वह उस युग की एक दस्तक थी, जो युग सुप्रिय के नाम लिखा जाना था।

यह विचित्र संयोग है कि झारखण्ड से आईं दो हस्तियां लोकमानस में अपना विशिष्ट स्थान बनाकर देश-दुनिया और समाज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पहला-रांची के महेंद्र सिंह धोनी और दूसरा-दुमका शहर के सुप्रिय प्रसाद। आईआईएमसी से पत्रकारिता करने के बाद सुप्रिय प्रसाद ने कमर वहीद नकवी के अधीन एक ट्रेनी के तौर पर ‘आजतक’ जॉइन किया था। तब ‘आजतक’ एसपी सिंह के निर्देशन में ‘दूरदर्शन’ पर प्रसारित होने वाला एक बुलेटिन भर था। आज की तारीख में ‘टीवी टुडे’ ग्रुप के चारों चैनलों-‘आजतक’, ‘तेज’, ‘हेडलाइंस टुडे’ और ‘दिल्ली आजतक’ की जिम्‍मेदारी सुप्रिय के कंधों पर है। इसे कहते हैं सफलता।

करीब 25 साल पहले झारखंड के एक कस्बानुमा शहर दुमका के टीन बाजार से बतौर स्ट्रिंगर पत्रकारिता का अपना सफर शुरू करने वाले सुप्रिय आज हिंदी टीवी पत्रकारिता के उन चार संपादकों (आशुतोष, दीपक चौरसिया और अजीत अंजुम) में शुमार हैं, जिनके नाम से चैनल का रुतबा है। तभी तो टीवी की दुनिया में कहा जाता है कि सुपिय्र केवल टीआरपी मास्‍टर ही नहीं, बल्कि तकनीक के भी जानकार हैं। अपनी टीम से कैसे काम लिया जाता है, इसको भी वे भली-भांति जानते हैं। इससे आगे यह भी कहना ज्यादा मुनासिब होगा कि सुप्रिय की उपलब्धियां जानने के लिए कोई सर्च इंजन तलाशने की जरूरत नहीं, बल्कि फिलवक्त ‘आजतक’ जो भी है, उसमें सुप्रिय की निष्ठा, ईमानदारी और कर्मठता है। ‘आजतक’ का इतिहास सुप्रिय का इतिहास है।

जनसंचार संस्थान की एक घटना याद आती है। ‘दूरदर्शन’ के वरिष्ठ अधिकारी मयंक अग्रवाल आये थे-खोजी पत्रकारिता पढ़ाने और अभ्यास करवाने। विषय था ‘विमान खरीद सौदे में दलाली’। हमें उस दलाली का पर्दाफाश करना था। उस अभ्यास में जो टीम अव्वल रही, उसकी अगुआई सुप्रिय कर रहे थे।

सुप्रिय खबरों को जानने वाला और उनकी अहमियत समझने वाला इंसान है। इसी वजह से वह हिंदी टीवी पत्रकारिता का सबसे सफल और सिद्ध संपादक है। वह खबरों को जीवन मानता है, उनके लिए शिल्प सजाता है, जो शिल्प आपके जीवन का कोई हिस्सा है, अनदेखा हिस्सा। समय के साथ खबरें कैसे अपना रंग बदलती हैं, ढंग बदलती हैं और अपना तर्ज बदलती हैं, कोई सुप्रिय से पूछे। उसके लिए खबरों का ट्रीटमेंट पूजा है, इबादत है।

इसके बावजूद सुप्रिय की पत्रकारिता से जुडी कई ख्वाहिशें हैं, ढेरों मन्नतें हैं, जिन्हें वह पूरा करना चाहते हैं। हम मित्रों की दुआ है कि वे तमाम ख्वाहिशें सुप्रिय के कदम चूमें और मन्नतें उसका सिर चूमें।

(वरिष्ठ पत्रकार अमरेंद्र किशोर की फेसबुक वॉल से साभार)


टैग्स आजतक सुप्रिय प्रसाद अमरेंद्र किशोर
सम्बंधित खबरें

एआई पर नियंत्रण करना भी बेहद आवश्यक : रजत शर्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है।

1 hour ago

रामबहादुर राय - पत्रकारिता क्षेत्र में शुचिता और पवित्रता के जीवंत व्यक्तित्व

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वे शीर्ष नेताओं में थे। जब पत्रकारिता में आए तो शीर्ष पत्रकार बने। आज की भारतीय पत्रकारिता में उन सरीखे सम्मानित और सर्वस्वीकार्य नाम बहुत कम हैं।

1 hour ago

भविष्य को आकार देने की कोशिश कर रहा है भारत: राहुल कंवल

यदि कुछ समय के लिए राजनीति को अलग रख दें, तो एक बात स्पष्ट है। भारत की एआई रणनीति (AI strategy) की सफलता में हमारे सामूहिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निहित है।

1 day ago

मधुसूदन आनंद हमेशा यादों में बने रहेंगे : अनिल जैन

आनंद जी ने जर्मनी में 'डायचे वेले' (द वाॅयस ऑफ जर्मनी) में कुछ सालों तक काम किया और वे 'वाॅयस ऑफ अमेरिका' के नई दिल्ली स्थित संवाददाता भी रहे।

1 day ago

प्रवक्ता, अहंकार और संवाद की संवेदनहीनता का सबक: नीरज बधवार

चूंकि समाज के अवचेतन में अंग्रेज़ी को लेकर एक हीन भावना मौजूद है, इसलिए जो व्यक्ति अंग्रेज़ी में प्रभावशाली ढंग से बोल लेता है, वह अक्सर खुद को विद्वान भी मान बैठता है।

2 days ago


बड़ी खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 day ago

AI बना सकता है भारत को दुनिया की क्रिएटिव कैपिटल: उदय शंकर

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने कहा कि अब भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर में है।

15 hours ago

ENIL के प्रमोटर ढांचे में जल्द होगा बड़ा बदलाव, NCLT के बाद अब CCI की भी मंजूरी

एफएम चैनल ‘रेडियो मिर्ची’ का संचालन करने वाली कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क (इंडिया) लिमिटेड (ENIL) के कॉर्पोरेट ढांचे में बड़ा बदलाव अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।

1 day ago

Decode ने पूरे किए 200 एपिसोड: यूट्यूब व्यूज़ और सब्सक्राइबर में बना नंबर 1

डीडी न्यूज के प्राइम टाइम शो डिकोड विद सुधीर चौधरी ने 200 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। यूट्यूब पर मिले कुल व्यूज़ में इसका योगदान 74 प्रतिशत और नए सब्सक्राइबर में 75 प्रतिशत रहा।

20 hours ago

AI में 10 लाख करोड़ का निवेश करेगी रिलायंस: मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी ने AI क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया। जियो सस्ता और सुलभ इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा, जिससे भारत को इंटेलिजेंस के नए युग से जोड़ने की तैयारी है।

1 day ago