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प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर विशेष: बदलते भारत की कहानी, साक्षी रहे पत्रकार की जुबानी
सुधीर चौधरी लिखते हैं कि मोदी का दौर किसी क्रांति से कम नहीं रहा। उन्होंने अपने दो दशक से भी अधिक लंबे सफर को याद किया और कहा कि एक पत्रकार के रूप में मुझे इतिहास को खुलते हुए देखने का सौभाग्य मिला
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
सुधीर चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार व एडिटर-इन-चीफ, डीडी न्यूज ।।
17 सितंबर 2025 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष के हो रहे हैं, तब मैं अपने दो दशक से भी अधिक लंबे सफर को याद कर रहा हूं। एक पत्रकार के रूप में मुझे इतिहास को खुलते हुए देखने का सौभाग्य मिला है, अक्सर उस दृष्टिकोण से जिसे बहुत कम लोग देख पाते हैं। मेरी मुलाकातें मोदी जी से उस समय शुरू हुईं, जब वे देश के सर्वोच्च पद पर नहीं पहुंचे थे। इन मुलाकातों के जरिये मैंने न केवल उस व्यक्ति को देखा, बल्कि उस गहन परिवर्तन को भी महसूस किया है, जिसे उन्होंने भारत में साकार किया। एक ऐसे राष्ट्र से, जो जड़ता से जूझ रहा था, लेकर उस भारत तक, जो आज आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है। मोदी युग वास्तव में एक क्रांति से कम नहीं रहा। इस विशेष जन्मदिन पर, मुझे अपने कुछ निजी अनुभव और अवलोकन साझा करने दें, एक ऐसे दौर के गवाह के रूप में जो अद्वितीय रहा है।
मुझे आज भी याद है 2001 की एक शुरुआती मुलाकात, जब नरेंद्र मोदी जी हाल ही में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। मैं उस समय 'जी न्यूज' का युवा रिपोर्टर था, देश को आकार देने वाली कहानियों को समझने की उत्सुकता लिए। मैंने उनसे साक्षात्कार का अनुरोध किया और मेरी आश्चर्य की बात यह थी कि उन्होंने बिना हिचकिचाहट इसे स्वीकार कर लिया। हम उनके सादे कार्यालय में मिले, जहां ताजी चाय और दृढ़ संकल्प की खुशबू बसी हुई थी। मोदी जी ने जिस स्पष्टता के साथ अपनी बातें रखीं, उसने मुझे प्रभावित किया। उन्होंने गुजरात के विकास का अपना दृष्टिकोण समझाया, प्रशासनिक सुधारों पर बल दिया और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। वह उस समय भी आज की तरह निपुण वक्ता थे, एक ऐसे वैश्विक नेता की झलक जिनकी नींव आरएसएस की विचारधारा और अटूट कार्यनीति पर टिकी थी। 20 मिनट की वह बातचीत बढ़कर पूरे एक घंटे में बदल गई, जब उन्होंने जल संरक्षण और औद्योगिक विकास की अपनी योजनाओं को धैर्यपूर्वक विस्तार से बताया। मुझे अंदाजा नहीं था कि यह एक ऐसे प्रोफेशनल रिश्ते की शुरुआत होगी, जिसमें मैं उनके राज्य नेता से राष्ट्रीय प्रतीक बनने तक के सफर का गवाह बनूंगा।
इन वर्षों में मैंने प्रधानमंत्री मोदी का कई बार इंटरव्यू किया और हर मुलाकात ने उनके व्यक्तित्व और नीतिगत समझ की नई परतें खोलीं। एक अविस्मरणीय अनुभव 2014 में था, उनके ऐतिहासिक लोकसभा विजय से ठीक पहले। 'जी न्यूज' पर DNA का एंकर होते हुए मैंने उनसे भारत के एजेंडे पर खुलकर चर्चा की। पूरे दिन के चुनाव प्रचार के बाद भी वे ऊर्जा से भरे हुए आए, जबकि उनका लोकसभा कैंपेन बेहद कठिन और निरंतर चल रहा था। सबसे ज्यादा जो बात उभरकर आई, वह थी उनकी विनम्रता। इंटरव्यू के बाद उन्होंने पूरी टीम का अभिवादन किया। कैमरामैन से लेकर मेकअप आर्टिस्ट तक, सभी के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, हालचाल पूछा और चाय-नाश्ते का भी आग्रह किया। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने “नए भारत” का सपना रखा, जो भ्रष्टाचार और अक्षमता की बेड़ियों से मुक्त हो। मैंने बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे और उनके जवाब सीधे, आंकड़ों पर आधारित और दृढ़ निश्चय से भरे थे। यह स्पष्ट था कि यह महज भाषणबाजी नहीं थी, बल्कि बदलाव का खाका था। उनकी आंखों में नए भारत के रोडमैप की पूरी स्पष्टता दिख रही थी।
मोदी शासन के दौरान एक पत्रकार के रूप में मैंने भारत के इस परिवर्तन को नजदीक से देखा है- चाहे वह मेरे शो DNA हो, 'आजतक' पर ब्लैक&व्हाइट, या अब 'डीडी न्यूज' पर डिकोड। 2014 में जब उन्होंने पद संभाला, तब भारत नीति-गत गतिरोध से जूझ रहा था, 2जी और कोलगेट जैसे घोटालों ने जनविश्वास को हिला दिया था और अर्थव्यवस्था अस्थिर थी। 2025 तक आकर तस्वीर बदल चुकी है। 2017 में जीएसटी लागू हुआ, जिसकी मैंने गहन कवरेज की। इसने बिखरे टैक्स ढांचे को एकीकृत किया, राजस्व बढ़ाया और कारोबार आसान बनाया। आलोचकों ने शुरुआत में इसे अराजक कहा, लेकिन राज्यों में व्यापारियों और उद्यमियों से मिलते हुए मैंने देखा कि इसने कामकाज को सरल बनाया और भारत को एकल बाजार में बदल दिया। आज हमारी जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर पार कर चुकी है, हमें दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रही है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने का अनुमान है।
बुनियादी ढांचे में यह बदलाव और भी स्पष्ट है। 2014 से पहले उत्तर प्रदेश के दूरदराज गांवों में बिजली एक विलासिता थी। सौभाग्य जैसी योजनाओं ने 2.6 करोड़ से अधिक घरों को रोशन किया। हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट्स, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अहमदाबाद से कोच्चि तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार- ये सब महज ढांचे नहीं हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कनें हैं। गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की रिपोर्टिंग के दौरान मैंने स्थानीय लोगों से बात की, जिनकी जिंदगियां पर्यटन से बदल गईं। मोदी जी का “मेक इन इंडिया” अभियान टेस्ला और एप्पल जैसी वैश्विक कंपनियों को भारत लाया, जिससे रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिला। विभिन्न मंचों पर मैंने विदेशी निवेशकों को शुरुआत में सशंकित और बाद में उत्साहित होते देखा।
डिजिटल क्षेत्र में भारत की छलांग अद्भुत रही। जन धन योजना के तहत 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुले, जिससे वित्तीय समावेशन हुआ। 2016 की नोटबंदी की कवरेज करते हुए मैंने बहसें और कतारें देखीं, लेकिन इसने नकदी रहित अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त किया। आज यूपीआई हर महीने अरबों लेन-देन संभाल रहा है और फ्रांस व यूएई जैसे देशों में अपनाया गया है। अपने कार्यक्रमों में मैंने अक्सर दिखाया है कि कैसे आधार-लिंक्ड सेवाओं ने कल्याणकारी योजनाओं में रिसाव कम किया और लाभार्थियों तक सीधी सहायता पहुंचाई। कोविड-19 महामारी के दौरान मैंने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान- कोविन- की रिपोर्टिंग की, जिसने 220 करोड़ से अधिक खुराकें प्रभावी ढंग से दीं। उन अंधेरे दिनों में मोदी जी का नेतृत्व, राष्ट्र के नाम संबोधन और 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त राशन योजना ने मानवीय संकट टाल दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी जी ने भारत की स्थिति को ऊंचा उठाया। उनकी शुरुआती विदेश यात्राओं से लेकर 2023 के जी20 दिल्ली शिखर सम्मेलन और हालिया चीन में हुए एससीओ सम्मेलन तक, मैंने कूटनीति को प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय होते देखा। उरी सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट कार्रवाई और 2025 का ऑपरेशन सिंदूर- इन पर मेरी वास्तविक समय की कवरेज रही- ने आतंकवाद के खिलाफ हमारे संकल्प को दिखाया। इंटरनेशनल सोलर अलायंस और वैक्सीन मैत्री जैसी पहल ने भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया। 2024 में यूक्रेन-रूस संघर्ष में भारत की मध्यस्थता, जिसे विश्व नेताओं ने सराहा, हमारे बढ़ते प्रभाव का प्रमाण बनी।
लेकिन नीतियों से परे, मोदी जी का व्यक्तिगत स्पर्श दिल को छूता है। 2019 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने वडनगर के बचपन की कहानियां साझा कीं- रेलवे प्लेटफॉर्म पर चाय बेचने से लेकर विपक्षियों की तीखी आलोचना पर उनकी भावनाएं। इससे उनका मानवीय रूप सामने आया, यह याद दिलाते हुए कि महान नेता साधारण पृष्ठभूमि से भी उभरते हैं। मैंने उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर बच्चों से बातचीत करते देखा है, आपदाओं जैसे मोरबी पुल हादसे के बाद परिवारों को ढांढस बंधाते देखा है। उनका अनुशासन- सुबह 4 बजे उठना, योग करना- लोगों के लिए उदाहरण है। आलोचक केंद्रीकरण का आरोप लगाते हैं, लेकिन एक पत्रकार के रूप में मैंने देखा है कि उन्होंने राज्यों को “सहकारी संघवाद” के जरिये सशक्त किया, जो पीएम गति शक्ति जैसी योजनाओं में झलकता है।
जब मोदी जी 75वें जन्मदिन का उत्सव मना रहे हैं, भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दहलीज पर खड़ा है। चुनौतियां अब भी हैं- असमानता, जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव लेकिन उनका विजन एक स्पष्ट रोडमैप देता है। एक पत्रकार के रूप में 2001 की शंका से लेकर आज की प्रशंसा तक की मेरी यात्रा समृद्ध रही है। उन्होंने न केवल भारत को बदला है, बल्कि नेतृत्व की परिभाषा भी नई गढ़ी है।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, प्रधानमंत्री जी। आप हमें और ऊंचाइयों की ओर मार्गदर्शन देते रहें।
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