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जातिगत जनगणना मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने जैसा : समीर चौगांवकर
देश का दुर्भाग्य है कि पूरा देश जातिगत समीकरणों की विचित्र प्रयोगशाला बना हुआ है। लेकिन जात को देखने वाली भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी को एक अपवाद के रूप में देखा जा रहा था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
समीर चौगांवकर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
आजाद भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार जनगणना में जाति पूछेगी। जाति है कि जो भारतीय राजनीति से जाती नहीं। मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का प्रस्ताव पास कर मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाला है। सरकार को शहद मिलता है या डंक यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन देश की राजनीति जाति के चक्रव्यूह में फंसेगी यह तय है।
देश का कोई भी राजनीतिक दल और चुनाव जाति के प्रभाव से मुक्त नहीं है। इस कारण सभी राजनीतिक दल टिकट बंटवारे से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री बनाने में जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखते है। यह भारत में विकास की राजनीति पर जाति के दबदबे को बताता है। जहा योग्यता जाति के सामने दम तोड़ देती है। सभी राजनीतिक दल विकास के प्रमाण पत्र से ज्यादा जाति के प्रमाण पत्र को महत्व देते है।
चुनावी गणित जाति के समीकरणों से सधता है। यह हमारे देश की राजनीति का दुर्भाग्य है कि चुनावी गणित विकास से कम और जाति से ज्यादा प्रभावित होता है और जाति पर मरता है। इसी कारण भारत जैसे देश में सियासत अपनी लीक से चलती है और विकास सिसकता है। देश के नेता और राजनीतिक दल जानते है कि सत्ता में पहुंचकर आर्थिक प्रगति और विकास का माल भी वोट की मंडी में जाति के सामने दम तोड़ देता है तो चुनाव में विकास से ज्यादा जाति को आगे कर चुनाव क्यो न लड़ा जाए?
देश का दुर्भाग्य है कि पूरा देश जातिगत समीकरणों की विचित्र प्रयोगशाला बना हुआ है। लेकिन जात को देखने वाली भारतीय राजनीति में नरेन्द्र मोदी को एक अपवाद के रूप में देखा जा रहा था। आजादी के बाद किसी भी कालखंड में इस तरह की राजनीति देश की जनता ने नहीं देखी जिसमें भारत की जटिल क्षेत्रीय पहचानें, जातिगत समीकरण, धार्मिक पहचान और राजनीतिक अस्मितांए किसी एक नेता में इस कदर घनीभूत हो गई हो, जैसा मोदी के साथ हुआ।
मोदी के भरोसे ने पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक फैली वैविध्यपूर्ण जातिगत भारतीय राजनीति को गजब का एकरंगी कर दिया था। राजनीति को जाति का अतीत कुरेदने की लत लग गई है। जाति की राजनीति में गजब का नशा है और यह नशा देश के नेताओं और राजनीतिक दलों में सर चढ़कर बोल रहा है। जाति जितनी मजबूत, सत्ता में उतनी धमक मजबूत। मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना का निर्णय कर लिया है। एकबार जातिगत जनगणना हो जाने दीजिए फिर देखना देश की राजनीति में जाति का रंग कैसे सर चढ़कर बोलता है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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