जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
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Vikas Saxena
देश में टेलीविजन देखने का तरीका बदल रहा है और बदलाव इतनी तेजी से है कि नियामक संस्थाएं भी पीछे छूट रही हैं। एक ओर करोड़ों भारतीय अपने Smart TV पर Samsung TV Plus और LG Channels जैसे ऐप्स से मुफ्त में टीवी चैनल देख रहे हैं, दूसरी ओर केबल ऑपरेटर और DTH कंपनियां चिल्ला रही हैं कि यह "रेगुलेटरी वैक्यूम" में चल रहा बिजनेस है। इसी टकराव के बीच 'टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' यानी कि ट्राई ने अप्रैल 2026 में एक ऐसा कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जो भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकता है।
सवाल सीधा है, जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
FAST क्या है और यह क्यों मायने रखता है?
FAST यानी Free Ad-Supported Streaming Television, यह वह मॉडल है जिसमें दर्शक बिना कोई सब्सक्रिप्शन दिए, सिर्फ इंटरनेट के जरिए, Live या Scheduled टीवी चैनल देख सकते हैं, ठीक वैसे जैसे पहले एंटिना से दूरदर्शन देखते थे, लेकिन अब Smart TV ऐप पर Samsung TV Plus, LG Channels, Amazon Fire TV, JioStar और ZEE5, ये सभी किसी न किसी रूप में FAST सेवाएं दे रहे हैं।
ट्राई ने इस पूरी श्रेणी को एक नया नाम दिया है, Application-based Linear Television Distribution (ALTD)। इसमें वे सभी ऐप्लिकेशन आती हैं जो स्मार्ट टीवी, मोबाइल या वेब ब्राउजर के जरिए Scheduled/Linear TV चैनल दिखाती हैं।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने दिसंबर 2025 में ट्राई को रेफरेंस भेजा कि इन सेवाओं के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाए। ट्राई ने अप्रैल 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया। शुरुआत में 4 मई 2026 तक कमेंट मांगे गए थे, लेकिन इंडस्ट्री की मांग पर ट्राई ने यह डेडलाइन बढ़ाकर 11 मई 2026 कर दी (counter-comments 25 मई तक)।
आंकड़े बताते हैं, बदलाव असली है
इस पूरी बहस को समझने के लिए पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन पर क्या हो रहा है।
Connected TV का विस्फोट: ट्राई के अपने कंसल्टेशन पेपर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, भारत में Connected TV (CTV) दर्शकों की संख्या 2024 में 6.97 करोड़ (69.7 मिलियन) थी, जो 2025 में बढ़कर 12.92 करोड़ (129.2 मिलियन) हो गई, यानी एक साल में 85% की बढ़ोतरी। Nielsen की India Internet Report 2025 के अनुसार, साउथ इंडिया में 25% घरों में, वेस्ट इंडिया में 16%, नॉर्थ इंडिया में 10% और ईस्ट इंडिया में 5% घरों में Smart TV आ चुके हैं। 2026 में भारत में Smart TV और OTT मार्केट का आकार $26.39 अरब (करीब ₹2.2 लाख करोड़) पहुंचने का अनुमान है।
FAST का बढ़ता मार्केट: ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में Muvi की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि भारत में FAST सेवाओं के यूजर्स 2023 में 11.64 करोड़ (116.4 मिलियन) थे, जो 2027 तक 14.86 करोड़ (148.6 मिलियन) होने का अनुमान है। FAST राजस्व 2023 में USD 63.69 मिलियन (करीब ₹530 करोड़) था, जो 2027 तक USD 104 मिलियन से अधिक पहुंच सकता है। बेंगलुरू की Amagi Media Labs, जो FAST चैनल डिलीवरी की रीढ़ है, जनवरी 2026 में BSE/NSE पर लिस्ट हुई, उसका FY2025 राजस्व ₹1,162 करोड़ रहा।
DTH की गिरती दुनिया: दूसरी तरफ, पारंपरिक Pay TV का संसार सिकुड़ता जा रहा है। ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, चारों प्रमुख DTH कंपनियों के एक्टिव सब्सक्राइबर्स जून 2024 के 6.217 करोड़ से घटकर दिसंबर 2025 तक 5.099 करोड़ रह गए, 18 महीने में करीब 1.1 करोड़ की गिरावट। EY और AIDCF की रिपोर्ट के अनुसार, Pay TV सब्सक्राइबर्स 2018 के 15.1 करोड़ से घटकर 2024 में 11.1 करोड़ रह गए। इस गिरावट का असर सीधे राजस्व पर भी दिख रहा है, Dish TV की कुल आय Q1 FY26 में 27.7% घटकर ₹329.4 करोड़ रह गई।
विज्ञापन का रुख बदला: WPP की TYNY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में Linear TV का विज्ञापन राजस्व 1.5% घटकर ₹47,740 करोड़ रहा। जबकि उसी साल CTV विज्ञापन खर्च करीब 20% बढ़ा। 2026 में CTV एडवर्टाइजिंग करीब ₹8,000 करोड़ (लगभग $1 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है, 2025 के करीब $760 मिलियन से 32% अधिक। भारत का कुल विज्ञापन मार्केट 2026 में ₹2,01,891 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और इसमें CTV और Retail Media सबसे तेज बढ़ते सेगमेंट हैं।
केबल और DTH कंपनियों की दलील, 'एक ही काम, दो तराजू'
Dish TV ने ट्राई को सबमिशन में कहा कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म "रेगुलेटरी वैक्यूम" में काम कर रहे हैं। Tata Play ने तर्क दिया कि कंटेंट को या तो सभी टेक्नोलॉजी पर समान रूप से रेगुलेट किया जाए, या सबको डीरेगुलेट किया जाए, "रेगुलेटरी आर्बिट्रेज" बंद होनी चाहिए।
इनकी शिकायत का सार यही है: एक केबल या DTH ऑपरेटर को लाइसेंस लेना होता है, कंटेंट कोड मानने होते हैं, टैरिफ ऑर्डर का पालन करना होता है, Interconnect Regulations का हिसाब देना होता है, लेकिन एक Smart TV ऐप उन्हीं चैनलों को बिना किसी लाइसेंस के मुफ्त में दिखा देती है। Zee Entertainment ने भी कहा कि FAST और Linear TV फंक्शनली एक जैसे हैं, दर्शक दोनों को एक ही तरह देखते हैं, इसलिए एक ही नियम होने चाहिए।
OTT और टेक कंपनियों का पलटवार, 'इनोवेशन मत दबाओ'
JioStar, भारत की सबसे बड़ी टेलीविजन और स्ट्रीमिंग कंपनी, ने ट्राई को बताया कि FAST सेवाएं इंटरनेट के "ऐप्लिकेशन लेयर" पर काम करती हैं और इन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग कैरिज सेवा नहीं माना जाना चाहिए। Sony-owned Culver Max ने कहा कि दुनिया भर में FAST प्लेटफॉर्म को डिजिटल सॉफ्टवेयर सेवाओं की तरह ट्रीट किया जाता है।
Internet and Mobile Association of India (IAMAI) ने तो सीधे कहा कि ट्राई के पास FAST और ALTD को रेगुलेट करने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है, क्योंकि ये ओपन इंटरनेट पर चलती हैं। IAMAI ने चेतावनी दी कि टेलीकॉम-स्टाइल ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क से "रेगुलेटरी ओवररीच" होगी और इनोवेशन को नुकसान पहुंचेगा।
Tata Communications ने बीच का रास्ता सुझाया, ALTD को पुरानी केबल TV रेगुलेशन में मत घसीटो, लेकिन Piracy control, कंटेंट accountability, Consumer grievance और Service transparency पर हल्के नियम जरूर बनाओ।
ट्राई का असली सवाल, 'फंक्शन देखो, टेक्नोलॉजी नहीं'
ट्राई का कंसल्टेशन पेपर खुद मानता है कि FAST और ALTD सेवाएं "consumer के नजरिए से पारंपरिक टेलीविजन से अलग नहीं दिखतीं।" रेगुलेटर ने Italy के AGCOM का उदाहरण दिया जहां FAST चैनलों को अब रेगुलेटरी ऑथराइजेशन लेनी पड़ती है।
ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में 15 से ज्यादा बड़े सवाल उठाए गए हैं:
होम स्क्रीन की असली जंग, कौन तय करेगा क्या दिखेगा?
इस पूरी बहस की जड़ में एक और बड़ा सवाल है जिसे अभी तक खुलकर नहीं कहा गया: Smart TV की Home Screen का कंट्रोल किसके पास होगा?
जब आप अपना Samsung, LG या Xiaomi Smart TV ऑन करते हैं, तो सबसे पहले जो दिखता है वह उस TV OEM का होम स्क्रीन है। Samsung TV Plus सीधे उस होम स्क्रीन पर पहला बटन है। LG Channels का भी यही हाल है। यानी जो कंपनी TV बनाती है, वही तय करती है कि दर्शक को पहले क्या दिखेगा और इसमें केबल ऑपरेटर या ब्रॉडकास्टर का कोई रोल नहीं।
यही वह "डेटा और एल्गोरिद्म" की जंग है जिसके बारे में इंडस्ट्री के जानकार बात कर रहे हैं। Samsung और LG के पास Automatic कंटेंट Recognition (ACR) तकनीक है जो यह जानती है कि आप कब क्या देख रहे हैं, यह डेटा विज्ञापन टार्गेटिंग के लिए बेहद कीमती है। पारंपरिक केबल या DTH ऑपरेटर के पास ऐसा डेटा नहीं है।
विज्ञापन मार्केट का समीकरण बदला
परंपरागत टीवी विज्ञापन के लिए यह दौर कठिन है। WPP के अनुसार 2025 में Linear TV Ad Revenue ₹47,740 करोड़ रहा, 1.5% की गिरावट के साथ। वहीं, CTV पर विज्ञापन खर्च 2025 में 20% और 2026 में 22% बढ़ने का अनुमान है।
ZEE5 ने August 2025 में LG Channels पर पांच FAST चैनल लॉन्च किए। Samsung TV Plus पर भारत में NDTV, Republic, Zee News, Times Now, ABP News जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद हैं। इसका मतलब यह है कि ब्रॉडकास्टर खुद FAST इकोसिस्टम में उतर रहे हैं, भले ही वे ट्राई के सामने ALTD को रेगुलेट करने की मांग कर रहे हों।
यह द्वंद्व भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की असली जटिलता है: एक तरफ ब्रॉडकास्टर FAST को Level Playing Field की दृष्टि से रेगुलेट करवाना चाहते हैं, दूसरी तरफ वे खुद FAST प्लेटफॉर्म पर अपने चैनल चला रहे हैं क्योंकि वहां दर्शक हैं।
क्या भारत में अमेरिका जैसा FAST बूम आएगा?
अमेरिका में Tubi, Pluto TV और Roku Channel जैसे FAST प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक केबल TV को बड़ी चुनौती दी है। (Peacock का Free FAST टियर 2023 में बंद हो चुका है, वह अब paid subscription सेवा है।) Pluto TV के करीब 8 करोड़ Monthly Active Users हैं। Pew Research (2025) के अनुसार, अमेरिका में अब सिर्फ 36% वयस्क केबल या सैटेलाइट TV के subscriber हैं, जबकि 55% Americans streaming-only हैं।
भारत में FAST का बूम जरूर आएगा, लेकिन कुछ फर्क के साथ। MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार, भारत में 93% दर्शक mobile पर और 71% TV स्क्रीन पर वीडियो देखते हैं, यानी यह exclusive नहीं, बल्कि multi-screen मार्केट है। FAST का "lean-back" यानी सोफे पर बैठकर TV देखने का अनुभव Smart TV पर ज्यादा Natural है। जैसे-जैसे Smart TV घरों में पहुंचेगी, FAST का भारतीय मार्केट और बड़ा होगा।
APAC FAST मार्केट 2033 तक $38.77 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो 15.2-16.5% CAGR पर बढ़ेगा।
उपभोक्ता के लिए क्या मायने रखता है?
अभी उपभोक्ता के नजरिए से FAST सेवाएं फायदेमंद हैं, मुफ्त, बिना सब्सक्रिप्शन, सिर्फ इंटरनेट चाहिए। लेकिन समस्याएं भी हैं:
कंटेंट जवाबदेही का अभाव: यदि किसी FAST ऐप पर गलत या भड़काऊ कंटेंट आता है, तो कोई स्पष्ट Grievance System नहीं है।
Pay Channels का मुफ्त वितरण: कुछ FAST प्लेटफॉर्म वे चैनल मुफ्त दे रहे हैं जिन्हें DTH पर सब्सक्रिप्शन लेकर देखना पड़ता, यह Market Distortion का मामला है।
डेटा की निजता: ACR जैसी तकनीक से OEM आपकी Viewing Habits Track कर रहे हैं और यह डेटा Ad-Targeting में इस्तेमाल हो रहा है।
रेगुलेशन इन्हीं समस्याओं का हल दे सकता है, बशर्ते वह इनोवेशन को दबाने वाला न हो।
रेगुलेशन बनाम इनोवेशन, कहां खींचें लकीर?
ट्राई के सामने सबसे कठिन काम यही है। यदि FAST ऐप्स को DTH जैसे भारी लाइसेंस नियमों में बांधा गया, तो Startup-friendly FAST Ecosystem का विकास रुक जाएगा। अगर बिल्कुल नहीं बांधा, तो पारंपरिक ऑपरेटर नाइंसाफी का शोर मचाते रहेंगे और Consumer Protection के मुद्दे अनसुलझे रहेंगे।
ABC Live के विश्लेषण के अनुसार, भारत को एक अलग ALTD फ्रेमवर्क चाहिए, न DTH का Copy-Paste, न IT Rules 2021 की सीमित छाया। इसमें Local Compliance Presence अनिवार्य हो, Grievance Officer हो, केवल MIB-Approved Channels FAST पर दिखें और Audience Measurement BARC में Integrate हो।
Tata Communications ने जो "Light-Touch, Technology-Neutral" नजरिया सुझाया है, वह सबसे व्यावहारिक लगता है: कंटेंट Accountability, Piracy Control और Consumer Protection पर नियम हों, लेकिन पुराने ढांचे का बोझ न लादा जाए।
टीवी का अगला मॉडल कैसा होगा?
सभी संकेत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं, Hybrid TV का युग। वह युग जिसमें DTH Set-Top Box और Smart TV App एक ही स्क्रीन पर साथ चलेंगे। Tata Play और Airtel पहले से Hybrid STB ला चुके हैं जो DTH के साथ OTT Apps को Integrate करते हैं। IPTV तेजी से बढ़ रहा है, Airtel के पास दिसंबर 2025 तक 25.4 लाख Active IPTV Subscribers थे।
पारंपरिक केबल और DTH खत्म नहीं होंगे, लेकिन उनकी भूमिका बदलेगी। जहां Broadband कमजोर है, वहां Satellite TV काम आएगा। जहां Smart TV और Fast Internet है, वहां FAST और OTT राज करेंगे।
जो नहीं बदलेगा वह है, कंटेंट की भूख। और उस भूख को कौन किस तरह, किस कीमत पर, किस प्लेटफॉर्म पर पूरा करता है, यही तय करेगा कि अगले 5 साल में भारतीय टेलीविजन का नक्शा कैसा दिखेगा।
ट्राई का FAST/ALTD कंसल्टेशन पेपर सिर्फ एक रेगुलेटरी दस्तावेज नहीं है, यह उस बड़े युद्ध की अगली कड़ी है जिसमें केबल, DTH, OTT, Smart TV OEM और Big Tech कंपनियां भारत के 90 करोड़ TV दर्शकों (23 करोड़ TV households) की स्क्रीन पर कब्जे के लिए लड़ रही हैं। जो आंकड़े सामने हैं वे साफ बोलते हैं, Connected TV का उभार रोकना किसी के बस में नहीं। सवाल सिर्फ यह है कि इस नई दुनिया के नियम कौन और कैसे लिखेगा।
e4m CTV Conference में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना था कि CTV की ताकत केवल रीच बढ़ाने में नहीं, बल्कि दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने व ब्रैंड पर भरोसा बनाने में है।
by
Samachar4media Bureau
Connected TV (CTV) ने भारत में तेजी से विस्तार किया है, लेकिन इंडस्ट्री अभी भी इस सवाल से जूझ रही है कि आखिर इसकी असली वैल्यू क्या है। e4m CTV Conference 2026 में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना था कि CTV की ताकत केवल रीच बढ़ाने में नहीं, बल्कि दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने, ब्रैंड पर भरोसा बनाने और उसे वास्तविक बिजनेस नतीजों में बदलने में है।
WPP Media में Advanced TV के बिजनेस हेड राजीव राजगोपाल की अध्यक्षता में आयोजित "From Impressions to Impact: The CMO's CTV Playbook" सत्र में Huella में रेवेन्यू के के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट पंकज राय, Teads India की डायरेक्टर (एंटरप्राइज सॉल्यूशंस) रिद्धि पिमपुटकर, Visa के मार्केटिंग हेड (CMO) गौरव रामदेव, Tata AIG के मार्केटिंग हेड शेखर सौरभ और Castrol India में मार्केटिंग वाइस प्रेजिडेंट कौशिक वेदुला शामिल हुए।
राजीव राजगोपाल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत में CTV घरों की संख्या लगभग 6 करोड़ तक पहुंच चुकी है और इसकी आधे से ज्यादा ग्रोथ मेट्रो शहरों के बाहर से आई है। इसके बावजूद विज्ञापन खर्च उसी गति से नहीं बढ़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
रिद्धि पिमपुटकर के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह मीजरमेंट (Measurement) को लेकर भरोसे की कमी है। उन्होंने कहा, "कई मार्केटर्स को अभी भी यह विश्वास नहीं है कि CTV उस प्रभाव को सही तरीके से माप सकता है, जिसके लिए इसकी चर्चा की जाती है।"
वहीं Visa के गौरव रामदेव ने कहा कि मामला सिर्फ मीजरमेंट तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, "विज्ञापन निवेश का फैसला ROI यानी निवेश पर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर होता है। लेकिन आज सवाल यह भी है कि CTV अन्य मीडिया विकल्पों से अलग क्या देता है। क्या यह अतिरिक्त रीच देता है? क्या यह प्रीमियम दर्शकों तक पहुंच बनाता है? इन सवालों के जवाब अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।"
चर्चा के दौरान यह बात बार-बार सामने आई कि कई मार्केटर्स अभी भी CTV को सिर्फ एक और रीच प्लेटफॉर्म की तरह देख रहे हैं, जबकि इसकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है।
पंकज राय ने कहा कि लगभग एक दशक तक पारंपरिक मीडिया बेचने के अनुभव के बाद उन्हें लगता है कि मार्केटर्स अभी भी CTV को पुराने नजरिए से देख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मार्केटर्स यह देख रहे हैं कि क्या CTV उन्हें अतिरिक्त 6 करोड़ घरों तक पहुंच दे रहा है या बेहतर टार्गेटिंग दे रहा है। लेकिन यह माध्यम इससे कहीं ज्यादा गहराई रखता है, जिसे समझने की जरूरत है।"
कौशिक वेदुला ने कहा कि CTV को अपनाने की रफ्तार हर कैटेगरी और ऑडियंस में अलग-अलग है। उन्होंने कहा, "Measurement सबसे बड़ी चुनौती है और अगर इसे बेहतर किया जाए तो CTV की ग्रोथ काफी तेज हो सकती है। लेकिन साथ ही यह भी देखना होगा कि सभी उपभोक्ता अभी इस प्लेटफॉर्म पर नहीं आए हैं, इसलिए निवेश करते समय ऑडियंस मिक्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है।"
उन्होंने बताया कि Castrol के विभिन्न प्रोडक्ट और ग्राहक वर्गों में CTV की मौजूदगी लगातार बढ़ी है।
शेखर सौरभ के मुताबिक विज्ञापन खर्च में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, "पिछले साल की तुलना में इस साल जो अतिरिक्त विज्ञापन खर्च बढ़ा है, उसका बड़ा हिस्सा नए दौर के ब्रैंड्स से आ रहा है। ये छोटे ब्रैंड्स पूरी तरह कन्वर्जन और परफॉर्मेंस पर फोकस कर रहे हैं।"
हालांकि स्थापित ब्रैंड्स के लिए CTV अब भी ब्रैंड बिल्डिंग का एक मजबूत माध्यम बना हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी पिछली संस्था के अधिकांश पारंपरिक विज्ञापनदाता CTV में अपने निवेश को लगातार बढ़ा रहे हैं, खासकर SSEA क्षेत्र में।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नए और प्रोडक्ट-केंद्रित ब्रैंड जैसे The Whole Truth CTV या टीवी की बजाय सोशल मीडिया और परफॉर्मेंस मार्केटिंग को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में विज्ञापन बजट का यह हिस्सा शायद CTV की ओर न आए।
CTV को प्रीमियम अटेंशन प्लेटफॉर्म के रूप में समझने की जरूरत
राजीव राजगोपाल ने सवाल उठाया कि मार्केटर्स को CTV के बारे में सबसे जरूरी क्या समझना चाहिए।
इस पर रिद्धि पिमपुटकर ने कहा कि सबसे बड़ा बदलाव सोच में आना चाहिए। उन्होंने कहा, "CTV सिर्फ एक और वीडियो प्लेसमेंट नहीं है, बल्कि यह एक प्रीमियम अटेंशन एनवायरनमेंट है। जब कोई व्यक्ति स्मार्ट टीवी ऑन करता है, तो वह कंटेंट देखने के लिए पूरी तरह तैयार और केंद्रित होता है। बड़ी स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने वाला यह दर्शक ब्रैंड्स के लिए कहानी कहने का बेहतरीन अवसर देता है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि मार्केटर्स को यह पूछने के बजाय कि CTV मीडिया मिक्स में कैसे फिट होता है, यह सोचना चाहिए कि CTV पूरे मीडिया मिक्स की प्रभावशीलता को कैसे बढ़ा सकता है।
गौरव रामदेव ने भी इसी सोच का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि Visa अब पारंपरिक जागरूकता (Awareness) से आगे बढ़कर मिड-फनल मेट्रिक्स पर फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम उपभोक्ताओं के साथ भरोसा बनाने की प्रक्रिया को बड़े पैमाने और सटीकता के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं।"
रामदेव के अनुसार CTV तीन बड़े फायदे देता है- प्रीमियम घरों तक पहुंच, बेहतर देखने का अनुभव और अधिक प्रभावी फॉर्मेट्स के जरिए भरोसा बनाने की क्षमता।
सिर्फ रीच नहीं, कैटेगरी के हिसाब से अलग भूमिका
ऑटोमोटिव आफ्टरमार्केट जैसी कैटेगरी के संदर्भ में चर्चा करते हुए राजगोपाल ने पूछा कि क्या CTV खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।
इस पर कौशिक वेदुला ने कहा कि नतीजों की शुरुआत उपभोक्ता की जरूरतों को समझने से होती है। उन्होंने कहा, "अगर हमारा संदेश उपभोक्ता की जरूरतों से जुड़ा होगा तो कंसिडरेशन बढ़ेगा, लेकिन सामान्य और गैर-प्रासंगिक कम्युनिकेशन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को अलग-अलग हिस्सों में देखकर मूल्यांकन करने का दौर खत्म हो जाना चाहिए। उनके मुताबिक, "डिजिटल हमें टार्गेटिंग देता है, जबकि CTV हमें अटेंशन देता है। असली सवाल यह है कि क्या हम उस अटेंशन को हासिल करने के लिए पर्याप्त अच्छा और क्रिएटिव कंटेंट बना रहे हैं?"
पंकज राय ने भी इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि CTV की ताकत सिर्फ टार्गेटिंग तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि विज्ञापन देखने के बाद उपभोक्ता क्या करता है—क्या वह वेबसाइट पर जाता है, ब्रोशर डाउनलोड करता है, टेस्ट ड्राइव बुक करता है या किसी सेवा के बारे में पूछताछ करता है?
उनके अनुसार CTV की असली गहराई इन्हीं वास्तविक बिजनेस परिणामों में दिखाई देती है।
कौन से मेट्रिक्स सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?
विज्ञापन जगत में अब केवल यह नहीं देखा जाता कि विज्ञापन कितनी बार दिखा (Impressions) या एक क्लिक की कीमत कितनी रही (CPC), बल्कि यह देखा जाता है कि उससे कारोबार को कितना फायदा हुआ।
राजीव राजगोपाल ने कहा कि किसी भी कंपनी के बोर्डरूम में मार्केटिंग की सफलता को सिर्फ "इम्प्रेशन" (कितनी बार विज्ञापन दिखा) या "CPC" (प्रति क्लिक लागत) से नहीं मापा जाता। वहां यह देखा जाता है कि विज्ञापन से बिजनेस को क्या फायदा हुआ। यानी क्या बिक्री बढ़ी, नए ग्राहक आए या ब्रैंड की स्थिति मजबूत हुई। उनका कहना है कि CTV को भी सिर्फ विज्ञापन दिखाने वाले प्लेटफॉर्म के बजाय ऐसा माध्यम बनना होगा जो सीधे बिजनेस परिणाम दे सके।
जब पूछा गया कि CTV पर कौन-से मेट्रिक्स सबसे महत्वपूर्ण हैं, तो पंकज राय ने तीन चीजों पर जोर दिया। पहली है "Unique Household Reach" यानी विज्ञापन ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग घरों तक पहुंचे, न कि एक ही परिवार को बार-बार दिखाया जाए। इससे विज्ञापन का दायरा बढ़ता है और नए दर्शकों तक पहुंच बनती है। दूसरा मेट्रिक "Quality Engagement" है। इसका मतलब सिर्फ विज्ञापन दिख जाना नहीं, बल्कि दर्शक वास्तव में उसे ध्यान से देख रहा है या नहीं। अगर टीवी चल रहा है लेकिन व्यक्ति मोबाइल में व्यस्त है, तो वह प्रभावी एंगेजमेंट नहीं माना जाएगा। विज्ञापन का असर तभी होगा जब दर्शक कंटेंट और संदेश में रुचि ले। तीसरा मेट्रिक "Measurable Impact" है। यानी विज्ञापन देखने के बाद दर्शक ने कोई कार्रवाई की या नहीं। उदाहरण के लिए वेबसाइट पर गया, QR कोड स्कैन किया, ऐप डाउनलोड किया या किसी प्रोडक्ट के बारे में जानकारी ली। इससे पता चलता है कि विज्ञापन ने वास्तविक परिणाम दिए या नहीं। इसके बाद चर्चा फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर पर पहुंची। राजगोपाल ने कहा कि इस सेक्टर की कंपनियों पर हमेशा दबाव रहता है कि वे अपने मार्केटिंग खर्च को सही साबित करें, क्योंकि यहां भरोसा और पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए उन्होंने पूछा कि इस क्षेत्र में कौन-से मेट्रिक्स सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।
इस पर शेखर सौरभ ने कहा कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री में लोग अक्सर किसी ब्रैंड का नाम तो जानते हैं, लेकिन उसके उत्पादों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते। उदाहरण के लिए लोग Tata AIG का नाम पहचान सकते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि कंपनी हेल्थ इंश्योरेंस भी देती है। इसी तरह कई लोगों को अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस किस कंपनी से है, यह भी याद नहीं रहता। यानी सिर्फ ब्रैंड की पहचान होना काफी नहीं है, लोगों को उत्पादों की जानकारी भी होनी चाहिए।
इसी वजह से शेखर सौरभ के लिए सबसे महत्वपूर्ण मेट्रिक सही घरों तक पहुंच (Reach) है। उनका मानना है कि विज्ञापन सही ऑडियंस तक पहुंचे और एक तय संख्या में दिखाई दे, ठीक वैसे ही जैसे पारंपरिक टीवी विज्ञापनों में किया जाता है। उन्होंने बताया कि Tata AIG अपने मार्केटिंग बजट का लगभग 50% CTV पर खर्च करता है क्योंकि यह उन लोगों तक पहुंचता है जो पारंपरिक केबल या डीटीएच टीवी कम देखते हैं या छोड़ चुके हैं। उन्होंने इंडस्ट्री के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में लगभग 32 करोड़ घर हैं, जिनमें से करीब 24 करोड़ घरों में टीवी मौजूद है। इनमें लगभग 5 से 6 करोड़ घर ऐसे हैं जो पारंपरिक टीवी बहुत कम देखते हैं या पूरी तरह छोड़ चुके हैं। यही वर्ग CTV का मुख्य दर्शक है। इसलिए CTV ब्रैंड्स को ऐसे दर्शकों तक पहुंचने का मौका देता है, जिन तक सामान्य टीवी से पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
अंत में सौरभ ने कहा कि CTV पर Reach, View-through Rate (विज्ञापन को पूरा देखने की दर) और Engagement जैसे बुनियादी मेट्रिक्स को अच्छी तरह ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए उनके अनुसार CTV सिर्फ एक नया विज्ञापन माध्यम नहीं है, बल्कि ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां विज्ञापनदाता यह समझ सकते हैं कि उनके विज्ञापन को कितने लोगों ने देखा, कितना देखा और उससे कितनी रुचि पैदा हुई।
भविष्य: इम्प्रेशन से आगे, परिणामों की ओर
रिद्धि पिमपुटकर ने भविष्य की मार्केटिंग दिशा की बात की। उनका कहना है कि आने वाले समय में मार्केटर्स सिर्फ यह नहीं देखेंगे कि विज्ञापन कितने लोगों ने देखा, बल्कि यह देखेंगे कि उससे वास्तविक बिजनेस में कितना फर्क पड़ा। वह "Incrementality" पर जोर देती हैं, जिसका मतलब है कि विज्ञापन से कितना अतिरिक्त फायदा या नया परिणाम मिला, जो बिना विज्ञापन के शायद नहीं मिलता। रिद्धि ने कहा कि Attention (ध्यान) और Engagement (जुड़ाव) अभी भी महत्वपूर्ण हैं, जो ये बताते हैं कि मीडिया की गुणवत्ता कैसी है। लेकिन किसी CMO का अंतिम लक्ष्य सिर्फ लोगों का ध्यान खींचना नहीं होता। कंपनी पैसा इसलिए खर्च करती है ताकि बिक्री बढ़े, ग्राहक जुड़ें या ब्रैंड को व्यावसायिक लाभ मिले। इसलिए असली महत्व नतीजों का है, सिर्फ ध्यान आकर्षित करने का नहीं।
रिद्धि ने कहा कि जैसे-जैसे मीजरमेंट टेक्नोलॉजी बेहतर होगी, मार्केटर्स पहले "Exposure" यानी विज्ञापन दिखने, फिर "Attention" यानी ध्यान मिलने और अंत में "Business Impact" यानी वास्तविक व्यापारिक परिणामों पर फोकस करेंगे। उनके मुताबिक CTV ऐसा माध्यम है जो इन तीनों चरणों को जोड़ने की क्षमता रखता है।
इसके बाद राजीव राजगोपाल ने एक पुराने मार्केटिंग विवाद को उठाया और पूछा कि क्या CTV ने ब्रैंड अवेयरनेस (Top Funnel) और ग्राहक की वास्तविक भागीदारी या एक्शन (Bottom Funnel) के बीच की दूरी को कम करने में मदद की है? आसान भाषा में कहें तो क्या CTV सिर्फ ब्रैंड पहचान बनाने तक सीमित है या यह लोगों को खरीदारी और कार्रवाई के लिए भी प्रेरित कर सकता है?
इस सवाल पर गौरव रामदेव ने कहा कि यह विभाजन काफी हद तक कृत्रिम है। उनका मानना है कि ब्रैंड मार्केटिंग और परफॉर्मेंस मार्केटिंग को अलग-अलग देखना मार्केटर्स की बनाई हुई सोच है। वास्तव में दोनों का अंतिम उद्देश्य एक ही है- बिक्री बढ़ाना और बिजनेस को आगे ले जाना।
गौरव रामदेव आगे समझाते हैं कि पहले से ही ब्रैंड मेट्रिक्स जैसे Brand Preference या Top-of-Mind Recall का मकसद भी अंततः बिजनेस प्रदर्शन को बेहतर बनाना था। जब कोई ग्राहक किसी ब्रैंड को याद रखता है या उसे पसंद करता है, तो भविष्य में उसके उत्पाद खरीदने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ब्रैंडिंग और परफॉर्मेंस दोनों एक ही यात्रा के अलग-अलग पड़ाव हैं।
CTV की भूमिका को समझाते हुए गौरव रामदेव कहते हैं कि इसकी सबसे बड़ी ताकत "Memorability" यानी यादगार प्रभाव पैदा करना है। कई बार ग्राहक विज्ञापन देखकर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं करता, लेकिन बाद में जब उसे जरूरत पड़ती है तो वही विज्ञापन उसके दिमाग में आता है और वह ब्रैंड को खोजता है। इसलिए सिर्फ अलग-अलग मेट्रिक्स देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि विज्ञापन भविष्य में ग्राहक के व्यवहार को कितना प्रभावित कर सकता है। इसी सोच के तहत रामदेव "Actionability" शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि विज्ञापन ऐसा होना चाहिए जो या तो ग्राहक के मन में खरीदने की इच्छा पैदा करे या पहले से मौजूद इच्छा को मजबूत करे। यानी विज्ञापन का काम सिर्फ दिखाई देना नहीं, बल्कि भविष्य की कार्रवाई के लिए जमीन तैयार करना भी है।
इसके बाद राजगोपाल ने Castrol India के कौशिक वेदुला से पूछा कि उनकी कंपनी CTV पर प्रीमियम ग्राहकों और बड़े जनसमूह दोनों को टार्गेट करती है। ऐसे में वे इन दोनों तरह के अभियानों को कैसे अलग-अलग देखते हैं? इस पर वेदुला ने कहा कि बिजनेस परिणाम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे "Lagging Indicators" होते हैं। इसका मतलब है कि परिणाम बाद में दिखाई देते हैं। बिक्री या लीड बढ़ना अंतिम नतीजा है, लेकिन उससे पहले कुछ संकेत मिलते हैं, जैसे लोगों का ध्यान, रुचि और एंगेजमेंट। इसलिए सिर्फ अंतिम परिणाम देखने से पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
वेदुला ने आगे कहा कि CTV को इंडस्ट्री में एक ऐसे माध्यम के रूप में पेश किया गया था जो ज्यादा और बेहतर Attention देता है, लेकिन इसकी कीमत भी अधिक होती है। अगर उस Attention को सही तरीके से मापा ही नहीं जा सके, तो मार्केटर्स के मन में हमेशा यह सवाल बना रहेगा कि क्या उन्हें अपने निवेश का पूरा मूल्य मिल रहा है।
ब्रैंड बनाम परफॉर्मेंस की बहस पर कौशिक वेदुला भी रामदेव से सहमत नजर आते हैं। उनका कहना है कि आखिरकार हर मार्केटिंग गतिविधि का उद्देश्य प्रदर्शन यानी Performance ही होता है, चाहे उसका असर तुरंत दिखे या लंबे समय बाद। इसलिए CMOs को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका संदेश लोगों के दिमाग में लंबे समय तक बना रहे।
कहानी कहने की ताकत ही असली अंतर
आज के समय में विज्ञापन फॉर्मेट छोटे होते जा रहे हैं और लोगों का ध्यान आकर्षित करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। ऐसे माहौल में ब्रैंड्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी कहानी (Storytelling) को प्रभावी ढंग से कैसे पेश करें। यानी कम समय में लोगों तक सही संदेश पहुंचाना अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
कौशिक वेदुला ने कहा कि ब्रैंड्स हमेशा यह दावा करते हैं कि वे उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी आवाज़ को समझते हैं। लेकिन असली चुनौती यह है कि वे उपभोक्ता को कितनी स्पष्ट, सरल और प्रभावी भाषा में बता पाते हैं कि उनका प्रोडक्ट या सेवा उसके लिए क्यों प्रासंगिक है। अगर कोई ब्रैंड यह बात समझाने में सफल नहीं होता, तो यह समस्या उपभोक्ता की नहीं बल्कि मार्केटिंग टीम और ब्रैंड की है।
इसके बाद चर्चा के समापन की ओर बढ़ते हुए राजीव राजगोपाल, पंकज राय से सवाल पूछते हैं। चूंकि राय क्रिएटिव इनोवेशन और विज्ञापन की रचनात्मकता पर ज्यादा काम करते हैं, इसलिए उनसे पूछा गया कि प्रभावी कम्युनिकेशन की इस जरूरत को पूरा करने में क्रिएटिविटी की क्या भूमिका है।
इस पर पंकज राय कहते हैं कि क्रिएटिविटी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रणनीति बनने के बाद आखिर में जोड़ दिया जाए। उनके अनुसार क्रिएटिविटी और रणनीति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ चलते हैं। उनका मानना है कि किसी भी ब्रैंड की सबसे बड़ी ताकत उसका क्रिएटिव आइडिया होता है और पूरी मार्केटिंग रणनीति उसी के आसपास तैयार की जानी चाहिए। पंकज राय आगे कहते हैं कि अच्छी क्रिएटिविटी सिर्फ लोगों का ध्यान नहीं खींचती, बल्कि उनके भीतर रुचि (Engagement) और इच्छा (Intent) भी पैदा करती है। यही रुचि आगे चलकर ग्राहक को ब्रैंड पर विचार करने और खरीदारी के फैसले तक ले जाती है। यानी क्रिएटिविटी सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि बिजनेस परिणामों की नींव भी रखती है।
अंत में पंकज राय एक महत्वपूर्ण बात कहते हैं कि मीडिया का काम सिर्फ ब्रैंड को दर्शकों के ड्रॉइंग रूम या स्क्रीन तक पहुंचाना है। लेकिन एक बार जब विज्ञापन दर्शक के सामने पहुंच जाए, तो उसका ध्यान बनाए रखना और उसे बीच में विज्ञापन छोड़ने से रोकना क्रिएटिविटी का काम है। दूसरे शब्दों में, मीडिया आपको मौका देता है, लेकिन उस मौके को सफलता में बदलने का काम बेहतरीन क्रिएटिव कंटेंट करता है।
देश के प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज चैनल 'न्यूज18 इंडिया' (News18 India) ने अपने नए फ्लैगशिप प्राइम-टाइम शो ‘देश की पाठशाला’ के लॉन्च की घोषणा की है।
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Samachar4media Bureau
News18 India का बड़ा कदम: सुशांत सिन्हा के साथ शुरू होगा ‘देश की पाठशाला’, खबरों को समझाने का नया अंदाज
देश के प्रतिष्ठित हिंदी न्यूज चैनल 'न्यूज18 इंडिया' (News18 India) ने अपने नए फ्लैगशिप प्राइम-टाइम शो ‘देश की पाठशाला’ के लॉन्च की घोषणा की है। जाने-माने टीवी न्यूज एंकर व वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा इस कार्यक्रम को होस्ट करेंगे। यह शो चैनल के प्राइम-टाइम लाइनअप को और मजबूत करेगा और दर्शकों के सामने समाचार प्रस्तुत करने का एक बिल्कुल नया एक्सप्लेनर फॉर्मेट लेकर आएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ खबरें बताना नहीं, बल्कि उनके पीछे का संदर्भ, कारण और प्रभाव भी समझाना है।
तेज रफ्तार न्यूज साइकिल और सूचनाओं की भरमार वाले इस दौर में ‘देश की पाठशाला’ इस सोच पर आधारित है कि खबरों को केवल रिपोर्ट करना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें समझना भी उतना ही जरूरी है। इसी विचार को शो की टैगलाइन में समेटा गया है- “खबर सिर्फ बताने के लिए नहीं, समझाने के लिए भी होती है।”
यह कार्यक्रम विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करेगा। दुनिया के समृद्ध इतिहास और जटिल भूगोल से लेकर बदलते राजनीतिक परिदृश्य, नई वैज्ञानिक खोजों, सरकारी नीतियों और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों तक, शो का उद्देश्य दर्शकों को हर विषय की पूरी तस्वीर दिखाना है।
अपने नाम के अनुरूप ‘देश की पाठशाला’ जटिल और बहुस्तरीय विषयों को आसान भाषा में समझाएगा। इसमें मैप्स, टाइमलाइन, डेटा ग्राफिक्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि छात्र से लेकर नीति-निर्माता तक हर दर्शक विषय को स्पष्ट रूप से समझ सके। कार्यक्रम लगातार तीन अहम सवालों के जवाब देने की कोशिश करेगा- यह खबर क्यों हो रही है, इसका आप पर क्या असर पड़ेगा और इतिहास हमें इसके बारे में क्या बताता है?
News18 India की मैनेजिंग एडिटर Jyoti Kamal ने कहा, “News18 India में हमारा हमेशा से मानना रहा है कि दर्शक सिर्फ हेडलाइंस से ज्यादा के हकदार हैं। ‘देश की पाठशाला’ ऐसी पत्रकारिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है जो जानकारी देने के साथ-साथ शिक्षित और सशक्त भी बनाती है। मीडिया के शोर-शराबे के बीच हम ऐसा शो तैयार कर रहे हैं जो गहराई और गंभीरता का प्रतिनिधित्व करेगा। हमें विश्वास है कि सुशांत के नेतृत्व में यह कार्यक्रम न केवल हमारे प्राइम-टाइम ऑफरिंग को मजबूत करेगा, बल्कि हिंदी न्यूज टेलीविजन में एक्सप्लेनर पत्रकारिता का नया मानक भी स्थापित करेगा।”
अपने नए शो के बारे में बात करते हुए Sushant Sinha ने कहा, “हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब जानकारी तो बहुत है, लेकिन समझ कम है। ‘देश की पाठशाला’ इसी अंतर को भरने की कोशिश है। हमारा उद्देश्य दर्शकों को सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज तक सीमित न रखकर, उस खबर के पीछे की पूरी कहानी तक ले जाना है। हर एपिसोड डेटा, इतिहास और विश्लेषण की एक यात्रा होगा, जिसे हर वर्ग के दर्शकों के लिए आसान और रोचक बनाया जाएगा। मैं चाहता हूं कि किसी छोटे शहर का छात्र भी उतनी ही जानकारी हासिल कर सके, जितनी किसी नीति-निर्माण कक्ष में बैठा व्यक्ति करता है। यही इस शो का वादा है।”
‘देश की पाठशाला’ का प्रसारण 16 जून से हर दिन रात 8:50 बजे किया जाएगा। दर्शक इसे टीवी, CTV और YouTube पर देख सकेंगे। यह शो हिंदी न्यूज टेलीविजन में एक्सप्लेनर पत्रकारिता को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
‘जियोस्टार’ (JioStar) ने ICC Women’s T20 World Cup 2026 के लिए अपने स्पॉन्सर्स की घोषणा की है। Google Gemini, Herbalife, Havells और Parle Products समेत कई बड़े ब्रांड्स टूर्नामेंट से जुड़े हैं।
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ICC Women’s T20 World Cup 2026 के आधिकारिक ब्रॉडकास्टर (Broadcaster) और स्ट्रीमिंग पार्टनर (Streaming Partner) ‘जियोस्टार’ (JioStar) ने गुरुवार को टूर्नामेंट के लिए अपनी स्पॉन्सर लाइन-अप (Sponsor Line-up) की घोषणा की। 'गूगल जेमिनी' (Google Gemini), 'हर्बालाइफ' (Herbalife), 'हैवेल्स' (Havells) और 'पार्ले प्रोडक्ट्स' (Parle Products) को Co-Presenting Partners बनाया गया है।
वहीं 'गूगल पे' (Google Pay), 'राडो' (Rado) और 'कैंपा एनर्जी' (Campa Energy) एसोसिएट पार्टनर्स (Associate Partners) के रूप में जुड़े हैं। इसके अलावा 'एडिडास' (adidas) को प्री और पोस्ट लाइव शोज़ (Pre and Post Live Shows) का टाइटल पार्टनर (Title Partner) बनाया गया है।
‘जियोस्टार’ (JioStar) के अनुसार, इस बार महिला क्रिकेट में उसकी तरफ से तीन नए तरह के ब्रांड्स पहली बार जुड़े हैं। 'एडिडास' (adidas) महिला क्रिकेट से जुड़ने वाला पहला वैश्विक स्पोर्ट्सवियर ब्रांड (Global Sportswear Brand) बना है। वहीं 'राडो' (Rado) के रूप में पहली बार कोई लग्जरी ब्रांड (Luxury Brand) महिला क्रिकेट के लाइव प्रसारण से जुड़ा है। 'कैंपा एनर्जी' (Campa Energy) ने भी महिला क्रिकेट को अपनी पहुंच और पहचान बढ़ाने के मंच के रूप में चुना है।
'ICC Women’s T20 World Cup 2026' की शुरुआत 12 जून यानी आज से होगी। उद्घाटन मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड (England) का सामना श्रीलंका (Sri Lanka) से होगा। भारतीय टीम 14 जून को पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। टूर्नामेंट का सीधा प्रसारण 'स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क' (Star Sports Network) पर किया जाएगा, जबकि इसकी लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) 'जियोहॉटस्टार' (JioHotstar) पर उपलब्ध होगी।
तमिलनाडु के सरकारी केबल टेलीविजन नेटवर्क अरसु केबल टीवी पर मंगलवार को तीन तमिल न्यूज चैनल- पोलिमर न्यूज, न्यूज तमिल 24x7 और तमिल जनम का प्रसारण बंद हो गया।
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तमिलनाडु के सरकारी केबल टेलीविजन नेटवर्क अरसु केबल टीवी पर मंगलवार को तीन तमिल न्यूज चैनल- पोलिमर न्यूज, न्यूज तमिल 24x7 और तमिल जनम का प्रसारण बंद हो गया।
विपक्ष का आरोप है कि इन चैनलों को सरकार ने निशाना बनाया है, क्योंकि वे लगातार कानून-व्यवस्था, सत्तारूढ़ दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित ज्यादतियों, महिलाओं की सुरक्षा और राज्य में बढ़ते नशे के खतरे जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे।
AIADMK प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया है, जब एक अन्य न्यूज चैनल को भी ऑफ एयर कर दिया गया था। उस चैनल ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान पत्रकारों से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों और मीडिया संगठनों के व्यापक विरोध के बाद ही उस चैनल का प्रसारण दोबारा बहाल किया गया था।
इस बीच, चेन्नई प्रेस क्लब ने भी न्यूज चैनलों के कथित ब्लैकआउट की कड़ी निंदा की है। क्लब ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल चैनलों का प्रसारण बहाल करने की मांग की है।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार की फैक्ट-चेक इकाई TN Fact Check ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इकाई ने X पर जारी अपने बयान में कहा कि चैनलों को हटाए जाने की खबरें गलत हैं।
फैक्ट-चेक इकाई के अनुसार, तीनों चैनल केवल कुछ सेट-टॉप बॉक्स पर तकनीकी कारणों से अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हैं। प्रभावित चैनलों को इस बारे में जानकारी दे दी गई है और समस्या को दूर करने का काम किया जा रहा है।
इकाई ने बताया कि अनुबंधित सेवा प्रदाता मंतरा इंडस्ट्रीज लिमिटेड सुधारात्मक कदम उठा रही है और सामान्य प्रसारण को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किए जा रहे हैं।
TN Fact Check ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि चैनलों का प्रसारण सेट-टॉप बॉक्स कंपनी को बकाया भुगतान न किए जाने की वजह से बाधित हुआ है।
அரசு கேபிள் ஒளிபரப்பிலிருந்து 3 செய்தி சேனல்கள் நீக்கம் என பரவும் தவறான தகவல்
— TN Fact Check (@tn_factcheck) June 9, 2026
பரவும் செய்தி
தமிழக அரசு கேபிள் ஒளிபரப்பிலிருந்து பாலிமர், நியூஸ் தமிழ் 24X7 மற்றும் தமிழ் ஜனம் ஆகிய செய்தி சேனல்கள் நீக்கப்பட்டுள்ளதாக சமூக வலைதளங்களில் தவறான தகவல் பரவி வருகிறது.
உண்மை என்ன ?
இது… pic.twitter.com/RbEZYLrvGO
e4m Connected TV Conference के एक खास फायरसाइड चैट में Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।
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e4m Connected TV Conference का चौथा संस्करण 11 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के कई प्रमुख इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, मार्केटर्स और बिजनेस लीडर्स एक मंच पर जुटेंगे। इस बार के e4m Connected TV Conference में एक खास फायरसाइड चैट होगी, जिसमें Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।
यह चर्चा ‘AI, Data & CTV: Building the Next Generation of Media Growth’ विषय पर केंद्रित होगी। Connected TV (CTV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह सत्र इस बात पर प्रकाश डालेगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित रणनीतियां किस तरह मीडिया इंडस्ट्री को बदल रही हैं। इस बातचीत से यह समझने का अवसर मिलेगा कि तकनीक की बदलती भूमिका किस तरह बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद कर रही है।
e4m Connected TV Conference में CTV के अगले दौर पर होगी गहन चर्चा
लालतेंदु दास इस सत्र में अपने अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे। वह बताएंगे कि ब्रांड्स किस तरह AI और डेटा का इस्तेमाल करके Connected TV प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी अनुभव दे सकते हैं।
इस चर्चा में यह भी सामने आएगा कि AI, डेटा और Connected TV का मेल किस तरह इनोवेशन, ऑडियंस एंगेजमेंट और विज्ञापन की प्रभावशीलता के नए अवसर पैदा कर रहा है। साथ ही यह सत्र इंडस्ट्री के सामने उभर रहे नए अवसरों, दर्शकों के बदलते व्यवहार, भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा करेगा।
इंडस्ट्री जगत के सीनियर लीडर्स, मार्केटर्स, मीडिया प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में होने वाली यह फायरसाइड चैट मीडिया ग्रोथ के भविष्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। इसमें शामिल होने वाले लोगों को Connected TV, AI और डेटा आधारित मीडिया रणनीतियों के भविष्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां और उपयोगी इनसाइट्स मिलने की उम्मीद है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा।
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न्यूज चैनलों की TRP पर जारी रोक के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि जब तक न्यूज चैनलों की टेलीविजन रेटिंग (TRP) जारी नहीं की जा रही है, तब तक उनसे ऑडियंस मेजरमेंट सर्विस के लिए कोई सब्सक्रिप्शन शुल्क न लिया जाए।
मामले से जुड़े इंडस्ट्री जगत के अधिकारियों के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर BARC को निर्देश दिया गया है कि TRP सस्पेंशन या तथाकथित ‘डार्क पीरियड’ के दौरान न्यूज चैनलों से फीस न वसूली जाए।
हालांकि, इस फैसले के बाद BARC की स्वायत्तता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि BARC एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली संस्था है और सदस्यता शुल्क जैसे मामलों में निर्णय आमतौर पर संस्था के भीतर ही लिए जाते रहे हैं। ऐसे में मंत्रालय का सीधे हस्तक्षेप करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खबर लिखे जाने तक BARC की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
TRP बंदी से पहले ही जूझ रही है इंडस्ट्री
टीवी न्यूज इंडस्ट्री लंबे समय से साप्ताहिक TRP डेटा के बिना काम कर रही है। TRP को विज्ञापन सौदों, मीडिया प्लानिंग और कार्यक्रमों की स्ट्रैटेजी तय करने का प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में रेटिंग्स के अभाव ने न्यूज चैनलों और विज्ञापनदाताओं दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
BARC अपनी आय का एक हिस्सा ब्रॉडकास्टर्स और अन्य हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से मिलने वाले सब्सक्रिप्शन शुल्क से प्राप्त करता है। TRP डेटा बंद होने के बाद इंडस्ट्री में यह बहस चल रही थी कि जब सेवा उपलब्ध नहीं है तो क्या चैनलों को इसके लिए भुगतान करना चाहिए। मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद फिलहाल यह विवाद समाप्त होता नजर आ रहा है।
चार सप्ताह और बढ़ाई गई TRP सस्पेंशन अवधि
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक को चार सप्ताह और बढ़ा दिया है। BARC ने हाल ही में अपने सब्सक्राइबर्स को सूचित किया था कि मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार न्यूज चैनलों की ऑडियंस रेटिंग्स को फिलहाल और जारी नहीं किया जाएगा।
इस साल मार्च में मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी टीवी न्यूज कवरेज में कथित सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग की चिंताओं का हवाला देते हुए न्यूज रेटिंग्स पर रोक लगाई थी। सरकार का तर्क था कि TRP आधारित प्रतिस्पर्धा गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सकती है। इसके बाद इस रोक को कई बार बढ़ाया जा चुका है।
नई TRP नीति पर भी जारी है विवाद
TRP सस्पेंशन के समानांतर सरकार ने हाल ही में टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 लागू की है, जिसने 2014 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह ली है। नई नीति में कई संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दर्शक मापन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।
नई नीति का सबसे चर्चित प्रावधान ‘लैंडिंग पेज’ व्यूअरशिप को अंतिम रेटिंग गणना से बाहर करना है। लैंडिंग पेज वह चैनल होता है जो टीवी ऑन करते ही डिफॉल्ट रूप से दिखाई देता है। कई न्यूज चैनल लंबे समय से इस व्यवस्था को रेटिंग्स को कृत्रिम रूप से बढ़ाने वाला मानते रहे हैं।
हालांकि, इस प्रावधान का केबल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) ने विरोध किया। मामला बाद में केरल हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने मई में इस प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मंत्रालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर यह फैसला लिया है।
विज्ञापन बाजार पर भी असर
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि TRP डेटा की अनुपलब्धता से विज्ञापनदाताओं के लिए विभिन्न न्यूज चैनलों के बीच निवेश का आकलन करना कठिन हो गया है। TRP विज्ञापन दरें तय करने, प्रायोजन समझौतों और कंटेंट रणनीति बनाने का प्रमुख आधार होती है।
फिलहाल कई चैनल पुराने प्रदर्शन, ब्रांड वैल्यू और विज्ञापनदाताओं के साथ सीधे संबंधों के आधार पर कारोबार चला रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक TRP डेटा उपलब्ध न रहने से टीवी विज्ञापन बाजार में पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
मंत्रालय के ताजा निर्देश से न्यूज चैनलों को आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नियमित TRP सेवाएं कब से दोबारा शुरू होंगी। ऐसे में भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
प्रोमो जारी होने के बाद मीडिया इंडस्ट्री में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, शो के साथ रुबिका लियाकत की एंट्री की चर्चा है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) के एक नए प्रोमो ने हिंदी न्यूज इंडस्ट्री में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। चैनल की ओर से जारी किए गए इस टीजर में कहा गया है, ‘खबरें तो सब बताएंगे, लेकिन उन्हें समझाएगा कौन? इसीलिए... मैडम आ रही हैं! क्लास मिस मत कीजिएगा, यहां आपकी अटेंडेंस जरूरी है! ‘न्यूज की पाठशाला’ सिर्फ TIMES NOW नवभारत पर।’
प्रोमो में ‘मैडम’ और ‘न्यूज की पाठशाला’ का जिक्र सामने आते ही मीडिया गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ‘न्यूज की पाठशाला’ वही शो है, जिसे लंबे समय तक वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर सुशांत सिन्हा होस्ट करते रहे थे। हाल ही में सुशांत सिन्हा ने टाइम्स नाउ नवभारत से विदाई लेकर ‘न्यूज18 इंडिया’ के साथ नई पारी शुरू की है।
ऐसे में अब चर्चा इस बात को लेकर तेज हो गई है कि आखिर चैनल इस लोकप्रिय शो की कमान किसे सौंपने जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो इस प्रोमो को रुबिका लियाकत की संभावित एंट्री से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया इंडस्ट्री में पहले से ही उनके टाइम्स नाउ नवभारत के साथ जुड़ने की चर्चाएं चल रही हैं और अब इस नए प्रोमो ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।
हालांकि, चैनल की ओर से अभी तक इस बारे में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न तो ‘मैडम’ की पहचान का खुलासा किया गया है और न ही शो के नए होस्ट को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने आई है। ऐसे में फिलहाल दर्शकों और मीडिया जगत की निगाहें टाइम्स नाउ नवभारत की अगली घोषणा पर टिकी हैं।
बता दें कि सुशांत सिन्हा के जाने के बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि ‘न्यूज़ की पाठशाला’ को आगे कौन संभालेगा। अब चैनल के इस नए प्रोमो ने उस चर्चा को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें चैनल की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो ‘मैडम’ की पहचान और ‘न्यूज की पाठशाला’ के नए चेहरे से पर्दा उठा सकती है।
खबरें तो सब बताएंगे, लेकिन उन्हें समझाएगा कौन?
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) June 7, 2026
इसीलिए...
मैडम आ रही हैं!
क्लास मिस मत कीजिएगा, यहां आपकी अटेंडेंस जरूरी है!
'न्यूज़ की पाठशाला' सिर्फ TIMES NOW नवभारत पर।@TNNavbharat #NewsKiPathshala pic.twitter.com/Xc5WhDXBJ3
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम, 2013, सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरियों के अधीन होगा।
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Vikas Saxena
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) फंड जुटाने की योजना पर विचार कर रही है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया है कि उसके निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की बैठक 10 जून 2026, बुधवार को आयोजित की जाएगी, जिसमें फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी सूचना में कहा है कि बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयरों या इक्विटी शेयरों में परिवर्तित होने वाली अन्य प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के जरिए पूंजी जुटाने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की जाएगी।
ZEEL के अनुसार, कंपनी एक या एक से अधिक चरणों (ट्रांच) में फंड जुटा सकती है। इसके लिए प्राइवेट प्लेसमेंट, प्रेफरेंशियल इश्यू या कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य वैध माध्यम अथवा उनके संयोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है। फंड जुटाने की शर्तें और तरीका बोर्ड अपने विवेक के अनुसार तय करेगा।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम, 2013, सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरियों के अधीन होगा। इसके लिए कंपनी के शेयरधारकों और संबंधित नियामकीय एवं वैधानिक प्राधिकरणों की मंजूरी भी आवश्यक होगी।
इस बीच, सेबी के इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध नियम, 2015 और कंपनी की आचार संहिता के तहत ZEEL के शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई है। यह प्रतिबंध बोर्ड बैठक समाप्त होने के 48 घंटे बाद तक जारी रहेगा।
‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय सीरीज के टीवी और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।
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‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज के टेलीविज़न और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।
यह टूर्नामेंट 9 जून से 21 जून तक श्रीलंका में खेला जाएगा। भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका में दर्शक मुकाबलों का सीधा प्रसारण ‘सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क’ (Sony Sports Network) और ‘सोनी LIV’ (Sony LIV) पर देख सकेंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ कमेंट्री के साथ प्रसारित किए जाएंगे।
इस प्रतियोगिता में कई उभरते क्रिकेटरों पर नजर रहेगी। इनमें वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) सबसे चर्चित नाम हैं, जिन्हें पहली बार भारत A की एकदिवसीय टीम में जगह मिली है। इसके अलावा प्रियांश आर्य (Priyansh Arya), आयुष बडोनी (Ayush Badoni) और सूर्यांश शेडगे (Suryansh Shedge) भी टीम का हिस्सा हैं।
भारत A टीम की कप्तानी तिलक वर्मा (Tilak Varma) करेंगे, जबकि रुतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaikwad) उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे। टीम में निशांत सिंधु, प्रभसिमरन सिंह, कुमार कुशाग्र, विप्रज निगम, यश ठाकुर, युधवीर सिंह, अंशुल कंबोज, अरशद खान और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं।
‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) के स्पोर्ट्स बिजनेस प्रमुख और वितरण व अंतरराष्ट्रीय कारोबार के मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि यह सीरीज क्षेत्र के उभरते क्रिकेटरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का नया आकर्षण बताया।
‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर व न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे।
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Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शामिल ‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर और लोकप्रिय न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे। उन्होंने 'नेटवर्क18' समूह जॉइन कर लिया है।
दरअसल, 'समाचार4मीडिया' ने ही विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सबसे पहले खबर दी थी कि ‘टाइम्स नेटवर्क’ से विदाई तय मानी जा रही है, क्योंकि सुशांत सिन्हा का इस चैनल के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और नेटवर्क रिन्यू करने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों ने तो यहां तक कह दिया था कि वह जल्द ही ‘नेटवर्क18’ के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे हैं और अब इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। सुशांत सिन्हा ने एक प्रोमो जारी किया है।
"आ रहा हूं BOSS.... तैयार रहिएगा"
— News18 India (@News18India) June 5, 2026
सुशांत सिन्हा News18 India पर#News18India | @SushantBSinha pic.twitter.com/pAPlhjO9M2
इस खबर से 'समाचार4मीडिया' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाठकों का भरोसा उस पर क्यों है। दरअसल, यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि 'समाचार4मीडिया' की ही खबरों को कई वेबसाइट अपने प्लेटफॉर्म पर पब्लिश करती हैं।
यहां पढ़ें पुरानी खबर- टाइम्स नेटवर्क से सुशांत सिन्हा की विदाई तय, Network18 जाने की तैयारी!
गौरतलब है कि सुशांत सिन्हा हिंदी न्यूज इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा हैं। टाइम्स नाउ नवभारत पर ‘पाठशाला’ और ‘राष्ट्रगर्व’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने खास पहचान बनाई। करीब दो दशक के करियर में वह इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया, न्यूज24 और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।