जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
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Vikas Saxena
देश में टेलीविजन देखने का तरीका बदल रहा है और बदलाव इतनी तेजी से है कि नियामक संस्थाएं भी पीछे छूट रही हैं। एक ओर करोड़ों भारतीय अपने Smart TV पर Samsung TV Plus और LG Channels जैसे ऐप्स से मुफ्त में टीवी चैनल देख रहे हैं, दूसरी ओर केबल ऑपरेटर और DTH कंपनियां चिल्ला रही हैं कि यह "रेगुलेटरी वैक्यूम" में चल रहा बिजनेस है। इसी टकराव के बीच 'टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' यानी कि ट्राई ने अप्रैल 2026 में एक ऐसा कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जो भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकता है।
सवाल सीधा है, जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
FAST क्या है और यह क्यों मायने रखता है?
FAST यानी Free Ad-Supported Streaming Television, यह वह मॉडल है जिसमें दर्शक बिना कोई सब्सक्रिप्शन दिए, सिर्फ इंटरनेट के जरिए, Live या Scheduled टीवी चैनल देख सकते हैं, ठीक वैसे जैसे पहले एंटिना से दूरदर्शन देखते थे, लेकिन अब Smart TV ऐप पर Samsung TV Plus, LG Channels, Amazon Fire TV, JioStar और ZEE5, ये सभी किसी न किसी रूप में FAST सेवाएं दे रहे हैं।
ट्राई ने इस पूरी श्रेणी को एक नया नाम दिया है, Application-based Linear Television Distribution (ALTD)। इसमें वे सभी ऐप्लिकेशन आती हैं जो स्मार्ट टीवी, मोबाइल या वेब ब्राउजर के जरिए Scheduled/Linear TV चैनल दिखाती हैं।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने दिसंबर 2025 में ट्राई को रेफरेंस भेजा कि इन सेवाओं के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाए। ट्राई ने अप्रैल 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया। शुरुआत में 4 मई 2026 तक कमेंट मांगे गए थे, लेकिन इंडस्ट्री की मांग पर ट्राई ने यह डेडलाइन बढ़ाकर 11 मई 2026 कर दी (counter-comments 25 मई तक)।
आंकड़े बताते हैं, बदलाव असली है
इस पूरी बहस को समझने के लिए पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन पर क्या हो रहा है।
Connected TV का विस्फोट: ट्राई के अपने कंसल्टेशन पेपर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, भारत में Connected TV (CTV) दर्शकों की संख्या 2024 में 6.97 करोड़ (69.7 मिलियन) थी, जो 2025 में बढ़कर 12.92 करोड़ (129.2 मिलियन) हो गई, यानी एक साल में 85% की बढ़ोतरी। Nielsen की India Internet Report 2025 के अनुसार, साउथ इंडिया में 25% घरों में, वेस्ट इंडिया में 16%, नॉर्थ इंडिया में 10% और ईस्ट इंडिया में 5% घरों में Smart TV आ चुके हैं। 2026 में भारत में Smart TV और OTT मार्केट का आकार $26.39 अरब (करीब ₹2.2 लाख करोड़) पहुंचने का अनुमान है।
FAST का बढ़ता मार्केट: ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में Muvi की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि भारत में FAST सेवाओं के यूजर्स 2023 में 11.64 करोड़ (116.4 मिलियन) थे, जो 2027 तक 14.86 करोड़ (148.6 मिलियन) होने का अनुमान है। FAST राजस्व 2023 में USD 63.69 मिलियन (करीब ₹530 करोड़) था, जो 2027 तक USD 104 मिलियन से अधिक पहुंच सकता है। बेंगलुरू की Amagi Media Labs, जो FAST चैनल डिलीवरी की रीढ़ है, जनवरी 2026 में BSE/NSE पर लिस्ट हुई, उसका FY2025 राजस्व ₹1,162 करोड़ रहा।
DTH की गिरती दुनिया: दूसरी तरफ, पारंपरिक Pay TV का संसार सिकुड़ता जा रहा है। ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, चारों प्रमुख DTH कंपनियों के एक्टिव सब्सक्राइबर्स जून 2024 के 6.217 करोड़ से घटकर दिसंबर 2025 तक 5.099 करोड़ रह गए, 18 महीने में करीब 1.1 करोड़ की गिरावट। EY और AIDCF की रिपोर्ट के अनुसार, Pay TV सब्सक्राइबर्स 2018 के 15.1 करोड़ से घटकर 2024 में 11.1 करोड़ रह गए। इस गिरावट का असर सीधे राजस्व पर भी दिख रहा है, Dish TV की कुल आय Q1 FY26 में 27.7% घटकर ₹329.4 करोड़ रह गई।
विज्ञापन का रुख बदला: WPP की TYNY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में Linear TV का विज्ञापन राजस्व 1.5% घटकर ₹47,740 करोड़ रहा। जबकि उसी साल CTV विज्ञापन खर्च करीब 20% बढ़ा। 2026 में CTV एडवर्टाइजिंग करीब ₹8,000 करोड़ (लगभग $1 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है, 2025 के करीब $760 मिलियन से 32% अधिक। भारत का कुल विज्ञापन मार्केट 2026 में ₹2,01,891 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और इसमें CTV और Retail Media सबसे तेज बढ़ते सेगमेंट हैं।
केबल और DTH कंपनियों की दलील, 'एक ही काम, दो तराजू'
Dish TV ने ट्राई को सबमिशन में कहा कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म "रेगुलेटरी वैक्यूम" में काम कर रहे हैं। Tata Play ने तर्क दिया कि कंटेंट को या तो सभी टेक्नोलॉजी पर समान रूप से रेगुलेट किया जाए, या सबको डीरेगुलेट किया जाए, "रेगुलेटरी आर्बिट्रेज" बंद होनी चाहिए।
इनकी शिकायत का सार यही है: एक केबल या DTH ऑपरेटर को लाइसेंस लेना होता है, कंटेंट कोड मानने होते हैं, टैरिफ ऑर्डर का पालन करना होता है, Interconnect Regulations का हिसाब देना होता है, लेकिन एक Smart TV ऐप उन्हीं चैनलों को बिना किसी लाइसेंस के मुफ्त में दिखा देती है। Zee Entertainment ने भी कहा कि FAST और Linear TV फंक्शनली एक जैसे हैं, दर्शक दोनों को एक ही तरह देखते हैं, इसलिए एक ही नियम होने चाहिए।
OTT और टेक कंपनियों का पलटवार, 'इनोवेशन मत दबाओ'
JioStar, भारत की सबसे बड़ी टेलीविजन और स्ट्रीमिंग कंपनी, ने ट्राई को बताया कि FAST सेवाएं इंटरनेट के "ऐप्लिकेशन लेयर" पर काम करती हैं और इन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग कैरिज सेवा नहीं माना जाना चाहिए। Sony-owned Culver Max ने कहा कि दुनिया भर में FAST प्लेटफॉर्म को डिजिटल सॉफ्टवेयर सेवाओं की तरह ट्रीट किया जाता है।
Internet and Mobile Association of India (IAMAI) ने तो सीधे कहा कि ट्राई के पास FAST और ALTD को रेगुलेट करने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है, क्योंकि ये ओपन इंटरनेट पर चलती हैं। IAMAI ने चेतावनी दी कि टेलीकॉम-स्टाइल ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क से "रेगुलेटरी ओवररीच" होगी और इनोवेशन को नुकसान पहुंचेगा।
Tata Communications ने बीच का रास्ता सुझाया, ALTD को पुरानी केबल TV रेगुलेशन में मत घसीटो, लेकिन Piracy control, कंटेंट accountability, Consumer grievance और Service transparency पर हल्के नियम जरूर बनाओ।
ट्राई का असली सवाल, 'फंक्शन देखो, टेक्नोलॉजी नहीं'
ट्राई का कंसल्टेशन पेपर खुद मानता है कि FAST और ALTD सेवाएं "consumer के नजरिए से पारंपरिक टेलीविजन से अलग नहीं दिखतीं।" रेगुलेटर ने Italy के AGCOM का उदाहरण दिया जहां FAST चैनलों को अब रेगुलेटरी ऑथराइजेशन लेनी पड़ती है।
ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में 15 से ज्यादा बड़े सवाल उठाए गए हैं:
होम स्क्रीन की असली जंग, कौन तय करेगा क्या दिखेगा?
इस पूरी बहस की जड़ में एक और बड़ा सवाल है जिसे अभी तक खुलकर नहीं कहा गया: Smart TV की Home Screen का कंट्रोल किसके पास होगा?
जब आप अपना Samsung, LG या Xiaomi Smart TV ऑन करते हैं, तो सबसे पहले जो दिखता है वह उस TV OEM का होम स्क्रीन है। Samsung TV Plus सीधे उस होम स्क्रीन पर पहला बटन है। LG Channels का भी यही हाल है। यानी जो कंपनी TV बनाती है, वही तय करती है कि दर्शक को पहले क्या दिखेगा और इसमें केबल ऑपरेटर या ब्रॉडकास्टर का कोई रोल नहीं।
यही वह "डेटा और एल्गोरिद्म" की जंग है जिसके बारे में इंडस्ट्री के जानकार बात कर रहे हैं। Samsung और LG के पास Automatic कंटेंट Recognition (ACR) तकनीक है जो यह जानती है कि आप कब क्या देख रहे हैं, यह डेटा विज्ञापन टार्गेटिंग के लिए बेहद कीमती है। पारंपरिक केबल या DTH ऑपरेटर के पास ऐसा डेटा नहीं है।
विज्ञापन मार्केट का समीकरण बदला
परंपरागत टीवी विज्ञापन के लिए यह दौर कठिन है। WPP के अनुसार 2025 में Linear TV Ad Revenue ₹47,740 करोड़ रहा, 1.5% की गिरावट के साथ। वहीं, CTV पर विज्ञापन खर्च 2025 में 20% और 2026 में 22% बढ़ने का अनुमान है।
ZEE5 ने August 2025 में LG Channels पर पांच FAST चैनल लॉन्च किए। Samsung TV Plus पर भारत में NDTV, Republic, Zee News, Times Now, ABP News जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद हैं। इसका मतलब यह है कि ब्रॉडकास्टर खुद FAST इकोसिस्टम में उतर रहे हैं, भले ही वे ट्राई के सामने ALTD को रेगुलेट करने की मांग कर रहे हों।
यह द्वंद्व भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की असली जटिलता है: एक तरफ ब्रॉडकास्टर FAST को Level Playing Field की दृष्टि से रेगुलेट करवाना चाहते हैं, दूसरी तरफ वे खुद FAST प्लेटफॉर्म पर अपने चैनल चला रहे हैं क्योंकि वहां दर्शक हैं।
क्या भारत में अमेरिका जैसा FAST बूम आएगा?
अमेरिका में Tubi, Pluto TV और Roku Channel जैसे FAST प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक केबल TV को बड़ी चुनौती दी है। (Peacock का Free FAST टियर 2023 में बंद हो चुका है, वह अब paid subscription सेवा है।) Pluto TV के करीब 8 करोड़ Monthly Active Users हैं। Pew Research (2025) के अनुसार, अमेरिका में अब सिर्फ 36% वयस्क केबल या सैटेलाइट TV के subscriber हैं, जबकि 55% Americans streaming-only हैं।
भारत में FAST का बूम जरूर आएगा, लेकिन कुछ फर्क के साथ। MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार, भारत में 93% दर्शक mobile पर और 71% TV स्क्रीन पर वीडियो देखते हैं, यानी यह exclusive नहीं, बल्कि multi-screen मार्केट है। FAST का "lean-back" यानी सोफे पर बैठकर TV देखने का अनुभव Smart TV पर ज्यादा Natural है। जैसे-जैसे Smart TV घरों में पहुंचेगी, FAST का भारतीय मार्केट और बड़ा होगा।
APAC FAST मार्केट 2033 तक $38.77 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो 15.2-16.5% CAGR पर बढ़ेगा।
उपभोक्ता के लिए क्या मायने रखता है?
अभी उपभोक्ता के नजरिए से FAST सेवाएं फायदेमंद हैं, मुफ्त, बिना सब्सक्रिप्शन, सिर्फ इंटरनेट चाहिए। लेकिन समस्याएं भी हैं:
कंटेंट जवाबदेही का अभाव: यदि किसी FAST ऐप पर गलत या भड़काऊ कंटेंट आता है, तो कोई स्पष्ट Grievance System नहीं है।
Pay Channels का मुफ्त वितरण: कुछ FAST प्लेटफॉर्म वे चैनल मुफ्त दे रहे हैं जिन्हें DTH पर सब्सक्रिप्शन लेकर देखना पड़ता, यह Market Distortion का मामला है।
डेटा की निजता: ACR जैसी तकनीक से OEM आपकी Viewing Habits Track कर रहे हैं और यह डेटा Ad-Targeting में इस्तेमाल हो रहा है।
रेगुलेशन इन्हीं समस्याओं का हल दे सकता है, बशर्ते वह इनोवेशन को दबाने वाला न हो।
रेगुलेशन बनाम इनोवेशन, कहां खींचें लकीर?
ट्राई के सामने सबसे कठिन काम यही है। यदि FAST ऐप्स को DTH जैसे भारी लाइसेंस नियमों में बांधा गया, तो Startup-friendly FAST Ecosystem का विकास रुक जाएगा। अगर बिल्कुल नहीं बांधा, तो पारंपरिक ऑपरेटर नाइंसाफी का शोर मचाते रहेंगे और Consumer Protection के मुद्दे अनसुलझे रहेंगे।
ABC Live के विश्लेषण के अनुसार, भारत को एक अलग ALTD फ्रेमवर्क चाहिए, न DTH का Copy-Paste, न IT Rules 2021 की सीमित छाया। इसमें Local Compliance Presence अनिवार्य हो, Grievance Officer हो, केवल MIB-Approved Channels FAST पर दिखें और Audience Measurement BARC में Integrate हो।
Tata Communications ने जो "Light-Touch, Technology-Neutral" नजरिया सुझाया है, वह सबसे व्यावहारिक लगता है: कंटेंट Accountability, Piracy Control और Consumer Protection पर नियम हों, लेकिन पुराने ढांचे का बोझ न लादा जाए।
टीवी का अगला मॉडल कैसा होगा?
सभी संकेत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं, Hybrid TV का युग। वह युग जिसमें DTH Set-Top Box और Smart TV App एक ही स्क्रीन पर साथ चलेंगे। Tata Play और Airtel पहले से Hybrid STB ला चुके हैं जो DTH के साथ OTT Apps को Integrate करते हैं। IPTV तेजी से बढ़ रहा है, Airtel के पास दिसंबर 2025 तक 25.4 लाख Active IPTV Subscribers थे।
पारंपरिक केबल और DTH खत्म नहीं होंगे, लेकिन उनकी भूमिका बदलेगी। जहां Broadband कमजोर है, वहां Satellite TV काम आएगा। जहां Smart TV और Fast Internet है, वहां FAST और OTT राज करेंगे।
जो नहीं बदलेगा वह है, कंटेंट की भूख। और उस भूख को कौन किस तरह, किस कीमत पर, किस प्लेटफॉर्म पर पूरा करता है, यही तय करेगा कि अगले 5 साल में भारतीय टेलीविजन का नक्शा कैसा दिखेगा।
ट्राई का FAST/ALTD कंसल्टेशन पेपर सिर्फ एक रेगुलेटरी दस्तावेज नहीं है, यह उस बड़े युद्ध की अगली कड़ी है जिसमें केबल, DTH, OTT, Smart TV OEM और Big Tech कंपनियां भारत के 90 करोड़ TV दर्शकों (23 करोड़ TV households) की स्क्रीन पर कब्जे के लिए लड़ रही हैं। जो आंकड़े सामने हैं वे साफ बोलते हैं, Connected TV का उभार रोकना किसी के बस में नहीं। सवाल सिर्फ यह है कि इस नई दुनिया के नियम कौन और कैसे लिखेगा।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रसार भारती ने बोलियां आमंत्रित की हैं। यह कदम डीडी फ्री डिश पर चैनल क्षमता के अगले चरण के आवंटन की तैयारियों का संकेत देता है।
दूरदर्शन की ओर से 1 अक्टूबर को जारी नोटिस के मुताबिक, प्रसार भारती इस काम के लिए भारतीय एजेंसी की तलाश कर रहा है। टेंडर की अनुमानित कीमत 32 लाख रुपये, टैक्स समेत रखी गई है। बोलियां 22 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे खोली जाएंगी। वहीं, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) यानी बोली के साथ जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि 64,000 रुपये तय की गई है।
DD Free Dish के साथ दूसरे प्लेटफॉर्म भी शामिल
चुनी गई एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ डीडी फ्री डिश तक सीमित नहीं होगी। एजेंसी को डीडी फ्री डिश के साथ-साथ प्रसार भारती के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी भी करानी होगी। टेंडर को लेकर इच्छुक बोलीदाताओं के सवालों और स्पष्टीकरण के लिए 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे प्री-बिड मीटिंग रखी गई है। यह बैठक नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन में होगी।
अगली नीलामी में कितने स्लॉट होंगे, जानकारी नहीं
डीडी फ्री डिश भारत में टीवी प्रसारकों के लिए एक अहम वितरण प्लेटफॉर्म बना हुआ है। यह प्लेटफॉर्म बिना पारंपरिक सब्सक्रिप्शन फीस के बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच उपलब्ध कराता है।
हालांकि, इस टेंडर दस्तावेज में यह नहीं बताया गया है कि प्रस्तावित अनुबंध के तहत कितने स्लॉट की नीलामी की जाएगी। साथ ही, अगली नीलामी का पूरा चक्र कब और कैसे होगा, इसकी जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है।
तकनीकी और वित्तीय बोली देनी होगी
एजेंसी का चयन दो-बोली प्रणाली के जरिए होगा। इसमें तकनीकी बोली और वित्तीय बोली शामिल होगी। दोनों बोलियां डिजिटल तरीके से प्रसार भारती के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए जमा करनी होंगी। जो बोलीदाता तकनीकी योग्यता की शर्तें पूरी करेंगे, केवल उन्हीं की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी।
ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी
प्रसार भारती ने बोलीदाताओं के लिए ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण और क्लास-III डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट होना जरूरी किया है।
पोर्टल पर सालाना पंजीकरण शुल्क 450 रुपये और जीएसटी है। वहीं, 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कीमत वाले टेंडर के लिए टेंडर प्रोसेसिंग फीस 925 रुपये और जीएसटी है। जीएसटी मिलाकर यह रकम 1,091.50 रुपये होती है।
सफल एजेंसी को देनी होगी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी
टेंडर जीतने वाली एजेंसी को अनुबंध की कीमत के 3 फीसदी के बराबर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। यह राशि अनुबंध दिए जाने के 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
यह टेंडर केवल भारतीय बोलीदाताओं के लिए रखा गया है। प्रसार भारती ने बताया है कि इस पर ग्लोबल टेंडर से जुड़ी सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) की लागू व्यवस्थाओं के मुताबिक शर्तें लागू होंगी। साथ ही, सरकार की मेक इन इंडिया खरीद नीति भी इस टेंडर पर लागू होगी।
गलत जानकारी देने पर कार्रवाई संभव
प्रसार भारती ने अपने पास किसी भी या सभी आवेदनों को बिना कारण बताए स्वीकार या खारिज करने का अधिकार रखा है। वह किसी भी चरण में टेंडर प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।
प्रसार भारती बोलीदाताओं की ओर से जमा किए गए दस्तावेज और उनकी योग्यता की जांच अनुबंध दिए जाने से पहले या बाद में भी कर सकता है।
FIFA रणनीति से जी का स्पोर्ट्स कारोबार मजबूत, लेकिन IPL की बड़ी कीमत और मुश्किल अर्थशास्त्र बनेगी चुनौती
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Samachar4media Bureau
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अगले मीडिया राइट्स ऑक्शन में एक जाना-पहचाना नाम फिर से बोली लगाता नजर आ सकता है। पुनीत गोयनका की अगुवाई वाली जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL), जो 2022 में हुए IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में बोली लगाने वालों में शामिल थी, 2028-32 के अगले चक्र के लिए मौजूदा राइट्स होल्डर जियोस्टार को चुनौती दे सकती है।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, जी ने अभी सार्वजनिक तौर पर अपनी IPL रणनीति की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ग्रुप बोली में जरूर शामिल होना चाहता है। अब उसकी नजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से अगले टेंडर का ढांचा तय किए जाने पर है।
जी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कंपनी ऐसे प्रीमियम स्पोर्ट्स में निवेश करने को तैयार है, जहां लंबे समय तक कारोबार खड़ा करने का मौका हो। उनके मुताबिक, IPL के टीवी और डिजिटल मीडिया राइट्स कंपनी के लिए विचाराधीन हैं।
जियोस्टार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि ZEEL संभावित बोलीदाता हो सकता है। उनके मुताबिक, जी ने हाल के समय में दिखाया है कि वह स्पोर्ट्स को लेकर गंभीर है और अगर BCCI राइट्स के पैकेज को ज्यादा छोटे और अलग-अलग हिस्सों में बांटता है तो ऑक्शन में और कंपनियां भी उतर सकती हैं।
FIFA से मजबूत हुआ जी का स्पोर्ट्स कारोबार
पिछले कुछ समय में जी ने अपने स्पोर्ट्स कारोबार को मजबूत करने की कोशिश की है। कंपनी ने 2026 फीफा वर्ल्ड कप समेत 2034 तक 39 ग्लोबल फुटबॉल इवेंट्स के लिए FIFA के साथ करार किया है। इन इवेंट्स को ZEE5 और Unite8 Sports चैनलों के जरिए दिखाया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, वर्ल्ड कप के शुरुआती वीकेंड में उसके डिजिटल, टीवी और सोशल प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनी। ZEE5 पर करीब 60 लाख दर्शक आए।
जी ने FIFA के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान भी पेश किए। यानी कंपनी ने सिर्फ विज्ञापन के भरोसे रहने के बजाय सब्सक्रिप्शन, डिजिटल और टीवी से कमाई का मॉडल आजमाया।
इसके अलावा जुलाई में जी ने भारत में बुंडेसलीगा के पांच साल के एक्सक्लूसिव टीवी और डिजिटल राइट्स भी हासिल किए। मैच ZEE5 और Unite8 Sports पर उपलब्ध होंगे।
हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि FIFA और IPL की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। IPL भारत की सबसे बड़ी प्रीमियम स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी है और इसके राइट्स की कीमत काफी ज्यादा है। इसलिए जी के सामने बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह IPL के लिए जरूरी बड़े निवेश को सही ठहरा पाएगी।
IPL राइट्स की कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती
2023-27 के मौजूदा IPL मीडिया राइट्स चक्र से BCCI को 48,390 करोड़ रुपये मिले थे। यह पिछली अवधि के 16,347 करोड़ रुपये से करीब तीन गुना ज्यादा था। उस समय डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई थी।
इसके बाद मीडिया कारोबार का समीकरण काफी बदल गया है। डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के विलय से जियोस्टार बना है। ऐसे में टीवी और डिजिटल IPL राइट्स अब एक ही कंपनी के पास हैं और उसके पास पहले से ही टीवी, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी का बड़ा नेटवर्क है।
IPL 2026 के दौरान जियोस्टार ने बताया था कि उसकी कुल पहुंच 1.06 अरब स्क्रीन से ज्यादा हो गई, जबकि औसत मैच पहुंच सालाना आधार पर 6% बढ़ी। कनेक्टेड टीवी की पहुंच में 26% और खपत में 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अगली नीलामी में पैकेजिंग अहम हो सकती है
मीडिया पार्टनर्स एशिया की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2028-32 के IPL राइट्स की कीमत करीब 5.4 अरब डॉलर रह सकती है। रिपोर्ट में 2028-32 के दौरान एक सीजन में मैचों की संख्या बढ़कर 94 होने की संभावना जताई गई है। इसके चलते प्रति मैच राइट्स की अनुमानित कीमत करीब 13% घट सकती है।
ऐसे में अगली नीलामी में सिर्फ राइट्स हासिल करना ही कंपनियों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों से कमाई का पूरा हिसाब महत्वपूर्ण होगा।
इसी वजह से BCCI की पैकेजिंग रणनीति भी काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अगले IPL टेंडर में राइट्स को और ज्यादा अलग-अलग पैकेज में बांटा जा सकता है। इसमें कनेक्टेड टीवी के लिए अलग पैकेज का विकल्प भी शामिल हो सकता है।
अगर ऐसा होता है तो अगले IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में जी एंटरटेनमेंट समेत ज्यादा कंपनियों के लिए बोली लगाने का रास्ता खुल सकता है।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है।
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Samachar4media Bureau
इमरान फैजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है। टाटा प्ले की स्मार्ट कनेक्टेड टीवी सर्विस में भी अब सोनी के चैनल उपलब्ध नहीं हैं। दोनों कंपनियों के बीच मामला टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) में चल रहा है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है।
यह विवाद शुरुआत में चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन और कमर्शियल शर्तों को लेकर था, लेकिन अब इसका असर टीवी देखने के नए तरीकों पर भी दिखाई दे रहा है। टाटा प्ले जैसे डिस्ट्रीब्यूटर कनेक्टेड टीवी की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं ब्रॉडकास्टर्स अलग-अलग स्क्रीन पर अपने कंटेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
टाटा प्ले स्मार्ट पर 500 से ज्यादा लाइव चैनल
टाटा प्ले ने Tata Play Smart के जरिए कनेक्टेड स्क्रीन पर अपनी टीवी सर्विस का विस्तार किया है। इसकी ऐप लिस्टिंग के मुताबिक, यहां स्पोर्ट्स, न्यूज, फिल्म और जनरल एंटरटेनमेंट समेत 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल उपलब्ध हैं।
इसमें स्टार प्लस, जी टीवी, कलर्स, स्टार स्पोर्ट्स, स्टार गोल्ड, जी सिनेमा, एमटीवी, स्टार मां, जी तेलुगु, सन टीवी और स्टार विजय जैसे प्रमुख चैनल शामिल हैं। हालांकि, सोनी के चैनल Tata Play Smart पर उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह टाटा प्ले और सोनी के बीच चल रहे विवाद का असर अब एक और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है।
डीटीएच पर चुनिंदा पैक और ए ला कार्टे में मिल रहे सोनी चैनल
टाटा प्ले की डीटीएच सर्विस पर सोनी के चैनल पूरी तरह से बंद नहीं हैं। ये चैनल ए ला कार्टे विकल्प और कुछ प्रीमियम पैक के जरिए उपलब्ध हैं। हालांकि, वे अभी भी टाटा प्ले के बेस चैनल पैक्स का हिस्सा नहीं हैं।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने इस मामले पर औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
कनेक्टेड टीवी की तरफ बढ़ रहे डिस्ट्रीब्यूटर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब डीटीएच कंपनियां सैटेलाइट आधारित टीवी से आगे बढ़कर कनेक्टेड टीवी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
कनेक्टेड टीवी के जरिए लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक ही इंटरफेस पर उपलब्ध कराया जा सकता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इससे दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने का एक और रास्ता मिलता है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स को पारंपरिक पे-टीवी के अलावा नए प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है।
लेकिन टाटा प्ले स्मार्ट से सोनी चैनलों की गैर-मौजूदगी यह दिखाती है कि नए प्लेटफॉर्म आने के बावजूद पुराने कमर्शियल विवादों का असर इन नई टीवी सर्विसेज पर भी पड़ सकता है।
त्योहारों के सीजन में भी समाधान नहीं
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव गौरव बनर्जी ने पहले उम्मीद जताई थी कि त्योहारों के सीजन में यह लंबा चला आ रहा विवाद सुलझ सकता है। हालांकि, उनके बयान से किसी ठोस समाधान या समझौते की पुष्टि नहीं हुई थी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या त्योहारों का समय कानूनी विवाद को खत्म कर सकता है, तो उन्होंने कहा था, “मुझे उम्मीद है।”
यह पूछे जाने पर कि सोनी के प्रमुख कंटेंट के साथ चैनल टाटा प्ले के बड़े चैनल पैक्स में वापस आ सकते हैं या नहीं, उन्होंने भी उम्मीद जताई थी। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया था कि दोनों कंपनियों के बीच बातचीत किस स्थिति में है या चैनलों की वापसी की कोई तय समयसीमा है।
उनका बयान टाटा प्ले पर ए ला कार्टे आधार पर सोनी चैनलों की उपलब्धता के संदर्भ में था। इससे किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई।
स्पोर्ट्स चैनलों की गैर-मौजूदगी भी अहम
सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल भी इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। लाइव स्पोर्ट्स टीवी दर्शकों को किसी खास समय पर टीवी देखने के लिए आकर्षित करता है और इससे चैनलों की मांग पर भी असर पड़ता है।
फिलहाल सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में वापस नहीं आए हैं। ऐसे में दोनों कंपनियां त्योहारों के महत्वपूर्ण टीवी सीजन में बिना किसी सार्वजनिक रूप से घोषित समाधान के आगे बढ़ रही हैं।
30 अक्टूबर को TDSAT में अगली सुनवाई
इस कमर्शियल विवाद के साथ कानूनी मामला भी जारी है। TDSAT ने 7 अगस्त को मामले की सुनवाई की थी और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर के लिए तय की है।
TDSAT के पहले के एक आदेश में टाटा प्ले को दो सप्ताह के भीतर 40 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, सोनी समूह की टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी Culver Max Entertainment की ओर से जारी 128.42 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक लगाई गई थी।
ट्रिब्यूनल ने विवादित डिमांड नोटिस पर कार्रवाई पर भी रोक लगाई थी और ब्रॉडकास्टर को विवाद से जुड़े स्थिर चित्र या स्क्रॉल प्रसारित नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद Culver Max ने TDSAT के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला टाटा प्ले के डीटीएच पैक्स से सोनी चैनलों को हटाने के फैसले को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक से जुड़ा था।
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन सोनी को एक तय सोशल मीडिया संदेश साझा करने की अनुमति दी। इसमें बताया जा सकता था कि मामला अदालत में विचाराधीन है और सोनी के चैनल टाटा प्ले पर ए ला कार्टे सर्विस के जरिए उपलब्ध हैं।
टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का बदल रहा बाजार
यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा बाजार बदल रहा है। ऑपरेटर अब कनेक्टेड टीवी और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं ब्रॉडकास्टर्स भी पे-टीवी, कनेक्टेड स्क्रीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
Vzy, Nelen और Sun Direct की Linear TV Streaming सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर JioStar, Sony Pictures Networks India, Warner Bros Discovery India और Zee Entertainment जैसे ब्रॉडकास्टर्स के चैनल भी शामिल हैं।
यहां एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलती है। सोनी एक इंटीग्रेटेड कनेक्टेड टीवी सर्विस में शामिल है, जबकि टाटा प्ले के साथ उसका डिस्ट्रीब्यूशन विवाद टाटा प्ले की स्मार्ट सर्विस तक पहुंच गया है।
अभी भी समाधान का इंतजार
टाटा प्ले के लिए कनेक्टेड टीवी का विस्तार अपने चैनल एग्रीगेशन बिजनेस को डीटीएच कनेक्शन से आगे ले जाने का मौका है। वहीं सोनी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने का जरिया है।
लेकिन टाटा प्ले और सोनी का विवाद यह दिखाता है कि तकनीक और टीवी देखने के नए प्लेटफॉर्म आने भर से कंपनियों के बीच कमर्शियल शर्तों को लेकर विवाद अपने आप खत्म नहीं होते।
30 अक्टूबर की TDSAT सुनवाई के करीब आने के साथ अब मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में कब लौटेंगे। सवाल यह भी है कि कनेक्टेड टीवी का बाजार तेजी से बढ़ने और त्योहारों के सीजन में दोनों कंपनियां किसी समझौते तक पहुंच पाती हैं या नहीं।
फिलहाल गौरव बनर्जी की ओर से जताई गई उम्मीद के बावजूद किसी समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स से बाहर हैं और Tata Play Smart की कनेक्टेड टीवी सर्विस पर भी उपलब्ध नहीं हैं।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।
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Samachar4media Bureau
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कंपनी की 30 सितंबर 2026 को हुई 32वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में दी गई।
कंपनी के मुताबिक, भारती श्रीधर को 1 अप्रैल 2027 से पांच साल की दूसरी लगातार अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। उनका नया कार्यकाल 31 मार्च 2032 तक रहेगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। यह पुनर्नियुक्ति नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश और कंपनी के निदेशक मंडल की मंजूरी के आधार पर की गई है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर रोक नहीं है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारती श्रीधर ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है और उन्हें मीडिया व एंटरमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। टेलीविजन और प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न मीडिया मंचों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव है।
कंपनी के अनुसार, मीडिया इंडस्ट्री में अपने प्रोफेशनल काम के अलावा वह ज्योतिष और अंक ज्योतिष की विशेषज्ञ और काउंसलर भी हैं। पिछले करीब 20 वर्षों में वह कई बड़े जनसंचार माध्यमों पर नजर आई हैं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों की पसंद, मीडिया संचार और टेलीविजन इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों को लेकर व्यापक समझ विकसित की है।
कंपनी ने कहा है कि उनका अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की समझ कंपनी के कामकाज और इंडस्ट्री से जुड़ाव के लिए उपयोगी नजरिया देती है।
कंपनी ने यह भी बताया है कि भारती श्रीधर फिलहाल किसी दूसरी कंपनी में निदेशक पद पर नहीं हैं। इसके अलावा, उनका कंपनी के किसी भी अन्य निदेशक के साथ कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।
कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
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Vikas Saxena
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और 11:45 बजे खत्म हुई। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।
बैठक की शुरुआत कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और कंपनी के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के ऑडिटर, कॉस्ट ऑडिटर, सेक्रेटेरियल ऑडिटर, इंटरनल ऑडिटर और स्क्रूटिनाइजर भी मौजूद रहे।
इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. राजेंद्रन ने सदस्यों का स्वागत किया और जरूरी कोरम पूरा होने के बाद बैठक शुरू की। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के सफर, आर्थिक और मीडिया उद्योग की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट, अनक्वालिफाइड ऑडिटर्स रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स रिपोर्ट सदस्यों को पहले ही भेजी जा चुकी थी और इन्हें बैठक में पढ़ा हुआ माना गया।
AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी
AGM में कुल चार प्रस्ताव रखे गए। इनमें सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रस्ताव शामिल थे।
शेयरधारकों ने सवाल भी पूछे
AGM में रजिस्टर्ड स्पीकर-शेयरहोल्डर्स अभिषेक जे. और महेश कुमार बोहरा ने अपने विचार रखे और कंपनी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे, जिनका जवाब कंपनी के मैनेजमेंट ने दिया। इसके बाद कोई और सवाल नहीं उठाया गया।
ई-वोटिंग के जरिए हुआ मतदान
कंपनी ने बताया कि रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 29 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई। AGM खत्म होने के बाद भी 15 मिनट तक ई-वोटिंग खुली रखी गई, ताकि सदस्य अपना वोट दे सकें।
कंपनी के मुताबिक, सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। ई-वोटिंग के विस्तृत नतीजे और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर जारी की जाएगी। इसे कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंजों और CDSL पर उपलब्ध कराया जाएगा।
जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है।
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Vikas Saxena
जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया है कि राज कुमार गुप्ता का कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा हो गया है। उनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को कारोबारी समय खत्म होने के साथ समाप्त हो गया।
कंपनी ने दी जानकारी में कहा कि राज कुमार गुप्ता का दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद वह अब कंपनी के स्वतंत्र निदेशक नहीं रहे हैं।
कंपनी के मुताबिक, उनका कार्यकाल कंपनी अधिनियम, 2013 और उससे जुड़े नियमों के तहत एक स्वतंत्र निदेशक के लिए तय अधिकतम अवधि पूरी होने के कारण समाप्त हुआ है।
कार्यकाल पूरा होने के साथ ही राज कुमार गुप्ता कंपनी के निदेशक मंडल की विभिन्न समितियों में सदस्य या अध्यक्ष, जहां भी लागू था, उस पद से भी अलग हो गए हैं।
पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी ने एक्स पोस्ट के जरिए 'न्यूज़ इंडिया 24X7' से ढाई साल बाद विदाई की जानकारी दी और संस्था, टीम तथा वरिष्ठों के प्रति आभार जताया।
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पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी (Surbhi Tiwari) ने न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) से अपने सफर के खत्म होने की जानकारी दी है। उन्होंने एक्स (X) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर ढाई साल के सफर को याद किया और संस्था व टीम के प्रति आभार जताया।
समाचार4मीडिया से बातचीत में सुरभि ने बताया कि न्यूज़ इंडिया उनके लिए घर जैसा हो गया था और यहां से अलग होने का फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सभी का साथ, सहयोग, प्यार, विश्वास और समर्थन मिला, जिसके लिए वह सभी की दिल से आभारी हैं।
न्यूज़ इंडिया 24X7 के साथ मेरा सफर यहीं समाप्त होता है।
— Surabhi🇮🇳 (@surabhi_tiwari_) September 30, 2026
ढाई साल का यह समय मेरे लिए शानदार रहा। ये कदम मेरे लिए बहुत इमोशनल रहा क्योंकि न्यूज इंडिया मेरे लिए मेरे घर जैसा हो गया था। ये डिसीजन लेना भी मेरे लिए बहुत मुश्किल था। मुझे यहाँ सबका साथ मिला, सबका सहयोग मिला और हर कदम पर… pic.twitter.com/e6hLjUcPXW
उन्होंने संस्था और टीम के साथ काम करने को अपने लिए गर्व की बात बताया। सुरभि ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जो कुछ सीखा और अनुभव हासिल किया, वह सभी के सहयोग से संभव हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस दौरान उनसे कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो वह इसके लिए माफी चाहती हैं। उन्होंने न्यूज़ इंडिया 24X7 के उज्ज्वल भविष्य और लगातार आगे बढ़ने की कामना की।
सुरभि ने अपने ढाई साल के सफर में विजेंद्र सर और शैलेंद्र सर का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने उन्हें जिम्मेदारी दी, उनके काम को सराहा और पूरा सम्मान दिया, जो उनके लिए बेहद मूल्यवान है और जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने पंकज त्रिपाठी के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें भारत के पनामा, ब्राजील और उरुग्वे मुकाबलों को शामिल किया गया है।
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Samachar4media Bureau
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ (India Ki Sabse Badi Party) अभियान शुरू किया है। इसका मकसद पनामा, ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम के मुकाबलों को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ाना है।
अभियान की शुरुआत 65 सेकंड की एक फिल्म से हुई है। इसमें पंकज त्रिपाठी लोगों को एक पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन शुरुआत में पार्टी की वजह नहीं बताते। बाद में पता चलता है कि यह पार्टी भारतीय टीम के पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ मुकाबले से जुड़ी है। भारत और ब्राजील के बीच मैच 3 अक्टूबर को कोलकाता में खेला जाएगा। अभियान में 25 सितंबर को पनामा और 6 अक्टूबर को उरुग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले भी शामिल हैं।
अभियान को ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी एक्स फैन एडिशन’ के तौर पर भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पंकज त्रिपाठी देशभर के फुटबॉल फैंस (Football Fans) के साथ उनकी स्थानीय भाषाओं में नजर आएंगे। इसके अलावा ‘त्रिपाठी जी की ट्यूशन’ नाम से शॉर्ट-फॉर्म फिल्मों (Short-Form Films) की सीरीज भी पेश की जाएगी, जिसमें अभिनेता फुटबॉल से जुड़े विषयों पर नजर आएंगे।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया सोशल मीडिया (Social Media) पर आधारित एक अन्य अभियान भी शुरू करेगा। इसमें पंकज त्रिपाठी भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते दिखेंगे। इस अभियान में भारतीय टीम के कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) भी शामिल होंगे।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर और स्पोर्ट्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस हेड (Chief Revenue Officer and Sports & International Business Head) राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि भारत का पनामा, ब्राजील और उरुग्वे से मुकाबला भारतीय फुटबॉल के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इसलिए अभियान को इन मैचों के उत्साह और स्तर के अनुरूप तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता, सहजता और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता उन्हें इस जश्न के लिए देश को आमंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है। अभियान के जरिए मनोरंजन और खेल को भारतीय अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि मुख्य फुटबॉल दर्शकों से आगे भी उत्साह पैदा हो और इन मुकाबलों को देशभर के लोगों के साझा आयोजन के रूप में देखा जाए।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है।
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Vikas Saxena
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि उसके शेयर की कीमत में हुआ बदलाव पूरी तरह बाजार की स्थिति की वजह से है और यह पूरी तरह बाजार से संचालित है।
कंपनी ने 28 सितंबर 2026 को बीएसई और एनएसई से मिले ईमेल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है। इन ईमेल में कंपनी के शेयर की कीमत में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
कंपनी ने कहा कि उसके शेयर की कीमत में हुई इस महत्वपूर्ण हलचल के कारणों पर प्रबंधन का न तो कोई नियंत्रण है और न ही उसे इसकी जानकारी है।
राज टेलीविजन नेटवर्क ने कहा कि वह सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत अपनी सभी जरूरी जानकारियां लगातार साझा करता रहा है और आगे भी अपनी जिम्मेदारियों के मुताबिक सभी संबंधित खुलासे करता रहेगा।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज के साथ हुए अपने समझौतों के तहत भी जरूरी खुलासे करने की बात कही है। यह जवाब कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने दिया है।
डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।
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Vikas Saxena
डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।
एजीएम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे हुई और यह दोपहर 12:27 बजे समाप्त हुई। बैठक में कुल 76 शेयरधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 15 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से, जबकि 61 सार्वजनिक शेयरधारक थे।
वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी
पहले प्रस्ताव के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.7072% वोट पड़े, जबकि 0.2928% वोट विरोध में रहे।
मनोज डोभाल फिर बने डायरेक्टर
दूसरे प्रस्ताव में मनोज डोभाल को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने खुद को पुनर्नियुक्ति के लिए पेश किया था। इस प्रस्ताव को 98.4873% वोट के साथ मंजूरी मिली, जबकि 1.5127% वोट इसके खिलाफ पड़े।
कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को भी मंजूरी
तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने का प्रस्ताव था। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया। इसके पक्ष में 99.7055% वोट पड़े, जबकि 0.2945% वोट विरोध में रहे।
कंपनी ने बताया कि तीनों प्रस्तावों को रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिली।