वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने ‘टीवी9 भारतवर्ष’ को बोला बाय, जल्द जुड़ सकते हैं इस चैनल से

मीडिया इंडस्ट्री में पीडी के नाम से फेमस प्रियदर्शन ‘टीवी9 भारतवर्ष’ में करीब पांच साल से कार्यरत थे और बतौर एडिटर (आउटपुट) अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 13 August, 2025
Priyadarshan.


वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। मीडिया इंडस्ट्री में पीडी के नाम से फेमस प्रियदर्शन इस संस्थान में करीब पांच साल से कार्यरत थे और बतौर एडिटर (आउटपुट) अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रियदर्शन जल्द ही ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। खबर है कि वह यहां पर बतौर एडिटर (आउटपुट) अपनी भूमिका निभाएंगे। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इस खबर पर मुहर लगनी बाकी है।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले प्रियदर्शन को मीडिया में काम करने का करीब ढाई दशक का अनुभव है। प्रियदर्शन पूर्व में ‘न्यूज24’ (News 24), ‘इंडिया टीवी’ (India TV) और ‘आजतक’ (AajTak) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के अलावा ‘जी न्यूज’ (Zee News) में भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पढ़ाई लिखाई की बात करें तो उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

बता दें कि इससे पहले ‘जी न्यूज’ (Zee News) में आउटपुट हेड की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार सुबोध सिंह ने पिछले दिनों यहां से इस्तीफा देकर ‘एनडीटीवी’ (NDTV) जॉइन कर लिया है।

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टीवी रेटिंग पर रोक फिर बढ़ी : ‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) का फैसला

नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले डाटा रिलीज से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
tv rating

‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने न्यूज चैनलों की टेलीविज़न ऑडियंस रेटिंग्स पर लगी रोक को चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले से ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजर्स और मीडिया प्लानर्स के बीच अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पूरा सेक्टर वीकली व्यूअरशिप डेटा पर काफी हद तक निर्भर करता है।

‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया’ (BARC India) ने सोमवार को अपने सब्सक्राइबर्स को भेजे गए कम्युनिकेशन में इस फैसले की जानकारी दी।

BARC India के मुताबिक उसे मंत्रालय की ओर से नया निर्देश मिला है, जिसमें कहा गया है कि TV न्यूज चैनलों की रेटिंग्स रिपोर्टिंग को अगले चार हफ्तों तक या अगले आदेश तक रोके रखा जाए। नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले data release से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।

इससे पहले मई में भी मंत्रालय ने रेटिंग्स रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब नई अवधि बढ़ने के बाद न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में ratings दोबारा शुरू होने को लेकर इंतजार और लंबा हो गया है।

TV न्यूज रेटिंग्स एडवर्टाइजर्स और मीडिया एजेंसीज़ के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर एडवर्टाइजिंग स्पेंड्स और कैंपेन प्लानिंग तय की जाती है।

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NDTV को SEBI मामले में बड़ी राहत, 2009 के खुलासों से जुड़े केस में नहीं लगा कोई जुर्माना

न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
NDTV874

न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि SEBI ने 2009 में किए गए कुछ समझौतों और उनके खुलासों (Disclosure) से जुड़े मामले में चल रही जांच प्रक्रिया को बंद कर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी ने SEBI के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया और उस पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

NDTV ने 2 जून 2026 को बीएसई और एनएसई को भेजे गए अपने पत्र में बताया कि वह 27 जनवरी 2020 को किए गए अपने पुराने खुलासे का संदर्भ दे रही है। उस समय कंपनी ने जानकारी दी थी कि SEBI ने उसे एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 30 का पालन नहीं किया और 2009 में किए गए कुछ समझौतों से जुड़ी जानकारियों का उचित खुलासा नहीं किया।

कंपनी ने अब बताया है कि SEBI के एजुडिकेटिंग ऑफिसर (Adjudicating Officer) ने 29 मई 2026 को जारी अपने आदेश में इस मामले का निपटारा कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने शो-कॉज नोटिस में लगाए गए आरोपों के अनुसार SEBI के लिस्टिंग नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया है और कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया गया।

NDTV के अनुसार, यह आदेश Adjudication Order No. Order/JS/DP/2026-27/32428 के तहत 29 मई 2026 को पारित किया गया। कंपनी को यह आदेश 1 जून 2026 को प्राप्त हुआ।

क्या था मामला?

SEBI ने NDTV के खिलाफ यह कार्रवाई 2009 में हुए कुछ समझौतों के खुलासे को लेकर शुरू की थी। यह मामला VCPL (विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड), RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के तत्कालीन प्रमोटरों के बीच हुए कुछ समझौतों से जुड़ा था।

SEBI का आरोप था कि इन समझौतों से संबंधित जानकारी के खुलासे में Regulation 30 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था और जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।

हालांकि, अब SEBI के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह खुलासा करने की बाध्यता (Disclosure Obligation) पैदा ही नहीं होती थी, जिसका उल्लेख शो-कॉज नोटिस में किया गया था। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही एडजुडिकेशन प्रक्रिया को बिना किसी जुर्माने के समाप्त कर दिया गया।

कंपनी पर क्या होगा असर?

NDTV ने अपने खुलासे में साफ कहा है कि SEBI के इस आदेश का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, संचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी पर किसी तरह का आर्थिक दंड नहीं लगाया गया है और न ही इस आदेश से उसके संचालन पर कोई असर पड़ेगा। 

 

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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब TV चैनलों पर हर घंटे सिर्फ 12 मिनट ही दिखेंगे विज्ञापन

देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया

Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
TV8965

देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया, जिसमें टीवी चैनलों पर हर घंटे सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई।

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन शामिल थे, ने ब्रॉडकास्टर्स और इंडस्ट्री संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। TRAI ने यह नियम साल 2013 में लागू किया था। इसके तहत किसी भी चैनल को एक घंटे में 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट अपने प्रमोशनल कंटेंट दिखाने की इजाजत है।

यह फैसला टीवी इंडस्ट्री, खासकर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनलों पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। पिछले कई सालों से कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं।

दरअसल, दिसंबर 2013 में हाई कोर्ट ने चैनलों को अस्थायी राहत देते हुए TRAI को सख्त कार्रवाई से रोक दिया था। तभी से यह मामला अदालत में लंबित था। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि TRAI का नियम वैध है।

TRAI का कहना था कि जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दर्शकों के देखने के अनुभव को खराब करते हैं और कार्यक्रमों की निरंतरता टूटती है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि TRAI के पास विज्ञापनों की अवधि तय करने का अधिकार नहीं है। उनका यह भी कहना था कि अगर विज्ञापन समय घटा दिया गया, तो कई चैनलों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद चैनलों को अपनी प्रोग्रामिंग और कमाई की रणनीति बदलनी पड़ सकती है। विज्ञापन स्लॉट कम होने से चैनल प्रीमियम रेट बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इससे विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ और तेजी से जा सकते हैं, जहां टारगेटेड और सस्ते विज्ञापन विकल्प मौजूद हैं।

मनोरंजन चैनल, मूवी चैनल और लाइव स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट करने वाले नेटवर्क्स को भी अब अपने एड शेड्यूल और इन्वेंट्री प्लानिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री अब कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रही है, जिससे यह साफ होगा कि नियम लागू करने का तरीका क्या होगा और लाइव इवेंट्स या स्पोर्ट्स प्रसारण को कोई छूट मिलेगी या नहीं।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टीवी इंडस्ट्री पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया वीडियो और OTT से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में टीवी नेटवर्क्स सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल कारोबार पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं।

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दिल्ली HC के फैसले से ब्रॉडकास्टर्स की बढ़ी चिंता, घटेगी ऐड इन्वेंट्री

दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब टीवी चैनल एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट ही विज्ञापन दिखा सकेंगे। इसमें 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के खुद के प्रमोशनल कंटेंट के लिए होंगे।

इस फैसले के साथ ब्रॉडकास्टर्स और TRAI के बीच पिछले 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई है। हालांकि मीडिया इंडस्ट्री के कई खिलाड़ी अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर (FTA) चैनलों पर पड़ सकता है। वजह यह है कि इन चैनलों की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।

दरअसल, कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, चुनाव कवरेज, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव इवेंट्स के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं। अब 12 मिनट की सीमा लागू होने के बाद उनके पास बेचने के लिए कम विज्ञापन स्लॉट बचेंगे। इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब चैनलों के सामने दो रास्ते होंगे। पहला, कम विज्ञापन स्लॉट होने की वजह से विज्ञापन दरें बढ़ाई जाएं। दूसरा, अपने बिजनेस मॉडल और प्रोग्रामिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया जाए। खासतौर पर हिंदी न्यूज चैनलों और रीजनल चैनलों पर ज्यादा दबाव बन सकता है, क्योंकि इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी ज्यादा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई सीमित है।

मीडिया एजेंसियों का मानना है कि इस फैसले के बाद टीवी विज्ञापनों की उपलब्धता कम हो जाएगी। ऐसे में प्राइम टाइम शो, बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम और लाइव स्पोर्ट्स के दौरान विज्ञापन स्लॉट की कीमतें बढ़ सकती हैं।

हालांकि विज्ञापनदाता ज्यादा महंगे टीवी विज्ञापन स्वीकार करेंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले ही ऐडवर्टाइजर्स को बेहतर टार्गेटिंग, पर्फॉमेंस ट्रैकिंग और फ्लैक्सिबल प्राइजिंग जैसे विकल्प दे रहे हैं। ऐसे में अगर टीवी चैनल विज्ञापन दरें बहुत ज्यादा बढ़ाते हैं, तो कई ब्रांड डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ तेजी से शिफ्ट हो सकते हैं।

इंडस्ट्री के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय टीवी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में चैनलों को कम विज्ञापनों में ज्यादा कमाई का नया रास्ता तलाशना पड़ सकता है।

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ABBY Awards 2026 में Zee का जलवा, बना ‘ब्रॉडकास्टर ऑफ द ईयर’

मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2026
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मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपनी के मुताबिक, उसने लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ का खिताब अपने नाम किया।

इस साल Zee ने कुल 15 अवॉर्ड जीते, जिनमें 3 गोल्ड, 6 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज और 1 मेरिट अवॉर्ड शामिल हैं। कंपनी की इस उपलब्धि को टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उसकी मजबूत पकड़ और दर्शकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

Zee Kannada, Zee Bangla, Zee Marathi और Zee Cinema जैसे चैनलों ने अलग-अलग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया। Zee Kannada के शो ‘श्री राघवेंद्र महात्मे’ को ‘Best Launch of a TV Program Using Multi-Media’ कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड मिला। वहीं Zee Cinema पर ‘Pushpa 2: The Rule’ के वर्ल्ड टीवी प्रीमियर को भी दो अलग-अलग कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

कंपनी का कहना है कि बदलते मीडिया माहौल में भी उसका लीनियर टीवी नेटवर्क लगातार मजबूत बना हुआ है और दर्शकों के बीच उसकी पकड़ कायम है।

इस उपलब्धि पर Zee Entertainment Enterprises Ltd. के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ जीतना इस बात का सबूत है कि कंपनी लगातार ऐसा कंटेंट देने पर फोकस कर रही है, जो बड़े स्तर पर दर्शकों से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सफलता टीम और पार्टनर्स की मेहनत का नतीजा है, जो लगातार नई कहानियों और दमदार किरदारों के जरिए स्टोरीटेलिंग को नई पहचान दे रहे हैं।

कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी कंटेंट रणनीति को और मजबूत किया है। मजबूत किरदारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े नए शो लॉन्च करने की वजह से Zee ने एंटरटेनमेंट नेटवर्क में अपनी पकड़ और मजबूत की है। कंपनी फिलहाल 17.4% मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर-2 एंटरटेनमेंट नेटवर्क बनी हुई है।

हिंदी, बांग्ला, ओड़िया और कन्नड़ बाजारों में Zee की मजबूत स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही Zee Cinema ने नए शो और बड़ी फिल्म प्रीमियर के दम पर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है।

ABBY Awards को देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिएटिव और मीडिया अवॉर्ड्स में गिना जाता है। इसमें देशभर की बड़ी एजेंसियां, मार्केटर्स और क्रिएटिव लीडर्स हिस्सा लेते हैं। ऐसे में लगातार चौथी बार यह सम्मान जीतना Zee के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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FAST TV पर बंटा टीवी न्यूज इंडस्ट्री का मत, TRAI के नए नियमों को लेकर बढ़ी बहस

देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2026
fasttv98562

देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। मामला TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें Application-based Linear Television Distribution (ALTD) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) सेवाओं के लिए रेगुलेशन लाने की बात कही गई है।

TRAI ने 6 अप्रैल को इस विषय पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था और कंपनियों से राय मांगी थी। इसके बाद टाइम्स नेटवर्क, एबीपी नेटवर्क, टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 जैसी बड़ी मीडिया कंपनियों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इन प्रतिक्रियाओं से साफ हो गया है कि टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य को लेकर इंडस्ट्री के भीतर बड़ी बहस चल रही है।

टाइम्स नेटवर्क और एबीपी नेटवर्क का मानना है कि FAST चैनल्स और इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन पर वैसी जिम्मेदारियां और नियम लागू नहीं हैं जैसे केबल, डीटीएच और IPTV प्लेटफॉर्म पर होते हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है।

टाइम्स नेटवर्क ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कई प्रीमियम चैनल, जो पहले पेड टीवी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे, अब FAST प्लेटफॉर्म्स पर मुफ्त में दिखाए जा रहे हैं। इससे लोगों का पेड टीवी से दूरी बनाना बढ़ रहा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर असर पड़ रहा है।

कंपनी ने यह भी चिंता जताई कि स्मार्ट टीवी कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोवाइडर्स अब यह तय करने लगे हैं कि कौन-सा चैनल दर्शकों को ज्यादा दिखाई देगा। भविष्य में ये कंपनियां चैनलों से “दिखाई देने” के बदले फीस भी मांग सकती हैं, जैसा पहले पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में देखा गया था।

एबीपी नेटवर्क ने भी कई मुद्दों पर टाइम्स नेटवर्क का समर्थन किया, लेकिन उसने पूरी तरह सख्त नियमों की बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय रेगुलेशन” की बात कही। कंपनी का कहना है कि अगर FAST इकोसिस्टम बिना किसी निगरानी के बढ़ता रहा, तो कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।

एबीपी नेटवर्क ने एल्गोरिदम के जरिए अपने कंटेंट को बढ़ावा देने, विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों के डेटा पर असमान नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई। कंपनी ने मांग की कि ब्रॉडकास्टर्स के कंटेंट से जुड़े विज्ञापन इन्वेंटरी पर उनका ही नियंत्रण रहना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 ने TRAI के इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं असल में OTT और इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन हैं, इसलिए इन्हें टेलीकॉम सर्विस की तरह रेगुलेट नहीं किया जा सकता।

टीवी टुडे नेटवर्क ने कहा कि ये सेवाएं सिर्फ इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन खुद टेलीकॉम सर्विस नहीं हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि न्यूज और कंटेंट प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, आईटी नियमों और सेल्फ-रेगुलेटरी संस्थाओं के दायरे में आते हैं। ऐसे में नए नियम सिर्फ अतिरिक्त बोझ बढ़ाएंगे।

नेटवर्क18 ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि FAST और ALTD सेवाओं को टेलीकॉम रेगुलेशन के दायरे में लाना कानूनी और संवैधानिक रूप से गलत हो सकता है। कंपनी का कहना है कि संसद ने पहले ही टेलीकॉम एक्ट के अंतिम मसौदे में OTT सेवाओं को बाहर रखा था।

नेटवर्क18 ने यह भी कहा कि इंटरनेट आधारित ऐप्स और टेलीकॉम नेटवर्क दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और पुराने ब्रॉडकास्टिंग नियम लागू करना डिजिटल इंडिया और कारोबार आसान बनाने की नीति के खिलाफ होगा।

दरअसल, भारत में FAST TV बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट टीवी की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट की बढ़ती मांग इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स इसे एक बड़े मौके के साथ-साथ अपने पारंपरिक बिजनेस के लिए खतरे के रूप में भी देख रहे हैं।

अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर TRAI की अगली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर भारत के कनेक्टेड टीवी बाजार, डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री और ब्रॉडकास्टर्स, टेक कंपनियों तथा रेगुलेटर्स के बीच ताकत के संतुलन पर पड़ सकता है।

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खेलों की दुनिया में बड़ा दांव: Zee लॉन्च करेगा ‘Unite8 Sports’ नाम से चार नए चैनल

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अब ‘Unite8 Sports’ नाम से चार नए स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने जा रही है। इसके जरिए Zee फुटबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन, रेसलिंग, बॉक्सिंग और कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे खेलों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

कंपनी के मुताबिक, वह चार चैनल लॉन्च करेगी- Unite8 Sports 1, Unite8 Sports 1 HD (हिंदी) और Unite8 Sports 2, Unite8 Sports 2 HD (अंग्रेजी)। इन चैनलों के जरिए अलग-अलग तरह के खेलों का लाइव एक्शन दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। चैनल लॉन्च करने के लिए जरूरी आवेदन भी कंपनी ने जमा कर दिए हैं।

Zee का कहना है कि भारत में लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है और दर्शकों की दिलचस्पी अब कई तरह के खेलों में बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी अपने स्पोर्ट्स कारोबार का विस्तार कर रही है।

इस नए स्पोर्ट्स कारोबार की जिम्मेदारी भावेश जनावेल्कर को दी गई है। वह अब Unite8 Sports चैनलों के Chief Business Officer के तौर पर काम संभालेंगे। इससे पहले वह कंपनी के मराठी मूवी बिजनेस को संभाल रहे थे।

भावेश जनावलेकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में ऐसे खेलों की मांग बढ़ रही है, जिनकी वैश्विक पहचान हो लेकिन जिनसे देश के आम दर्शक भी जुड़ाव महसूस करें। उन्होंने कहा कि लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और कंपनी इसी मौके का फायदा उठाना चाहती है।

कंपनी ने यह भी बताया कि वह FIFA के साथ बातचीत कर रही है, ताकि भारत में FIFA World Cup 2026 के मैचों का प्रसारण और स्ट्रीमिंग की जा सके।

Zee का मानना है कि नए स्पोर्ट्स चैनलों के जरिए वह तेजी से बढ़ रहे स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगी और लंबे समय में कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।

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‘भारत एक्सप्रेस’ के मैनेजिंग एडिटर मिहिर रंजन ने दिया इस्तीफा

मिहिर रंजन ने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
Mihir Ranjan

वरिष्ठ पत्रकार मिहिर रंजन ने देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले साल जुलाई में इस न्यूज चैनल के साथ मीडिया में अपनी नई पारी का आगाज किया था और बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अपनी इस भूमिका में मिहिर रंजन चैनल की संपादकीय रणनीति और आउटपुट संचालन का नेतृत्व कर रहे थे।

मिहिर रंजन ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। मिहिर रंजन इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया डेली लाइव’ (India Daily Live) से जुड़े हुए थे। बतौर मैनेजिंग एडिटर वह इस चैनल की सभी डिजिटल प्रॉपर्टीज की कमान संभाल रहे थे। इसी के साथ वह कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर टीवी चैनल को भी अपने सुझाव दे रहे थे।

‘इंडिया डेली लाइव’ से पहले मिहिर रंजन ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की टीम का हिस्सा थे, जहां उन्होंने एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद वह IIM, इंदौर में डिजिटल मीडिया का एक कोर्स करने चले गए थे।

‘एबीपी न्यूज’ में मिहिर रंजन करीब दो साल तक रहे थे। उन्होंने मई 2020 में बतौर आउटपुट हेड ‘एबीपी न्यूज’ जॉइन किया था।

इसके बाद वह ‘इंडिया डेली लाइव’ के साथ जुड़ गए थे और फिर पिछले साल उन्होंने ‘भारत एक्सप्रेस’ के साथ अपना सफर शुरू किया था।

मिहिर रंजन को विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। ’एबीपी न्यूज’ से पहले वह ’रिपब्लिक भारत’ (Republic Bharat) से जुड़े हुए थे। वह ‘रिपब्लिक टीवी’ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रहे हैं और ‘रिपब्लिक भारत’ में आउटपुट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में भी अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं।

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के साथ अपनी 14-15 साल की लंबी पारी के दौरान वह कई अहम प्रोग्राम भी कर चुके हैं। यही नहीं, मिहिर रंजन करीब पांच साल तक जानी-मानी न्यूज एजेंसी ‘यूएनआई’ (UNI) के साथ भी काम कर चुके हैं। इसमें करीब ढाई साल उन्होंने लखनऊ और करीब ढाई साल दिल्ली में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले मिहिर रंजन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने डिफेंस करेसपॉन्डेंट (Defence Correspondent) का कोर्स भी किया है।

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TRP विवाद: ‘लैंडिंग पेज’ व्यूअरशिप को शून्य मानना कारोबार पर चोट- हाईकोर्ट में AIDCF

ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
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टीवी इंडस्ट्री में TRP को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स लिमिटेड (DEN Networks Limited) ने केंद्र सरकार की नई TV Ratings Policy 2026 को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि नई नीति के तहत ‘लैंडिंग पेज’ की व्यूअरशिप को TRP में शामिल नहीं करना केबल ऑपरेटर्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) के कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

दरअसल, ‘लैंडिंग पेज’ वह चैनल होता है जो सेट-टॉप बॉक्स ऑन करते ही सबसे पहले स्क्रीन पर दिखाई देता है। केबल और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स माना जाता है, क्योंकि कई ब्रॉडकास्टर्स बेहतर प्लेसमेंट के लिए भुगतान करते हैं।

नई नीति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने साफ कहा है कि लैंडिंग पेज से आने वाली व्यूअरशिप को TRP में नहीं गिना जाएगा और इसे सिर्फ मार्केटिंग टूल माना जाएगा। इसी फैसले को AIDCF और DEN Networks ने अदालत में चुनौती दी है।

मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना लैंडिंग पेज डेटा वाले TRP जारी करने पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने नई TRP नीति के लागू होने पर रोक नहीं लगाई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया की बढ़ती चुनौती के बीच केबल टीवी इंडस्ट्री पहले से दबाव में है। ऐसे में लैंडिंग पेज से जुड़ी कमाई खत्म होने से कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

AIDCF और DEN Networks ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार अप्रत्यक्ष रूप से वही काम कर रही है, जिसे लेकर पहले से सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। यह विवाद 2017 से चला आ रहा है, जब Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने लैंडिंग पेज पर रेटेड चैनल दिखाने पर रोक लगाने की कोशिश की थी।

बाद में यह मामला TDSAT और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही TRAI को सीधे तौर पर ऐसे प्रतिबंध लागू करने से रोका था, लेकिन अब नई TRP नीति के जरिए वही काम दूसरे तरीके से किया जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने पहले से ऐसा एल्गोरिद्म तैयार किया हुआ है, जो यह पहचान सकता है कि दर्शक किसी चैनल को सिर्फ ऑटोमेटिक प्लेसमेंट की वजह से देख रहा है या वास्तव में उसमें रुचि ले रहा है। इसलिए पूरी तरह से लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाना तकनीकी रूप से भी सही नहीं माना जा सकता।

नई TV Ratings Policy 2026 में सिर्फ लैंडिंग पेज ही नहीं, बल्कि पूरे टीवी मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब TV रेटिंग्स में केबल, DTH, OTT और Connected TV को भी शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा मापे जाने वाले घरों की संख्या बढ़ाने, ऑडिट और निगरानी को सख्त करने जैसे कई नए नियम भी लागू किए गए हैं।

AIDCF और DEN Networks ने अदालत से मांग की है कि लैंडिंग पेज व्यूअरशिप हटाने वाले प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया जाए और नई गाइडलाइंस के अमल पर रोक लगाई जाए।

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Dish TV यूजर्स को लगा झटका: फ्री में नहीं दिखेगा 'Star Sports 1 Hindi'

Dish TV ने IPL सीजन के दौरान Star Sports 1 Hindi SD और HD की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब मैच देखने के लिए ग्राहकों को चैनल अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा।

Last Modified:
Monday, 25 May, 2026
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आईपीएल (IPL) सीजन के बीच Dish TV यूजर्स को बड़ा झटका लगा है। प्लेटफॉर्म ने Star Sports 1 Hindi SD और HD चैनलों की फ्री एक्सेस बंद कर दी है। अब क्रिकेट मैच देखने के लिए ग्राहकों को इन चैनलों को अलग से अपने पैक में जोड़ना होगा। पहले यह चैनल आईपीएल प्रसारण के दौरान कई ग्राहकों को मुफ्त उपलब्ध कराया गया था।

हालांकि अब इन्हें फिर से पेड कैटेगरी में डाल दिया गया है। Dish TV पर आईपीएल के बाकी मैच देखने के लिए सब्सक्राइबर्स को Star Sports 1 Hindi चैनल 19 रुपये प्लस जीएसटी देकर एक्टिवेट करना होगा। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आईपीएल लगातार स्पोर्ट्स चैनलों के लिए हाई व्यूअरशिप ला रहा है। खासतौर पर हिंदी क्रिकेट फीड्स की मांग काफी ज्यादा बनी हुई है।

डीटीएच ऑपरेटर्स अक्सर प्रमोशनल ऑफर या सैंपलिंग के तहत कुछ पेड चैनलों को सीमित समय के लिए फ्री उपलब्ध कराते हैं। बाद में कंपनी अपनी नीति या ऑफर के अनुसार इन्हें वापस पेड कैटेगरी में डाल सकती है। हालांकि Dish TV की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह बदलाव सभी ग्राहकों पर लागू हुआ है या केवल कुछ चुनिंदा पैक्स वाले यूजर्स पर इसे लागू किया गया है।

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