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गौरव बनर्जी का बड़ा कदम: बदलते दौर में SPNI का नया निर्माण

अगस्त 2024 में जब गौरव बनर्जी ने Sony Pictures Networks India (SPNI) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ का पद संभाला, तो उनका काम बिल्कुल आसान या सिर्फ दिखावे वाला नहीं था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

अदिति गुप्ता, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

अगस्त 2024 में जब गौरव बनर्जी ने Sony Pictures Networks India (SPNI) के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ का पद संभाला, तो उनका काम बिल्कुल आसान या सिर्फ दिखावे वाला नहीं था। उस समय SPNI इतिहास के सबसे अस्थिर दौर से गुजर रहा था। Zee Entertainment के साथ प्रस्तावित मर्जर फेल हो गया था, कई महीने तक नियम-कानून (रेगुलेशन) में अनिश्चितता थी, लीडरशिप थक गई थी और इंडस्ट्री में बड़े बदलाव होने वाले थे, जिससे कुछ ही महीनों बाद JioStar का गठन हुआ।

SPNI अब मार्केट में लीडर नहीं था और न ही कोई सीधा चुनौती देने वाला चैलेंजर। यह एक पुराना ब्रॉडकास्टर था जो सही दिशा खोज रहा था, जबकि मार्केट में स्केल, स्पोर्ट्स और स्ट्रीमिंग तेजी से पावर बदल रहे थे।

ऐसे समय में, बनर्जी के शुरुआती कदम सिर्फ लीडरशिप का स्टाइल बदलने जैसे नहीं थे, बल्कि SPNI के काम करने के तरीके को चुपचाप बदलने और बेहतर बनाने की कोशिश थे।

इंडस्ट्री के अंदर की योजना

गौरव बनर्जी इंडियन टीवी इंडस्ट्री में लंबे अनुभव के साथ SPNI आए। उन्होंने करीब 20 साल Star India और बाद में Disney Star में काम किया, जहां उन्होंने जनरल एंटरटेनमेंट, रीजनल नेटवर्क, स्पोर्ट्स और अंत में ब्रॉडकास्ट और डिजिटल दोनों को संभाला।

उनका यह अनुभव SPNI में किए गए ज्यादातर बदलावों की दिशा तय करता है। बनर्जी ने अचानक कोई बड़ा पब्लिक बदलाव नहीं किया, बल्कि पहले संगठन के अंदर काम करने का तरीका बदलने, टीम को स्थिर करने और रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर को दोबारा व्यवस्थित करने पर ध्यान दिया। उन्होंने यह भी सोचा कि कंटेंट और प्लेटफॉर्म को कैसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जाए।

कुछ ही महीनों में, SPNI ने लीडरशिप टीम में बड़े बदलाव की घोषणा की। हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट, रीजनल क्लस्टर्स, स्पोर्ट्स और डिजिटल के बीच बिज़नेस और कंटेंट जिम्मेदारियां फिर से बांटी गईं। कई सीनियर रोल्स को नया रूप दिया गया, ताकि नेटवर्क स्ट्रेटेजी, कंटेंट क्रिएशन और प्लेटफॉर्म एक्सिक्यूशन के बीच साफ़ अंतर दिखे।

रणनीतिक तौर पर यह बदलाव इसलिए किया गया कि टीवी और SonyLIV के बीच लंबे समय से बने अलग-अलग हिस्सों (साइलो) को तोड़ा जा सके और एक ऐसा कंटेंट सिस्टम तैयार किया जा सके जो कई प्लेटफॉर्म पर एक साथ प्रोग्राम चला सके।

चूंकि SPNI पर ऐडवर्टाइजिंग और सब्सक्रिप्शन दोनों से दबाव है, इसलिए यह लॉजिक बहुत साधारण है: कंटेंट को ज्यादा जगह पर पहुंचाना होगा, ज्यादा तरीके से पैसा कमाना होगा और इसे सिर्फ एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना होगा।

रेवेन्यू की हकीकत: क्यों मोनेटाइजेशन ही है असली बदलाव की चाबी 

Sony Pictures Networks India (SPNI) के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपना रेवेन्यू सिस्टम ठीक करना, क्योंकि अब यह अपने प्रतियोगियों के मुकाबले पीछे है।

SPNI का OTT (डिजिटल) रेवेन्यू FY25 में लगभग ₹1,100 करोड़ था और FY26 में भी यह करीब ₹1,100–1,200 करोड़ ही रहने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस समय बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन SPNI का डिजिटल रेवेन्यू स्थिर है और बढ़ नहीं रहा।

स्पर्धा के मामले में अंतर बहुत साफ है। JioStar का कुल रेवेन्यू FY26 में लगभग ₹33,000–35,000 करोड़ होने की उम्मीद है, जिसमें JioHotstar अकेले ₹9,000–10,000 करोड़ कमाएगा। ZEEL का कुल रेवेन्यू लगभग ₹8,000 करोड़ है, जबकि Zee5 का लगभग ₹1,200–1,300 करोड़। ये आंकड़े दिखाते हैं कि SPNI सिर्फ पैमाने (scale) में ही नहीं, बल्कि डिजिटल ग्रोथ के मामले में भी पीछे है।

गौरव बनर्जी के लिए यह साफ है कि मजबूत मोनेटाइजेशन करना उतना ही जरूरी है जितना कि कंटेंट में निवेश करना।

कंपनी का कुल रेवेन्यू FY25 में ₹6,338 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹6,641 करोड़ से कम है। ऑपरेशन से होने वाली आमदनी ₹6,151 करोड़ रही, जबकि पिछले साल यह ₹6,435 करोड़ थी। कंपनी की घरेलू आमदनी ₹5,575 करोड़ रही, जो FY24 में ₹5,777 करोड़ थी।

SPNI की विज्ञापन आमदनी FY25 में ₹2,606 करोड़ रही, जो FY24 में ₹2,857 करोड़ थी। यानी विज्ञापन से होने वाली कमाई में गिरावट आई। वहीं, सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू थोड़ी बढ़कर ₹3,244 करोड़ हुई, जो FY24 में ₹3,206 करोड़ थी। डिस्ट्रीब्यूशन और ऐड टाइम से होने वाला रेवेन्यू भी घटकर ₹86 करोड़ रह गया, जबकि FY24 में यह ₹119 करोड़ था।

कंपनी का कुल सालाना मुनाफा भी काफी गिरकर ₹456 करोड़ रह गया, जो FY24 में ₹843 करोड़ था।

प्लेटफॉर्म पर निर्भरता: YouTube दोधारी तलवार

गौरव बनर्जी के सामने एक और चुनौती यह है कि SPNI धीरे-धीरे YouTube पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है। कंपनी का बहुत सारा लाइब्रेरी और एपिसोडिक कंटेंट YouTube पर उपलब्ध है। इससे डिजिटल एड रेवेन्यू और ऑडियंस बढ़ रही है, खासकर गैर-मेट्रो और प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में।

सूत्रों के मुताबिक, SPNI को YouTube से सालाना लगभग ₹250–300 करोड़ की आमदनी होती है। इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि Sony TV की व्यूअरशिप पर डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से असर पड़ा है, और YouTube पर कंटेंट अपलोड करने से यह असर और बढ़ गया है।

Sony का संगठनात्मक बदलाव

SPNI अब YouTube पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है, लेकिन यह लंबी अवधि में ज्यादा फायदा नहीं दे सकता। इसके कारण हैं: प्लेटफॉर्म की आर्थिक स्थिति, एल्गोरिदम पर निर्भरता और सीमित प्राइसिंग पॉवर। गौरव बनर्जी का लक्ष्य यह है कि YouTube से आने वाले बड़े दर्शक फनल को SonyLIV पर गहरे एंगेजमेंट और पेड सब्सक्रिप्शन में बदलें, बजाय इसके कि फ्री YouTube प्लेटफॉर्म SPNI के अपने OTT प्लेटफॉर्म का स्थायी विकल्प बन जाए।

साउथ इंडिया पर फोकस: रीजनल विस्तार पर बड़ा दांव

SPNI की अगली ग्रोथ में अब साउथ इंडिया की मार्केट सबसे अहम हो गई है, दोनों ही पैमाने (scale) और डिजिटल महत्व के लिए। यह कंपनी का पहला गंभीर कदम है साउथ के मार्केट में, जो अब तक ज्यादातर हिंदी-केंद्रित रही है।

इस विस्तार के लिए राजारामन सुंदरम को चीफ कंटेंट ऑफिसर, साउथ बनाया गया। उनकी जिम्मेदारी है रीजनल ग्रोथ बढ़ाना, कंटेंट प्लानिंग देखना और टीवी और SonyLIV दोनों पर प्रोग्रामिंग को तेजी से बढ़ाना।

साउथ के लिए रणनीति यह है कि स्थानीय भाषा और संस्कृति को गहराई से अपनाया जाए, जैसे तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में ओरिजिनल प्रोग्रामिंग बनाना, और टीवी और OTT कंटेंट pipelines के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना।

रणनीतिक रूप से बनर्जी साउथ को सिर्फ एक छोटा मार्केट नहीं देख रहे, बल्कि इसे मुख्य ग्रोथ इंजन बना रहे हैं, जो हिंदी बेल्ट में saturaton और मोनेटाइजेशन के दबाव को संतुलित कर सके।

कंटेंट और प्लेटफॉर्म की रणनीति को नए तरीके से देखना

गौरव बनर्जी के SPNI जॉइन करने के बाद की एक खास बात यह रही कि उन्होंने बार-बार कहा कि टीवी और स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री अब “आरामदायक स्थिति में नहीं” है, और इस समय इन दोनों में इनोवेशन करना जरूरी है।

यह सोच SPNI के अंदर चल रहे बदलावों को भी दर्शाती है। पहले SPNI मुख्य रूप से एक मजबूत टीवी नेटवर्क था, और डिजिटल प्लेटफॉर्म (SonyLIV) छोटा और अलग था। बनर्जी के नेतृत्व में अब रणनीति बदली है। अब कंटेंट रणनीति प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं होगी। यानी प्रोग्रामिंग के फैसले सिर्फ टीवी की साप्ताहिक रेटिंग्स के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल देखने, कैच-अप और सिंडीकेशन को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

यह बदलाव नेतृत्व की जिम्मेदारियों और SonyLIV पर नए फोकस में भी साफ दिखता है। अब SonyLIV सिर्फ सपोर्ट प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि ग्रोथ का एक मुख्य जरिया माना जा रहा है।

मूल विचार यह है कि SPNI सिर्फ अपने बड़े वितरण नेटवर्क (distribution scale) पर टिककर नहीं जीत सकता। कंपनी की ताकत तब आएगी जब वह इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को बेहतर तरीके से विकसित, नियंत्रित और मोनेटाइज करेगी, चाहे प्लेटफॉर्म कोई भी हो।

स्पोर्ट्स का सवाल: बिना ज्यादा रिस्क लिए प्रासंगिक बने रहना

जिन कंपनियों के पास पैसा और ताकत है, उन्होंने स्पोर्ट्स राइट्स (टूर्नामेंट और मैच दिखाने का अधिकार) बड़े खर्च करके हासिल किए हैं और मार्केट में दबदबा बनाया है। लेकिन गौरव बनर्जी के तहत SPNI की रणनीति अलग है। उन्होंने सिर्फ जरूरी पार्टनरशिप और साझेदारी पर भरोसा किया है, बजाय इसके कि हर स्पोर्ट्स राइट के लिए ज्यादा पैसा खर्च किया जाए।

उदाहरण के तौर पर, JioStar के साथ मिलकर भारत की इंग्लैंड टूर दिखाना इस सोच को दर्शाता है। इसमें Sony की टीवी ब्रॉडकास्ट ताकत और JioStar की डिजिटल पहुंच का इस्तेमाल हुआ।

SPNI बड़े खिलाड़ियों के मुकाबले ज्यादा पैसा खर्च करने की बजाय यह तरीका अपनाता है कि महत्वपूर्ण स्पोर्ट्स इवेंट्स में मौजूद रहे, लेकिन अपने फाइनेंसियल रिस्क को ज्यादा न बढ़ाए।

क्योंकि अब SPNI इंडस्ट्री में सबसे बड़े पैसों वाले नेटवर्क में नहीं आता, इसलिए यह पार्टनरशिप-आधारित मॉडल ज्यादा महत्व रखता है। इसका मकसद केवल स्पोर्ट्स में दबदबा बनाना नहीं, बल्कि रिस्क कम करके प्रासंगिक बने रहना है।

Netflix–CID सहयोग

SPNI ने Netflix के साथ CID को फिर से लाने का फैसला किया, जिसे इंडस्ट्री में एक प्रतीकात्मक (symbolic) कदम माना जा रहा है।

एक तरफ यह एक जान-पहचान वाली टीवी फ्रैंचाइज़ी को फिर से वापस लाना है। लेकिन दूसरी तरफ यह रणनीतिक बदलाव भी दिखाता है: SPNI अब सिर्फ ब्रॉडकास्टर नहीं है, बल्कि एक कंटेंट स्टूडियो भी बन रहा है जो अपनी IP (intellectual property) को ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स को सप्लाई कर रहा है।

यह कदम इंडस्ट्री की उस बड़ी प्रवृत्ति के साथ मेल खाता है जिसमें पुराने ब्रॉडकास्टर अब अपने लाइब्रेरी और फ्रैंचाइज़ीज़ को स्ट्रीमिंग पार्टनरशिप के जरिए मोनेटाइज कर रहे हैं।

SPNI, जिसके पास अपने बड़े प्रतियोगियों जितना डिजिटल स्केल नहीं है, के लिए यह एक वैकल्पिक विकास मार्ग है। इसका फोकस है स्वामित्व और क्रिएटिव सप्लाई पर, न कि प्लेटफॉर्म के साथ सीधे मुकाबले पर।

यह यह भी दर्शाता है कि इस प्लेटफॉर्म-प्रधान इकोसिस्टम में संघर्ष से ज्यादा सहयोग करना ज्यादा व्यावहारिक रणनीति हो सकती है।

लीडरशिप और संगठनात्मक बदलाव

SPNI के सीईओ गौरव बनर्जी के तहत कंपनी का सबसे बड़ा और अहम कदम रहा लीडरशिप या प्रबंधन टीम का फिर से संगठन करना। पिछले 12–18 महीनों में कंपनी में कई सीनियर अधिकारी या तो छोड़कर चले गए या नए लोगों को जिम्मेदारी दी गई। यह बदलाव दो वजहों से हुआ: एक तो पूरी इंडस्ट्री पर जो दबाव है और दूसरा कंपनी की काम करने की प्राथमिकताओं को बदलने की योजना।

कई सीनियर और लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारी SPNI से निकल गए या अपने रोल बदल रहे हैं। इनमें नीरज व्यास, जो पहले हिंदी एंटरटेनमेंट और मूवीज़ क्लस्टर के हेड थे; लीना लेले दत्ता, किड्स और एनीमेशन की हेड; संदीप मेहरोत्रा, एड सेल्स के हेड; तुषार शाह, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर और मूवीज़, रीजनल, FTA और इनफोटेनमेंट बिज़नेस के हेड; सोहा डी कुलकर्णी, वाइस-प्रेजिडेंट और फिक्शन प्रोग्रामिंग की क्रिएटिव हेड और दानिश खान, जो SonyLIV और Studio NEXT के बिज़नेस हेड थे और मार्च 2026 तक SPNI छोड़ देंगे, शामिल हैं। डेनिश ने SPNI में करीब एक दशक तक काम किया है।

इसी के साथ, SPNI ने कई नए लीडर्स को प्रमोट और अपॉइंट किया, ताकि कंपनी की नई कंटेंट और प्लेटफ़ॉर्म-फोकस्ड रणनीति के साथ संगठन का तालमेल बने। जनवरी 2026 में कंटेंट और मोनेटाइजेशन के लिए की गई इस रीलाइनमेंट के तहत नचिकेत पंतवैद्य Sony Entertainment Television (SET), Sony Marathi और मूवी प्रोडक्शन के लिए जिम्मेदार बनाए गए। अजय भालवानकर को Sony SAB, मूवीज़, FTA और इनफोटेनमेंट चैनल्स की जिम्मेदारी मिली। राजारामन सुंदरम को साउथ इंडिया में रीजनल विस्तार संभालने के लिए नियुक्त किया गया और अम्बेश तिवारी Sony AATH और किड्स बिज़नेस के प्रभारी बने।

SPNI में मोनेटाइजेशन और सपोर्ट टीम में बड़े बदलाव किए गए। राजेश कौल को चीफ रेवेन्यू ऑफिसर बनाया गया, जो पूरे रेवेन्यू स्ट्रेटेजी और मोनेटाइजेशन के लिए जिम्मेदार होंगे।

इस बदलाव के तहत अक्षय अग्रवाल को लीनियर ऐड सेल्स का हेड बनाया गया है, जबकि मकरंद पालेकर को लीनियर डिस्ट्रिब्यूशन संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। रंजना मंगला की जिम्मेदारी बढ़ाकर अब उन्हें डिजिटल एड सेल्स और YouTube स्ट्रेटेजी भी देखनी है। साथ ही, मनीष अग्रवाल SonyLIV के B2B और सिंडीकेशन बिज़नेस के प्रभारी बनाए गए हैं।

सपोर्ट फंक्शन में भी संगठन को री-अलाइन किया गया है। गौरव लाघाटे अब कॉर्पोरेट ब्रांड और कम्युनिकेशन की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि मनु वाधवा CHRO बने रहेंगे और अब प्रशासन और फैसिलिटीज़ की निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी में शामिल हो गई है।

SPNI से आगे की पोजिशनिंग

गौरव बनर्जी के इंडस्ट्री में निभाए जाने वाले रोल, जैसे कि BARC के चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति और इंडस्ट्री फोरम में उनकी भागीदारी, केवल पब्लिक दिखावे के लिए नहीं हैं। ये रणनीतिक कदम हैं।

वे इंडस्ट्री के मेज़रमेंट सिस्टम, पॉलिसी डिस्कशन और क्रिएटिव-इकोनॉमी की बातें समझकर SPNI को भारतीय मीडिया के बड़े फ्रेमवर्क में एक मजबूत पोजिशन देते हैं। इसका मकसद सिर्फ खुद को दिखाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि SPNI उन इंडस्ट्री चर्चाओं में शामिल रहे जो विज्ञापन और पॉलिसी पर असर डालती हैं।

दूसरे चरण की तैयारी

खुले तौर पर नहीं कहा गया, लेकिन साफ दिख रहा है कि SPNI का लंबी अवधि का भविष्य शायद अकेले ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के रूप में नहीं है। बनर्जी ने खुद माना है कि कंपनी को अपने पोर्टफोलियो में कमियां पूरी करनी होंगी और मर्जर या अधिग्रहण (mergers & acquisitions) के अवसर तलाशने होंगे।

इंडस्ट्री तेजी से कुछ बड़े प्लेटफॉर्म्स के इर्द-गिर्द कंसॉलिडेट हो रही है, इसलिए यह संकेत है कि SPNI भविष्य में एलायंस, जॉइंट वेंचर या कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग के लिए खुला है।

इसी नजरिए से बनर्जी के वर्तमान कदम- संगठन को साफ करना, IP पर मजबूत पकड़ बनाना, स्पोर्ट्स प्रेजेंस को स्थिर करना और कंपनी को क्रिएटिव सप्लायर के रूप में पोजिशन करना SPNI को भविष्य के विकल्पों के लिए तैयार कर रहे हैं।

भविष्य में ये कदम नई पार्टनरशिप, छोटे निवेश या कोई और मर्जर में बदलेंगे या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा।


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