शेयरचैट (ShareChat) ने नितिन जैन को अपना नया चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (Chief Technology Officer) नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
शेयरचैट (ShareChat) ने नितिन जैन को अपना नया चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (Chief Technology Officer) नियुक्त किया है। इस भूमिका में नितिन, शेयरचैट और इसके शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म 'मोज' (Moj) पर तकनीक के विकास और अनुप्रयोग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
नितिन जैन एक अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने विज्ञापन, ई-कॉमर्स, फिनटेक और उन्नत डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में कई बदलावकारी परियोजनाओं का नेतृत्व किया है। उन्होंने शुरुआती विचारों को विकसित कर प्रभावशाली वैश्विक मंचों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपने करियर में नितिन ने Tokopedia, Gojek और हाल ही में TikTok जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में काम किया है। उन्होंने शून्य से तकनीकी व्यवसायों को खड़ा करने और उन्हें तेजी से बढ़ाने का अनुभव हासिल किया है। उनकी विशेषज्ञता कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और आधुनिक देवऑप्स प्रथाओं जैसे अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में है।
नितिन के स्वागत में शेयरचैट और मोज के सीईओ व को-फाउंडर अंकुश सचदेवा ने कहा, “नितिन एक वैश्विक तकनीकी लीडर हैं, जिनके पास विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में काम करने का दो दशकों से अधिक का अनुभव है। शेयरचैट और मोज में विकास के अगले अध्याय की शुरुआत के लिए नितिन का अनुभव और तकनीकी व्यवसायों को स्केल करने की उनकी सिद्ध क्षमता गेम-चेंजर साबित होगी। उनके टीम में शामिल होने और हमारे तकनीकी संगठन का नेतृत्व करने को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं।”
अपनी नियुक्ति पर नितिन जैन ने कहा, “मैं ग्राहक-केंद्रित उत्पादों को विकसित करने के लिए अत्यधिक जुनूनी हूं, जो नवाचार और तकनीकी अनुप्रयोगों के माध्यम से वास्तविक मूल्य प्रदान करते हैं। शेयरचैट के साथ काम करने और इतने प्रतिभाशाली टीम से सीखने का अवसर मेरे लिए बेहद रोमांचक है। मैं अपने अनुभव का उपयोग करके हमारे बढ़ते उपयोगकर्ताओं और क्रिएटर्स समुदाय को एक अत्यधिक व्यक्तिगत सामाजिक अनुभव प्रदान करने के लिए तत्पर हूं।”
यह नियुक्ति शेयरचैट और मोज के लिए तकनीकी क्षेत्र में नवाचार और विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों के साथ एआई सुरक्षा समझौते पर चर्चा की। कंपनियों ने आंतरिक जांच, निगरानी, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की समीक्षा पर सहमति जताई।
by
Samachar4media Bureau
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को व्हाइट हाउस (White House) में बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ (CEO) के साथ बैठक की। बैठक में एआई (AI) की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic), मेटा (Meta), ओपनएआई (OpenAI), एक्सएआई (xAI) और एनवीडिया (Nvidia) समेत कंपनियों ने एक स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत कंपनियों ने अपने एआई सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर निगरानी रखने पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों की ओर से अपने एआई मॉडल की जांच, अलग टीम के जरिए निगरानी, बाहरी विशेषज्ञों या स्वतंत्र संस्थाओं से ऑडिट और बोर्ड की स्वतंत्र समिति की ओर से रिपोर्ट की समीक्षा शामिल है।
बैठक के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी एसआई (Super Intelligence - SI) नाम के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द तकनीक को बनावटी बताता है। इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रंप ने एआई के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही थी।
ट्रंप ने एआई की दौड़ को अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा और अमेरिका के आगे होने की बात कही। बैठक में टेक कंपनियों के एआई विकास और सुरक्षा के साथ डेटा सेंटर (Data Center) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ट्रंप ने टेक कंपनियों से कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां की स्थानीय कम्युनिटी (Local Community) के साथ मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को स्थानीय लोगों के लिए स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी जरूरतों में मदद करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
ट्रंप ने एआई कंपनियों के लिए सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) पर भी जोर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता फिलहाल स्वैच्छिक है और इसमें कंपनियों की ओर से अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
एनवीडिया ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल लॉन्च किए हैं, जो एआई एजेंट्स की रियल-टाइम एक्सेस को नियंत्रित करेंगे और नियम तोड़ने पर उन्हें बंद कर सकेंगे।
by
Samachar4media Bureau
सेमीकंडक्टर कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल (Open-Source Software Security Tools) लॉन्च किए हैं। ये टूल कंपनी के हार्डवेयर (Hardware) पर चलेंगे और यह नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Artificial Intelligence) एजेंट रियल-टाइम में किन चीजों का एक्सेस (Access) ले सकते हैं।
अगर एआई एजेंट तय नियमों को तोड़ते हैं, तो ये टूल उन्हें बंद भी कर सकते हैं। कंपनी ने यह कदम ऑटोनॉमस एजेंट (Autonomous Agent) के गलत व्यवहार से जुड़ी कई घटनाओं के बाद उठाया है।
एनवीडिया के एंटरप्राइज एआई के वाइस प्रेसिडेंट जस्टिन बोइटानो (Justin Boitano) ने कहा कि अगर अत्याधुनिक एआई लैब्स ने अपने एआई मॉडल को टेस्ट करने के लिए इस टेक्नोलॉजी का पहले ही इस्तेमाल किया होता, तो हगिंग फेस (Hugging Face) पर हुआ हमला रोका जा सकता था।
कंपनी को उम्मीद है कि उसका ओपन एजेंट सेफ्टी प्लेटफॉर्म (Open Agent Safety Platform) एआई डेवलपमेंट (AI Development) की रफ्तार को धीमा किए बिना भविष्य में होने वाली ऐसी सेंधमारी को रोकने में मदद करेगा। इसे तकनीक की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम बताया जा रहा है।
एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसेन हुआंग (Jensen Huang) ने नए एआई नियमों की जरूरत को ज्यादा अहमियत नहीं दी है, लेकिन सुरक्षा की कड़ी जांच पर जोर दिया है। वह सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को इंजीनियरिंग चैलेंज (Engineering Challenge) मानते हैं, न कि ऐसी समस्या जिसके लिए ज्यादा नियमों या वैश्विक तालमेल की जरूरत हो।
हुआंग ने कुछ एआई डेवलपर्स के उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि उनकी टेक्नोलॉजी से इंसानों का अस्तित्व खत्म हो सकता है।
भारत सरकार AI को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। इससे AI कंपनियों और कंप्यूटिंग ढांचे को मदद मिल सकती है।
by
Samachar4media Bureau
भारत सरकार देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) यानी एआई (AI) को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड का मकसद एआई कंपनियों को फंडिंग देने के साथ बड़े एआई मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Computing Infrastructure) विकसित करना है।
प्रस्तावित नेशनल फ्रंटियर एआई एंड कंप्यूट फंड (National Frontier AI and Compute Fund) के तहत एआई कंपनियों और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबी अवधि के लिए फंड उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा हो रही है।
प्रस्तावित फंड से दो प्रमुख क्षेत्रों को मदद मिलने की उम्मीद है। पहला, बड़े एआई मॉडल तैयार करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों को लंबे समय के लिए फंडिंग उपलब्ध कराना। दूसरा, एआई मॉडल बनाने और चलाने के लिए जरूरी जीपीयू क्लस्टर्स (GPU Clusters) और डाटा सेंटर (Data Centre) तैयार करने में मदद करना। इससे उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें शुरुआती दौर में बड़े निवेश की जरूरत होती है।
इस फंड में सरकार के साथ निजी निवेशकों को जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हो रही है। एक प्रस्ताव के तहत सरकार और निजी निवेशक 50-50 हिस्सेदारी के साथ फंड में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि, फंड का कुल आकार, निवेश का तरीका और सरकार की भूमिका अभी तय नहीं हुई है। वित्तीय संस्थानों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
यह प्रस्तावित फंड इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) से अलग होगा, लेकिन उसे मजबूत करने में मदद कर सकता है। इंडिया एआई मिशन के लिए सरकार ने 10,372 करोड़ रुपये का खर्च मंजूर किया है। इसके तहत कंपनियों को कम कीमत पर कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराने और देश में एआई क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
नया फंड खास तौर पर बड़े एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों और बड़े कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लंबी अवधि की फंडिंग उपलब्ध कराने पर ध्यान देगा।
गूगल ने जेमिनी में ‘कॉल फॉर मी’ फीचर शुरू किया है। इसके जरिए एआई यूजर की तरफ से बिजनेस को फोन कर सामान, बुकिंग और अपॉइंटमेंट से जुड़े काम कर सकेगा।
by
Samachar4media Bureau
गूगल (Google) ने जेमिनी (Gemini) के लिए ‘कॉल फॉर मी’ (Call for Me) नाम का नया फीचर शुरू किया है। इसकी मदद से जेमिनी यूजर की तरफ से किसी बिजनेस (Business) को फोन कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा अमेरिका में रहने वाले पिक्सल 11 (Pixel 11) यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी, जो जेमिनी की पेड मेंबरशिप (Paid Membership) लेते हैं। इसके लिए एंड्रॉयड (Android) के गूगल फोन ऐप (Google Phone App) का बीटा वर्जन (Beta Version) भी जरूरी होगा।
गूगल फिलहाल इस फीचर को प्रयोग के तौर पर सीमित स्तर पर उपलब्ध करा रहा है। ‘कॉल फॉर मी’ की मदद से जेमिनी किसी दुकान पर फोन करके सामान उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी ले सकता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट में टेबल बुक करने, अपॉइंटमेंट की तारीख बदलने या किसी सामान को कुछ समय के लिए रखने जैसे काम भी किए जा सकेंगे।
फोन कॉल के दौरान एआई अपना परिचय देगा, मेन्यू के विकल्प चुनेगा और जरूरत पड़ने पर होल्ड पर भी इंतजार करेगा। गूगल के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर जेमिनी यूजर की मंजूर की गई निजी जानकारी भी फोन पर साझा कर सकेगा। इससे बिजनेस के साथ बातचीत के दौरान ज्यादा काम पूरा किया जा सकेगा।
कॉल शुरू होने के बाद यूजर बातचीत को लाइव ट्रांसक्रिप्ट (Live Transcript) के जरिए देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर कॉल को नियंत्रित भी कर सकेंगे। खास बात यह है कि फोन करने के लिए जेमिनी यूजर के अपने मोबाइल नंबर (Mobile Number) का इस्तेमाल करेगा।
गूगल का नया फीचर कंपनी की पहले से मौजूद एआई कॉलिंग (AI Calling) तकनीक पर आधारित है। इससे पहले कंपनी ‘कॉल फॉर मी’, ‘होल्ड फॉर मी’ (Hold for Me) और दूसरे फीचर भी दे चुकी है, जो फोन कॉल में मदद करते हैं।
कंपनी के मुताबिक, वास्तविक फोन बातचीत कई बार आसान नहीं होती और अलग-अलग स्थितियां सामने आ सकती हैं। इसी वजह से ‘कॉल फॉर मी’ को अभी छोटे स्तर पर शुरू किया गया है। बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने से पहले फीचर में सुधार किया जाएगा।
एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर X Number फीचर आया है। इसके जरिए यूजर्स बिना फोन नंबर शेयर किए चैट, कॉल और वीडियो कॉल कर सकते हैं।
by
Samachar4media Bureau
एलॉन मस्क (Elon Musk) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर नया एक्स नंबर (X Number) फीचर आया है। इसकी मदद से यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए किसी से चैट (Chat), कॉल (Call) या वीडियो कॉल (Video Call) कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए दोनों लोगों का एक-दूसरे को फॉलो करना भी जरूरी नहीं है।
कई बार लोग प्राइवेसी (Privacy) की वजह से किसी के साथ फोन नंबर शेयर नहीं करना चाहते। वहीं, कुछ मामलों में सामने वाले व्यक्ति को फॉलो किए बिना बातचीत करना चाहते हैं। ऐसे में एक्स नंबर फीचर उपयोगी हो सकता है।
एक्स नंबर कोई फोन नंबर नहीं है, बल्कि एक प्राइवेट कोड (Private Code) है। यूजर इस कोड को उस व्यक्ति के साथ शेयर कर सकता है, जिससे वह एक्स पर बात करना चाहता है। कोड शेयर करने के बाद दोनों लोग प्लेटफॉर्म पर चैट कर सकते हैं।
यह सुविधा केवल चैट तक सीमित नहीं है। यूजर्स एक्स पर कॉल और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। हालांकि, कॉल और वीडियो कॉल का विकल्प एक्स की प्राइवेसी सेटिंग्स (Privacy Settings) पर निर्भर करता है।
एक्स नंबर फीचर में प्राइवेसी को लेकर एक और सुविधा दी गई है। अगर यूजर अपने एक्स नंबर को रिफ्रेश करके नया कोड बनाता है, तो पुराना कोड काम करना बंद कर देता है। इसके बाद पुराने कोड के जरिए कोई व्यक्ति दोबारा संपर्क नहीं कर पाएगा।
इस तरह एक्स नंबर यूजर्स को अपना फोन नंबर निजी रखते हुए प्लेटफॉर्म पर चैट और कॉल करने की सुविधा देता है। यह एक प्राइवेट कोड है, जिसे यूजर अपनी जरूरत के मुताबिक शेयर और रिफ्रेश कर सकता है।
गूगल भारत से जुड़े बाल यौन शोषण सामग्री मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत संबंधित जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र को दी जाएगी।
by
Samachar4media Bureau
गूगल (Google) भारत से जुड़े चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (Child Sexual Abuse Material) यानी सीएसएएम (CSAM) मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिसमें इन मामलों की जानकारी पहले अमेरिका स्थित मध्यस्थ के पास भेजने के बजाय सीधे भारतीय अधिकारियों को दी जा सके।
यह कदम मेटा (Meta) की ओर से पिछले सप्ताह उठाए गए इसी तरह के कदम के बाद सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकारी अधिकारियों ने बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से बच्चों से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग चेन (Reporting Chain) को छोटा करने की मांग की थी। दो भारतीय सरकारी सूत्रों ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी कि इससे स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई में काफी देरी हो सकती है।
गूगल ने कहा है कि वह प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि गूगल सीएसएएम का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और रिपोर्ट करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करता है। कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था सरकार के साथ चल रही बातचीत का हिस्सा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल ने सीएसएएम से जुड़े मामलों में संबंधित जानकारी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (Indian Cyber Crime Coordination Centre) यानी आई4सी (I4C) के साथ साझा करने की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इससे भारतीय अधिकारियों को ऐसे मामलों में ज्यादा सीधा रिपोर्टिंग चैनल मिल सकेगा।
कई वर्षों से गूगल और मेटा संदिग्ध सीएसएएम मामलों के लिए इंटरनेशनल रिपोर्टिंग प्रोसेस (International Reporting Process) का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके तहत संदिग्ध सामग्री की जानकारी अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (National Center for Missing & Exploited Children) यानी एनसीएमईसी (NCMEC) को भेजी जाती है।
एनसीएमईसी साइबरटिपलाइन (CyberTipline) संचालित करता है और संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक रिपोर्ट पहुंचाता है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त चरण में महत्वपूर्ण समय लग सकता है, खासकर उन मामलों में जहां किसी बच्चे को तत्काल खतरा हो और स्थानीय पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत हो।
ऐपल भारत में अगले महीने अपनी पेमेंट सर्विस ऐपल पे लॉन्च कर सकती है। शुरुआत एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड से होने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
by
Samachar4media Bureau
टेक कंपनी ऐपल (Apple) अगले महीने भारत में अपनी पेमेंट सर्विस (Payment Service) ऐपल पे (Apple Pay) लॉन्च कर सकती है। मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी शुरुआत एक्सिस बैंक (Axis Bank) के क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के साथ होने की संभावना है। हालांकि, ऐपल और संबंधित बैंकों ने संभावित लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ऐपल पे के आने के बाद आईफोन (iPhone) यूजर्स को अलग पेमेंट ऐप (Payment App) खोलने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने फोन में सुरक्षित तरीके से सेव कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगे और भुगतान मशीन के पास फोन ले जाकर टैप-एंड-पे (Tap-and-Pay) कर सकेंगे। भुगतान की पुष्टि फेस आईडी (Face ID) और टच आईडी (Touch ID) के जरिए की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐपल एक्सिस बैंक के अलावा एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के साथ भी बातचीत कर रही है। दोनों बैंकों के साथ चर्चा जारी है, लेकिन अभी कारोबारी शर्तों (Business Terms) पर सहमति नहीं बनी है। कंपनी की योजना अलग-अलग बैंकों के साथ सीधे समझौते करके सेवा का विस्तार करने की है।
शुरुआत एक बड़े बैंकिंग पार्टनर (Banking Partner) के साथ हो सकती है और बाद में अन्य बैंकों को जोड़ा जा सकता है। पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने कार्ड भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Biometric Authentication) की अनुमति दी थी।
भारत में ऐपल पे को पहले से मजबूत डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) बाजार में जगह बनानी होगी। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी यूपीआई (UPI) देश के डिजिटल भुगतान में करीब 84 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। यूपीआई के जरिए क्यूआर कोड (QR Code), फोन नंबर और टैप-एंड-पे से भुगतान किया जा सकता है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से भारत के स्मार्टफोन बाजार में ऐपल की हिस्सेदारी बढ़कर आठ प्रतिशत हो गई है। इससे भारत कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है।
दिल्ली पुलिस ने हीरो फिनकॉर्प से जुड़े 12.84 करोड़ रुपये के कथित साइबर ठगी मामले में बैंक रिलेशनशिप मैनेजर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
by
Samachar4media Bureau
दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने हीरो फिनकॉर्प लिमिटेड (Hero FinCorp Ltd.) से जुड़े कथित 12.84 करोड़ रुपये के साइबर ठगी (Cyber Fraud) मामले में बैंक रिलेशनशिप मैनेजर (Bank Relationship Manager) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कंपनी के खाते से बिना अनुमति 317 डिजिटल ट्रांजैक्शन (Digital Transactions) किए गए और रकम 34 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। मामले में 1.7 करोड़ रुपये की ठगी की रकम रोकी गई है।
कंपनी को एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के सिस्टम अलर्ट (System Alert) के जरिए खाते में संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली। शिकायत के अनुसार, कंपनी के प्रबंधन की जानकारी, अनुमति या सहमति के बिना 12,84,09,997 रुपये के 317 डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए। यह रकम पहले स्तर के 34 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई।
स्पेशल सेल (Special Cell) की आईएफएसओ यूनिट (IFSO Unit) ने जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और लेनदेन की जानकारी खंगाली। इसके बाद देश के कई हिस्सों में छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान बुलंदशहर के अभय कुमार सोलंकी, कुरुक्षेत्र के लवली, जयपुर के नमन कुमार, बीकानेर के हरमन और जयपुर के विकास के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, सोलंकी के खाते में 60 हजार रुपये पहुंचे, जिन्हें बाद में एटीएम (ATM) से निकाला गया। लवली के खाते में कथित तौर पर 80 लाख रुपये और नमन के खातों में करीब 1.10 करोड़ रुपये मिले हैं।
पुलिस का आरोप है कि हरमन ने कमीशन लेकर नमन का बैंक खाता चलाया और उसके मोबाइल में एपीके फाइल (APK File) इंस्टॉल कराई। वहीं बैंक रिलेशनशिप मैनेजर विकास ने नमन को बैंक खाते खुलवाने और हरमन से संपर्क कराने में मदद की। हरमन कथित तौर पर टेलीग्राम (Telegram) पर विदेशी समूहों के संपर्क में था।
अमेजन प्राइम वीडियो ने अमेरिका में News Clips फीचर शुरू किया है, जिसके जरिए यूजर्स को लोकल और नेशनल खबरों के क्यूरेटेड शॉर्ट वीडियो ऑन-डिमांड देखने मिलेंगे।
by
Samachar4media Bureau
अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) ने अमेरिका में न्यूज ऑफरिंग (News Offering) का विस्तार करते हुए News Clips नाम का नया फीचर लॉन्च किया है। इसके जरिए यूजर्स को लोकल और नेशनल खबरों से जुड़े क्यूरेटेड शॉर्ट वीडियो (Curated Short Videos) ऑन-डिमांड देखने को मिलेंगे।
फिलहाल News Clips प्राइम वीडियो ऐप (Prime Video App) पर टीवी और दूसरे लिविंग-रूम डिवाइसेज (Living-Room Devices) में उपलब्ध हैं। इन्हें Trending Topics और Local News कैरोसेल (Carousel) के जरिए देखा जा सकता है। अमेजन के मुताबिक, यह फीचर आगे चलकर वेब के साथ iOS और Android ऐप्स पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि मोबाइल पर News Clips वर्टिकल वीडियो (Vertical Video) फॉर्मेट में होंगे या नहीं।
News Clips के जुड़ने से प्राइम वीडियो की मौजूदा फ्री न्यूज सर्विस (Free News Service) में ऑन-डिमांड शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट (Short-Form Content) भी शामिल हो गया है। प्लेटफॉर्म पर पहले से ABC News Live, CBS News 24/7, CNN Headlines और NBC News NOW जैसे प्रोवाइडर्स की 24/7 लाइव न्यूज (Live News) उपलब्ध है।
अमेरिका में यह न्यूज प्रोग्रामिंग (News Programming) सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। इसके लिए यूजर के पास प्राइम मेंबरशिप (Prime Membership) होना जरूरी नहीं है।
News Clips का लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब कई स्ट्रीमिंग सर्विसेज (Streaming Services) शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट की ओर बढ़ रही हैं। Peacock ने मार्च में शॉर्ट-फॉर्म क्लिप्स पेश किए थे। इसके बाद जुलाई में HBO Max और Netflix ने, जबकि अगस्त में Disney+ ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया।
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने AI के दो बड़े खतरों को लेकर चेताया है। उन्होंने इंसानी नियंत्रण खत्म होने और ताकत के एक हाथ में सिमटने को गंभीर जोखिम बताया।
by
Samachar4media Bureau
ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) को लेकर दो बड़े खतरों की ओर ध्यान दिलाया है। एक एक्स पोस्ट (X Post) में उन्होंने कहा कि अगर एआई का विकास गलत दिशा में गया तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं।
ऑल्टमैन के मुताबिक पहला बड़ा खतरा यह है कि एआई सिस्टम (AI Systems) इतने सक्षम और ताकतवर हो जाएं कि इंसान उन पर अपना नियंत्रण खो दें। उनका मानना है कि तकनीक के आगे बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इंसानी नियंत्रण किसी भी स्थिति में खत्म न हो।
उन्होंने कहा कि एआई के विकास के साथ सेफ्टी (Safety) पर भी लगातार ध्यान देना होगा। इसके लिए निगरानी, सुरक्षा जांच और समय-समय पर सिस्टम की समीक्षा जरूरी होगी, ताकि संभावित जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सके।
The world deserves confidence that American companies developing increasingly capable AI will act responsibly, especially as the trajectory of progress has steepened. Every frontier lab must deliver on this, and there is no reason any of us should come to work if we cannot.
— Sam Altman (@sama) September 14, 2026
We…
ऑल्टमैन ने दूसरा बड़ा खतरा एआई की ताकत के किसी एक व्यक्ति, कंपनी या देश के हाथों में सिमटने को बताया। उनका कहना है कि अगर किसी एक पक्ष के पास बहुत शक्तिशाली एआई आ गया और उसका इस्तेमाल अपनी सोच दूसरों पर थोपने के लिए किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भविष्य में कोई देश या एआई कंपनी जरूरत से ज्यादा शक्तिशाली बन सकती है। इसलिए एआई का विकास संतुलित तरीके से होना चाहिए और इसके इस्तेमाल पर पर्याप्त निगरानी रखी जानी चाहिए।
ऑल्टमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई डेवलपमेंट (AI Development) को रोकना समाधान नहीं है। इसके बजाय कंपनियों को तेज विकास के साथ सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना चाहिए। इसके लिए निगरानी व्यवस्था, सेफ्टी टेस्टिंग (Safety Testing) और स्वतंत्र ऑडिटर्स (Independent Auditors) की मदद ली जा सकती है।
उन्होंने एआई कंपनियों के लिए समान नियम बनाने का समर्थन किया। साथ ही कहा कि कंपनियों को कानून बनने का इंतजार किए बिना खुद भी जरूरी सुरक्षा कदम उठाने चाहिए। इससे एआई के संभावित गलत इस्तेमाल और भविष्य के बड़े खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।