इंटरनेट पर इंसानों से आगे निकली मशीनें : 50% से ज्यादा ट्रैफिक अब बॉट्स का

क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट का 50% से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय एआई, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम से आया।

Last Modified:
Tuesday, 11 August, 2026
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इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब वेबसाइट्स पर आने वाले ट्रैफिक में इंसानों के मुकाबले मशीनों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट पर पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक नॉन-ह्यूमन सिस्टम (Non-Human Traffic) से आया। इसमें एआई सिस्टम, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम शामिल हैं।

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। एआई एजेंट अब इंसानों की तरह एक-एक वेबसाइट खोलकर जानकारी तलाशने के बजाय एक साथ बड़ी संख्या में वेबसाइट्स से डेटा जुटा सकते हैं।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी व्यक्ति को नई घड़ी खरीदनी है तो वह कीमत और फीचर्स देखने के लिए कुछ वेबसाइट्स खोल सकता है। वहीं, एआई एजेंट इसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स से एक साथ जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण कर सकता है और फिर यूजर को एक जवाब दे सकता है।

क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस (Matthew Prince) ने मार्च में बताया था कि एक इंसान किसी प्रोडक्ट की जानकारी के लिए करीब पांच वेबसाइट्स देख सकता है, जबकि एआई एजेंट उसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मशीनों की ओर से भेजी जाने वाली रिक्वेस्ट भी तेजी से बढ़ रही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले तक क्लाउडफ्लेयर का अनुमान था कि बॉट ट्रैफिक 2027 तक इंसानी ट्रैफिक से आगे निकल सकता है। लेकिन कंपनी के नए आंकड़ों के मुताबिक यह बदलाव अनुमान से पहले ही हो गया।

जुलाई 2026 में क्लाउडफ्लेयर ने बताया कि इंटरनेट के इतिहास में पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय नॉन-ह्यूमन सिस्टम से आया। आसान भाषा में कहें तो वेबसाइट्स पर आने वाली हर 100 रिक्वेस्ट में 50 से ज्यादा रिक्वेस्ट इंसानों के अलावा दूसरे सिस्टम से आ रही हैं।

इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि इंटरनेट का इस्तेमाल अब सिर्फ इंसानों द्वारा वेबसाइट्स देखने तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में एआई एजेंट भी इंटरनेट पर जानकारी खोजने, तुलना करने और यूजर्स के लिए काम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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ओपनएआई के ब्रैड लाइटकैप ने दिया इस्तीफा : 8 साल बाद होंगे अलग

ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ नया शुरू करेंगे।

Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
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ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बताया कि वह अब “कुछ नया शुरू” करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

ब्रैड लाइटकैप 2018 में ओपनएआई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Chief Financial Officer-CFO) के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद 2022 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान लाइटकैप ने कई अहम बिजनेस और ऑपरेशनल टीमों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें फाइनेंस, लीगल, पीपल, कॉरपोरेट सिक्योरिटी, गो-टू-मार्केट, गवर्नमेंट अफेयर्स और पार्टनरशिप्स जैसी टीमें शामिल हैं।

लाइटकैप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें कंपनी की कई ऑपरेशनल और बिजनेस टीमों के शुरुआती ढांचे तैयार करने का मौका मिला। उन्होंने इन टीमों को आगे बढ़ते और अनुभवी नेतृत्व के तहत मजबूत होते देखना अपने सफर के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक बताया।

उन्होंने ओपनएआई की मौजूदा टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह कंपनी के अगले दशक को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम लोगों के हाथों में देखकर उत्साहित हैं। ब्रैड लाइटकैप तुरंत कंपनी से अलग नहीं होंगे। वह अगले कुछ हफ्तों तक ओपनएआई में बने रहेंगे और जिम्मेदारियों के ट्रांजिशन (Transition) में मदद करेंगे।

उनके जाने के बाद ओपनएआई के ऑपरेशनल और बिजनेस नेतृत्व में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से उनके अगले कदम या नई कंपनी को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

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जीस्केल से जुड़े सिद्धार्थ सिंह : बने प्रेसिडेंट–मार्केटिंग और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह को President – Marketing एवं Chief Marketing Officer नियुक्त किया है। इसकी जानकारी उन्होंने LinkedIn पोस्ट के जरिए साझा की।

Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
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एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह (Siddharth Singh) को प्रेसिडेंट–मार्केटिंग (President – Marketing) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से कंपनी के साथ काम कर रहे हैं।

नई जिम्मेदारी में सिद्धार्थ सिंह जीस्केल की मार्केटिंग (Marketing), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) और गो-टू-मार्केट (Go-to-Market) रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।

अपने लिंक्डइन पोस्ट में सिद्धार्थ सिंह ने लिखा कि स्टार्टअप्स में काम करने का अनुभव इतना रोमांचक रहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी नई भूमिका साझा करने में कुछ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि जीस्केल का लक्ष्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को गति देने के लिए एक एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है।

उन्होंने कहा कि एआई की चर्चा अक्सर केवल मॉडल्स तक सीमित रहती है, जबकि उन्हें सुचारु रूप से चलाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिद्धार्थ ने कहा कि नई भूमिका उन्हें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को और गहराई से समझने तथा इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने का अवसर देगी।

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WhatsApp का नया फीचर: अलग फोल्डर में होंगे ऑफर्स और डिलीवरी मैसेज

व्हाट्सऐप (WhatsApp) जल्द Offers & Updates फोल्डर लाने की तैयारी में है, जिससे ऑफर्स, डिलीवरी और एयरलाइन अपडेट जैसे बिजनेस मैसेज मुख्य चैट लिस्ट से अलग दिखाई देंगे।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। इस अपडेट के तहत ऐप में ''Offers & Updates'' नाम का नया फोल्डर या सेक्शन जोड़ा जाएगा, जिसमें बड़ी कंपनियों की ओर से आने वाले ऑफर्स, डिस्काउंट, डिलीवरी अपडेट और एयरलाइन से जुड़े संदेश अपने आप अलग दिखाई देंगे।

टेकक्रंच (TechCrunch) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की मुख्य चैट लिस्ट (Main Chat List) को साफ-सुथरा रखना है। नया फीचर आने के बाद ई-कॉमर्स कंपनियों, एयरलाइंस और अन्य बड़े ब्रांड्स के बिजनेस मैसेज कुछ समय बाद स्वतः ''Offers & Updates'' फोल्डर में चले जाएंगे, जिससे व्यक्तिगत चैट्स के बीच इन संदेशों की भीड़ नहीं रहेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप फिलहाल इस फीचर के लिए अलग-अलग समय सीमा की टेस्टिंग कर रहा है। यह अवधि अधिकतम 24 घंटे तक हो सकती है। हालांकि यूजर्स इस समय सीमा को अपनी पसंद के अनुसार बदल नहीं सकेंगे।

अगर किसी यूजर को यह फीचर पसंद नहीं आता है, तो वह ऐप की सेटिंग्स (Settings) में जाकर इसे बंद भी कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा केवल बड़ी कंपनियों (Large Businesses) के बिजनेस अकाउंट्स पर लागू होगी। छोटे बिजनेस और पर्सनल अकाउंट्स को फिलहाल इससे बाहर रखा जाएगा, हालांकि भविष्य में उन्हें भी इस फीचर के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।

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दुनियाभर में करीब एक घंटे ठप रही ओपनएआई की चैटजीपीटी सर्विस

ओपनएआई (OpenAI) की चैटजीपीटी (ChatGPT) सेवा शनिवार दोपहर करीब एक घंटे तक प्रभावित रही। भारत समेत कई देशों के यूजर्स ने दिक्कत की शिकायत की।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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ओपनएआई (OpenAI) का लोकप्रिय एआई चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) शनिवार दोपहर अचानक तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। इस दौरान भारत सहित दुनिया के कई देशों के यूजर्स करीब एक घंटे तक सेवा का उपयोग नहीं कर सके। बाद में कंपनी ने समस्या दूर होने की पुष्टि की और सेवाएं सामान्य हो गईं।

आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर (Downdetector) पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। यूजर्स ने बताया कि उन्हें चैटजीपीटी का वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही थी।

यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के यूजर्स ने भी सेवा बाधित होने की रिपोर्ट दी। ओपनएआई (OpenAI) ने स्वीकार किया कि चैटजीपीटी (ChatGPT) के साथ-साथ उसकी एपीआई (APIs) और कोडैक्स (Codex) सेवाएं भी प्रभावित हुईं। कंपनी ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की जांच की जा रही है और समस्या की वजह का पता लगाया जा रहा है।

चैटजीपीटी (ChatGPT) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट है, जिसे ओपनएआई (OpenAI) ने विकसित किया है। यह यूजर्स के प्रॉम्प्ट के आधार पर जवाब तैयार करता है और ईमेल, लेख, अनुवाद, कहानियां तथा सोशल मीडिया पोस्ट जैसी सामग्री बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह इमेज जनरेट करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।

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Apple बनाम OpenAI: पूर्व एंप्लॉयीज से मांगे दस्तावेज, बढ़ा कानूनी विवाद

नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
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एप्पल (Apple) ने ओपनएआई (OpenAI) के साथ चल रहे कानूनी विवाद को और आगे बढ़ाते हुए अपने करीब 40 पूर्व एंप्लॉयीज को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी कर्मचारी अब ओपनएआई में कार्यरत हैं। नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।

यह कदम उस संघीय मुकदमे (Federal Lawsuit) के बाद उठाया गया है, जिसमें एप्पल ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने हार्डवेयर कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए गोपनीय हार्डवेयर डिजाइनों, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और मैन्युफैक्चरिंग ब्लूप्रिंट्स तक पहुंच बनाने की संगठित कोशिश की।

मुकदमे में एप्पल (Apple) ने अपने दो पूर्व एंप्लॉयीज का नाम लिया है, जो अब ओपनएआई (OpenAI) के हार्डवेयर डिवीजन से जुड़े हैं। इनमें पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, प्रोडक्ट डिजाइन (Vice President of Product Design) तांग तान (Tang Tan) शामिल हैं, जो वर्तमान में ओपनएआई में हेड ऑफ हार्डवेयर (Head of Hardware) हैं। दूसरे नाम चांग लियू (Chang Liu) का है, जो पहले आईफोन (iPhone) के वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Senior System Electrical Engineer) रह चुके हैं।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल का मानना है कि यह मामला केवल दो एंप्लॉयीज तक सीमित नहीं है। कंपनी का दावा है कि उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी वर्तमान में ओपनएआई में कार्यरत हैं और मुकदमे में नामित दोनों लोग इस बड़े मामले का केवल "आइसबर्ग का ऊपरी हिस्सा" (Tip of the Iceberg) हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने मुकदमा दायर करने के तुरंत बाद अपने लगभग 10 प्रतिशत पूर्व एंप्लॉयीज को लीगल प्रिजर्वेशन नोटिस भेजे हैं। कंपनी का उद्देश्य ऐसे साक्ष्य जुटाना है, जिनसे यह साबित किया जा सके कि ओपनएआई का हार्डवेयर कारोबार कथित रूप से एप्पल के ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग पर आधारित है।

वहीं ओपनएआई (OpenAI) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट्स में कोई रुचि नहीं है। कंपनी का कहना है कि उसे ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे एप्पल की शिकायत को उचित ठहराया जा सके।

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ओपनएआई ने उदय रुद्दारराजू को बनाया ''Chief Technology Officer, Compute''

अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं।

Last Modified:
Saturday, 18 July, 2026
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ओपनएआई (OpenAI) ने उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) को चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, कंप्यूट (Chief Technology Officer, Compute) के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वह कंपनी में हेड ऑफ कंप्यूट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (Head of Compute and Infrastructure) के रूप में कार्यरत थे।

उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) जुलाई 2025 में ओपनएआई (OpenAI) से जुड़े थे। इससे पहले वह एलन मस्क (Elon Musk) की एआई कंपनी एक्सएआई (xAI) में हेड ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग (Head of Infrastructure Engineering) के पद पर कार्यरत थे। OpenAI में शामिल होने से पहले उन्होंने xAI में अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया था।

अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं। इससे पहले वह वर्ष 2013 से 2018 तक ईबे (eBay) के साथ भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।

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AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर HCLTech का बड़ा दांव, डेटा सेंटर बनाने में लगाएगी ₹3,500 करोड़

देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है।

Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2026
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देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। कंपनी AI डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। इन डेटा सेंटरों की क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 50 मेगावाट (MW) तक की जा सकती है।

कंपनी का कहना है कि यह निवेश सरकारी और निजी संस्थानों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। खास तौर पर ऐसे सॉवरेन AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे, जिनमें डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा और प्रोसेस किया जा सके।

HCLTech के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सी. विजयकुमार ने कहा कि AI ने कंप्यूटिंग की पूरी अर्थव्यवस्था बदल दी है। उनके मुताबिक, डेटा सेंटर अब AI समाधान की सबसे मजबूत नींव बन चुके हैं। इन्हीं के जरिए GPU, AI मॉडल और एंटरप्राइज एप्लिकेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह HCLTech के लिए भविष्य में विकास का एक नया बड़ा अवसर साबित होगा।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब HCLTech ने हाल ही में भारत के AI स्टार्टअप Sarvam AI में 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। कंपनी का उद्देश्य देश में स्वदेशी AI तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है।

वहीं, कंपनी ने पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं। इस दौरान HCLTech की आय 3.6 अरब डॉलर रही। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 0.9 प्रतिशत कम, लेकिन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी की आय तिमाही-दर-तिमाही 0.5 प्रतिशत घटी, जबकि सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत बढ़ी है।

कंपनी का मानना है कि AI डेटा सेंटर और AI आधारित सेवाओं में बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में उसके कारोबार को नई गति देगा।

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स्पैम कॉल के खिलाफ TRAI की बड़ी तैयारी, WhatsApp-Google से होगी साझेदारी

देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI इस समय Meta Platforms और Google के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि WhatsApp और Google Phone Dialer पर यूजर्स द्वारा की गई स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम कंपनियों की शिकायत प्रणाली से जोड़ा जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, TRAI ने दोनों टेक कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिससे थर्ड पार्टी ऐप्स पर दर्ज स्पैम शिकायतों का डेटा सीधे टेलीकॉम इंडस्ट्री के Distributed Ledger Technology (DLT) प्लेटफॉर्म और TRAI के Do Not Disturb (DND) पोर्टल तक पहुंच सके।

फिलहाल अगर कोई यूजर WhatsApp पर किसी बिजनेस अकाउंट को स्पैम के रूप में रिपोर्ट करता है या Google के फोन डायलर पर किसी नंबर को स्पैम बताता है, तो यह जानकारी सिर्फ Meta या Google के सिस्टम तक ही सीमित रहती है। टेलीकॉम कंपनियों या नियामक एजेंसियों को इसका सीधा फायदा नहीं मिल पाता।

TRAI चाहता है कि इस डेटा को DLT नेटवर्क से जोड़ा जाए। DLT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां टेलीमार्केटर्स के पंजीकरण और कमर्शियल कॉल व मैसेज की निगरानी के लिए करती हैं। वहीं, DND पोर्टल पर उपभोक्ता अनचाहे प्रमोशनल कॉल और एसएमएस की शिकायत दर्ज कराते हैं।

अगर यह डेटा एक साथ उपलब्ध होगा, तो बार-बार स्पैम कॉल और मैसेज भेजने वाले लोगों या कंपनियों की पहचान करना आसान हो जाएगा। इससे ऐसे नंबरों और नेटवर्क पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि Meta और Google के साथ स्पैम मैनेजमेंट को लेकर सक्रिय रूप से बातचीत चल रही है। TRAI चाहता है कि WhatsApp अपने स्पैम से जुड़े डेटा को टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा करे, ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में DLT सिस्टम के सख्त होने के बाद कई स्पैम करने वाले पारंपरिक SMS छोड़कर WhatsApp जैसे इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में TRAI अब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट दोनों पर स्पैम फैलाने वालों पर एक साथ नजर रखने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, यह प्रस्ताव अभी विचार-विमर्श के चरण में है और इस पर Meta व Google के साथ चर्चा जारी है। अंतिम ढांचा तैयार होने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। अगर यह योजना लागू होती है, तो देश में स्पैम कॉल और फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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प्राइवेसी विवाद के बाद मेटा ने 'Muse AI' का विवादित फीचर हटाया

मेटा ने यूजर्स की आलोचना के बाद अपने AI इमेज जनरेटर 'Muse AI' का विवादित फीचर हटा दिया है। यह फीचर पब्लिक 'Instagram' अकाउंट की तस्वीरों के आधार पर AI इमेज बनाने की सुविधा देता था।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2026
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मेटा (Meta) ने अपने AI इमेज जनरेटर म्यूज़ एआई (Muse AI) का एक विवादित फीचर हटा दिया है। इस फीचर को लेकर यूजर्स और डिजिटल अधिकार (Digital Rights) से जुड़े विशेषज्ञों ने प्राइवेसी (Privacy) और डेटा सुरक्षा (Data Safety) पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके जरिए किसी पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) अकाउंट की तस्वीरों का इस्तेमाल कर AI इमेज बनाई जा सकती थी।

मेटा (Meta) ने हाल ही में म्यूज़ एआई (Muse AI) को एक नए AI इमेज जनरेशन टूल के रूप में पेश किया था। इस फीचर के तहत यूजर्स किसी पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) प्रोफाइल को टैग कर उसकी तस्वीरों के आधार पर नई AI इमेज तैयार कर सकते थे। कंपनी का कहना था कि इसका उद्देश्य यूजर्स को अधिक रचनात्मक (Creative) अनुभव उपलब्ध कराना है।

हालांकि, फीचर लॉन्च होते ही इसकी आलोचना शुरू हो गई। यूजर्स और डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना था कि इससे बिना स्पष्ट सहमति (Consent) के पब्लिक इंस्टाग्राम (Instagram) तस्वीरों का AI मॉडल में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इमेज स्क्रैपिंग (Image Scraping) और डेटा प्राइवेसी (Data Privacy) को लेकर भी चिंताएं जताई गईं।

लगातार बढ़ते विरोध के बाद मेटा (Meta) ने कहा कि उसने यूजर्स की प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया है। कंपनी ने स्वीकार किया कि यह फीचर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा, इसलिए इसे हटा दिया गया है। मेटा (Meta) के अनुसार उसका उद्देश्य केवल एक उपयोगी क्रिएटिव टूल उपलब्ध कराना था।

इस विवाद के बाद भारत सरकार ने भी मामले पर नजर रखी है। सरकार इस फीचर से जुड़ी शिकायतों और सुझावों की समीक्षा कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत मामले का आकलन किया जाएगा।

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''WhatsApp Username विवाद'' : सरकार लाएगी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समान नियम

सरकार से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि MeitY ऐसा ढांचा तैयार करना चाहता है, जिससे सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर समान प्रकार के फीचर्स एक जैसे नियमों के तहत संचालित हों।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियामकीय मानक (Common Regulatory Framework) तैयार करने पर काम कर रहा है। इस बीच सरकार व्हाट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर अपनी आपत्तियां भी बनाए हुए है। यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर यूजरनेम फीचर लागू होने से प्रतिरूपण (Impersonation), तथाकथित डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और ऑनलाइन धोखाधड़ी (Online Fraud) जैसे मामलों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के लिए जांच करना भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, MeitY द्वारा जारी नोटिस के जवाब में व्हाट्सऐप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) दोनों ने अपने-अपने उत्तर मंत्रालय को सौंप दिए हैं। इन जवाबों में कंपनियों ने यूजरनेम फीचर में शामिल सुरक्षा उपायों (Safeguards) की जानकारी दी है।

वर्तमान में व्हाट्सऐप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal) और अरट्टई (Arattai) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) के रूप में कार्य करते हैं।

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