एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) को 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी चेन्नई में 10,000 GPU वाली AI फैक्ट्री बनाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसी बीच एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को 10,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये का मेगा ऑर्डर मिला है। इसके तहत चेन्नई में भारत की बड़ी सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा तैयार की जाएगी।
इस AI फैक्ट्री में एनवीडिया (NVIDIA) के B300 प्लेटफॉर्म पर आधारित करीब 10,000 GPU लगाए जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट अमेरिका की AI क्लाउड कंपनी टुगेदर AI (Together AI) के लिए तैयार किया जाएगा।
इस सुविधा का इस्तेमाल बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस के लिए किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यहां AI कंपनियों और डेवलपर्स को बड़े स्तर पर तेज कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे AI मॉडल को तैयार करने और चलाने में मदद मिलेगी।
L&T के लिए यह ऑर्डर इसलिए भी खास है क्योंकि इससे कंपनी AI फैक्ट्री कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी। कंपनी पहले से डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम कर रही है और अब इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए भारत के तेजी से बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
10 हजार GPU से बढ़ेगी कंप्यूटिंग क्षमता
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका करीब 10,000 GPU वाला क्लस्टर है। बड़े AI मॉडल को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। GPU एक साथ बड़ी संख्या में गणनाएं करने में सक्षम होते हैं, इसलिए AI मॉडल की ट्रेनिंग और जटिल कामों को तेजी से पूरा करने में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
एनवीडिया का B300 प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के बड़े AI कंप्यूटिंग कामों के लिए तैयार किया गया है। इतने बड़े स्तर पर GPU की तैनाती से AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है L&T
L&T की AI और डेटा सेंटर रणनीति नई नहीं है। फरवरी 2026 में कंपनी ने एनवीडिया के साथ भारत में गीगावॉट-स्केल AI फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना का ऐलान किया था।
इसके तहत चेन्नई में GPU क्लस्टर को 30 मेगावाट तक बढ़ाने और मुंबई में 40 मेगावाट का नया डेटा सेंटर विकसित करने की योजना बताई गई थी। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जहां भारतीय कंपनियों के साथ ग्लोबल क्लाउड कंपनियां और अन्य संस्थान बड़े स्तर पर AI मॉडल तैयार और इस्तेमाल कर सकें।
नया ऑर्डर भारत में AI कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे देश में बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। वॉशिंगटन डीसी में OpenAI के दफ्तर में प्रदर्शन के दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अमेरिका और यूरोप में विरोध बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई (OpenAI) के दफ्तर में घुसकर AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला और इस दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
यह सिर्फ किसी कंपनी के दफ्तर के बाहर हुआ सामान्य प्रदर्शन नहीं है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और यूरोप में AI को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर लोगों की चिंता और नाराजगी सामने आ रही है। इनमें नौकरी जाने का डर, कलाकारों के काम के इस्तेमाल और AI के लिए बनाए जा रहे बड़े डेटा सेंटर से जुड़ी बिजली और पानी की खपत जैसे मुद्दे शामिल हैं।
मार्च 2026 में सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) में भी प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई के दफ्तर से लेकर एलन मस्क (Elon Musk) की एक्सएआई (xAI) तक मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि AI के विकास की रफ्तार को रोका जाए।
वॉशिंगटन डीसी में हुए प्रदर्शन में भी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे होने वाले संभावित नुकसान को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि AI कंपनियां जिस तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, उसके मुकाबले सरकारें नियम और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने में पीछे रह रही हैं।
इसी वजह से अमेरिका में AI का विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अब टेक कंपनियों के दफ्तरों, सरकारी संस्थानों और डेटा सेंटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मार्च में सैन फ्रांसिस्को में ओपनएआई (OpenAI), एंथ्रोपिक (Anthropic) और गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) से जुड़े ठिकानों पर भी प्रदर्शन हुए थे। जुलाई में भी सैन फ्रांसिस्को में स्टॉपएआई (StopAI) से जुड़े लोगों ने AI कंपनियों के खिलाफ मार्च किया।
ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ नया शुरू करेंगे।
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ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बताया कि वह अब “कुछ नया शुरू” करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रैड लाइटकैप 2018 में ओपनएआई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Chief Financial Officer-CFO) के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद 2022 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान लाइटकैप ने कई अहम बिजनेस और ऑपरेशनल टीमों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें फाइनेंस, लीगल, पीपल, कॉरपोरेट सिक्योरिटी, गो-टू-मार्केट, गवर्नमेंट अफेयर्स और पार्टनरशिप्स जैसी टीमें शामिल हैं।
लाइटकैप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें कंपनी की कई ऑपरेशनल और बिजनेस टीमों के शुरुआती ढांचे तैयार करने का मौका मिला। उन्होंने इन टीमों को आगे बढ़ते और अनुभवी नेतृत्व के तहत मजबूत होते देखना अपने सफर के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक बताया।
उन्होंने ओपनएआई की मौजूदा टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह कंपनी के अगले दशक को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम लोगों के हाथों में देखकर उत्साहित हैं। ब्रैड लाइटकैप तुरंत कंपनी से अलग नहीं होंगे। वह अगले कुछ हफ्तों तक ओपनएआई में बने रहेंगे और जिम्मेदारियों के ट्रांजिशन (Transition) में मदद करेंगे।
उनके जाने के बाद ओपनएआई के ऑपरेशनल और बिजनेस नेतृत्व में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से उनके अगले कदम या नई कंपनी को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट का 50% से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय एआई, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम से आया।
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इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब वेबसाइट्स पर आने वाले ट्रैफिक में इंसानों के मुकाबले मशीनों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट पर पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक नॉन-ह्यूमन सिस्टम (Non-Human Traffic) से आया। इसमें एआई सिस्टम, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम शामिल हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। एआई एजेंट अब इंसानों की तरह एक-एक वेबसाइट खोलकर जानकारी तलाशने के बजाय एक साथ बड़ी संख्या में वेबसाइट्स से डेटा जुटा सकते हैं।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी व्यक्ति को नई घड़ी खरीदनी है तो वह कीमत और फीचर्स देखने के लिए कुछ वेबसाइट्स खोल सकता है। वहीं, एआई एजेंट इसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स से एक साथ जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण कर सकता है और फिर यूजर को एक जवाब दे सकता है।
क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस (Matthew Prince) ने मार्च में बताया था कि एक इंसान किसी प्रोडक्ट की जानकारी के लिए करीब पांच वेबसाइट्स देख सकता है, जबकि एआई एजेंट उसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मशीनों की ओर से भेजी जाने वाली रिक्वेस्ट भी तेजी से बढ़ रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले तक क्लाउडफ्लेयर का अनुमान था कि बॉट ट्रैफिक 2027 तक इंसानी ट्रैफिक से आगे निकल सकता है। लेकिन कंपनी के नए आंकड़ों के मुताबिक यह बदलाव अनुमान से पहले ही हो गया।
जुलाई 2026 में क्लाउडफ्लेयर ने बताया कि इंटरनेट के इतिहास में पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय नॉन-ह्यूमन सिस्टम से आया। आसान भाषा में कहें तो वेबसाइट्स पर आने वाली हर 100 रिक्वेस्ट में 50 से ज्यादा रिक्वेस्ट इंसानों के अलावा दूसरे सिस्टम से आ रही हैं।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि इंटरनेट का इस्तेमाल अब सिर्फ इंसानों द्वारा वेबसाइट्स देखने तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में एआई एजेंट भी इंटरनेट पर जानकारी खोजने, तुलना करने और यूजर्स के लिए काम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह को President – Marketing एवं Chief Marketing Officer नियुक्त किया है। इसकी जानकारी उन्होंने LinkedIn पोस्ट के जरिए साझा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह (Siddharth Singh) को प्रेसिडेंट–मार्केटिंग (President – Marketing) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से कंपनी के साथ काम कर रहे हैं।
नई जिम्मेदारी में सिद्धार्थ सिंह जीस्केल की मार्केटिंग (Marketing), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) और गो-टू-मार्केट (Go-to-Market) रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।
अपने लिंक्डइन पोस्ट में सिद्धार्थ सिंह ने लिखा कि स्टार्टअप्स में काम करने का अनुभव इतना रोमांचक रहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी नई भूमिका साझा करने में कुछ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि जीस्केल का लक्ष्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को गति देने के लिए एक एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि एआई की चर्चा अक्सर केवल मॉडल्स तक सीमित रहती है, जबकि उन्हें सुचारु रूप से चलाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिद्धार्थ ने कहा कि नई भूमिका उन्हें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को और गहराई से समझने तथा इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने का अवसर देगी।
व्हाट्सऐप (WhatsApp) जल्द Offers & Updates फोल्डर लाने की तैयारी में है, जिससे ऑफर्स, डिलीवरी और एयरलाइन अपडेट जैसे बिजनेस मैसेज मुख्य चैट लिस्ट से अलग दिखाई देंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। इस अपडेट के तहत ऐप में ''Offers & Updates'' नाम का नया फोल्डर या सेक्शन जोड़ा जाएगा, जिसमें बड़ी कंपनियों की ओर से आने वाले ऑफर्स, डिस्काउंट, डिलीवरी अपडेट और एयरलाइन से जुड़े संदेश अपने आप अलग दिखाई देंगे।
टेकक्रंच (TechCrunch) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की मुख्य चैट लिस्ट (Main Chat List) को साफ-सुथरा रखना है। नया फीचर आने के बाद ई-कॉमर्स कंपनियों, एयरलाइंस और अन्य बड़े ब्रांड्स के बिजनेस मैसेज कुछ समय बाद स्वतः ''Offers & Updates'' फोल्डर में चले जाएंगे, जिससे व्यक्तिगत चैट्स के बीच इन संदेशों की भीड़ नहीं रहेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप फिलहाल इस फीचर के लिए अलग-अलग समय सीमा की टेस्टिंग कर रहा है। यह अवधि अधिकतम 24 घंटे तक हो सकती है। हालांकि यूजर्स इस समय सीमा को अपनी पसंद के अनुसार बदल नहीं सकेंगे।
अगर किसी यूजर को यह फीचर पसंद नहीं आता है, तो वह ऐप की सेटिंग्स (Settings) में जाकर इसे बंद भी कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा केवल बड़ी कंपनियों (Large Businesses) के बिजनेस अकाउंट्स पर लागू होगी। छोटे बिजनेस और पर्सनल अकाउंट्स को फिलहाल इससे बाहर रखा जाएगा, हालांकि भविष्य में उन्हें भी इस फीचर के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
ओपनएआई (OpenAI) की चैटजीपीटी (ChatGPT) सेवा शनिवार दोपहर करीब एक घंटे तक प्रभावित रही। भारत समेत कई देशों के यूजर्स ने दिक्कत की शिकायत की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) का लोकप्रिय एआई चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) शनिवार दोपहर अचानक तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। इस दौरान भारत सहित दुनिया के कई देशों के यूजर्स करीब एक घंटे तक सेवा का उपयोग नहीं कर सके। बाद में कंपनी ने समस्या दूर होने की पुष्टि की और सेवाएं सामान्य हो गईं।
आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर (Downdetector) पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। यूजर्स ने बताया कि उन्हें चैटजीपीटी का वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही थी।
यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के यूजर्स ने भी सेवा बाधित होने की रिपोर्ट दी। ओपनएआई (OpenAI) ने स्वीकार किया कि चैटजीपीटी (ChatGPT) के साथ-साथ उसकी एपीआई (APIs) और कोडैक्स (Codex) सेवाएं भी प्रभावित हुईं। कंपनी ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की जांच की जा रही है और समस्या की वजह का पता लगाया जा रहा है।
चैटजीपीटी (ChatGPT) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट है, जिसे ओपनएआई (OpenAI) ने विकसित किया है। यह यूजर्स के प्रॉम्प्ट के आधार पर जवाब तैयार करता है और ईमेल, लेख, अनुवाद, कहानियां तथा सोशल मीडिया पोस्ट जैसी सामग्री बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह इमेज जनरेट करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।
नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।
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एप्पल (Apple) ने ओपनएआई (OpenAI) के साथ चल रहे कानूनी विवाद को और आगे बढ़ाते हुए अपने करीब 40 पूर्व एंप्लॉयीज को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी कर्मचारी अब ओपनएआई में कार्यरत हैं। नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।
यह कदम उस संघीय मुकदमे (Federal Lawsuit) के बाद उठाया गया है, जिसमें एप्पल ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने हार्डवेयर कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए गोपनीय हार्डवेयर डिजाइनों, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और मैन्युफैक्चरिंग ब्लूप्रिंट्स तक पहुंच बनाने की संगठित कोशिश की।
मुकदमे में एप्पल (Apple) ने अपने दो पूर्व एंप्लॉयीज का नाम लिया है, जो अब ओपनएआई (OpenAI) के हार्डवेयर डिवीजन से जुड़े हैं। इनमें पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, प्रोडक्ट डिजाइन (Vice President of Product Design) तांग तान (Tang Tan) शामिल हैं, जो वर्तमान में ओपनएआई में हेड ऑफ हार्डवेयर (Head of Hardware) हैं। दूसरे नाम चांग लियू (Chang Liu) का है, जो पहले आईफोन (iPhone) के वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Senior System Electrical Engineer) रह चुके हैं।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल का मानना है कि यह मामला केवल दो एंप्लॉयीज तक सीमित नहीं है। कंपनी का दावा है कि उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी वर्तमान में ओपनएआई में कार्यरत हैं और मुकदमे में नामित दोनों लोग इस बड़े मामले का केवल "आइसबर्ग का ऊपरी हिस्सा" (Tip of the Iceberg) हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने मुकदमा दायर करने के तुरंत बाद अपने लगभग 10 प्रतिशत पूर्व एंप्लॉयीज को लीगल प्रिजर्वेशन नोटिस भेजे हैं। कंपनी का उद्देश्य ऐसे साक्ष्य जुटाना है, जिनसे यह साबित किया जा सके कि ओपनएआई का हार्डवेयर कारोबार कथित रूप से एप्पल के ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग पर आधारित है।
वहीं ओपनएआई (OpenAI) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट्स में कोई रुचि नहीं है। कंपनी का कहना है कि उसे ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे एप्पल की शिकायत को उचित ठहराया जा सके।
अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) ने उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) को चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, कंप्यूट (Chief Technology Officer, Compute) के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वह कंपनी में हेड ऑफ कंप्यूट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (Head of Compute and Infrastructure) के रूप में कार्यरत थे।
उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) जुलाई 2025 में ओपनएआई (OpenAI) से जुड़े थे। इससे पहले वह एलन मस्क (Elon Musk) की एआई कंपनी एक्सएआई (xAI) में हेड ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग (Head of Infrastructure Engineering) के पद पर कार्यरत थे। OpenAI में शामिल होने से पहले उन्होंने xAI में अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया था।
अपने करियर में उदय रुद्दारराजू (Uday Ruddarraju) ने वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड (Robinhood) में लगभग सात वर्षों तक विभिन्न तकनीकी नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं। इससे पहले वह वर्ष 2013 से 2018 तक ईबे (eBay) के साथ भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।
देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश की प्रमुख आईटी कंपनी HCLTech ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। कंपनी AI डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। इन डेटा सेंटरों की क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 50 मेगावाट (MW) तक की जा सकती है।
कंपनी का कहना है कि यह निवेश सरकारी और निजी संस्थानों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। खास तौर पर ऐसे सॉवरेन AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे, जिनमें डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा और प्रोसेस किया जा सके।
HCLTech के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सी. विजयकुमार ने कहा कि AI ने कंप्यूटिंग की पूरी अर्थव्यवस्था बदल दी है। उनके मुताबिक, डेटा सेंटर अब AI समाधान की सबसे मजबूत नींव बन चुके हैं। इन्हीं के जरिए GPU, AI मॉडल और एंटरप्राइज एप्लिकेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह HCLTech के लिए भविष्य में विकास का एक नया बड़ा अवसर साबित होगा।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब HCLTech ने हाल ही में भारत के AI स्टार्टअप Sarvam AI में 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का निवेश किया है। कंपनी का उद्देश्य देश में स्वदेशी AI तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है।
वहीं, कंपनी ने पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं। इस दौरान HCLTech की आय 3.6 अरब डॉलर रही। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 0.9 प्रतिशत कम, लेकिन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी की आय तिमाही-दर-तिमाही 0.5 प्रतिशत घटी, जबकि सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत बढ़ी है।
कंपनी का मानना है कि AI डेटा सेंटर और AI आधारित सेवाओं में बढ़ता निवेश आने वाले वर्षों में उसके कारोबार को नई गति देगा।
देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में बढ़ती स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज की समस्या से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI इस समय Meta Platforms और Google के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि WhatsApp और Google Phone Dialer पर यूजर्स द्वारा की गई स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम कंपनियों की शिकायत प्रणाली से जोड़ा जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, TRAI ने दोनों टेक कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिससे थर्ड पार्टी ऐप्स पर दर्ज स्पैम शिकायतों का डेटा सीधे टेलीकॉम इंडस्ट्री के Distributed Ledger Technology (DLT) प्लेटफॉर्म और TRAI के Do Not Disturb (DND) पोर्टल तक पहुंच सके।
फिलहाल अगर कोई यूजर WhatsApp पर किसी बिजनेस अकाउंट को स्पैम के रूप में रिपोर्ट करता है या Google के फोन डायलर पर किसी नंबर को स्पैम बताता है, तो यह जानकारी सिर्फ Meta या Google के सिस्टम तक ही सीमित रहती है। टेलीकॉम कंपनियों या नियामक एजेंसियों को इसका सीधा फायदा नहीं मिल पाता।
TRAI चाहता है कि इस डेटा को DLT नेटवर्क से जोड़ा जाए। DLT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां टेलीमार्केटर्स के पंजीकरण और कमर्शियल कॉल व मैसेज की निगरानी के लिए करती हैं। वहीं, DND पोर्टल पर उपभोक्ता अनचाहे प्रमोशनल कॉल और एसएमएस की शिकायत दर्ज कराते हैं।
अगर यह डेटा एक साथ उपलब्ध होगा, तो बार-बार स्पैम कॉल और मैसेज भेजने वाले लोगों या कंपनियों की पहचान करना आसान हो जाएगा। इससे ऐसे नंबरों और नेटवर्क पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि Meta और Google के साथ स्पैम मैनेजमेंट को लेकर सक्रिय रूप से बातचीत चल रही है। TRAI चाहता है कि WhatsApp अपने स्पैम से जुड़े डेटा को टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा करे, ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में DLT सिस्टम के सख्त होने के बाद कई स्पैम करने वाले पारंपरिक SMS छोड़कर WhatsApp जैसे इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में TRAI अब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट दोनों पर स्पैम फैलाने वालों पर एक साथ नजर रखने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि, यह प्रस्ताव अभी विचार-विमर्श के चरण में है और इस पर Meta व Google के साथ चर्चा जारी है। अंतिम ढांचा तैयार होने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। अगर यह योजना लागू होती है, तो देश में स्पैम कॉल और फर्जी संदेशों पर लगाम लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।