पैरेंटल कंट्रोल के जरिए माता-पिता क्वाइट आवर्स (Quiet Hours) भी निर्धारित कर सकेंगे। जोखिम वाली परिस्थितियों में उन्हें सुरक्षा संबंधी नोटिफिकेशन भी मिल सकेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) ने किशोरों के लिए खास तौर पर तैयार किया गया ChatGPT पेश किया है। कंपनी ने इसमें सीखने के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई अतिरिक्त फीचर्स शामिल किए हैं। यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है, जब किशोरों के बीच एआई चैटबॉट के इस्तेमाल और इसके मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
ओपनएआई ने सितंबर 2025 में किशोरों के लिए उम्र के अनुरूप नीतियों और सुरक्षा उपायों वाला विशेष ChatGPT अनुभव विकसित करने की घोषणा की थी। अब ChatGPT for Teens के जरिए स्टडी और सेफ्टी से जुड़े मौजूदा और नए फीचर्स को एक जगह लाया गया है। यह अनुभव 13 से 17 साल के यूजर्स के लिए अपने आप लागू होगा। इसमें पिछले साल जुलाई में पेश किया गया स्टडी मोड (Study Mode) भी शामिल है।
यह मोड सीधे जवाब देने के बजाय मार्गदर्शक सवालों और चरणबद्ध तरीके से किसी विषय को समझने में मदद करता है। असाइनमेंट को शॉर्टकट से पूरा करने की कोशिश करने वाले किशोरों को होमवर्क से जुड़े रिमाइंडर के जरिए दोबारा स्टडी मोड की ओर ले जाया जाएगा। माता-पिता स्टडी आवर्स (Study Hours) तय कर सकेंगे। इसके अलावा चैटबॉट क्विज और सीखने में मदद करने वाले विजुअलाइजेशन भी उपलब्ध कराएगा।
सुरक्षा के लिहाज से किशोरों के लिए बनाए गए ChatGPT में खुद को नुकसान पहुंचाने, हिंसा, ईटिंग डिसऑर्डर, खतरनाक गतिविधियों और सेक्स से जुड़े स्पष्ट या ग्राफिक कंटेंट जैसे संवेदनशील मामलों के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय होंगे। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर किशोरों को ब्रेक लेने के लिए भी रिमाइंडर दिए जाएंगे।
क्रिएटर्स के लिए नेटफ्लिक्स अतिरिक्त कमाई और 325 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स तक पहुंच का अवसर देता है। हालांकि, कुछ क्रिएटर्स ने इन व्यवस्थाओं से दूरी भी बनाई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूट्यूब (YouTube) लोकप्रिय क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी चुनिंदा क्रिएटर्स के साथ मल्टी-मिलियन डॉलर के इंसेंटिव पर चर्चा कर रही है, ताकि वे तय अवधि तक अपने वीडियो को एक्सक्लूसिव तौर पर यूट्यूब पर उपलब्ध रखें।
प्रस्तावित डील अलग-अलग स्वरूप में हो सकती हैं। यूट्यूब कुछ क्रिएटर प्रोग्राम्स को सीधे फंड करने और क्रिएटर्स को बड़े ब्रांड पार्टनरशिप अवसरों में हिस्सेदारी देने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, अभी किसी डील को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और कुछ क्रिएटर्स के साथ बातचीत एडवांस स्टेज में बताई जा रही है।
बिजनेस इनसाइडर (Business Insider) की रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब कुछ चुनिंदा क्रिएटर्स के साथ बातचीत कर रहा है। कम से कम एक मामले में प्लेटफॉर्म ने एक्सक्लूसिव अवधि के लिए एक क्रिएटर को लाखों डॉलर देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी मौखिक स्तर पर था और इसकी शर्तें अंतिम नहीं हुई थीं।
यूट्यूब यह संकेत भी दे रहा है कि जो क्रिएटर्स अपने वीडियो को उसी समय नेटफ्लिक्स पर भी रिलीज करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म के कुछ फायदे नहीं मिल सकते। इनमें प्रमोशनल सपोर्ट, यूट्यूब इवेंट्स में भागीदारी और बड़े ब्रांड कैंपेन से जुड़े अवसर शामिल हो सकते हैं।
यह कदम ऐसे समय आया है जब नेटफ्लिक्स (Netflix) क्रिएटर-आधारित प्रोग्रामिंग पर अपना फोकस बढ़ा रहा है। स्ट्रीमिंग कंपनी एलन चिकिन चाउ (Alan Chikin Chow) और निक डिगियोवानी (Nick DiGiovanni) जैसे क्रिएटर्स को यूट्यूब के साथ-साथ नेटफ्लिक्स पर वीडियो उपलब्ध कराने के लिए भुगतान कर चुकी है।
क्रिएटर्स के लिए नेटफ्लिक्स अतिरिक्त कमाई और 325 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स तक पहुंच का अवसर देता है। हालांकि, कुछ क्रिएटर्स ने इन व्यवस्थाओं से दूरी भी बनाई है। नेटफ्लिक्स ने कुछ मामलों में वीडियो रिलीज से कई दिन पहले जमा करने और मौजूदा ब्रांड स्पॉन्सरशिप हटाने की मांग की है।
गूगल लेंस के जरिए छात्र पढ़ाई की सामग्री की तस्वीर लेकर उससे जुड़े कॉन्सेप्ट को समझ सकेंगे। AI Overview संभावित गलतियों की पहचान करने और आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देने में मदद करेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने छात्रों के लिए अपने सर्च (Search) और जेमिनी (Gemini) प्लेटफॉर्म पर नए AI-पावर्ड लर्निंग फीचर्स पेश किए हैं। इनका उद्देश्य कठिन विषयों को समझने, परीक्षा की तैयारी करने, स्टडी मैटेरियल व्यवस्थित करने और सवालों को हल करने में छात्रों की मदद करना है।
गूगल सर्च अब जटिल विषयों के लिए इंटरैक्टिव विजुअल एक्सपीरियंस तैयार कर सकेगा। उदाहरण के तौर पर pH स्केल जैसे विषयों की विजुअल व्याख्या AI Overview में दिखाई जा सकती है। वहीं AI Mode यूजर के सवालों के आधार पर ज्यादा कस्टमाइज्ड अनुभव तैयार करेगा। यह सुविधा AI Mode में अंग्रेजी भाषा में दुनियाभर में उपलब्ध कराई गई है और AI Overviews में भी इसका रोलआउट शुरू हो गया है।
छात्र अब सर्च के जरिए अलग-अलग विषयों और परीक्षाओं के लिए प्रैक्टिस क्विज भी तैयार कर सकेंगे। इनमें साइंस, मैथ्स, ह्यूमैनिटीज और विदेशी भाषाओं के अलावा ACT, AP, ENEM, GRE, JEE, LSAT, MCAT, NEET और SAT जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। क्विज में जवाबों की व्याख्या और आगे सीखने के लिए लिंक भी दिए जाएंगे।
गूगल लेंस (Google Lens) के जरिए छात्र पढ़ाई की सामग्री की तस्वीर लेकर उससे जुड़े कॉन्सेप्ट को समझ सकेंगे। AI Overview संभावित गलतियों की पहचान करने और आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देने में मदद करेगा।
इसके अलावा AI Mode में स्टडी नोटबुक की सुविधा दी जा रही है। छात्र लेक्चर स्लाइड्स, सिलेबस और वेब आर्टिकल जैसी सामग्री जोड़कर उसी आधार पर सवाल पूछ सकेंगे। यह सुविधा 180 से ज्यादा देशों में अंग्रेजी भाषा में रोलआउट हो रही है।
गूगल अपलोड किए गए नोट्स और अन्य स्टडी मैटेरियल से कस्टम डॉक्यूमेंट भी तैयार कर सकेगा। वहीं Gemini में मल्टी-स्टेप रिसर्च, इंटरैक्टिव 3D सिमुलेशन और स्टडी हब जैसे फीचर्स भी जोड़े जा रहे हैं। 3D मॉडल के जरिए छात्र DNA जैसे जटिल विषयों को घुमाकर और जूम करके समझ सकेंगे।
टेलीग्राम (Telegram) ने .gram इंटरनेट डोमेन के लिए आवेदन किया है। मंजूरी मिलने पर यूजर्स को username.gram जैसे वेब एड्रेस और आसान तरीके से वेबसाइट बनाने की सुविधा मिल सकती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टेलीग्राम (Telegram) के संस्थापक और सीईओ पावेल डुरोव (Pavel Durov) ने बताया है कि कंपनी ने .gram इंटरनेट डोमेन के लिए आवेदन किया है। अगर इस आवेदन को मंजूरी मिलती है, तो टेलीग्राम के 1 अरब से ज्यादा यूजर्स को अपने यूजरनेम के आधार पर yourname.gram जैसा वेब एड्रेस मिल सकता है।
इस व्यवस्था के तहत टेलीग्राम यूजरनेम को इंटरनेट एड्रेस के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर किसी यूजर को durov.gram जैसा वेब एड्रेस मिल सकता है। हालांकि, कंपनी के आवेदन की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और अंतिम फैसला इंटरनेट डोमेन व्यवस्था संभालने वाली संस्था आईकैन (ICANN) को करना होगा।
टेलीग्राम का प्लान सिर्फ डोमेन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। कंपनी यूजर्स को आसान तरीके से वेबसाइट बनाने और कंटेंट प्रकाशित करने की सुविधा भी दे सकती है। इसके लिए यूजर्स को जटिल तकनीकी जानकारी सीखने के बजाय सामान्य भाषा में निर्देश देने की सुविधा मिल सकती है।
.gram डोमेन को सामान्य इंटरनेट डोमेन की तरह नहीं देखा जाएगा। इसका नियंत्रण टेलीग्राम के पास रहेगा और इससे जुड़े वेब एड्रेस कंपनी के सिस्टम से जुड़े होंगे। यानी username.gram जैसे पते किसी दूसरे प्रदाता के पास सामान्य डोमेन की तरह आसानी से ट्रांसफर नहीं किए जा सकेंगे।
इस व्यवस्था से टेलीग्राम को अपनी इंटरनेट आधारित सेवाओं और डोमेन सिस्टम पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है। कंपनी पहले अपने t.me लिंक सिस्टम से जुड़ी बड़ी रुकावट का सामना कर चुकी है।
आईकैन ने 2026 में नए इंटरनेट डोमेन के आवेदन की प्रक्रिया 12 अगस्त को बंद की है। इसके बाद आवेदनों की जांच, आपत्तियों और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। संस्था के मुताबिक आवेदन सामने आने के बाद तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी।
इसलिए टेलीग्राम का .gram आवेदन वास्तव में स्वीकार किया गया है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आगे आवेदन सूची सामने आने के बाद ही हो सकेगी। अगर आवेदन मंजूर भी हो जाता है, तो डोमेन सेवा शुरू होने में कुछ समय लग सकता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। Ads पर ‘Sponsored’ लेबल होगा और उन्हें सामान्य जवाबों से अलग दिखाया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) ने भारत के कुछ चैटजीपीटी (ChatGPT) यूजर्स को ईमेल भेजकर विज्ञापन से जुड़ी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव की जानकारी दी है। इससे संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में भारत में भी ChatGPT पर विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी भारत में विज्ञापन शुरू करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
ईमेल में ओपनएआई ने बताया कि ChatGPT पर विज्ञापन कैसे काम करेंगे और यूजर्स के पास उन्हें नियंत्रित करने के लिए क्या विकल्प होंगे। कंपनी के मुताबिक, Free और Go प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। वहीं Plus, Pro, Enterprise, Business और Education प्लान के यूजर्स को विज्ञापन नहीं दिखेंगे।
भारत में ChatGPT Go प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति माह और ChatGPT Plus की कीमत 1,999 रुपये प्रति माह बताई गई है। ओपनएआई पहले ही अमेरिका में ChatGPT पर विज्ञापन दिखा रहा है।
कंपनी ने ब्रिटेन, मैक्सिको, ब्राजील, जापान और दक्षिण कोरिया में भी विज्ञापन का विस्तार किया है। वहीं न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में विज्ञापनों की टेस्टिंग चल रही है। भारत को अभी आधिकारिक तौर पर इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। Ads पर ‘Sponsored’ लेबल होगा और उन्हें सामान्य जवाबों से अलग दिखाया जाएगा। ओपनएआई के अनुसार, विज्ञापन को यूजर के लिए प्रासंगिक बनाने के लिए ChatGPT में मौजूद जानकारी, पिछली विज्ञापन गतिविधियों और बातचीत के संदर्भ का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, विज्ञापनदाताओं को यूजर्स की चैट, चैट हिस्ट्री, मेमोरी या निजी जानकारी नहीं दी जाएगी। उन्हें केवल विज्ञापन के व्यू और क्लिक जैसी समेकित जानकारी मिलेगी।
गूगल (Google) ने Gemini 3.7 Flash लॉन्च किया है। नया AI मॉडल कोडिंग, सॉफ्टवेयर टूल्स और कई कामों को खुद करने वाले AI सिस्टम के लिए बनाया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल Gemini 3.7 Flash लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे खास तौर पर सॉफ्टवेयर कोडिंग और ऐसे बिजनेस कामों के लिए तैयार किया है, जिन्हें AI कम इंसानी मदद के साथ खुद पूरा कर सके।
Gemini 3.7 Flash को कारोबारियों के लिए कम कीमत वाला विकल्प बताया जा रहा है। इसकी मदद से ऐसे AI सिस्टम बनाए जा सकते हैं, जो किसी काम की योजना तैयार करने, सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल करने और कई चरणों वाले काम को खुद पूरा करने में सक्षम हों।
कोडिंग में बेहतर प्रदर्शन
गूगल के मुताबिक, नया मॉडल पिछले मॉडल की तुलना में कोडिंग से जुड़े कामों में बेहतर है। इसमें सॉफ्टवेयर की गलतियां ढूंढना, समस्याओं को ठीक करना और इस्तेमाल के लिए तैयार कोड तैयार करना शामिल है।
खास बात यह है कि गूगल ने Gemini 3.7 Flash को अपने पिछले मॉडल Gemini 3.6 Flash के लॉन्च के सिर्फ तीन हफ्ते बाद पेश किया है। इससे AI मॉडल के क्षेत्र में कंपनियों के बीच चल रही तेज प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आधी कीमत में मिलेगा मॉडल
गूगल ने Gemini 3.7 Flash को अपनाने के लिए शुरुआती कीमत भी कम रखी है। 2026 के अंत तक इसकी कीमत प्रति 10 लाख इनपुट टोकन 0.75 डॉलर और प्रति 10 लाख आउटपुट टोकन 3.75 डॉलर होगी। यह Gemini 3.6 Flash की शुरुआती कीमत से करीब आधी है।
Gemini 3.7 Flash को गूगल की सब्सक्रिप्शन आधारित AI एजेंट सर्विस Gemini Spark में भी तुरंत उपलब्ध कराया गया है। यह सर्विस 160 से ज्यादा देशों में Google AI Pro और Ultra ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।
OpenAI और Anthropic से मुकाबला
Gemini 3.7 Flash का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब गूगल की सीधी टक्कर ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी कंपनियों से है। खासतौर पर AI कोडिंग और AI एजेंट से जुड़े कारोबार में कंपनियां तेजी से नए मॉडल पेश कर रही हैं।
गूगल के ज्यादा शक्तिशाली Gemini 3.5 Pro मॉडल को लेकर भी काफी चर्चा है। कंपनी ने जुलाई में बताया था कि इस मॉडल की पार्टनर्स के साथ टेस्टिंग चल रही है और इसे जल्द लॉन्च किया जाएगा। हालांकि, इसकी आधिकारिक रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है।
गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) में हालिया नेतृत्व बदलावों के बीच भी यह लॉन्च हुआ है। Gemini की शुरुआती तकनीकी टीम के दो प्रमुख सह-नेता कंपनी छोड़कर नया वेंचर शुरू कर चुके हैं।
गूगल अब AI को सिर्फ चैटबॉट तक सीमित रखने के बजाय ऐसे सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो यूजर्स और कंपनियों की ओर से काम कर सकें, कोड लिख सकें और अलग-अलग सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल कर सकें। Gemini 3.7 Flash इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) को 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी चेन्नई में 10,000 GPU वाली AI फैक्ट्री बनाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसी बीच एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को 10,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये का मेगा ऑर्डर मिला है। इसके तहत चेन्नई में भारत की बड़ी सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा तैयार की जाएगी।
इस AI फैक्ट्री में एनवीडिया (NVIDIA) के B300 प्लेटफॉर्म पर आधारित करीब 10,000 GPU लगाए जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट अमेरिका की AI क्लाउड कंपनी टुगेदर AI (Together AI) के लिए तैयार किया जाएगा।
इस सुविधा का इस्तेमाल बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस के लिए किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यहां AI कंपनियों और डेवलपर्स को बड़े स्तर पर तेज कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे AI मॉडल को तैयार करने और चलाने में मदद मिलेगी।
L&T के लिए यह ऑर्डर इसलिए भी खास है क्योंकि इससे कंपनी AI फैक्ट्री कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी। कंपनी पहले से डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम कर रही है और अब इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए भारत के तेजी से बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
10 हजार GPU से बढ़ेगी कंप्यूटिंग क्षमता
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका करीब 10,000 GPU वाला क्लस्टर है। बड़े AI मॉडल को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। GPU एक साथ बड़ी संख्या में गणनाएं करने में सक्षम होते हैं, इसलिए AI मॉडल की ट्रेनिंग और जटिल कामों को तेजी से पूरा करने में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
एनवीडिया का B300 प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के बड़े AI कंप्यूटिंग कामों के लिए तैयार किया गया है। इतने बड़े स्तर पर GPU की तैनाती से AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है L&T
L&T की AI और डेटा सेंटर रणनीति नई नहीं है। फरवरी 2026 में कंपनी ने एनवीडिया के साथ भारत में गीगावॉट-स्केल AI फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना का ऐलान किया था।
इसके तहत चेन्नई में GPU क्लस्टर को 30 मेगावाट तक बढ़ाने और मुंबई में 40 मेगावाट का नया डेटा सेंटर विकसित करने की योजना बताई गई थी। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जहां भारतीय कंपनियों के साथ ग्लोबल क्लाउड कंपनियां और अन्य संस्थान बड़े स्तर पर AI मॉडल तैयार और इस्तेमाल कर सकें।
नया ऑर्डर भारत में AI कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे देश में बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। वॉशिंगटन डीसी में OpenAI के दफ्तर में प्रदर्शन के दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अमेरिका और यूरोप में विरोध बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई (OpenAI) के दफ्तर में घुसकर AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला और इस दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
यह सिर्फ किसी कंपनी के दफ्तर के बाहर हुआ सामान्य प्रदर्शन नहीं है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और यूरोप में AI को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर लोगों की चिंता और नाराजगी सामने आ रही है। इनमें नौकरी जाने का डर, कलाकारों के काम के इस्तेमाल और AI के लिए बनाए जा रहे बड़े डेटा सेंटर से जुड़ी बिजली और पानी की खपत जैसे मुद्दे शामिल हैं।
मार्च 2026 में सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) में भी प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई के दफ्तर से लेकर एलन मस्क (Elon Musk) की एक्सएआई (xAI) तक मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि AI के विकास की रफ्तार को रोका जाए।
वॉशिंगटन डीसी में हुए प्रदर्शन में भी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे होने वाले संभावित नुकसान को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि AI कंपनियां जिस तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, उसके मुकाबले सरकारें नियम और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने में पीछे रह रही हैं।
इसी वजह से अमेरिका में AI का विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अब टेक कंपनियों के दफ्तरों, सरकारी संस्थानों और डेटा सेंटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मार्च में सैन फ्रांसिस्को में ओपनएआई (OpenAI), एंथ्रोपिक (Anthropic) और गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) से जुड़े ठिकानों पर भी प्रदर्शन हुए थे। जुलाई में भी सैन फ्रांसिस्को में स्टॉपएआई (StopAI) से जुड़े लोगों ने AI कंपनियों के खिलाफ मार्च किया।
ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ नया शुरू करेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बताया कि वह अब “कुछ नया शुरू” करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रैड लाइटकैप 2018 में ओपनएआई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Chief Financial Officer-CFO) के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद 2022 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान लाइटकैप ने कई अहम बिजनेस और ऑपरेशनल टीमों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें फाइनेंस, लीगल, पीपल, कॉरपोरेट सिक्योरिटी, गो-टू-मार्केट, गवर्नमेंट अफेयर्स और पार्टनरशिप्स जैसी टीमें शामिल हैं।
लाइटकैप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें कंपनी की कई ऑपरेशनल और बिजनेस टीमों के शुरुआती ढांचे तैयार करने का मौका मिला। उन्होंने इन टीमों को आगे बढ़ते और अनुभवी नेतृत्व के तहत मजबूत होते देखना अपने सफर के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक बताया।
उन्होंने ओपनएआई की मौजूदा टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह कंपनी के अगले दशक को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम लोगों के हाथों में देखकर उत्साहित हैं। ब्रैड लाइटकैप तुरंत कंपनी से अलग नहीं होंगे। वह अगले कुछ हफ्तों तक ओपनएआई में बने रहेंगे और जिम्मेदारियों के ट्रांजिशन (Transition) में मदद करेंगे।
उनके जाने के बाद ओपनएआई के ऑपरेशनल और बिजनेस नेतृत्व में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से उनके अगले कदम या नई कंपनी को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट का 50% से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय एआई, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम से आया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब वेबसाइट्स पर आने वाले ट्रैफिक में इंसानों के मुकाबले मशीनों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट पर पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक नॉन-ह्यूमन सिस्टम (Non-Human Traffic) से आया। इसमें एआई सिस्टम, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम शामिल हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। एआई एजेंट अब इंसानों की तरह एक-एक वेबसाइट खोलकर जानकारी तलाशने के बजाय एक साथ बड़ी संख्या में वेबसाइट्स से डेटा जुटा सकते हैं।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी व्यक्ति को नई घड़ी खरीदनी है तो वह कीमत और फीचर्स देखने के लिए कुछ वेबसाइट्स खोल सकता है। वहीं, एआई एजेंट इसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स से एक साथ जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण कर सकता है और फिर यूजर को एक जवाब दे सकता है।
क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस (Matthew Prince) ने मार्च में बताया था कि एक इंसान किसी प्रोडक्ट की जानकारी के लिए करीब पांच वेबसाइट्स देख सकता है, जबकि एआई एजेंट उसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मशीनों की ओर से भेजी जाने वाली रिक्वेस्ट भी तेजी से बढ़ रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले तक क्लाउडफ्लेयर का अनुमान था कि बॉट ट्रैफिक 2027 तक इंसानी ट्रैफिक से आगे निकल सकता है। लेकिन कंपनी के नए आंकड़ों के मुताबिक यह बदलाव अनुमान से पहले ही हो गया।
जुलाई 2026 में क्लाउडफ्लेयर ने बताया कि इंटरनेट के इतिहास में पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय नॉन-ह्यूमन सिस्टम से आया। आसान भाषा में कहें तो वेबसाइट्स पर आने वाली हर 100 रिक्वेस्ट में 50 से ज्यादा रिक्वेस्ट इंसानों के अलावा दूसरे सिस्टम से आ रही हैं।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि इंटरनेट का इस्तेमाल अब सिर्फ इंसानों द्वारा वेबसाइट्स देखने तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में एआई एजेंट भी इंटरनेट पर जानकारी खोजने, तुलना करने और यूजर्स के लिए काम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह को President – Marketing एवं Chief Marketing Officer नियुक्त किया है। इसकी जानकारी उन्होंने LinkedIn पोस्ट के जरिए साझा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह (Siddharth Singh) को प्रेसिडेंट–मार्केटिंग (President – Marketing) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से कंपनी के साथ काम कर रहे हैं।
नई जिम्मेदारी में सिद्धार्थ सिंह जीस्केल की मार्केटिंग (Marketing), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) और गो-टू-मार्केट (Go-to-Market) रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।
अपने लिंक्डइन पोस्ट में सिद्धार्थ सिंह ने लिखा कि स्टार्टअप्स में काम करने का अनुभव इतना रोमांचक रहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी नई भूमिका साझा करने में कुछ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि जीस्केल का लक्ष्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को गति देने के लिए एक एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि एआई की चर्चा अक्सर केवल मॉडल्स तक सीमित रहती है, जबकि उन्हें सुचारु रूप से चलाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिद्धार्थ ने कहा कि नई भूमिका उन्हें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को और गहराई से समझने तथा इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने का अवसर देगी।