देश के बड़े अखबार समूह अब प्रिंट से आगे बढ़कर डिजिटल, OOH विज्ञापन और इवेंट्स जैसे कारोबारों पर फोकस कर रहे हैं, जिसका असर उनकी कमाई में भी दिख रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के बड़े अखबार समूह अब सिर्फ अखबार बेचने और प्रिंट विज्ञापन पर निर्भर नहीं रहना चाहते। डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन (OOH), इवेंट्स और दूसरे कारोबारों की ओर बढ़ते कदमों का असर अब उनकी कमाई में भी साफ दिखाई दे रहा है।
Crisil Ratings की एक स्टडी के मुताबिक, देश के बड़े अखबार समूहों की कुल कमाई में नॉन-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी इस वित्त वर्ष करीब 25% तक पहुंचने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2019 में करीब 13% थी। यानी पिछले कुछ वर्षों में अखबार कंपनियों ने अपनी कमाई के स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है।
प्रिंट से आगे बढ़ रहे हैं अखबार समूह
Crisil Ratings ने देश के पांच सबसे ज्यादा प्रसारित अखबारों को संचालित करने वाले बड़े अखबार समूहों का अध्ययन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात वित्त वर्षों में इन कंपनियों के नॉन-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी 11-13 प्रतिशत अंक बढ़ी है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, आउटडोर विज्ञापन, इवेंट मैनेजमेंट और दूसरे संबंधित कारोबार शामिल हैं।
इस बदलाव से साफ है कि अखबार कंपनियां अब केवल सर्कुलेशन बढ़ाने वाले पुराने मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय अपने ब्रांड और बड़ी ऑडियंस का इस्तेमाल अलग-अलग तरह की कमाई के लिए कर रही हैं।
अखबारों की सर्कुलेशन में आई गिरावट
अखबार कंपनियों के लिए कारोबार में बदलाव की सबसे बड़ी वजह प्रिंट सर्कुलेशन में लगातार आ रही गिरावट है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी अखबार कंपनियों का कुल सर्कुलेशन 2019 में करीब 1.5 करोड़ से घटकर 2025 में लगभग 1 करोड़ रह गया है। आने वाले समय में इसमें और गिरावट की आशंका है, क्योंकि युवा पाठक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं।
इसका सीधा असर प्रिंट से होने वाली कमाई पर पड़ा है। पिछले सात वर्षों में प्रिंट से जुड़ी कमाई, जिसमें प्रिंट विज्ञापन भी शामिल है, में 1-2% की सालाना चक्रवृद्धि दर से गिरावट आई है।
नॉन-प्रिंट कारोबार तेजी से बढ़ेगा
Crisil Ratings के Senior Director और Deputy Chief Rating Officer Manish Gupta के मुताबिक, बड़े अखबार समूहों के लिए कारोबार में विविधता लाना अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है।
उनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 से 2027 के बीच नॉन-प्रिंट कारोबार से होने वाली कमाई में 10-12% सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके मुकाबले पारंपरिक प्रिंट कारोबार की वृद्धि सिर्फ 2-3% रहने का अनुमान है।
Gupta ने कहा कि बड़े मीडिया समूहों की मजबूत ब्रांड पहचान, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत पहुंच और प्रिंट, डिजिटल, रेडियो, इवेंट्स और आउटडोर मीडिया को एक साथ जोड़कर विज्ञापन समाधान देने की क्षमता नॉन-प्रिंट कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।
डिजिटल कारोबार से बढ़ रही उम्मीद
नॉन-प्रिंट कारोबार बढ़ने से अखबार कंपनियों की कमाई के साथ-साथ मुनाफे पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नॉन-प्रिंट कारोबार अभी भी पारंपरिक प्रिंट बिजनेस के मुकाबले कम मुनाफे वाला है।
इस वित्त वर्ष कंपनियों का मार्जिन करीब 12-13% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। डिजिटल और उससे जुड़े कारोबार में बढ़ते पैमाने का फायदा कंपनियों को मिल रहा है।
आउटडोर विज्ञापन और इवेंट मैनेजमेंट में लागत ज्यादा होने और प्रतिस्पर्धा कड़ी होने के कारण मार्जिन पर दबाव रहता है। वहीं, डिजिटल कारोबार में शुरुआती निवेश का दौर धीरे-धीरे कम हो रहा है और कारोबार का पैमाना बढ़ने से EBITDA घाटे में सुधार देखने को मिल रहा है।
मजबूत बैलेंस शीट से मिल रहा सहारा
प्रिंट कारोबार में दबाव के बावजूद बड़े अखबार समूहों की वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। इसकी वजह उनकी अपेक्षाकृत कम कर्ज वाली बैलेंस शीट, नेट कैश पोजिशन और बड़े लिक्विड निवेश हैं।
Crisil Ratings के Director Ankit Hakhu के मुताबिक, इन कंपनियों की क्रेडिट मजबूती अब सिर्फ प्रिंट कारोबार के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं है, बल्कि उनकी मजबूत बैलेंस शीट भी अहम भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि इन कंपनियों की नेटवर्थ का करीब 90% हिस्सा लिक्विड और निवेश वाली परिसंपत्तियों, जैसे वित्तीय संपत्तियों और कैश इक्विवेलेंट्स में है।
इन निवेशों से होने वाली आय और कम कर्ज का स्तर कंपनियों को नए कारोबारों में निवेश करने और उन्हें बड़ा करने के दौरान पुराने प्रिंट कारोबार से मिलने वाली कमाई में कमी की भरपाई करने में मदद कर सकता है।
डिजिटल से कमाई बढ़ाना अब बड़ी चुनौती
हालांकि, सेक्टर के सामने कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। इनमें उम्मीद से ज्यादा तेजी से अखबारों के सर्कुलेशन में गिरावट, डिजिटल प्लेटफॉर्म से कमाई बढ़ाने में देरी और नॉन-प्रिंट कारोबार को तेजी से बड़े पैमाने पर पहुंचाने में आने वाली दिक्कतें शामिल हैं।
फिलहाल, डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन और इवेंट जैसे कारोबारों से बढ़ती कमाई और मजबूत बैलेंस शीट देश के बड़े अखबार समूहों को प्रिंट बिजनेस पर लंबे समय से बने दबाव से निपटने में मदद कर रही है।
कुल मिलाकर, भारतीय अखबार उद्योग का कारोबार अब सिर्फ प्रिंट तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल और दूसरे नॉन-प्रिंट कारोबार आने वाले वर्षों में मीडिया कंपनियों की कमाई और ग्रोथ की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों के बीच देश के प्रमुख घरेलू निर्माताओं में से एक ने कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों को लेकर चल रही बहस में अब एक और पहलू जुड़ गया है। इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के साथ-साथ आयातित न्यूजप्रिंट की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जताई थी। इसके कुछ दिनों बाद भारत के प्रमुख घरेलू न्यूजप्रिंट निर्माताओं में से एक ने कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी का कहना है कि घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतों में बदलाव लागत बढ़ने की वजह से हुआ है और यह पूरे इंडस्ट्री में देखने को मिल रही है।
इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के मुताबिक, भारतीय अखबार इंडस्ट्री हर साल करीब 13 लाख टन न्यूजप्रिंट इस्तेमाल करती है, जबकि देश में घरेलू उत्पादन करीब 5 लाख टन है। देश के प्रमुख घरेलू न्यूजप्रिंट उत्पादकों में ओडिशा की Emami Paper Mills, पंजाब की Khanna Paper Mills और सरकार के स्वामित्व वाली केरल की Hindustan Newsprint तथा मध्य प्रदेश की NEPA शामिल हैं।
एक्सचेंज4मीडिया ने सभी प्रमुख खिलाड़ियों और Indian Newsprint Manufacturers Association (INMA) से यह समझने के लिए संपर्क किया कि महंगाई का उन पर किस तरह असर पड़ रहा है। INMA के महासचिव विजय कुमार ने कहा, “एसोसिएशन बाजार की कीमतों पर नजर नहीं रखता है, इसलिए हम इस पर टिप्पणी नहीं कर पाएंगे।”
जहां दूसरे निर्माताओं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, वहीं हर साल करीब 75,000 मीट्रिक टन (MT) न्यूजप्रिंट बनाने वाली Emami Paper Mills का कहना है कि कई तरह की कच्चे माल से जुड़ी और वित्तीय लागतें निर्माताओं पर दबाव डाल रही हैं।
Emami Paper Mills Ltd के होल टाइम डायरेक्टर व सीईओ एस. के. खेतान ने एक्सचेंज4मीडिया को बताया कि घरेलू न्यूजप्रिंट की मौजूदा कीमत करीब 58 से 62 रुपये प्रति किलो एक्स-मिल है। कीमत GSM, गुणवत्ता और स्थान के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। खेतान के मुताबिक, “घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतें अभी भी वित्त वर्ष 2022-23 में देखे गए स्तर से नीचे हैं, जबकि निर्माताओं को लागत से जुड़े कई तरह के दबावों का सामना करना पड़ रहा है।”
खेतान ने कहा, “कीमतों में यह बदलाव मुख्य रूप से लागत बढ़ने की वजह से है और पूरे इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है।”
उन्होंने चार प्रमुख दबावों की ओर इशारा किया। इनमें रुपये की कीमत में गिरावट, आयातित फाइबर और केमिकल की बढ़ती लागत, पूंजी की ऊंची लागत और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति के कारण शिपिंग तथा लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोतरी शामिल है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पब्लिशर्स पहले से ही आयातित न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों, कमजोर रुपये और बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत से परेशान हैं। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्धी विज्ञापन बाजार के कारण पब्लिशर्स के लिए बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पाठकों या बाजार पर डालना भी आसान नहीं है।
इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) के प्रमुख विवेक गुप्ता ने इससे पहले e4m को बताया था कि मार्च से घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतों में 30-40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इसके लिए “कोई वजह नहीं” बताई गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि आयातित और घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतें लगातार एक-दूसरे के करीब आ रही हैं।
हालांकि, Emami ने इस व्यापक धारणा से असहमति जताई है कि घरेलू निर्माताओं ने वैश्विक बाजार में आई परेशानी का फायदा उठाकर केवल अपनी कीमतें बढ़ाई हैं।
पब्लिशर्स के लिए अलग-अलग लागत दबावों के बीच यह अंतर तत्काल असर को ज्यादा नहीं बदलता। न्यूजप्रिंट उनके सबसे बड़े ऑपरेशनल खर्चों में से एक है और इसकी खरीद लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ता है।
INS की ओर से किए गए प्रमुख दावों में से एक यह भी था कि घरेलू न्यूजप्रिंट को पहले जो कीमत का फायदा मिलता था, वह अब काफी कम हो गया है। INS के मुताबिक, घरेलू और आयातित न्यूजप्रिंट की कीमत करीब 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
Emami की राय इससे अलग है। खेतान ने कहा कि घरेलू न्यूजप्रिंट अभी भी प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध है और यह हमेशा आयातित न्यूजप्रिंट से सस्ता रहता है। हालांकि, दोनों के बीच कीमत का अंतर वैश्विक न्यूजप्रिंट की कीमतों और मुद्रा में होने वाले बदलाव के आधार पर बदलता रहता है।
भारत में पर्याप्त उत्पादन क्षमता है: INMA
INMA के महासचिव कुमार का कहना है, “हमारे पास पूरी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त क्षमता है। चूंकि न्यूजप्रिंट का इस्तेमाल एक खास उद्देश्य के लिए होता है और इसे केवल वास्तविक उपयोगकर्ताओं को ही बेचा जाना है, इसलिए उत्पादन पूरी तरह उपभोक्ताओं से मिले वास्तविक और पक्के ऑर्डर के आधार पर किया जाता है।”
हालांकि, पब्लिशर्स का कहना है कि कीमतों की तुलना सिर्फ लागत के आधार पर नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि देश में तैयार होने वाला न्यूजप्रिंट हर बार आयातित न्यूजप्रिंट की गुणवत्ता के बराबर नहीं होता, खासकर हाई-स्पीड अखबार प्रिंटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले पेपर में।
इसी वजह से कई पब्लिकेशन प्रीमियम जरूरतों के लिए आयातित पेपर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि घरेलू न्यूजप्रिंट का इस्तेमाल मुख्य रूप से अंदर के पन्नों के लिए किया जाता है। किसी पब्लिकेशन और उसकी पेपर जरूरतों के आधार पर घरेलू न्यूजप्रिंट किसी अखबार के कुल संस्करण में 30-40 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा रख सकता है।
विवेक गुप्ता ने घरेलू बाजार में गुणवत्ता के मानकों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कुछ घरेलू निर्माता कम गुणवत्ता वाले न्यूजप्रिंट को Grade 1 के रूप में बेचते हैं। इससे पब्लिशर्स के लिए वास्तविक कीमत और गुणवत्ता के अंतर को समझना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, e4m इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है। घरेलू निर्माताओं ने भी इस व्यापक धारणा पर आपत्ति जताई है कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला न्यूजप्रिंट स्वाभाविक रूप से घटिया गुणवत्ता का होता है।
गुणवत्ता को लेकर यह बहस नई नहीं है। INS पहले भी घरेलू और आयातित न्यूजप्रिंट के बीच अंतर की ओर इशारा कर चुका है। इसमें अलग-अलग ग्रेड और गुणवत्ता के अंतर की बात कही गई है। INS की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में भी “गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं” और घरेलू बाजार में कुछ कम-GSM वाले उत्पादों की सीमित उपलब्धता का जिक्र किया गया है।
इसका नतीजा यह है कि बाजार में पब्लिशर्स और निर्माता एक ही कीमत में हुए बदलाव को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। पब्लिशर्स के लिए घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में एक अतिरिक्त बोझ है, जब आयातित न्यूजप्रिंट पहले से ही महंगा हो रहा है।
वहीं, घरेलू निर्माताओं का कहना है कि वे भी उसी महंगाई और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच काम कर रहे हैं और बढ़ती कच्चे माल तथा वित्तीय लागतों को हमेशा अपने ऊपर नहीं ले सकते।
क्या कीमतों में कमी आ सकती है?
जो पब्लिशर्स वैश्विक न्यूजप्रिंट संकट से कुछ राहत के लिए घरेलू बाजार की ओर देख रहे हैं, उनके लिए Emami की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट राहत नहीं मिली है।
जब खेतान से पूछा गया कि आने वाले महीनों में घरेलू न्यूजप्रिंट की कीमतों में कमी आ सकती है या नहीं, तो उन्होंने कहा कि इस समय भविष्य का अनुमान लगाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा, “मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए इस समय भविष्य में कीमतों में होने वाले बदलाव का अनुमान लगाना मुश्किल होगा।”
इस अनिश्चितता के कारण पब्लिशर्स के सामने एक मुश्किल स्थिति बनी हुई है। आयातित न्यूजप्रिंट की कीमतें मुद्रा, माल ढुलाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित होती रहेंगी। घरेलू न्यूजप्रिंट कम लागत वाला विकल्प हो सकता है, लेकिन निर्माताओं का कहना है कि उन्हें भी कच्चे माल और वित्तीय लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे इंडस्ट्री के लिए, जो पहले से ही प्रतिस्पर्धी विज्ञापन बाजार में काम कर रहा है, अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि घरेलू या आयातित न्यूजप्रिंट में से कौन सस्ता है। सवाल यह भी है कि कीमत और गुणवत्ता के बीच संतुलन क्या होगा और न्यूज पब्लिशर्स बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा खुद वहन कर पाएंगे।
सम्भाव मीडिया (Sambhaav Media Limited) की 36वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के शेयरधारकों ने रखे गए दोनों प्रस्तावों को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सम्भाव मीडिया की AGM में दोनों प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी, 99.99% वोट पड़े पक्ष में
सम्भाव मीडिया (Sambhaav Media Limited) की 36वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के शेयरधारकों ने रखे गए दोनों प्रस्तावों को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। AGM का आयोजन 13 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए किया गया था।
कंपनी के मुताबिक, 6 अगस्त 2026 की कट-ऑफ डेट के आधार पर कुल 27,016 शेयरधारक वोटिंग के लिए पात्र थे। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 30 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
इन दोनों प्रस्तावों को मिली मंजूरी
पहला प्रस्ताव-
AGM में पहला प्रस्ताव कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को स्वीकार करने और मंजूर करने से जुड़ा था। इसमें बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, कैश फ्लो स्टेटमेंट के साथ ऑडिटर्स और डायरेक्टर्स की रिपोर्ट को अपनाना शामिल था।
इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 11,92,59,567 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 17,072 वोट आए। इस तरह कुल वैध वोटों में करीब 99.99% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे। प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई।
दूसरा प्रस्ताव-
दूसरा प्रस्ताव जगदीश पावरा (DIN: 02203198) को डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने से संबंधित था। जगदीश पावरा कंपनी के उन डायरेक्टर्स में शामिल हैं, जो रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र थे।
इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों का जबरदस्त समर्थन मिला। इसके पक्ष में 11,92,59,567 वोट पड़े, जबकि 17,072 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी करीब 99.99% वैध वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़े।
जगदीश पावरा गुजरात यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा इंजीनियर हैं। उन्हें कॉरपोरेट और टेक्निकल क्षेत्र में लंबे समय से काम करने का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेक्निकल फील्ड से की थी।
शुरुआत में उन्होंने इंस्टॉलेशन ऑफिसर के तौर पर काम किया, जहां वह टीवी ट्रांसमीटर, रेडियो एफएम ट्रांसमीटर, रेडियो स्टूडियो और टीवी स्टूडियो की स्थापना से जुड़े प्रोजेक्ट्स को संभालते थे। इसके अलावा उन्हें मीडिया से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी विभागों से जरूरी मंजूरियां लेने, सोर्सिंग और लायजनिंग का भी अच्छा अनुभव है।
मीडिया इंडस्ट्री में उनकी अच्छी पकड़ है और उन्होंने अलग-अलग तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में भी काम किया है। उन्हें भारत में टीवी चैनल और एफएम रेडियो चैनल स्थापित करने और ब्रॉडकास्टिंग मीडिया से जुड़े प्रोजेक्ट्स की अच्छी समझ है।
जगदीश पावरा कई कंपनियों के साथ निदेशक के तौर पर भी जुड़े हुए हैं। इनमें Ved Technoserve India Private Limited में Whole-Time Director, Ahmedabad Radio and Mast Services Private Limited और Neri Hydro Projects Private Limited शामिल हैं।
कुल 11.92 करोड़ से ज्यादा वोट पड़े
कंपनी की ओर से जारी वोटिंग डिटेल के मुताबिक, AGM में कुल 11,92,76,639 वोट पड़े। इनमें से 11,92,59,567 वोट पक्ष में और 17,072 वोट विरोध में थे। कुल वोटिंग प्रतिशत कंपनी के बकाया शेयरों के मुकाबले 62.41% रहा।
प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के पास कुल 12,02,73,982 शेयर थे, जिनमें से 11,33,75,982 शेयरों के लिए वोटिंग हुई। प्रमोटर ग्रुप के सभी वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे।
पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की ओर से 59,00,657 वोट पड़े। इनमें 58,83,585 वोट प्रस्तावों के पक्ष में, जबकि 17,072 वोट विरोध में रहे। पब्लिक इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की ओर से वोटिंग नहीं हुई।
स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में भी प्रस्ताव पास
कंपनी के लिए स्क्रूटिनाइजर की भूमिका निभाने वाली Umesh Ved & Associates, Company Secretaries ने अपनी रिपोर्ट में भी दोनों प्रस्तावों को जरूरी बहुमत से पास घोषित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान की गई ई-वोटिंग के नतीजों को कंपनी के रिकॉर्ड और रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट के रिकॉर्ड से मिलाकर देखा गया। वोटों को AGM खत्म होने के बाद अनब्लॉक किया गया।
स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में कहा गया कि AGM के नोटिस में शामिल दोनों प्रस्ताव आवश्यक बहुमत के साथ पास हो गए हैं।
AGM में ऑनलाइन हुई वोटिंग
सम्भाव मीडिया की 36वीं AGM 13 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित हुई। शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा 10 अगस्त 2026 सुबह 9 बजे से 12 अगस्त 2026 शाम 5 बजे तक उपलब्ध थी।
AGM के दौरान उन शेयरधारकों को भी ई-वोटिंग की सुविधा दी गई, जिन्होंने पहले रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपना वोट नहीं डाला था।
कुल मिलाकर, सम्भाव मीडिया के शेयरधारकों ने कंपनी के वित्तीय खातों को मंजूरी देने और जगदीश पावरा की डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्ति, दोनों प्रस्तावों पर लगभग सर्वसम्मति से मुहर लगा दी।
हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ रहे सुकुमार रंगनाथन का नेतृत्व सिर्फ संपादकीय फैसलों तक सीमित नहीं रहा। उनकी सादगी, निष्पक्षता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता ने अलग पहचान बनाई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ पद से सुकुमार रंगनाथन (Sukumar Ranganathan) के हटने की खबर ने मीडिया जगत में कई लोगों को चौंकाया है। हालांकि, उनके जाने का यह दौर उनके करीब से काम करने वाले लोगों के लिए उनके नेतृत्व, सोच और पत्रकारिता के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है।
पिछले चार वर्षों से सुकुमार रंगनाथन ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40 अंडर 40 अवॉर्ड्स (e4m English Journalism 40 Under 40 Awards) की जूरी के अध्यक्ष रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि यह सम्मान केवल हर साल 40 नाम पूरे करने की औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए।
उनके नेतृत्व में जूरी ने हमेशा काम की गुणवत्ता को संख्या से ऊपर रखा। हर साल 40 पत्रकारों को सम्मान देने की परंपरा के बावजूद उन्हीं उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिनका काम तय मानकों पर खरा उतरा। अब तक सबसे ज्यादा 26 पत्रकार चुने गए, जबकि इस साल यह संख्या सिर्फ 17 रही। यह अंतर अपने आप में बताता है कि सुकुमार के लिए सम्मान की विश्वसनीयता कितनी महत्वपूर्ण थी।
जूरी की जिम्मेदारी को वह बेहद गंभीरता से लेते थे। हर उम्मीदवार की प्रोफाइल और उसके काम को ध्यान से पढ़ना, जरूरी बातें नोट करना और बैठकों में उनसे जुड़े छोटे-छोटे पहलुओं को याद रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। कई बार चयन प्रक्रिया महीनों तक चलती थी, लेकिन अगली बैठक में भी उन्हें पिछली चर्चाओं, सवालों और तर्कों की पूरी जानकारी रहती थी।
उनकी खासियत सिर्फ पेशेवर गंभीरता तक सीमित नहीं थी। इतने बड़े पद पर रहने के बावजूद उनकी सादगी और विनम्रता हमेशा लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। व्यस्त कार्यक्रम हो या किसी आयोजन में देरी, उन्होंने कभी अपने पद या कद को सामने नहीं रखा। वह सहजता और धैर्य के साथ लोगों से मिलते और बातचीत करते रहे।
हिंदुस्तान टाइम्स में उनका कार्यकाल संपादकीय दृष्टि, संस्थान निर्माण और पत्रकारिता में बौद्धिक कठोरता के लिए याद किया जाएगा। उनका प्रभाव केवल उन खबरों और संपादकीय फैसलों तक सीमित नहीं रहेगा, जिनका उन्होंने नेतृत्व किया, बल्कि उस कार्यसंस्कृति में भी दिखाई देगा, जिसे उन्होंने अपने आसपास विकसित किया।
सुकुमार रंगनाथन की पत्रकारिता की सबसे बड़ी पहचान शायद यही रही कि उन्होंने उत्कृष्टता को केवल एक शब्द नहीं माना। उन्होंने अपने काम और फैसलों के जरिए यह दिखाया कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता, ईमानदारी, विनम्रता और गुणवत्ता से समझौता किए बिना भी नेतृत्व किया जा सकता है।
न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने भले ही विज्ञापन दरें बढ़ाने की जरूरत पर एकजुट होकर अपनी बात रखी हो, लेकिन जब वास्तव में विज्ञापनदाताओं से ज्यादा पैसा लेने की बात आई है, तो पब्लिशर्स काफी सावधानी बरत रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने भले ही विज्ञापन दरें बढ़ाने की जरूरत पर एकजुट होकर अपनी बात रखी हो, लेकिन जब वास्तव में विज्ञापनदाताओं से ज्यादा पैसा लेने की बात आई है, तो पब्लिशर्स काफी सावधानी बरत रहे हैं।
इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने 22 जुलाई को अपने सदस्यों को 1 अगस्त से विज्ञापनों पर 15% सरचार्ज लगाने की सलाह दी थी। इसके 12 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ज्यादातर बड़े अंग्रेजी, हिंदी और रीजनल पब्लिशर्स ने इसे लागू नहीं किया है। यह हिचकिचाहट प्रिंट मीडिया के सामने मौजूद एक पुराने संकट को दिखाती है। बढ़ती लागत से मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धी विज्ञापन मार्केट में दरें बढ़ाने से पब्लिशर्स को वही कारोबार खोने का डर है, जिसे वे बचाना चाहते हैं।
INS ने यह सलाह 22 जुलाई को जारी की थी। इससे पहले 17 जुलाई को हुई उसकी एग्जिक्यूटिव कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। INS ने घरेलू और आयातित न्यूजप्रिंट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और लगातार बढ़ते ऑपरेशनल खर्च का हवाला दिया था। इस सिफारिश का मकसद पब्लिशर्स को मिलकर अपनी बढ़ी हुई लागत का कम से कम कुछ हिस्सा विज्ञापनदाताओं तक पहुंचाने का एक तरीका देना था।
लेकिन मार्केट में इसका असर सीमित ही दिखाई दिया है। एक वरिष्ठ पब्लिशिंग एग्जिक्यूटिव ने कहा, “मार्केट की स्थिति मुश्किल है, प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है और विज्ञापनदाताओं की ओर से दबाव भी है। इसलिए हमने कुछ और समय तक इसे लागू नहीं करने का फैसला किया है।” यह बयान बताता है कि पब्लिशर्स ऐसे समय में दरें बढ़ाने से क्यों बच रहे हैं, जब विज्ञापन से मिलने वाले हर अतिरिक्त रुपये के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
'एक्सचेंज4मीडिया' ने सभी प्रमुख अंग्रेजी और हिंदी प्रकाशनों से संपर्क किया। ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने माना कि उन्होंने अभी तक इसे लागू नहीं किया है।
'द हिंदू' ने भी अभी तक सरचार्ज लागू नहीं किया है। चेन्नई स्थित इस ग्रुप के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुंदर कोंडूर ने इसकी पुष्टि की।
'मातृभूमि' के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार ने कहा कि ग्रुप ने अब तक सरचार्ज लागू नहीं किया है। उन्होंने बताया कि केरल में भी अखबारों ने बड़े पैमाने पर इसे लागू करने से फिलहाल दूरी बनाए रखी है।
एक प्रमुख मैगजीन पब्लिकेशन के एमडी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह सरचार्ज मैगजीन के मुकाबले अखबारों के लिए ज्यादा प्रासंगिक है, क्योंकि दोनों के लागत ढांचे और मार्केट की स्थिति अलग-अलग है।
INS के प्रेजिडेंट विवेक गुप्ता ने बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया।
त्योहारी सीजन ने बढ़ाई मुश्किल
रीजनल पब्लिशर्स के लिए इस समय को लेकर एक और चुनौती सामने आई है। पब्लिशर्स का कहना है कि ओणम (16-26 अगस्त), जो केरल के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, ने इस समय को और संवेदनशील बना दिया है।
ओणम भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत का संकेत माना जाता है। इसके बाद रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्र और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। यह समय रीजनल मीडिया के लिए विज्ञापन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान रिटेल, ऑटो, ज्वेलरी, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और स्थानीय कारोबारों से जुड़े विज्ञापनदाता अपनी मौजूदगी बढ़ाते हैं।
एक प्रमुख पब्लिशर ने कहा, “ज्यादातर विज्ञापनदाता त्योहारी सीजन के दौरान भारी डिस्काउंट चाहते हैं। यह लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। ऐसे समय में हम रेट बढ़ाने की मांग करने की स्थिति में नहीं हैं, भले ही मौजूदा हालात इसकी जरूरत बता रहे हों।”
पब्लिशर्स के सामने जोखिम साफ है। 15% की बढ़ोतरी से हर विज्ञापन से होने वाली कमाई बढ़ सकती है, लेकिन इससे बातचीत, ज्यादा डिस्काउंट की मांग या विज्ञापन बजट को दूसरी जगह ले जाने की स्थिति भी बन सकती है। और यह ठीक उसी समय हो सकता है जब पब्लिशर्स विज्ञापन की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं।
INS की सिफारिश पर अलग-अलग पब्लिशर्स का अलग-अलग रुख एक बड़ी समस्या को सामने लाता है। लागत का दबाव सभी पर समान है, लेकिन सभी पब्लिशर्स के पास विज्ञापन दरें बढ़ाने की एक जैसी क्षमता नहीं है।
मार्केट कुछ और संकेत दे रहा है
पब्लिशर्स की हिचकिचाहट यह भी दिखाती है कि ज्यादा कमाई की उनकी जरूरत और मार्केट की ज्यादा कीमत चुकाने की इच्छा के बीच कितना बड़ा अंतर है।
पब्लिशर्स कई सालों से यह कहते रहे हैं कि विज्ञापन दरें न्यूजप्रिंट, प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की बढ़ती लागत के हिसाब से नहीं बढ़ी हैं। लेकिन जब भी किसी पब्लिशर ने अकेले विज्ञापन दरें बढ़ाने की कोशिश की है, उसे अक्सर विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के विरोध का सामना करना पड़ा है। INS की सलाह इसी लंबे समय से चली आ रही समस्या के लिए पब्लिशर्स को एक साथ लाने की कोशिश थी।
लेकिन एक साथ इरादा जाहिर करने का मतलब यह नहीं है कि सभी के पास कीमत बढ़ाने की ताकत भी एक जैसी हो। एक प्रमुख FMCG कंपनी के CMO ने कहा, “अखबार और टीवी मीडिया स्पेस की खरीद-बिक्री डिमांड और सप्लाई के आधार पर होती है। यहां दरें मार्केट तय करता है, पब्लिशर्स की संस्था नहीं।”
मार्केटर्स का कहना है कि विज्ञापन की दरें पाठकों की संख्या, सर्कुलेशन, मार्केट में स्थिति, उपलब्ध इन्वेंट्री, किसी कैटेगरी की मांग और विज्ञापनदाता के साथ रिश्ते जैसे कई फैक्टर के आधार पर तय होती हैं। किसी राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक, बड़े हिंदी अखबार और किसी रीजनल प्रकाशन के पास 15% की बढ़ोतरी को विज्ञापनदाताओं पर डालने की समान क्षमता जरूरी नहीं है। INS की सलाह सामने आने के बाद विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों की ओर से यह एक प्रमुख चिंता थी।
एक विज्ञापन एग्जिक्यूटिव ने कहा, “अगर कोई पब्लिकेशन अपनी ऑडियंस की क्वालिटी, रीडरशिप, कंटेंट और असर के आधार पर ज्यादा कीमत को सही साबित कर सकता है, तो मीडिया बायर्स उसके लिए भुगतान करेंगे। लेकिन कीमत तय करना आदर्श रूप से खरीदार और विक्रेता के बीच का फैसला होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष की ओर से तय किया जाना चाहिए।”
इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की गैरमौजूदगी ने इस पूरी बातचीत को और मुश्किल बना दिया है। पिछले IRS को करीब सात साल हो चुके हैं। इसके बावजूद विज्ञापनदाताओं के पास ऐसा कोई सर्वमान्य रीडरशिप करेंसी नहीं है, जिसके आधार पर अलग-अलग प्रकाशनों की ऑडियंस के आकार, क्वालिटी और अतिरिक्त पहुंच की तुलना की जा सके। डाबर इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट, हेड ऑफ मीडिया और हेड ऑफ ब्रांड एक्टिवेशंस राजीव दुबे ने भी कहा है कि इससे प्रिंट मीडिया के लिए ज्यादा दरों को सही ठहराना मुश्किल होता है।
हालांकि पब्लिशर्स का इसके उलट तर्क है कि उनकी कारोबारी वैल्यू को सिर्फ एक रीडरशिप नंबर से नहीं आंका जा सकता। पाठकों का भरोसा, एडिटोरियल प्रभाव, प्रीमियम माहौल और बड़े आयोजनों या महत्वपूर्ण घटनाओं के आसपास प्रभाव पैदा करने की क्षमता भी उनकी वैल्यू का हिस्सा है।
INS के प्रेजिडेंट विवेक गुप्ता ने भी इन्हीं आधारों पर सरचार्ज का बचाव किया है। इससे पहले एक्सचेंज4मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने 15% सरचार्ज को स्थायी बढ़ोतरी के बजाय एक अस्थायी उपाय बताया था। उनका तर्क था कि जब अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, तो अखबारों से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे महंगाई से बढ़ी लागत को खुद ही वहन करते रहें।
विवेक गुप्ता ने कहा था, “अगर युद्ध और दूसरी ऐसी परिस्थितियां, जिन्होंने हमें इस स्थिति में पहुंचाया है, सामान्य हो जाती हैं और कीमतें नीचे आती हैं, तो हम सरचार्ज को हटा सकते हैं। यह स्थायी सरचार्ज नहीं है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि INS पब्लिशर्स के लिए एक फैसिलिटेटर और गाइड के रूप में काम कर रही है, न कि उनकी कीमतें तय कर रही है।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड के बोर्ड ने कंपनी के चार पूर्णकालिक निदेशकों को एक बार फिर पांच साल के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड के बोर्ड ने कंपनी के चार पूर्णकालिक निदेशकों को एक बार फिर पांच साल के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। बोर्ड की 12 अगस्त 2026 को हुई बैठक में धीरेंद्र मोहन गुप्ता, सुनील गुप्ता, संजय गुप्ता और शैलेश गुप्ता की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। हालांकि, इन नियुक्तियों के लिए अब शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी।
इन चारों की मौजूदा अवधि 30 सितंबर 2026 को खत्म हो रही है। प्रस्तावित पुनर्नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से अगले पांच साल के लिए होगी।
धीरेंद्र मोहन गुप्ता को 60 साल से ज्यादा का प्रिंट मीडिया अनुभव
धीरेंद्र मोहन गुप्ता की उम्र 82 साल है और उनके पास प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।
सुनील गुप्ता 64 साल के हैं। उन्होंने कॉमर्स में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल की है। उनके पास प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 45 साल से ज्यादा का अनुभव है।
संजय गुप्ता और शैलेश गुप्ता की भी होगी पुनर्नियुक्ति
संजय गुप्ता की उम्र 63 साल है और उन्होंने साइंस में बैचलर डिग्री हासिल की है। उनके पास प्रिंट मीडिया क्षेत्र में 45 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं।
वहीं, शैलेश गुप्ता 57 साल के हैं और उनके पास कॉमर्स में बैचलर की डिग्री है। उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं।
1 अक्टूबर से शुरू होगा नया कार्यकाल
कंपनी के मुताबिक, चारों पूर्णकालिक निदेशकों की नई पांच साल की अवधि 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। यह फैसला कंपनी की नामांकन और पारिश्रमिक समिति व ऑडिट समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया है।
हालांकि, अंतिम नियुक्ति के लिए कंपनी के शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
करीब 2 घंटे में खत्म हुई बोर्ड मीटिंग
जागरण प्रकाशन के बोर्ड की बैठक 12 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और 3:35 बजे खत्म हुई। बैठक में चारों पूर्णकालिक निदेशकों की पुनर्नियुक्ति के अलावा कंपनी से जुड़े अन्य मामलों पर भी विचार किया गया।
इस फैसले से कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में मौजूदा नेतृत्व की निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया कंपनियां डिजिटल विस्तार और बदलते मीडिया कारोबार के बीच अपनी रणनीति को लगातार मजबूत कर रही हैं।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के स्टैंडअलोन कारोबार में रेवेन्यू और विज्ञापन से होने वाली कमाई में अच्छी बढ़त देखने को मिली है, लेकिन दूसरी आय में बड़ी कमी के चलते मुनाफे पर दबाव रहा। वहीं, कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब 10 फीसदी बढ़ा है।
स्टैंडअलोन रेवेन्यू 11 फीसदी बढ़ा
कंपनी का स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग रेवेन्यू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 442.27 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 398.13 करोड़ रुपये से 11.1 फीसदी ज्यादा है।
विज्ञापन से होने वाली कमाई में और तेज बढ़ोतरी हुई। कंपनी का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 14.5 फीसदी बढ़कर 289.23 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल की पहली तिमाही में यह 252.64 करोड़ रुपये था।
सर्कुलेशन रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 82.42 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 82.30 करोड़ रुपये था। दूसरी ओर, अन्य ऑपरेटिंग रेवेन्यू 11.8 फीसदी बढ़कर 70.62 करोड़ रुपये हो गया।
डिजिटल रेवेन्यू में 32.6 फीसदी की बढ़ोतरी
जागरण प्रकाशन के डिजिटल कारोबार ने इस तिमाही में मजबूत ग्रोथ दर्ज की। डिजिटल रेवेन्यू 32.6 फीसदी बढ़कर 23.38 करोड़ रुपये हो गया। Q1FY26 में यह 17.64 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी के लिए डिजिटल कारोबार लगातार एक महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया बन रहा है।
स्टैंडअलोन मुनाफे में गिरावट
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग प्रॉफिट 61.52 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 64.70 करोड़ रुपये था।
कंपनी की दूसरी आय में भी बड़ी गिरावट आई। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह 23.60 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल 44.53 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने बताया कि पिछले साल की दूसरी आय में 23.85 करोड़ रुपये की Keyman Insurance Policy की maturity proceeds शामिल थी।
इस वजह से स्टैंडअलोन प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 94.73 करोड़ रुपये से घटकर 70.16 करोड़ रुपये और टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 71.35 करोड़ रुपये से घटकर 53.50 करोड़ रुपये रह गया।
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़ा
पूरे ग्रुप के कंसोलिडेटेड नतीजों की बात करें तो ऑपरेटिंग रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़कर 499.35 करोड़ रुपये हो गया। Q1FY26 में यह 460.05 करोड़ रुपये था।
कंसोलिडेटेड विज्ञापन रेवेन्यू भी 14 फीसदी बढ़कर 299.25 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 262.52 करोड़ रुपये था।
कंसोलिडेटेड डिजिटल रेवेन्यू 30.8 फीसदी बढ़कर 24.58 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, सर्कुलेशन रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 84.78 करोड़ रुपये रहा।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट 9.8 फीसदी बढ़ा
कंपनी के कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी बढ़त रही। यह 9.8 फीसदी बढ़कर 70.03 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 63.79 करोड़ रुपये था।
हालांकि, दूसरी आय घटने के कारण कंसोलिडेटेड PBT 90.37 करोड़ रुपये से घटकर 81.02 करोड़ रुपये और PAT 66.76 करोड़ रुपये से घटकर 61.23 करोड़ रुपये रह गया।
Dainik Jagran की कमाई बढ़ी, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट घटा
कंपनी के प्रमुख अखबार Dainik Jagran का वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ऑपरेटिंग रेवेन्यू 314.15 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 286.35 करोड़ रुपये था।
हालांकि, इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट 63.14 करोड़ रुपये से घटकर 59.84 करोड़ रुपये रह गया। ऑपरेटिंग मार्जिन भी 22.05 फीसदी से घटकर 19.05 फीसदी रहा।
अन्य पब्लिकेशंस का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 54.45 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इस कारोबार में 2.04 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग घाटा हुआ।
Radio City के कारोबार में सुधार
जागरण प्रकाशन के रेडियो कारोबार Music Broadcast Limited, जो Radio City चलाती है, ने इस तिमाही में अच्छा सुधार दिखाया।
रेडियो का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44.54 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 49.32 करोड़ रुपये था। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 0.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 8.92 करोड़ रुपये हो गया।
इसका ऑपरेटिंग मार्जिन भी 1.90 फीसदी से बढ़कर 20.03 फीसदी हो गया।
डिजिटल कारोबार अभी भी घाटे में
डिजिटल प्रिंट कारोबार का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 18.80 करोड़ रुपये से बढ़कर 24.58 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कारोबार अभी भी घाटे में है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में डिजिटल कारोबार को 3.07 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में यह घाटा 4.69 करोड़ रुपये था। यानी घाटा कम हुआ है।
डिजिटल पहुंच भी मजबूत
कंपनी के मुताबिक, जागरण न्यू मीडिया की न्यूज और इंफॉर्मेशन कैटेगरी में करीब 4.8 करोड़ यूनिक विजिटर्स रहे। वहीं, Hindi News and Information Category में Jagran.com के करीब 3.6 करोड़ कुल यूनीक विजटर्स और एजुकेशन कैटेगरी में JagranJosh.com के करीब 70 लाख कुल यूनीक विजटर्स रहे।
ये आंकड़े जून 2026 के Comscore MMX Multi-Platform डेटा पर आधारित हैं।
जागरण प्रकाशन के पास प्रिंट, रेडियो, डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन, प्रमोशनल मार्केटिंग और इवेंट मैनेजमेंट समेत मीडिया कारोबार की कई श्रेणियां हैं। कंपनी के मुताबिक, उसका ग्रुप 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5 भाषाओं में 8 पब्लिकेशन प्रकाशित करता है और रेडियो कारोबार के तहत 39 FM स्टेशन संचालित करता है।
कंपनी की क्रेडिट रेटिंग की बात करें तो CRISIL ने जागरण प्रकाशन की लॉन्ग और मीडियम टर्म रेटिंग AA+ Stable और शॉर्ट टर्म रेटिंग A1+ पर बरकरार रखी है।
HT Media Group के लिए पहली तिमाही में विज्ञापन कारोबार ने अच्छी रफ्तार दिखाई है, लेकिन महंगा न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
HT Media: न्यूजप्रिंट की कीमतें $650-700 प्रति टन पर पहुंचीं, Piyush Gupta बोले- शायद पीक पर पहुंच चुका है दबाव
HT Media Group के लिए पहली तिमाही में विज्ञापन कारोबार ने अच्छी रफ्तार दिखाई है, लेकिन महंगा न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। 5 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही को लेकर हुई अर्निंग्स वेबिनार में ग्रुप CFO पीयूष गुप्ता ने कहा कि न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस की सबसे बड़ी लागत है और इसकी कीमत करीब 650-700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।
हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यूजप्रिंट की कीमतें अब अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं और आगे चलकर इनमें कमी आ सकती है। अगर कीमतें मौजूदा स्तर से ज्यादा नहीं बढ़ती हैं तो कंपनी अपने प्रिंट बिजनेस के मौजूदा ऑपरेटिंग मार्जिन को बनाए रखने में सक्षम हो सकती है।
प्रिंट बिजनेस की कमाई 16% बढ़ी
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में HT Media के प्रिंट बिजनेस का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 16% बढ़कर 376 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 324 करोड़ रुपये के आसपास था। प्रिंट में विज्ञापन राजस्व 15% बढ़कर 295 करोड़ रुपये रहा, जबकि सर्कुलेशन रेवेन्यू करीब 52 करोड़ रुपये रहा। प्रिंट का ऑपरेटिंग EBITDA बढ़कर 50 करोड़ रुपये हो गया और ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन करीब 13% रहा।
पीयूष गुप्ता ने बताया कि ऊंची कमोडिटी लागत के बावजूद प्रिंट बिजनेस ने 13% का मार्जिन हासिल किया है।
न्यूजप्रिंट सबसे बड़ी लागत
पीयूष गुप्ता के मुताबिक न्यूजप्रिंट प्रिंट बिजनेस की सबसे बड़ी लागत है। इसकी कीमत के हिसाब से यह कंपनी के कुल बिल ऑफ मैटेरियल में करीब 25% से 40% तक हिस्सा रख सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण न्यूजप्रिंट की कीमतें काफी ऊपर चली गई थीं। इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन अब फिर से इसमें तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
उनके मुताबिक मौजूदा कीमत करीब 650-700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है और यह कोविड के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
डॉलर ने बढ़ाई परेशानी
न्यूजप्रिंट की बढ़ी कीमत के साथ-साथ रुपये की कमजोरी ने भी कंपनी की लागत पर दबाव बढ़ाया है। पीयूष गुप्ता ने कहा कि न्यूजप्रिंट की कीमत अमेरिकी डॉलर में तय होती है। ऐसे में अगर न्यूजप्रिंट महंगा हो और डॉलर भी मजबूत हो, तो कंपनी पर दोहरा दबाव पड़ता है।
उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि न्यूजप्रिंट की कीमतें अब पीक पर हैं और आगे चलकर नीचे आ सकती हैं।
Q2 में न्यूजप्रिंट की कीमत थोड़ी ज्यादा
एचटी मीडिया ग्रुप के ग्रुप डिप्टी सीएफओ अन्ना अब्राहम ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में न्यूजप्रिंट की कीमत पहली तिमाही के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही का वास्तविक मार्जिन इस बात पर भी निर्भर करेगा कि किस तरह के विज्ञापन मिलते हैं और कंपनी को विज्ञापन से कितना यील्ड मिलता है। अगर विज्ञापन से मिलने वाला बेहतर रेट न्यूजप्रिंट की बढ़ी लागत की भरपाई कर देता है तो मार्जिन पर दबाव सीमित रह सकता है।
13% प्रिंट EBITDA मार्जिन को मान सकते हैं बेसलाइन
जब एक निवेशक ने पूछा कि क्या 13% का प्रिंट EBITDA मार्जिन बाकी साल के लिए बेसलाइन माना जा सकता है, तो पीयूष गुप्ता ने कहा कि मॉडलिंग के लिहाज से इसे एक उचित अनुमान माना जा सकता है।
हालांकि उन्होंने चेताया कि कमोडिटी और डॉलर की कीमतों में बड़ा बदलाव हुआ तो मार्जिन पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए अगर डॉलर 100 रुपये तक पहुंच जाए और न्यूजप्रिंट 700 डॉलर प्रति टन तक चला जाए, तो मार्जिन में गिरावट आ सकती है।
अखबारों की कवर प्राइस बढ़ाना आसान नहीं
न्यूजप्रिंट महंगा होने की स्थिति में अखबारों की कवर प्राइस बढ़ाने के सवाल पर मैनेजमेंट ने कहा कि यह आसान विकल्प नहीं है। अन्ना अब्राहम ने कहा कि हिंदी अखबारों की कीमत फिलहाल ठीक स्तर पर है। पिछले समय में कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सभी प्रकाशकों ने कीमतें बढ़ाई हैं। ऐसे में आगे और कीमत बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
कंपनी ऐसे समय में बिना प्रोडक्ट और रीच से समझौता किए वॉल्यूम से जुड़े कदम उठा सकती है, लेकिन कवर प्राइस बढ़ाना उसके लिए बड़ा लीवर नहीं है।
विज्ञापन राजस्व में 15% की ग्रोथ, कीमत बढ़ाने का बड़ा योगदान
पहली तिमाही में प्रिंट विज्ञापन राजस्व में करीब 15% की बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल पूछा गया।
अन्ना अब्राहम ने बताया कि कमर्शियल विज्ञापन के मामले में वॉल्यूम काफी हद तक स्थिर रहा, लेकिन यील्ड में सुधार हुआ। यानी कंपनी को विज्ञापन की समान या मिलती-जुलती मात्रा पर बेहतर रेट हासिल हुआ।
सरकारी विज्ञापन में वॉल्यूम और कीमत दोनों का योगदान रहा। सरकार ने पिछले साल नवंबर में सभी प्रकाशनों के लिए विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी की थी।
पीयूष गुप्ता ने कहा कि कंपनी पिछले काफी समय से यील्ड सुधारने पर फोकस कर रही है और इस तिमाही में इसका असर साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि 15% की विज्ञापन ग्रोथ में प्राइसिंग और यील्ड सुधार का बड़ा योगदान है। साथ ही वॉल्यूम भी काफी हद तक मजबूत रहा।
HT English की सर्कुलेशन ग्रोथ में कीमत का बड़ा रोल
HT English की सर्कुलेशन रेवेन्यू में करीब 14% की बढ़ोतरी पर भी सवाल पूछा गया। मैनेजमेंट ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि अखबार की कॉपी संख्या में 14% की वृद्धि हुई है।
अन्ना अब्राहम ने बताया कि यह मुख्य रूप से प्राइसिंग और सब्सक्रिप्शन तथा लाइन कॉपी के मिक्स का असर है।
पीयूष गुप्ता ने कहा कि प्रतिशत बड़ा दिखाई दे सकता है, लेकिन वास्तविक रकम में बदलाव बहुत बड़ा नहीं है। कंपनी प्रमुख इंग्लिश स्पीकिंग मार्केट्स में अपनी कॉपी शेयर को लगभग स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल कॉपी की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही है और मौजूदा प्रतिस्पर्धी माहौल में यही steady-state circulation आगे भी रहने की उम्मीद है।
कर्मचारी लागत में भी कटौती
कॉन्फ्रेंस कॉल में कर्मचारी लागत घटने पर भी चर्चा हुई। एक निवेशक ने बताया कि कंसोलिडेटेड लेवल पर कर्मचारी लागत पिछले साल के करीब 111 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 99 करोड़ रुपये रह गई है।
इस पर पीयूष गुप्ता ने बताया कि कंपनी पिछले कुछ समय से खर्च कम करने और कामकाज को ज्यादा कुशल बनाने पर जोर दे रही है। इसी के तहत कर्मचारियों और टीम स्ट्रक्चर को कारोबार की जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित किया गया है, जिसका असर कर्मचारी लागत में कमी के रूप में दिखा है।
कंपनी पिछले कुछ समय से संगठन को ज्यादा कुशल बनाने और लागत को नियंत्रित करने पर काम कर रही है। यह बदलाव HT Media और HMVL दोनों स्तरों पर दिखाई दे रहा है।
Q1 में HT Media का कुल रेवेन्यू 15% बढ़ा
कॉन्फ्रेंस कॉल में पीयूष गुप्ता ने बताया कि Q1 FY27 में कंपनी का कुल रेवेन्यू करीब 15% बढ़कर 497 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA करीब तीन गुना बढ़कर 90 करोड़ रुपये हो गया और EBITDA मार्जिन में करीब 12 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।
कंपनी का PAT बढ़कर 47 करोड़ रुपये रहा और PAT मार्जिन करीब 9% पहुंच गया।
मैनेजमेंट ने कहा कि लागत पर लगातार नियंत्रण और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में सुधार से कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी मजबूत हुई है।
प्रिंट अभी भी कारोबार का सबसे बड़ा आधार
कंपनी के चेयरपर्सन के संदेश का हवाला देते हुए अन्ना अब्राहम ने कहा कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत स्थिर रही है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई और मुनाफे में भी सुधार हुआ।
प्रिंट कारोबार अभी भी कंपनी का मुख्य आधार बना हुआ है। विज्ञापन राजस्व बढ़ा है और सर्कुलेशन राजस्व भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि कंपनी के लिए महंगा न्यूजप्रिंट, कमजोर रुपया और ग्लोबल सप्लाई चेन में अनिश्चितता आगे भी चिंता के विषय हैं।
कंपनी को आगे भी अच्छे नतीजों की उम्मीद
कॉल के अंत में पीयूष गुप्ता ने कहा कि कंपनी पहली तिमाही के नतीजों से खुश है और उम्मीद करती है कि आने वाली तिमाहियों में भी इस प्रदर्शन को दोहराया जा सके। हालांकि उन्होंने साफ किया कि कंपनी की ओर से कोई औपचारिक फॉरवर्ड गाइडेंस नहीं दी जा रही है। फिर भी, मौजूदा प्रदर्शन और संभावित परिस्थितियों को देखते हुए मैनेजमेंट को आगे भी अच्छे नतीजे आने की उम्मीद है।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने FMCG क्षेत्र की कंपनी RD Retail India Private Limited में 32.5 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने FMCG क्षेत्र की कंपनी RD Retail India Private Limited में 32.5 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी ने अपने पास मौजूद वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर RD Retail के 3,927 शेयर हासिल किए हैं। यह जानकारी कंपनी ने 10 अगस्त 2026 को शेयर बाजारों को दी।
कंपनी के मुताबिक, उसने RD Retail में रखे 3,250 वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला, जिसकी कुल कीमत 32.5 करोड़ रुपये है। इस रूपांतरण के बाद RD Retail में HMVL की हिस्सेदारी करीब 3.8% हो गई है।
FMCG कारोबार में करती है RD Retail
RD Retail India Private Limited की शुरुआत 2012 में हुई थी और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। कंपनी दिल्ली-एनसीआर में रिटेलर्स को प्रमुख FMCG उत्पाद उपलब्ध कराने वाले बी2बी मार्केटप्लेस के तौर पर काम करती है।
कंपनी के कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 में RD Retail का टर्नओवर 77.28 करोड़ रुपये रहा। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह 59.04 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022-23 में 68.19 करोड़ रुपये था।
भविष्य में रिटर्न हासिल करने का लक्ष्य
HMVL ने बताया कि RD Retail में निवेश का उद्देश्य भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। साथ ही कंपनी अपने पास मौजूद मीडिया संपत्तियों का फायदा उठाकर इस निवेश का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निवेश किसी संबंधित पक्ष के लेनदेन के तहत नहीं आता है और प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह की कंपनियों की RD Retail में कोई हिस्सेदारी या हित नहीं है।
इस निवेश के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं है। शेयरों का अधिग्रहण नकद भुगतान के जरिए वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर किया गया है।
एचटी मीडिया (HT Media Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के 95.30 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एचटी मीडिया (HT Media Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के 95.30 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है। 7 अगस्त 2026 को हुई कंपनी की असाधारण आम बैठक (EGM) में यह प्रस्ताव 88.75% वोटों के साथ पास हो गया।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस वारंट इश्यू से जुटाई जाने वाली राशि में से 90 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि 5.30 करोड़ रुपये सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों पर खर्च किए जाएंगे। कंपनी का उद्देश्य अपने कर्ज का बोझ कम करना और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाना है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर शेयरधारकों की राय बंटी हुई नजर आई। प्रमोटर समूह ने 100% वोट इसके पक्ष में दिए, जबकि सार्वजनिक (पब्लिक) शेयरधारकों के 98.71% वोट इसके विरोध में पड़े। इसके बावजूद प्रमोटर समूह के समर्थन के चलते प्रस्ताव आसानी से पारित हो गया।
इस मंजूरी के तहत कंपनी 3.87 करोड़ से अधिक वारंट 24.57 रुपये प्रति वारंट की कीमत पर जारी करेगी। इनमें प्रमोटर कंपनी Hindustan Times Limited के अलावा कुछ अन्य निवेशकों को भी वारंट आवंटित किए जाएंगे।
कंपनी के अनुसार, इस कदम से कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और बैलेंस शीट पहले से अधिक मजबूत होगी। हालांकि, पब्लिक शेयरधारकों के भारी विरोध से यह भी साफ है कि वारंट इश्यू की कीमत और इससे होने वाले संभावित शेयर डाइल्यूशन को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई है।
DB Corp Limited ने अपनी 30वीं वार्षिक आम बैठक की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी की AGM 2 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-वीडियो माध्यम के जरिए आयोजित की जाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
DB Corp Limited ने अपनी 30वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी की AGM 2 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) और अन्य ऑडियो-वीडियो माध्यम (OAVM) के जरिए आयोजित की जाएगी।
कंपनी ने शेयरधारकों को जानकारी देते हुए बताया कि AGM से पहले रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। ई-वोटिंग 29 अगस्त सुबह 9 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर शाम 5 बजे तक चलेगी। जिन शेयरधारकों के पास 26 अगस्त 2026 तक कंपनी के शेयर होंगे, वही मतदान के पात्र होंगे।
कंपनी ने शेयरधारकों से 21 अगस्त तक अपना ई-मेल पता डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) के साथ अपडेट करने की अपील की है, ताकि उन्हें ई-वोटिंग से जुड़ी सभी जानकारी समय पर मिल सके।
इस AGM में कई अहम प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मंजूरी मांगी जाएगी। इनमें सुधीर अग्रवाल को 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक अगले पांच वर्षों के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी, कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि और रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे पवन अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति पर भी फैसला लिया जाएगा।
DB Corp ने हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी किए थे। कंपनी की आय में हल्की बढ़ोतरी हुई, लेकिन मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों के लिए 7 रुपये प्रति शेयर (70%) के इक्विटी डिविडेंड की भी घोषणा की है। AGM में इन सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर शेयरधारकों की राय ली जाएगी।