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Apple का खामोश हमला: Siri से आगे बढ़कर गूगल सर्च व ChatGPT को टक्कर देने की तैयारी

एप्पल ने आंतरिक रूप से एक नई यूनिट गठित की है, जिसका नाम है– “Answers, Knowledge and Information (AKI)”। इस यूनिट का मकसद है एक जनरेटिव AI-पावर्ड सर्च अनुभव विकसित करना

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago

एप्पल ने आंतरिक रूप से एक नई यूनिट गठित की है, जिसका नाम है– “Answers, Knowledge and Information (AKI)”। इस यूनिट का मकसद है एक जनरेटिव AI-पावर्ड सर्च अनुभव विकसित करना, जो सीधे तौर पर ChatGPT और पारंपरिक सर्च इंजन जैसे गूगल को टक्कर देगा। यह कंपनी की रणनीति में एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि एप्पल अब तक चैटबॉट-स्टाइल टूल्स को नजरअंदाज करता रहा है। लेकिन अब AI दौड़ में पिछड़ने की आशंका ने इसे नई दिशा में कदम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।

ब्लूमबर्ग के मार्क गुर्मन की रिपोर्ट के अनुसार, इस AKI यूनिट का नेतृत्व पूर्व सिरी प्रमुख रॉबी वॉकर कर रहे हैं और इसका फोकस है एप्पल के पूरे इकोसिस्टम में ‘संवादात्मक सर्च’ को शामिल करना। शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह प्लेटफॉर्म सिरी, स्पॉटलाइट और सफारी को बेहतर बनाएगा, हालांकि इसकी लॉन्च डेट अभी घोषित नहीं हुई है। ‘Apple Intelligence’ के तहत लॉन्च हुए पहले फीचर्स जैसे Genmoji और Notification Summaries खास प्रभाव नहीं छोड़ सके हैं, वहीं Siri में बड़ा बदलाव अब 2026 तक टल गया है।

एप्पल की AI महत्वाकांक्षाओं के पीछे आंतरिक चुनौतियाँ भी हैं। बीते महीने, इसके ‘फाउंडेशन मॉडल्स’ ग्रुप से चार शोधकर्ता Meta की AI टीम में शामिल हो गए, जिससे टैलेंट बनाए रखने को लेकर चिंता और गहरी हो गई। इसी बीच, CEO टिम कुक ने तिमाही नतीजों के दौरान यह साफ किया कि एप्पल AI में बड़े निवेश कर रहा है और अधिग्रहण के लिए भी तैयार है। खबरें हैं कि कंपनी Perplexity AI जैसे स्टार्टअप्स से बातचीत कर रही है और लगभग 14 अरब डॉलर की डील की अटकलें लगाई जा रही हैं, जो एप्पल का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण हो सकता है।

रणनीतिक रूप से, एप्पल का यह कदम बेहद नाजुक वक्त पर आ रहा है। कंपनी और गूगल के बीच अरबों डॉलर की डील है, जिसके तहत सफारी में गूगल को डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखने के लिए गूगल हर साल लगभग 20 अरब डॉलर तक का भुगतान करता है। लेकिन अब अमेरिका में इस डील की जांच चल रही है। ऐसे में अगर एप्पल खुद का AI-संचालित सर्च टूल लाता है, तो यह गूगल पर निर्भरता कम करने और मोबाइल सर्च की दुनिया में एक नया अध्याय लिखने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

भारत जैसे बाजार में, जहां iPhone और iPad यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह बदलाव मार्केटर्स और मीडिया बायर्स के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। अगर गूगल आधारित सर्च से हटकर एप्पल के AI उत्तर इंजन का इस्तेमाल बढ़ता है, तो खोज-आधारित विज्ञापन, SEO रणनीतियां और ब्रैंड की विजिबिलिटी- तीनों ही क्षेत्रों में नई चुनौतियां और संभावनाएं पैदा होंगी।

गौरतलब है कि AKI प्रोजेक्ट को एप्पल कोई चमकदार, पब्लिक चैटबॉट के तौर पर पेश नहीं करेगा। यह एक “Answer Engine” के रूप में तैयार हो रहा है—यानी ऐसा AI टूल जो बैकग्राउंड में काम करे, लेकिन उपयोगकर्ता अनुभव, जानकारी के प्रवाह, सर्च से होने वाली आमदनी और AI की परिभाषा- इन सब पर एप्पल का पूरा नियंत्रण बनाए रखे।

सालों तक AI की दौड़ में पीछे छूटने के बाद, अब एप्पल ने शांति से लेकिन निर्णायक ढंग से अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं।


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