क्या लेखक सत्ता की कांता होती है या गांव की सीमा पर भूँकता हुआ कुकुर ? प्रगतिशीलता के ध्वजवाहकों ने महिलाओं और साहित्यकारों पर घटिया टिप्पणी क्यों की थी?

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 hours ago


बचे-खुचे कम्युनिस्ट लेखक संघों के चेहरे पर लगा प्रगतिशीलता के मुखौटे का रंग बदरंग हो गया है। फासीवाद फासीवाद चिल्लानेवाले स्वयं फासीवादी मानसिकता की जकड़न में हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 weeks ago


राजेंद्र यादव आगे कहते हैं कि यह अशोक और अनंत विजय जैसों की तरह ज्यादा पढ़ने और घूमने से उपजी हुई तकलीफ नहीं, बल्कि एक सुना सुनाया और आत्मप्रचार को सही सिद्ध करने का हथकंडा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago