एक समय था जब ब्रैंड्स के लिए टीवी पर 30 सेकंड का ऐड सबसे कीमती माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। आज वही पैसा (कई बार उससे भी ज्यादा) Instagram Reel जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ 15 सेकंड के वीडियो पर खर्च हो रहा है। भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां “मोबाइल-फर्स्ट इंडिया” सीधे “मोबाइल-फर्स्ट ऐडवर्टाइजिंग” बन गया है। साफ शब्दों में कहें तो अब ज्यादातर ऐड मोबाइल स्क्रीन को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं।
आंकड़े भी यही बताते हैं कि भारत में डिजिटल ऐड पर होने वाले कुल खर्च का करीब 78% हिस्सा अब सिर्फ मोबाइल पर ही खर्च हो रहा है। यानी जो टीवी कभी “सबसे बड़ी स्क्रीन” और ऐड का सबसे ताकतवर जरिया माना जाता था, उसकी पकड़ अब कमजोर पड़ रही है। और यह बदलाव इतना तेजी से आया है कि पूरी इंडस्ट्री अभी भी इसे समझने और अपनाने में लगी हुई है।
₹49,000 करोड़ का डिजिटल साम्राज्य और उसका राजा है मोबाइल
ET Brand Equity और Ipsos की रिपोर्ट "The State of Digital Advertising in India 2025-26" (सितंबर 2025) के अनुसार, भारत का कुल ऐड खर्च FY2025 (अप्रैल 2024 – मार्च 2025) में ₹1,11,000 करोड़ पहुंच गया- यह पिछले साल की तुलना में 11% की वृद्धि है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा डिजिटल ऐड का है- ₹49,000 करोड़, यानी कुल बाजार का 44%। पहली बार डिजिटल ने टेलीविजन को पीछे छोड़ दिया है। टेलीविजन का हिस्सा 27%, प्रिंट का 18%, OTT का 5%, OOH (आउटडोर) का 3%, रेडियो का 2% और सिनेमा का 1% रह गया है। FY2026 में यह डिजिटल खर्च और 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो कुल बाजार का 46% होगा। और इस पूरे डिजिटल साम्राज्य का राजा है- मोबाइल। उसी Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 78% डिजिटल ऐड खर्च मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होता है। स्मार्टफोन अब "commerce, content और engagement" तीनों के लिए primary screen बन चुका है।
Sensor Tower की "State of Digital Advertising India 2026" रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, 2025 में भारत का कुल डिजिटल ऐड खर्च US$4.2 बिलियन रहा और 2026 में इसके US$5 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। ResearchAndMarkets (फरवरी 2026) के अनुसार, सभी digital channels- Search, Social, Display, Video, OTT, Retail Media- मिलाकर 2026 में भारत का Digital Ad Spend Market US$14.56 बिलियन तक पहुंच सकता है।
अरब इंटरनेट यूजर्स- और ज्यादातर मोबाइल पर
DataReportal की "Digital 2026: India" रिपोर्ट (नवंबर 2025) के अनुसार, 2025 के अंत तक भारत में 103 करोड़ (1.03 बिलियन) इंटरनेट यूजर्स थे- internet penetration 70% पर पहुंच गई। इसके साथ ही 106 करोड़ cellular mobile connections सक्रिय थे, जो देश की कुल आबादी का 72.5% है।
ET Brand Equity–Ipsos रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में 5.6 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स जुड़े। 2026 में Connected TV (CTV) यूजर्स 40 मिलियन से बढ़कर 50 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 5G की बात करें तो जनवरी 2026 में भारत में 40 करोड़ 5G users थे- 2025 के 36.5 करोड़ से 9.59% की वृद्धि।
यह सारे आंकड़े एक बात साफ करते हैं: भारत अब दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल इंटरनेट बाजारों में से एक है और इसी वजह से ब्रैंड्स के लिए मोबाइल स्क्रीन सबसे जरूरी ऐड माध्यम बन गई है।
OTT, Reels और Shorts- ब्रैंड्स की नई दुनिया
अब OTT प्लेटफॉर्म्स (जैसे Netflix, JioCinema, Hotstar आदि) पर ऐड करना कोई नया प्रयोग नहीं रहा, बल्कि मीडिया प्लानिंग का जरूरी हिस्सा बन गया है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 वह साल था जब OTT को “ऑप्शन” नहीं, बल्कि “कोर” यानी जरूरी प्लेटफॉर्म माना जाने लगा। पहली बार 2025 में OTT ऐड को कुल एड खर्च में एक अलग और अहम कैटेगरी के तौर पर देखा गया। इसी साल भारत में OTT यूजर्स की संख्या बढ़कर करीब 60 करोड़ से ज्यादा हो गई, जिससे ब्रैंड्स के लिए यह प्लेटफॉर्म और भी अहम बन गया।
Connected TV (CTV) यानी इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट टीवी पर भी तेजी से ग्रोथ दिख रही है। Deloitte और PwC की रिपोर्ट के अनुसार, CTV ऐड खर्च 2022 में करीब ₹450 करोड़ था, जो 2024 तक बढ़कर ₹1,500 करोड़ हो गया यानी तीन गुना से ज्यादा।
Madison World की रिपोर्ट कहती है कि 2025 के अंत तक यह खर्च ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंच सकता है, और 2027 तक ₹3,500 करोड़ तक जाने की उम्मीद है। वहीं WPP Media के अनुमान के मुताबिक, भारत का कुल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में ₹2 लाख करोड़ के आसपास पहुंच सकता है।
अब OTT सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि ब्रैंड्स के लिए बड़ा एड प्लेटफॉर्म बन चुका है। JioCinema और JioStar जैसे प्लेटफॉर्म IPL जैसे बड़े इवेंट्स में ब्रैंड्स को ऐसे एड ऑप्शन दे रहे हैं, जहां वे दर्शकों तक हर स्तर पर पहुंच सकते हैं।
खास बात यह है कि अब ऐसे ऐड ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिन्हें स्किप नहीं किया जा सकता और जिन पर दर्शकों का पूरा ध्यान जाता है। यानी साफ है—OTT अब एडवर्टाइजिंग की दुनिया का एक बड़ा और मजबूत खिलाड़ी बन चुका है।
Reels और Shorts- "15 सेकंड में बिकती दुनिया"
Short Video का जलवा: ऐड की दुनिया का नया सुपरस्टार
आज के समय में भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ऐड फॉर्मेट शॉर्ट वीडियो बन चुका है। यानी छोटे-छोटे वीडियो (15–60 सेकंड) अब ब्रैंड्स के लिए सबसे बड़ा हथियार बन रहे हैं। YouTube के Shorts ने जून 2025 में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया। कंपनी के सीईओ नील मोहन ने बताया कि Shorts पर रोजाना 200 अरब (200 बिलियन) व्यूज आ रहे हैं। यह 2024 के 70 अरब व्यूज के मुकाबले लगभग 3 गुना ज्यादा है।
वहीं Instagram Reels भी पीछे नहीं है। मार्क जुकरबर्ग के अनुसार, 2025 तक Instagram पर लोग जितना समय बिताते हैं, उसमें से करीब 50% समय सिर्फ Reels देखने में जा रहा है। Reels की पहुंच भी बहुत बड़ी हो चुकी है। दुनियाभर में करीब 72 करोड़ लोग इसे देखते हैं, जो Instagram के कुल ऐड दर्शकों का आधे से ज्यादा हिस्सा है।
भारत में खास बात यह है कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में Reels की लोकप्रियता मेट्रो शहरों से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि Zomato, Swiggy और Myntra जैसे बड़े ब्रैंड्स अब अपने ऐड बजट का बड़ा हिस्सा Reels और शॉर्ट वीडियो कैंपेन पर खर्च कर रहे हैं।
साफ है, आज के दौर में अगर ब्रैंड्स को लोगों तक जल्दी और असरदार तरीके से पहुंचना है, तो शॉर्ट वीडियो ही सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग- ₹3,375 करोड़ की नई अर्थव्यवस्था
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अब एक "एक्सपेरिमेंट" नहीं बल्कि मेनस्ट्रीम ऐडवर्टाइजिंग स्ट्रेटजी है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बाजार ₹3,000 से ₹3,500 करोड़ के बीच था और 2026 में यह ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- यानी 25% CAGR से वृद्धि।
Kofluence की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग Research Report 2025 के अनुसार, Instagram इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के लिए सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बना हुआ है- 50% से अधिक brand allocations यहाँ जाते हैं। Micro-influencers (10,000 से 1 लाख followers) Tier-2 और Tier-3 शहरों में hyperlocal campaigns के जरिए brands को ज्यादा ROI दे रहे हैं। FMCG, E-commerce, Beauty, Finance और Food सेक्टर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में सबसे बड़े निवेशक हैं।
Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Shopping category ने 2025 में भारत के डिजिटल ऐड खर्च का 28-30% हिस्सा घेरा, जिसमें Flipkart, Reliance Retail और Amazon के बीच सबसे कड़ा मुकाबला रहा। Flipkart की Big Billion Day 2025 campaign में लगभग 80% audience युवा users थे।
टेलीविजन की घटती ताकत: लाइसेंस वापस, ऐड गायब
टीवी पर घट रहा असर: ऐड और दर्शक दोनों कम हुए
जहां एक तरफ डिजिटल और मोबाइल तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं टीवी की हालत कुछ ठीक नहीं दिख रही। WPP की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का कुल TV ऐड रेवेन्यू करीब 1.5% गिरकर ₹47,740 करोड़ रह गया।
TAM Media Research के आंकड़े बताते हैं कि 2025 में TV पर दिखने वाले ऐडों की संख्या (ad volumes) में पिछले साल के मुकाबले 11% की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह रही- रियल मनी गेमिंग गेम पर बैन, FMCG कंपनियों का कम खर्च और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तेज बढ़त।
FICCI और Ernst & Young (FICCI-EY रिपोर्ट) के अनुसार, 2024 में भी टीवी सेक्टर की कमाई 4.5% घट गई थी। यह लगातार दूसरा साल था जब गिरावट देखी गई (2023 में 2% गिरावट आई थी)। इतना ही नहीं, 2024 में TV पर ऐड से होने वाली कमाई 6% कम हो गई और ऐड देने वाले ब्रैंड्स की संख्या भी 12% घट गई। दर्शकों की संख्या में भी गिरावट आई है। FY25 में एक्टिव DTH यूजर्स करीब 5.69 करोड़ रह गए, जो FY24 के 6.19 करोड़ से कम हैं।
Dentsu का अनुमान है कि आने वाले समय में TV का कुल ऐड खर्च में हिस्सा और घट सकता है- 2027 तक यह 21% से गिरकर करीब 15% तक आ सकता है। इस गिरावट का असर साफ दिख रहा है। पिछले तीन सालों में 50 से ज्यादा TV चैनलों के लाइसेंस वापस किए जा चुके हैं। इसमें Zee Entertainment, TV Today Network, NDTV और ABP Network जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
साफ है कि टीवी जो कभी ऐड की दुनिया का सबसे बड़ा मंच था, अब डिजिटल के सामने अपनी पकड़ खोता जा रहा है।
प्रोग्रामैटिक, रिटेल मीडिया और AI- अगली पीढ़ी का ऐडवर्टाइजिंग
अब मोबाइल पर दिखने वाले ऐड पहले जैसे नहीं रहे। अब यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड (अपने आप चलने वाले) और डेटा के आधार पर तय होने लगे हैं।
Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में डिजिटल ऐड का 40% से ज्यादा हिस्सा अब प्रोग्रामैटिक ट्रेडिंग के जरिए हो रहा है। यानी कंप्यूटर और AI खुद तय करते हैं कि कौन-सा ऐड किसे और कब दिखाना है।
Retail media भी तेजी से बढ़ रहा है। Amazon Ads, Flipkart Ads, JioMart, Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐड में साल-दर-साल 20% से ज्यादा की बढ़त देखी गई है। यह ग्रोथ सर्च और सोशल मीडिया ऐड से भी तेज है। FMCG और E-commerce कंपनियां मिलकर digital advertising का करीब 68% खर्च कर रही हैं, यानी सबसे ज्यादा पैसा यही सेक्टर लगा रहे हैं।
Sensor Tower की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सॉफ्टवेयर कैटेगरी में ऐड खर्च सबसे तेजी से बढ़ा- इसमें 84% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई। इसके बाद Food & Dining में 38% और Travel & Tourism में 40% की बढ़त रही।
अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी ऐड का बड़ा हिस्सा बन चुका है। Ad buying (ऐड खरीदना), टार्गेटिंग (किसे दिखाना है) और creative बनाना- इन सबमें AI का इस्तेमाल आम हो गया है।
AI की मदद से ब्रैंड्स अब छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) के लोगों के लिए उनकी भाषा में, उनकी पसंद के हिसाब से पर्सनलाइज्ड ऐड बना रहे हैं। यानी हर यूजर को अलग-अलग और ज्यादा जुड़ा हुआ कंटेंट दिख रहा है। आने वाले समय में, खासकर 2026 में, यह ट्रेंड और तेज होने वाला है। साफ है—मोबाइल एडवर्टाइजिंग अब सिर्फ बड़ी नहीं, बल्कि ज्यादा स्मार्ट भी हो चुकी है।
टीवी बनाम मोबाइल: नंबरों में पूरी कहानी
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पैमाना
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टेलीविजन (2025)
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मोबाइल/डिजिटल (2025-26)
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कुल Ad Spend में हिस्सा
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27% (₹47,740 Cr, घटता हुआ)
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44% (₹49,000 Cr, बढ़ता हुआ)
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Ad Volume growth (2025)
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-11% (TAM data)
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+20% (digital, Ipsos)
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Brands की संख्या
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-12% (2024 vs 2023)
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लगातार नए advertiser जुड़ रहे
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CTV ad revenue
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₹1,500 Cr (2024)
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₹2,300-2,500 Cr (2025 est.)
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2027 तक projected share
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15% (Dentsu)
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46%+ (Ipsos)
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जमीनी हकीकत: Tier-2 भारत बदल रहा है खेल
अब मोबाइल ऐड का असली विस्तार बड़े शहरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में हो रहा है। Ipsos की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 20-30 करोड़ नए इंटरनेट यूजर्स अपनी स्थानीय भाषा (vernacular) में कंटेंट देखना पसंद करेंगे। यही वजह है कि ShareChat (और Moj), Dailyhunt (Josh) और InMobi जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म regional कंटेंट और अलग-अलग ऑडियंस को टारगेट करने की रणनीति के जरिए Google और Meta Platforms जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ, Accenture की रिपोर्ट बताती है कि 77% भारतीय यूजर्स इतने सारे OTT प्लेटफॉर्म देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसी वजह से अब लोग ऐसे प्लान पसंद कर रहे हैं, जिनमें कई OTT एक साथ मिल जाएं। जैसे Airtel का Xstream और Jio का JioFiber, इनमें एक ही पैक में कई OTT प्लेटफॉर्म मिल जाते हैं (Airtel में 25+ और Jio में 16 तक)।
CTV (Connected TV) यानी इंटरनेट वाले स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। MiQ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में CTV यूजर्स की संख्या 87% बढ़कर करीब 13 करोड़ तक पहुंच गई है। यानी अब 6-7 करोड़ घरों में CTV इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा, छोटे शहरों में Reels और शॉर्ट वीडियो का क्रेज और भी ज्यादा है। खासकर Diwali, Eid, Onam और Pongal जैसे त्योहारों के दौरान ये वीडियो तेजी से वायरल होते हैं।
यही वजह है कि अब ब्रैंड्स के लिए ये शॉर्ट वीडियो सिर्फ सोशल मीडिया कंटेंट नहीं, बल्कि पूरे देश में चलने वाले बड़े ऐड कैंपेन का मजबूत विकल्प बन चुके हैं।
'स्क्रीन' की लड़ाई खत्म हो चुकी है
अगर यह पूछा जाए कि "स्क्रीन की लड़ाई" खत्म हुई या नहीं- तो जवाब है: हां, खत्म हो चुकी है। और जीता है मोबाइल। 78% डिजिटल ad spend, 103 करोड़ internet users, 601 मिलियन OTT दर्शक, 200 billion YouTube Shorts daily views (जून 2025), Reels पर 50% Instagram screen time, ₹3,375 करोड़ का influencer economy, और 50 से अधिक TV channels का बंद होना- यह सब मिलकर एक ही कहानी कह रहे हैं। टेलीविजन अभी मरा नहीं है, लेकिन वह अब "King Screen" नहीं रहा। मोबाइल ने वह ताज छीन लिया है।
FY2026 में डिजिटल ऐड के ₹56,400 करोड़ तक पहुंचने और टोटल ऐड मार्केटिंग के ₹2 लाख करोड़ को छूने के अनुमानों के साथ, यह साफ है कि भारत की ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का भविष्य मोबाइल स्क्रीन पर लिखा जा रहा है- Reels में, Shorts में, OTT ads में, और influencer की आवाज में।