कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत के करीब ₹1.55 लाख करोड़ के ऐड मार्केट में एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है कि अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलने वाले किसी ऐड कैंपेन को वास्तव में कितने अलग-अलग लोग (यूनिक कंज्यूमर्स) देखते हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के पास ऐसा कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है, जो टीवी, डिजिटल और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलाकर यह बता सके कि किसी कैंपेन की कुल रीच कितनी रही और एक ही व्यक्ति तक ऐड कितनी बार पहुंचा।
इस कमी को दूर करने के लिए इंडियन सोसायटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) अगले कुछ महीनों में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट (CMM) सिस्टम लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। प्रस्तावित सिस्टम के पहले चरण में वीडियो को शामिल किया जाएगा, क्योंकि यह ऐडवर्टाइजिंग का सबसे बड़ा इन्वेंट्री सेगमेंट है। आगे चलकर इस सिस्टम में दूसरे मीडिया को भी शामिल किया जा सकता है।
यह पहल ISA के करीब तीन साल से चल रहे प्रयास का अगला बड़ा कदम है। ऐडवर्टाइजर लंबे समय से ऐसे साझा सिस्टम की जरूरत महसूस कर रहे हैं, जिससे अलग-अलग और तेजी से बढ़ते मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को एक समान तरीके से मापा जा सके।
WFA के Halo फ्रेमवर्क से प्रेरित होगा सिस्टम
ISA के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत में तैयार किया जा रहा यह सिस्टम वर्ल्ड फेड्रेशन ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (WFA) के Halo फ्रेमवर्क के सिद्धांतों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। Halo एक ऐसा कॉमन फ्रेमवर्क है, जिसका मकसद अलग-अलग मीडिया पर कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा और उन्होंने उसे कितनी बार देखा, यह पता लगाना है। यानी यह पता लगाया जा सके कि किसी कैंपेन को कुल कितने अलग लोगों ने देखा और उनमें से कितने लोगों तक ऐड बार-बार पहुंचा।
ISA ने इस दिशा में ब्रिटेन के Origin मॉडल का भी अध्ययन किया है। Origin को Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सफल मॉडलों में से एक माना जाता है।
ISA के अधिकारी ने बताया कि भारतीय सिस्टम की शुरुआत वीडियो मीजरमेंट से होने की उम्मीद है। इसके बाद इसे धीरे-धीरे दूसरे मीडिया तक बढ़ाया जाएगा। यानी शुरुआत से ही हर माध्यम को एक ही सिस्टम में शामिल करने के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
ऐडवर्टाइजर्स, एजेंसीज और प्लेटफॉर्म्स को साथ लाने की तैयारी
ISA की CMM पहल पर उसकी क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी के भीतर काफी समय से चर्चा और विचार-विमर्श चल रहा है। अब ISA इस प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इनमें ऐडवर्टाइजर्स, मीडिया एजेंसीज, ब्रॉडकास्टर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, पब्लिशर्स और मीजरमेंट/डेटा कंपनीज शामिल हैं।
मौजूदा मीजरमेंट सिस्टम और डेटा प्रोवाइडर्स जैसे BARC और TAM की भी इस प्रक्रिया में भूमिका हो सकती है। इंडस्ट्री यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग स्रोतों से आने वाले डेटा और मीजरमेंट मेथडोलॉजी को एक कॉमन फ्रेमवर्क के तहत किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। ISA का मकसद मौजूदा मीजरमेंट करेंसी को तुरंत खत्म करना नहीं है। इसके बजाय एक ऐसी न्यूट्रल मीजरमेंट layer तैयार करने की कोशिश है, जो अलग-अलग जगहों से मिले आंकड़ों को जोड़कर यह बताए कि कैंपेन कितने अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।
ऐडवर्टाइजर 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का कर रहे इस्तेमाल
इंडस्ट्री से जुड़े ऐडवर्टाइजर्स के मुताबिक, मीडिया का दायरा लगातार बढ़ रहा है और आज एक ऐडवर्टाइजर अपने ऑडियंस तक पहुंचने के लिए औसतन 10 से ज्यादा टचपॉइंट्स का इस्तेमाल करता है। टीवी, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब, सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, ऑडियो और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक ही व्यक्ति तक ऐड पहुंच सकता है। ऐसे में हर प्लेटफॉर्म का अलग-अलग डेटा मिलने से यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में कितने यूनिक कंज्यूमर्स तक कैंपेन पहुंचा।
ऐडवर्टाइजर्स का मानना है कि करीब ₹1.5 लाख करोड़ के सालाना ऐडवर्टाइजिंग खर्च वाले बाजार में यह समझना जरूरी है कि ऑडियंस किस माध्यम पर और किस तरह जुड़ रही है। इसके लिए एक अकाउंटेबल, न्यूट्रल और क्रेडिबल क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम की जरूरत है।
TV और CTV मिलाकर करीब 25% ऐड मार्केट
पिच मेडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक, भारत में 2025 में लीनियर टीवी का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹32,855 करोड़ रहा। इंडस्ट्री के एक अनुमान के मुताबिक, कनेक्टेड टीवी (CTV) समेत ब्रॉडर लार्ज-स्क्रीन इकोसिस्टम का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹38,855 करोड़ रहा। इसमें CTV का ऐडवर्टाइजिंग खर्च करीब ₹6,000 करोड़ रहने का अनुमान है, जो एक साल में दोगुना हुआ है। TV और CTV को मिलाकर यह आंकड़ा भारत के कुल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का करीब 25% बैठता है।
Halo से Origin और अब भारत की तैयारी
दुनिया में ISA जिस मॉडल को समझने की कोशिश कर रहा है, उसमें WFA का Halo फ्रेमवर्क अहम है। यह ऐडवर्टाइजर्स की पहल पर तैयार किया गया एक ओपेन फ्रेमवर्क है। इसमें कुछ साझा तकनीकी तरीके और नियम दिए गए हैं, जिनकी मदद से अलग-अलग देश अपनी जरूरत के हिसाब से ऐसा क्रॉस-मीडिया मेजरमेंट सिस्टम बना सकते हैं, जिसमें लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।
ब्रिटेन का Origin मॉडल, जिसे Incorporated Society of British Advertisers (ISBA) के नेतृत्व में तैयार किया गया है, Halo फ्रेमवर्क पर आधारित सबसे विकसित मॉडलों में से एक माना जाता है। इसमें टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पैनल डेटा को एक साथ जोड़कर ऑडियंस को मापा जाता है, जबकि लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक ही ऐड कितने लोगों तक पहुंचा और लोगों ने उसे कुल कितनी बार देखा।
WFA के मुताबिक, Origin अब ब्रिटेन के ऐडवर्टाइजिंग मार्केट के खर्च के हिसाब से 60% से ज्यादा हिस्से को कवर करता है। अमेरिका में ऐडवर्टाइजर्स द्वारा विकसित Aquila भी इसी तरह के मॉडल पर काम कर रहा है और इसके ट्रायल्स चल रहे हैं।
ISA अब Origin और Aquila दोनों का अध्ययन कर रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि भारत में क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम को किस तरह तैयार किया जा सकता है। Origin में सिंगल-सोर्स पैनल को प्लेटफॉर्म डेटा के साथ जोड़ा जाता है। यह प्राइवेसी-प्रिजर्विंग एनवॉयरमेंट में काम करता है और स्वतंत्र ऑ़डिट के अधीन है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि TV और डिजिटल के जरिए कितने नए लोगों तक ऐड पहुंचा और कितने लोगों को वही ऐड दोबारा दिखा।
सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी नहीं, इंडस्ट्री की सहमति
इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, CMM सिस्टम तैयार करने में तकनीक शायद सबसे बड़ी चुनौती नहीं होगी। असली चुनौती अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साझा सिस्टम पर सहमत करना हो सकती है।
ऐडवर्टाइजर्स को independent और comparable मीजरमेंट चाहिए। एजेंसीज ऐसा करेंसी सिस्टम चाहती हैं, जिसे मीडिया प्लानिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सके। वहीं ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अपने डेटा और commercial interests को लेकर सतर्क रहते हैं। दूसरी तरफ मीजरमेंट कंपनीज की अपनी मेथोलॉजी और इंफ्रास्टचर्स पहले से मौजूद हैं। ऐसे में सभी पक्षों को एक साझा फ्रेमवर्क पर लाना ISA के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
इस पूरी पहल का अंतिम मकसद काफी सीधा है- यह पता लगाना कि किसी कैंपेन ने कितने अलग लोगों तक पहुंच बनाई, लोगों को कितनी बार ऐड दिखा और किस चैनल ने अतिरिक्त (incremental) रीच दी।
ISA की क्रॉस मीडिया मीजरमेंट सब-कमेटी की अध्यक्षता ITC Ltd के चीफ डिजिटल मार्केटिंग ऑफिसर शुवादीप बनर्जी कर रहे हैं। शुवादीप बनर्जी से इस मामले में टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। ISA चेयरमैन सुनील कटारिया ने एक्सचेंज4मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया।
भारत में CMM की जरूरत क्यों बढ़ रही है?
भारत में TV, कनेक्टेड टीवी, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म्स, social मीडिया, स्ट्रीमिंग सर्विसेज और ऑडियो जैसे कई माध्यमों की ऑडियंस अब एक-दूसरे से काफी हद तक overlap करती है। लेकिन इन सभी के मीजरमेंट सिस्टम अभी भी काफी हद तक प्लेटफॉर्म या medium-specific हैं।
उदाहरण के लिए, किसी ऐडवर्टाइजर को यह पता हो सकता है कि TV पर उसके ऐड को कितने इम्प्रेशंस मिले और डिजिटल पर कितने इम्प्रेशंस मिले। लेकिन दोनों को मिलाकर यह पता लगाना आसान नहीं है कि वास्तव में कितने अलग-अलग लोगों तक ऐड पहुंचा।
एक साझा क्रॉस मीडिया फ्रेमवर्क आने से फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं रहेगा कि ऐडवर्टाइजर ने कितनी ऐडवर्टाइजिंग इन्वेंट्री खरीदी, बल्कि यह भी देखा जा सकेगा कि उसे वास्तव में कितनी इक्रीमेंटल ऑडियंस मिली। इसका असर आगे चलकर मीडिया प्लानिंग, ऐडवर्टाइजिंग प्राइसिंग, कैंपेन ऑप्टमाइजेशन और टीवी, डिजिटल वीडियो समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म के योगदान के आकलन पर भी पड़ सकता है।
TV ratings के बदलते दौर में पहल महत्वपूर्ण
ISA की यह पहल ऐसे समय में सामने आ रही है जब भारत का टीवी मीजरमेंट इकोसिस्टम भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। टीवी रेटिंग्स काफी समय से रुकी हुई हैं। सरकार की TV Ratings Policy 2026 में रेटिंग्स इकोसिस्टम को लेकर नए प्रावधान किए गए हैं। इनमें transparency, accountability, data protection और independent oversight को मजबूत करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। BARC नए रेगुलेट्री फ्रेमवर्क के तहत काम कर रहा है। वहीं मार्केट में TAM जैसे स्थापित खिलाड़ियों से भी ज्यादा कम्पटीशन देखने को मिल सकता है।
दूसरी तरफ दूसरे मीडिया की मीजरमेंट करेंसीज में भी कई चुनौतियां हैं। इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) पिछले सात साल से रुका हुआ है। वहीं Out-of-Home (OOH) इंडस्ट्री के सामने भी अब तक कोई साझा मीजरमेंट सिस्टम नहीं है। डिजिटलमीडिया का मीजरमेंट बाकी माध्यमों की तुलना में ज्यादा विकसित है, लेकिन यहां भी बड़ी मात्रा में मीजरमेंट डेटा बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के नियंत्रण में रहता है।
ऐसे में ISA का प्रस्तावित क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट सिस्टम अगर आकार लेता है, तो इसका उद्देश्य अलग-अलग मीडिया की ऑडियंस को एक साझा फ्रेमवर्क में देखकर ऐडवर्टाइजर्स को कैंपेन की वास्तविक रीच और फ्रीक्वेंसी समझने में मदद करना होगा।