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ट्विटर और भारत सरकार फिर आए आमने-सामने, यहां जानें पूरा मामला
सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर और भारत सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर और भारत सरकार एक बार फिर आमने-सामने हैं। ट्विटर ने भारत सरकार की ओर से आपत्तिजनक ठहराए गए कुछ कंटेंट्स और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाले अकाउंट्स को ब्लॉक किए जाने के आदेश को अदालत में चुनौती दी है। ट्विटर के अधिकारियों ने सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया है।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने ट्विटर से सैकड़ों अकाउंट्स और कथित आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए कहा है, लेकिन ट्विटर सरकार के आदेश का पूरी तरह से पालन करने में आनाकानी कर रहा और वह ऐसा कोई पहली बार नहीं कर रहा है, बल्कि पहले भी करता रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 4 जुलाई तक आदेशों का पालन नहीं करने पर आपराधिक कार्यवाही की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी दी हुई है। इसके लिए ट्विटर को एक नोटिस 6 जून को और फिर दूसरा 9 जून को भेजा गया था, जिसका कंपनी ने अभी तक पालन नहीं किया। वहीं, इस बार सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 27 जून को कंपनी के मुख्य अनुपालन अधिकारी को तीसरा व फाइनल नोटिस भेजा, जिसमें दो टूक शब्दों में कहा गया कि या तो 4 जुलाई तक सभी आपत्तिजनक ट्वीट्स और हैंडल पर कार्रवाई करो या फिर इंटरमीडियरी का 'कवच' खोने को तैयार रहो।
इंटरमीडियरी स्टेटस खत्म होने का मतलब है कि प्लेटफॉर्म कंटेंट चाहे जिसका हो, ट्वीट चाहे जिसका हो, उसके लिए सीधे जवाबदेही ट्विटर की होगी। आपत्तिजनक कंटेंट के लिए उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होगा।
सरकार के सख्त रुख के आगे ट्विटर ने कुछ पोस्ट्स और ट्विटर हैंडल के खिलाफ कार्रवाई तो की, लेकिन अब उसने भारत सरकार के आदेश को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सोशल मीडिया कंपनी की दलील है कि भारत सरकार के आदेश कानूनसम्मत नहीं हैं और अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करने वाले हैं।
हालांकि जिस दिन ट्विटर ने भारत सरकार के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, उसी दिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी अश्विनी वैष्णव ने दो टूक शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया जवाबदेही से भाग नहीं सकतीं। उन्हें जवाबदेह बनाया ही जाना चाहिए और सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
वैष्णव ने कहा, 'सोशल मीडिया बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है। सोशल मीडिया का हमारी लाइफ में आज बहुत बड़ा प्रभाव है। इसकी अकाउंटेबिलिटी कैसे तय हो, यह पूरी दुनिया में एक बड़ा सवाल बन गया है। दुनियाभर में देश और सोसाइटीज इस दिशा में बढ़ रही हैं कि सोशल मीडिया को अकाउंटबेल बनाना जरूरी है। कैसे अकाउंटेबिलिटी बनेगी? सबसे पहले सेल्फ रेग्युलेशन है कि वे खुद ही कुछ ऐसे कंटेंट जिससे समाज में नकारात्मक असर पड़ता है, उन्हें खुद ही दूर करें। फिर इंडस्ट्री रेग्युलेशन फिर गवर्नमेंट रेग्युलेशन। अभी हर तरह का एक ऐसा इकोसिस्टम, ऐसा थॉट प्रॉसेज बन रहा है कि दुनिया में सब जगह और देश में भी कि सोशल मीडिया को जवाबदेह बनाना चाहिए। जैसे पत्रकार (और मीडिया संस्थान) अपनी मेहनत से कंटेंट क्रिएट करते हैं, अगर उससे सोशल मीडिया को उससे रेवेन्यू मिल रहा है, मान लो फेसबुक से रेवेन्यू आ रहा है तो उसका एक हिस्सा आपको (मीडिया संस्थान) को भी मिलना चाहिए। इस तरह की सोच भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। इसलिए किस तरह से एक फेयर सिस्टम बने, क्योंकि ये सोसाइटी में एक बहुत बड़ी प्रोग्रेस है। इस प्रोग्रेस में सभी भागीदार कैसे बनें और ये अकाउंटेबल कैसे बने, इस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है।'
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