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सरकारी खजाने का दुरुपयोग राज्यों को कंगाल कर रहा: अखिलेश शर्मा
कई सरकारें करोड़ों रुपये विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर सब्सिडी देने में खर्च कर रही हैं, जबकि वे बजट घाटे का सामना कर रही हैं और धन की कमी की शिकायत कर रही हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 days ago
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले 'मुफ्त की रेवड़ियां' बांटने यानि फ्रीबीज पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर वे इसी तरह 'मुफ्त खाना, मुफ्त बिजली...' जैसी सुविधाएं देते रहे, तो डेवलेपमेंट के लिए पैसे कहां से बचेगा? इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा भी सुप्रीम कोर्ट की इस बात से सहमत दिखाई दिए।
उन्होंने अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट कर लिखा, चुनाव के समय रेवड़ियां (फ्रीबीज़) बांटने की प्रवृत्ति पर अब सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से सवाल उठाया कि जब कई राज्य पहले से ही भारी घाटे में चल रहे हैं, तो विकास के लिए आवश्यक संसाधन आखिर कहां से आएंगे, यदि लगातार मुफ्त योजनाएं घोषित की जाती रहेंगी।
वास्तविकता यह है कि जरूरतमंदों की सहायता करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले वोट हासिल करने के उद्देश्य से सरकारी खजाने का अंधाधुंध उपयोग देश और राज्यों की आर्थिक बुनियाद को कमजोर कर सकता है। ऐसी स्थिति में यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि कल्याणकारी योजनाओं और राजनीतिक लाभ के लिए दी जाने वाली रेवड़ियों के बीच स्पष्ट अंतर हो, ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ हो तथा देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रभावित न हो।
आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनाई के दौरान कहा कि कई सरकारें करोड़ों रुपये विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर सब्सिडी देने में खर्च कर रही हैं, जबकि वे बजट घाटे का सामना कर रही हैं और विकास एवं बुनियादी ढांचे के लिए धन की कमी की शिकायत कर रही हैं।
चुनाव के समय रेवड़ियां बांटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो रहा है। आज ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि विकास के लिए पैसा कहां से आएगा। कई राज्य पहले से ही घाटे में लेकिन वे फ्रीबीज़ की नई योजनाएं शुरू कर रहे हैं।
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) February 19, 2026
हकीकत तो यही है कि देश की आर्थिक बुनियाद को खोखला…
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