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भारतीय भाषाओं के बीच विवाद कराने वाले दुखी: हर्षवर्धन त्रिपाठी
भारतीय भाषाओं के बीच विवाद कराने वाले दुखी हैं। कुम्भ की शुरुआत में 11 जनवरी की रात को कुम्भ क्षेत्र भ्रमण करते लेटे हनुमान जी मंदिर का यह बोर्ड दिखा तो मैंने चित्र ले लिया था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago
भारत के सुदूर दक्षिण राज्य तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले एक बार फिर से भाषा का विवाद सुलग रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस विवाद को बड़ा फलक देते हुए यहां तक कह दिया कि तमिलनाडु 'एक और भाषा युद्ध' के लिए तैयार है।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की और अपनी राय दी। उन्होंने एक्स हैंडल से एक पोस्ट कर लिखा, भारतीय भाषाओं के बीच विवाद कराने वाले दुखी हैं। कुम्भ की शुरुआत में 11 जनवरी की रात को कुम्भ क्षेत्र भ्रमण करते लेटे हनुमान जी मंदिर का यह बोर्ड दिखा तो मैंने चित्र ले लिया था।
दरअसल, भारतीयों के बीच किसी न किसी बहाने विवाद कराने वालों को डर लग रहा है कि, कुछ वर्ष और मोदी सरकार रह गई। योगी जी कुम्भ जैसे आयोजन करते रहे तो हमारा क्या बचा रह जाएगा। आपको बता दें, सीएम स्टालिन ने कहा कि 1965 से ही डीएमके ने कई बलिदान दिए और हिंदी से मातृभाषा तमिल की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि यह भावना पार्टी सदस्यों के खून में समाई हुई है। तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जहां अब तक नई शिक्षा नीति 2020 लागू नहीं हुई है। केंद्र सरकार की ओर से बार-बार कहने के बावजूद तमिलनाडु नई शिक्षा नीति लागू नहीं कर रही है।
भारतीय भाषाओं के बीच विवाद कराने वाले दुखी हैं। कुम्भ की शुरुआत में 11 जनवरी की रात को कुम्भ क्षेत्र भ्रमण करते लेटे हनुमान जी मंदिर का यह बोर्ड दिखा तो मैंने चित्र ले लिया था। दरअसल, भारतीयों के बीच किसी न किसी बहाने विवाद कराने वालों को डर लग रहा है कि, कुछ वर्ष और मोदी सरकार… pic.twitter.com/V5YvqLX98b
— हर्ष वर्धन त्रिपाठी ??Harsh Vardhan Tripathi (@MediaHarshVT) February 26, 2025
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